पार्क बनाने को लेकर मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और कर्नल इंद्र सिंह आमने-सामने

रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। सरकाघाट शहर के मेन बाज़ार में क़रीब 45 लाख से बनने वाले पार्क और पुराने बस स्टॉप के सुंदरीकरण को लेकर जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और स्थानीय विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर आमने-सामने आ गए हैं l

जहां विधायक ने इस प्रॉजेक्ट का शिलान्यास करके युद्ध स्तर पर काम शुरू करवाया था, वहीं बीती शाम जल शक्ति मंत्री ने बाजार का दौरा करके इस पार्क के निर्माण को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैंl अब एक बार फिर जल शक्ति मंत्री के अपने साथ लगते हल्के में दखलअंदाजी करने से विधायक और कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ गया है।

इस बीच, विधायक इंद्र सिंह का साफ कहना है कि काम किसी भी हाल से बंद नहीं होगा और पार्क बनाने के लिए अवैध अतिक्रमण को हर हालत में हटाया जाएगा। वहीं निर्माण कार्य बंद होने पर नगर परिषद ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस ने भी इसे मुद्दा बनाने का तय किया है।

क्या है मामला
इसी महीने 7 जून को सरकाघाट ओल्ड बस स्टैंड में सुंदरीकरण और पार्क को लेकर विधायक कर्नल इन्द्र सिंह ने बाकायदा शिलान्यास किया था। नगर परिषद के अधीन बनने वाले इस पार्क का 45 लाख रुपये का टेंडर लोक निर्माण विभाग ने दिया था। ठेकेदार ने पार्क का काम शुरू कर दिया था परंतु बीच में बाजार में हुए अवैध कब्जे न हटाए जाने के कारण ठेकेदार ने काम रोक दिया था।

इसी महीने विधायक ने किया था शिलान्यास

करीब 2 सप्ताह पहले इस पार्क का निर्माण बंद करवाने को लेकर कुछ व्यापारियों ने विधायक से मुलाकात की थी और पार्क का काम रोकने का आग्रह किया था। परंतु विधायक ने दो टूक शब्दों में कह दिया था कि विकास कार्य किसी भी हाल में रोके नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा था कि अगर व्यापारियों को इससे कोई समस्या है तो नगर परिषद के साथ बैठकर इस पार्क का नक़्शा रीडिजाइन करवाया जाएगा, परंतु क़ब्ज़े हर हाल में हटेंगे।

मंत्री की शऱण में पहुंचे व्यापारी
इसके बाद व्यापारियों द्वारा जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर से गुहार लगाने बाद कल शाम मंत्री द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर जाते हुए सरकाघाट बाजार में पार्क का निरीक्षण किया और उन्होंने डीसी मंडी को फोन पर ही इस पार्क का काम तुरंत बंद करने का निर्देश दिया। मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि पार्क बनने से सरकाघाट बाजार खत्म हो जाएगा अगर पार्क बनाना ही है तो इसे रेस्ट हाउस में बनाया जाएगा। मंत्री के आदेशों बाद जहां व्यापारियों ने स्वागत किया है वहीं नगर परिषद और विधायक ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

हर हाल में हटाया जाएगा अतिक्रमण: कर्नल
सरकाघाट के विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि लोगों द्वारा निर्वाचित नगर परिषद द्वारा सभी के लाभ के लिए और पुराने अतिक्रमण हटाने को लेकर पार्क बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को आपत्ति है तो नगर परिषद को सभी के अनुरूप योजना में संशोधन करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अतिक्रमण करने वालों पर यह नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि पार्क बनाना है या नहीं। सुंदरीकरण भी हर हालत में किया जाएगा और अतिक्रमण हर हाल में हटाया जाएगा।”

