मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में अपने ही परिवार के लोगों की पिटाई की शिकार हुई महिला के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की सूचना ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से जैसे ही सीएम तक पहुँची, उन्होंने मंडी पुलिस को तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। पुलिस ने पहले एफआईआर दर्ज की और अब उसके पति और सास को हिरासत में ले लिया है।
शादी की पहली एनिवर्सरी पर हिंसा की शिकार महिला के पति और सास से पुलिस से पूछताछ की है। इस संबंध में मंडी पुलिस ने अपने फ़ेसबुक पेज पर भी जानकारी दी है।
सोमवार रात को सोशल मीडिया पर एक महिला ने वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी बेटी के साथ कैसे ससुराल वाले एक साल से दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उनका कहना था कि उनकी बेटी को बांधकर लोहे की रॉड से पीटा गया। उन्होंने बेटी के शरीर पर आईं चोटें भी दिखाईं जो विचलित कर देने वाली थीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो इतना विचलित करने वाला बै कि हम उसे शेयर न करने का फ़ैसला किया था। वीडिया में महिला बहुत डरी हुई दिख रही थी। वीडियो के नीचे आए कॉमेंट्स में लोगों का ग़ुस्सा और दुख, दोनों को साथ देखा जा सकता था। लोग पुलिस और सरकार से सख़्त कार्रवाई किए जाने की माँग कर रहे थे।
वीडियो में आरोप लगाया गया है कि पीड़ित महिला की शादी 26 जनवरी 2019 को हुई थी और जब से उसकी शादी हुई है तब से उसके ससुराल वाले इसके साथ शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। आरोप है कि बीती रात 26 जनवरी 2020 को इसकी पति और सास ने इसके हाथ-पैर बांध कर औऱ मुंह पर टेप लगा कर पूरी रात लोहे की रॉड से बुरी तरह से पिटाई की। महिला पर दबाव बनाया जा रहा है कि पहले तुम तलाक़ दो।
अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद आऱोपी पति और सास से पूछताछ की है। आगे क्या कार्रवाई होगी, पूरे प्रदेश की नज़र इस पर टिकी रहेगी।
मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में एक महिला के साथ परिवारवालों द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। एक महिला ने बेटी का वीडियो डाला है और बताया है कि सास और पति ने पिटाई की है। वीडियो में महिला के शरीर पर पड़े ज़ख़्म दिखाई देते हैं जो दिल दहला देते हैं।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है मगर इतना विचलित करने वाला है कि हम उसे यहाँ शेयर नहीं कर सकते। महिला बेहद डरी हुई है। लोग इस वीडियो को देखकर भावुक हो जा रहे हैं और ग़ुस्से से भर जा रहे हैं। वीडियो को हज़ारों लोग शेयर कर चुके है और कॉमेंट करके सख़्त कार्रवाई की माँग की जा रही है।
महिला की शादी 26 जनवरी 2019 को हुई थी और जब से उसकी शादी हुई है तब से उसके ससुराल वाले इसके साथ शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
आरोप है कि बीती रात 26 जनवरी 2020 को इसकी पति और सास ने इसके हाथ-पैर बांध कर औऱ मुंह पर टेप लगा कर पूरी रात लोहे की रॉड से बुरी तरह से पिटाई की। महिला पर दबाव बनाया जा रहा है कि तू हमें तलाक़ देने की पहल कर।
पुलिस ने मामले में ससुराल वालों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली है।
इन हिमाचल डेस्क।। सोशल मीडिया ओर लोग एक वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें एक युवक केंद्रीय वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर पर निशाना साध रहा है और सवाल पूछ रहा है कि गद्दार कौन है।
लगभग चार मिनट के इस वीडियो को मकरझण्डू नाम के पेज पर शेयर किया गया है जहां पर युवक का नाम अंशुमान राणा लिखा गया है। इसमें युवक अनुराग ठाकुर की उस हरकत पर सवाल उठा रहा है जिसमें उन्होंने मंच से ‘देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को’ के नारे लगवाए।
अनुराग ने नागरिकता कानून का विरोध कर रहे लोगों को लेकर कथित तौर पर गद्दार कहकर गोली मारने की बात कही थी। युवक ने सवाल पूछा है कि लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन करना गद्दारी कैसे हो गई। पूरा वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।
वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर बताएं कि देश का असल गद्दार कौन है, देश की अर्थव्यवस्था को सुस्त और सरकारी कंपनियों को पस्त करने वालों को क्या कहा जाए? वीडियो- अंशुमन राणा.
