स्कूल के ड्राइवरों का आरोप- फीस के नाम पर निकाल दिए हमारे बच्चे

कांगड़ा।। नूरपुर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले 6 बच्चों के अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि फीस जमा न होने पर उनके बच्चों को स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अभिभावक इसकी शिकायत को लेकर गुरुवार को डी.सी. कांगड़ा से मिलने पहुंचे। जिन बच्चों को कथित तौर पर स्कूल से बाहर निकाला गया, वे पहली व दूसरी कक्षा के हैं।

जानकारी के मुताबिक उक्त अभिभावक अपने बच्चों के साथ सुबह लगभग 10 बजे डी.सी. कांगड़ा से मिलने डी.सी. दफतर पहुंचे। डी.सी. कांगड़ा को दी शिकायत में उक्त अभिभावकों ने डीएवी स्कूल नूरपुर (बागनी) के प्रबंधन पर बच्चों व उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

बच्चों से मिलते डीसी

शिकायतकर्ता का कहना है कि वे उसी स्कूल में बतौर ड्राइवर सेवाएं देते हैं, जहां उनके बच्चे पढ़ते हैं। संजीव कुमार, संजू और प्रकाश आदि का कहना है कि जिस समय बच्चों की स्कूल में एडमिशन दी थी तो उस बच्चों की फीस 120 रुपए थी। उसके बाद स्कूल द्वारा दूसरे सेशनन में फीस को 1060 रुपए कर दिया।

उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2018 तक हम सभी अभिभावकों ने बच्चों की फीस 1060 रुपए के हिसाब से दे दी परंतु उसके बाद स्कूल के प्रिंसीपल ने फीस लेने से मना कर दिया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब प्रिंसीपल ने उन्हें अक्तूबर 2018 से लेकर मार्च 2019 तक 2380 रुपए के हिसाब से फीस जमा करवाने के लिए कहा है।

डीएवी स्कूल नूरपुर (बागनी) के प्रिंसिपल पर स्कूल के आधा दर्जन ड्राइवर और कंडक्टरों ने लगाया आरोप- फीस को लेकर हमारे बच्चों को हाथ पकड़कर स्कूल से बाहर कर दिया गया। डीसी से मुलाकात कर लगाई मदद की गुहार।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಮೇ 30, 2019

परेशान अभिभावकों का कहना है कि मार्च महीने में प्रिंसीपल ने बच्चों का रिपोर्ट कार्ड भी नहीं दिया। उसके बाद उन्होंने नूरपुर एस.डी.एम. के सहयोग से रिपोर्ट कार्ड प्राप्त किए। अभिभावकों का कहना है कि वह फीस देने को तैयार हैं परंतु प्रिंसीपल मानने को तैयार नहीं है। इसके उपरांत प्रिंसीपल ने बच्चों को स्कूल से निकाल दिया था कि अब बच्चों को स्कूल में आने की कोई जरूरत नहीं है।

क्या बोले डीसी
इस मामले में स्कूल प्रबंधन का पक्ष सार्वजनिक नहीं हो पाया है। स्कूल की ओर से कोई बयान आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। बहरहाल, इस मामले पर डी.सी. कांगड़ा संदीप कुमार ने कहा कि आज बच्चों के साथ उनके माता-पिता मेरे पास आए थे।

उन्होंने कहा, “मामले पर कार्रवाई की जाएगी। एक दिन के भीतर समाधान किया जाएगा और किसी भी बच्चे को स्कूल से नहीं निकाला जाएगा”

पुलिस बोली- शिमला में युवती का न तो अपहरण हुआ न बलात्कार

शिमला।। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हिमाचल को चौंकाकर रख देने वाली शिमला में युवती के अपहरण और बलात्कार के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस का कहना है कि फरेंसिक जांच में रेप के साक्ष्य नहीं मिले हैं और संभवत: युवती ने अपने दोस्त की अटेंशन पाने के लिए कहानी रची थी। वहीं युवती का कहना है कि उसे शुरू से ही पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं था। हालांकि पुलिस का कहना है कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है।

