सरकार ने और आसान की हिमाचल आना चाह रहे पर्यटकों की राह

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटकों को आने देने के लिए नियमों को आसान कर दिया है। अब वे रैपिड एंटीबाडी टेस्ट रिपोर्ट लेकर आ सकते हैं। पहले RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट लेकर आना पड़ता था जो महंगी तो थी मगर साथ में भरोसेमंद भी ज्यादा थी।

कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अब 96 घण्टों के अंदर जारी हुई रिपोर्ट मान्य होगी। पहले 72 घण्टों के अंदर जारी हुई रिपोर्ट वालों को ही हिमाचल में प्रवेश मिलता था। साथ ही 10 साल से कम उम्र के बच्चों की टेस्ट रिपोर्ट दिखाना जरूरी नहीं होगा। (भले वह बिना लक्षणों वाला कैरियर हो)

इसके अलावा पहले जहां होटल में कम से कम 5 दिन की बुकिंग करवानी पड़ती थी, अब सिर्फ 2 दिन की बुकिंग अनिवार्य होगी। अब इस सम्बंध में पर्यटन विभाग नए दिशा निर्देश जारी करेगा।

पिछले दिनों होटल कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित पर्यटन सचिव से मुलाकात कर अपनी परेशानियों से अवगत कराया था। उनका कहना था कि पर्यटकों के लिए बनाए सख्त नियमों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हिमाचली घर लौटेगा तो होगा क्वॉरन्टीन, लेकिन पर्यटक मस्त नाचेगा वादियों में?

क्या सरवीण से मंत्री पद छीन लेंगे मनकोटिया के आरोप?

नई दिल्ली।। पिछले दिनों मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने हिमाचल सरकार में मंत्री सरवीण चौधरी पर गलत ढंग से सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि बड़े पैमाने पर मंत्री के करीबी परिजन जमीनें खरीद रहे हैं।

इन आरोपों को सरवीण ने गलत बताया था। इसके बाद अमर उजाला ने खबर दी थी कि एक मंत्री पर लगे आरोपों के बाद विजिलेंस ने जाँच शुरू कर दी है। अब तेजी से बदले घटनाक्रम के तहत सरवीण ने मनकोटिया को एक करोड़ का मानहानि का नोटिस भेजा है। अब वह दो दिनों से दिल्ली में हैं। इस दौरान उन्होंने जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर से मुलाकात की कोशिश की।

दरअसल मामला पीएमओ तक पहुंच गया है और कहा जा रहा है मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। दैनिक जागरण का कहना है कि ऐसी जानकारी है कि दिल्ली में डटी सरवीण चौधरी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात करके सफाई दी है। इसके बाद सरवीण चौधरी ने केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से मिलने के लिए समय मांगा है।

मनकोटिया के आरोपों पर मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया था कि ‘परिवार ने कानून की प्रक्रिया के तहत ही सारी 515 कनाल कुल जमीन खरीदी है। इसमें सीलिंग एक्ट की कोई उल्ल्घंन नहीं हुआ है नहीं तो भू-राजस्व विभाग इसका पंजीकरण नहीं करता।’ मंत्री ने कहा था, “इसमें से 275 कनाल मेरे बेटे के नाम है जबकि 240 कनाल मेरे पति के नाम है।”

उधर न्यूज 18 हिमाचल का कहना है कि विजिलेंस ने शुरुआती जांच पूरी करके सीएम को रिपोर्ट सौंप दी है। अब यह कयास लग रहे हैं कि विवाद से बचने के लिए मंत्री का इस्तीफा लिया जा सकता है और सँगठन में कोई पद सौंपा जा सकता है। दरअसल पहले से ही नॉन परफोर्मिंग मिनिस्टर बताते हुए सरवीण को मन्त्रिमण्डल फेरबदल के दौरान हटाया जा सकता था मगर इकलौती सीनियर विधायक और ओबीसी नेता होने के कारण उनका सिर्फ विभाग बदला गया था। अब मनकोटिया के आरोप उनपर भारी पड़ सकते हैं।

एसएमसी अध्यापकों ने बंद की ऑनलाइन कक्षाएं, दी आत्मदाह की धमकी

शिमला।। सएमसी शिक्षक संघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि ‘प्रदेश सरकार एसएमसी शिक्षक संघ को लेकर तीन दिन के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करे कि एसएमसी शिक्षक संघ को 8 महीने का वेतन कब जारी किया जा रहा है।’ एसएमसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज रोंगटा ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि सरकार बताए कि एसएमसी शिक्षक संघ के बारे में क्या नीति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि तीन दिन में सरकार उन्हें लेकर तस्वीर साफ नहीं करती है तो वह आत्मदाह जैसा कदम उठा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि इसे लेकर संघ सुप्रीम कोर्ट में भी जा सकता है।

