हिमाचल की 23 साल की युवती से दिल्ली में चलती कार में गैंगरेप

इन हिमाचल डेस्क।।

दिल्ली के वसंत विहार में 23 साल की एक युवती का अपहरण करके चलती कार में गैंगरेप का मामला सामने आया है। तीनों आरोपियों को अरेस्ट कर लिया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

हिंदी अखबार ‘अमर उजाला’ की खबर के मुताबिक पुलिस ने बताया है कि मूल रूप से हिमाचल की रहने वाली युवती दिल्ली के मुनीरका में रहती है। प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली यह युवती मंगलवार रात अपनी सहेली के साथ प्रिया सिनेमा में मूवी देखने गई थी। रात सवा 3 बजे जब वह प्रिया कॉम्प्लेक्स से बाहर निकली, कार सवार तीन युवकों ने उसे गाड़ी में खींच लिया।

आरोपियों ने चलती गाड़ी में और कई जगह पर गाड़ी रोककर रेप किया। इस बीच युवती की सहेली ने गाड़ी का नंबर नोट कर लिया था और तुरंत 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बता दिया था। पुलिस ने हरकत में आकर तलाश शुरू कर दी।

रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस को पता चला कि कार किसकी है। इसके बाद कार के मालिस ने बताया कि उसने उदय सेहरावत नाम के शख्स को गाड़ी दी हुई है। सुबह करीब साढ़े 4 बजे आरोपियों ने युवती को वसंत विहार छोड़ दिया, जहां से पुलिस ने उसे अस्त-व्यस्त हालत में पाया। मेडिकल में रेप की पुष्टि हुई है और तीन आरोपियों उदय सेहरावत, विनीत और राजवीर को अरेस्ट कर लिया गया है।

अभद्र टिप्पणियों पर नीरज भारती को पिता चंद्र कुमार का समर्थन

धर्मशाला।।

अगर बच्चा कोई गलती करे तो उसे समझाना पैरंट्स का फर्ज होता है। क्या हो अगर किसी का बेटा गालियां देता हो और कोई पिता से इसकी शिकायत करे। जाहिर है, हर पिता कहेगा कि मेरे बेटे को ऐसा नहीं करना चाहिए और वह अपने बेटे को समझाएगा भी। मगर कांगड़ा से सांसद रह चुके चंद्र कुमार अलग ही सोच रखते हैं। उनके बेटे और हिमाचल सरकार में सीपीएस नीरज भारती फेसबुक पर अभद्र भाषा इस्तेमाल करते हैं। जब इस बारे में उनसे पूछा जाता है, तो वह अपने बेटे का बचाव करते हैं।

हिंदी अखबार पंजाब केसरी के मुताबिक जब चंद्र कुमार से नीरज भारती की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘नीरज भारती जो कुछ कर रहा है, वह सही है।’ बकौल चंद्र कुमार ऐसी टिप्पणियां जब राज्य में भाजपा के कार्यकाल में कांग्रेस के आला नेताओं के खिलाफ की जाती थी भाजपा कहां सोई हुई थी।

चंद्र कुमार (बाएं) और नीरज भारती।
चंद्र कुमार (बाएं) और नीरज भारती।

चंद्र कुमार ने कहा, ‘सोशल मीडिया पर हर किसी को कुछ भी करने की आजादी है तो भाजपाई भी बयानबाजी कर रहे हैं। इस पर हो-हल्ला करने की क्या जरूरत है।’

यही नहीं, अनुराग ठाकुर और सुषमा स्वराज पर ताजा अभद्र टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने क्या कहा, यह चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘जब सुषमा स्वराज राजघाट पर नाची थीं और भाजयुमो राष्ट्रीय अध्यक्ष उस तमाशे को देख रहे तो उन्होंने इस पर नाराजगी क्यों नहीं जाहिर की थी?’