नगर परिषद ने की आपात बैठक
नगर परिषद सरकाघाट की आपात बैठक अध्यक्ष अनूप कुमारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई जिसमें पार्क के निर्माण पर रोड़ा अटकाए जाने को लेकर कड़े शब्दों में निंदा की गई। उपस्थित हाउस ने कहा कि अवैध कब्जा धारियों जिन्होंने बाजार में अतिक्रमण कर रखा है सिर्फ उन्हें ही दिक्कत हो रही है। अध्यक्षा ने साफ कहा कि ‘माननीय न्यायालय ने पहले ही सरकाघाट बाजार से अतिक्रमण हटाने वाले आदेश पारित कर रखे हैं उसे हर हॉल में अमलीजामा पहनाया जाएगा।’

उन्होंने कहा, “अगर व्यापारियों नें 4 दिनों के अंदर अतिक्रमण नहीं हटाया तो उन पर कानूनी कार्रवाई करके खुद अतिक्रमण हटा दिया जाएगा ताकि काम को पूरा किया जा सके। जनता ने हाउस को विकास करवाने के लिए चुना है और जो भी विकास कार्य में  रोड़ा अटकाएगा उसे बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।’ बैठक में नगर परिषद उपाध्यक्ष ध्यान सिंह पार्षद शांता देवी हेमराज बृजलाल मंजू देवी कश्मीर सिंह आशीष संजय ठाकुर और वर्षा ठाकुर भी उपस्थित रहे।

बढ़ गई दूरियां
इस पूरे मामले में बीजेपी दो नेता और चुने हुए विधायक आमने-सामने हैं। बता दें कि इससे पहले भी सरकाघाट में तबादलों को लेकर मंत्री के दखल के कारण दोनों में दूरियां बढ़ गई थीं। फिर बीच में जिला परिषद चुनाव के दौरान मंत्री के बेटे रजत ठाकुर ने सरकाघाट के विधायक को नालायक कह दिया था।

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फतेहपुर में कांग्रेस के कार्यक्रम में छाए ‘जय भवानी’ के बिल्ले

कांगड़ा।। बुधवार को कांगड़ा जिले के फतेहपुर में हुए कांग्रेस के कार्यक्रम में ‘जय भवानी’ लिखे बिल्ले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा का विषय बने रहे। दरअसल, बहुत से लोगों ने सीने पर जय भवानी लिखा बिल्ला लगाया था। कई गाड़ियों में भी ऐसे ही लाल रंग के स्टिकर लगे हुए थे।

इन बैज और स्टिकरों में ‘जय’ शब्द पर दोनों ओर त्रिशूल लगे हुए हैं। देखने में यह धार्मिक नारा लग सकता है मगर इसकी हकीकत कुछ औऱ है। दरअसल, फतेहपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है और दिवंगत सुजान सिंह पठानिया के बेटे भवानी सिंह पठानिया टिकट के दावेदारों में है। ये बिल्ले भी भवानी सिंह के समर्थकों ने लगाए हुए थे।

चर्चा में जो बात रही वो ये कि कांग्रेस पार्टी का नाम और चिह्न इन स्टिकरों में कहीं नहीं था। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इसे भवानी समर्थकों का संदेश मान रहे हैं कि वे हर हाल में भवानी के साथ हैं। वे कहना चाहते थे कि भवानी को टिकट दिया जाए और अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे पार्टी नहीं, भवानी का चुनाव करेंगे।

इस बीच उपचुनाव के लिए कांग्रेस के प्रभावी पूर्व मंत्री जीएस बाली ने भी स्वीकार किया सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद होने जा रहे उपचुनाव में दिवंगत सुजान सिंह पठानिया के बेटे फ्रंटलाइनर के रूप में मौजूद हैं।

अब भवानी भले टिकट के दावेदार हों, मगर कुछ समय पहले तक वह राजनीति में वंशवाद के धुर विरोधी रहे हैं और कुछ साल पहले राजनेताओं के बेटों के राजनीति में आने पर प्रहार कर चुके हैं। बहरहाल, भवानी समर्थकों का स्टिकर लगाना पूरे हलके में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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स्वामित्व एवं फंडिंग

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इन हिमाचल ने सीधे किसी से विज्ञापन न लेने की अपनी नीति में बदलाव किया है जिसकी जानकारी अपने पाठकों को देना हम अपना कर्तव्य समझते हैं।

