कोरोना केस आते ही फ़ेसबुक पर लाइव आने वाले बेहूदा लोग

राजेश वर्मा।। जब भी कहीं कोई कोरोना का पॉजिटिव मरीज सामने आता है सबसे पहले तो आधिकारिक मीडिया की बजाय फेसबुकिया मीडिया सक्रिय हो जाता है। विशेषकर संक्रमित पाए गए व्यक्ति के आसपास के लोग फ़ेसबुक लाइव करके पीड़ित  की ही नहीं, बल्कि पुश्तों की हिस्ट्री खोल कर रख देते हैं कि फलां के पिता को ये था, दादा को वो था, माता हाई ब्लडप्रेशर की मरीज़ है वगैरह-वगैरह।

ये लोग पूरे परिवार की निजता को तार-तार कर देंगे। जब तक कोरोना पीड़ित को अस्पताल में शिफ्ट नहीं किया जाता तब तक ये ऐसा गेंडा देकर रखते हैं कि पूछिए मत। इनका अपना खुद का पूरा बब्बर चाहे खांस और छींक-छींक कर पूरे गाँव को ‘सैनिटाइज’ कर रहा हो मगर इनका ध्यान पड़ोसी की छींक पर रहता है।

इस दौर में सबसे भयानक पहलू है- जब उस व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए हू-हू करती ऐंबुलेंस आती है, तब आस-पड़ोस के लोग महज अपने पेज और आईडी पर लाईक, शेयर, कमेंट के लिए वीडियो बनाने लग जाते हैं। और तब ये लोग वीडियो ऐसे बनाते हैं जैसे मानों कोई सीक्रेट कमांडो मिशन चला हुआ हो।

जरा सोचना यदि आपके किसी अपने को कोई ऐसे ऐंबुलेंस में ले जाए और कोई वीडियो बनाकर डाल दे तो आप पर क्या बीतेगी? तब आपका मन क्या करेगा यह हम जानते हैं। अपने आप से कुछ प्रश्न तो पूछ कर देखो?

1.क्या तुम किसी मीडिया समूह से अधिकृत पत्रकार हो?

2.क्या तुम लोगों ने अभी तक कोई कोरोना संक्रमित नहीं देखा?

3.क्या तुमने कभी ऐंबुलेंस नहीं देखी?

4.क्या तुम्हें वीडियोग्राफी करने पर अवॉर्ड मिलेगा?

5.क्या इस बात की गांरटी है कि तुम्हारे या तुम्हारे अपनों के साथ ऐसा कभी नहीं हो सकता?

6.क्या तुमने सोचा आसपास के अन्य लोगों विशेषकर बच्चों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

7.क्या तुम्हें निजता का अर्थ मालूम है?

8.क्या तुम लोग समाज में खाई पैदा नहीं कर रहे?

अरे यदि कोई अपनी लापरवाही से समाज या लोगों से खिलवाड़ कर रहा है तो उसके लिए पुलिस व प्रशासन से संपर्क करो, किसने रोका है? लेकिन यार ये विडियो बनाना बंद करो।

आज तुम कोरोना के पीड़ितों का विडियो बनाओगे कल यही चीज दूसरे को भी उकसा सकती है। और तब जरूरी नहीं कि वजह कोरोना ही है, और भी कोई कारण हो सकता है। इसलिए, मीडिया का काम मीडिया पर छोड़ दो और मीडिया वालों, आप भी जरा ज़िम्मेदारी से काम करो।

समाज को तोड़ने की बजाए जोड़ने का काम करें। कोरोना आया है, एक दिन चला भी जाएगा। मगर हम लोगों को इसी समाज में रहना है। फिर आज ये सनक किसलिए?

(स्वतंत्र लेखक राजेश वर्मा लम्बे समय से हिमाचल से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे vermarajeshhctu @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

गाय को ज़ख़्मी करने के केस में पुलिस ने 11 दिन बाद की गिरफ्तारी

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िले के झंडूता में एक गाय को कथित तौर पर बम खिलाकर ज़ख़्मी करने का वीडियो सामने आने के बाद आज पुलिस ने गिरफ़्तारी की है। बिलासपुर पुलिस ने जानकारी दी है कि इस संबंध में 26 मई को एफआईआर रजिस्टर हुई थी।

इससे पता चलता है कि आज जो वीडियो वायरल हुआ और उसके आधार पर इन हिमाचल और अन्य मीडिया संस्थानों ने ख़बर बनाई, उससे पुलिस हरकत में आई है। बिलासपुर पुलिस के फ़ेसबुक पेज में जानकारी दी गई है कि इस मामले में 26 मई को एफआईआऱ हुई थी। यह भी बताया गया है कि डीएसपी ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आज इस संबंध में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

#Jhandutta_Cow_injury_case.FIR was registered on 26 May 2020 u/s 286, 429 IPC and Section 11 Prevention of Cruelty to Animals Act.Dsp hq visited the spot.The accused has been arrested today evening.