बहरहाल, पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री चंद्र कुमार को पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया पर किसी को कुछ भी करने की आजादी का मतलब किसी को गालियां देना नहीं है। दूसरी बात यह है कि नेता और चुने हुए प्रतिनिधि को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। वे आपस में अपने घर में इस तरह की बातें करते हों तो करें, सार्वजनिक मंचों पर ऐसा करने से परहेज करना चाहिए। साथ ही अगर कोई दूसरा गलत व्यवहार कर रहा हो तो उसके स्तर पर उतरकर गलत व्यवहार करना समझदारी नहीं होती।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता चंद्र कुमार के इस स्टैंड के बाद बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। एक सीनियर नेता का इस तरह से गलत काम को डिफेंड करना उन्हें रास नहीं रहा। कुछ नेता इसे पुत्रमोह में गरिमा खोना भी करार दे रहे हैं।

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पंजाब केसरी की खबर
PJ

कई वादे करने के बावजूद विकलांग युवक के लिए PWD से नहीं बन पाई 600 मीटर सड़क

चंबा।।

आज आप जो पढ़ने जा रहे हैं, यह किसी एक युवक को हो रही समस्या की बात नहीं है, बात सरकारी महकमों की टरकाने वाली आदत से जुड़ी हुई है। तस्वीर में दिख रहे युवक का नाम अमित है। चंबा के सलूणी में ग्राम पंचायत ठाकरी मट्टी का एक गांव है- मकडोगा। इस गांव में अमित का घर है और उनके घर से मुख्य सड़क की दूरी करीब 600 मीटर है। प्रदेश में बहुत से गांव ऐसे हैं, जहां पर कई किलोमीटर दूर सड़क है और वे कटे हुए हैं। इस हिसाब से 600 मीटर की दूरी कुछ भी नहीं लगती, मगर अमित के लिए यही दूरी परेशानी का सबब बन गई है। दरअसल अमित जन्म से ही 60 फीसदी विकलांग हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। वह वीलचेयर की मदद से ही मूव कर पाते हैं। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा।

सड़क से काफी ऊंचाई पर उनका घर है। कहीं भी आना-जाना हो, उनके लिए मुश्किल हो जाती है। गांव से सड़क तक आना और फिर सड़क से वापस घर तक जाना बहुत मुश्किल काम है। उपचार के लिए महीने में 2-3 बार अस्पताल भी जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें कई बार रिश्तेदारों के यहां महीनों रुकना पड़ता है तो कई बार पिता जी के साथ डलहौजी में। उनकी मांग है कि गांव को सड़क से जोड़ा जाए, ताकि वह भी सामान्य लोगों की तरह जीवनयापन कर पाएं।

अच्छी बात यह है कि उनके घर तक के रास्ते में जितने भी लोगों की जमीन पड़ती है, वे सड़क के लिए जमीन देने को तैयार हैं। पिछले कई सालों से अमित सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। करीब ढाई साल पहले उन्होंने आयुक्त विकलांगजन हिमाचल प्रदेश को अपनी समस्या के बारे में बताया था और आयुक्त ने जिला उपायुक्त और जिला कल्याण अधिकारी को इस ओर ध्यान देकर कदम उठाने के लिए कहा था।

Amit

लोक निर्माण विभाग ने गांव से नीचे दरोल नाला से सर्वेक्षण किया और पाया कि सिर्फ 600 मीटर सड़क बननी है। गांव के लोग निजी भूमि देने को भी तैयार है और इस बारे में लोक निर्माण विभाग को एफिडेविट भी दे चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक सड़क बन ही नहीं पाई।

अमित दोनों पैरों की विकलांगता के वावजूद खुद कई बार एडीएम, जिला उपायुक्त चम्बा, जिला कल्याण अधिकारी चम्बा, से मिल चुके हैं, मगर इन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्होंने सांसद शांता कुमार को भी इस बारे पत्र लिखा, मगर जवाब आय़ा कि राज्य सरकार का मामला है और वह कुछ नहीं कर सकते। एक लेटर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को लिखा गया और वहां से सख्त आदेश आने के बाद कागजी कार्रवाई तो हुई, मगर इसे टाल दिया गया।

आखिर में परिवार सहित अमित ने डलहौज़ी की विधायक से भेट की और उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत ही सड़क निर्माण करवाने का आशवासन दिया। इस तरह से लोक निर्माण विभाग हर बार दो-तीन महीनों में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का आशवासन देता रहा। इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही होती नहीं दिखी। एक लेटर राष्ट्रपति और महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को लिखा। राष्ट्रपति भवन ने अपर मुख्य सचिव अनुपम कश्यप लोक निर्माण विभाग को लेटर भेजा व उचित कार्यवाही करने को लिखा। प्रधान सचिव राज्यपाल हिमाचल प्रदेश, राज भवन शिमला से भी अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने का लिखित निर्देश हुआ, मगर अब तक कुछ नहीं हुआ।

