रामस्वरूप ही नहीं, किशन भी लॉकडाउन में दिल्ली से घर लौटे

धर्मशाला।। मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ही नहीं बल्कि कांगड़ा के सांसद किशन कपूर भी लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुंचे हैं। वह 10 अप्रैल को दिल्ली से लौटे हैं। इस मामले ने भी तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने कहा है कि सत्ताधारी नेताओं के लिए लॉकडाउन के नियम बदल दिए जा रहे हैं।

इस बारे में किशन कपूर ने अंग्रेजी अखबार ट्रिब्यून से कहा कांग्रेस पार्टी गन्दी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली में अपने आवास पर 14 दिन क्वारन्टीन रहा। यहां भी लौटने के बाद मैंने खुद को घर पर क्वारन्टीन कर लिया है।

किशन कपूर ने कहा, “जो हिमाचल के लोग बाहर फंसे हैं, उनसे पूरी सहानुभूति रखता हूँ और उनकी मदद की कोशिश कर रहा हूँ। मगर कांग्रेस पार्टी गन्दी राजनीति कर रही है।” उन्होंने कहा कि दिल्ली में उन्होंने सम्बंधित प्रशासन से धर्मशाला लौटने की इजाजत ली थी।

इससे पहले मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने दैनिक जागरण के लिए अपनी फोटो खिंचवाई थी और खबर प्रकाशित हुई थी कि वह दिल्ली से लौटे हैं। जब सवाल उठे कि पाबंदियों के बीच वह कैसे होमटाउन पहुंचे तो उन्होंने भी कांग्रेस पर कई आरोप लगा दिए थे।

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

सैनिटाइजेशन के नाम पर छिड़का पानी, शराब और मिट्टी का तेल

शिमला।। जिस समय पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है, उस दौर में कुछ लोग अवैध ढंग से पैसे कमाने में जुटे हैं। ऐसा मामला सामने आया है कि ऊना ज़िले की कुछ पंचायतों ने सैनिटाइज़ेशन करने के नाम पर पानी, मिट्टी के तेल और शराब से घोल बनाकर उसका छिड़काव कर दिया।

इस संबंध में ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया, “प्रधान पंचायतों को सैनिटाइज करने के नाम पर कुछ बिल पास कवाना चाह रहे। जब उनसे पूछा गया कि छिड़काव किस चीज का किया गया तो उनका जवाब संतोषजनक नहीं था। जब छिड़काव करने वाले कुछ लोगों से पूछा गया तो पता चला कि पानी, मिट्टी के तेल और शराब को इस्तेमाल किया है।”

मगर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक प्रदेश की कई पंचायतों के प्रधान सैनिटाइजेशन के नाम पर सरकार से बिल मंजूर करवाना चाह रहे थे, जबकि उन्हें पता ही नहीं था कि कोरोना वायरस फैलने का खतरा कहां-कहां ज्यादा होता है और अगर ऐसी जगहों को सैनिटाइज करना भी है तो किस चीज का छिड़काव करना है।

इस संबंध में उन्होंने न तो स्वास्थ्य विभाग से जानकारी जुटाई न प्रशासन में किसी से पूछा। बस इधर उधर पंचायतों में सैनिटाइजेशन अभियान छिड़ने की खबर मिली तो देखादेखी में अपने यहां भी जैसे-तैसे जो मर्जी मिलाकर छिड़काव करना शुरू कर दिया।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया है कि पंचायतें खुद सैनिटाइज करने का काम नहीं कर सकतीं, सरकार ने इसपर रोक लगाई हुई है।

कोरोना काल में कहां हैं ‘देश के सर्वश्रेष्ठ क्षमतावान मंत्री’ महेंद्र सिंह: भूपेंद्र