Bilaspur Police ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಜೂನ್ 6, 2020

वीडियो में शख़्स ने बताया था कि उनकी गर्भवती गाय को उनके पड़ोस के ही एक शख़्स ने कुछ ‘बम’ जैसी चीज खिला दी थी। वीडियो में गाय बहुत दर्द में थी और उसके जबड़े से खून निकल रहा था। नीचे का जबड़ा ग़ायब दिख रहा था और गाय की आँखों से आंसू टपक रहे थे।

गाय का नीचे का जबड़ा फट चुका है, ऊपर भी चोट आई है।

पुलिस ने 26 मई को आईपीसी और प्रिवेंशन ऑफ क्रुऐलिटी टु एनिमल्स ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इतने समय बाद कार्रवाई होना बताता है कि अगर केरल में हथिनी की मौत न होती तो लोगों की संवेदना न जगती और न ही शायद पुलिस इस मामले में कार्रवाई करती।

मामला क्या है, जानने के लिए आप नीचे दी गई ख़बर पढ़ सकते हैं-

ज़हर से बंदर मारने वाले हिमाचल में हथिनी की मौत पर हाहाकार

हिमाचल के बिलासपुर में गर्भवती गाय का मुँह ‘बम’ से उड़ाने का आरोप, वीडियो वायरल

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िले के झंडूता में एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने वीडियो अपलोड किया है जिसमें गाय का जबड़ा फट चुका है और उससे रक्त चू रहा है। गाय की आँखों से आंसू भी टपकते दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस ने बताया है कि 26 मई को एफआईआर दर्ज हुई थी और आज आरोपी की गिरफ़्तारी हुई है।

ज़हर से बंदर मारने वाले हिमाचल में हथिनी की मौत पर हाहाकार

क्या है वीडियो में
वीडियो बनाने वाले शख़्स का कहना है कि यह उसकी गाय है और गर्भवती है मगर पड़ोस के एक शख्स ने जानबूझकर बम खिलाकर इसे ज़ख़्मी कर दिया। वीडियो बनाने वाला शख़्स डाहड़ गाँव का है और उसका कहना है कि गाय एक-दो दिन में बच्चा देने वाली थी।

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने अपने पड़ोसी पर आरोप लगाया है और कहा है वह अब भाग गया है। यह वीडियो कुछ लोगों और पेजों ने शेयर किया है मगर बेहद विचलित करने वाला है। इसलिए हम इसे यथावत प्रकाशित करना उचित नहीं समझ रहे। बहरहाल, पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।

हाल ही में केरल में कुछ लोगों ने गर्भवती हथिनी को विस्फोटकों भरा अनानास खिला दिया जिसके फटने से हथिनी का मुँह ज़ख़्मी हो गया था। वह तीन दिन तक नदी में सूँड़ पानी में डुबोकर खड़ी रही थी और आख़िर में दर्द के कारण जान गँवा बैठी थी।

ज़हर से बंदर मारने वाले हिमाचल में हथिनी की मौत पर हाहाकार

फर्जी है हिमाचल कांग्रेस के नाम से बना 12 करोड़ का बिल: राठौर

शिमला।। हिमाचल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने शुक्रवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस के नाम से 12 करोड़ का जो बिल वायरल हुआ है, वह फर्जी है। उन्होंने कहा कि सीएम ने ऐसे किसी फर्जी बिल के आधार पर जो आरोप लगाया है, वह गलत है। राठौर ने कहा कि यदि सीएम के पास कोई बिल है तो पेश करें अन्यथा कानूनी कार्रवाई के कई प्रावधान हैं।

कुलदीप राठौर ने कहा कि कोरोना संकट काल में कांग्रेस पार्टी ने लोगों की हरसंभव मदद की है। इससे जुड़ा पूरा रिकॉर्ड जिला और ब्लॉक स्तर से मांगा गया है तथा कांग्रेस ने जो मदद की है, वह भाजपा से ज्यादा ही होगी

