शिमला।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन एक बार फिर पिछले साल जैसे हालात बनते दिखे। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस विधायक पिछले साल राज्यपाल की गाड़ी के आगे कूदते और सुरक्षा कर्मियों से धक्कामुक्की करते नजर आए थे। इस बार उनके नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ही हंगामा कर दिया और वॉकआउट कर दिया।
जयराम सरकार को भेजो हरिद्वार को और जयराम तुम आराम करो जैसे नारे लगाते हुए कांग्रेस विधायक विधानसभा से बाहर निकले और मीडिया के सामने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण झूठ का पुलिंदा है।
सुबह 11 बजे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कोविड को लेकर अच्छा काम किया है और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती आदि का जिक्र किया। इसी बीच कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और वॉकआउट कर दिया।
हालांकि, सीपीएम के विधायक राकेश सिंघा सदन में बैठे रहे। उन्होंने कांग्रेस के विधायकों के साथ वॉकआउट नहीं किया।
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र के बाथू में एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने से 7 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। इसमें एक महिला और बच्ची भी शामिल है। दुर्घटना में मारे गए मजदूर प्रवासी बताए जा रहे हैं। घटना में 12 लोग घायल भी हुए हैं, जो रिजनल अस्पताल ऊना में उपचाराधीन है। जिस जगह घटना घटी वह टाहलीवाल औद्योगिक क्षेत्र के तहत आता है।
एसपी ऊना अर्जित सेन सहित प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर मौजूद है। एसपी ऊना के मुताबिक पुलिस को सुबह करीब 11:30 पर घटना की सूचना मिली। इसके तुरंत बाद मौके पर पुलिस टीम भी पहुंच गई। औद्योगिक विभाग से जानकारी जुटाई जा रही है कि इस पटाखा फैक्टरी के संचालन के लिए कोई अनुमति थी या नहीं।
मौके पर मौजूद महिला प्रधान का कहना है कि उन्हें इस फैक्टरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। कुछ महीने पहले तक इस फैक्टरी में धर्मकांटा बनाया जाता था। महिला प्रधान ने यह भी कहा कि पंचायत की ओर से इस फैक्टरी के लिए कोई एनओसी जारी नहीं की गई थी।
बिलासपुर। अरुणाचल प्रदेश के कामेंग सेक्टर में हुए हिमस्खलन में हिमाचल के जवान अंकेश भारद्वाज सहित 7 सैनिक शहीद हो गए हैं। सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि भी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार 6 फरवरी को भारतीय सेना के 7 जवान हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे।
सेना की ओर से जवानों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन भी चलाया गया, लेकिन किसी भी जवान को नहीं बचाया जा सका। शहीद होने वाले जवानों में बिलासपुर जिला के 21 वर्षीय अंकेश भारद्वाज भी शामिल हैं। अंकेश बिलासपुर जिले की घुमारवीं उपतहसील के सेऊ गांव के रहने वाले थे। जानकारी के अनुसार अंकेश के पिता भी सैनिक रहे हैं। इसके अलावा एक चाचा भी पूर्व सैनिक हैं, जबकि दो चाचा बीएसफ सेवाएं दे रहे हैं।
अंकेश माता-पिता के बड़े बेटे थे, जबकि अंकेश का छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। अंकेश भारद्वाज का जन्म 6 सितंबर 2000 को हुआ था और वो 2019 से भारतीय सेना की जैक-19 में सेवाएं दे रहे थे। सैनिक के शहीद होने की खबर से गांव में मातम है।