आज भी अमित को 600 मीटर सड़क के लिए जगह-जगह भटकाया जा रहा हैं। पिछले तीन साल से निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। विकलांग अधिकार अधिनियम-1995 के अनुसार इस सड़क को तुरंत बनाया जना चाहिए था। वैसे भी यह सड़क एक व्यक्ति के लिए नहीं, पूरे गांव के लिए फायदेमंद होगी। आखिर में अमित ने फैसला लिया है कि एक महीने के अंदर काम शुरू नहीं हुआ तो परिवार के साथ जिला प्रशासन के दफ्तर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।

(पाठक अजय राणा की इनपुट के साथ)

जानिए, HRTC की हड़ताल पर क्या बोले परिवहन मंत्री जी.एस. बाली

शिमला।।

एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर परिवहन मंत्री जी.एस बाली ने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से टिप्पणी की है। भावनात्मक रूप से बाली ने लिखा है कि वह हमेशा से HRTC कर्मचारियों की भलाई के लिए काम करते रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों से काम पर वापस लौटने की अपील की है और तब तक जनता से गुजारिश की है कि अन्य वैकल्पिक साधनों को इस्तेमाल करे। बाली की फेसबुक पोस्ट का टेक्स्ट नीचे है-

‘मैंने HRTC को हमेशा अपना परिवार समझा है। जब से निगम की स्थापना हुई है, तबसे लेकर आज तक का रेकॉर्ड देख लिया जाए, यह साफ हो जाएगा कि किसके कार्यकाल में निगम और इसके कर्मचारियों के हित में सबसे ज्यादा फैसले लिए गए, किसने निगम में सुधारवादी कदम उठाए और कौन इसे आधुनिकता की तरफ ले गया।

जहां तक अभी की हड़ताल की बात है, पेंशन वगैरह जैसे तात्कालिक मामलों संबंधित मांगें मान ली गई हैं और अन्य को मुख्यमंत्री जी के पास भेज दिया गया है। फिर भी कुछ कर्मचारी नेता, जो महिलाओं और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए चर्चित रहे हैं, भोले-भाले कर्मचारियों को अपनी राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

मैं मंत्री पद पर बैठा हूं, इसलिए मैं अपनी जिम्मेदारी समझता हूं कि न तो मेरे तहत आने वाले विभागों के कर्मचारियों को कोई दिक्कत हो, न उनके परिवार को और न ही उन विभागों से वास्ता रखने वाली जनता को। इसके लिए मैंने हमेशा जी-जान से कोशिश की है और कोई मुझे निजी स्वार्थ के लिए ब्लैकमेल नहीं कर सकता।

निगम के कर्मचारियों से अपील है कि वे काम पर लौट आएं, अपने विवेक से काम लें। जनता से गुजारिश है कि वह कारपूलिंग या अन्य वैकल्पिक परिवहन साधनों का प्रयोग करे। बाकी यह मामला माननीय हाई कोर्ट से संज्ञान में है, आखिरी फैसला उसी पर निर्भर करता है।’

 

गौरतलब है कि कर्मचारी हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद हड़ताल पर गए हैं और कोर्ट ने कहा है कि आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई भी होगी। इस बीच निगम को एक दिन काम न होने से 2 करोड़ रुपये का घाटा होने का अंदाजा लगाया गया है।

लेख: कहीं राजनीतिक हथियार तो नहीं बन गए HRTC कर्मचारी?