क्या है मामला
इस मामले में कई मोड़ आए और पुलिस पर भी सवाल उठे। मूलत: हरियाणा की और शिमला में रहकर नीट की तैयारी कर रही युवती ने ढली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में कहा था कि उसके साथ चलती कार में एक व्यक्ति ने अपहरण कर दुष्कर्म किया।

युवती का कहना था कि कार में कुल तीन लोग बैठे थे और फिर इसके बाद वे उसे सड़क पर फेंक कर चले गए थे। लड़की ने पुलिस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसे पहले ही अनहोनी का अंदेशा हो गया था इसलिए वह लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी भी गई थी जहां से उसे ढली जाने के लिए कहा गया।

क्या कहती है पुलिस
मिनी सचिवालय सोलन में आपराधिक मामलों पर आयोजित बैठक में डीजीपी एसआर मरडी ने पहली बार शिमला में युवती से दुष्कर्म मामले में पुलिस जांच को सामने रखा। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में युवती से दुष्कर्म के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि जांच में न तो अपहरण के कोई साक्ष्य मिल रहे हैं। डीजीपी का कहना था कि लड़की के बयान मौजूदा हालात से मेल नहीं खा रहे हैं। चर्चा में रहने के लिए लड़की पहले भी इस तरह के आरोप और बयान दे चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है उसके बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

एसआईटी ने भी दावा किया है कि जांच में पता चला है कि जहां से लड़की ने अपहरण और बलात्कार होने का दावा किया था, उस इलाके की सीसीटीवी फुटेज में वह पैद जाती दिख रही है और उसी समय वहां 30-40 गाड़ियां गुजरी थीं। मामले की जांच कर रहे एसआईटी प्रमुख प्रवीर ठाकुर ने फरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि एफआईआर में युवती ने जो अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप लगाए थे वह साबित नहीं हुए हैं।

पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट से भी जाहिर हो रहा है कि जिस दिन की वह बात कर रही है, उस दिन उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ। फरेंसिक रिपोर्ट में भी युवती के कपड़ों पर ऐसे कोई साक्ष्य (बॉडी फ्लूइड आदि) न मिलने की बात कही जा रही है, जिससे इस नतीजे पर पहुंचा जा सके कि युवती सही कर रही है।

लड़की पर उठे सवास, लड़की ने पुलिस पर उठाए सवाल
यही नहीं, युवती को जो चोट आई थी, मेडिकल ऑपिनियन के मुताबिक वह संभवत: उसने खुद ही खुद को लगाई थी और जिस नुकीली चीज़ से उसने यह किया था, वह उसी के मोबाइल के कवर के पीछे मिली है। फरेंसिक रिपोर्ट के अऩुसार इसपर लगे खून का पीड़िता से मिलान हुआ है। जबकि लड़की का कहना था कि आरोपी ने उसे यह चोट पहुंचाई थी।

हिंदी अखबार अमर उजाला के मुताबिक एसआईटी का कहना है कि लड़की ने यह सब अपने दोस्त की अटेंशन पाने के लिए किया है। मगर इसी अखबार से बात करते हुए लड़की ने कहा है कि उसे शुरू से पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं था। उसने कहा कि अगर मैंने कोई साजिश की है तो पुलिस उसका सबूत दे।

HRTC कंडक्टर और टिकट जांचने वाले में बहस, वीडियो वायरल

इन हिमाचल डेस्क।। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एचआरटीसी की एक बस में यह जांच हो रही है कि कंडक्टर ने यात्रियों को टिकट दिया है या नहीं। वीडियो कब का है, किस रूट का है, इस संबंध में जानकारी नहीं मिल पाई है मगर इसमें नजर आता है कि कंडक्टर सवारियों से पूछ रहा है कि मैंने आपको टिकट दिया है या नहीं और जवाब में यात्री टिकट दिखा रहे हैं और हां में जवाब दे रहे हैं।