सरकाघाट।। आदर्शनी वेलफेयर सोसाइटी की टोपियों ने देश की राजनीति में धूम मचा रखी है। भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के सिर पर सजी टोपी चर्चा में आ गई है। बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल के निशान वालीं ये सफेद टोपियां 360 महिलाओं को रोजगार भी मुहैया करवाने का अहम जरिया बनी है।
इन सफेद टोपीयों को न सिर्फ जगत प्रकाश नड्डा बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सिर पर भी देखा गया है।
प्रदेश जुवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटक्शन ऑफ चिल्ड्रन की मेंबर एवं आदर्शनी वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्षा वंदना गुलेरिया ने बताया की उनकी सोसाइटी के सदस्यों ने वर्ष 2015 में इन टोपियों को बनाना शुरू किया था।
वह बाती हैं कि पहले सोसाइटी कई रंगों की टोपियां बनाती थी मगर एक दिन सोसाइटी के सदस्यों ने सफ़ेद रंग की टोपी पर कमल का निशान बनाकर इसकी तीन टोपियाँ जेपी नड्डा की पत्नी मल्लिका नड्डा को भेंट की थीं। उन्होंने इन टोपियों को काफी पसंद किया और सलाह दी कि ऐसी और टोपियां बनाई जाएं जिससे कि महिलाओं को भी रोजगार मिले।
वंदना ने कहा कि सोसायटी ने इसे गंभीरता से लिया और सफ़ेद व क्रीम रंग की टोपी पर कमल का निशान बनाने को अपना ट्रेडमार्क बनाया। पहली बार सोसाइटी की इन टोपियों को भाजपा द्वारा पन्ना प्रमुख सम्मेलन में खरीदा गया। लोकसभा चुनाव में मंडी में पन्ना प्रमुख के सम्मेलन में भारी डिमांड के साथ इन टोपियों को पसंद किया गया।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बिलासपुर आए तो जेपी नड्डा ने ही उन्हें यही टोपी भेंट की थी। पीएम के इस टोपी को पहनने के बाद पूरे देश और विदेश से भी आदर्शनी वेलफेयर सोसाइटी को ऑर्डर मिलना शुरू हो गए।
वंदना ने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद में राष्ट्रीय महिला मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन में इस कमल के फूल वाली टोपी को बहुत ज्यादा पसंद किया गया और वेलफेयर सोसाइटी को वेस्ट बंगाल बैंगलोर तेलंगाना सहित दर्जनों राज्यों से आर्डर आना शुरू हुए।
वंदना ने बताया कि अब इस टोपी को बनाने के काम में सोसायटी की 360 महिलाएं काम कर रही है। इस तरह सैकड़ों महिलाओं को ऐसी टोपियाँ बनाने से आमदनी भी होने लगी है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अनुराग ठाकुर के द्वारा कथित तौर पर इग्नोर किए जाने वाले वीडियो को लेकर हो रही चर्चा पर प्रतिक्रिया दी है। सीएम ने इस संबंध में कहा है- जो हो गया, सो हो गया।
हाल ही में हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष डॉक्टर राजीव बिंदल की ताजपोशी वाले दिन एक वीडियो वायरल हो गया था जिसमें अनुराग ठाकुर ने सीएम को छोड़कर बिंदल को बधाई दी और फिर जल्दी में सीएम से हाथ मिलाकर एक ओर चले गए। चर्चा होने लगी कि जयराम ने जानबूझकर सीएम को नज़रअंदाज़ कर दिया।
सीएम जयराम ठाकुर को केंद्रीय मंत्री अनुराग द्वारा 'इग्नोर' किए जाने की खबर वाले वीडियो को लेकर कुछ पाठकों को शिकायत थी…
अब इस संबंध में सीएम ने कहा है, “इस बात को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। जो हो गया, सो हो गया।” सीएम का यह बयान आज अख़बारों की सुर्खियों में भी है। इसके बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सीएम के स्वभाव को लेकर चर्चा होने लगी है।
सीएम जयराम ठाकुर को पूर्व सीएम और बीजेपी के संस्थापक सदस्य शांता कुमार जैसी शैली का नेता समझा जाता है। दोनों ही नेता संयमित और मर्यादित भाषा में अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। वीडियो के वायरल हो जाने के बाद ऐसी भी चर्चा होने लगी थी कि सीएम के इसी स्वभाव का फायदा उठाया जाने लगा है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश में जयराम के सत्ता में आने के बाद विरोधी नेताओं पर छींटाकशी और बदले की भावना से कार्रवाई करने की परंपरा भी ख़त्म हुई है। इससे पहले कांग्रेस के सत्ता में आने पर वीरभद्र सिंह अपने प्रदिद्वंद्वी प्रेम कुमार धूमल और उनके परिजनों के पीछे पड़े रहते थे तो बीजेपी के सत्ता में आने पर स्थिति इसके ठीक विपरीत हो जाती थी।