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इस बीच पाठकों से अनुदान लेने की भी कोशिश की गई मगर हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य से कम रकम आने के कारण पोर्टल का विस्तार कर पाना संभव नहीं हो पाया। इसलिए, अब इन हिमाचल ने सीधे विज्ञापन न लेने की नीति में बदलाव करने का फैसला किया है ताकि आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपने पाठकों को अच्छी सामग्री उपलब्ध करवाई जाए।

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मुझसे नहीं मिले विशाल नेहरिया: एसपी विमुक्त रंजन

धर्मशाला।। धर्मशाला के विधायक विशाल नेहरिया पर उनकी HAS पत्नी ओशीन शर्मा ने मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए है। ओशीन का वीडियो वायरल होने के बाद विधायक की ओर से एक प्रेस नोट जारी किया गया था। विधायक के PA ने मीडिया ग्रुप में इसे जारी किया था।

इसमें कहा गया था कि विधायक विशाल नेहरिया ने एसपी विमुक्त रंजन के साथ मुलाकात की है और अपना पक्ष रखा है। अब एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन ने साफ कहा कि उनके पास ओशीन की तरफ से एक लिखित शिकायत मिली है मगर इसमें उन्होंने FIR दर्ज करने के लिए नहीं कहा है।

बकौल एसपी, ओशीन ने शिकायत इसलिए दी है जिससे भविष्य में विधायक को कुछ हो तो उसके लिए उन्हें जिम्मेदार न ठहराया जाए। दरअसल ओशीन का कहना है कि विशाल झगड़ा करने के बाद खुद को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

पुलिस प्रोटेक्शन देने के सवाल पर SP ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से अभी जो बन सकेगा वो किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले की जांच संबंधित अधिकारी को सौंप दी गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एसपी ने ये भी साफ किया कि उनसे विधायक विशाल की कोई बातचीत नहीं हुई है, इसलिए जो कुछ भी उनके नाम से वायरल हो रहा है, वो फर्जी है।

विशाल नेहरिया ने कहा- मानसिक दबाव डालती थीं ओशीन

विशाल नेहरिया ने कहा- मानसिक दबाव डालती थीं ओशीन

धर्मशाला।। एचएएस ओशीन शर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनके पति और धर्मशाला के विधायक विशाल नेहरिया की प्रतिक्रिया आई है। न्यून 18 हिमाचल के अनुसार, नेहरिया ने कहा कि ओशीन उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थीं।

पति पर हिंसा का आरोप लगाने वाली ओशीन की शिकायत कांगड़ा पुलिस ने दर्ज कर ली है मगर अभी एफआईआर नहीं हुई है। ऐसी खबर है कि विशाल ने भी पुलिस के सामने बयान दिया है।

न्यूज 18 के अनुसार, नेहरिया ने कहा है कि ‘शादी से पहले ओशिन से दोस्ती हुई थी, जो बाद में वैवाहिक जीवन तक पहुंची, लेकिन विवाह के कुछ दिन बाद से ही ओशिन ने उन पर और उनके परिवार पर कई तरह से मानसिक दवाब डालना शुरू कर दिया।’

बकौल नेहरिया, उन्होंने ‘एक पढ़े लिखे और अपने पद को समझते हुए और सामाजिक जिम्मेदारी को जानते हुए इस बात को घर तक ही सीमित रखना उचित समझा और पत्नी के परिवार पर मानसिक दवाब को घर मे ही शांत करने का भरपूर प्रयास किया है।’

बयान के अनुसार, नेहरिया ने कहा है कि वह अब भी चाहते हैं कि घर की बातें घर में ही सुलझ जाएं और उसे समाजिक और राजनीतिक तूल न दिया जाए।

लेकिन बड़ा सवाल है कि मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। मतभेद अलग बात है लेकिन हिंसा किसी के घर की बात नहीं जो घर में सुलझाई जाए। बहरहाल, आगे देखना होगा कि इस मामले में क्या प्रगति होती है।

