एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। शिमला के कोटखाई में राज्य सरकार सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला ले लिया है। इससे लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है मगर आठ साल की एक और नन्ही बच्ची की आत्मा भी इंसाफ मांग रही है। इस बच्ची को मणिकर्ण के नजदीक बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार दिया गया था।
इस मामले में कुछ दिन तक सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए, लेकिन तकरीबन अढ़ाई महीने बीत जाने के बावजूद अपराधी के बारे मे कोई पता नहीं चला है। सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को गुनहगार की परछाई तो मिल गई है, लेकिन उसके गिरेबान तक खाकी नहीं पहुंची है।
यूएसए की कंपनी को सीसीटीवी फुटेज भेजी गई है, ताकि धुंधली तस्वीर से परत हट सके। गौरतलब है कि 28 अप्रैल को 8 साल की मासूम बच्ची को बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार दिया गया था। इसके बाद लाश को ब्या नदी के किनारे फेंक दिया गया था। पुलिस की जांच यहां तक पहुंच चुकी है कि जब गुनहगार बच्ची को बहला-फुसला कर अपने साथ ले जा रहा था तो उस समय एक ओर बच्ची भी उनके साथ थी।
यह मामला प्रवासी लोगों से जुड़ा हुआ है, जो शनि दान मांग कर अपना गुजर बसर करते हैं। संभवत: गुनाहगार भी इसी कबीले का है। उधर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एनएस नेगी का कहना है कि पुलिस इस मामले पर गहनता से जांच कर रही है। उन्होंने माना कि यूएसए की कंपनी को सीसी फुटेज भेजी गई है, ताकि आरोपी की सही तस्वीर सामने आ सके।
(यह समाचार MBM News Network से सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)
शिमला।। कोटखाई में हुए जघन्य अपराध को लेकर अब ऐसी जानकारी सामने आई है जो विचलित करती है। एक अखबार के संवाददाता ने आरोपियों से उस वक्त बातचीत की जब उन आरोपियों का मेडिकल किया जा रहा था। अखबार का कहना है कि एक नेपाली आरोपी ने हंसते हुए कहा- हां, मैंने रेप किया है।
पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच पांच आरोपियों को मेडिकल के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल लाया गया। एएसपी और डीएसपी समेत पुलिस के करीब 40 जवान यहां पहरा कर रहे थे। जिस जगह पर आरोपियों के शरीर की जांच की जा रही थी, वहां पर हिंदी अखबार अमर उजाला के संवाददाता भी थे। इस दौरान आरोपी से बातचीत हुई और उशके अंश को अखबार ने पहले पन्ने पर जगह दी है(यहां क्लिक करें)। बातचीत कुछ इस तरह से हुई-
क्या किया तैने?
आरोपी: सर जी, मैंने कुछ नहीं किया, मैं तो नपुंसक हूंं।
झूठ बोलता है?
इतने में आरोपी की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी ने बीच में ही कहा- ये सच बोल रहा है इससे कुछ नहीं होता।
जब लड़की को मार रहे थे तो तू बचाने क्यों नहीं गया? आरोपी: मैं बोलता रहा, भाई जी मत मारो, मत मारो पर ये लाल टी शर्ट वाला नहीं माना (अपने साथ की तरफ इशारा किया)।
अंदर चार लोग बैठे हैं, क्या सभी ने रेप किया? आरोपी: अंदर जो कोने पर बैठा है, जो आगे से गंजा है, इसने भी कुछ नहीं किया।
ये गढ़वाल का है इसलिए बोल रहा है ऐसा? आरोपी: कसम से
आशीष कहां है? आरोपी चुप रहा। पुलिस कर्मी बोला- उसे भी मेडिकल के लिए लाया जा रहा हैष
नेपाली से पूछा गया- तैने रेप किया? नेपाली हंसते हुए बोला- हां मैंने रेप किया।
(वहां मौजूद एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने इस बदतमीजी पर उसे लताड़ते हुए कहा- चल नीचे बैठ)
शिमला।। कोटखाई गैंगरेप और हत्या मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सीबीआई से जांच करवाने का फैसला किया है। मामले में लोगों की नाराजगी और पुलिस जांच को लेकर अविश्वास जताए जाने के बाद प्रदर्शन के बाद सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
दरअसल स्थानीय लोग यह आरोप लगा रहे थे कि पुलिस इस मामले में हाईप्रोफाइल लोगों को बचा रीह है। शुक्रवार को सुबह से ही ठियोग और कोटखाई समेत अन्य जगहों पर लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इससे सरकार पर दबाव बढ़ गया था। अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी।
शिमला।। भले ही पुलिस ने रेप ऐंड मर्डर केस को सुलझाने का दावा किया है मगर हिंदी अखबार दैनिक जागरण का कहना है कि विक्टिम के माता-पिता ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं (यहां क्लिक करके पढ़ें)। अखबार के मुताबिक पिता ने कहा है- मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मलिा है। मामले को दबाया गया है। जो आरोपी पकड़े गए हैं, उनकी संलिप्तता पर हमें संदेह है। हम जांच से संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले में प्रदेश सरकार की कोई भी एजेंसी जांच न करे। अब हम इस केस की सीबीआई जांच की मांग करेंगे।