इन हिमाचल डेस्क।। जगत प्रकाश नड्डा या जेपी नड्डा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बन गए हैं। बीते साल जून में वह पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बने थे। कौन जानता था कि जिस नेता को हिमाचल प्रदेश से नेतृत्व विवाद टालने के लिए हिमाचल से दिल्ली भेजा गया था, वह एक दिन पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएगा। मगर राजनीतिक जानकर मानते थे कि नड्डा माहिर रणनीतिकार हैं और लो प्रोफाइल रहकर काम करने में यकीन रखते हैं। इसी वजह से वह संगठन द्वारा दी गई जिम्मेदारियां निभाते चले गए और फिर संगठन ने भी उनका ख्याल रखा। एक नजर डालते हैं जेपी नड्डा के अब तक के राजनीतिक सफर पर:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माहिर रणनीतिकार और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के विश्वासपात्र जगत प्रकाश नड्डा को जिस वक्त केंद्र में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी, साफ हुआ था कि उनकी संगठन क्षमता और पर्दे के पीछे रहकर काम करने की खूबी को पुरस्कृत किया गया है। अपने कॉलेज के दिनों में प्रभावी छात्र नेता रहे नड्डा बेहद मृदुभाषी हैं। मुश्किल से मुश्किल कामों को आसानी से सुलझाने में माहिर नड्डा बीजेपी के अध्यक्ष पद की रेस में भी थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना समर्थन अमित शाह को दे दिया था।
जेपी नड्डा को बधाई देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नड्डा आज मोदी और शाह के साथ बीजेपी की सबसे शक्तिशाली तिकड़ी का हिस्सा हैं। वह पार्टी के हर बड़े फैसले में शामिल रहते हैं, साथ ही पार्टी और सरकार के बीच में कड़ी की भूमिका भी निभाते हैं। उन्हें आरएसएस से भी समर्थन मिलता है और बीजेपी से सभी बड़े नेताओं से उनके अच्छे रिश्ते हैं। किसी भी राज्य के चुनाव हों, या बीजेपी की कोई राज्य सरकार संकट में घिरी हो, नड्डा को ही केंद्र से पहले भेजा जाता रहा है।
छात्र राजनीति में प्रवेश
2 दिसंबर, 1960 को बिहार के पटना में नड्डा का जन्म हुआ था। उनके पिता पटना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे। नड्डा जेपी आंदोलन से प्रभावित होकर छात्र राजनीति में आए थे। जिस वक्तबिहार में स्टूडेंट मूवमेंट चरम पर था, उस दौर में जेपी नड्डा की उम्र 15-16 साल थी। मगर इसी उम्र में नड्डा ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद वह छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और एबीवीपी के साथ जुड़े। 1977 में छात्र संघ चुनाव में वह पटना यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी चुने गए। 13 सालों तक वह विद्यार्थी परिषद में ऐक्टिव रहे।
जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से हैं।
हिमाचल वापसी
संगठन में उनकी काबिलियत को देखते हुए जेपी नड्डा को साल 1982 में उनके पैतृक राज्य हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बना कर भेजा गया। इसके साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई भी शुरू की। तेज़ तर्रार जेपी नड्डा हिमाचल के उस दौर के छात्रों में काफी लोकप्रिय हुए। नड्डा के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार छात्र संघ चुनाव हुआ और उसमें विद्यार्थी परिषद को संपूर्ण जीत हासिल हुई। उस दौर में वह 1983-1984 में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी परिषद के पहले प्रेजिडेंट बने। 1986 से 1989 तक जगत प्रकाश नड्डा विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव रहे।
भाजयुमो में भी अच्छा काम किया
1977 से लेकर 1990 तक वह एबीवीपी में करीब 13 सालों तक विभिन्न पदों पर रहे। 1989 में केंद्र सरकार के भ्रटाचार के खिलाफ नड्डा ने राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा का गठन किया इस आंदोलन को चलाने के लिए उन्हें 45 दिन तक जेल में भी रहना पड़ा। 1989 के लोकसभा चुनाव में जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया जो देश में युवा कार्यकर्तायों को चुन कर चुनाव लड़ने के लिए आगे लाने का काम करती थी। 1991 में 31 साल की आयु में नड्डा भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्य्क्ष बने। अपने कार्य काल में नड्डा ने जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने और ट्रेनिंग देने पर बल दिया। जेपी नड्डा के कार्यकाल में बहुत से युवा पार्टी से जुड़े। उन्होंने कार्यशाला आदि लगाकर युवा वर्ग के भीतर पार्टी की विचारधारा का प्रचार किया । यह उस समय अपने आप में एक नई तरह का प्रयोग था।