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने चेताते हुए कहा कि जिन लोगों द्वारा बिना हस्ताक्षर किया पत्र वायरल किया गया है, उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और उचित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

क्या है मामला
दरअसल एक लेटर मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें कोरोना काल में हिमाचल कांग्रेस की ओर से 12 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा था। ये पार्टी के लेटरहेड पर नहीं छपा था और न ही इसमें राठौर के हस्ताक्षर थे।

‘इन हिमाचल’ ने भी ऐसे लेटर के संबंध में खबर छापी थी, जिसे राठौर  का बयान शामिल करके अब अपडेट कर दिया गया है। नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ें, क्या लिखा था लेटर में-

फर्जी है हिमाचल कांग्रेस के नाम से बना 12 करोड़ का बिल: राठौर

 

कोरोना पीड़ित मां-बेटी की तस्वीरें वायरल कीं, फिर दे रहे गालियाँ

यतिन पंडित।। कुल्लू के भुंतर में तीसरे टेस्ट में कोरोना पॉज़िटिव पाई गईं माँ-बेटी की पहले तस्वीरें वायरल की गईं और अब कुछ लोग इनके प्रति सहानुभूति दिखाने की जगह उन्हें कोस रहे हैं। अभी कुछ देर पहले शीतला माता मोड़ से एक पहचान के मित्र घर आ रहे थे। दो-तीन औरतें खड़ी होकर हाल ही में भुंतर में आए कोरोना पॉजिटिव केस के बारे बातें कर रही थीं। जिसमें औरतों ने सम्बंधित मरीज महिला के लिए ऐसे शब्द प्रयुक्त किए कि शर्म से सर झुक जाए। उन शब्दों को सुनकर लगा कि हम मानव जाति के तौर पर नीचता के स्तर पर पहुंच चुके हैं।

और आप जानते हैं यह सब क्यों हुआ? क्योंकि कुछ लोगों ने उस बेचारी महिला का फोटो और जानकारी वायरल कर दी। साथ ही हमारी अपनी मानसिकता इतनी गिर चुकी है कि हमे एक मरीज़ और एक अपराधी के बीच अंतर करना भी नहीं आ रहा! हमारा दिमाग कोरोना से भी अधिक गंभीर बीमारी से संक्रमित हो चुका है।

सवाल यह भी कि क्या बातें बनाने वाली महिलाओं के घर मे कभी की बीमार ही नहीं हुआ होगा? भगवान ना करे उनके यहां कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाए और लोग उनके उस सम्बंधी को घृणित नज़रों से देखना शुरू कर दें। उसे गंदे और भद्दे नामों से बुलाने लग जाएं, तब उन महिलाओं पर क्या बीतेगी?

गाँव-गांव में ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है और संकट के दौर में घर लौट रहे लोगों को भी कुछ लोग दुश्मन मान रहे हैं। एक तरफ़ यह बात भी सच है कि सामाजिक दूरी का स्लोगन वास्तव में ही हमारे समाज मे आपस मे ही सामाजिक रूप से दूरी बनाने का औज़ार बनता जा रहा है। शारीरिक दूरी शब्द इस सम्बन्ध में ज़्यादा उपयुक्त है। पर फिर भी; शब्दों का करेंगे क्या हम लोग? जागरूकता शब्दों से नहीं आती, कॉमन सेंस से आती है। हम जाहिलों की कौम हैं और शायद जाहिल ही बने रहेंगे।

मेरे गृहक्षेत्र सुलतानपुर में पिछले दिनों एक अंग्रेज कोरोना के कारण फंस गया था। वह जनवरी से यहीं था और अपने देश जाने का इंतज़ार कर रहा था। दिन में घूमते हुए मेरी दुकान पर आता और बैठकर बातचीत करता। काफ़ी दिनों तक हमारी बहुत से विषयों पर चर्चा हुई। उस दौरान उसने भारत की समस्याओं के सम्बंध में एक बहुत बड़ी बात कही थी।

“तुम्हारे इंडिया की समस्या पता है क्या है? तुम्हारे यहां बेशक किसी के पास शौचालय नहीं होगा पर हाथ मे मोबाइल ज़रूर होगा। तुम्हें बेशक विज्ञान के बारे में पता नहीं होगा पर ज्ञान तुम सबको देते फिरोगे।”

