मंडी।। द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर ने पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह पर जुबानी हमला किया है। जवाहर ठाकुर ने कहा कि कौल सिंह ठाकुर उम्र के हिसाब से मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उन्होंने कौल सिंह ठाकुर को डॉक्टर की सलाह लेने की भी बात कही।
सोमवार को मंडी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जवाहर ठाकुर ने यह बात कही। जवाहर ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद ठाकुर कौल सिंह शेखचिल्लियों वाले सपने देख रहे हैं।
जवाहर ठाकुर ने यह भी कहा कि कौल सिंह खुद को वीरभद्र सिंह के बाद दूसरा विकल्प साबित करने में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही खुद को सबसे वरिष्ठ नेता बताने की कोशिश में भी लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह सपने शेखचिल्लियों वाले हैं, जो कभी पूरे नहीं होंगे।
जवाहर ठाकुर ने यह भी कहा कि कौल सिंह एक ओर खुद मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मंडी उपचुनाव के लिए प्रतिभा सिंह को खुद से बेहतर उम्मीदवार बता रहे हैं।
इसके साथ ही जवाहर ठाकुर ने कौल सिंह ठाकुर को चुनौती भी दे डाली है। जवाहर ठाकुर ने कहा अगर वो 8 बार के विधायक, कई बार के मंत्री और पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं तो उन्हें खुद उपचुनाव में उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कौल सिंह ऐसा करते हैं तो उन्हें यह भी पता चल जाएगा कि 1977 वाला इंजन आज के दौर में चलता है या नहीं।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की गाड़ियों पर लगी फ्लैशर लाइट हटाने की कवायद शुरू हो गई हैं। प्रदेश में जिलों के डीसी, एसपी, एसडीपीओ और एसडीएम के वाहनों पर फ्लैशर लाइट लगी हुई है।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में यह सवाल किया था। अग्निहोत्री ने कहा था कि हिमाचल में रेड लाइट कल्चर खत्म हो गया है, लेकिन अफसरों का बत्तियों का शौक खत्म नहीं हो रहा। उन्होंने सीएम से पूछा था कि किस नियम के तहत अधिकारियों ने अपने वाहनों में लाल-नीली फ्लैशर लाइट लगाई हैं।
इसके जवाब में सीएम ने कहा था कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से किसी को भी गाड़ियों में फ्लैशर लाइट लगाने की अनुमति नहीं है। सीएम ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेने की भी बात कही थी।
इसके बाद जब परिवहन विभाग ने अपनी फाइलों की जांच की तो पाया कि कोरोना की पहली लहर के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एक्ट का हवाला देते हुए जिलों के उपायुक्तों को फ्लैशर लाइट लगाने को लेकर अधिकृत कर दिया गया था। उस दौरान इसके पीछे दलील दी गई थी कि बिना लाइट के लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी करने में दिक्कतें आ रही हैं।
उस दौरान परिवहन विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को यह अधिकार दिया था। इस संबंध में आदेश भी नारी किये गए थे। लेकिन अब विभाग इस आदेश को वापस लेने पर विचार कर रहा है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने रिफाइंड तेल के टेंडर रद्द कर दिए हैं। ऐसे में अब राशनकार्ड धारकों को रिफाइंड तेल के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। प्रति लीटर तेल के रेट अधिक होने के कारण खाद्य आपूर्ति निगम ने यह टेंडर रद्द किया है।
बता दें कि तीन कंपनियों ने इस टेंडर में भाग लिया था। सबसे कम रेट वाली कंपनी ने 153 रुपये प्रति लीटर दाम बताया था। सब्सिडी देने के बाद उपभोक्ताओं को 125 से 130 रुपये में यह तेल मिलना था। जानकारी के अनुसार सरकार उपभोक्ताओं को 110 रुपये प्रति लीटर रिफाइंड तेल देने पर विचार कर रही है। इसी वजह से टेंडर रद्द किया गया है।
खाद्य आपूर्ति निगम ने अब दोबारा कम्पनियों से टेंडर मांगें हैं। अब यह टेंडर 10 दिन बाद होगा। जब तक यह टेंडर नहीं हो जाता, तब तक राशनकार्ड उपभोक्ताओं को दो लीटर सरसों तेल ही मिलता रहेगा।