कुल्लू में पुलिस के बीच थप्पड़ और लात चलने की पूरी बैकग्राउंड

शिमला। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दौरे के दौरान कु्ल्लू में पुलिस अधिकारियों के बीच बहस और मारपीट के मामले में सरकार ने कार्रवाई की है। कुल्लू के एसपी गौरव सिंह और सीएम के पीएसओ बलवंत सिंह का सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही ब्रजेश सूद से एएसपी सीएम सिक्यॉरिटी की ज़िम्मेदारी वापस ले ली गई है। अब पुनीत रघु एएसपी सीएम सिक्यॉरिटी होंगे जबकि गुरुदेव शर्मा अब कुल्लू के एसपी होंगे।

बुधवार को कुल्लू में पहले एएसपी सीएम सुरक्षा ब्रजेश सूद और कुल्लू के एसपी गौरव सिंह के बीच बहस हुई थी जिसके बाद गौरव सिंह ने ब्रजेश को थप्पड़ मार दिया। इस बीच कुछ अधिकारी और पुलिसकर्मी बीच-बचाव करने आए। वहीं घटना के वीडियो में सीएम सुरक्षा टीम में पीएसओ बलवंत सिंह एसपी कुल्लू को लात मारते नजर आए।

मामले के वीडियो वायरल होने के बाद हिमाचल पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए गौरव सिंह, ब्रजेश सूद और बलवंत सिंह को छुट्टी पर भेजकर जांच शुरू कर दी थी। अब प्रारंभिक कार्रवाई हुई है मगर लोगों में इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि आखिर यह हालत पैदा क्यों हुई। इस संबंध में अब कुछ और वीडियो सामने आए हैं, जो इशारा करते हैं कि उस दिन सुरक्षा और अन्य बातों के लकर बड़ी लापरवाहियां हुई थीं।

1. हेलिकॉप्टर की लैंडिंग में दिक्कत

जिस समय सीएम का हेलिकॉप्टर लैंड हुआ, वीडिया दिखाता है कि उस समय भारी धूल उड़ी। कुछ ही सेकेंड में चॉपर धूल के गुब्बार के बीच दिखना बंद हो गया और मैदान के आसपास खड़े लोग धूल से बचने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। जानकारी मिली है कि हेलिकॉप्टर के पायलट को भी दिक्कत हुई और उसने जैसे-तैसे लैंडिंग करवाई।

इसके बाद के वीडियो में दिखता है कि जब सीएम जयराम ठाकुर हेलिकॉप्टर से उतरे, तब सीएम सुरक्षा के प्रमुख ब्रजेश सूद और एसपी गौरव के बीच बातचीत हो रही है। इसमें पानी डालने की बात की जा रही है। कुछ खबरों में दावा किया गया है कि इसी दौरान ब्रजेश ने कहा कि ‘धूल उड़ रही थी, इसे बिठाने के लिए पानी का छिड़काव करना चाहिए था।’ फिर गौरव सिंह ने कहा कि ‘पानी डाला था।’ तो ब्रजेश ने कहा कि ‘दोबारा डालना पड़ना था।’

हालांकि, हमने जब ऑडियो को सुना तो यह संवाद स्पष्ट नहीं सुनाई दिया। बताया जा रहा है कि उस दिन एसपी और एएसपी के बीच तनातनी की शुरुआत यहीं से हो गई थी।

2. फोर लेन विस्थापितों की गडकरी से मुलाकात

फोरलेन विस्थापितों का एक समूह चाहता था कि वह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करे। भुंतर एयरपोर्ट के बाहर वीडियो में दिखता है कि वे नितिन गडकरी को घेर कर खड़े हैं और उनसे चार गुना मुआवज़ा मांग रहे हैं। वे शिकायत कर रहे हैं कि डीसी कुल्लू उनकी बात नहीं सुनती। वे ये मांग भी कर रहे थे कि ‘2017 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के घोषणापत्र को लागू किया जाए।’ उनका कहना था कि वे बीजेपी समर्थक हैं, राज्य में भी बीजेपी की सरकार है मगर उनकी सुनाई नहीं हो रही।

इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर काफी असहज दिखे। वह भी गुस्से में लोगों से यह कहते नजर आए- आराम से बात कीजिए। जिस दौरान यह सब हो रहा था, उस दौरान भीड़ जमा थी और सीएम की सुरक्षा टीम के अलावा अन्य वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी कम ही नजर आ रहे थे। फिर गडकरी ने लोगों को आश्वासन दिया और वाहन पर सवार होकर निकल गए। इस अव्यवस्था को लेकर भी सीएम सुरक्षा की टीम में नाराजगी बनी हुई थी। हालांकि, गडकरी ने लोगों को देखकर खुद गाड़ी रोकी थी और इसी वजह से अव्यवस्था बनी।

3. मुख्यमंत्री की गाड़ी और सुरक्षाकर्मी की गाड़ियों में गैप

इस बीच अव्यवस्था का आरोप यह भी लग रहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के काफिले में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की गाड़ी काफी पीछे रह गई। यही नहीं, सीएम की गाड़ी दसवें नंबर पर थी जबकि उनके सिक्यॉरिटी स्टाफ की गाड़ी 15वें नंबर पर लगी। इस बात पर भी सीएम सिक्यॉरिटी चीफ की ओर से आपत्ति जताई गई कि इससे तो सुरक्षा में चूक हो जाएगी। वायरल वीडियो में दिखता है कि सीएम की गाड़ी के सामने ही ब्रजेश सूद और गौरव सिंह बात कर रहे हैं। इस दौरान ब्रजेश सूद को तेज आवाज में कुछ कहते सुना और देखा जा सकता है। गाड़ियों में गैप पर आपत्ति जताते हुए कथित तौर पर ब्रजेश सूद ने कहा, ‘ये क्या कर रहे हैं आप?’ इसके तुरंत बाद गौरव सिंह ने उन्हें थप्पड़ मार दिया।

इसके बाद ब्रजेश सूद ने तो कुछ नहीं किया मगर आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मी और पुलिस अधिकारी बीच-बचाव करने आ गए। उधर सीएम के पीएसओ बलवंत ने गौरव सिंह को लात मारना शुरू कर दिया।

शर्मनाक घटना

इस घटना के बाद कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने फेसबुक पर इस घटना की आलोचना की है। कइयों का कहना है कि सीएम की सुरक्षा के लिए सीएम की सिक्यॉरिटी जिम्मेदार होती है जबकि जिले के अंदर पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपी की होती है। जहां तक हेलिपैड पर धूल बिठाने के लिए पानी का छिड़काव करने की बात है, यह जिम्मेदारी नागरिक प्रशासन की होती है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि अगर नागरिक प्रशासन चूक करे तो पुलिस विभाग सुरक्षा को खतरे का आकलन ही नहीं करेगा।

वास्तव में क्या हुआ था, जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा। मगर इस मामले में पूरी तरह से आपसी तालमेल की कमी दिखती है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों या अलग-अलग टीमों में इस तरह के मतभेद नहीं होते। कई बार नौबत कहासुनी तक भी हो जाती है मगर हिंसक हो जाने की यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। ब्रजेश सूद और गौरव सिंह, दोनों को ही निष्ठावान अधिकारी माना जाता है। मगर इस घटना में साफतौर पर नियम और अनुशासन टूटा है। पुलिस अधिकारियों का संयम खोकर एक-दूसरे से चिल्लाकर बात करना, एक-दूसरे को थप्पड और लात मारना बेहद शर्मनाक है।

मंत्री महेंद्र सिंह और मुख्य सचिव खाची में बहस, चुपचाप देखती रही कैबिनेट

शिमला।। अक्सर अधिकारियों का डांटने-डपटने के लिए चर्चित हिमाचल प्रदेश के मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कथित तौर पर मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री के सामने कुछ ऐसा ही व्यवहार किया। खबर है कि उनकी मुख्य सचिव अनिल खाची के साथ बहस हो गई।

इस संबध मे अमर उजाला ने भी खबर छापी है और बताया है कि ‘महेंद्र सिंह एसडीआरएफ बजट आवंटन और अन्य मुद्दों पर उन्हें पूछे बगैर बैठकें कर फैसले लेने और उनकी मर्जी से फंड जारी नहीं होने पर तल्ख हो गए।’ मुख्य सचिव ने कहा कि सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए बजट आवंटन किया जा रहा है और पूरा काम पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।