उस समय यह सुनकर बहुत अजीब लगा और गुस्सा भी आया था। पर वो आदमी सच ही कह रहा था। हमे सामाजिक व्यवहार के नाम पर सिर्फ़ त्यौहारों में शराब पीकर गीदड़ों की तरह आवाज़ निकालते हुए हुड़दंग मचाना आता है। अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताने के लिए दूसरों को नीचा दिखाना आता है। ज्ञान के बारे में कहें तो हमे हर चीज़ आती है, सिर्फ़ इंसान बनना नहीं आता।

उन महिलाओं को ही नहीं, हर उस व्यक्ति को ईश्वर सबक़ सिखाए जो इंसानियत से किनारा कर चुके हैं। क्या उन्हें ये अहसास नहीं है कि कल को ख़ुद उनके साथ या किसी अपने के साथ ऐसा हो सकता है? मेरी कामना है कि ऐसे लोगों का दिमागी संक्रमण दूर हो और भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

एक और गंभीरर बात- कल से लोगों ने व्हाट्सएप्प पर उन महिला और उनकी बेटी की फ़ोटो वायरल कर रखी है। अगर वे कोरोना पॉजिटिव आई हैं तो क्या वे अपराधी हो गईं, जो बाकी सब लोग उनकी फ़ोटो किसी सम्भावित अपराधी की तरह शेयर किए जा रहे हैं? यह बिल्कुल भी सही नहीं।

आप उनकी फोटो शेयर करके उन्हें मानसिक पीड़ा पहुंचा रहे हैं। लोगों के मन मे उनके प्रति दुर्भावना भर रहे हैं। यह समझ लीजिए उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वे स्वयं इस परिस्थिति में उलझ गई हैं, जिससे बाहर निकलने के लिए उन्हें हम सबके साथ की ज़रूरत है। जो लोग उन महिला और उनकी बेटी के फोटो सोशल मीडिया पर ‘कुल्लू में कोरोना’ नाम से शेयर कर रहे हैं उन्हें थोड़ी शर्म आनी चाहिए। इस प्रकार किसी के व्यक्तित्व को आघात पहुंचाकर आप लोग भी अपने आप को ज़्यादा बड़ा वायरस साबित करने पर तुले हुए हैं।

याद रखिए उस महिला ने हर तरह से निर्देशों का पालन करते हुए अपना टेस्ट दो बार पहले करवाया था। वह एक जागरूक और संवेदनशील महिला हैं जिन्होंने दूसरों की जिंदगी का महत्व समझकर तीसरा टेस्ट भी करवाया। पता है क्यों? हमारे जैसे जाहिलों के ही लिए, ताकि हम लोग खतरे में ना पड़ें। उन्होंने लगभग एक महीना इस मानसिक थकान को झेला है और अब फिर से झेल रही है। इसलिए थोड़ी अक्ल मांग लीजिए भगवान से अपने लिए। उनका फ़ोटो शेयर करने जैसी जाहिलपने की ओछी हरकतें बंद कीजिए।

कोरोना से खतरनाक वायरस वो लोग हैं जो ऐसी घृणित हरकतें करते हैं जिसका इलाज ही नहीं है। सोचिएगा इस बारे में क्योंकि यह शेयर करके हीरोगिरी दिखाने वाली संक्रामक बीमारी ठीक नहीं होती, जबकि कोरोना तो फिर भी ठीक हो जाता है।

यदि आपके आपके पास किसी संक्रमित व्यक्ति की फ़ोटो किसी माध्यम से आती है तो कृपया उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले को भी थोड़ा समझाएं।

कवर इमेज प्रतीकात्मक है

(कुल्लू जिले से संबंध रखने वाले यतिन पंडित हिमाचल प्रदेश के इतिहास और कला एवं संस्कृति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं और प्रदेश व देश से जुड़े विषयों पर लिखते रहते हैं।)

हिमाचल का वो ‘मूर्ख’ दुकानदार, जिसे गालियां दे रहे घरवाले

बिना नंबर की JCB से रात को काम, कोर्ट स्टे और मंत्री की बात पर सवाल

धर्मपुर।। हिमाचल प्रदेश का धर्मपुर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार बिना नंबर वाली जेसीबी से लोगों की निजी ज़मीन से उनकी अनुमति के बिना रात को सड़क बनाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के आदेश के बाद ये सड़क बिना मंज़ूरी और डीपीआर के बनाई जा रही थी। अब ग्रामीणों कोर्ट की मदद लेकर इसके निर्माण पर रोक लगवाई है। हालांकि, PWD का कहना है कि एक ही व्यक्ति ने स्टे लिया है और विवाद को सुलझा लिया जाएगा।