जेपी नड्डा
जब अकेले घेरी थी वीरभद्र सरकार
साल 1993 में नड्डा ने चुनावी राजनीति की तरफ रुख किया और अपने पहले ही चुनाव में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बिलासपुर के विधायक के रूप में कदम रखा। इस चुनाव में पार्टी के प्रमुख नेताओं की हार के कारण नड्डा को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। तेज तर्रार और ओजस्वी वक्ता के रूप में नड्डा ने कम विधायकों का साथ होने के बावजूद सरकार को 5 साल तक विभिन्न मुद्दों पर ऐसे घेरा की विपक्ष में होने के बावजूद उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया।
जब प्रदेश से केंद्र में गए
नड्डा 1993 से 1998, 1998 से 2003 और 2007 से 2012 तक बिलासपुर सदर से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। साल 1998 से 2003 तक वह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रहे और 2008 से 2010 तक वन एवं पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री रहे। मंत्रायलय और सत्ता से ऊपर संगठन को तवज्जो देने वाले शख्स की छवि रखने वाले नड्डा ने मंत्रालय से इस्तीफा दिया और राष्ट्रीय टीम का रुख किया। अप्रैल 2012 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया और कई सारी संसदीय कमिटियों में जगह दी गई। वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की टीम में राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता रहे।
संगठन का काम
राजनाथ सिंह की टीम में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय महासचिव चुना गया। नड्डा छत्तीसगढ़ के भी प्रभारी रहे थे, जहां पर बीजेपी ने तीसरी बार सरकार बनाई। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान संगठन की जिम्मेदारी संभालने से लेकर और भी कई काम भीउ न्होंने बखूबी निभाए। टिकट आवंटन के समय भी उनकी योग्यता पार्टी के काम आई। खास बात यह रही कि वह किसी भी खेमे से नहीं जुड़े और बीजेपी का हर धड़ा उनकी संगठन शक्ति का लोहा मानता रहा। आखिरकार जब लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, डॉक्टर हर्षवर्धन के बाद जेपी नड्डा को स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा दिया गया।
मोदी और शाह से रिश्ते
लो-प्रोफाइल रहने वाले नड्डा को बीजेपी के लगभग सभी बड़े नेताओं का समर्थन हासिल रहा। नड्डा के रिश्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी काफी अच्छे रहे हैं। एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मोदी जब हिमाचल प्रदेश के प्रभारी थे, तब से दोनों के बीच समीकरण काफी अच्छा है। दोनों अशोक रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय में बने आउट हाउस में रहते थे। अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी में नड्डा को अहम भूमिका रही है क्योंकि दोनों पार्टी के यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा में साथ काम कर चुके हैं। जब नड्डा भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, उसके बाद अमित शाह भाजयुमो के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने थे।
केंद्र की ओर रुख करने से पहले हिमाचल प्रदेश में वह बेहद कद्दावर नेता बनकर उभरे थे। कम उम्र में ही बीजेपी के साथ उनका जुड़ाव रहा। जमीनी स्तर से उठकर उन्होंने यहां तक का सफर किया है, जिससे अनुभव के आधार पर राजनीति समस्याओं को शांति से सुलझाना उनकी काबिलियत में शुमार हो गया। वह हमेशा अपने भाषणों में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मुद्दों और विज़न की बात करते रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वह अध्यक्ष के तौर पर काफी सकारात्मक बदलाव कर सकते हैं। देश में ढर्रे पर चली आ रही निजी छींटाकशी वाली राजनीति को बदलने में उनकी भूमिका रह सकती है।