मगर टिकट निरीक्षक नजर आ रहे शख्स और कंडक्टर के बीच गहमागहमी हो रही है। कंडक्टर अपनी बात कहना चाहता है मगर निरीक्षक सुनने को तैयार नहीं है। बस के अंदर से लेकर निरीक्षक के उतर जाने तक की हर बात इस वीडियो में रिकॉर्ड हुई है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे लोग अब निरीक्षक के व्यवहार को गलत बता रहे हैं और उनका मानना है कि कंडक्टर के साथ मनमानी की गई है।

गौर करने वाली बात है कि एक साल पहले भी एक वीडियो आया था और उसमें निरीक्षक पर मनमनाी का आरोप लगा था। इस बार के भी वीडियो वह निरीक्षक भी नज़र रहा है। पहले तो आप देखें, स्पीक आउट हिमाचल पेज पर शेयर किया गया ताजा वीडियो-

पिछले साल जनवरी में भी एक निरीक्षक पर कंडक्टर को टारगेट करने का आरोप लगा था। उस समय भी यात्रियों के दखल देने पर निरीक्षक को जाना पड़ा था। वह निरीक्षक नए वीडियो में भी नज़र आता है। देखें वीडियो।

इन दोनों वीडियो में क्लीन शेव, सिर पर मेहंदी लगे हुए बालों वाला शख्स नजर आ रहा है।

बहुत बार ड्यूटी को ईमानदारी से निभाने वाले सख्त अधिकारी बिना वजह भी टारगेट हो जाते हैं और जनता भावनात्मक रूप से किसी भी साथ दे देती है। इसलिए ताजा मामले में कौन दोषी है कौन सही, यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा। इस संबंध में और सूचना मिलने पर इस आर्टिकल को अपडेट किया जाएगा।

इससे पहले भी इस तरह के वीडियो वायरल होते रहे हैं जिनमें पास लेने के दौरान ड्राइवरों में बहस, कंडक्टर की सवारियों से बहस या फिर निरीक्षकों की कंडक्टरों से बहस होती नजर आती है।

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नीरज भारती ने भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दी मारपीट की शिकायत

एमबीएम न्यूज, जवाली।। शनिवार को जवाली में हंगामा करने वाले पूर्व विधायक और कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे नीरज भारती और अन्य कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की है।

भारती के अलावा कांग्रेसी कार्यकर्ताओं विनय कुमार, संसार सिंह संसारी, मनु शर्मा, सुरिंदर छिंदा, राजिंदर कुमार, मनवीर सिंह इत्यादि ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है कि शनिवार को गैस एजेंसी ज्वाली के समीप समीप उनके ऊपर हमला किया गया।

शिकायत में हमले का आरोप जतिंदर सिंह पुत्र त्रिलोक चन्द, नरेंद्र सिंह उर्फ शिंटू पुत्र त्रिलोक चन्द, नितिश पुत्र रसाल सिंह, गोगी पठानिया पुत्र हरबंस सिंह, अनूप कुमार पुत्र प्रेम चन्द, दीपू राणा पुत्र दिलबाग सिंह,अरुण गुलेरिया पुत्र जसवंत सिंह, मनु पठानिया पुत्र जोगिंदर सिंह, सुलक्षण शर्मा पुत्र सुभाष चंद, कुलवीर सिंह पुत्र ईश्वर सिंह,सतीश कुमार पुत्र चानन ,पंकज डोगरा व तरसेम सिंह पर लगाया गया है।

क्या है शिकायत में
भले ही खुद किए फेसबुक लाइव में भारती विरोधियों को ललकारते नजर आ रहे थे मगर शिकायत में पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने कहा कि 25 मई को वह अपने घर आ रहा थे तो जतिन्द्र सिंह ने उनकी फेसबुक आईडी पर कमेंट करना शुरू कर दिए व अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

उन्होंने शिकायत दी है, “जब मैं अपनी स्टील इंडस्ट्री को जाने लगा तो मेरे दोस्त गैस एजेंसी के पास मुझसे मिलने को खड़े हो गए। मैंने उनसे बातचीत करनी शुरू कर दी। इतनी ही देर में जतिंदर सिंह सहित अन्य वहां पर आ गए और मुझसे व मेरे दोस्तों से लड़ाई-झगड़ा करना शुरू कर दिया।”

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शिकायत में कहा है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