दरअसल, डरवाड़ ग्राम पंचायत के गरली गांव में निचली गरली से नीचे खड्ड की ओर सड़क बनाई जा रही है। गरली गाँव के कुछ निवासियों का कहना है कि उन्हें सड़क के निर्माण से आपत्ति नहीं है मगर विभाग यह नहीं बता रहा कि सड़क कहां से कहां तक बननी है और उन्हें विश्वास में लिए बग़ैर ही उनकी ज़मीन से सड़क निकालने पर आमादा है।

गाँव के निवासियों टोडरमल और रूपचंद ने बताया कि पिछले 13 दिनों से इस सड़क निर्माण के कारण पूरे गांव में तनाव का माहौल है और आपसी विवाद भी बढ़ गया है। उन्होंने गाँव की बिगड़ी फ़िज़ा के लिए सीधे तौर पर जलशक्ति मन्त्री पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयान और इशारे के बाद उन्हीं के करीबी ठेकेदार द्वारा ये किया जा रहा है।

क्या कहा था मंत्री ने
लोगों का आरोप है कि जब 21 मई को मंत्री यहाँ आए थे तो बस स्टैंड में उन्होंने कथित तौर पर कहा था, “गरली वालों, सड़कें धक्के से बनती हैं और ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं मिलेगा इसलिए जो फ़ायदा उठाना है अभी उठा लो।” गाँव के लोगों ने आरोप लगाया कि इसके बाद मन्त्री ने अपने चचेरे भाई को बिना नंम्बर की जेसीबी के साथ इस सड़क के निर्माण के लिए भेज भी दिया और गांव वालों को आपस में ही लड़वा दिया।

इस सड़क के विरोध में गरली गाँव के निवासियों टोडरमल और रूपचंद ने कोर्ट का रुख किया। इसके बाद सरकाघाट कोर्ट नंम्बर एक ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। इस मुक़दमे में सचिव लोक निर्माण विभाग, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग धर्मपुर, राजेन्द्र सिंह जेसीबी मालिक और गरली भाजपा बूथकमेटी प्रधान प्रभदयाल और सुरेश कुमार को पार्टी बनाया गया था। कोर्ट ने इस काम को रोकने व उसमें कोई दख़ल न करने के आदेश जारी किये हैं। गरली गांववासी टोडरमल, रूप चन्द गुलेरिया,ठाकर दास, धर्मचंद, बर्फी देवी, भूपसिंह, रवि कुमार, सुरजीत सिंह, दूनी चन्द, कांता देवी, जानकी देवी, ब्यासा देवी और अन्य ने मीडिया को बताया कि ये सड़क बिना बजट के ही बनाई जा रही है।

शिकायकर्ताओं का कहना है कि विभाग भरोसे में लिए बिना बनवा रहा सड़क

रात को चली जेसीबी
इन ग्रामीणों का कहना है कि 23 मई को पुलिस चौकी टिहरा में उनकी सहमति बगैर उनकी नीजि भूमि पर अज्ञात लोगों द्धारा बनाई जा रही सड़क की शिकायत दर्ज कराई थी तथा अधिशाषी अभियंता लोकनिर्माण विभाग धर्मपुर को इस सड़क बारे जानकारी देने बारे सूचित किया था। जिसके चलते पुलिस ने दो बार मौके पर आकर सबकी सहमति होने तक काम स्थगित करने के लिए आदेश जारी किए लेकिन गांव के एक पक्ष ने रात को जेसीबी से चोरी-छिपे और जोर जबरदस्ती काम जारी रखा।

इसके बाद शिकायतकर्ता टोडरमल और रूपचंद ने दोबारा पुलिस से दखल देने की मांग की जिसके चलते नायब तहसीलदार की अगुआई में सरकारी और नीजि भूमि की निशानदेही 2 जून को करवाई गई। इसमें विभाग के जेई और ग्राम पंचायत प्रधान भी मौजूद थे। इसके बाद नायब तहसीलदार ने निजी भूमि पर कार्य न करने के लिए कहा था।

काम न रुकने के चलते 27 मई को ये मामला एडवोकेट सुरेश शर्मा के माध्यम से कोर्ट पहुंच गया और गत दिवस 4 जून को काम रोकने के आदेश कोर्ट ने जारी कर दिये।