इसके बाद मंत्री शांत नहीं हुए और मामला बहस तक पहुंच गया। खबर के अनुसार, इस दौरान पूरी कैबिनेट खामोश होकर देखती रही और फिर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दख़ल देना पड़ा। मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और मुख्य सचिव अनिल खाची की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।

सचिव को बदल दिया?
अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ‘राज्य मंत्रिमंडल की कई अन्य बैठकों में भी राजस्व मंत्री कई बार शीर्ष अधिकारियों पर ऐसे ही गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। पिछली बार भी वह अपने क्षेत्र से संबंधित राजस्व विभाग के एक मामले को मनवाने में कामयाब नहीं हुए तो इससे संबंधित सचिव पर गुस्सा गए थे। अब वह सचिव बदल गए हैं।”

बैलों को एकांत में बांध गया शख्स, रस्सी से बंधे मिले कंकाल

रितेश चौहान, फॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। मंडी जिले के धर्मपुर उपमंडल की चनौता पंचायत में एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने जंगल में कथित तौर पर अपनी पशुशाला के बाहर दो बैलों को तीन महीने तक बांधकर रखा और मरने के लिए छोड़ दिया।

बैलों के अब कंकाल ही बचे हैं मगर फिर भी उनके गले में बंधी रस्सी बता रही है कि वे कितनी दर्दनाक मौत मरे होंगे।

गुरुवार को एक शख्स जब लखदाता पीर के दर्शनों के लिए जंगल से गुज़र रहा तो उसे दुर्गन्ध का एहसास हुआ। उसने बैलों के कंकाल दिखे जिनके गले से रस्सी बंधी हुई थी। वह गांव लौटा और लोगों को सारी बात बताई। प्रधान को सूचना मिली और फिर  आसपास के कई सारे लोग भी इस मंजर को देखने आ पहुंचे।

दुख तस्वीर। मानो, मरकर भी इंतज़ार कर रहा हो कि कब मालिक आएगा…

प्रधान सविता गुप्ता ने बताया कि इस हरकत को अंजाम देने वाला शख्स पीडब्ल्यूडी में कर्मचारी है और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। बैलों का मालिक अल्पसंख्यक समुदाय से है जिससे इलाके में काफ़ी तनावपूर्ण माहौल भी पैदा हो गया था।

प्रधान ने कहा कि बैलों को रस्सी से बांधकर गोशाला का मालिक चला गया और पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। इससे वे तड़प-तड़पकर मर गए।

डीएसपी चंद्रपाल सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि पुलिस की टीमें भेज दी गई हैं। उन्होंने कहा कि दोषी को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

महेंद्र सिंह ठाकुर होंगे मंडी लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार?

इन हिमाचल डेस्क।। रामस्वरूप शर्मा के निधन से खाली हुई मंडी लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी में चल रहा मंथन अब आख़िरी दौर में पहुंच गया है। ऐसी सूचना मिली है कि धर्मपुर से विधायक और जयराम सरकार में कद्दावर मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को टिकट देने पर सहमति बनती दिख रही है।

महेंद्र सिंह के दौरे के मायने क्या?
इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है मगर मंडी जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच कोरोना संकट के दौरान ही महेंद्र सिंह ठाकुर ने विधानसभा क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। मंगलवार को वह जोगिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र का पूरा चक्कर लगाएंगे। इसके लिए महेंद्र के क़रीबी निर्दलीय विधायक प्रकाश राणा ने अपने समर्थकों से मंत्री के सामने अपनी समस्याएं लेकर आने को कहा है। भाजपा मंडल के अध्यक्ष पंकज जमवाल ने भी ऐसी ही गुजारिश की है।

इसके बाद महेंद्र सिंह बगल की दरंग विधानसभा सीट का दौरा करेंगे और लोगों की समस्याएं सुनेंगे। इस दौरे को रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस समय कोरोना कर्फ्यू लागू है और समस्याएं सुलझाने के लिए सरकार जनमंच जैसे कार्यक्रम भी नहीं कर रही। इसलिए राजनीतिक पंडितों की भी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं अचानक महेंद्र सिंह ठाकुर को अपने पड़ोस के विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करने की क्या ज़रूरत आन पड़ी।