एसपी कांगड़ा सन्तोष पटियाल ने कहा कि पूर्व सीपीएस नीरज भारती सहित अन्य ने पुलिस थाना ज्वाली में शिकायत दी है। उन्होंने कहा कि इस पर भी छानबीन करके कार्रवाई शुरू की जाएगी।

बता दें कि कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे नीरज भारती व भाजपा कार्यकर्ता जतिंद्र सिंह के बीच फेसबुक पर चल रही लड़ाई शनिवार को सड़क पर आ गई थी। इस मामले में पुलिस ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर पूर्व सीपीएस नीरज भारती सहित अन्य लोगों के खिलाफ धारा 147,149,143,341,506,504 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

अनोखा प्रचार भी न आया काम, दादा का सपना पूरा नहीं कर पाए आश्रय

इन हिमाचल डेस्क।। मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार आश्रय शर्मा की हार हिमाचल प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। वैसे तो इस बार पूरे प्रदेश में ही चारों सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों ने बहुत बड़े अंतर से कांग्रेस प्रत्याशियों को हराया है, लेकिन मंडी सीट को लेकर चर्चा ज्यादा इसलिए हो रही है क्योंकि यहां अजीब स्थिति पैदा हो गई थी। आश्रय शर्मा, उनके पिता अनिल शर्मा और दादा सुखराम 2017 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे और फिर अनिल शर्मा मंडी से बीजेपी के विधायक बनकर जयराम सरकार में मंत्री भी बने थे।

मगर पहले आश्रय बीजेपी से टिकट मांगते रहे और जब नहीं मिला तो कांग्रेस में चले गए। ऐसी स्थिति में अनिल शर्मा को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और घर पर बैठना पड़ा क्योंकि वह आश्रय के लिए प्रचार भी नहीं कर सकते। ऐसा करते तो उनकी विधायकी भी जाती। नए हालात में दादा और पोता दोनों ही प्रचार करते घूमे। इस दौरान सुखराम और आश्रय मंच से भावुक होते भी दिखे। सुखराम ने भावुक अपील की कि मैं अपना पोता आपको सौंप रहा हूं, यह मेरी कमी महसूस नहीं होने देगा। अनिल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने पर दादा-पोता दोनों भावुक होकर रोते हुए नज़र आए थे।

आंसू भी न आए काम
एक मंच से तो सुखराम लगभग रोने ही लगे और रुंधे हुए गले से बात करने लगे। दादा की यह स्थिति देख आश्रय भी मंच पर भावुक हो गए और आंसुओं पर काबू पाते नजर आए। प्रचार के दौरान जहां भी आश्रय गए, उन्होंने रामस्वरूप शर्मा के पांच के साल बतौर सांसद कार्यकाल को नाकामयाब तो बताया ही, भावनात्मक रूप से यह अपील की कि वह अपने दादा की इच्छा पूरी करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। यह कहते हुए वह भावुक भी हो जाते। चूंकि सुखराम इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे, इसलिए आश्रय की कोशिश रही होगी कि दादा के नाम पर लोगों से कनेक्ट करने में उन्हें आसानी होगी।

वायरल वीडियो
इसी बीच 21 मई को एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने लगा, जिसमें आश्रय कार में बैठकर रो रहे हैं। फिर पास खड़े लोग शीशा खोलकर आश्रय की हिम्मत बढ़ाते हैं और कहते हैं कि ठंड रखो। इसके बाद वे आश्रय का मनोबल बढ़ाने के लिए कहते हैं- पूरा इलाका आपके साथ है और फिर नारेबाजी करते हैं। यह वीडियो कहां का है, पता नहीं मगर इससे संकेत मिलते हैं कि आश्रय की प्रचार शैली कैसी थी। इस वीडियो को लोग नतीजों के बाद का वीडियो बता रहे हैं मगर है यह पहले का। वीडियो देखें-

