फ़तेहपुर में एक बार फिर बीजेपी का मुक़ाबला बीजेपी से! यहां बागियों के चलते नहीं हुई 13 वर्षों से वापसी 

फतेहपुर।। फ़तेहपुर में एक बार फिर बीजेपी का मुक़ाबला बीजेपी से ही होता नज़र आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि बीजेपी अपने बाग़ियों के कारण यहाँ क़रीब 13 वर्षों से जीत नहीं सकी है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बनते जा रहे हैं। फ़तेहपुर विधानसभा सीट पर फिलहाल चतुष्कोणीय मुक़ाबला है, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी भवानी सिंह पठानिया और बीजेपी प्रत्याशी राकेश पठानिया को छोड़ दें तो बाक़ी के दो प्रत्याशी बीजेपी के दिग्गज नेता रहे हैं। ऐसे में हर बार की तरह यहाँ बीजेपी का मुक़ाबला बीजेपी से ही है। भाजपा के दो पूर्व सांसद यहाँ से मैदान में हैं। एक आम https://inhimachal.in/news/fatehpur-bjp-eelection-2022-bjp-rebel/आदमी पार्टी तो दूसरे आज़ाद बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं।

बीजेपी ने इस बार प्रयोग के तौर पर नूरपुर की सीट बदलते हुए अपने वन मंत्री राकेश पठानिया को यहां से टिकट देकर चुनाबी मैदान में उतारा है। अब उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी भवानी सिंह पठानिया से पहले बीजेपी के पूर्व दिग्गज नेता और वर्तमान में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. राजन सुशांत से टक्कर मिल रही है। डॉ. राजन सुशांत बीजेपी से कई मर्तबा विधायक, मंत्री और सांसद रह चुके हैं।

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हालांकि फ़तेहपुर में मुक़ाबला त्रिकोणीय ही रहता, लेकिन यहाँ 2017 की तरह बीजेपी के ही एक नेता बाग़ी होकर आज़ाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी समर में कूद गए हैं। इस बार पूर्व राज्य सभा सांसद एवं बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार भी चुनाब भवंर मे कूद पड़े है जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी राकेश पठानिया की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 2017 में इस सीट से बीजेपी ने कृपाल परमार को प्रत्याशी बनाया था। उस दौरान बीजेपी के ही बलदेव ठाकुर निर्दलीय मैदान में उतर आए थे, जो यहाँ से बीजेपी प्रत्याशी कृपाल परमार की हार का बड़ा कारण रहा था।

अभी तक इतिहास गवाह है कि फतेहपुर मे भाजपा ने ही भाजपा का खेल बिगाडा़ है। यही कारण है कि  फतेहपुर में कांग्रेस पिछले 13 वर्ष से विजय भव का आशीर्वाद प्राप्त किए हुए है और इस बार भी बीजेपी के बाग़ी इतिहास दोहराने को तैयार बैठे हैं। हालाँकि नामांकन वापसी की तारीख़ में अभी भी कई दिन बाक़ी हैं और बीजेपी अपने बाग़ियों में को मनाने में लगी हुई है। ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी इस बार फ़तेहपुर में अपने बाग़ियों को मनाने का रिवाज बदल पाती है या नहीं।

सबसे बड़ा सवाल यह भी बनता है की पहले से ही फतेहपुर के कई दावेदारों को दरकिनार कर और आज तक हमेशा से ही बाहरी नेताओं का विरोध होने के बाबजूद बाहरी प्रत्याशी को फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी का टिकट देना कहां तक उचित रहेगा।

 

हिमाचल: बीजेपी ने खुद ही क्यों निकाल दी ‘वंशवाद’ विरोध के फुकणू की हवा

आई.एस. ठाकुर।। आपने प्लेटो का नाम सुना होगा। ग्रीस यानी यूनान के महान दार्शनिक, जिन्हें अफलातून भी कहा जाता है। उन्होंने आज से 2400 साल पहले एक किताब लिखी थी- ‘द रिपब्लिक।’ इसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि पहले तो  ‘पढ़े-लिखे और बुद्धिमान लोगों के बच्चे अंतत: आराम और विशेष अधिकार मिलने के कारण भ्रष्ट हो जाएंगे। फिर वे सिर्फ अपने बारे में और अपनी संपत्ति के बारे में सोचेंगे। फिर एरिस्टोक्रेसी (बेहतरीन लोगों का शासन) जो है, वह ओलिगार्की (चंद लोगों तक सिमटा शासन) में तब्दील हो जाएगा।