मंडी।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी जिले में बगुलामुखी माता मंदिर के लिए बनने वाले 800 मीटर रोपवे का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने हाल ही में संपन्न उपचुनावों में लाहौल स्पीति से भाजपा प्रत्याशी को कांग्रेस प्रत्याशी की तुलना में कम वोट मिलने का जिक्र भी किया।
सीएम ने कहा, “ये बात पक्की है कि जहां ज्यादा काम होता है, वहां ज्यादा वोट पड़ते हों, ऐसा जमाना बहुत पहले चला गया। वो जमाना नहीं रहा। लाहौल को हमने साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की टनल बनाकर दी। जब वोट की बारी तो आपने देखा हाल। क्या लोग चीजों को याद रखते हैं।”
सीएम ने कहा कि द्रंग के नेता विकास के मामले में द्रंग के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कौल सिंह ठाकुर को पिछले चार वर्षों के दौरान सरकार के कामों को देखकर भय हो गया है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सामाजिक और धार्मिक समारोहों पर कोविड की थर्ड वेव के कारण लगाई गई रोक हटा दी है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल को देखते हुए पहले सरकार ने इन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी। अब रोक तो हटी है लेकिन आयोजन के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।
हिमाचल प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी राम सुभग सिंह की ओर से जारी ताजा आदेशों के अनुसार, सभी सामाजिक और धार्मिक समारोह, जिनमें विवाह भी शामिल हैं, उनमें आयोजन स्थल की क्षमता के 50 फीसदी लोग ही मौजूद रह सकेंगे। अगर आयोजन स्थल बड़े होंगे, तब इंडोर यानी बंद जगहों पर अधिकतम सीमा 100 लोगों की होगी और खुली जगहों पर 300 लोगों की।
इसके साथ ही इस तरह के किसी भी आयोजन से पहले जिला या उपमंडल के प्रशासन से इजाजत लेनी होगी। आयोजकों को कोविड 19 की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की ओर से लगाई जाने वालीं अतिरिक्त शर्तों का भी पालन करना होगा। ये आदेश 24 जनवरी, 2022 सुबह छह बजे तक लागू रहेंगे।
आदेश में कहा गया है कि जिला प्रशासन को ऐसी प्रक्रिया बनानी होगी जिससे इस बात की निगरानी की जाए कि इस तरह के आयोजनों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है या नहीं।
इससे पहले बीते रविवार को जारी आदेश में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी प्रकास के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अकादमिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, राजनीतिक और अन्य आयोजनों की इजाजत थी मगर उसके लिए भी इंडोर में 100 और आउटडोर में 300 लोगों की सीमा तय की हुई थी।
चूंकि शादी और अन्य कार्यक्रम एक तरह से सोशल गैदरिंग में आते हैं, ऐसे में लोगों में नाराजगी थी कि जब राजनीतिक और मनोरंजक कार्यक्रमों को छूट दी गई है तो लोगों की शादियों या अन्य निजी समारोहों (जिनमें सोशल गैदरिंग की जाती है) पर रोक क्यों लगाई गई है। ऐसे में, आज के आदेश में अकादमिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक और राजनीतिक आयोजनों आदि से पहले धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का जिक्र