जिस समय नेता को हिम्मत रखनी चाहिए, मजबूती से सामने वाले प्रतिद्वंद्वी को चुनौती देनी चाहिए, उस समय आंसू बहाना शायद लोगों को जमा नहीं और उनकी इस भावनात्मक अपील का भी कोई असर नहीं हुआ। नतीजा यह है कि रामस्वरूप शर्मा को जहां 6,47,189 वोट मिले, वहीं आश्रय 2,41, 730 पर सिमटकर रह गए। यह बहुत बड़ा अंतर है और साफ है कि वह मुकाबले में आसपास भी नहीं थे।

सुखराम परिवार का प्रभाव कितना
इस हार से दो-तीन बातें साफ हुई हैं। एक तो यह कि इस बार वोट मोदी के नाम पर पड़ा है, दूसरा यह कि पंडित सुखराम और उनके परिवार का यह भ्रम भी टूट गया कि उनका मंडी में बहुत प्रभाव है। वे प्रचार कर रहे थे कि मंडी से विधानसभा के लिए बीजेपी की 10 सीटें इसलिए आई हैं क्योंकि पंडित सुखराम बीजेपी में आए थे। जबकि हकीकत यह है कि इन सीटों को तो वैसे ही आना था क्योंकि पूरे प्रदेश में ही बीजेपी के पक्ष में उस समय माहौल था। अब शायद वे पत्रकार साथी भी सुखराम के लिए ‘चाणक्य’ शब्द इस्तेमाल करना बंद कर देंगे, जो जमीनी हालात से वाकिफ नहीं थे या शायद जनता को वाकिफ नहीं करवाना चाहते थे।

कांग्रेस की हार पर बोले नीरज भारती- भाजपाइयों को कुछ नहीं कहूंगा

कांगड़ा।। आम चुनावों में पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी को मिली जीत और हिमाचल में भी बीजेपी उम्मीदवारों के जीतने के बाद कांग्रेस के नेता और पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने कांग्रेस पार्टी ही हार की ही जिम्मेदारी ले ली है। उन्होंने इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता के रूप से भी इस्तीफा देने का ऐलान किया है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मैं आज से भाजपा के नेताओं के विरोध में कोई पोस्ट नहीं करूंगा। इसके पीछे की वजह बताते हुए फेसबुक पर नीरज भारती ने लिखा है- जब कमी अपने में हो तो दूसरे को दोष दे कर क्या फायदा। हालांकि उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस उनके खून में है।

आख़िर में उन्होंने भाजपा की सरकार बनने पर भाजपाइयों को शुभकामनाएं दी हैं मगर ज्वाली से अपने प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा विधायक को लेकर आक्रामक भाषा इस्तेमाल की है। उस हिस्से को तो हम नहीं प्रकाशित कर सकते, मगर पहला हिस्सा आप नीचे पढ़ सकते हैं।

“मैं भी कांग्रेस पार्टी की हार की जिम्मेवारी लेते हुए अपनी बिना मेंबरशिप वाली कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में इस्तीफा देता हूं, अब से भाजपा या भाजपाई नेताओं के विरोध में कोई पोस्ट नहीं करूंगा, जब कमी अपने में हो तो दूसरे को दोष दे कर क्या फायदा, पर एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी मेरे खून में है और हमेशा रहेगी….. चाहे ईवीएम के बूते ही सही पर जीती हुई इस भाजपा सरकार और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि उसकी अगुवाई में देश पीछे हटने की बजाए आगे बढ़ेगा, सभी भाजपाइयों को भाजपा की सरकार बनने पर शुकामनाएं…..जय हिन्द, जय हिमाचल, जय कांग्रेस.”

गौरतलब है कि नीरज भारती न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी करने के लिए बल्कि हिंदू धर्म की कुछ मान्यताओं पर टिप्पणी करने को लेकर भी लंबे समय से विवादों में रहे हैं। उनके ऊपर मामले भी दर्ज हुए हैं और शिमला पुलिस उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। मगर अब उनका बदला हुआ अंदाज़ कब तक जारी रहता है, यह देखने वाली बात है।