वे एक अलग व्यवस्था के बारे में बात कर रहे थे मगर डेमोक्रेसी में भी यही हालत होती दिख रही है। 15 अगस्त 2022 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस पर वंशवाद को लेकर निशाना साधा। इसे संकेत माना गया कि भारतीय जनता पार्टी वंशवाद से दूरी बनाने के सिद्धांत पर काम करेगी। मगर चंद महीने बाद हिमाचल प्रदेश के चुनावों में ही इस अवधारणा की हवा निकल गई।

उपचुनाव में जब चेतन बरागटा का टिकट काटकर नीलम सरैक को दिया गया था तो नीलम पांच हजार वोट भी नहीं ले पाई थीं। उसके बाद एक कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा था कि पार्टी ने तय किया है कि परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देना है तो हमने कठोर फैसला लिया। हम सीट हारे लेकिन एक पहल की। अब जेपी नड्डा के उन शब्दों का भी कोई मोल नहीं रहा। उल्टा कांग्रेस कार्यकर्ता उस वीडियो को सोशल मीडिया पर कुछ मजे लेकर शेयर कर रहे हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी ने सभी 68 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं और इनमें चार नए चेहरे परिवारवाद की श्रेणी में हैं। ये हैं- चंबा सीट पर नीलम नैयर जो वपर्तमान विधायक पवन नैयर की पत्नी हैं। धर्मपुर सीट से रजत ठाकुर जो कि जल शक्ति मंत्री महेंद्र ठाकुर के बेटे हैं। जुब्बल कोटखाई से चेतन बरागटा जो दिवंगत पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के बेटे हैं। इसी तरह बड़सर सीट पर माया शर्मा जो बलदेव शर्मा की पत्नी हैं। इसके अलावा भी, मनाली से गोविंद ठाकुर, भोरंज से अनिल धीमान, हमीरपुर से नरेंद्र ठाकुर, मंडी से अनिल शर्मा और सोलन से राजेश कश्यप भी परिवारवाद की श्रेणी में आते हैं।

बीजेपी का स्टैंड कमजोर हुआ
हिमाचल में भी बीजेपी के नेता और प्रवक्ता खुलकर कांग्रेस पर हमला कर रहे थे। वे कह रहे थे कि दिल्ली से हिमाचल तक कांग्रेस में वंशवाद चल रहा है। कांग्रेस के पास इस सवाल का कोई तोड़ नहीं होता था। वे ज्यादा से ज्यादा पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का जिक्र कर देते थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।

बीजेपी के नेताओं के सामने संकट यह है कि वे ऐसा भी नहीं बोल सकते कि आपके यहां वंशवाद के उदाहरण ज्यादा हैं, जबकि हमारे पास कम हैं। यह तो कोई तार्किक जवाब हुआ नहीं। तो कुल मिलाकर स्थिति यह है कि आम जनता के बीच भी यह मुद्दा अब फुस्स हो चुका है। टिकटों में परिवारवाद झलकने के कारण न सिर्फ हिमाचल में बीजेपी की छवि कमजोर हुई है बल्कि इस कदम ने एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता को भी कम करने वाला काम किया है।

अब बीजेपी भविष्य में जो भी करे, कम से हिमाचल में तो वह परिवारवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला नहीं कर पाएगी। हो सकता है कुछ नेता कहें कि हमारे यहां परिवारवाद का मतलब है कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को पद या अवसर मिलेगा। लेकिन यह भी हास्यास्पद लॉजिक होगा। ऐसा लॉजिक कांग्रेस के लोग देते रहे हैं। खासकर कौल सिंह ठाकुर का वह बयान चर्चा में रहा था, जब उन्होंने कहा था उनकी बेटी चंपा ठाकुर के मामले में परिवारवाद नहीं बनता क्योंकि उनकी शादी हो चुकी है और गोत्र बदल गया है।