इस बारे जानकारी देते हुए नागरिक एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेंद्र गर्ग ने बताया कि उपभोक्ताओं को सस्ते दामों में रिफाइंड दिया जाना है। रेट ज़्यादा होने के कारण यह टेंडर रद्द किया गया है। जल्द ही अगले टेंडर के लिए कम्पनियों से आवेदन मांगे जायेंगें।
बता दें कि हिमाचल में साढ़े 18 लाख उपभोक्ताओं को सस्ता राशन मिलता है। इसमें आटा और चावल केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जबकि तेल, दालें, चीनी और नमक राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू हो गया है। सीजन के शुरुआती दौर में ही सरकारी एजेंसी मार्केटिंग बोर्ड के कर्मचारियों पर प्रवेश द्वारों पर लगे नाकों में स्थानीय बागवानों से अवैध वसूली करने के आरोप लगे हैं।
इस संबंध में स्थानीय प्रतिनिधियों और मार्केटिंग बोर्ड के पास शिकायतें भी पहुंच रही हैं। आरोप हैं कि एजेंसी के कर्मचारी शिमला के शोघी और सोलन के परवाणू में प्रवेश द्वारों पर लगे नाकों में स्थानीय बागवानों से प्रति पेटी तीन रुपये अवैध वसूली कर रहे हैं।
बता दें कि इन नाकों पर बाहरी राज्यों के कारोबारियों से तीन रुपये प्रति सेब पेटी मार्केट फीस ली जाती है। लेकिन एपीएमसी कर्मचारियों पर आरोप है कि वे स्थानीय बागवानों से भी वसूली कर रहे हैं।
सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने भी 2019 में विधानसभा में यह मामला उठाया था। सरकार के निर्देशों के बाद 2020 में अवैध वसूली बंद भी हुई थी। लेकिन अब फिर आरोप लगे हैं कि इस साल फिर से अवैध वसूली की जा रही है।
इस बारे शिमला-किन्नौर विपणन समिति के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि विपणन समिति किसी भी प्रकार का टैक्स वसूल नहीं करती है। कोई कर्मचारी अवैध वसूली कर रहा है तो उसकी पुलिस में शिकायत करें। स्थानीय किसानों-बागवानों को केवल अपने कुछ दस्तावेजों की कॉपी ही दिखानी होती है।
शिमला।। मौसम विभाग ने प्रदेश के सात जिलों में 12 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। वहीं, 14 अगस्त तक इस क्षेत्र में बारिश की भी भविष्यवाणी की है। इन सात जिलों में ऊना, हमीरपुर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिले शामिल हैं।
इस समय राज्य में कुल नौ सड़कें बंद हैं, जबकि सात जलापूर्ति योजनाएं बाधित हैं। पिछले 24 घंटों में हमीरपुर और शिमला में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो मौतें हुई हैं। ऐसे में राज्य में बारिश से संबंधित घटनाओं के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 232 हो गई है। कुल 11 लोग अभी भी लापता हैं।
अगर राज्य में तापमान की बात करें तो न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया। केलांग में रात का सबसे ठंडा तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि ऊना में सबसे अधिक तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
शिमला।। कुल्लू में थप्पड़ प्रकरण के बाद सस्पेंड एसपी गौरव सिंह और सीएम के पीएसओ रहे बलवंत सिंह का सस्पेंशन खत्म हो गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक, इन दोनों को नियुक्ति मिलने तक मुख्यालय में तैनात रहना होगा।
23 जून को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दौरान कुल्लू के एसपी रहे गौरव सिंह और अडिशनल एसपी सीएम सिक्यॉरिटी बृजेश सूद के बीच कहासुनी हो गई थी। इसके बाद गौरव ने बृजेश पर हाथ उठा दिया था। इसके तुरंत बाद सीएम के पीएसओ बलवंत सिंह गौरव सिंह से भिड़ गए थे और वीडियो में उन्हें लात मारते नजर आए थे।
इसके बाद पुलिस विभाग ने प्रारंभिक जांच के आधार पर गौरव सिंह, बृजेश सूद और बलवंत को सस्पेंड कर दिया था। बाद में पाा गया कि बृजेश सूद की गलती नहीं थी तो उन्हें फिर से सीएम सुरक्षा का जिम्मा दे दिया गया था। अब गौरव सिंह से घटना को लेर लिखित जवाब मांगा गया है। आगे की कार्रवाई उस जवा पर निर्भर करेगी।
शिमला।। सीएम जयराम ठाकुर के आश्वासन के बाद अब प्रदेश के सैंकड़ों करुणामूलक आश्रितों की उम्मीद जगी है। विधानसभा में सीएम ने कहा है कि प्रदेश के पात्र लोगों को एक साथ करुणामूलक नौकरी मिलेगी।