पहले बड़े इम्तिहान में डिस्टिंक्शन के साथ पास हुए जयराम ठाकुर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों की रिकॉर्ड अंतर से जीत के बाद बीजेपी के खेमे में जश्न का माहौल है। यह जीत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि इसे उनके सवा साल के कार्यकाल का इम्तिहान भी माना जा रहा था। उनके गृह जिले की सीट मंडी पर भी सबकी निगाहें थीं और वहां से बीजेपी के रामस्वरूप शर्मा ने कांग्रेस के आश्रय शर्मा को बड़े अंतर से हराया है।

मंडी सीट पर पैदा हुए हालात जयराम के लिए असहज करने वाले ज़रूर नज़र आ रहे थे, मगर नतीजे ने बता दिया कि यहां को लेकर लगाए जा रहे तमाम कयास गलत थे। इन चुनावों ने बता दिया कि न तो सुखराम ‘चाणक्य’ हैं, जैसा कि कुछ पत्रकार उन्हें लिखते हैं, न ही अनिल शर्मा और उनके परिजनों का अब कुछ बूथों से बाहर प्रभाव बचा है।

मंडी सीट ही नहीं, अन्य सीटों, कम से कम कांगड़ा और शिमला में भी चुनाव मोदी के नाम और जयराम के काम के आधार पर लड़ा जा रहा था। इन सीटों पर भी भाजपा प्रत्याशियों ने जीत के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। साथ ही हमीरपुर सीट पर अनुराग की बड़ी जीत के साथ वह अटकलें भी गलत साबित हुई कि पार्टी का एक धड़ा उनके खिलाफ काम कर रहा था।

हिमाचल ने इस बार न सिर्फ 2014 वाले नतीजे दोहराए हैं बल्कि चारों सीटों पर जीत के पिछले आंकड़ों को भी पीछे छोड़ा है। वोट बेशक मोदी के नाम पड़े हैं मगर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर राज्य सरकार के काम से जनता को असंतोष होता तो भाजपा प्रत्याशियों की जीत का अंतर इतना ज्यादा न होता। बहरहाल, मोदी सरकार को फिर जनादेश मिलने के साथ ही यह भी साफ हो गया कि राज्य में जयराम आराम से सरकार चलाते रहेंगे।

जेपी नड्डा इस बार मंत्री बनेंगे या भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष?

इन हिमाचल डेस्क।। भारतीय जनता पार्टी ने 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव ने बंपर जीत हासिल की है। पार्टी अब सरकार के गठन की तैयारी शुरू कर चुकी है और एनडीए की सहयोगी पार्टियों को सरकार में कैसे शामिल करना है, कौन सा मंत्रालय देना है, इसे लेकर चर्चा हो रही है। चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा।

चूंकि अमित शाह इस बार लोकसभा चुनाव लड़कर चुने गए हैं, इसलिए यह तय माना जा रहा है कि वह मंत्री बनेंगे। पहले ये क़यास लगाए जा रहे थे कि वह गृहमंत्री बन सकते हैं, मगर अब चर्चा है कि पार्टी के सीनियर नेता अरुण जेटली खराब सेहत के कारण अगली सरकार में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में कहा जा रहा है कि अमित शाह उनकी जगह वित्त मंत्रालय देखेंगे।

ऐसे में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ही बने रह सकते हैं। सवाल उठता है कि जब अमित शाह सरकार में शामिल हो जाएंगे तो पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा? ऐसे में एक नाम जो सबसे पहले चर्चा में आता है, वह है जगत प्रकाश नड्डा का। उनके अध्यक्ष बनने की चर्चा पहले भी होती रही है मगर इस बार हालात इन चर्चाओं के अनुकूल नजर आ रहे हैं।

जगत प्रकाश नड्डा 2014 में मंत्री बनने से पहले संसदीय बोर्ड में थे, चुनाव समिति के सचिव और हाल ही में यूपी के प्रभारी भी थे जहां पर बीजेपी महागठबंधन के खेल को फेल करने में सफल रही है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के विश्वासपात्र बनकर उभरे नड्डा कई मौकों पर खुद को साबित कर चुके हैं। ऐसे में अब चूंकि अमित शाह सरकार में जाने की तैयारी कर रहे हैं, मोदी और शाह चाहेंगे कि पार्टी का अध्यक्ष उनका ही भरोसेमंद बने। इस पैमाने पर नड्डा फिट बैठते हैं।

अगर ऐसा हुआ तो नड्डा के बीजेपी अध्यक्ष बनने पर हिमाचल से अनुराग ठाकुर के मंत्री बनने का रास्ता भी साफ हो जाएगा, जिन्हें बड़ा नेता बनाने का वादा अमित शाह बिलासपुर में कर चुके हैं।

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अब अनुराग को बड़ा नेता बनाएंगे अमित शाह, कौन सा पद मिलेगा?

