हिमाचल: मरीजों से भर गए कोविड अस्पताल, मंगलवार को 16 की मौत

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को कोविड 19 से रिकॉर्ड 16 लोगों की मौत हो गई है। शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और डीडीयू में दाखिल नौ मरीजों की मंगलवार को जान चली गई। इनमें छह मरीज शिमला जिले के ही रहने वाले हैं, जिसमें से चार मरीज शिमला शहर से हैं। एक ही दिन में राजधानी में कोरोना से नौ मरीजों की मौत का यह अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।

इसके अलावा रिकांगपिओ के मरीज की भी मौत हुई है। सभी आईजीएमसी में दाखिल थे। मंडी में दो कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है। सुंदरनगर में 57 वर्षीय बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता की घर में मौत हो गई है। वहीं करसोग के सनारली पंचायत में कोरोना से 72 वर्षीय शख्स की मौत हो गई। एसडीएम करसोग सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार कर दिया है।

मंडी के टारना निवासी 59 वर्षीय संक्रमित व्यक्ति ने नेरचौक अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में दम तोड़ दिया। गागल के 48 वर्षीय संक्रमित ने भी दम तोड़ दिया। वहीं, कुल्लू में कोरोना पाॅजिटिव भाजपा चुनाव प्रकोष्ठ के जिला संयोजक की मौत हो गई है। वह पिछले दिनों कोरोना वायरस की चपेट में आए थे। जिसके बाद उनका पीजीआई में उपचार चल रहा था लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई।

वहीं, खनियारा निवासी कोरोना संक्रमित 71 वर्षीय बुजुर्ग की धर्मशाला अस्पताल में मौत हो गई। बिलासपुर में 79 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई है।

उधर, मंगलवार शाम तक प्रदेश में कोरोना वायरस के 542 नए मामले आए हैं। शिमला जिले में 121, कांगड़ा 77, कुल्लू 79, मंडी 52, सोलन 31,किन्नौर 34, लाहौल-स्पीति 24, बिलासपुर 28, चंबा 52, सिरमौर 8 और हमीरपुर में 7 नए मामले आए हैं।

हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा 26808 के पार हो गया है। करीब 5365 सक्रिय मामले हैं। अब तक 21027 मरीज ठीक हो चुके हैं। 390 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

मंत्री गर्ग की फॉर्च्यूनर का ऐक्सिडेंट, आधी रात हुए हादसे पर उठे सवाल

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग को मिली सरकारी फॉर्च्यूनर रहस्यमय हालत में बिलासपुर रोड पर कंदरौर से आगे दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि आधी रात को ही इस मामले में वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद सदर पुलिस स्टेशन को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर जाकर हालात तस्दीक करने के बाद इस संबंध में सदर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज की है।

इस बीच, पुलिस सूत्रों के हवाले से जागरण की रिपोर्ट में लिखा गया है कि आधी रात करीब 1:00 बजे यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ है।

चूंकि इस गाड़ी का प्रयोग खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग करते हैं, इसलिए इस मामले में सवाल यह उठा है कि आखिर आधी रात को यह वाहन कंदरौर के आगे बिलासपुर रोड पर कैसे पहुंचा। इसे कौन चला रहा था और कौन सवार था।

सरकारी गाडियों पर ऐश: काश शास्त्री जी से सबक लेते हिमाचल के मंत्री

इन हिमाचल डेस्क।। इन दिनों शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर एक एसयूवी को लेकर विवादों में हैं। सवाल उठ रहे हैं कि पहले से तीन गाड़ियां होने के बावजूद क्यों नई एसयूवी ली गई और वो भी कोरोना काल में। इसपर मंत्री ने जो सफाई दी, वह लोगों को पसंद नहीं आई।

गोविंद ठाकुर ने पुरानी गाड़ी के कबाड़ होने और पहले से मंजूरी मिले होने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री के लिए एक गाड़ी नाकाफी होती है। नई गाड़ी के सस्ती और स्वदेशी होने का भी उन्होंने तर्क दिया। साथ ही कहा कि उन्होंने गाड़ी मोह के कारण नहीं बल्कि जरूरत के कारण ली।