क्या कहता है विभाग
टोडरमल और रूप चन्द गुलेरिया ने बताया कि इस सड़क के निर्माण के लिए जो जेसीबी लगी है वो बिना नंम्बर की है जो मन्त्री के चचेरे भाई चन्जैर-ध्वाली निवासी राजेन्द्र सिंह पुत्र हेम सिंह की है। गावँ वालों द्धारा जेसीबी के मालिक से वर्क ऑर्डर की कॉपी मांगने पर उसने कहा कि वो इस सड़क का काम श्रमदान व जनसेवा के नाते कर रहा है और मुझे किसी विभाग ने यहां काम करने के लिए नहीं भेजा है। बल्कि गांव वालों के अनुरोध पर उनकी सहायता के लिए यहाँ आया हूँ।

वहीं, लोक निर्माण विभाग मंडल धर्मपुर के कनिष्ठ अभियंता अतुल शर्मा ने कहा कि विभाग भूमि अधिकरण करने के बाद ही सड़क का काम शुरू कर रहा है। उन्होंने कहा, “जहां पर विवाद हुआ है वहां पर एकमात्र व्यक्ति ने ही कोर्ट से स्टे लिया है। विभाग ने भी अपनी तरफ से राजस्व विभाग में निशानदेही करने वारे पत्र लिख दिया है। शीघ्र विवाद हल कर लिया जाएगा।

हिमाचल कांग्रेस के नाम से छपे लेटर में दावा- कोरोना राहत पर खर्च किए 12 करोड़

शिमला।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस केे नाम से शेयर किए जा रहे के लेटर में दावा किया गया है कि कांग्रेस कमेटी की ओर से कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों में 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर का कहना है कि ये लेटर फर्जी है।

इसके लेटर मुताबिक़, पार्टी ने 2 लाख 40 हज़ार लोगों की मदद की है जिनमें प्रवासी भी शामिल हैं। इस पर 12 करोड़ रुपये का खर्च आने की बात कही गई है। कांग्रेस बताती है कि 70 हज़ार प्रवासी मज़दूरों की उसने मदद की।

आगे बताया गया है कि 2 लाख 40 हज़ार लोगों को खाना दिया गया, 20 हज़ार लोगों को आश्रय दिया गया, 9,800 लोगों के टिकट करवाए गए, 5000 को स्वास्थ्य सहायता दी गई।

इसके अलावा, कांग्रेस ने साढ़े सात लाख मास्क, ढाई लाख सैनिटाइर और 11 हज़ार पीपीई किट देने की बात भी कही है। यह लेटर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के नाम के साथ साइन्ड ऑफ है मगर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। 

हिमाचल कांग्रेस के नाम से छपे लेटर में दावा- कोरोना राहत पर खर्च किए 12 करोड़

 

गुमनाम पत्र लिखने वाले को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे: जयराम ठाकुर

शिमला।। स्वास्थ्य विभाग में वेंटिलेटर ख़रीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले एक गुमनाम लेटर को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह पत्र राजनीतिक मंशा से सरकार को बदनाम करने के लिए लिखा गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले को पाताल से भी ढूँढकर निकालेंगे। सीएम ने कहा कि इस शख़्स के ख़िलाफ़ एफआईआऱ की जाएगी और मानहानिका का केस किया जाएगा। सीएम ने कहा कि इस पत्र में सारे आरोप झूठे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वेंटिलेटर की खरीद में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और कोई कोताही नहीं हुई है। सीएम ने कहा, “गुमनाम पत्र जारी करने वाले तत्व सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। वेंटिलेटर में गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाले में हिम्मत है तो वो सामने आए।”

LIVE : पत्रकार वार्ता को संबोधन।

LIVE : पत्रकार वार्ता को सम्बोधन ।

Jairam Thakur ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಜೂನ್ 4, 2020

क्या है लेटर में
एक अज्ञात पत्र में आरोप लगाया गया है कि साढ़े 3 लाख का वेंटीलेटर 10 लाख रुपये में खरीदा गया है। सीएम ने बताया कि वेंटीलेटर की खरीद पर बिठाई जांच में सरकार ने पाया कि हाइलेवल परचेज कमेटी की अनुशंसा पर मैनुफैक्चरर से उच्च गुणवता का एक वेंटीलेटर 9.19 लाख रुपये में खरीदा गया है।

सीएम के अनुसार, यह पाया गया कि ऐसे सात वेंटीलेटर खरीदे गए जो कि हिमाचल में 17 अप्रैल को पहुंचे। इसी मेनुफैक्चरर से हरियाणा सरकार ने 20 अप्रैल को 10.30 लाख प्रति वेंटीलेटर की कीमत पर खरीद की है। उन्होंने कहा कि अज्ञात पत्र झूठ और गुमराह करने वाला है और तथ्यों पर आधारित नहीं है।