विधानसभा के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने करुणामूलक आधार पर नियुक्तियों को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में सीएम ने कहा इसके लिए एक कमेटी गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव द्वारा की जाएगी। इसके अलावा सीएम ने पांच प्रतिशत कोटे को खत्म करने की भी बात कही है। सीएम ने कहा कि यह कमेटी इस कोटे को खत्म करने का रास्ता निकलेगी।
सीएम ने कहा कि कमेटी इस बात के लिए भी सरकार को सिफारिश करेगी कि सबको एकसाथ नौकरी मिल सके। सीएम ने इस बात की भी जानकारी दी कि सरकार ने सात मार्च, 2019 की रिवाइज़्ड पॉलिसी में भी बदलाव किया था। पहले 50 साल की उम्र में मृत्यु होने पर ही नौकरी देने का प्रावधान था, जिसे सरकार ने अब बढ़ा दिया है।
अब अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु रिटायरमेंट के दो दिन पहले भी हो जाती है, तो तब भी उनके परिवार को नौकरी दी जाएगी। इसके साथ करुणामूलक नौकरी के लिए आय सीमा को भी सरकार ने अढ़ाई लाख तक कर दिया है।
सीएम के इस जवाब पर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने पटलवार भी किया। अग्निहोत्री ने कहा कि जब किसी मामले को लटकाना हो, सरकार तब कमेटियां बनाती है। इस समय करुणामूलक के तहत बहुत से पात्र लोग ऐसे हैं जिनकी सरकारी नौकरी की उम्र निकल गई है। नेता प्रतिपक्ष के अलावा कांग्रेस के विधायक रामलाल ठाकुर ने भी आरोप लगाया कि करुणामूलक नौकरी समय पर नहीं दी जाती है। इस पर सीएम ने कहा कि जनवरी, 2018 से 31 जनवरी, 2021 तक करुणामूलक के आधार पर प्रदेश के विभिन्न विभागों में कुल 706 लोगों को नौकरियां दी गई हैं।
कांगड़ा।। ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला शनिवार को नगर परिषद के कार्यालय में मनोनीत पार्षदों के शपथ ग्रहण में पहुंचे थे। जैसे ही विधायक कार्यालय में पहुंचे तो कार्यालय में चरमराई व्यवस्थाओं को देख कर आग बबूला हो गए। कार्यालय के एक कमरे में चारपाई लगी हुई थी। फिर क्या था विधायक ने जमकर कर्मचारियों पर गुस्सा निकाला। विधायक ने बाकी के कमरे भी खुद जाकर देखे।
इससे पहले रमेश धवाला और उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह के बीच विधानसभा में तीखी नोकझोंक देखने को मिली है। धवाला ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि ये विकास से जुड़ा मुद्दा है। मुझे उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे, क्योंकि आप मेरे उत्तराधिकारी हैं। धवाला ने सदन में मामला उठाया कि किस प्रकार कानूनी तरीके से हो रहे खनन कार्यों में अड़चनें आ रही हैं।
अपने सम्बोधन के अंत में धवाला ने उद्योग मंत्री को यह भी कहा मैं आपके बड़े भाई की तरह हूँ, आप मेरी बात का बुरा न मानें। मगर इसमें सुधार करें। अगर आपने सुधार नहीं किया तो मैं संघर्षशील हूं। जिसके जवाब में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि मैं मानता हूं आप ईमानदार हैं और संघर्षशील भी हैं। लेकिन मैं भी यहां आया हूँ और मैंने भी ईमानदारी से काम किया है। मैं भी संघर्षशील हूं। 23 साल मुझे राजनीति में हो चुके हैं। आपके आशीर्वाद से मुझे पहली बार मौका मिला है। आपने मना किया तभी मैं मंत्री बना, नहीं तो आप बनते, क्योंकि हमारा क्षेत्र एक ही है।
धवाला ने कहा कि पंचायतों में सीमेंट सेट हो रहा है। पंचायत वालों के फोन आ रहे हैं। डेढ़ महीने से बजरी-रेत नहीं है। ऐसे में लेबर क्या करेगी। मनरेगा में लगाने की मांग लेकर मेरे पास भी लोग आते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब से चोरी का माल आ रहा है। इससे सरकार को क्या मिल रहा है।
जवाब में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि मैनुअल लोडिंग के बजाय मेकेनिकल लोडिंग की हम अधिसूचना जारी कर रहे हैं। नूरपुर और इंदौरा में राज्य प्रदूषण बोर्ड की कोई अलग शर्त नहीं है। बरसात में क्रशर चलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
बजट सत्र में भी घेरी थी सरकार