रितेश चौहान, सरकाघाट।। पिछले दिनों एक संदिग्ध संस्था की ओर से ‘देश का सर्वश्रेष्ठ क्षमतावान मंत्री‘ का टाइटल हासिल करने वाले हिमाचल प्रदेश के जनशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह पर विपक्ष ने ज़ोरदार हमला बोला है। भाकपा का कहना है कि 1990 में ठाकुर नत्था सिंह के लिए ‘नत्था सिंह का पता बताओ, दस पैसे इनाम पाओ’ का नारा चलाकर चुनाव जीतने वाले महेंद्र सिंह कोरोना संकट के दौरान कहां पर हैं।

इलाक़े के वामपंथी नेताओं का आरोप है कि मंत्री के चहेते ठेकेदारों ने मज़दूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया है और वे लॉकडाउन में रोटी के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने ये भी पूछा कि आज जब आम जनता के बच्चे प्रदेश से बाहर फंसे हैं तब सबसे ज्यादा टीए डीए झटकने और पूरा महीना धर्मपुर-शिमला-दिल्ली करने वाले जलशक्ति मंत्री कहां हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव और जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि ‘गरीबों के मसीहा कहलाने वाले मंत्री, उनके पुत्र-पुत्री आपदा के समय धर्मपुर की जनता से मुंह मोड़ चुके हैं।’ उन्होंने पूछा, “जान सबको प्यारी है और प्रधानमंत्री के आदेशों का पालन हर नागरिक का फर्ज है लेकिन सांसद रामस्वरूप की पैरवी करने वाले अपनी जनता के लिए क्या कर रहे हैं?”

भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और दो तीन मंत्रियों के अलावा पूरी सरकार क्वॉरन्टीन में है। उन्होंने कहा, “गरीबों के मसीहा महेंद्र सिंह और उनके परिवार को धर्मपुर के लोगों की कोई फिक्र नहीं, उन्हें तो केवल वोट चाहिए।”

रामस्वरूप शर्मा का समर्थन करने पर भी उठाए सवाल
भूपेंद्र सिंह ने सांसद राम स्वरूप शर्मा के लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से जोगिन्दर नगर पहुंचने के बारे भाजपा के राज्य मीडया सह प्रभारी रजत ठाकुर के ब्यान की भी कड़ी निंदा की है।रजत ठाकुर जनशक्ति मंत्री महेंद्र के बेटे हैं।

भूपेंद्र ने कहा, “भाजपा के प्रवक्ता द्वारा मीडिया को दिए बयान में सांसद के जोगिन्दर नगर पहुंचने को सही ठहराया है। इस बयान में उन्होंने सांसद का अपनी जनता के बीच पहुँचना व रहना जरूरी बताया है। मगर सवाल ये है कि लॉकडाउन के हाथ से धर्मपुर के विधायक और वरिष्ठ मंत्री एक दिन भी जनता की सुध लेने क्यों नहीं पहुँचे?”

भूपेंद्र ने सवाल किया है, “अब तक चुप रहने वाले और मीडिया में कोई बयान जारी न करने वाले मंत्री और उनके बेटे ने चुप्पी तोड़ी भी तो सांसद द्वारा ग़लत ढंग से की गई यात्रा को सही बताने के लिए। जबकि साफ़ है कि सांसद के लिए नियमों को तोड़-मरोड़ दिया गया जैसा आम लोगों के लिए नहीं किया जाता।”

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

CM बोल रहे- जहां हैं, वहीं रहें | MP बोले- हम लाने को प्रयत्नशील

शिमला।। कोरोना संकट के कारण लगाए गए लॉकडाउन से ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि जो जहां पर है, वहीं फँस गया है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की थी अभी वे जहां हैं, कुछ समय तक वहीं रहें। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक कह चुके हैं कि इन हालात में बाहर फँसा हुआ महसूस कर रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों को वापस लाना फ़िलहाल संभव नहीं है।

उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन हटने और स्थिति ठीक होने के बाद इस बारे में विचार किया जाएगा। मगर लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से अपने होमटाउन पहुँचे मंडी लोकसभा सीट से सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा है कि वह बाहर फँसे हिमाचल के लोगों को वापस लाने के लिए प्रयत्नशील हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह के प्रयत्न कर रहे हैं।

हालांकि, उनके इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि कोरोना के इस दौर में किसी को भी इधर से उधर, यहाँ तक कि एक ज़िले से दूसरे ज़िले में जाने की इजाज़त नहीं है। जब सीएम ख़ुद कह चुके हैं कि लोगों को लाना अभी संभव नहीं है तो फिर इस दौर में बाहर फँसे हिमाचलियों को लाने के लिए सांसद की ओर से कैसे प्रयत्न किए जा रहे हैं, इसे लेकर चर्चा होने लगी है।

“बहुत से लोग बाहर फँसे हैं. हम प्रयत्नशील हैं कि उनको जैसे संभव हो सके, लेकर आएं। उस दुख पीड़ा से हम भलीभाँति परिचित हैं।”

– रामस्वरूप शर्मा

रामस्वरूप शर्मा का विरोधाभासी दावा
इस तरह से मंडी के सांसद ने हिमाचल प्रदेश के सीएम से उलट दावा किया है। बता दें कि गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ने प्रदेशवासियों के नाम जारी संबोधन में फिर अपील की थी कि जो लोग जहां हैं, वहीं रहें। यानी सरकार फ़िलहाल इस बारे में कोई योजना नहीं बना रही। मगर मंडी के सांसद का कहना है कि वह बाहर फँसे लोगों को लाने की कोशिश कर रहे हैं और जिनके अपने बाहर फँसे हैं, वह उनके दर्द को समझते हैं। वीडियो देखें-

दरअसल रामस्वरूप शर्मा की आलोचना इस बात को लेकर हो रही है कि कैसे वह लॉकडाउन  के दौरान दिल्ली से अपने होमटाउन पहुँच गए। अगर उन्होंने परमिट ली भी थी तो क्यों उन्हें बाक़ी लोगों की तरह हिमाचल की सीमा पर क्वॉरन्टीन न करके जोगिंदर नगर आकर सेल्फ़ क्वॉरन्टीन होने दिया गया। इस संबंध में आलोचना होने के बाद सफ़ाई देते हुए रामस्वरूप शर्मा ने कहा है कि वह नियमों का पालन करके लौटे हैं और इससे प्रदेश की जनता के बीच अच्छा संदेश गया है।

इसी दौरान उन्होंने कहा, “बहुत से लोग बाहर फँसे हैं. हम प्रयत्नशील हैं कि उनको जैसे संभव हो सके, लेकर आएं। उस दुख पीड़ा से हम भलीभाँति परिचित हैं।”

सांसद ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफ़ाई देते हुए एक वीडियो भी जारी किया है। पूरी वीडियो देखें-

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

कोरोना के खिलाफ सरकार और नागरिक, दोनों निभाएं अपने फर्ज- लेख

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चांदनी शर्मा।। पिछले दिनों पाँच अप्रैल को रात 9 बजे पीएम मोदी की अपील पर पूरा भारत प्रकाशमय हो गया था। यह प्रकाश इस बात का प्रतीक था कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए समूचा भारत एकजुट है। भारतवासियों ने रात 9 बजे , 9 मिनट के लिए अपने घर की बिजली बंद कर दीपक, टाॅर्च, फ़्लैशलाइट आदि जलाकर एकता का जो दृश्य प्रस्तुत किया, वह अद्भुत था। कोरोना के खिलाफ हमारी एकता और मनोबल के साथ-साथ इसने राष्ट्रभक्ति की महाशक्ति का परिचय भी पूरे विश्व को दिया।क्या ग़रीब , क्या अमीर, क्या शहर, क्या गांव; प्रदेश के प्रत्येक हिस्से और तबके ने एकता प्रदर्शन इस समारोह में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी तथा मौतों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन के कारण मानसिक तनाव, घृणा, अनिश्चितता, नकारात्मकता, अकेलेपन में भी बढ़ोतरी हुई है। ये समस्याएँ भी कोरोना रूपी अंधकार को दूर करने में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। पाँच अप्रैल को जो देशवासियों ने किया, उससे इनसे निपटने में भी मदद मिली होगी।