पिछले दिनों हाईकोर्ट ने 2613 एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। हाालंकि, शिक्षा मंत्री ने कहा है कि इन्हें निकाला नहीं जाएगा। अब एसएमसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज रोंगटा ने कहा है कि हिमाचल में 160 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी एसएमसी शिक्षक पर है। उन्हें 8 माह से वेतन नहीं मिला है। उन्हें ऑनलाइन क्लासिज का वेतन जारी किया जाए। मनोज ने कहा कि जब तक सरकार एसएमसी शिक्षक को 8 माह का वेतन जारी नहीं करती है तब तक सभी शिक्षक ऑनलाइन क्लासेज नहीं लगाएंगे।

मनोज ने कहा कि वेतन न मिलने से एसएमसी शिक्षकों को परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। सरकार जल्द से जल्द एसएमसी शिक्षक संघ को आठ माह का वेतन जारी करे। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2012 में सरकार ने जब एसएमसी के लिए पॉलिसी बनाई थी लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने एसएमसी शिक्षक को सेवा विस्तार नहीं दिया है।

रोंगटा ने कहा, “एसएमसी शिक्षक ने सबसे पहले कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा कर अपनी सेवाएं दी हैं। इसकी पूर्व शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी सराहना की थी। यदि सरकार एसएमसी शिक्षक का आज तक का रिकॉर्ड खंगाले तो उसमें सबसे ज्यादा छात्र टॉपटैन में मिलेंगे। इसके अलावा एसएमसी शिक्षक सरकार के हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।”

उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि एसएमसी शिक्षक के साथ कुछ भी होता है चाहे आत्मदाह या कुछ और तो इसकी जिम्मेदार प्रदेश सरकार की होगी। रोंगटा ने कहा, “2613 एसएमसी शिक्षक ट्राइबल क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जब कोई भी रैगुलर शिक्षक ट्राइबल क्षेत्र में जाने से कतरा रहे थे तो एसएमसी शिक्षकों ने वहां पर अपनी सेवाएं दी हैं। ट्राइबल क्षेत्र के 130 स्कूलों में 2613 शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 250 से अधिक ऐसे स्कूल हैं जहां पर 4 से 5 एसएमसी शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। इसमें पांगी में 100, किन्नौर में 140, भरमौर में 126 तथा स्पीति में 164 के करीब शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी शिक्षक किराए के मकान में रहते हैं तथा वेतन न मिलने से इनको मकान का किराया व घर का खर्चा चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।”

सीएम जयराम ठाकुर के काफिले के 13 कर्मी कोरोना पॉजिटिव, कुल संख्या हुई 19

शिमला।। हाल ही में कांगड़ा जिले में घूमकर आए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के स्टाफ के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। आज सीएम के काफिले में एक चालक समेत 13 सुरक्षा कर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह पहले मुख्यमंत्री के काफिले का एक चालक कोरोना पॉजिटिव आया। उसके बाद 5 लोग और कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। अब मुख्यमंत्री के काफिले के ही 7 और लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

इससे पहले 13 अगस्त को मुख्यमंत्री की पायलट के चालक समेत 5 सुरक्षा कर्मी पॉजिटिव पाए गए थे। आज पॉजिटिव पाए गए सभी लोग भी उन्हीं के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं। उक्त सभी को शिमला के ग्रैंड होटल में क्वारंटाइन किया गया था।

इस तरह से अब सीएम के काफिले के कुल 19 कर्मचारी कोरोना संक्रमित हैं। अब आंशका उठ रही है कि ये लोग जहाँ जहाँ घूमे होंगे, वहां कितने लोगों को संक्रमित किया होगा। पिछले दिनों शांता शांता कुमार ने भी सीएम को नियमों के पालन की सलाह दी थी।

सीएम जयराम घूमें कम, नियमों का सख्ती से पालन करें: शांता कुमार

मंत्री महेंद्र सिंह ने खाया ‘तिरंगा’ केक, लगा अपमान का आरोप

शिमला।। अक्सर विवादों में रहने वाले हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं जलशत्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। उनकी एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह परिवार के साथ तिरंगा केक खा रहे हैं। इस केक को उनके परिजन ने काटा ओर उन्हें खिलाया। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रध्वज का अपमान करार दिया है।