सवाल ये भी है कि अगर विनेबिलिटी यानी जीत की संभावना पर ही टिकट देना है तो कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी तो यही कहती हैं कि जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट दिए जाते हैं, परिवार को देखकर नहीं। पर इस पूरे मामले के बीच एक सवाल जो उभर रहा है, बीजेपी को उस पर विचार करना चाहिए। क्या वह अब भी The Party with a Difference की टैगलाइन को मजबूत करना चाह रही है या सभी मामलों में यह फर्क खत्म कर देना है।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश से संबंधित विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

ये लेखक के निजी विचार हैं

आरएस बाली नामांकन दाखिल कर बोले- भारी बहुमत से जीतेगी कांग्रेस

कांगड़ा।। नगरोटा के कांग्रेस प्रत्याशी आरएस बाली ने शुरक्रवार नामांकन पत्र भरा। उनके नामांकन के लिए सैकड़ों लोग ओबीसी भवन नगरोटा बगवां में पहुंचे। वहीं, आरएस बाली ने चामुंडा माताजी, नारदा शारदा माताजी और ब्रजेश्वरी माताजी से आशीर्वाद लिया।

आरएस बाली ने नामांकन पत्र भर से पहले नगरोटा मार्केट में जाकर लोगों से आशीर्वाद लिया, जिसके बाद ओबीसी भवन पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए आरएस बाली ने विकासपुरुष जीएस बालीजी को याद करते हुए कहा कि विकासपुरुष शरीरिक रूप से आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे आज भी हमारे दिल में और नगरोटा की बुलंद आवाज में हमेंशा जिंदा रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की हर ईंट में मिलेगा विकासपुरुष जीएस बाली जी का नाम।

इस बीच, भाजपा सरकार पर हमला करते हुए आरएस बाली ने कहा कि अक्षम भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और झूठे वादों के खिलाफ लोग उठ खड़े हुए हैं। भाजपा की हार जनता की जीत होगी और हिमाचल में नया सवेरा लाएगी।

बीजेपी के खिलाफ कई हमलों में आरएस बाली ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों, छात्रों से लेकर महिलाओं तक, हर कोई बीजेपी से नाराज है। आज पूरा राज्य कई मुद्दों पर विरोध कर रहा है- ओपीएस, अग्निवीर, बेरोजगारी या महंगाई से। जनता आज सड़कों पर निकलने को मजबूर हो गई है। कांग्रेस इस बार भारी बहुमत से जीतने जा रही है।

महेंद्र सिंह ठाकुर के दामाद संजीव भंडारी ने चढ़ाया सियासी पारा

मंडी।। एक ओर जहां बेटे को टिकट मिलने के बाद बेटी की बगावत के चलते मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर का परिवार अंतर्कलह का शिकार हो गया है वहीं उनके दामाद ने धर्मपुर के साथ लगती जोगिंदर नगर सीट का सियासी पारा चढ़ा दिया है।

मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के दामाद संजीव भंडारी पेशे से ठेकेदार हैं और जोगिंदर नगर से कांग्रेस के टिकट के तलबगार हैं। वह टिकट की रेस में सबसे आगे भी बताए जा रहे हैं। लेकिन महेंद्र ठाकुर के लिए परेशानी की बात यह हो सकती है कि जोगिंदर नगर में बीजेपी का टिकट उनके खास रहे निर्दलीय विधायक प्रकाश राणा को मिला है।

संजीव भंडारी ने पिछले एक साल में प्रकाश राणा के ही ‘समाजसेवा’ मॉडल पर चलते हुए महिला और युवक मंडलों में पैठ बना ली है। भले ही कांग्रेस से टिकट की दौड़ में वह आगे बताए जा रहे हैं मगर पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र पाल ने अपना टिकट फाइनल होने का दावा किया है। गुरुवार सुबह नौ बजे उनके समर्थक घट्टा बॉर्डर पर स्वागत करने जा रहे हैं।