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी अनुराग ठाकुर ने बड़े अंतर से कांग्रेस उम्मीदवार रामलाल ठाकुर को पराजित किया है। यह चौथा मौका है जब अनुराग हमीरपुर के सांसद चुने गए है। पहले 2008 में हुए उपचुनाव, फिर 2009 और 2014 के चुनावों में उन्होंने जीत हासिल की थी।

यह चुनाव अनुराग ठाकुर के लिए इसलिए अहम है क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था- “अनुराग मेरा छोटा भाई है आप उसे सांसद बनाओ,बड़ा नेता बनाने की जिम्मेदारी मेरी है।” बिलासपुर में कहे गए अमित शाह के इन शब्दों का क्या मतलब है, यह जल्द ही साफ होने वाला है।

अमित शाह के इन शब्दों का मतलब यह समझा जा रहा था कि उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जाने वाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अनुराग ठाकुर को मंत्री पद मिलना तय है।

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार?
चूंकि जेपी नड्डा हिमाचल से हैं और वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, उन्हें नई सरकार में भी कैबिनेट मंत्री बनाकर रखा जाएगा। ऐसे में अनुराग कैबिनेट मंत्री तो नहीं होंगे, मगर उन्हें स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री बनाया जाएगा यानी वह राज्यमंत्री होंगे और उनका कोई सीनियर मंत्री नहीं होगा।

चूंकि अनुराग युवा हैं, खेल की दुनिया से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें युवा एवं खेल मामलों की ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बहरहाल, ये तो अभी क़यास हैं, कुछ ही दिनों में साफ हो जाएगा कि अमित शाह ने अनुराग के लिए क्या सोचकर रखा है।

अगर नड्डा के साथ उन्हें भी मंत्री बनाया जाता है तो हिमाचल जैसे छोटे राज्य से यह दूसरी बार होगा, जब केंद्र में दो मंत्री होंगे। इससे पहले 2009 में यूपीए सरकार में वीरभद्र सिंह इस्पात मंत्री थे जो मंडी के सांसद थे। साथ ही आनंद शर्मा वाणिज्य और उद्योग मंत्री थे जो हिमाचल से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

अमित शाह के वादे
अमित शाह जो कहते हैं, वह करते हैं। इसका सबूत उस समय मिला था जब वह विधानसभा चुनाव प्रचार करने के दौरान जयराम ठाकुर के लिए कह गए थे कि जयराम को जिताइए, इन्हें सरकार में ऊंचा पद दिया जाएगा। आज जयराम ठाकुर प्रदेश सरकार में सबसे ऊंचे पद यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं।

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गुड़िया केस में थाना फूंकने के अभियुक्त टीचर पर छात्रा से रेप का आरोप

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के शिमला के कोटखाई में एक छात्रा से रेप का मामला सामने आया है।

4 जुलाई 2017 में कोटखाई गैंगरेप और मर्डर में स्थानीय थाने को फूंकने के आरोपी शिक्षक पर ही छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगा है। बताया जा रहा कि छात्रा के गर्भवर्ती होने पर पूरे मामले का पता चला है।

जानकारी के अनुसार, 29 साल के शिक्षक हितेश निजी स्कूल में शिक्षक है। उसने कथित तौर पर नाबालिग छात्रा से दुराचार किया।

कुछ दिन पहले पीड़िता के परिजनों को बेटी के गर्भवती होने की आशंका हुई। इसके बाद सारे मामले का पता चला।

गुड़िया प्रकरण में कोटखाई थाना फूंकने पर 48 लोगों के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चालान दाखिल किया है, इनमें इस आरोपी का नाम भी है।