महेंद्र सिंह की बेटी वंदना गुलेरिया ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर दक्ष गुलेरिया के जन्मदिन की तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में महेंद्र सिंह भी हैं और टेबल पर एक तीन रंगों का केक रखा गया है। ये तीन रंग भारतीय राष्ट्रध्वज से मेल खाते हैं। फिर एक तस्वीर में इस केक को काटा गया और अगली में महेंद्र सिंह को खिलाया गया।

विपक्षी नेताओं के साथ साथ सोशल मीडिया पर आम लोग भी इस तस्वीर को शेयर करते हुए प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि केक को तिरंगे जैसा बनाना, फिर उसे काटना और खाना अपमानजनक है। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह तिरंगा तब होता जब अशोक चक्र बना होता।

इसी तरह के मामले में एक बार केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। एक कार्यक्रम में उन्होंने तिरंगे और भारत के नक्शे वाला केक काटा था। हरियाणा में कांग्रेस के एक नेता ने भी सोनिया गांधी के जन्मदिन पर तिरंगे वाला केक काटा था, जिसके बाद उनपर तिरंगे के अपमान का आरोप लगा था।

 

 

 

धारा 118 के मामलों को ऑनलाइन दी जाएगी मंजूरी: महेंद्र सिंह ठाकुर

शिमला।। हाल ही में राजस्व विभाग संभालने वाले हिमाचल प्रदेश के मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि धारा 118 के मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन परिवारों के पास जमीन नहीं है, उन्हें सरकार की ओर से जमीन देने पर विचार किया जा रहा है।

जलशक्ति और बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह को हाल ही में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान राजस्व विभाग दिया गया है। इसी विभाग के तहत राजस्व से जुड़े मामले होते हैं जिनमें जमीनों की खरीद-फरोख्त भी शामिल है। हिमाचल में गैर-कृषकों को जमीन खरीदने को विशेष अनुमति लेने के प्रावधान वाली धारा 118 का जिम्मा भी अब महेंद्र सिंह के पास होगा।

राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा, “प्रदेश में हजारों ऐसे परिवार हैं, जिनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। ऐसे में सरकार की ओर से उन्हें शहरी क्षेत्रों में दो विस्वा और ग्रामीण क्षेत्रों में 3 विस्वा जमीन देने पर विचार किया जा रहा है। धारा-118 की पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अलावा राजस्व विभाग में सुधारीकरण की प्रक्रिया जारी है।”

जीएस बाली फिर निकालेंगे ‘बेरोजगार यात्रा’, 2 लाख को नौकरी देने का लक्ष्य

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व परिवहन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली ने एलान किया है कि कोरोना की स्थिति काबू में आने के बाद वह प्रदेश भर में घूमेंगे और युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे। बाली ने कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर प्रदेश के दो लाख लोगों को संगठित क्षेत्र में नौकरी दिलाने का लक्ष्य रखा है। अपने पेज पर फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य उन्होंने इसलिए रखा है क्योंकि वर्षों के अनुभव और कॉर्पोरेट सेक्टर में अपने संपर्क के आधार पर वह इसे पूरा करने में सक्षम हैं। बाली ने कहा कि पहले भी बड़ी संख्या में उन्होंने युवाओं को रोजगार दिलाया है और आगे भी यह मुहिम जारी रहेगी।

जीएस बाली ने कहा कि जैसे ही कोरोना कंट्रोल में आता है, उसके बाद वे प्रदेश भर में बेरोजगार रथ यात्रा निकलेंगे ओर सभी युवाओ से मुलाकात करेंगे। जीएस बाली ने युवाओं को अपने स्तर पर नौकरी दिलाने के लिए एक डेटाबेस तैयार करेन के अभियान का भी आगाज किया। उन्होंने एक लिंक शेयर किया है जिसमें युवा अपनी शैक्षणिक योग्यता और काम के अनुभव आदि की डीटेल दाखिल कर सकते हैं। बकौल जीएस बाली, बाद में उनकी दी गई जानकारी के आधार पर उन्हें उनके क्षेत्र में नौकरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बाली ने कहा, “जो फॉर्म हमने सोशल मीडिया पर डाला है, उसमें रजिस्टर करने वाले लोग ‘स्नो टाइगर’ कहलाएंगे। जॉब न होना कोई हीन भावना की बात नहीं है। यह व्यवस्था का फर्ज है कि शिक्षित और प्रशिक्षित लोगों को रोजगार दिलाए। रोजगार नागरिकों का अधिकार है और इसके लिए संघर्ष करने से एभी पीछे नहीं हटना चाहिए। मेरा लक्ष्य है कि दो लाख लोगों को रोजगार दूं और इसके लिए मैंने रूपरेखा तैयार करके काम शुरू कर दिया है।”