कांग्रेस में टिकटों की घोषणा से पहले ही सुरेंद्र पाल का यह कार्यक्रम वास्तव में शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है ताकि वह आलाकमान को बता सकें कि मैं ही राइट चॉइस हूं। इस भीड़ में उनके चाचा व पूर्व मंत्री गुलाब सिंह के समर्थक भी शामिल हो सकते हैं जो अपने नेता को टिकट न दिए जाने से नाराज हैं।

इस बीच सवाल यह है कि आर्थिक रूप से सुरेंद्र पाल पर भारी पड़ रहे संजीव भंडारी कहीं टिकट तो नहीं ले आएंगे? ऐसा हुआ तो सुरेंद्र पाल निर्दलीय लड़ेंगे या नहीं? और अगर सुरेंद्र पाल को टिकट मिला तो देखना होगा कि संजीव भंडारी निर्दलीय लड़ते हैं या नहीं।

दोनों ही स्थितियों में नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं और सीधा असर प्रकाश राणा की जीत की संभावनाओं पर पड़ सकता है, जो अभी यहां जिताऊ माने जा रहे हैं। बहरहाल, कुछ घंटों में तस्वीर साफ हो जाएगी कि जोगिंदर नगर में क्या होने वाला है क्योंकि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट आज जारी कर सकती है।

राजन सुशांत और कृपाल परमार की ‘जुगलबंदी’ कहीं राकेश पठानिया पर पड़ न जाए भारी

फतेहपुर।। हमेशा से हॉट सीट मानी जाने वाली फतेहपुर सीट इस बार पहले से ज्यादा हॉट मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार यहां बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार राकेश पठानिया के खिलाफ दो बड़े नेता एकसाथ आ सकते हैं। ये नेता हैं- पहले बीजेपी में रहे और अभी आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट डॉ. राजन सुशांत और पूर्व राज्य सभा सांसद कृपाल परमार। ऐसी खबरें हैं कि दोनों नेताओं के बीच गुपचुप ढंग से बात भी हो चुकी है।

फतेहपुर में बीजेपी का काफी जनाधार रहा है मगर पिछले 13 सालों से यहां कांग्रेस जीतती आ रही है। और जिस तरह यहां बीजेपी बंटी हुई है, उससे लगता है कि आगे भी यही सिलसिला जारी रह सकता है। पिछले हर चुनाव में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं ने भाजपा की नैया डुबोने और कांग्रेस को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसा इस बार भी हो सकता है।

समस्या यह भी है कि स्थापित नेताओं समेत फतेहपुर में बीजेपी के करीब एक दर्जन टिकटार्थी थे। वे एक दूसरे के खिलाफ अभियान चलाते हुए यह भी कहते रहे हैं कि यहां बाहरी नहीं चलेगा। कृपाल परमार का विरोध भी इसी कारण हुआ था। ऐसे में अब नूरपुर के राकेश पठानिया को दावेदार बनाने पर क्या होगा, आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

बीजेपी आलाकमान ने राकेश पठानिया को फतेहपुर भाजपा का प्रत्याशी बनाकर अजीब स्थिति पैदा कर दी है। बहुत से टिकटार्थी अभी तक चुप हैं लेकिन चुनावों के दौरान उनकी भूमिका क्या रहेगी, यह बात देखने लायक होगी। इस संबंध में जब भाजपा मंडल अध्यक्ष राजिंदर राणा से बात की तो उन्होंने बताया की पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और मंडल की ओर से जिस प्रत्याशी के लिए वोटिंग हुई थी, टिकट भी उसी के अनुरूप मिला है।

जयराम ठाकुर के नामांकन में जुटी भारी भीड़, बोले- पहले तोड़ा था मिथक, अब बदलेंगे रिवाज