आज जहां चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी, आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले सरकारी व गैर-सरकारी संस्थान कोरोना के विरुद्ध सीधी जंग लड़कर मानवता को बचाने में प्रयासरत हैं, वही घरों में बंद नागरिकों की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे विपत्ति की इस घड़ी में अपना यथासंभव योगदान दे। जब किसी काम को 130 करोड़ लोग एकसाथ करते हैं, तो वह चर्चा का विषय बन जाता है ।

भारत ने कई बार विश्व को मार्ग दिखाया है और वर्तमान में भी दुनिया भर में भारत की ओर से अपने नागरिकों को कोरोना से बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ हो रही है। मगर नेतृत्व द्वारा लिए गए फ़ैसले तभी सफल होंगे जब आम जनता भी इसमें साथ देगी। भारत में कोरोना से लड़ना है तो कई चुनौतियों से पार पाना होगा। इन चुनौतियों को सरकार और समाज के आपसी समन्वय द्वारा हल किया जा सकता है।

समाज लॉकडॉउन को पूरा करने में अपना योगदान दे, ये ज़रूरी है। मगर सरकार की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वह डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ की सुरक्षा के लिए ज़रूरी सामग्री और उपकरण जुटाए और साथ ही मरीज़ों के इलाज के लिए ज़रूरी संसाधनों का भी इंतज़ाम करे। इससे भी ज़्यादा ज़रूरी है कि टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाना।

यह दौर इंसानों के लिए मुश्किल बेशक है मगर ज़रूर है कि हम इंसानियत बनाए रखें। जो ज़रूरतमंद हैं, उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करना हमारा फ़र्ज़ है। अगर हम एक हैं तो किसी भी मुसीबत का सामना आसानी से कर सकते है । एकता, उत्साह व अनुशासन का मिश्रण संसार के किसी भी बल से शक्तिशाली होता है। इसलिए, कोरोना जैसी अदृश्य शक्ति से लड़ने के लिए ज़रूरी है कि हम इन्हें बनाए रखें।

(लेखिका भुंतर, कुल्लू से हैं)

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

रामस्वरूप बोले- मुझे टारगेट करने वाले जमातियों से भी ज़्यादा घातक

मंडी।। लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा है कि जो लोग उनके आने पर सवाल उठा रहे हैं, वे जमातियों से भी ज़्यादा घातक हैं। सांसद ने कहा कि उन्हें जनता ने भारी बहुमत से जिताया है इसलिए उनका फ़र्ज़ था कि वह अपने चुनावक्षेत्र में रहते। ग़ौरतलब है कि आम लोगों के लेकर कांग्रेस पार्टी तक ने लॉकडाउन के बीच सांसद की वापसी को मुद्दा बना लिया है।

एक पोर्टल से टेलिफोन पर बात करते हुए मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद ने बताया कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद लॉकडाउन के कारण वह घर नहीं लौट पाए थे और 10 अप्रैल तक दिल्ली में अपने आवास पर ही रुके थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली और मंडी के प्रशासन से इजाज़त लेने के बाद ही वह लौटे हैं और यहाँ आकर भी नियमों का पालन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जो लोग इस पर टिप्पणी कर रहे हैं, वे वही मानसिकता वाले लोग हैं देश में खलबली करना चाहते हैं, देश की जनता में मतभेद करना चाह रहे हैं। सुख दुख की घड़ी में सांसद और विधायकों को अपने क्षेत्र में रहना चाहिए। मैं लॉकडाउन के कारण दिल्ली में रुका था मगर स्वास्थ्य जाँच करवाने के बाद अपने इलाक़े में आया हूँ. मेरे लिए जनता के बीच रहना ज़रूरी था। फिर भी मैंने औपचारिकताएँ पूरी कीं और दिल्ली व मंडी के प्रशासन से अनुमति ली।”