विक्टिम के पिता का कहना है हम अपनी बेटी को इंसाफ दिलवाने के लिए मरते दम तक लड़ाई लड़ेंगे। वहीं मृतका की माता ने कहा कि मैंने अपने कलेजे का टुकड़ा खोया है। उन्होंने भी कहा कि पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है औऱ हम शांत बैठने वाले नहीं हैं। हम कोर्ट में भी लड़ाई लड़ेंगे। मां का कहना है कि जैसे मेरी बेटी को मारा है, उसी तरह असली आरोपियों को मारा जाना चाहिए।
इस बीच मृतक छात्रा के जीजा ने कहा, पुलिस ने इस मामले को दबाया है। अब लड़ाई सीबीआई से इस केस की जांच करवाने के लिए लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि असली आरोपी पैसे वाले और रसूखदार हैं इसलिए पुलिस और राजनीतिज्ञ इस मामले में उन्हें बचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल और गढ़वाल मूल के व्यक्ति इतने होशियार नहीं हो सकते कि घटना के बाद भी गांव में डेरा जमाए रखे।
शिमला।। शिमला प्रकरण को लेकर जहां ज्यादातर अखबारों ने पुलिस द्वारा मामले का खुलासा करने की खबर को प्रमुखता दी है, वहीं कुछ अखबारों ने पुलिस की थ्योरी पर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया है। इस मामले में ‘अमर उजाला’ अखबार उन चुनिंदा मीडिया आउटलेट्स में शामिल है, जिन्होंने वैसे ही निर्भीक रिपोर्टिंग की है, जैसी होशियार सिंह केस में की थी। अखबार ने ‘चंद घंटों में पलट गई पुलिस की कहानी’ शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है। इसमें अखबार ने पुलिस द्वारा दी गई थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। पेज नंबर 2 पर छपी रिपोर्ट (यहां क्लिक करके पढ़ें पूरी खबर) में नक्शा भी दिया गया है जिसमें बताया गया है कि घटनास्थल, स्कूल और घर आदि के बीच में कितनी दूरी है। इस रिपोर्ट में अखबार ने पुलिस द्वारा बताई गई थ्योरी की पड़ताल की है।
रिपोर्ट में लिखा गया है कि गुड़िया प्रकरण पर पुलिस की थ्योरी चंद घंटों में पलटती नजर आई। पहले स्थानीय निवासी आशीष चौहान उर्फ आशु की गिरफ्तारी दिखाई गई। गुरुवार सुबह पुलिस ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया था, उसमें आशु की गिरफ्तारी की बात ही गई थी। मगर 2 घंटों के अंदर पांच अन्य लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। अमर उजाला लिखता है, ‘अब सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस के पास जानकारी थी कि आशु मुख्य आरोपी नहीं है तो सुबह 11 बजे तक उसी ही गिरफ्तार क्यों दिखाया गया। केस में अगर 55 घंटों की तफ्तीश थी और पुलिस सही दिशा में काम कर रही थी तो सभी आरोपियों की गिरफ्तारी एकसाथ क्यों नहीं दिखाई गई? सिर्फ आशु की गिरफ्तारी का खुलासा करने की जल्दी क्या थी? क्या तब तक नेपाली थ्योरी सामने नहीं आई थी?’
आगे अखबार लिखता है- पुलिस की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी सवालों के घेरे में है जबकि कन्फेशन के अलावा कोई और ठोस सबूत उशके हाथ नहीं लगा है। आगे एक अहम बात लिखी गई है- रसूखदार लोगों को छोड़ पुलिस नेपाली मूल के लोगों को आरोपी बनाएगी, इसकी आशंका शुरू से व्यक्त की जा रही थी। आरोपी आशीष चौहान की गिरफ्तारी की खबर मीडिया में फ्लैश होने के बाद राज्य पुलिस मानकर चल रही थी कि मामले में वह शामिल है और इसकी पीछे उसकी हिस्ट्री बताई जा रही थी। उसे नशे का आदी कहा जा रहा था।
जिन सवालों का जवाब नहीं मिला है
अमर उजाला ने 6 ऐसे सवालों का जिक्र किया है जो अनुत्तरित हैं। ये इस तरह से हैं-
1. जब चार जुलाई को गुड़िया की मौत हो गई थी तो 6 जुलाई तक खूंखार जानवरों वाले जंगल में उसकी लाश कैसे बची रही?
2. शव के साथ अगर उसके कपड़े रखे गए थे वे इससे पहले हुई बारिश के बावजूद सही सलामत कैसे थे?
3. अगर दो दिन तक लाश वहीं पड़ी रही तो उसके हाथ पैर और पूरा शरीर बिल्कुल साफ-सुथरा कैसे था?
4. दुराचार के दौरान आत्मरक्षा की कोशिश में उसके हाथ औऱ शरीर में मिट्टी क्यों नहीं लगी?
5. इस मामले में जो दो नेपाली पकड़े गए हैं, उनके डेरे से घटनास्थल सिर्फ 200 मीटर दूर है। सवाल उठता है कि उन्होंने ये हत्या की होती तो वे वहां शव क्यों फेंकते?
6. आमतौर पर जघन्य हत्या करने के बाद नेपाली भाग जाते हैं (क्योंकि नेपाल के साथ प्रत्यर्पण संधि न होने से उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है)। लेकिन इस मामले में वे क्यों नहीं भागे?