शिमला।। ‘आइए, हम प्रण लें कि जो बड़े-बड़ों से नहीं हो पाया, वो काम हम छोटे लोग करके दिखाएंगे।‘ तंज भरे लहजे में चुनावी आगाज करते हुए यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नामाकंन दाखिल से पहले आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री का यह तंज कांग्रेस पर था क्योंकि कुछ समय पहले विपक्ष के एक विधायक की टिप्पणी वायरल हुई थी जिसमें कहा गया था कि रिवाज बदलकर सरकार रिपीट करवाने का काम राजा साहब 6 बार मुख्यमंत्री होने के बाद भी नहीं कर पाए थे तो जयराम ठाकुर किस खेत की मूली हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नामांकन से पहले सराज विधानसभा क्षेत्र के कुथाह में बड़ी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि अबकी बार लोगों ने यह तय कर लिया है कि रिवाज बदलेंगे और उसकी शुरुआत आज सराज से होगी। आपको जयराम बनकर घर-घर जाना पड़ेगा। आज की रैली के बाद आप ऐसे ही नहीं बैठ सकते। रिवाज बदलने का काम सराज के जिम्मे आया तो हम सभी सराजी ये काम करके दिखाएंगे। आज एक ऐसी जिम्मेदारी मेरे पास है कि मुझे उसके लिए पूरे हिमाचल में जाना पड़ेगा। इसलिए सराज की जिम्मेदारी मैं आपके ऊपर छोड़ता हूं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र के महापर्व में हम प्रवेश कर रहे हैं और आप सभी के आशीर्वाद से हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 25 वर्षों का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक बार फिर आपके बीच आशीर्वाद लेने आया हूं। इस यात्रा के सभी साथियों का मैं आभार व्यक्त करता हूं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुझे आगे बढ़ने का हौसला सराज के भाई-बहनों से मिलता है क्योंकि आपने घर संभाला है। इसलिए 25 साल की यात्रा का दौर पूरा हुआ है और अब हम आगे की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने समस्त देवी-देवताओं को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने याद किए 1993 के चुनाव के दिन
जयराम ठाकुर ने कहा कि मैं कई बार सोचता हूं कि हम कहां से चले हैं और कहां पहुंचे हैं। कई जगह तो साथी ही नहीं मिलते थे। लेकिन साथी जुड़ते गए और कारवां बनता गया। उन्होंने कहा कि जब मैंने 1993 का चुनाव लड़ा था तो उस हमारे 60 पोलिंग स्टेशन में हमें एक-दो आदमी ही अपने मिलते थे, लेकिन कई पोलिंग बूथों पर अपना एक व्यक्ति भी नहीं मिलता था। सीएम ने कहा कहा कि सराज के पहाड़ चश्मदीद हैं कि इन पहाड़ों पर चढ़ते-चढ़ते हम थके भी, रुके भी, बैठे भी लेकिन फिर से चलते रहे। उस समय के कई साथी आज बुजुर्ग हो गए हैं लेकिन अभी भी चट्टान की तरह साथ खड़े हैं।

’मिथक तोड़ा था, रिवाज भी बदलेंगे’
जयराम ठाकुर ने कह कि मैं मंडल का अध्यक्ष रहा और 1998 में पहली बार विधायक बना, फिर मुझे युवा मोर्चा का भी अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद पार्टी का मंडी जिले का अध्यक्ष बनाया। उसके बाद मुझे पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2007 में पार्टी का अध्यक्ष भी बनाया गया। ये सहज रूप से नहीं हुआ क्योंकि इसके पीछे जो ऊर्जा थी वो सराज विधानसभा क्षेत्र के साथियों से मिली।

उन्होंने कहा कि जब मैं 2007 में पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष था तो मुझे हराने के लिए विरोधियों ने बात चलाई कि जो भी पार्टी का अध्यक्ष रहते हुए चुनाव लड़ता है, वो हार जाता है। जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसा हुआ भी था लेकिन हमने चुनाव जीता और इस मिथक को तोड़ा, रिवाज को बदला। दरअसल, जयराम ठाकुर इस बहाने उन मिथकों को तोड़ने की बात कर गए, जो हिमाचल में वर्षों से चले आ रहे हैं। जैसे हिमाचल में सरकार का रिपीट न होना।