इससे पहले विधायक रमेश धवाला मार्च महीने में हुए बजट सत्र के दौरान भी अपनी सरकार को घेर चुके हैं। उस दौरान धवाला ने कहा था कि कई विभागों में अफसरों की फौज है, लेकिन कर्मचारियों की भारी कमी है। उन्होंने एचआरटीसी का उदाहरण देते हुए कहा था कि निगम में करीब 50 आरएम हैं, लेकिन ड्राइवर और कंडक्टर के पद भारी संख्या में खाली हैं। यही सबसे बड़ा कारण है कि आज प्रदेश में कई निगम और बोर्ड घाटे में चल रहे हैं। अफसरों की फौज खड़ी हो गई है, निगम-बोर्ड घाटे में हैं। इनके लिए काम ढूंढना चाहिए।
बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए धवाला ने अफसरशाही पर नकेल कसने और फिजूलखर्ची पर भी रोक लगाने की भी मांग की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में नेताओं के अलावा अधिकारियों द्वारा गाड़ियों के फिजूल इस्तेमाल पर भी लगाम लगाने की जरूरत है। गाड़ियों की माइलेज कागजों में कुछ और भरी जाती है, जबकि होती कुछ और है।
इससे पहले 2018 में भी विधानसभा सत्र के दौरान विधायक रमेश धवाला और मंत्री सरवीण चौधरी के बीच बुढ़ापा पेंशन को लेकर नोकझोंक देखने को मिली थी।
धवाला की मंत्री बनने की इच्छा
यूँ तो रमेश धवाला तीन बार प्रदेश कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। लेकिन अभी भी मंत्री बनने की ख्वाहिश भी रखते हैं। धवाला का मंत्री बनने का दर्द 2019 में उस समय छलका था जब प्रदेश कैबिनेट के दो मंत्रियों अनिल शर्मा और किशन कपूर ने इस्तीफा दिया था। उस दौरान भाजपा नेता कैबिनेट में खाली इन दो पदों के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। भाजपा के विधायक मंत्रीपद के लिए अपनी-अपनी लॉबिंग में जुटे हुए थे। उस दौरान धवाला ने कहा था कि मंत्री बनने की इच्छा मेरी भी है, वैसे कईयों ने नए कोट सिलवा लिए हैं। अब ये सीएम जयराम ठाकुर के हाथ में है कि वह किसके नाम पर मुहर लगाते हैं।
उस दौरान धर्मशाला में चल रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान धवाला ने यह भी कहा था कि मंत्री बनने की दौड़ में एक नहीं, अनेक नेता भाग रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं और अपना काम पूरी निष्ठा से किया है। वह अपने काम के प्रति ईमानदार हैं। पर अब दूल्हा कैसे कह सकता है कि मेरी शादी करवा दो। इसी दौरान, वह बातों-बातों में कह गए थे कि कहीं ना कहीं उनके मन में भी मंत्री बनने की इच्छा है।
भाजपा से खफा होकर निर्दलीय लड़ा चुनाव
रमेश धवाला यूं तो जीवन भर बीजेपी के नेता रहे। लेकिन 1998 के विधानसभा चुनावों में जब ज्वालामुखी सीट से टिकट मांगा तो पार्टी ने नहीं दिया। जिसके बाद चुनाव में निर्दलीय उतरे और जीत भी गए। सरकार बनाने के लिए 33 विधायक चाहिए थे। कांग्रेस ने धवाला को अपने साथ लेकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लेकिन धवाला ने पाला बदल दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। यही वो समय था जब वीरभद्र सिंह को मात्र दो हफ़्तों में ही सीएम पद छोड़ना पड़ा था।
कांग्रेस नेताओं पर लगाया था किडनैपिंग का आरोप
उस दौरान धवाला ने कांग्रेस नेताओं पर उन्हें जबरदस्ती हॉली लॉज ले जाने का आरोप लगाया था। धवाला ने कहा था कि 22 मार्च 1998 को शिमला के पीटरहॉफ में रात 9.40 बजे तत्कालीन भाजपा प्रदेश प्रभारी नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा-हिविकां गठबंधन को समर्थन देने का निर्णय हुआ। इससे पहले मुझे पार्टी ने ज्वालामुखी सीट से भाजपा टिकट नहीं दिया था। मैंने लोगों की मांग पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। चुनाव जीतने के बाद चार मार्च को चंडीगढ़ होते हुए शिमला जा रहा था कि कालका के पास सरकारी अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं ने मुझे रोक लिया और जबरन होलीलॉज शिमला लेकर आ गए।
धवाला ने कहा था कि रात को प्रदेश हाईकोर्ट के निकट सिली चौक का वह मंजर मैं आज तक नहीं भूला हूं जब मेरे और समर्थकों के साथ हाथापाई हुई थी। हॉली लॉज पहुंचने के बाद कांग्रेस को समर्थन देने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था। उस समय मेरे राजनीतिक आदर्श शांता कुमार केंद्र सरकार में मंत्री थे। उनका पत्र आया और मुझसे भाजपा को समर्थन देने की बात हुई। मैं तब भी भाजपाई था और आज तक भाजपा मेरी पार्टी है।