किया गया है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश समेत पूरे देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर देखने को मिल रही है। प्रदेश में लगातार मामले बढ़ रहे हैं और सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में लोग सर्दी-जुकाम के लक्षणों से जूझ रहे है। इनमें से कितने कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, यह कहना मुश्किल है क्योंकि बहुत से लोग टेस्ट नहीं करवा रहे। लेकिन जितने लोग टेस्ट करवा रहे हैं, उनमें संक्रमित पाए जाने वालों की संख्या पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही है। हालांकि, यह देखा जा रहा है कि ज्यादातर लोगों को गंभीर समस्या नहीं हो रही। लेकिन इस बात को देखकर लापरवाही बरतना घातक साबित हो सकता है।
गुरुवार तक के आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि हिमाचल प्रदेश में जो कोराना संक्रमित अस्पतालों में भर्ती हुए हैं, वह कुल संक्रमितों के मात्र एक फीसदी है। फिलहाल राहत की बात यह है कि अभी कोई भी मरीज वेंटीलेटर पर नहीं है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि हम लापरवाही बरतने लग जाएं क्योंकि यह वायरस कब, किसे, किस हद तक नुकसान पहुंचा सकता है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए जरूरी है कि संक्रमण से बचने की कोशिश की जाए और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहें।
ऐसा इसलिए क्योंकि भले ही मात्र एक फीसदी संक्रमितों को ही अस्पताल में एडमिट होना पड़ा हो मगर अब तक एक दर्जन से ज्यादा संक्रमितों की जान भी गई है। थर्ड वेव के आंकड़े पिछले साल आई सेकंड वेव की तुलना में थोड़ी राहत देते हैं मगर चिंता की बात यह है कि कोरोना महामारी कभी भी बेकाबू हो सकती है। ऐसा सेकंड वेव के दौरान भी देखने को मिला था।
जानकारों का कहना है कि दोनों डोज देने के बाद लोगों में इम्यूनिटी पैदा हुई है जिसका लाभ पूरे प्रदेश को मिल रहा है। लेकिन चूंकि सभी की इम्यूनिटी का स्तर एक जैसा नहीं होता, इसलिए निश्चिंत होकर लापरवाही नहीं बरती जा सकती। इसी खतरे को देखते हुए वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाई जाने लगी है। साथ ही ऐसी रिपोर्ट्स भी आई हैं कि ओमिक्रॉन जैसे नए वेरिएंट्स वैक्सीन के सुरक्षाचक्र में सेंध लगा सकते हैं।
डॉक्टर साफ सलाह देते हैं कि अभी भी भीड़ से बचने की जरूरत है, मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहना है और सर्दी जुकाम या कोविड के लक्षण आने पर खुद को आइसोलेट भी करना है। डॉक्टर टेस्ट करवाने की सलाह भी देते हैं ताकि आप समय रहते खुद को भी गंभीर बीमारी से बचा सकें और संक्रमण को आगे फैलने से रोककर थर्ड वेव में उछाल लाने में योगदान देने से भी बच सकें।
अभिलक्ष्य सिंह गुलेरिया की फेसबुक टाइमलाइन से साभार।। केंद्र सरकार ने ग्रुप B (अराजपत्रित) ग्रुप C और D की भर्तियों में January, 2016 से इंटरव्यू खत्म कर दिए थे। यह व्यवस्था भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए की गई थी और यह एक बहुत अच्छा निर्णय भी था।
तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने भी ग्रुप C और D की भर्तियों में 2017 से इंटरव्यू खत्म कर दिए थे हालांकि इंटरव्यू के स्थान पर 15 नंबरों का डॉक्यूमेंटेशन क्राइटेरिया लाया गया। जिसमें नंबर कुछ इस प्रकार से थे:
1. Mimimum Education qualification = 2.5 marks on %age basis
2. Backward Area = 1 marks
3. Land less than 1 hectare = 1 marks
4. Non employment certificate in govt sector = 1 marks
5. Differently abled = 1 marks
6. NSS/NCC/Sports medal winner = 1 marks
7. BPL family = 2 marks
8. Widow/divorced/single woman = 1 marks
9. Single daughter/ orphan = 1 marks
10. Training for concerned post = 1 marks
11. Experience = 2.5 marks
जो यह सिस्टम भर्तियों के लिए अपनाया गया यह दुनिया का सबसे घटिया सिस्टम था। केंद्र सरकार ने इंटरव्यू इसलिए खत्म किए थे कि भर्तियों में पारदर्शिता आए और मेरिट में आने वाले परीक्षार्थी बाहर ना हो। परंतु जो सिस्टम तत्कालीन सरकार द्वारा अपनाया गया उससे पारदर्शिता तो क्या आनी थी उल्टा मेरिट के साथ-साथ टॉपर तक बाहर हो गए। मुझे 15 में से सिर्फ 1.66 अंक मिलते हैं। मैं ना जाने कितनी ही परीक्षाओं में इस सिस्टम की वजह से बाहर हुआ हूं।
जिस पद पर मैं आज कार्य कर रहा हूं इस परीक्षा में भी मैंने संयुक्त रूप से लिखित परीक्षा में पूरे हिमाचल में प्रथम स्थान हासिल किया था, जो किसी के लिए गर्व की बात होती है परंतु 15 अंक के कारण में पहले से चौथे स्थान पर चला गया और वैकेंसी सिर्फ तीन थी। हालांकि बाद में वेटिंग से कॉल आ गया शायद किस्मत अच्छी थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर परीक्षा में जनरल के कुल 16 पद थे । मेरा लिखित परीक्षा में आठवां स्थान था और 15 उनको के इवैल्यूएशन के बाद मेरा स्थान 26 वां हो गया था।
ना जाने आपको ऐसे कितने ही उदाहरण मिल जाएंगे यह मेरे साथ ही नहीं बहुत लोगों के साथ हुआ है। एलाइड सर्विसेज की परीक्षा में तो इससे भी बुरा हाल है वहां पर मुख्य परीक्षा 500 अंकों की होती है और जब 15 अंक के डॉक्यूमेंटेशन की बारी आती है तो 500 अंकों को 85 मैं परिवर्तित किया जाता है और बाद में वही होता था, मेहनत से आया हुआ परीक्षार्थी बाहर। बहुत से लोगों की जिंदगी इस सिस्टम की वजह खराब हो चुकी हैं। आज भी इन 15 अंकों के खिलाफ मेरा केस माननीय उच्च न्यायालय में पेंडिंग है। हम बहुत से छात्र माननीय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी, माननीय जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर जी से कई बार, इन 15 अंकों के खिलाफ मिले हैं। और उन्होंने आश्वस्त किया था कि हम इसके लिए कुछ ना कुछ करेंगे।
आज बहुत खुशी है कि लगभग 4 सालों के बाद इन 15 अंको की बहुत ही अन्याय पूर्ण व्यवस्था को हटाया गया है। ना जाने कितने ही लोगों को आने वाले समय में इससे न्याय मिलेगा और चयन केवल और केवल उनकी योग्यता के आधार पर होगा। यकीन मानिए यह 15 अंको की व्यवस्था इंटरव्यू से भी बुरी थी। जिस सरकारी स्कूल में मैं पढ़ा हूं वहां ना तो NCC थी ना NSS, मुझे नहीं लगता कि आज भी होगी। क्या यह समानता के अधिकार का हनन नहीं था। एक हेक्टर से जमीन कम होने पर एक अंक दिए जाने का प्रावधान था। एक हेक्टर में लगभग 12 बीघा जमीन होती है क्या जिसके पास 11 बीघा जमीन थी वह लैंडलेस है? उसको एक अंक मिल जाता था। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि ऐसे लोगों को एक अंक मिला है जिनकी जमीन एक जगह नहीं चार चार जगहों में थी। क्या सरकार के पास आधार कार्ड की तरह जमीन का भी कोई पैमाना था जिससे पता चल सके कि एक इंसान के पास कितनी जमीन है। सरकारी क्षेत्र में अगर किसी के पिताजी चपरासी थे तो उसको एक अंक नहीं मिलता था और अगर किसी के माता-पिता प्राइवेट कंपनीज में करोड़ों कमाते थे तो उनको एक अंक मिलता था। खुद सोचिए यह क्या व्यवस्था की गई थी। स्पोर्ट्स के 1 अंक मिलते थे हालांकि स्पोर्ट्स वालों को 3% आरक्षण भी है मतलब दोहरा आरक्षण। BPL वालों को 2 अंक मिलते थे हालांकि बीपीएल को पहले से ही सब कैटिगरी में रिजर्वेशन था। ना जाने कितने ही फर्जी बीपीएल को जानता हूं। आप सब लोग अपने आसपास ही देख लेना कितने ही फर्जी BPL आपको मिल जाएंगे जिनके घरों में गाड़ियां खड़ी है।
एक बहुत ही ताजा उदाहरण में आप लोगों को TGT Arts की परीक्षा का देना चाहता हूं जिसका परिणाम अभी 20 – 25 दिन पहले ही घोषित किया गया है। इस परीक्षा में कुल पद 306 थे जिसमें से जनरल के 112 पद थे। और सुनने में आया है कि जनरल वालों के सिर्फ 55 पद ही भरे गए हैं। हालांकि यह मैंने चेक नहीं किया है। परंतु फिर भी सोचिए 112 में से इतने कम पद। बाकी पद कैटिगरीज को शिफ्ट हो गए। 15 अंको की व्यवस्था ने ही यह सब कमाल किए हैं।
जयराम ठाकुर जी की सरकार का मैं तहे दिल से आभारी हूं, जिनकी सरकार ने यह निर्णय लिया। हम तो उम्मीद छोड़ चुके थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।
बिलासपुर।। एचएएस अधिकारी ओशिन शर्मा ने अपने पति विशाल नेहरिया पर स्टॉक (पीछा) करने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। ओशिन ने बिलासपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि मुझे भी जीने का अधिकार है, मैं भी धर्मशाला की हूं, मुझे जीने दिया जाए। ओशिन का कहना है कि उनके पति धर्मशाला से भाजपा के विधायक विशाल नेहरिया उन्हें मानसिक तौर पर परेशान कर रहे हैं। इन आरोपों पर विधायक विशाल नैहरिया ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और उन्हें फैसले का इंतजार है, इसके अलावा इस मामले पर उन्हें और कुछ नहीं कहना।
पिछले साल ओशिन ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके विशाल नेहरिया पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके कुछ महीनों बाद नेहरिया का भी एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह अपनी गलती स्वीकार करते हुए मान रहे थे कि उन्होंने हिंसक व्यवहार किया था।
ओशिन शर्मा और विशाल नेहरिया के तलाक का मामला अदालत में विचाराधीन है। सुनवाई से एक दिन पहले मीडिया के सामने आईं ओशिन ने कहा कि शारीरिक प्रताड़तना खत्म हुई तो उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके पति शादी के वीडियो अपने दोस्तों की मदद से यूट्यूब पर डाल रहे हैं। ओशिन ने कहा कि परेशान होने के कारण वह अपनी ड्यूटी भी सही से नहीं कर पा रहीं। अभी ओशिन एचएएस प्रोबेशनर ऑन डिस्ट्रिक्ट अटैचमेंट हैं।
‘मुझे जीने दिया जाए’
ओशिन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैं भी धर्मशाला की हूं। मुझे भी जीने दिया जाए। मुझे भी जीने का अधिकार है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मांग की कि धर्मशाला में सत्ता के दुरुपयोग को रोका जाए। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है तो दूसरी ओर बेटियां घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। वह भी उन बेटियों में से एक है, जो अपने पति व उनके परिवार के सदस्यों द्वारा प्रताड़ित व घरेलू हिंसा से पीड़ित है।”