लोग भी उठा रहे हैं सवाल
बेशक पुलिस इस मामले में आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रही है मगर लोग इस जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अमर उजाला अखबार लिखता है कि मदद सेवा ट्रस्ट की प्रमुख तनुजा थापटा ने कुश सवाल दागे हैं और सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने पुलिस पर कई सवाल उठाए हैं। जैसे कि अगल रेप जंगल में हुआ तो उसकी आवाज किसी ने सुनी क्यों नहीं। यदि नेपाली मूल के लोग शामिल थे तो वे भागे क्यों नहीं, क्या वे पुलिस के आने का इंतजार कर रहे थे? अखबार लिखता है कि आज ठियोग में न्याय की मांग को लेकर चक्का जाम होगा।
(13 जुलाई, 2017 को इन हिमाचल पर प्रकाशित लेख। उस समय तक जहूर जैदी के नेतृत्व वाली एसआईटी मामले को सुलझाने का दावा कर चुकी थी मगर उसकी थ्योरी पर कई सवाल उठ रहे थे। इसी बीच सीबीआई जांच के आदेश हो गए और पत्रकार नरेंद्र चौहान की पोस्ट पर आधारित इस लेख के प्रकाशित होने के पांच दिन बाद और सीबीआई जांच शुरू होने के ठीक पहले नेपाल के सूरज की 18 जुलाई, 2017 को पुलिस हिरासत में जान ले ली गई थी।)
शिमला।। शिमला के कोटखाई में हुए रेप ऐंड मर्डर केस में गुरुवार को पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने का दावा किया है। इस मामले में पुलिस के थ्योरी के अलावा हर न्यूज माध्मय पर अनोखी ही कहानी देखने को मिल रही है। कुछ लोग पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े कर रहे हैं, कुछ पुलिस की वाहवाही कर रहे हैं, कुछ कह रहे हैं कि घटनास्थल पर रेप हुआ, कुछ कह रहे हैं कि आरोपी के घर से जुराब मिली, कुछ कह रहे है ंकि लड़की के कपड़े तक नहीं फटे थे, कुछ कह रहे हैं कि लड़की के कपड़े फाड़ दिए गए थे, कुछ कह रहे हैं कि मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश हो रही है, कुछ कर रहे हैं कि आरोपी गरीब हैंं, कुछ कर रहे हैं कि आरोपी रसूखदार हैं…. कुल मिलाकर अजीब हाल बना हुआ है। यह दुखद स्थिति है कि हर कोई मीडिया- चाहे वह टीवी हो, डिजिटल या फिर अखबार। इस मामले में अलग-अलग रिपोर्टिंग करता रहा है। ऐसे में जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
बहरहाल, इन सब बातों को नजरअंदाज करें तो गुरुवार को पुलिस ने कहा कि इस मामले में 29 साल के आशीष चौहान उर्फ आशू को भी गिरफ्तार किया है। लेकिन संभव है कि आशू की बलात्कार में कोई भूमिका न हो। गुरुवार शाम पुलिस महानिदेशक सोमेश गोयल व एसआईटी चीफ जहूर एच जैदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया है। बताया गया कि जब पीड़िता घर की तरफ लौट रही थी तो मुख्य आरोपी राजेंद्र ने उसे पिकअप में लिफ्ट दे दी। इस दौरान बाकी साथी भी साथ थे। कुछ दूर जाने के बाद बच्ची को जंगल में घसीट दिया गया। जहां नशे की हालत में विक्टिम से सामूहिक बलात्कार हुआ।
पुलिस का कहना है कि इसके बाद आरोपियों ने विक्टिम का सिर मिट्टी की तरफ कर मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि विक्टिम की एक सहेली ने उसे लिफ्ट लेते हुए भी देख लिया था। मुख्य आरोपी राजू अपनी पिकअप में एक बगीचे में स्प्रे मशीन छोड़ने जा रहा था। जिसे छोड़ने के बाद ही उसने अपने साथियों के साथ इस घटना को अंजाम दिया। चूूंकि विक्टिम पहले भी राजू से लिफ्ट ले चुकी थी, लिहाजा वह उसे पहचानती थी। संभवत: सामूहिक बलात्कार को अंजाम देने के बाद बच्ची को पहचान छिपाने के मकसद से ही मौत दे दी गई।
बहरहाल तमाम आरोपियों को अदालत में पेश किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आशीष चौहान की भूमिका को लेकर जांच चल रही है। मगर एक पत्रकार नरेंद्र चौहान ने IG हिमाचल के नाम एक पोस्ट लिखी है जिसे खबर लिखे जाने तक 400 से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं। इसमें पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए गए हैं।
पत्रकार नरेंद्र चौहान
नरेंद्र लिखते हैं- जैदी साहब आपकी प्रेस कांफ्रेस के अनुसार गुडिया का बलात्कार पांच लोगों ने उसी जगह किया जहां उस मासूम का शव मिला था। अगर यह कहानी सही है ताे प्रदेशवासियों को यह भी बताऐं कि स्कूल से उस स्पाट की दूरी कितनी है जहां से गुडिया का शव बरामद हुआ था । गुडिया ने अगर गाडी में लिफ्ट ली तो गाडी से स्थान पर पंहुचने में कितना समय लगा होगा।
आगे नरेंद्र ने लिखा है- साहब आप भी अपनी सरकारी गाडी से वहां गए और आपकी कार के पीछे पीछे मैं भी अपनी कार से स्पाट तक पंहुचा । मुझे स्कूल के पास से स्पाट तक पंहुचने में दस मीनट लगे अगर शक है तो मैं दोबारा आपके साथ चलने को तैयार हूं। चार बजे भी अगर गुडिया ने गाडी में लिफ्ट ली तो ज्यादा से ज्यादा आरोपियों के साथ उस स्थान तक पहुचनें में आधा घंटा लगा होगा। चलिए मान लेते हैं पाचं बज गए होगें। तो श्रीमान जी पांच बजे आज कल कितना उजाला होता है यह भी ख्याल करिए। चलिए उजाला था या अंधेरा अगर यह भी मायने नहीं रखता तो जनाब जरा सपाट को फिर से एक बार देख लिजिए फोटो डाल रहा हूं।