महेंद्र सिंह ठाकुर

बदली ‘चाहवानों’ की बोली
पिछले दिनों महेंद्र सिंह ठाकुर की बेटी वंदना गुलेरिया के समर्थकों ने उनके लिए मंडी से बीजेपी का टिकट मांगा था जबकि प्रकाश राणा के समर्थकों ने उनकी पत्नी रीमा राणा के लिए। मगर पिछले कुछ दिनों से अचानक ये समर्थक खामोश हो गए हैं। उनकी इस चुप्पी को भी इशारे के तौर पर लिया जा रहा है कि कहीं न कहीं महेंद्र सिंह को मंडी का दुर्ग बरक़रार रखने की ज़िम्मेदारी मिलने वाली है।

हिमाचल में इस समय एक लोकसभा और दो विधानसभा सीटें खाली हैं जिनपर उपचुनाव होना है। खास बात यह है कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए डेढ़ साल से भी कम समय बचा है। और जब ये उपचुनाव होंगे तो और भी कम समय बचेगा। इसलिए बीजेपी और कांग्रेस, दोनों की कोशिश तीनों सीटों में जीत हासिल करने की होगी ताकि चुनावों से पहले गलत संदेश न जाए।

किन हालात में लड़ेंगे चुनाव?
अब सवाल उठता है कि इतने कद्दावर नेता महेंद्र सिंह भला क्यों मंत्री पद छोड़कर सांसद बनना चाहेंगे। जानकारी मिली है कि अगर कांग्रेस पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को टिकट देगी तो उस स्थिति में महेंद्र सिंह को हर हाल में लोकसभा चुनाव लड़ना पड़ सकता है। ऐसी चर्चाएं पहले से ही आम हैं कि 2019 चुनावों में हार के डर से मंडी से नहीं लड़ने वाला वीरभद्र परिवार उपचुनाव में जीत की संभावनाएं देखते हुए सक्रिय हो सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि कांग्रेस इस बार किसी भी स्थिति में सुखराम के पोते आश्रय शर्मा को नहीं उतारेगी क्योंकि वह बहुत ही बड़े मार्जन से हारे थे।

महेश्वर सिंह का दौर बीत सा गया है और ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह मंडी से बाहर चुनावी राजनीति के हिसाब से उतने सफल नहीं माने जा सकते। मंडी लोकसभा सीट के अंदर आने वाले विधानसभा क्षेत्रों मे ंभी कोई और विधायक या नेता बीजेपी के पास ऐसा नहीं है जो प्रतिभा सिंह को हराने की कूव्वत रखे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछले कुछ समय में महेंद्र सिंह प्रभावशाली और आर्थिक रूप से सशक्त बनकर उभरे हैं, ऐसे में वह अपने दम पर चुनाव लड़ने की क्षमता रखते है।

इस बात को लेकर कोई भी विश्लेषक कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है कि राज्य से इतना ताकतवर मंत्री पद छोड़कर अगर महेंद्र सांसद बन भी गए तो उन्हें केंद्र में क्या मिलेगा। क्योंकि उनसे पहले किशन कपूर ने भी मंत्री पद छोड़कर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की मगर केंद्र में उन्हें कुछ खास हासिल नहीं हुआ। बहरहाल, महेंद्र सिंह लोकसभा उप-चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह तो भविष्य में ही पता चलेगा। लेकिन फिलहाल बीजेपी के कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर चर्चा और अटकलें चरम पर हैं।

‘बीजेपी MLA के कहने पर नेगेटिव बता सामान्य वॉर्ड में भर्ती कर दी संक्रमित महिला’

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, स्थानीय विधायक अरुण कूका मेहरा के कहने पर नगरोटा बगवां अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना से संक्रमित 60 साल की महिला को सामान्य वॉर्ड में भर्ती कर दिया गया और वह भी ‘नेगेटिव’ बताकर।