‘दबाव में वापस ली एफआईआर’
ओशिन ने कहा कि पिछले साल जून में उनके पति और उनके परिवार के सदस्यों ने न केवल उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई थी। उसके बाद उन पर पुलिस में की गई एफआईआर वापस लेने का दबाव डाला गया।
ओशिन ने कहा कि उन्होंने एफआईआर इसलिए वापस ली थी क्योंकि उन्हें उनके पति ने दस वर्ष तक तलाक नहीं देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है, फिर भी उनके पति उन्हें लगातार स्टॉक (पीछा) करके परेशान कर रहे हैं। ओशिन का आरोप है कि विशाल अक्सर वहां पहुंच जाते हैं जहां पर रहती हैं या ड्यूटी करती हैं। ओशिन ने कहा कि जब वह जोगिन्दर नगर और हमीरपुर में रहीं तब भी उन्हें परेशान किया गया। हिपा में ट्रेनिंग दौरान उन्हें तंग किया जिस कारण उन्होंने शिमला के ढली थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।
इन हिमाचल डेस्क।। अक्सर ऐसा होता है कि भारी मात्रा में ओले गिरने पर लोग खुश हो जाते हैं और फेसबुक, इंस्टाग्राम, tiktok और वॉट्सऐप आदि पर वीडियो डालकर कहने लगते हैं कि उनके यहां बर्फबारी हो रही है।
ऐसा नहीं है कि यह शरारतन किया जा रहा है। दरसअल लोगों को ओलों और बर्फ में फर्क नहीं पता। शायद उन्हें आइस और स्नो में फर्क भी न मालूम हो। इसलिए उनकी सुविधा के लिए हम यह लेख लाए हैं।
स्नो या बर्फ तब गिरती है जब बादलों में मौजूद वाष्पकण बेहद कम तामपान के कारण सीधे जम जाते हैं (बिना लिक्विड स्टेट में आए) और फिर उसी अवस्था में षट्कोणीय क्रिस्टल के रूप में फाहे बनाते हुए धरती तक आ जाते हैं। वे फाहों के रूप में तभी धरती तक पहुंचेंगे, जब बादलों से धरती तक आते हुए उन्हें हिमांक से कम तापमान मिले। वे बहुत हल्के होते हैं, रूई के फाहों की तरह।
स्नोफॉल सर्दियों के मौसम में ही होता है मगर ओले किसी भी मौसम में गिर सकते हैं। जब गरजने-बरसने वाले तूफानी बादलों के बीच पानी की बूंदें जम जाने से बनते हैं। इनके लिए ऊंचाई में कम तापमान चाहिए होता है। नीचे आते समय कई बार ये और बड़ा आकार ले लेते हैं। ऊंचाई से गिरने और साइज़ बड़ा होने के कारण से बहुत जोर से गिरते हैं और नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
वैसे बादलों से सिर्फ बारिश, बर्फबारी या ओलावृष्टि ही नहीं होती। आगे ध्यान से पढ़ें-
वर्षण क्या है
वर्षण यानी अंग्रेजी में प्रेसिपिटेशन (Precipitaion). इसका अर्थ है- वायुमंडल में मौजूद वाष्पकणों का संघनित होकर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण नीचे की ओर गिरना। वर्षण का मतलब सिर्फ बारिश से नहीं है, बल्कि विभिन्न स्वरूपों से है। ये स्वरूप हैं- बारिश, बर्फ, ओले, बजरी (स्लीट) और फ्रोज़न रेन।
बारिश (रेन)- बादलों में मौजूद वाष्पकणों का संघनित होकर द्रव (लिक्विड स्टेट) बन जाना और बूंदों के रूप में धरती पर गिरना बारिश कहलाता है।
बारिश की बूंदें
बर्फ (Snow)- जब बादलों से लेकर धरती तक तापमान हिमांक (फ्रीजिंग मार्क- 32 डिग्री फारेनहाइट) या इससे कम रहेगा, बर्फ गिरेगी। जब जमीन पर तापमान 32 फारेनहाइट से ज्यादा हो, तब भी बर्फ गिरती है अगर थोड़ी ऊंचाई तक तापमान इससे नीचे हो।