हालांकि, गोविंद ठाकुर सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग के आरोप में घिरे रह चुके हैं। जब वह परिवहन मंत्री थे तो उनकी पत्नी एचआरटीसी के एमडी के नाम पर रजिस्टर्ड कार में चंडीगढ़ के एक ब्यूटी पार्लर में गई थीं। इस मामले का पता तब चला था जब उसी कार से कैश चोरी हुआ था।

जब सरकारी वाहनों के दुरुपयोग का सवाल उठा तो सीएम ने इस संबंध में जांच करवाने की बात कही थी मगर अब तक पता नहीं चला कि इस जांच का क्या हुआ। जनता को वैसे भी कोई खास उम्मीद नहीं थी क्योंकि सरकारी वाहनों का दुरुपयोग अफसरों और नेताओं के लिए आम हो गया है।

जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। बतौर मंत्री अलॉट एसयूवी से इतर अन्य महकमों से भी उन्हें गाड़ियां मिली हैं और आरोप लगता है कि परिजन उसका इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में एक एक्सईएन के नाम पर ली गई गाड़ी उनके बेटे द्वारा इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।

बात सिर्फ़ सरकारी पैसे पर खरीदी जाने वाली गाड़ियों की नहीं है।  यह नैतिकता का मुद्दा है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी तो इतना करते थे कि सरकारी गाड़ी से कहीं निजी काम पर जाना पड़े तो उसके तेल का खर्च अपनी जेब से भरते थे। मगर आज के नेता और अफसर जहां मन आए, वहां घूमते हैं।

बहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री ने बताया था कि परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी गाड़ी इस्तेमाल नहीं कर सकता था। एक बार सुनील अपने पिता को बतौर प्रधानमंत्री मिली शेवर्ले इम्पाला कार की चाबियां ड्राइवर से लेके चुपके से रात को दोस्तों के साथ घूमने निकल गए।

सुबह शास्त्री जी को यह बात पता चली तो उन्होंने ड्राइवर को बुलाया और कहा कि लॉग बुक में लिखो कि कल रात कार कितने किलोमीटर चली और इसे निजी काम के लिए इस्तेमाल हुआ दर्ज करो। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने बेटे को भी डांटा और ड्राइवर को भी।रात को कार 14 किलोमीटर चली थी। शास्त्री जी ने पत्नी से कहा कि 14 किलोमीटर के हिसाब से जितना पैसा बनता है वह उनके निजी सचिव को सौंप दें ताकि वह उसे जमा करवा सके।

सुनील ने बताया था कि इस घटना के बाद उन्होंने और उनके भाई ने कभी सरकारी गाड़ी को निजी काम में इस्तेमाल नहीं किया।

क्या हिमाचल के नेता या अफसर ऐसा कर सकते हैं? या वो जनता के पैसे को लुटाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने लगे हैं?

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

मोह नहीं, जरूरत के लिए ली गाड़ी और वो भी भारतीय कंपनी की: गोविंद ठाकुर

शिमला।। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मंत्री के लिए खरीदी गई टाटा हैरियर गाड़ी को लेकर शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें गाड़ी का कोई मोह नहीं है, जरूरत के कारण यह गाड़ी ली है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी गाड़ी कंडम हो चुकी थी, इस कारण नई गाड़ी लेनी पड़ी है।

शिक्षा मंत्री ने कहा गाड़ी की खरीद को पॉजिटिव साइड से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री के लिए एक वाहन से काम करना संभव नहीं होता। वहीं, गाड़ी खरीदने वाले विभाग का कहना है कि गाड़ी के लिए पहले ही मंजूरी मिल गई थी, अब जाकर खरीद की प्रक्रिया पूरी हुई है।