‘सब आपने किया है: जयराम’
जयराम ठाकुर ने कहा कि आज सराज के विकास की बात करूं तो मैंने भी नहीं सोचा था कि सराज विधानसभा के लिए जो लक्ष्य हमने तय किए थे, उन्हें मैं हासिल कर पाऊंगा। लेकिन ऐसा अवसर आया और हमने बहुत कुछ कर दिखाया। यदि मैं कहूं कि ये काम मैंने किए तो ऐसा नहीं है। ये काम मैंने नहीं आपने किए हैं। मैं आप सभी के बीच अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहा हूं। यदि आज मैं यहां हूं तो ये आपका सहयोग है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष के लोग कह सकते हैं कि वोट मांगने आपके बीच में नहीं आया, लेकिन आप लोग मेरे दिल में रहते हैं और मेरे हिस्से इस बार बड़ी जिम्मेदारी है। एक वक्त हमने सराज के लिए नारा दिया था कि शिखर पर सराज। और अब हिमाचल में हमने नारा दिया कि शिखर की ओर हिमाचल। ये नारा आज सबकी जुबान पर है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जताया आभार
जयराम ठाकुर ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय नेतृत्व भी आगे बढ़ाने के लिए मदद करता रहा। इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने मुझे अपने जीवन की परिस्थितियों के करीब पाया। जिस दौर से वो गुजरे हैं, उन्होंने देखा कि उस दौर से हिमाचल के एक गांव में रहने वाला जयराम भी गुजरा है।”

कांग्रेस से इस्तीफा देकर बोले आदित्य विक्रम सिंह- कभी नहीं थामूंगा कांग्रेस का दामन

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के द्वारा विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी कर दी गई है। तो वहीं अब लिस्ट में नाम न होने के चलते कांग्रेस के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस सचिव आदित्य विक्रम सिंह ने भी पहली लिस्ट में अपना नाम ना होने के चलते कांग्रेस पार्टी के विभिन्न पदों से अपना इस्तीफा दे दिया है और कहा है कि अब वे दोबारा कांग्रेस पार्टी का दामन नहीं थामेंगे।

आदित्य विक्रम सिंह प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव के पद पर कार्यरत है और सराज विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी के रूप में भी काम कर रहे थे। वहीं उन्होंने बंजार विधानसभा से कांग्रेस पार्टी से टिकट की मांग रखी थी और बीते 5 सालों से पार्टी के कार्यक्रमों में भी वह शामिल हो रहे थे। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के द्वारा बंजार विधानसभा से पूर्व मंत्री खीमी राम शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। जिसके चलते नाराज होकर आदित्य विक्रम सिंह ने कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया है और उसे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को भी भेज दिया है।

आने वाले विधानसभा चुनाव में विधानसभा में कांग्रेस को चुनाव जीतने के लिए काफी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि आदित्य विक्रम सिंह के पक्ष में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा लारजी में एक बैठक रखी गई थी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री खीमी राम का खुलकर विरोध किया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा था कि अगर आदित्य विक्रम सिंह को कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी घोषित नहीं करती है। तो कांग्रेस कार्यकर्ता सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे और इसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को भुगतना सकता है।

ऐसे में अब आदित्य विक्रम सिंह की नाराजगी बंजार विधानसभा में कांग्रेस पार्टी को भारी पड़ सकती है। कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आदित्य विक्रम सिंह का अगला कदम क्या होगा। क्या आदित्य विक्रम सिंह किसी अन्य पार्टी में शामिल होंगे या फिर भी निर्दलीय तौर पर बंजार विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। यह सब भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है।

रामपुर में छात्रा की हत्या, सड़क किनारे मिला शव

रामपुर बुशहर॥ शिमला जिला के झाकड़ी थाना के अंतर्गत कोटला कन्नी संपर्क मार्ग पर कालेज छात्रा की हत्या का मामला सामने आया है। युवती रामपुर कॉलेज की छात्रा थी, जिसका शव कोटला-कुन्नी सड़क के किनारे झाड़ियों के बीच बरामद किया गया है।

पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अनीता नेगी पुत्री टिक्कम नेगी निवासी गांव कुन्नी उम्र 20 वर्ष रविवार को करीब दस बजे ज्यूरी के समीप त्यावल गांव में अपने रिश्तेदार के घर से पैदल अपने घर कन्नी जा रही थी।