यह जानकारी सामने आई है कि भर्ती की गई महिला विधायक के पीए की पहचान वाली हैं। यही नहीं, इस संबंध में खबर कवर करने वाले अमर उजाला अख़बार के पत्रकार के मुताबिक़, विधायक के पीए ने उन्हें खुद फोन कर धमकी भरे लहजे में कहा कि ‘मरीज पपरोला अस्पताल से निगेटिव होकर आया था और मरीज घर में है।’ वहीं अस्पताल प्रशासन इस मामले में गोलमोल बातें कर रहा है और महिला की नेगेटिव रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया।

नगरोटा बगवां अस्पताल सरकार की ओर से कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है। फिर भी स्थानीय विधायक का कहना है कि उन्होंने कई कोरोना मरीजों का इलाज इस अस्पताल में किया है। यह दिखाता है कि कैसे अस्पताल के पूरे स्टाफ को खतरे में डाला जा रहा है क्योंकि कोविड अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं जो कि अन्य अस्पतालों में नहीं होते।

क्या है मामला
कोरोना से संक्रमित महिला 20 से 26 मई तक नगरोटा अस्पताल में रही और स्टाफ उसे सामान्य मरीज समझकर इलाज करता रहा। जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जब इस बारे में सवाल किए गए तो अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया।

इस महिला की रिपोर्ट आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला में 15 मई को पॉज़िटिव आई थी। फिर मरीज के परिजनों ने 19 मई को वहां से महिला को डिस्चार्ज किया और नगरोटा अस्पताल ले आए। खबर के अनुसार, नगरोटा में बनी पर्ची पर लिखा गया कि मरीज 15 मई को पॉजिटिव आया है। लेकिन इसे 20 मई को नेगेटिव बताकर दाखिल कर लिया गया। एडमिशन फाइल पर मरीज को पोस्ट कोविड दर्शाया गया है जबकि इलाज के दौरान फाइल पर डॉक्टर ने जो दवाइयां लिखीं, वे वही हैं कोरोना के मरीजों को दी जा रही हैं।

ध्यान देने की बात यह है कि रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के चार दिन बाद तक मरीज़ संक्रमित रहता है और संक्रमण फैलने की स्थिति में रहता है। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देश हैं कि रिपोर्ट आने के 17 दिन बाद तक मरीज आइसोलेट रहे और उसके बाद ही उसे पूरी तरह संक्रमण मुक्त माना जाएगा। मगर इस मामले में ऐसे किसी नियम का पालन नहीं हुआ। ऊपर से अस्पताल प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश करता दिख रहा है।

क्या कहता है अस्पताल
इस संबंध में अस्पताल के एसएमओ हरि राज ने कहा कि उनके पास मरीज की नेगेटिव रिपोर्ट थी, इसलिए भर्ती किया गया। उन्होंने कहा कि मरीज को सांस लेने में समस्या थी। लेकिन वह इस मरीज की नेगेटिव रिपोर्ट पत्रकार को दिखा नहीं पाए। वहीं सीएमओ जीडी गुप्ता ने कहा कि इस मामले में जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा यह भी कि नगरोटा बगवां अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है।

क्या कहते हैं विधायक
स्थानीय बीजेपी विधायक अरुण कूका मेहरा ने कहा कि अपने इलाके के हर शख्स की जान बचाना उनका फर्ज है। उन्होंने कहा, “बात मेरे पीए के मरीज की नहीं है, मैं हर आम आदमी का इलाज करवा रहा हूं। हमने कोरोना मरीजों के लिए नगरोटा बगवां अस्पताल में 10 बेड लगाए हैं। यहां पर हमने कई कोरोना मरीजों का इलाज किया है।”

विधायक के इस बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जब तक सरकार आधिकारिक रूप से किसी अस्पताल को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए इजाजत न दे, वहां पर संक्रमित मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते। वहीं अस्पताल के एसएमओ का कहना है कि मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव थी मगर विधायक कह रहे कि उन्होंने कई संक्रमितों का इलाज अस्पताल में करवाया है।

इस बीच अस्पताल स्टाफ के बीच डर और चिंता का माहौल बना हुआ है जो राजनीतिक दखल के कारण असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।