सीएम ने सैनिटाइजर मामले को लेकर कहा कि इस संबंध में सरकार ने तुरंत जाँच करके एफआईआऱ की और अधिकारियों को निलंबित करके चार्जशीट भी किया। साथ ही ऑडियो वाले मामले में भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी करप्शन करेगा तो बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही झूठे आरोप लगाकर राजनीति करने वालों को भी करारा जवाब दिया जाएगा।

ज़हर से बंदर मारने वाले हिमाचल में हथिनी की मौत पर हाहाकार

आशीष भरमौरिया।। कल सुबह केरल की हथिनी के बारे में पढ़ा तो उसी समय अंदाज़ा हो गया था कि अब सोशल मीडिया पर संवेदना की बाढ़ आ जाएगी। दोपहर होते-होते केरल की हथिनी पर खबरों और कार्टूनों की बाढ़ सी आ गई थी। देश के सबसे साक्षर राज्य केरल में हथिनी को जो कराह उठी, वो अभी कुछ दिन और गूंजती रहेगी और साथ ही इंसान की झूठी संवेदनाएँ भी।

इस दुखद घटना को लेकर हिमाचलवासियों ने भी जमकर केरल को कोसना शुरू कर दिया। ये सोचे बगैर कि देवभूमि में बंदरों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए हम इन उत्पातियों को ठीक वैसे ही जहर देकर मार रहे हैं, जैसे किसी ने शरारत या जानबूझकर हथिनी के साथ किया.

हाल ही में सरकार ने एक बार फिर बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए उन्हें वर्मिन घोषित करवा दिया है। ये कहते हुए कि ये फसलों और इंसानों के लिए हानिकारक हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। अब तक कई सरकारें इस तरह की योजनाएँ ला चुकी है और इस काम में करोड़ों खर्च हो गए। कुछ लोगों ने नोट भी खूब कमाए लेकिन बंदरों की संख्या कम नहीं हुई।

सरकार योजनाओं का एलान करे या न करे, गाँवों में आज भी बंदर खूब मारे जा रहे हैं। जानते हैं कैसे? बड़े ही दर्दनाक ढंग से। रोटियों और आटे में ज़हर रखा जा रहा है। जैसे ही भूखे बंदर इन रोटियों को खाते हैं, उनका कलेजा फट जाता है। वे उस हथिनी की तरह ही पानी की तलाश में निकलते हैं जो मुँह में धमाका होने के बाद नदी में घुस गई थी। लेकिन ये बंदर जैसे ही पानी पीते हैं, कुछ ही पलों के अंदर मर जाते हैं।

इसका एक वीडियो देखा था जिसने मुझे परेशान करके रख दिया था। एक बंदरिया को ज़हर दिया गया था। उसके मुँह से खून निकल रहा था। वह निढाल थी मगर उसके सीने से चिपका बच्चा माँ को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। अगर हिम्मत हो, तभी यहां क्लिक करके आगे का वीडियो देखें

यह सच है कि हिमाचल में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां लोगों ने खेती करना छोड़ दिया क्योंकि बंदर सब कुछ उजाड़ देते थे। मैंने भी बंदरों का आतंक देखा और महसूस किया है। मैं किसान नहीं हूँ तो हो सकता है कि फसल बर्बाद होने के दर्द को उस तरह से महसूस नहीं कर सकता जैसा किसान करते हैं। हो सकता है वे कहें कि उन्हें मजबूरी में ये कदम उठाना पड़ता है। मगर मेरा सवाल ये है कि इंसान जानवरों की जान को इतना सस्ता कैसे समझ लेता है कि उनकी हत्या ही कर डालता है?

आज एक वायरस आया तो डर के मारे इंसान को घर में क़ैद होना पड़ा। कोरोना के हमारे जीने का तरीक़ा बदल दिया तो हमें बड़ी परेशानी हो रही है। वो भी तब, जब हम सबसे समझदार जीव हैं और जानते हैं कि इस वायरस से कैसे बचा जा सकता है, कैसे इसके रहते हुए भी सावधानी से हम अपनी रूटीन पर लौट सकते हैं। मगर हम इंसानों ने जो दुनिया की ऐसी-तैसी कर दी है, हर जगह घुसपैठ कर दी है। अपनी ज़रूरतों से ज़्यादा अपनी लग्ज़री, अपनी सुविधाओं के लिए हमने धरती का स्वरूप बदलकर रख दिया है। फिर इन बदले हुए हालात से परेशान हुए जब जंगली जीव सिर्फ़ अपना पेट भरने के लिए भटकते हैं तो हम उनकी भी जान लेने पर आमादा हो जाते हैं।