इस दौरान युवती अपनी मां से मोबाइल पर बात कर रही थी, इसी बीच अचानक कॉल कट गई। इससे युवती की मां को अहसास हुआ कि मेरी बेटी के साथ कुछ हादसा हुआ है। मां ने अनीता के मोबाइल कई बार कॉल की लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। इसके बाद मां बेटी को ढूंढने के लिए कोटला की ओर निकली तो घर से कुछ दूरी पर सड़क के साथ ऊपर की ओर युवती का शव झाड़ियों से ढका मिला। सूचना मिलते ही कुन्नी गांव समेत आसपास के क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में घटना स्थल पहुंच गए और मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

इसके बाद ज्यूरी और झाकड़ी से पुलिस टीम मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि युवती के शरीर पर चोटों के निशान है। और गले में मोबाइल चार्जर की वायर भी बंदी है। पुलिस ने परिजनों के बयान ओर प्रारंभिक जांच के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है। युवती के शब को पोस्टमार्टम आई जी एम सी शिमला किया गया।

आज एसपी शिमला ने घटना स्थल का निरिक्षण किया। एफएसएल की टीम को घटना स्थल पर बुलाया गया हैं जो साक्ष्य जुटाने मैं लगी हैं। एनडीआरएफ की टीम को भी घटना स्थल पर बुलाया गया हैं जो युवती के मोबाइल के खोज में लगी हैं। मोबाइल मिलने के बाद हत्या के मामले में कुछ खुलासा हो सकता है।

हिमाचल: राजनीतिक मान-मर्यादा को लांघते गुमनाम सोशल मीडिया हैंडल्स

कपिल शर्मा।। वैसे तो शीत ऋतु आरंभ हो चुकी है लेकिन हिमाचल प्रदेश में चुनावी मौसम की गर्मी के चलते इस बार शीत लहर भी कुछ नहीं बिगाड़ पा रही। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि हर 5 साल बाद सत्ताधीश बने रहने के लिए नेताओं परीक्षा देनी पड़ती है। इस परीक्षा में आरोप, षड्यंत्र और सही गलत को दांव पर लगाया जाना आम बात है।

हालांकि इस बात को हुए 5 साल होने को आ गए पर लगता है कि यह चंद दिनों पहले की ही बात है जब भारतीय जनता पार्टी ने जय राम ठाकुर को अचानक से मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था और हिमाचल प्रदेश की राजनीति का एक अलग अध्याय का आरंभ हो गया। आज उन्हीं जय राम ठाकुर को फिर मैदान में उतर कर अपनी दूसरी पारी को जारी रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

इस चुनावी उठापटक के बीच पक्ष-विपक्ष की एक दूसरे की आलोचना या बयानबाजी होना स्वाभाविक है और आवश्यक भी है। चूंकि यही चुनावी मौसम होता है जो नेताओं के असली रंग जनता के सामने लेकर आता है, वरना 5 साल तक तो कुछ नेताओं के दर्शन तक दुर्लभ हो जाते हैं। पहले जहां रैलियों, भाषणों और समाचार पत्रों के माध्यम से नेता लोग एक दूसरे पर निशाना बनाते थे वहीं इसकी जगह आज सोशल मीडिया ने ले ली है।

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राजनीतिक रैलियों के मंच और भाषणों की तरह सोशल मीडिया की कोई सीमा य़ा मर्यादा नहीं होती। वहां तो बस आपकी उंगलियां चलती हैं और कुछ भी, किसी के भी बारे में लिख दिया जाता है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ढेरों ऐसी प्रोफाइल बन गई हैं जिनका नाम तो हिमाचली सा लगता है पर चेहरा नहीं, इनकी फेसबुक फ्रैंडलिस्ट तो काफी लंबी दिखता है पर इन्हें फेसबुक के बाहर कोई नहीं जानता है।