फेसबुक पेज पर बाली ने लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने पोस्ट किया है, “यदि आप या आपका कोई परिचित बेरोजगार है तो इस फॉर्म पर जाकर पंजीकरण करें। हमने पहले भी युवाओं को रोजगार दिया है और आगे भी अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार देने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। shorturl.at/opvyF

उन्होंने ऑफलाइन फॉर्म्स और एक टोल फ्री नंबर के जरिए पंजीकरण की भी जानकारी दी। फेसबुक पेज पर लिखा गया है, “अगर आप ऑनलाइन न भर पाएं तो हमारे वॉलंटियर आपको निशुल्क ये फॉर्म देंगे। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 74200 00001 पर कॉल करके भी पंजीकरण करवा सकेंगे।”

जीएस बाली ने कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए भी प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिलाने के लिए संघर्ष किया था। उनका कहना था कि कांग्रेस ने जब घोषणापत्र में इसका जिक्र किया था इसे पूरा करना चाहिए था। बाद में इस योजना को लागू भी किया गया था मगर इसके ढंग से लागू होने से पहले ही चुनाव हो गए थे।

उस समय कुछ लोगों ने बेरोजगारी भत्ते का यह कहते हुए विरोध किया था कि यह मुफ्तखोरी की आदत डालना होगा। मगर बकौल बाली, बेरोजगारी भत्ता बेरोजगारी बढ़ाने वाला नहीं बल्कि रोजगार बढ़ाने वाला होगा। उन्होंने कहा था, “रोजगार पाने के लिए योग्यता के बावजूद कई बच्चे ऐसे हैं जो फॉर्म भरने या प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस भरने, यहां तक कि इंटरनेट पैक डलवाने तक सक्षम नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए बेरोजगारी भत्ता मददगार साबित होगा।”

पूर्व मंत्री ने आज फेसबुक लाइव में युवाओ से संवाद करते हुए साफ किया की हर वर्ग को रोजगार देना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में बेरोजगारों के लिए कोई काम नही हो रहा है, ऐसे में बेरोजगारों के लिए वे खड़े है ओर उनके लिए वह प्रदेश भर में भ्रमण करेंगे। उन्होंने दो लाख लोगों को रोजगार देने के भारी भरकम आंकड़े को लेकर कहा, “मैंने पूरा होमवर्क किया है और जो मैं कहता हूं, वो करता हूं और जो मैं कर सकता हूं, वही कहता हूं।”

सीएम ने लॉन्च किया ‘इम्युनिटी बूस्टर और एन्टी हैंगओवर’ हिम हल्दी दूध

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को पोषणयुक्त और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मिल्कफेड के ‘हिम हल्दी दूध’ का लोकार्पण किया। इस दूध में एंटी हैंगओवर क्षमता होने का भी दावा किया गया है।

सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत मंडी, शिमला और कुल्लू जिले के दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन राशि भी वितरित की और उनसे बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम हल्दी दूध पंजाब विश्वविद्यालय पटियाला के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से विकसित किया गया है, जिसका पेटेंट करवाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पेय डिटॉक्स ड्रिंक है, जिसमें एंटी हैंगओवर, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इन्फ्लेमेटरी और रोग प्रतिरोधक क्षमता विद्यमान है। यह कोरोना से बचाव में मददगार होगा। सीएम ने इस दूध का लोकार्पण ओक ओवर शिमला में किया। इस दूध को शीतल पेयजल के रूप में छोटी बोतल में पैक किया गया है। दावा किया गया है कि इसमें नैनो टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।

सीएम ने फेसबुक पर भी इसकी तस्वीरें शेयर की हैं। साथ में लिखा है, “यह दूध काफी पौष्टिक है, विशेषकर रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए यह लाभप्रद होगा। आप भी हिम हल्दी दूध का सेवन अवश्य करें। संबंधित विभाग एवं मिल्क फेडरेशन को साधुवाद। #शिखरकीओरहिमाचल”