  • आई.एस. ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में अव्यवस्था का मौहाल है। प्रदेश की जीवनधारा कही जाने वाली एचआरटीसी के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद कर्मचारियों ने संघर्ष का रास्ता अपनाया और 14 और 15 जून को हड़ताल कर दी। कर्मचारियों की मांगों पर नजर डालें तो ये मांगें जायज नजर आती हैं। इनमें से अधिकतर मांगों को तुरंत मान लिया जाना चाहिए, क्योंकि हर किसी को अधिकार है कि उसे वक्त पर अच्छा वेतन मिले और समय पर पेशन मिले। अन्य सरकारी कर्मचारियों जैसे अधिकार पाना HRTC के कर्मचारियों का अधिकार है।

क्या है मामला?
गौरतलब है कि परिवहन कर्मचारी चाह रहे हैं कि HRTC, जो कि एक निगम (Corporation) है, उसे रोडवेज में बदल दिया जाए। यानी अभी वे अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों के तहत नहीं हैं और उनसे सर्विस रूल्स वगैरह कॉर्पोरेशन के हैं। कर्मचारियों की यह मांग जायज है, मगर इसपर फैसला सिर्फ और सिर्फ प्रदेश कैबिनेट ले सकती है और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को इसकी मंजूरी देनी है। मगर वीरभद्र सिंह कह चुके हैं कि निगम को रोडवेज में बदलना मुश्किल है।

मगर इस हड़ताल को लेकर बहुत सी बातें चौंकाने वाली हैं। इस हड़ताल की टाइमिंग, इसका आह्वान करने वाला संगटन, नेताओं की बयानबाजी कई सवाल खड़े करती है। इन हिमाचल को गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि एचआरटीसी के कर्मचारियों की भावनाओं से खेलते हुए उनका राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। कैसे, आइए नजर डालते हैं।

– हड़ताल करने वाला संगठन इंटक है, जो कि कांग्रेस का मजदूर संगठन है। इस वक्त हिमाचल प्रदेश में इंटक की सरकार है, बावजूद इसके इस संगठन का हड़ताल पर जाना बहुत से लोगों को पच नहीं रहा।

– इंटक के एचआरटीसी नेता अक्सर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीब देखे जाते हैं। ये नेता वक्त-वक्त पर अपनी प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री के प्रति जाहिर करते रहे हैं और उनके कार्यक्रमों में शिरकत करते भी दिखते हैं।

– कोर्ट जाने की नौबत नहीं आती, अगर मुख्यमंत्री वीरभद्र (जो कि राज्य के मुखिया हैं और परिवहन मंत्री से भी ऊपर हैं) इस मामले में सुलझाने वाला रवैया अपनाते। उन्होंने कोई अपील नहीं की और न ही कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की कि वे हड़ताल पर न जाएं।
– जब मुख्यमंत्री ने निगम को रोडवेज में बदलने की मांग को खारिज कर दिया तो नाराजगी उनके प्रति क्यों नहीं है?

– मुख्यमंत्री चाहते तो हिमाचल प्रदेश एसेंशल सर्विसेज़ मेनटेनेंस ऐक्ट 1973 के प्रावधान के तहत इस हड़ताल को गैर-कानूनी घोषित कर देते, ताकि लोगों को परेशानी न हो और बातचीत से मसला सुलझाया जा सके। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

चर्चा है कि एचआरटीसी कर्मचारियों की नाराजगी और उनके गुस्से को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वीरभद्र सिंह और परिवहन मंत्री बाली के बीच का 36 का आंकड़ा किसी से छिपा नहीं है। आए दिन वीरभद्र सिंह बाली की बातें काटते नजर आ जाते हैं तो बाली खुद भी मुख्यमंत्री के रुख से उलट बातें करते नजर आ जाते हैं।

बाली पिछले दिनों से काफी ऐक्टिव दिख रहे हैं और सोशल मीडिया आदि पर उनकी मौजूदगी से लोगों के बीच में उनकी पहुंच बढ़ी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को कसने से लेकर नई बसों को चलाने और लोगों की समस्या पर तुरंत ऐक्शन लेने की वजह मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे बाली को वीरभद्र के बाद मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी देखा जाने लगा है।

Chief minister Virbhadra singh inspecting the buses proposed for Himachal Pradesh under JNNURM at Tapovan near Dharamsala on Thursday. photo by Kamaljeet.