आगे नरेंद्र लिखते हैं- सड़क से महज सौ या दो फीट की दूरी पर जहां आप खोज बीन कर रहे है यहां अपराधी इतने खुले व सड़क के करीबी स्थान पर गुडिया का बलात्कार करते? शायद आपने गौर नहीं किया होगा साहब स्पाट पर जब आप छानबीन कर रहे थे तो स्पाट के पास से ही नेपाली मजदूर की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। मतलब स्पाट के नजदीक ही अस्थायी रिहाइश हैं। चलिए आप पुलिस विभाग के तेज तरार कुशाग्र बुद्वि वाले जांच अधिकारी है इस लिए मान लेता हूं कि गुडिया के साथ ज्यादती वहीं हुई और जिस दिन गुडिया लापता हुई उसी रात को उसकी मौत हो गई जैसा कि आपके अनुसार गुडिया की पोर्स्टमाटम रिपोर्ट बताती है। तो कृपा कर यह सपष्ट करने की जहमत उठा दिजीए कि गुडिया के शव को दो दिनों में जंगली जानवरों ने क्यों नहीं नोचा।
पत्रकार ने आगे लिखा है- मंगलवार को जीन तीन लोगों को आप बडे फिल्मी अंदाज में सबसे पहले हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर उडन छू हुए उसकी वजह क्या थी। क्या नेपाली मजदूरों के लिए कोई भी स्थानीय व्यक्ति पुलिस के चंगुल में फंसना चाहेगा । यही नहीं अभी ऐसे कई सवाल है जिनका ज्वाब मिलना लाजमी है आपके लिए भी और हमारे लिए भी । मसलन गुडिया की गुम हुई जुराब कहां है। गुडिया के अंत्रवस्त्र के टुकडे किसने किए इत्यादी । साहब आप दोनों से मैने और मेरे साथियों ने स्पाट पर व विश्राम गृह में भी बात करने की कोशिश की थी लेकिन बाने बात करने का आशवासन देकर हमसे दूरी बनाते हुए गाडी आगे बढा दी ।कोई बात नहीं आप बहुत बडे व जिम्मेवार अधिकारी है। मुझे व मेरे पत्रकार साथियों को इस बात का कोई मलाल नहीं कि आपने हमसे बात नहीं की। हो सकता है आप छानबीन को गोपनीय रखने का प्रयास कर रहे हों। जनाब यह लोकतंत्र है यहां ज्वाब देयी तय है आपकी भी और मेरी भी।
आखिरी हिस्से में नरेंद्र ने लिखा है- हो सकता है मेरी इस पोस्ट के खिलाफ की कानून की कोई धारा मेरे गिरेबान तक पंहुचती हो तो जरूर पंहुचेलेकिन कलम का सिपाही हूं । जब तक गुडिया के हत्या की निष्पक्ष जांच या संतोष जनक परिणाम नहीं मिल जाते मैं सवाल उठाता रहूंगा। यही मेरा काम है । उम्मीद है कि गुडिया को इंसाफ दिलाने की इस जंग में आप हर पहलू को निष्पक्षता व बिना किसी प्रभाव व दबाव में काम करते हुए दूध का दूध पानी का पानी करेंगे। आपने सवालों के ज्वाबों के साथ आपकी आगामी जांच व उनके परिणामों के इंतजार में- नरेंद्र चौहान।
इसके अलावा भी मीडिया के हिस्से में सुगबुगाहट है कि पुलिस की थ्योरी गले से नीचे नहीं उतर रही है और कहीं एक आरोपी को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही है। बहरहाल, ये तो पत्रकार के निजी विचार हैं। मगर अब मामला कोर्ट में तय होगा और इस मामले में DNA टेस्ट की रिपोर्ट भी अहम होगी। इसलिए इंतजार करना होगा कि पुलिस इस केस मेंं किस हद तक सही या गलत है।
(इस लेख के पांच दिन बाद नेपाली युवक सूरज की पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी, जिस मामले में अब कोर्ट ने पुलिस की पूरी जांच टीम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस लेख का मौलिक कॉन्टेंट बरकरार रखा गया है। शुरू और आखिर में italic फॉन्ट में संदर्भ डाला गया है और शीर्षक बदला गया है।)
शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार और धर्मशाला नगर निगम द्वारा बेलारूस की कंपनी स्काईवे टेक्नॉलजी से कुछ महीने पहले करार किया गया था। देश के सबसे बड़े आर्थिक अखबार ‘इकनॉमिक टाइम्स’ ने धर्मशाला स्काईवे प्रॉजेक्ट को लेकर विस्तृत स्टोरी कवर की है और इसपर कई सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि इस डील को लेकर उसी वक्त In Himachal ने कुछ अहम बिंदुओं पर सवाल खड़े किए थे (इस आर्टिकल के आखिर में लिंक दिए हैं)। इसके बाद हरकत में आते हुए विपक्ष ने सरकार से प्रश्न किए थे और धर्मशाला नगर निगम ने कहा था कि डील को लेकर बिना वजह शक पैदा किया जा रहा है। अब इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि इस मामले में कई लूप होल हैं।
इस स्टोरी के मुताबिक बेलारूस की कंपनी को चुनने की अपारदर्शी प्रक्रिया को लेकर हिमाचल सरकार के ही तीन मंत्रियों ने सवाल खड़े किए हैं। यही नहीं, मुख्यमंत्री के सलाहकार टी.जी. नेगी ने इस मामले में अखबार के पत्रकार को शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा से बात करने के लिए कहा मगर अखबार के मुताबिक सुधीर शर्मा ने ईमेल, मेसेज और फोन किए जाने पर भी संपर्क स्थापित नहीं किया। इसके अलावा अखबार ने विशेषज्ञों से बात की है और उन्होंने भी इस प्रॉजेक्ट को लेकर कई तरह की चिंताएं जताई हैं। सबसे खास बात यह कि ET के मुताबिक बेलारूस की कंपनी का प्रतिनिधि संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाया।
नीचे हम ET के आर्टिकल- Doubts raised over Belarus company credential for Rs 250-crore skyway transport project in Dharamshala के अहम हिस्सों का अनुवाद कर रहे हैं। ध्यान दें, हम अपनी तरफ से कोई बात ऐड नहीं कर रहे। सिर्फ हर पैरा के निचोड़ को उसके ऊपर सब-हेड के तौर पर लिख रहे हैं। आप अनुवाद की हुई बातों को यहां क्लिक करके ET के ईपेपर पर जाकर वेरिफाई कर सकते हैं। ईपेपर में Himachal SkyWay Hangs In Midair टाइटल से यह छपी है। पढ़ें:
ET: बीच हवा में लटका हिमाचल का स्काईवे
हिमाचल प्रदेश सरकार का बेलारूस की कंपनी स्काईवे टेक्नॉलजीज से धर्मशाला में दुनिया का पहला सस्पेंडेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम स्थापित करने का सौदा कंपनी की विश्वसनीयता और प्रॉजेक्ट की व्यावहारिकता को लेकर विवादों में पड़ गया है। कांग्रेस सरकार के अंदर और बाहर के आलोचकों ने ऐसी कंपनी के साथ MoU साइन करने को लेकर सवाल किए हैं जिसके दुनिया में कहीं पर कोई प्रॉजेक्ट काम नहीं कर रहे। 250 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट की सुरक्षा और व्यावहारिकता को लेकर गंभीर चिताएं भी व्यक्त की गई हैं।
‘कंपनी ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट सरकार को नहीं दी’
स्काईवे ट्रांसपोर्ट सिस्टम स्टील की पटरियों पर कार्बन फाइबर की बनी कारों को तेजी से दौड़ाने की बात करता है। सरकार के एक मंत्री ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया, ‘बेलारूस की कंपनी क्यों चुनी गई, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। कंपनी ने सरकार के साथ कोई फिजिबिलिटी रिपोर्ट या स्टडी भी शेयर नहीं की है जो कि इस तरह के प्रॉजेक्टों के लिए जरूरी होती है। यह नहीं बताया है कि प्रॉजेक्ट को कैसे चलाया जाएगा।’
‘मुख्यमंत्री के सलाहकार ने कहा- सुधीर का प्रॉजेक्ट है’ मुख्यमंत्री के सलाहकार और प्रमुख सहयोगी टीजी नेगी ने ET को बताया कि सिर्फ शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा की मीडिया के सवालों के जवाब दे सकते हैं क्योंकि यह उनका प्रॉजेक्ट है। हालांकि सुधीर शर्मा कई ईमेल, टेक्स्ट मेसेज और कॉल के जरिए बात करने की कोशिशों के बावजूद टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं हुए।
‘तीन मंत्री CM से उठाना चाहते थे स्वाईवे का मुद्दा’ तीन मंत्रियों ने कहा कि वे स्काईवे प्रॉजेक्ट के मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाना चाहते थे मगर झिझक थी क्योंकि ‘शर्मा को राजा (मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह) का काफी करीबी माना जाता है।’
कंपनी ने कहीं अपने चालू प्रॉजेक्टों का जिक्र नहीं किया
स्काईवे टेक्नॉलजी की वेबसाइट पर नजर जालें तो कंपनी बताती है कि वह ऐलिवेटेड रूट टेक्नॉलजी इस्तेमाल करेगी, जिसे ‘स्ट्रिंग ट्रांसपोर्ट’ कहा जाता है। वेबसाइट कहती है कि कंपनी भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के साथ बातचीत कर रही है, मगर कहीं पर कोई प्रॉजेक्ट काम कर रहा है या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
मॉस्को यूनिवर्सिटी के मुताबिक जानलेवा है यह सिस्टम
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी टेक्नॉलजी के शुरुआती मॉडल रूस में टेस्ट किए गए थे मगर स्टेट रेलवेज यूनिवर्सिटी मॉस्को के आकलन के बाद प्रॉजेक्ट को ड्रॉप कर दिया गया था। 2008 में यूनिवर्सिटी ने पाया था कि प्रॉजेक्ट व्यावहारिक नहीं है और असुरक्षित भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रिंग रल टेक्नॉलजी में ‘सिस्टम डिफेक्ट्स हैं और यह असलियत में काम करने वाले नहीं लगती क्योंकि यह ट्रैफिक के लिए सम रास्ता नहीं देती।’ रिपोर्ट यह भी कहती है कि “जमीन से ऊंचाई पर पैसंजर ट्रैवल करते हैं। अगर कोई स्ट्र्रिंग टूटी तो मौतें हो सकती हैं। सिस्टम में बहुत खतरा है।’ पिछले साल रूसी सरकार के पैनल ने इस टेक्नॉलजी का मूल्यांकन किया था और कहा था कि यह इनोवेटिव तो है, मगर सिर्फ थ्योरी में।
बावजूद इसके धर्मशाला नगर निगम ने अप्रूव किया टेक्निकल प्रपोजल
मगर राज्य सरकार के अधिकारी बताते हैं कि धर्मशाला नगर निगम ने पहले ही प्रॉजेक्ट के लिए टेक्निकल प्रपोजल को अप्रूव कर दिया है और वह प्रॉजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में चलाने के लिए टेंडरिंग शुरू करेगी। प्रपोजल के मुताबिक 15.4 किलोमीटर का सस्पेंडेड स्काईवे ट्रैक बनाया जाएगा जिसके पहले चरण में 15 स्टेशन होंगे।
राज्य में विधानसभा चुनाव होने से कुछ ही महीने पहले MoU साइन करते वक्त शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, जो कि धर्मशाला के विधायक हैं, ने कहा था कि प्रॉजेक्ट 3 साल में काम करना शुरू कर देगा। मंत्री ने हाल ही में कंपनी के अधिकारियों से मिलने के लिए बेलारूस का दौरा भी किया था।
(L to R) Sudhir Sharma, Dorothea Jeger and Unitsky
बीजेपी नेता ने भी उठाए सवाल
बीजेपी नेता किशन कपूर, जो कि धर्मशाला से 4 बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर भी हैं, कहते हैं, ‘स्मार्ट सिटी धर्मशाला को स्काईवे की भ्रष्ट नींव पर नहीं बनाया जा सकता। मैं गुजारिश करता हूं कि कांग्रेस सरकार यह बताए कि इस स्काईवे प्रॉजेक्ट के लिए स्विस या किसी अन्य कंपनी के बजाय बेलारूस की कंपनी को क्यों चुना गया? हिमाचल की गरीब जनता के पैसे ऐसी कंपनी पर क्यों खर्च किया जाए जिसकी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है?’
कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट तक नहीं दिखाई गई
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘जिस कंपनी से MoU साइन हुआ, कम से कम उसकी ऑडिट रिपोर्ट तो दिखाई जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि किसी हवा-हवाई स्कीम मे तो नहीं फंस रहे।’
2 साल में स्काईवे नाम से कई कंपनियां बनाकर भंग की गईं
अगर स्काईवे ग्रुप ऑफ कंपनीज के बारे में इँटरनेट पर सर्च किया जाए तो असंख्य कंप्यूटर से बनाई गई तस्वीरें, ग्राफिक्स और फ्यूचरिस्टिक टेक्नॉलजी के विज्ञापन आदि सामने आ जाते हैं और लोगों से इन्वेस्ट करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, स्ट्रिंग टेक्नॉलजी कई देशों में है मगर स्काईवे नाम की कंपनी का प्रॉजेक्ट कहीं पर शुरू नहीं हुआ। यूरोएशियन रेल स्काईवे सिस्टम, अमेरिकन रेल स्काईवे सिस्टम, अफ्रीकन रेल स्काईवे सिस्टम, ऑस्ट्रेलियन ऐंड ओशनिक रेल स्काईवे सिस्टम नाम की कंपनियां पिछले 2 सालों में दुनिया के कई हिस्सों में रजिस्टर की गईं और फिर भंग भी कर दी गईं।
स्काईवे टेक्नॉलजीज के फाउंडर एनातोली यूनित्सकी अपनी पर्सनल वेबसाइट पर खुद को इंजनियर, ऑथर और ‘यूनित्सकी स्ट्रिंग ट्रांसपोर्ट’ नाम के सिस्टम के डिजाइन बताते हैं। इस टेक्नॉलजी को स्काईवे ब्रैंड नेम के तहत मार्केट किया जा रहा है। वह कहते हैं कि स्काईवे को लाने के पीछे का मकसद ‘पृथ्वी को बचाना है।’
* * *
स्काईवे ने अन्य कंपनियों से संबंध होने से किया इनकार
कंपनी के डेप्युटी जनरल डायरेक्टर विक्टर बबुरिन ET को बताते हैं कि स्काईवे टेक्नॉलजीज कंपनी (बेलारूस) साल 2015 से चल रही है। उन्होंने स्काईवे नाम की अन्य कंपनियों, जो कि दुनिया भर में बनाकर भंग की गईं, से संबंध होने से इनकार कर दिया। 2014 में लिथुएनिया में बेलारूस की कंपनी ने प्रॉजेक्ट बनाने की योजना बनाई थी मगर कुछ ही महीनों में फर्जीवाड़े की आशंका में इसे कैंसल कर दिया गया। बैंक ऑफ लिथुएनिया ने निवेशकों को इस मामले में चेताया भी था। ईटी के सवालों के ईमेल के जरिए भेजे गए जवाब में बबुरिन ने लिथुएनिया की इस घटना को ऐंटी रूस हिस्टीरिया करार दिया। उन्होंने कहा कि लिथुएनिया की सरकार रूस (और बेलारूस) की कंपनियों को लेकर चिंतित रहती हैं क्योंकि 2013 से वहां रूस के खिलाफ ‘पागलपन’ बना हुआ है।
क्या पूरी दुनिया में कहीं स्काईवे का प्रॉजेक्ट काम कर रहा है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या दुनिया में कहीं आपका कोई प्रॉजेक्ट काम कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “हमारे मुख्य प्रॉजेक्ट ईकोटेक्नोपार्क में हमारी टेक्नॉलजी सर्टिफिकेशन मिलने के आखिरी चरण में है। भारत में भविष्य के प्रॉजेक्ट को लोकर इंजिनियरिंग कंपनियों के साथ मिलकर लगाया जाएगा और सुरक्षा आदि के उच्च मानकों का ध्यान रखा जाएगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट? रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन विवेक सहाय कहते हैं कि ऐसे प्रॉजेक्टों में सेफ्टी बड़ा मसला होती है। इसलिए यह साफ होना चाहिए कि कौन सा संगठन स्काईवे सिस्टम को प्रमाणित करेगा। वैसे भी रोपवे एक घंटे में 360 लोगों को कैरी करता है और दिल्ली मेट्रो 20 हजार लोगों को। इसलिए यह सिस्टम महंगा भी है। टूरिस्टों के लिए तो ठीक है मगर लोकल लोगों के लिए नहीं। मैं तो कहूंगा कि भारत के पहाड़ी राज्यों में तो सड़क ही ठीक रहेगी।
पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने ऐसे मामलों में स्विस टेक्नॉलजी की वकालत की। उन्होंने कहा कि सेफ स्काईवे बनाने में स्टिवटजरलैंड की कंपनियों का लंबा इतिहास रहा है। जापान की तकनीक को भी हम एक बार सोच सकते हैं और इस मामले में उन्हीं कंपनियों पर भरोसा करना चाहिए जो इस तरह से प्रॉजेक्ट चलाने के लिए प्रतिष्ठित हों। उन्होंने स्काईवे की मुखालफत भी की। उन्होंने कहा कि इस तरह ट्रांसपोर्ट सिस्टम अडवेंचर या टूरिजम के लिए सही है हमारे देश में। अगर ट्रांसपोर्ट के लिए इसे इस्तेमाल करना है तो इसे लंबे विश्लेषण से गुजरना होगा क्योंकि इसमें हादसों का खतरा है।
कोंकण रेलवे के मुखिया संजय गुप्ता कहते हैं कि विदेशी तकनीक को अपनाने से पहले ध्यान से उन्हें स्टडी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्काईवे ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बहुत कम लोगों के लिए जगह होगी इसलिए भारत के लिए तो यह सही ऑप्शन नहीं है। यहां पर मेट्रो जैसे जांचे-परखे सिस्टम पर भरोसा करना चाहिए। मेट्रो के लिए यहां रेग्युलेटरी मकैनिजम और गवर्निंग बॉडी है। क्या नए सिस्टम के लिए भी कुछ ऐसा है?
ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट सुधीर बदामी कहते हैं कि दूसरों की तरफ देखने के बजाय भारत में अपनी टेक्नॉलजी पर रिसर्च करने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि कोंकण रेलवे में 2003-2005 में स्ट्रिंग रेल ट्रांसपोर्ट पर रिसर्च शुरू हुआ था मगर बंद करना पड़ा था। अगर रिसर्च जारी रहता तो शायद हमारे पास अपना सिस्टम होता। बदामी ने कहा, ‘भारतीय ट्रांसपोर्ट में इंटरनैशनल डील नई बात नहीं है। हमारे पास ऑस्ट्रियन ट्रॉलर्स और चीनी बसें हैं। इंटरनैशनल मार्केट में लॉबीइंग की जाती है जो कई स्तर पर डील करवाती है। हमें देखना चाहिए कि इस मामले में देश को कितना फायदा हो रहा है और कहीं यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा।’
कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले का गांव मलाणा पूरी दुनिया से पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह गांव चरस और गांजे के लिए ज्यादा पहचाना जाता है और यहां पाई जाने वाली तथाकथित उच्च कोटि की चरस को ‘मलाणा क्रीम’ नाम दिया जाता है।
यहां पर भारत ही नहीं, दुनिया के कई हिस्सों से पर्यटक आते हैं। मगर अब स्थानीय देवता के ‘आदेश’ पर यहां बाहरी लोगों के ठहरने पर बैन लगा दिया गया है। करीब 2500 लोगों की आबादी वाले इस गांव में करीब 500 परिवार हैं और अधिकतर ने देवता के आदेश को मानने का फैसला किया है। मगर मलाणा और बगियांदा से संबंध रखने वाले 2 लोगों ने इस आदेश को चुनौती दी है।
‘देव आदेश’ को चुनौती देने वाले लोगों का कहना है कि इस फैसले से तो मलाणा में टूरिजम से जो आमदनी हो रही थी, रोजगार मिल रहा था, वह बंद होने से लोगों को नुकसान हो जाएगा। ऐसे में दुनिया के सबसे पुराने लोकंतंत्रों मे गिने जाने वाले मलाणा में अब अपनी संसद का आयोजन हो रहा है। कुछ दिनों में इस संसद का फैसला आ जाएगा।
लोगों की देवता में गहरी आस्था है
अलग-थलग बसा है मलाणा कुल्लू में पार्वती घाटी में बसा मलाणा गांव थोड़ा अलग सा है। यहां के बाशिंदों को सिकंदर की आर्मी के यहां बच गए योद्धाओं का वंशज बताया जाता है। मलाणा के लोग जो बोली बोलते हैं, वह भी कुल्लू से थोड़ी अलग है। कुछ महीने पहले गांव ने फोटोग्राफी पर रोक लगा दी थी क्योंकि गांववालों को लगता है कि वे लोग यहां की तस्वीरें खींचते हैं और फिर मलाणा को नशे के लिए प्रसिद्ध टूरिस्ट डेस्टिनेशन बताते हैं।
यहां का सिस्टम कुछ अलग है
मलाणा के प्रमुख देवता का नाम जमलू है जो ऋषि जमदग्नि का ही अपभ्रंश है। देवता जमलू का आदेश है कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने के लिए सभी गेस्ट हाउस बंद किए जाएं। बाहर के लोगों को हैरानी हो सकती है कि देवता का आदेश कैसे आ सकता है। दरअसल स्थानीय संस्कृति ऐसी है कि यहां पर एक तरह की संसद बनी हुई है। अपर हाउस को ज्येष्ठांग कहा जाता है और निचले सदन को कनिष्ठांग। तो हुआ यह कि गांव वालों ने संसद का आयोजन किया था। फिर लोगों ने एक माध्यम के जरिए देवता का आह्वान किया जिसने देवता के आदेश को सुनाया। यानी माध्यम बने व्यक्ति को जो महसूस होगा, वही देवता का आदेश होगा वह लोग मानते हैं कि देव जमलू इसी तरह से उनके सवालों के जवाब देते हैं। ऐसा सदियों से यहां चला आ रहा है और देवता के आदेश को माना भी जाता है।
मलाणा में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को कई तस्वीरों और वीडियो में भांग मलते देखा जा चुका है।
मलाणा पंचायत के प्रधान भागी राम ने इंग्लिश अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि देवता नहीं चाहते कि गांव वाले अपनी प्रॉपर्टी को गेस्ट हाउस या रेस्टोरेंट चलाने के लिए किराए पर दें। उन्होंने सभी के ऐसा करने पर रोक लगा दी है और जो इस आदेश का उल्लंघन करेगा, उसे देवता के प्रकोप का सामना करना होगा। इस मामले में कुल्लू के डिस्ट्रिक्ट टूरिजम ऑफिसर रजनीश गौतम ने अखबार को बताया कि मुझे इस बारे में जानकारी मिली है कि गांव वालों को गेस्ट हाउस चलाने से मना किया गया है। गौरतलब है कि 5000 लोगों की आबादी वाले इस गांव में करीब एक दर्जन गेस्ट हाउस हैं, जिनका पंजीकरण इसी विभाग के पास करवाना होगा है।
देवता में गहरी आस्था है लोगों की, मगर…
एचटी से साथ बातचीत में मलाणा पर डॉक्युमेंट्री बनाने वाले विवेक मोहन बताते हैं, ‘मलाणा दो वजहों से अपनी संस्कृति को बचाने में कामयाब रहा है- पहला तो यह कि लोगों की देवता जमलू पर गहरी आस्था है औऱ दूसरा यह भौगोलिक दृष्टि से थोड़ा अलग सा है। अब हाइड्रो प्रॉजेक्ट और मोबाइल आने से दोनों वजहें कमजोर हो रही हैं। देवता को लेकर उनकी आस्था ने उन्हें जोड़ा हुआ है मगर वक्त के कभी न कभी यह भी परंपरा निभाने जैसा काम रह जाएगा।’