आई.एस. ठाकुर।। साल 2012 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के चुनाव हो रहे थे। प्रेम कुमार धूमल चाह रहे थे कि सरकार को रिपीट करवाया जाए। धूमल और सरकार में बैठे अन्य को लगता था कि इस बार सरकार रिपीट हो ही जाएगी। एक तो सरकार को यक़ीन था कि उसने अच्छा काम किया है, फिर चुनाव के दौरान उसने इंडक्शन चूल्हों से लेकर और भी कई कुछ देने जैसे लोक लुभावने वादे किए थे। साथ ही कांग्रेस भी अंतर्कलह से जूझ रही थी।
मगर जब चुनाव के नतीजे आए तो परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा। कुछ समय पहले तक जिन वीरभद्र के पार्टी छोड़ने की चर्चा हो रही थी, उन्होंने अपने दम पर हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बना ली। लेकिन यह सब हुआ कैसे? राजनीति पर नज़र रखने वालों को याद होगा कि चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर ने कुछ ऐसा किया था, जो पूरे हिमाचल में चर्चा का विषय बन गया था। उन्होंने एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ के दौरान वीरभद्र सिंह को अप्रत्यक्ष तौर पर बंदर कह दिया था।
हमीरपुर में टीवी का कार्यक्रम हो रहा था। इस बीच कांग्रेस की एक कार्यकर्ता ने हाथ में बैनर पकड़ा था जिसमें बंदरों के क़हर से फसलों की बर्बादी की ज़िक्र था और आरोप लगाया गया था कि धूमल सरकार के दौरान कृषि करना भी मुश्किल हो गया है। इस महिला ने साथ में बंदर का एक सॉफ़्ट टॉय भी पकड़ा हुआ था। कार्यक्रम के होस्ट दीपक चौरसिया ने बंदर का यह खिलौना लिया और अनुराग ठाकुर के सामने ले जाकर पूछा कि ये क्या है।
अनुराग ठाकुर का जवाब था- ये वही बंदर है जिनकी शक्ल राजा वीरभद्र सिंह जी से मिलती है। वीडियो देखें:-
वैसे तो यह मामूली और सामान्य सा व्यंग्यात्मक कॉमेंट लगता है मगर इसका खामियाजा पूरी बीजेपी को भुगतना पड़ा। ये वो दौर था जब सोशल मीडिया का चलन इतना अधिक नहीं था और न ही वॉट्सऐप इतना यूज होता था कि किसी घटना का वीडियो वायरल हो। मगर जिस किसी ने इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा था, उसे यह टिप्पणी पसंद नहीं आई थी। लोगों ने यह बात एक-दूसरे को बताई और धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में चर्चा होने लगी कि ‘अनुराग ठाकुर ने वीरभद्र सिंह को बंदर कहा है।’
हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाक़ों, जहां वीरभद्र सिंह का ख़ासा प्रभाव है, में बीजेपी के ख़िलाफ़ माहौल बन गया कि सीएम के बेटे ने ‘राजा साहब’ को बंदर कह दिया है। इस इमोशनल लहर का प्रसार मैदानी इलाक़ों में भी हुआ और यहाँ तक कि बीजेपी से जुड़े लोग भी कहने लगे कि यह अनुराग ठाकुर ने ठीक नहीं किया। नतीजा यह रहा कि इस वाक़ये ने इमोशंस में बहने वाली हिमाचल प्रदेश की जनता के वोटों पर भी असर डाल दिया। मतदाताओं ने कहा कि राजनीतिक विरोध और तनातनी अपनी जगह है मगर इस तरह की टिप्पणियाँ शोभा नहीं देतीं।
नतीजा यह हुआ कि जो बीजेपी सत्ता रिपीट करने की ओर बढ़ती दिख रही थी, वह मामूली से घटनाक्रम से बैकफ़ुट पर आ गई। वीरभद्र सत्ता में आ गए।
सात साल बाद फिर वैसा ही विवाद
ये तो हुई 7 साल पहले की बात। अब हुआ यह है कि अनुराग ठाकुर का एक वीडियो चर्चा है जिसमें वह पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष की ताजपोशी में शामिल होने शिमला आए थे। वीडियो को देखें तो पता चलता है कि वह मंगल पांडे से मिले, आगे सीएम खड़े थे तो उन्हें नज़रअंदाज़ किया और सीधे डॉक्टर बिंदल के गले लग गए। ऐसा तब हुआ जबकि सीएम जयराम हाथ आगे बढ़ा चुके थे।
यहाँ तक कोई भी कह सकता है कि जोश में ऐसा हो गया हो और बिंदल से गले मिलने की उत्सुकता में सीएम नज़र न आए हों। मगर सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिंदल से गले मिलने के बाद अनुराग ने सीएम की आँखों में आँखें मिलाए बग़ैर नमस्कार कहा और अनमने ढंग से हाथ मिलाकर अपनी सीट की ओर बढ़ गए।
सीएम जयराम ठाकुर को केंद्रीय मंत्री अनुराग द्वारा 'इग्नोर' किए जाने की खबर वाले वीडियो को लेकर कुछ पाठकों को शिकायत थी कि वीडियो में अचानक कट है जिससे पूरा मामला समझ नहीं आ रहा। इसलिए इस हिस्से को हम फिर से शेयर कर रहे हैं।पूरी खबर पढ़ें- https://inhimachal.in/news/himachal/jairam-anurag-handshake/
In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಜನವರಿ 18, 2020
इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। कुछ का कहना है कि अनुराग ने जानबूझकर सीएम को नज़रअंदाज़ किया। जितने भी लोगों ने वीडियो देखा, उनका कहना है कि बेशक बाद में अनुराग ने हाथ मिला लिया मगर वह सिर्फ़ औपचारिकता थी क्योंकि सीएम ने उनका हाथ थामा ही था कि वह अपनी सीट की ओर बढ़ गए।
लोग इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक के नेताओं का कहना है कि अनुराग का यह आचरण ठीक नहीं था। यहाँ तक कि प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले सुजानपुर से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र राणा ने भी अनुराग के व्यवहार की आलोचना की है। अनुराग से ऐसा गलती से हुआ या जानबूझकर किया, इस पर सिर्फ़ क़यास लगाए जा सकते है। ऐसा जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि इस घटना के पीछे क्या था। मगर उस दिन पूरे घटनाक्रम को देखने वाले पत्रकारों का कहना है कि अनुराग ने पहले भी सीएम को इग्नोर किया और बाद में उनके भाषण के दौरान फ़ोन पर बात करते दिखे।
अनुराग का इस तरह के विवादों में फँसना नई बात नहीं है। जब जेपी नड्डा केंद्र की पिछली सरकार (2014) में मंत्री पद के लिए चुने गए तो सबने उन्हें बधाई थी मगर अनुराग ठाकुर की ओर से ट्वीट नहीं किया गया था। बाद में वह एम्स निर्माण को लेकर खुलकर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर निशाना साधते रहे थे। अब यह नई घटना अनुराग के विवादों की लिस्ट में शामिल हो गई है।
अनुराग ठाकुर युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं और धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम को युवा उनकी उपलब्धियों में शामिल करते रहे है। भले ही उनकी यह उपलब्धि बतौर क्रिकेट प्रशासक है, बतौर सांसद नहीं। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि अनुराग एक दिन हिमाचल के सीएम बन सकते हैं। मगर जिस तरह की ख़बरों को लेकर अनुराग चर्चा में रहते हैं, उससे उनके प्रशंसकों को झटका ज़रूर लग सकता है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश में कोई भी नेता तभी अपना क़द बढ़ा पाया है, जब वह विवादों से दूर रहा है।
कुल मिलाकर शिमला वाली घटना से एक बार फिर अनुराग को लेकर वैसा माहौल बनता दिख रहा है, जैसा 2012 में बना था। बंदर वाले घटनाक्रम का नतीजा था कि उसके बाद प्रेम कुमार धूमल का फिर सीएम बनना संभव नहीं हो पाया क्योंकि 2017 के चुनावों में तो वैसे भी वह हार गए। हालाँकि, इस हार के लिए भी लोग उनके छोटे बेटे अरुण ठाकुर की ओर से वीरभद्र सिंह पर किए गए प्रहारों को ज़िम्मेदार मानते हैं।
हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे से प्रदेश में लोग इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखते हैं। हिमाचल के लोगों के लिए राजनीति में विकास मुद्दा नहीं है, करप्शन मुद्दा नहीं है, उनके लिए मायने रखता है नेताओं का आचार-व्यवहार। पिछड़े इलाक़ों की कम जागरूक जनता को छोड़ दें तो बाक़ी हिमाचल के लोग कभी ऐरोगेंट नेताओं को पसंद नहीं करते और यह बात छिपी हुई नहीं है। उदाहरण के लिए सतपाल सत्ती अगर सोचते होंगे कि जब प्रदेश में पार्टी की सरकार बन गई तो उनके अपने इलाक़े की जनता ने उन्हें क्यों हरा दिया तो एक बार उन्हें अपने बयानों पर नज़र डालनी चाहिए।
ऐसी बातें, ऐसा व्यवहार अपने समर्थकों की तालियाँ और वाहवाही तो बटोर सकता है मगर संवेदनशील जनता की नज़रों में सम्मान को कम कर देता है। हिमाचल प्रदेश में कभी सरकार रिपीट इसीलिए नहीं हुई क्योंकि वे सत्ताधारी नेताओं की हेकड़ी को पसंद नहीं करते और मौक़ा मिलते ही पाँच साल बाद उन्हें आसमान से ज़मीन पर ले आते है।
इसलिए नेताओं को अपनी छवि को लेकर जागरूक रहना चाहिए और सचेत रहना चाहिए कि भूलकर भी कोई ऐसी चूक न हो जिससे कि ग़लत संदेश चला जाए। उदाहरण के लिए अगर वह घटना महज़ चूक थी तो अब तक अनुराग ठाकुर की ओर से बयान आ जाना चाहिए था कि बे-सिर पैर बातें न करें, ऐसा कुछ नहीं है, मैं जयराम जी का सम्मान करता हूँ। मगर ऐसा नहीं हुआ और न ही शायद उनकी ओर से इसकी ज़रूरत समझी गई। इससे स्पष्ट हो जाता है कि किसका इरादा क्या था।
राजनीति में विरोध होना, एक दूसरे से टकराव होना सामान्य सी बात है। इसके लिए एक-दूसरे को रणनीति से घेरना, बैकफ़ुट पर डालना स्वाभाविक है। मगर यह टकराव जनता की नज़रों में उजागर होना या इसके कारण जनता के हित प्रभावित होना ठीक नहीं।