‘एक गाड़ी मंत्री के लिए पर्याप्त नहीं’
गोविंद ठाकुर ने कहा कि उनके पास जो गाड़ी थी, वह कंडम थी और ढाई लाख किलोमीटर चल चुकी थी। उसकी मेनटेनेंस में ज्यादा खरच आ रहा था। उन्होंने कहा, “मंत्री के लिए एक गाड़ी से काम करना संभव नहीं हो पाता है और दूसरा वाहन जरूरी होता है।”

‘स्वदेशी गाड़ी ली’
जरूरत का हवाला देते हुए गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि गाड़ी खरीदते वक्त यह कोशिश की गई है कि वह प्रचलिय गाड़ियों से सस्ती हो और मेड इन इंडिया हो ताकि हम स्वदेशी को भी प्रमोट कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत में बनी टाटा कंपनी की गाड़ी खरीदी है, इनोवो क्रिस्टा या होंडा जैसी गाड़ी नहीं ली। हालांकि, मंत्री के पास पहले से फॉर्च्यूनर भी है जो मूलत: जापानी कंपनी टोयोटा की है।

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हिमाचल की मालवी मल्होत्रा पर मुंबई में चाकू से हमला

मंडी।। हिमाचल के मंडी से संबंध रखने वालीं मालवी मल्होत्रा मुंबई में एक शख्स के हमले में घायल हो गई हैं। वह दक्षिण भारतीय भाषाओं के अलावा कुछ हिंदी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं।

मालवी पर एक शक्स ने चाकू से तीन बार हमला किया है। बताया जा रहा है कि यह शख्स प्रड्यूसर बनकर उनसे मिला और फिर बाद में शादी के लिए प्रपोज करने लगा था। हमले से पहले वह दो बार मिल चुका था।

अभिनेत्री ने जब शादी के लिए इनकार किया तो उसने हमला कर दिया।मालवी का धीरूभाई अंबानी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी हालत खतरे से बाहर है।

मंडी की मालवी दक्षिण भारत की एक फिल्म में काम कर चुकी हैं। साथ ही छोटे पर्दे के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘उड़ान’ में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी है। उन्होंने तेलुगू मूवी ‘कुमारी 18+’ में भी काम किया है।

पुलिस के मुताबिक, मालवी ने बताया है कि यह शख्स 2019 मे उनसे सोशल मीडिया पर पर बतौर प्रड्यूसर मिला था। इस साल जनवरी में वीडियो के सिलसिले में मुलाकात हुई थी। बाद में वह परेशान करने लगा तो उसे सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया था।

 

अब हिंदी मूवी में लीड रोल में दिखेंगी मंडी की मालवी

कंगना रणौत ने अपने परिवार को लेकर किए दोहरे दावे, लोग उड़ा रहे खिल्ली

शिमला।। सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहने वालीं अभिनेत्री कंगना रणौत के कई दावों को लेकर वैसे तो सवाल उठते रहे हैं मगर अब लोग उन्हीं के ट्वीट्स के जरिये उन्हें घेरने लगे हैं। हाल ही में कंगना ने कहा था कि हिमाचल में क्राइम रेट शून्य है। उनका यह दावा भी सच्चाई से कोसों दूर था और इसके लिए उनपर सवाल भी उठे थे।

अब, कंगना ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को निशाने पर लेते हुए सोमवार को एक ट्वीट किया, जिसकी तुलना कंगना के ही पिछले महीने किए गए अन्य ट्वीट से की जा रही है। दरअसल कंगना ने महाराष्ट्र के सीएम को परिवारवाद का लाभार्थी बताते हुए कहा कि मैंने अपने दम पर मुकाम हासिल किया, चाहती तो अपने प्रतिष्ठित परिवार की संपत्ति का लाभ उठाती। वहीं, पिछले महीने उन्होंने कहा था कि वह एक आम परिवार से हैं।

लोग अब सोशल मीडिया पर उनके दोनों ट्वीट शेयर करके सवाल उठा रहे हैं कि कंगना अपनी सहूलियत के हिसाब से बातें करती हैं।