इस वक्त हड़ताल होने से लोगों को असुविधा हो रही है और वे नाराज हैं। इसका सीधा ठीकरा यह सरकार बाली से सिर पर फोड़ती दिख रही है। हड़ताल में जाने के बाद कर्मचारी नेताओं का बाली हो हटाने की मांग करना और उन्हें तानाशाह दिखाना राजनीतिक पंडितों को हजम नहीं हो रहा। माना जा रहा है कि इस हड़ताल के जरिए जनता में ऐसा इंप्रेशन डालने की कोशिश है कि बाली की वजह से ही यह हड़ताल हुई और इसी वजह से लोगों को असुविधा हो रही है।

यह साफ है कि प्रदेश सरकार के भीतर कुछ भी ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री और उनके प्रमुख मंत्रियों के बीच अगर इसी तरह से खींचतान होती रहेगी तो नुकसान प्रदेश और प्रदेश की जनता का होगा। इस मामले में भी सीधा नुकसान जनता का हो रहा है। प्रदेश के नेताओं को चाहिए कि आपकी मतभेदों को भुलाकर जनता के हितों के बारे में सोचे।

(लेखक इन हिमाचल के नियमित स्तंभकार हैं)

अब CPS नीरज भारती ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रति इस्तेमाल की अभद्र भाषा

इन हिमाचल डेस्क।।

ज्वाली से कांग्रेस के विधायक और हिमाचल प्रदेश सरकार में शिक्षा विभाग संभाल रहे मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने अब बीजेपी की सीनियर नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रति अभद्र भाषा इस्तेमाल कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य बीजेपी नेताओं के प्रति अभद्र भाषा इस्तेमाल करते रहने वाले नीरज ने सुषमा स्वराज को ‘नचनिया’ करार दिया है।

Bharti post

फेसबुक पोस्ट में सुषमा स्वराज की तस्वीर के साथ डाले मेसेज में भारती ने लिखा है, ‘आजकल ये नचनियाँ भी कहीं नाचते हुए दिखाई नहीं देती और इसके पीछे खड़ा हिमाचल प्रदेश से भाजपा का सांसद और बीसीसीआई का दलाल ये भी ठुमके लगाता कहीं नजर नहीं आता….. पहले तो ये नचनियों की हिट जोड़ी FDI और महंगाई के विरोध में डांस इंडिया डांस करते थी….. अब कहाँ है ये सलीम और अनारकली कोई मुजरा – वुजरा नहीं करेंगे क्या ये अब…..’

आजकल ये नचनियाँ भी कहीं नाचते हुए दिखाई नहीं देती और इसके पीछे खड़ा हिमाचल प्रदेश से भाजपा का सांसद और बीसीसीआई का दलाल …

Posted by Neeraj Bharti on Thursday, June 9, 2016

गौरतलब है कि बीजेपी नीरज भारती की बदजुबानी को लेकर कई बार मुख्यमत्री वीरभद्र से मिल चुकी है। बीजेपी अध्यक्ष सतपात सत्ती ने जब वीरभद्र सिंह को नीरज भारती की पोस्ट्स के प्रिंट देने चाहे थे तो वीरभद्र ने उन्हें वापस फेंक दिया था। भारती के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, कई मौकों पर अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन देते नजर आए। गौरतलब है कि इससे पहले नरेंद्र मोदी, उनकी पत्नी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और बाबा रामदेव समेत कई नेताओं के प्रति अभद्र शब्द इस्तेमाल कर चुके हैं।

पढ़ें: नीरज भारती ने प्रधानमंत्री को दी गाली

शर्मनाक बात यह है कि प्रदेश के शिक्षा विभाग जैसे अहम डिपार्टमेंट का मुख्य संसदीय सचिव उन्हें बनाया गया है। यह मंत्रालय मुख्यमत्री ने अपने पास रखा है और नीरज भारती इस महकमे के सीपीएस (एक तरह से जूनियर मिनिस्टर की तरह के पदाधिकारी) हैं। आलम यह है कि कांग्रेस के प्रबुद्ध नेता और युवा कार्यकर्ता भी इस मामले में खामोशी की चादर ओढ़े बैठे हैं।

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वीरभद्र से लगातार दूसरे दिन पूछताछ, सीबीआई को हजम नहीं हो रहे जवाब