अखबार ने फैला दी ज्वालामुखी में शेर दिखने की अफवाह

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में कुछ लोग फेसबुक औए व्हाट्सऐप पर एक वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें एक शेरनी दहाड़ती नजर आ रही है। साथ में दावा किया जा रहा है कि यह ज्वालाजी का वीडियो है। एक अखबार ने तो अपने पेज पर इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे आस्था से जोड़ दिया।

शेर (lion) भारत में सिर्फ और सिर्फ गुजरात में पाए जाते हैं। एक समय अन्य इलाकों में भी इनका विस्तार था मगर अब ये गुजरात में ही हैं। ऐसे में यह वीडियो भी गिर नैशनल पार्क से लगते किसी इलाके का है। फिर भी लोग जानकारी के अभाव में आंख मूंदकर इसे शेयर कर रहे हैं।

अखबार ने फर्जी वीडियो शेयर करते समय आस्था का सहारा लिया है ताकि लोग तुरन्त इसे शेयर करें। लिखा है, “आपने तस्वीरों में देखा अथवा भजनों में सुना होगा कि शेर मां दुर्गा का वाहन है। ज्वालामुखी मंदिर के मझीण गांव में रात को स्थानीय लोगों ने जब एक शेर को देखा तो उनकी आस्था और मजबूत हो गई।”

आगे पूरे विश्वास के साथ लिखा है, “आपको बता दें कि इस क्षेत्र में तेंदुआ तो पाया जाता है, लेकिन शेर पहली बार देखा गया। प्राणी विज्ञान के लिए यह शोध का विषय है।”

अख़बार का यह दावा भ्रामक और गैरजिम्मेदाराना है। शोध का विषय यह नहीं कि ज्वालामुखी में शेर कैसे दिखा। शोध का विषय यह है कि मीडिया भी कैसे लाइक्स शेयर के लालच में अफवाहों को बढ़ाता है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फाड़े सीएम से पुल की मांग करने आए बच्चों के बैनर

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के जयसिंहपुर दौरे के दौरान एक विवाद हो गया। पुल की मांग को लेकर हाथों में पोस्टर लेकर खड़े बच्चों और लोगों के साथ धक्‍का मुक्‍की हुई। हाथों से पोस्‍टर छीनकर फाड़ दिए गए। कुछ बच्चे इस घटना के बाद आंखों में आंसू लिए दिखे। परिजनों का कहना है कि यह सब पुलिस के सामने हुआ मगर उसने कुछ नहीं किया।

यहां की पपलाह पंचायत के यह बच्चे मंद खड्ड पर पुल के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर आए थे। पुल निर्माण की मांग को लेकर इस पंचायत के बच्चे अपने अभिभावकों के साथ जयसिंहपुर में खड़े थे, जब मुख्यमंत्री का काफिला वहां से गुजरने वाला ही था तो ठीक उसी समय कुछ लोगों द्वारा बच्चों के हाथों में लिए गए पोस्टरों को फाड़ दिया गया।

"सीएम साहब, सब चंगा सी" – लोगों की मांग दबाकर बीजेपी कार्यकर्ता शायद सीएम साहब को यही संदेश देना चाहते थे। देखिए,…

Posted by In Himachal on Saturday, August 8, 2020

बच्चों की यह मांग मुख्यमंत्री के स्वागती नारों के बीच दबकर रह गई। इसके बाद काफी हंगामा भी वहां हुआ। बच्चों के अभिभावकों ने पोस्टरों को फाड़े जाने का आरोप भी कार्यकर्ताओं पर लगाया। आप तस्वीर में देख सकते हैं कि बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बड़ी मासूमियत से खड़े थे। उनके बैनर भी विरोध वाले नहीं, मांग वाले थे।

क्या है मामला
पंचायत पपलाह के तहत आते गांव कुरू, कलेन व बसूह के बच्चे अभी भी पुल की सुविधा न होने के कारण बरसात के दिनों में जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते हैं। वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि यहां पर मंद खड्ड पर पुल का निर्माण किया जाए। पर उनकी इस समस्या का हल अभी तक नहीं हो पाया है। पुल निर्माण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पोस्टर के माध्यम से अपनी समस्या से अवगत करवाने के लिए वहां खड़े थे। मगर बच्चे इस घटना के बाद सदमे में हैं और लोग गुस्से में।