सोमवार को कंगना उद्धव ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा- मुख्यमंत्री, मैं तुम्हारी तरह अपने पिता की ताकत के नशे में चूर नहीं हूं। अगर मैं परिवारवाद का लाभ उठाना चाहती तो हिमाचल में ही रहती। मैं एक मशहूर खानदार से आती हूं, मैं उनकी दौलत और इनायत पर नहीं रहना चाहती थी। कुछ लोगों में आत्मविश्वास और अपनी कुछ अहमियत होती है।

वहीं, कंगना ने 3 सितंबर, 2020 को ट्वीट किया था- मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हूं, मेरे माता कोई खास लोग नहीं हैं, हम आम लोग हैं तो सुशांत की तरह मेरा भी अवॉर्ड वापसी और कैंडल मार्च गैंग के लिए कोई महत्व नहीं है। वो हमारे लिए कभी बात नहीं करेंगे।

यानी डेढ़ महीना पहले कंगना ने अपने परिवार को आम और मध्यमवर्गीय बताया था मगर अब वह अपने परिवार को मशहूर और संपन्न बता रही हैं। इस बात लेकर कुछ यूजर्स ने लिखा है कि कंगना किसी दिन आम हो जाती हैं, किसी दिन संपन्न।

कंगना के दोनों ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे कुछ यूजर्स के ट्वीट आगे रहे-

हिमाचल भी ड्रग्स का गढ़ है, कंगना वहां से क्यों नहीं करती शुरुआत: उर्मिला मातोंडकर

फॉर्च्यूनर, इनोवा क्रिस्टा होने के बावजूद शिक्षामंत्री के लिए खरीदी नई SUV

शिमला।। जिस विभाग के पास शिक्षण संस्थानों के लिए पर्याप्त फंड का अभाव रहता है, उस विभाग पर फ़िजूलखर्ची के आरोप लग रहे हैं। चर्चा के केंद्र में हैं- शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर। यह बात सामने आई है कि गोविंद सिंह ठाकुर के लिए 18 लाख रुपये की नई एसयूवी खरीदी गई है। मंत्री के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने टाटा हैरियर गाड़ी खरीदी है।

ऐसा तब है, जब गोविंद सिंह ठाकुर के पास पहले से ही एक सरकारी फॉर्चूनर और एक इनोवा गाड़ी है। गोविंद ठाकुर पर पहले भी सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग का आरोप लग चुका है। उनकी पत्नी एचआरटीसी के अफसर के नाम पर खरीदी गाड़ी से चंडीगढ़ गई थीं जिससे पैसों की चोरी हुई थी।

प्रदेश कर्ज में, HRTC खस्ताहाल मगर MD की गाड़ी मंत्री की पत्नी की सेवा में

प्रदेश की आर्थिक हालत खराब है और सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है। सीएम ने मंत्रियों और अफसरों पर खर्च कम करने को कहा है मगर असर दिख नहीं रहा। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश भारद्वाज के शिक्षा मंत्री रहते हुए कैबिनेट से नई गाड़ी की खरीद की मंजूरी ली गई थी लेकिन कोरोना के कारण सुुरेश भारद्वाज ने गाड़ी की खरीद नहीं की। अब विभाग बदलने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने नई गाड़ी खरीद है।

इसके लिए अधिकारी कह रहे हैं कि इनोवा गाड़ी पुरानी हो गई है। राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष इसको लेकर प्रस्ताव भेजा गया था। सरकार ने इनोवा क्रिसटा को खरीदने के लिए मंजूरी दी थी। पूर्व शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के समय गाड़ी की खरीद नहीं हुई। अब इनोवा गाड़ी की हालत काफी खराब होने पर टाटा हैरियर को खरीदा गया है। विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना है कि टाटा हैरियर की कीमत इनोवा क्रिसटा से कम है।

शिक्षा विभाग की फ़िजूखर्ची
यह पहला मौका नहीं है। अप्रैल 2018 में स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सरकार से मंजूरी लिएक बिना करीब 35 लाख की फॉर्चूनर खरीदी थी और फिर उसके लिए अफसरों ने करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर वीआईपी नंबर भी लिया था।

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

उद्धव ठाकरे के ‘गांजे की खेती’ वाले बयान पर क्या बोलीं कंगना?