गांव वालों को विदेशियों ने सिखाया चरस का कारोबार पारंपरिक रूप से मलाणा के बांशिंदे भांग के रेशों से टोकरियां, रस्सियां और चप्पलें (पूलें) बनाया करते थे। मगर 80 के दशक के आखिर में विदेशियों ने गांव के लोगों को भांग के पौधों से चरस निकालना सिखा दिया। तब से लेकर आज तक सरकारों ने ग्रामीणों को चरस के कारोबार से दूर ले जाने की लाख कोशिशें की मगर मलाणा के लोगों के लिए यही चोखी कमाई है। मक्की और आलू उगाने से लोगों को इतना पैसा नहीं मिलत पाता जिसने भांग के उत्पादों से मिलता है।
80 के दशक के आखिर में विदेशियों ने लगाया चरस के कारोबार का चस्का
नशे के कारोबार का ठप्पा हटाना चाहते हैं लोग
अखबार के साथ बातचीत में महिला मंडल प्रधान राम कली ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भांग के व्यापार ने हमारे गांव को बदनाम किया है। गांव के लोगों की अपनी मान्यताएं और परंपराए हैं। हम भांग के ठप्पे से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’
शिमला।। कोटखाई में हुई दिल-दहलाने वाली घटना को लेकर हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अडवाइजरी और अपील जारी की है। पुलिस की तरफ से जारी संदेश में कहा गया है कि इश प्रकरण में अफवाहें न फैलाई जाएं। पुलिस का कहना है कि इस मामले में व्हाट्सऐप या सोशल साइट्स के साथ कुछ वेब पोर्टल्स पर भी गलत खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। पुलिस ने इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा है।
पुलिस ने कहा है कि पीड़िता का नाम और तस्वीरें वगैरह शेयर नहीं की जा सकतीं और ऐसा करना कानूनी जुर्म है। ऐसा करने वालों के खिलाफ आईटी ऐक्ट के अलावा जुविनाइल जस्टिस ऐक्ट और आईपीसी के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में पुलिस ने अपील की है कि किसी तरह की तस्वीरों या अफवाहों को पोस्ट न करें। In Himachal शुरू से ही लोगों को इस मामले में जागरूक कर रहा है कि अफवाहों को न फैलाएं और पहचान उजागर न करें वरना कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि शुरू से विक्टिम की तस्वीरों को सोशल मीडिया के साथ-साथ कुछ गैर-जिम्मेदार न्यूज पोर्टल्स पर प्रकाशित किया गया। हद उस वक्त हो गई जब 5-6 लोगों की तस्वीरें व्हाट्सऐप और फेसपबुक पर यह कहते हुए शेयर की जाने लगीं कि गुनहगार पकड़े गए हैं। यही नहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पेज से भी ऐसी तस्वीरें पोस्ट हुईं, जिन्हे बाद में हटा लिया गया।
इस बीच एमबीएम न्यूज नेटवर्क की पुख्ता जानकारी के मुताबिक अब तक इस मामले में 200 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है। अलबत्ता यह तय है कि कुछ लोगों से कल से ही पूछताछ चल रही है, लेकिन पुलिस किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंची। सूत्रों का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया समेत वेब पोर्टल्स पर चल रही खबरों को लेकर एसपी DW Negi ने कड़े तेवर दिखाए हैं।
(यह खबर सिंडिकेशन के तहत MBM News Network की इनपुट्स के साथ प्रकाशित की गई है)
चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के प्रसिद्ध टूरिस्ट डेस्टिनेशन डल्हौजी शहर में श्वेता सिंह सैक्रड हार्ट सीनियर सेकंडरी स्कूल में अध्यापिका हैं। श्वेता ने मिसेज इंडिया वर्ल्ड वाइड सीजन 7 के फाइनल में प्रवेश कर लिया है और अब वह वियतनाम में प्रतिभा का लोहा मनवाएंगी।
श्वेता ने बताया कि पूरे देश से 1500 प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था और इसके ऑडीशन पूरे भारत में हुए थे, जिनमें विश्व भर से एन.आर.आई. महिलाओं ने भी भाग लिया था। इनमें से वह टॉप 50 में आई थीं जबकि उत्तर भारत में उन्होंने टॉप 15 में स्थान बनाया। श्वेता ने बताया कि इस दौरान कुल 4 राउंड हुए।
बताया जा रहा है कि इस प्रतियोगिता में हिमाचल से केवल श्वेता सिंह ही एकमात्र प्रतिभागी हैं जोकि टॉप 50 में प्रवेश कर इस प्रतियोगिता में स्थान बना पाई हैं। अब श्वेता वियतनाम में 28 जुलाई से इस प्रतियोगिता में होने वाले अगले विभिन्न पड़ावों की तैयारियों में जुट गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने के दौरान उन्हें उनके पति हरप्रीत सिंह व परिजनों का बहुत सहयोग मिला और अब उन्हें हिमाचल की जनता का सहयोग चाहिए होगा, जब 27 जुलाई से 3 अगस्त तक इस प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन वोटिंग शुरू होगी।
इस प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 5 अगस्त को गुरुग्राम में होगा। श्वेता ने कहा- महिलाओं का जीवन विवाह के उपरांत घर की चारदीवारी में ही सिमट कर नहीं रह जाना चाहिए बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और इसमें उनके परिवार को भी पूरा सहयोग करना चाहिए।