विधानसभा में कपड़े उतार कर दिखाए थे पीठ पर निशान
विधानसभा में रमेश धवाला ने कपड़े उतार कर पीठ पर निशान दिखाए थे। उनका आरोप था कि कांग्रेस नेताओं द्वारा उनसे मारपीट कर जबरन समर्थन लिया गया था। धवाला वीरभद्र सरकार में पांच मार्च को कैबिनेट मंत्री बने थे। उसके बाद 24 मार्च को धूमल सरकार में भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी।
कुल्लू।। आगामी कैबिनेट बैठक में स्कूलों के संचालन पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस बात की जानकारी दी है।
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने अपने कुल्लू दौरे के दौरान कहा अभिभावकों की मांग थी की स्कूल खोले जाएं और उन्हीं की मांग पर सरकार ने स्कूल खोले हैं। लेकिन कोरोना के मामलों में हो रही बढ़ोतरी सरकार के लिए चिंता का विषय है। कैबिनेट की बैठक में स्कूलों के संचालन पर फैसला किया जाएगा।
बता दें कि 10 अगस्त को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार कई अहम निर्णय ले सकती है। ऐसे में शिक्षा मंत्री के बयान के बाद इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सरकार स्कूल खोलने के अपने पिछले निर्णय में बदलाव कर सकती है।
प्रदेश में 2 अगस्त से कोरोना नियमों को ध्यान में रखते हुए स्कूल खोले गए थे। लेकिन कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बीते दिनों में कई बच्चे व अध्यापक संक्रमित पाए गए हैं। जो कहीं ना कहीं सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि 10 अगस्त को होने वाली कैबिनेट बैठक में स्कूलों के संचालन को लेकर फैसले के लिए विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रयास करेगी कि किस प्रकार स्कूल बंद किये बिना ही छात्रों की पढ़ाई को जारी रखा जाए और उन्हें कोरोना के खतरे से भी बचाया जाए।
मंडी।। मंडी जिले के द्रंग क्षेत्र की रहने वाली विवाहिता अब अपने पति से तलाक लेकर वापस अपने मूल हिंदू धर्म में लौटना चाहती है। इसके लिए विवाहिता ने एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री को शिकायत पत्र भी सौंपा है।
विवाहिता लता देवी ने सात साल पहले जम्मू-कश्मीर के पुंछ में रहने वाले शब्बीर अहमद से शादी की थी। जिसके बाद उसने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया और शाजिया बन गई। अब युवती ने अपने पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के साथ ही कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
युवती ने इसके साथ ही महिला थाने में भी शिकायत दर्ज करवाई है और परिवार के लिए पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है। पुलिस को दी शिकायत में युवती ने लिखा है कि नाबालिग रहते 2014 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके का रहने वाला एक शख्स उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। 18 वर्ष की आयु में बालिग होने पर उसकी मर्जी के खिलाफ कथित तौर पर उसका धर्म परिवर्तन करवाया और उसके बाद उससे शादी कर ली।
पीड़िता का यह भी कहना है जब उसने अपने हिंदू धर्म में लौटने के बारे में पति को बताया तो उसने उससे मारपीट की। इसके साथ ही पीड़िता ने उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां देने का भी आरोप लगाया है। युवती नवंबर 2020 में पति का घर छोड़ कर मायके आकर रहने लगी थी। युवती का यह भी कहना है कि इसके बाद आरोपी यहाँ पहुंचकर उसे डराने धमकाने लगा।
युवती की दो बहनें हैं। दोनों बद्दी में नौकरी करती हैं। युवती का कहना है वो भी नौकरी की तलाश में जब बद्दी में अपनी बहनों के पास गई, तो उसके पति ने वहाँ पहुंचकर भी उन्हें धमकाया। पीड़िता का कहना है कि उसे और उसके परिवार को जान का खतरा है। उसने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।
इस बारे एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आगामी कार्रवाई कर रही है।