शिमला।। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में कंगना रणौत की ओर से बॉलिवुड के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम देखते ही देखते मुंबई या महाराष्ट्र बनाम हिमाचल प्रदेश की जंग बन गई है। पहले जहां कंगना ने मुंबई की तुलना पीओके से ही थी, अब उद्धव ठाकरे ने इशारों में कहा है ‘हिमाचल में गांजे की सबसे ज्यादा खेती होती है।’

दरअसल कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री के ड्रग्स की गिरफ्त में होने का दावा किया था। बाद में कंगना रणौत की ओर से महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार को लेकर निशाना साधने और फिर मुंबई में उनके ऑफिस पर बुलडोज़र चलने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

केंद्र सरकार ने जहां कंगना को उच्च दर्जे की सिक्यॉरिटी दे दी, साथ ही हिमाचल बीजेपी ने खुलकर कंगना का समर्थन करते हुए उन्हें ‘हिमाचल की बेटी’ का तमगा देते हुए रैलियां निकालीं और समर्थन किया। इस बीच जब कंगना ने मुंबई के हालात की तुलना पीओके से की थी तो जवाब में अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने भी हिमाचल प्रदेश में नशे की बहुलता को लेकर निशाना साधा था। बाद में कंगना ने उर्मिता को सॉफ्ट पॉर्न स्टार तक कह दिया।

इस बात को लंबा समय हो गया मगर कंगना की ओर से और शिवसेना नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर बयानबाजी और हमलों का सिलसिला जारी रहा। टीवी चैनलों से इतर ट्विटर और बाकी सोशल मीडिया पर भी यह जंग जारी रही। इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आ गया जब रविवार को शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नाम लिए बिना कंगना पर निशाना साधा।

उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के सीएम ने कहा, “कुछ लोग मुंबई रोजी-रोटी के लिए आते हैं और इसे पीओके बताकर गाली देते हैं। वे ऐसी तस्वीर बनाना चाहते है कि मुंबई पीओके है और यहां हर जगह ड्रग्स लेने वाले लोग हैं। वे कुछ इस तरह की तस्वीर बनाना चाहते हैं। वे नहीं जानते हैं कि हम अपने घरों में तुलसी उगाते हैं, गांजा नहीं। गांजे के खेत आपके राज्य में है, आप जानते हो कहां, महाराष्ट्र में नहीं।”

कंगना ने क्या टिप्पणी की?
अब कंगना ने कंगना ने ट्विटर पर जवाब देते हुए लिखा, ”मुख्यमंत्री आप बहुत तुच्छ व्यक्ति हैं। हिमाचल को देव भूमि कहा जाता है, यहां सबसे अधिक संख्या में मंदिर हैं और क्राइम रेट शून्य है। हां, यहां की जमीन बहुत उपजाऊ है, यह सेब, कीवी, अनार और स्ट्रॉबेरी की उपज होती है, यहां कोई कुछ भी उगा सकता है।”

बेबुनियाद बयानबाजी
इस तरह से यह पूरा का पूरा मामला अब दो जगहों के बीच की लड़ाई बनता जा रहा है। हालांकि, ध्यान देने की बात यह है कि इस राजनीतिक विवाद से बिना वजह देश के लोगों में विभाजन की लकीर खिंच रही है। क्योंकि दो लोगों या संगठनों की लड़ाई को राज्यों के बीच लड़ाई बनाना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। समस्या की बात यह है कि दोनों पक्ष अब अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं।