इन हिमाचल डेस्क।।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। दरअसल गुरुवार को सवालों के मिले जवाबों से सीबीआई संतुष्ट नहीं थी। ऐसे में वीरभद्र शुक्रवार सुबह 11 बजे फिर सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। इससे पिछले दिन उनसे 7 घंटों तक पूछताछ हुई थी।

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‘इन हिमाचल’ को सूत्रों से जानकारी मिली है कि जब सीबीआई के अधिकारियों ने वीरभद्र के सामने सबूत रखकर सवाल किए तो वह सफाई देने में नाकाम साबित हुए। सूत्र ने बताया कि सीबीआई के पास वीरभद्र के पास कड़े सबूत हैं। बच्चों और पत्नी के नाम पर जोड़ी गई संपत्ति को लेकर वीरभद्र ही नहीं, उनके सहयोगियों और पार्टनर्स के खिलाफ भी सीबीआई ने पर्याप्त सबूत होने का दावा किया है।

सीबीआई ने जांच में पाया है कि 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति जोड़ी, जो उनके आय के ज्ञात स्रोतों से होने वाली आमदनी से कहीं ज्यादा है। वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और यूनिवर्सल ऐपल असोसिएट्स लिमिटेड चुन्नी लाल चौहान के खिलाफ प्रिवेंशन और करप्शन ऐक्ट के तहत एफआईआर भी दर्ज हुई है।

बांसुरी की तान से मंत्रमुग्ध करने वाले करीब 100 साल के बुजुर्ग झाबे राम

मंडी।।

आज हम आपको जिस शख्सियत से मिलवाने जा रहे हैं, उनकी बांसुरी की धुन सुनकर आपका मन खुश हो जाएगा। इंटरनेट पर हमें यह विडियो मिला और फिर इसके बाद इनके बारे में पता लगाने की कोशिश की। जानकारी मिली कि इनका नाम झाबे राम है और यह थुनाग (मंडी जिला) के गांव शेगला के रहने वाले हैं। कुछ महीने पहले इनके पोते से हमें जानकारी मिली थी कि इनकी उम्र 100 साल के करीब है, फिर भी वह एकदम फिट हैं।

इन हिमाचल के पाठक पवन शर्मा, जो उनके पोते हैं ने बताया था कि झाबे राम इस उम्र में भी खुद मेहनत करके पैसे कमाकर जीवन-यापन करते हैं। उनके 5 बेटे और 3 बेटियां हैं, मगर झाबे राम जी नहीं चाहते कि वह किसी पर बोझ न बनें और खुद ही मेहनत करते हैं।

झाबे राम जी।
झाबे राम जी।

जानकारी मिली कि उन्होंने बहुत मेहनत की है और शून्य से ऊपर उठे हैं। गांव में आज भी उनकी खूब पूछ है और सबसे समझदार और बुजुर्ग आदमी माना जाता है। हर काम करने से पहले उनकी राय जरूर ली जाती है। कहा जाता है कि जवानी के वक्त वह इतने ताकतवर थे कि आसपास के किसी गांव का व्यक्ति ताकत के मामले में उनका मुकाबला नहीं कर सकता था।

वह देव सराज घाटी के बड़े देव मतलोड़ा के पुजारी भी हैं। उनकी बांसुरी की तान सुनने को गांव  के लोग बेकरार रहते हैं। वह साथ में पारंपरिक लोकगीत भी गाते हैं, जो शायद आज की पीढ़ी में किसी को नहीं आते। उनकी हमेशा से ख्वाहिश रही कि लोग उनकी कला को पहचानें और इसे आगे बढ़ाएं। इस वक्त उनकी सेहत कैसी है, इस बारे में हमने उनके पोते से संपर्क करने की कोशिश की, मगर फेसबुक पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। बहरहाल, आप देखें यह विडियो

झाबे राम जी का पता इस तरह से है- झाबे राम, गांव झेगला, पोस्ट ऑफिस- बागाचनोगी, तहसील- थुनाग, मंडी, हिमाचल प्रदेश, पिन- 175035.