सही तरीक़ा है- संयम और धैर्य रखकर उचित समय का इंतज़ार करना और फिर अपना क़द इतना बढ़ाना कि आपके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आपके सामने बौना हो जाए और फिर आप इस स्थिति में हों कि आपका एक कदम उसे राजनीति में अप्रासंगिक कर दे। एक समय प्रदेश में अपनी ही सरकार से त्रस्त होकर मंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर केंद्र में संगठन का काम सँभालने गए जेपी नड्डा इसका उदाहरण हैं जो आज सबसे बड़ी पार्टी के सर्वोच्च पद पर बैठे हैं।
इसलिए अनुराग क्या, किसी भी नेता को राजनीति में लंबे समय तक टिकना है तो ख़ुद परिपक्वता लानी चाहिए। राजनीति में बच्चों की तरह रूठने और दूरदर्शी सोच रखे बिना प्रतिक्रियावादी कदम उठाने का मतलब है अपने पाँव पर ख़ुद कुल्हाड़ी मारना।
(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)
शिमला।। डॉक्टर राजीव बिंदल की हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष पद पर ताजपोशी में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर पहले नए अध्यक्ष के गले मिले, बाद में मिलाया मुख्यमंत्री से हाथ। जबकि वह क्रम में पहले आ रहे थे।
इससे पहले मुख्यमंत्री को बाई पास कर अनुराग ठाकुर ने मंगल पांडेय के बाद सीधा डॉ राजीव बिंदल से हाथ मिलाया। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन अनुराग उनकी अनदेखी कर बिंदल की तरफ बढ़ गए।
बाद में अभी जल्दी में नमस्कार करके उन्होंने सीएम से हाथ मिलाया और जल्दी से एक ओर निकल गए। तब तक जयराम ने अनुराग ठाकुर का हाथ थामा ही हुआ था। अब यह वीडियो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीएम जयराम ठाकुर को केंद्रीय मंत्री अनुराग द्वारा 'इग्नोर' किए जाने की खबर वाले वीडियो को लेकर कुछ पाठकों को शिकायत थी…
रितेश चौहान, सरकाघाट।। पर्यावरण,जंगल और जमीन को बचाने के लिए भले ही रोज सरकारी दावे किए जाते हों लेकिन इन दावों की हवा धर्मपुर के विधायक और आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने निकाल दी है। अपने घर से एक किलोमीटर दूर बगैर वन विभाग की अनुमति के शानदार हैलीपैड बना डाला। यह ऐसी जगह है जिससे आम आदमी को रत्ती भर फायदा नहीं होगा।
दो चरणों में किये गए निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए और डोडर जंगल को डंपिंग साइट बना दिया गया जिसके लिए किस पर एफआईआर दर्ज होगी यह मालूम नहीं। धर्मपुर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर ने दावा किया है कि खोपूधार हैलीपेड बनाने के लिए नियमों को ताक में रख कर जंगल को बुरी तरह तबाह कर दिया गया है जिसके लिए संबंधित अधिकारियों पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। हालांकि डीएफओ का कहना है कि निर्माण की इजाजत मिल चुकी है।
उनका कहना है कि मंत्री महोदय ने क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को नजरअंदाज करते हुए अपनी सुविधा ऐसी जगह को चुना जो घर से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर है। इससे मंत्री के परिवार के अलावा कितनी जनता को फायदा होगा यह जगजाहिर है।
आरोप है कि अपनी स्वार्थपरता के लिए उन्होंने डोडर जंगल को भी नहीं बख्शा और उसे लाखों टन मलबे से ढक दिया गया जिस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय को संज्ञान लेना चाहिए। अभी भी निर्माण कार्य जारी है और हेलीपैड की कटिंग से जो मिट्टी निकल रही है उसको जंगल में फेंका जा रहा है। नियमों के अनुसार जंगल में मिट्टी को डंप नहीं किया किया जा सकता।
जंगल के साथ ही चुहडू रा बल्ह तथा शिवद्वाला गांव के लिए खतरा पैदा हो चुका है जो बरसात के समय कहर बनेगा। जितेंद्र ठाकुर ने स्थानीय वन अधिकारियों से नींद से जागने का आग्रह करते हुए कहा कि सदियों पुराना जंगल पीडब्ल्यूडी ने सरेआम बर्बाद कर दिया और किसी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, “टिहरा, संधोल और बनेरडी जैसी जगहों को नजरअंदाज कर खोपुआं में हैलीपेड बनाने के पीछे मंशा साफ है कि मंत्री महोदय बाकी जगहों को दरकिनार कर अपने घर के पास हर चीज बनाना चाहते हैं क्योंकि इसके बाद उन्हें ऐसा मौका नहीं मिलेगा और न ही ऐसा मुख्यमंत्री जो उनकी तरफ आंख बंद करके बैठा रहे। उन्होंने किसान भवन भी अपने घर के पास बनाया अब हेलीपैड बनाने के लिए जंगल को बर्बाद कर दिया है।”