ऐसे अज्ञात हैंडल्स हिमाचल की राजनीति में विशेष रुचि रख रहे हैं और किसी खास नेता या पार्टी के समर्थन में कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। बात केवल आरोप- प्रत्यारोप तक की ही नहीं बल्कि ये तो किसी संवैधानिक पद या उम्र तक का लिहाज भी नहीं करते। सोशल मीडिया पर कोई नियामक बॉडी नहीं है और ना ही कोई निगरानी व नियंत्रण, तो जो चाहे यहां लिखे और मान मर्यादा को तार तार कर दे इस से कोई फर्क नहीं पड़ता।

करीब से अध्ययन करने पर पता चलता है कि सैंकड़ो फेक प्रोफाइल बनाई गई हैं जिसमें बड़े बड़े नेताओं को निशाने पर लेकर उनपर अभद्र टिप्पणी की जाती हैं। देखादेखी में भोले भाले मासूम लोग भी यही करने लग जाते हैं और यही इन फेक प्रोफाइल को बनाने वाले का मुख्य मकसद है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को तू-तड़ाक से संबोधित करना, पूर्व मुख्यमंत्री पर ओछी टिप्पणी करना या किसी के निजी समस्याओं का मजाक बनाना, ये सब मर्यादाएं यहां लांघ दी गई हैं।

ऐसा नहीं है कि ये काम बिना किसी की शय से हो रहा है। ऐसा करने के लिए राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा निजी कंपनियों को काम पर लगाया गया है जिसमें काम करने वाले कर्मचारी इन हैंडल्स को चलाते हैं और इन पर पोस्ट होने वाले कंटेंट को मैनेज करते हैं। ऐसी कंपनियां खुद को पॉलिटिकल कैंपेन मैनेजमेंट फर्म के रूप में दिखाती है और इसकी आड़ में नफरत और कुंठा के इस व्यापार को अंजाम देती है।

यदि समय रहते ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कोई काबू न किया गया तो जल्द ही ऐसा होगा कि सोशल मीडिया से निकलकर ऐसी निर्लज्जता हमारी दैनिक चर्या में देखने को मिलेगी। अभी चेहरा छुपाकर सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है लेकिन बड़े नेताओं की शय मिलती रहे तो ये लोग किसी को भी बेइज्जत कर सकते हैं। चुनाव जीतने के लिए ऐसे हथकंडे तो जरा भी स्वीकार्य नहीं है, न ही लोकतंत्र के लिए लाभदायक। हमारे हिमाचल प्रदेश की ऐसी परंपरा तो कतई नहीं रही है।

(लेखक पत्रकारिता एवं जन संचार में एम.ए. हैं और वर्तमान में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से राजनीतिक शास्त्र में एम.ए. कर रहे हैं। उनसे kapilbom@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की निर्माण पट्टिका तोड़ने पर कांग्रेस कार्यकर्ता नाराज

धर्मशाला।। धर्मशाला के खनियारा स्थित पार्क में पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की लगी निर्माण पट्टिका के तोड़े जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ता उग्र हो गए हैं। 12 अक्तूबर को कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने निर्माण पट्टिका को तोड़ दिया जिस पर धर्मशाला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस थाना धर्मशाला में एफ.आई.आर. दर्ज करवाई।

पुलिस थाना प्रभारी धर्मशाला से धर्मशाला कांग्रेस कमेटी के महासचिव चतर सिंह की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधि मंडल मिला और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस थाना प्रभारी को बताया कि शरारती तत्वों की ऐसी हरकत से कांग्रेस कार्यकर्ता हताश हैं और गुस्से में हैं।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदेश में चुनावी दौर है और ऐसी घटनाएं माहौल उग्र कर सकती हैं। अतः प्रशासन ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करे और दोषियों को पकड़ नियमानुसार कार्रवाई करे।

पुलिस थाना प्रभारी से मिले प्रतिनिधि मंडल में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ धर्मशाला के अध्यक्ष सोनू डोगरा, पार्षद वार्ड-15 रजनी व्यास, जावेद भट्ट, प्रदीप कुमार, ओंकार सिंह, दीप राज, नरेश कुमार, राम लाल, श्रीराम, गुलशन, कंचन, संदीप गुप्ता, मदन, संदीप कुमार, नीरज कुमार, सन्नी कुमार, दीप राज, जय कुमार एवं रंचन विनीत कुमार सहित करीब 60 लोग मौजूद रहे।