जहां तक उद्धव और कंगना के दावों की बात है, दोनों के ही दावे पूरी तरह सच नहीं हैं। भांग के पौधे प्राकृतिक रूप से हिमाचल प्रदेश में बहुतायत में पाए जाते हैं। इसके लिए भौगोलिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। इसलिए यह कहना उचित नहीं कि हिमाचल में गांजे के खेत हैं।

हालांकि, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ लोग इसकी खेती करते हैं और कारोबार भी। हिमाचल की कुछ जगहें इसके लिए बदनाम  भी हैं। हिमाचल बेशक देवभूमि है, यहां सबसे अधिक मंदिर हैं मगर यह भी सच्चाई है यह नशे के चंगुल में आता जा रहा है।

कंगना का यह दावा भी सही नहीं कि हिमाचल में क्राइम रेट भी शून्य नहीं है। बाकी अपराध तो हैं ही, सिर्फ भांग के अवैध उत्पादों के मामलों की ही बात करें तो हिमाचल पुलिस आए दिन बड़ी संख्या में लोगों को चरस, गांजा आदि के साथ पकड़ती है। यह सिलसिला कई सालों से जारी है और अब तक इस पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है। यही कारण है कि पूरे देश में हिमाचल चरस-गांजे के कारण बदनाम है।

हिमाचल की प्रीतिका चौहान को NCB ने ड्रग्स खरीदते गिरफ्तार किया

मुंबई।। टीवी अभिनेत्री प्रीतिका चौहान को मुंबई में एक ड्रग पेडलर फैसल के साथ एनसीबी ने गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि एनसीबी ने यह गिरफ्तारी उस समय की जब ड्रग्स की डील हो रही थी। समाचार एजेंसियों के अनुसार, एनसीबी की मुंबई ज़ोनल यूनिट के अधिकारियों ने प्रीतिका और फैसल को शनिवार शाम को वर्सोवा के एक गांव से गिरफ्तार किया। दोनों के पास 99 ग्राम गांजा मिला है।

हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वालीं 30 साल की प्रीतिका करसोग के मूल माहूनाग गांव में जन्मी हैं और उनकी शादी सिरमौर के राजगढ़ में हुई है। वह सीआईडी, सावधान इंडिया और हनुमान जैसे सीरियल्स में काम कर चुकी हैं। उन्होंने ससुराल सिमर का में भी काम किया है। वह मां वैष्णोदेवी सीरियल में भूमिदेवी का किरदार निभा चुकी हैं।

Preetika Chauhan

प्रीतिका चौहान सलमान खान की फिल्म सुल्तान में भी काम कर चुकी हैं। मुंबई एनसीबी के अधिकारी गुप्त सूचना के बाद सादी वर्दी में दो जगहों पर तैनात थे और कथित तौर पर डील के दौरान ही अभियुक्तों को दबोच लिया

पुलिस ने अब तक इस पूरे मामले में पांच गिरफ्तारियां की हैं और जांच जारी है। यह पूरा मामला उस समय सामने आया है जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स को लेकर पहले से ही व्यापक जांच चल रही है।

हिमाचल: बिना मास्क आम लोगों का ही चालान क्यों कर रही है पुलिस?

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन खबरें आती हैं कि वहां पर पुलिस ने बिना मास्क घूम रहे इतने लोगों का चालान किया। पुलिस की यह कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ है। जो लोग लापरवाही बरत रहे हैं, नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनपर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि ऐसे लोग न सिर्फ अपनी, बल्कि अपने परिवार और बाकियों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। लेकिन ऐसा ही कर रहे कितने नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और सांसदों का चालान अब तक काटा गया है?