चुहडू रा बल्ह गांव के लिए बरसात के समय भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि हेलीपैड की मिट्टी उनके घरों से सटे जंगल में फेंकी गई है घर और गांव घर और गौशालाओं व रास्तों के लिए खतरा बना हुआ है अगर इस मिट्टी से क्षेत्र की जनता को कोई नुकसान होता है तो इसके लिए वन विभाग की जवाबदेही होगी।
उधर, खोपूधार में नियमों पर ताक पर बनाये जा रहे हेलीपैड के बारे में धर्मपुर न्याय मंच ने कड़ी आपत्ति जताई है। मंच का कहना है कि उन्होंने इस हेलीपैड बारे सभी विभागों से आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी थी, जिसमें पता चला है कि इसके बारे में न तो राजस्व विभाग ने इसके राजस्व कागज़ात जारी किए हैं और न ही वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है।
मंच का कहना है कि ये हेलीपैड कौन विभाग बना रहा है और इसके लिए कितना बजट कहाँ से स्वीकृत किया गया है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। मंच से जुड़े लोगों का कहना है, “अब इसे आईपीएच मन्त्री महेंद्र सिंह अपने जन्मदिन के मौक़े होने वाले कार्यक्रम के लिए तैयार करवा रहे हैं और रात दिन वहाँ कटिंग की जा रही है और मालवा इधर उधर चारों तरफ फेंका जा रहा है लेकिन पूछने वाला कोई नहीं है और सारे नियम कानूनों को ठेंगा दिखा कर इसका काम जारी है।
एक और हैलीपैड बना था
कांग्रेस नेता ने कहा की इससे पहले कुछ माह पहले लाखों खर्च करके इससे कुछ दूरी पर छोटा हैलीपैड बनाया गया था और उसमें सैकड़ों बोरियाँ सीमेंट रेता बजरी लगाया गया था। अब उसे उखाड़ दिया गया है, ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि लाखों रुपये जो बर्बाद किए गये है उसका जिम्मेदार कौन है।
ग्रीनरी पर फेंका मलबा तो करेंगे कार्यवाही: डीएफओ
वन विभाग के डीएफओ राकेश कटोच ने कहा की हेलीपैड को लेकर अब परमिशन मिल चुकी है l लोक निर्माण विभाग द्वारा पैसा भी जमा करवा दिया है l अगर मलबा ग्रीनरी हरियाली पर फेंका जा रहा होगा तो उसे लेकर कड़ी कार्यवाही की जाएगी l वह अभी रेंजर को साइट पर भेज रहे हैं l
उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग के सुप्रिडेंट इंजीनियर एनपीएस चौहान ने कहा की हैलीपैड का बकायदा टेंडर लगाया गया है l नियमों के अनुसार ही काम किया जा रहा है l कुछ लोग विकास को लेकर बेवजह अड़ंगा डाल रहे हैं।
सरकाघाट।। उपमण्डल सरकाघाट की रखोह पंचायत के गध्यानी गांव के सास संतोषी देवी और ससुर ब्रह्मदास ने डेढ़ साल पहले हुई बेटे की आकस्मिक मौत के बाद अपनी 31 वर्षीय युवा बहू को डोली में बिठाकर उसके ससुराल हमीरपुर ज़िला के चबूतरा गांव के नरेन्द्र कुमार पुत्र फितूरी राम के घर को विदा किया है। विवाह की सभी रस्मों को निभाते हुए लड़की के सास-ससुर ने माता-पिता की तरह हिन्दू रीति रिवाजों से विवाह को सम्पन्न कराया।
गांव के मंदिर में विवाह की वेद सजाकर और अपने सगे संबंधियों की उपस्थिति में यह पुण्य कार्य सम्पन्न हुआ। दुल्हन की शादी चार वर्ष पूर्व ब्रह्मदास के युवा बेटे के साथ हुई थी लेकिन मोहाली में एक दुर्घटना में उसका देहांत हो गया था। ब्रह्मदास और संतोषी देवी के अपने घर में धाम का भी आयोजन किया व उनके सगे संबंधियों ने भी दिल-खोल कर लड़की और उसके दूल्हे को आशीर्वाद देने के बाद शगुन दिया।
पूरे क्षेत्र में ब्रह्मदास और उनकी पत्नी सन्तोषी देवी के इस पावन कार्य की प्रशंसा हो रही है। समाजसेवी प्रताप चौहान, एसडीएम ज़फर इक़बाल,डी एस पी चन्दरपाल सिंह, तहसीलदार दीनानाथ यादव, ज्ञान चंद, विनोद कुमार, कुलदीप सिंह ठाकुर, राजेश वर्मा आदि सहित अन्य लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नव- विवाहित दम्पति युगल को अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
गौरतलब है कि डेढ़ वर्ष पहले अभागे मां-बाप ने अपने पुत्र को खो दिया था। इनके बेटे सुरेश कुमार की मोहली ( चंडीगढ़) में सड़क पर अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर दी गई थी। पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा लेकिन अभी तक न्याय तो क्या मिलना उल्टा पंजाब पुलिस ने वह फाइल ही बंद कर दी है।