हिमाचल का बेटा दौड़कर नापेगा दिल्ली से मुंबई की दूरी

MBM न्यूज नेटवर्क, नाहन।।

हम और आप शायद इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि दिल्ली से मुंबई तक दौड़कर पहुंच जाएं। मगर ‘ग्रेट इंडिया रन’ के तहत कुछ लोगों को इस काम को करने का मौका मिलेगा। यह अल्ट्रा मैराथन है, जिसके लिए देश-दुनिया से कुछ ही लोगों को मौका मिला है। सिरमौर की माइना पंचायत का रहने वाला हिमाचल का लाल सुनील भी इन चुनिंदा लोगों में एक है।

इस अनोखी रेस के लिए एक महीने से भी कम वक्त बचा है, इसलिए तैयारी में सुनील कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सुनील को विश्वास है कि वह इस काम को पूरा कर लेंगे, क्योंकि 18 दिन के अंदर इसे पूरा करना है। कुछ महीने पहले सुनील ने चंडीगढ़ से दिल्ली तक दौड़ लगाकर ध्यान बटोरा था। 8 घंटे तक लगातार मूसलाधार बारिश के बावजूद वह हटे नहीं थे।

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क्या तैयारी कर रहे हैं सुनील
– हर रोज 60 किलोमीटर दौड़ रहे हैं।
– अलग-अलग मौसम के हिसाब से ढलने के लिए हमीरपुर के नादौन में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
– सुबह तीन घंटे दौड़ते हैं।
– शाम के वक्त दो से तीन घंटे व्यायाम करते हैं।
– नादौन पहुंचने से पहले सुनील ने चंडीगढ़ में साइकलिंग व तैराकी की।
– इस माह के दूसरे सप्ताह में नाहन पहुंचकर यहां के तापमान में कुछ दिन तैयारी करेंगे।
– अंतिम चरण में रोजाना श्रीरेणुका जी जमदग्रि टिब्बे की चढ़ाई को प्रतिदिन नापेंगे।
– 8 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई में भी तैयारी में कोई समझौता नहीं होगा।

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क्या ले रहे हैं डाइट
खास बात यह है कि सुनील पूरी तरह शाकाहारी हैं। वह रोजाना तीन लीटर दूध पी रहे हैं और करीब 100 ग्राम ड्राई फ्रूट्स का रहे हैं। दो-तीन लीटर जूस पीते हैं। किट तो स्पॉन्सर्ड है, मगर डाइट का खर्च खुद उठा रहे हैं।

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सड़क हादसों से व्यथित गडकरी ने हिमाचल से किया एक वादा

MBM न्यूज नेटवर्क, सोलन।।

खराब मौसम के बावजूद हिमाचल पहुंचे केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार हिमाचल की सड़कों की तस्वीर बदलकर रख देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाया जाएगा।

जनसभा को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, ‘मीडिया से जब मुझे दुर्घटनाओं की जानकारी मिलती है तो मैं द्रवित हो जाता हूं। इसी व्यथा के कारण मैं चाहता हूं कि देवभूमि की सडक़ें बेहद सुरक्षित हो जाएं। लिहाजा केंद्र सरकार प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू करने जा रही है।’

गडकरी ने कहा, ‘इससे यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी काम मौजूदा एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही पूरे हो जाएं। देवभूमि में प्रस्तावित हाईवे अब सीमेंट से बनाए जाएंगे और दो पीढ़ियों तक उन्हें इस्तेमाल किया जा सकेगा।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसे लेकर महाराष्ट्र में प्रयोग किया गया था, जो कामयाब रहा।

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गडकरी ने संसदीय क्षेत्र में 9 राज्य मार्गों का दर्जा नैशनल हाईवे करने का भी ऐलान किया है। इसमें सनौरा-राजगढ़-रोहनाट-जामली, कफोटा-जाखना-हीरपुर, सतौन-जमटा-दोसडक़ा, साधुपुल-चायल-कुफरी, सोलन-सुबाथू, रोहडू-डोडराक्वार, सैंज-देहा-चौपाल व रोहनाट-जामली शामिल हैं।

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इस मौके पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश को विकास में आगे बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सडक़ों का निर्माण कठिन कार्य है, फिर भी प्रदेश की तस्वीर बदलने की कोशिश की जा रही है।

Forlaneइस कार्यक्रम के बाद गडकरी ने परवाणु से शिमला फोरलेन निर्माण का शिलान्यास किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी मौजूद थे। 89.51 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन को बनाने में 2.545 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

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