बर्फ़
स्लीट (Sleet)- जब बर्फ के फाहे रास्ते में पिघलकर बारिश की बूंदों में बन जाएं मगर धरती के पास कम तापमान होने के कारण फिर से जम जाएं तो इसे स्लीट कहते हैं। इससे छोटी-छोटी बारिश की बूंदें या बरफ के फाहे होते हैं। हिमाचल में इसको बोलते हैं- बजरी।
चूंकि पहले तापमान थोड़ा गर्म होता है इसलिए बर्फ पिघलकर बजरी या स्लीट में बदल जाता है। मगर इससे तापमान में गिरावट होती है और फिर बर्फ गिरने की संभावना बन जाती है। इसीलिए स्लीट गिरने पर लोग कहते हैं- अब बर्फ गिरने वाली है।
फ्रीज़िंग रेन (Freezing Rain)- ऐसा तब होता है जब पृथ्वी की सतह बहुत ठंडी हो मगर हवा गर्म हो। तो ऊपर से तो बारिश की बूंदें गिरती हैं मगर धरती पर गिरते ही वो जम जाती हैं। हिमाचल में ऐसा कम ही देखने को मिलता है।
फ्रीजिंग रेन पौधों और जीव जंतुओं के लिए खतरनाक है। बारिश की बूंदें तुरंत गिरते ही जम जाती हैं।
कच्चे ओले या ग्रॉपल (Graupel)- ये भी कम ही देखने को मिलते हैं। पहली नजर में ये ओलों जैसे लगेंगे मगर साइज छोटा होता है नरम होते हैं। दरअसल बर्फ के फाहों का बाहरी हिस्सा पिघलकर दोबारा जम जाता है तो छोटी-छोटी गोलियां सी बन जाती हैं। बाहर से सख्त ओलों जैसे नजर आते हैं मगर दबाने पर मुलायम होते हैं।
ग्रॉपल बर्फ़ की तरह सफेद होते हैं मगर मुलायम और थोड़े खुरदरे से लगते हैं देखने में।
ओले (Hail) – ओले तो आपको पता ही हैं क्या होते हैं। जमे हुए पानी के टुकड़े होते हैं जिनका निर्माण चमकते-गरजते तूफानी बादलों में होता है। बर्फ, स्लीट, फ्रीज़िंग रेन और ग्रॉपल तो सर्दियों में बनते हैं मगर ओले गर्म वातावरण में भी बन जाते हैं। इनका आकार इस बात पर निर्भर करता है कि थंडरस्टॉर्म कितना बड़ा है। वैसे दिल्ली एनसीआर के लोग ओलों को ही समझ बैठे बर्फ। उन्हें ये लेख जरूर पढ़ाएं।
ये तो बड़े खतरनाक होते हैं। कई बार साइज बड़ा होता है। गाड़ियों, घरों, जीव-जुंतुओं, इंसानों और सेब के पौधों समेत अन्य वनस्पति के लिए खतरनाक होते हैं।
तो उम्मीद है कि आपको इतनी जानकारी मिल गई होगी कि आप बर्फ, स्लीट, ग्रॉपल और ओलों की पहचान कर पाएंगे। जब कभी आप ओले या बर्फबारी देखें, जरूर सोचें कि बादलों से लेकर धरती तक पहुंचने की इसकी यात्रा कैसी रही होगी। बहरहाल, चलते-चलते इस वीडियो को भी देख लीजिए-
धर्मशाला। हिमाचल क्रिकेट टीम ने इतिहास में पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी अपने नाम की थी। अब इस विजेता टीम को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (HPCA) अपनी ओर से एक करोड़ रुपये की इनामी राशि देगी। इस बात एलान बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष और एचपीसीए के निदेशक अरुण धूमल ने किया है।
विजय हजारे जीतने पर बीसीसीआई की ओर से टीम को 30 लाख रुपये की इनामी राशि मिलेगी। पहले इनामी राशि 20 लाख थी, लेकिन बीसीसीआई ने इसे बढ़ा दिया था। उधर, बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल का कहना है कि वो दिन हिमाचल टीम के लिए ऐतिहासिक था।
इसके साथ ही अरुण धूमल ने हिमाचल क्रिकेट टीम के कप्तान ऋषि धवन और अन्य खिलाड़ियों की तारीफ की और कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल के खिलाड़ी भारतीय टीम की कैप पहनकर इस स्टेडियम में खेलते नजर आएंगे।