कोरोना ऐसा अजीब वायरस है जो कुछ लोगों को ज्यादा बीमार नहीं करता तो कुछ लोगों की जान तक ले लेता है। खतरा उन्हें बहुत ज्यादा है जो बुजुर्ग हैं या फिर अन्य किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। मगर सोशल मीडिया पर मौजूद भ्रामक जानकारी के कारण कुछ युवा यह मानने लग गए हैं कि कोरोना जानलेवा नहीं है और ऐसे ही माहौल बनाया जा रहा है। इसी सोच के कारण आज हिमाचल में भी यह स्थिति पहुंच गई है कि हर दिन मौतें हो रही हैं।

ऐसे लापरवाह लोगों को अपनी जान की परवाह न हो, कोई बात नहीं। मगर वे खुद संक्रमित होने पर बाकी लोगों को संक्रमित करके वायरस का फैलाव बढ़ा सकते हैं जिससे बाकियों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में इस तरह के लोगों का चालान काटकर जुर्माना भरना मामूली सजा है। इनके ऊपर भारी आर्थिक दंड लगाने के साथ अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा भी दर्ज होना चाहिए।

देखने को मिल रहा है कि पुलिस कुछ मामलों में तो अपनी ड्यूटी अच्छे से निभा रही है। लेकिन सवाल उठता है कि जब बड़े-बड़े कार्यक्रमों, रैलियों और आयोजनों में सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दलों के नेता बिना मास्क नजर आते हैं तो वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी हाथों पर हाथ बांधे क्यों खड़े रहते हैं? जब सरकार के मंत्री और विधायक इधर-उधर बिना मास्क दिखते हैं, तब वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को सांप क्यों सूंघ जाता है?

ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जाएंगे जहां पर इन नेताओं, विधायकों, मंत्रियों और सांसदों ने बिना मास्क भीड़ के बीच घूमते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी पोस्ट की हैं। फिर भी पुलिस की ओर से न कोई हिदायत देखने को मिलती है और न कोई चेतावनी। अब तक प्रदेश भर में असंख्य लोगों के चालान बिना मास्क घूमने के लिए काटे जा चुके हैं मगर इनमें एक भी मंत्री, विधायक और बड़ा राजनेता नहीं है। ऐसा क्यों?

क्या राजनेता कोरोना के प्रति इम्यूनिटी हासिल कर चुके हैं? अगर कर चुके होते तो इतनी बड़ी संख्या में विधायक और मंत्री कोरोना पॉजिटिव न होते। फिर क्यों पुलिस को वे नियमों का उल्लंघन करते हुए दिखाई नहीं देते? जैसे ये राजनेता देश और जनता के सेवक हैं, वैसे ही पुलिस भी देश और जनता की सेवक है। दोनों की अपनी भूमिकाएं हैं। पुलिस इस देश और संविधान के प्रति जवाबदेह है, राजनेताओं के प्रति नहीं। फिर भी क्यों पुलिसकर्मी या अधिकारी इस मामले में अपने कर्तव्य का निष्पक्षता से पालन नहीं करते।

क्या हो जब कल को हिमाचल की जनता अपने फोन पर मंत्रियों और राजनेताओं के ताजा कार्यक्रमों की तस्वीरें लेकर बिना मास्क घूमें और पुलिसवाले पूछें कि आप मास्क नहीं पहना तो कहें- ये देखो तस्वीरें, आपकी ड्यूटी तब कहां जाती है जब ये नेता फ्लां तारीख को फ्लां जगह बिना मास्क नियम तोड़ रहा था, इस पर भी कार्रवाई की? हमें यकीन है कि अगर कोई ऐसा करेगा तो पुलिसकर्मियों का आत्मसम्मान नहीं जागेगा बल्कि स्वाभिमान को ठेस पहुंचेगी और वे आईना दिखाने वाले व्यक्ति को ही निशाना बनाने लगेंगे।

इसलिए, हिमाचल पुलिस को चाहिए की दोहरे मापदंड न अपनाए। उदाहरण पेश करना है तो नेताओं के भी चालान काटे। उससे समाज को भी संदेश जाएगा। यह जिम्मेदारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की है कि वे पहल करें और अपनी फोर्स का मनोबल भी बढ़ाए। वरना नेता वही करेगी जो सरकार में बैठे लोग कर रहे हैं। कानून अगर सबके लिए समान है तो यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि उसका पालन भी समानता से करे। अपना फर्ज निभाए और सभी को एक नजर से देखे।