केरल की साक्षरता पर सवाल उठाने वालों को बता दूं कि जरा साक्षऱ और शिक्षित होने के बीच का फर्क पढ़ लें। हिमाचल भी साक्षरता दर के हिसाब से देश के शीर्ष प्रदेशों में है। मगर केरल को लेकर टिप्पणी करने और हथिनी के प्रति संवेदना दिखाने से पहले एक बार आईना देख लें। हम उन्हीं लोगों के बराबर खड़े मिलेंगे। वरना सरकारें भी बदरों को मारने की जगह किसी और विकल्प पर विचार करती।

और अगर संवेदना हथिनी के प्रेगनेंट होने को लेकर ज़्यादा है तो मत भूलिए कि जिस बंदरिया को ज़हर दिया जाता है, जिस मादा सुअर को मारा जाता है, वो भी प्रेगनेंट हो सकती हैं। फ़र्क़ इतना है कि उनका कोई पोस्टमॉर्टम नहीं करता तो ये बात पता नहीं चल पाती। बेहतर होगा कि हम अपनी मरी हुए संवेदनाओं का पोस्टमॉर्टम करें कि क्यों हम इंसानों और अन्य जीवों की जान में भेद करने लगे हैं।

(लेखक पत्रकार हैं और हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले से ताल्लुक़ रखते हैं।)

PWD महकमा रसूखदार मंत्री को मिलने के कयासों से ठेकेदार परेशान

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद ये क़यास लगाए जाने लगे हैं कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कई लिस्टें शेयर की जाने लगी हैं जिनमें न सिर्फ़ नए मंत्रियों के नाम लिखे जा रहे हैं बल्कि ये भी बताया जा रहा है कि पहले से मौजूद मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं।

ऐसी ही एक लिस्ट ने हिमाचल प्रदेश में PWD के लिए काम करने वाले ठेकेदारों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल इस लिस्ट में दावा किया गया है कि लोक निर्माण विभाग को एक ऐसे मंत्री को सौंपा जा सकता है जो पिछले कुछ समय से अपने सगे-संबंधियों को खुलेआम लाभ पहुंचाने के आरोपों से घिरे है। अभी यह महकमा सीएम के पास ही है।

मंत्री जी पर आरोप ये भी है कि उन्होंने अपने एक करीबी रिश्तेदार को लाभ पहुँचाने के लिए PWD के सर्कल तक बदलवा दिए और बाकी समय अन्य जगहों में ठेके लेने वाला उनके रिश्तेदार अब उन्हीं के चुनावक्षेत्र में सक्रिय है। यही नहीं, अब अगर उस सर्कल में कोई और ठेकेदार टेंडर डालता है तो उसे परेशान किया जाता है। अगर टेंडर किसी और ठेकेदार को मिले तो मंत्री के करीबियों की ओर से उनपर दबाव बनाया जाता है। ऐसे में चिंता ये है कि जब वही PWD मंत्री हो जाएंगे तो क्या होगा।

इस मामले को लेकर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है क्योंकि मंत्री पर पहले भी विभिन्न बातों को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं और उनके परिजनों पर भी सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मगर मंत्री जी पर आरोपों का फ़र्क़ नहीं पड़ता और तुरंत उन्हें ऊपर से क्लीन चिट भी मिल जाया करती है। यही नहीं, मंत्री जी के रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी अधिकारी नियमों तक को बदल देते हैं और मीडिया में भी ख़बरें प्रकाशित नहीं होतीं।

‘तगड़ा मारे भी और रोने भी न दे’ की स्थिति में फँसे ठेकेदारों को डर है कि अगर PWD विभाग इन्हीं मंत्री जी को मिला तो सारे के सारे ठेके न सिर्फ उनके चहेतों को जाएंगे और अगर कोई ठेका किसी और मिला तो उसपर दबाव बनाया जाएगा। फिलहाल वे यही दुआ कर रहे हैं कि भले ही ये महकमा सीएम के पास रहे और क्वॉलिटी कंट्रोल पर और जोर दिया जाए मगर किसी भी हाल में उन मंत्री को न दिया जाए जो खुलेआम परिवारवाद और क्षेत्रवाद में जुटे हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार: हलचल बढ़ी, इन्हें मिल सकती हैं फॉर्च्यूनर*