रामस्वरूप शर्मा

सांसद ने कहा, “मैं 10 अप्रैल रात नौ बजे जोगिंदर नगर पहुँचा और अपने प्रिंटिंग प्रेस जहां मेरा कार्यालय भी है, वहीं अपने साथ आए सहयोगियों के साथ क्वॉरन्टीन हूँ। मैंने इसकी सूचना एसडीएम और डीसी मंडी को भी दी है। स्वास्थ्य की जाँच करवाई है और नियमों का पालन किया है। जो नियम हमारी सरकार ने तय किए हैं, मैंने उनका पालन किया है।”

रामस्वरूप शर्मा ने कहा, “सांसद के लिए अपने इलाक़े में आकर जनता की सेवा में लगना ज़रूरी होता है। अगर मैं न आता तो तथाकथित नेता कहते कि इलाक़े में लोगों को दिक़्क़त आ रही है और मंडी का सांसद ग़ायब है, दिल्ली में आराम कर रहा है। बहुत से लोग, बेटे-बेटियां बाहर के प्रदेशों में फँसे हैं। कुछ लोग जो आए हैं, वो क्वॉरन्टीन किए गए हैं और अवधि पूरी करने पर छोड़ा भी गया हूँ। मैं लगातार फ़ोन पर संपर्क में हूँ और देख रहा हूँ कि कब महामारी पर ब्रेक लगे और वे घर लौटें।”

पोर्टल से बात करते हुए, अपने ऊपर आरोप लगाने वालों को निशाने पर लेते हुए मंडी के सांसद ने कहा, “ये वो लोग हैं जो डोकलाम में चीनी सेना के साथ भारत की सेना के आमने-सामने आने पर चीन के राजदूत के साथ नाश्ता कर रहे ते, सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँग रहे थे, जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े गैंग ने देश विरोधी बातें की थीं तो बनके नेता पहुँचे थे, ये शाहीन बाग़ के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। तबलीगी जमात से भी ज़्यादा घातक हैं, वो तो उन्होंने जो कर्म किए हैं उनकी सीमा उन्हें मिलने वाली है। मगर जमात इनकी छत्र छाया में पल रही है, ये उसे संरक्षण दे रहे हैं।”

सांसद ने कहा, “मंडी की जनता ने भारी बहुमत से मुझे जताया है। उनके साथ रहना, मेरा फ़र्ज़ है। मैंने सारे दायित्व निभाए हैं। मैंने 50 लाख की सांसद निधि कोरोना फैलते ही मंडी लोकसभा क्षेत्र को दिए। एक करोड़ संसद फंड में दिए हैं। एक महीने की सेलरी प्रधानमंत्री फंड में दी है।”

जारी किया वीडियो संदेश
सांसद ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफ़ाई देते हुए एक वीडियो भी जारी किया है। देखें-

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

सीएम फिर बोले- जो हिमाचल से बाहर हैं, वो वहीं रहें

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कोरोना लॉकडाउन के चलते अपने घर न आ पा रहे लोगों से कहा है कि वो वहीं रहें, अभी जहां पर हैं। सीएम पहले भी कह चुुके हैैं जो जहां है, उसे वहीं रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सही है कि लोगों को कठिनाइयां पेश आ रहीं होंगी, लेकिन इस समय इसके अलावा कोई उपाय नहीं है। सीएम ने अपने फेसबुक पेज पर जारी वीडियो बयान में कहा, “राज्य से बाहर रह रहे लोगों का हिमाचल अपना घर है, उनका स्वागत है, पर इस समय परिस्थितियां अलग हैं।”

सीएम ने कहा, “बहुत से बच्चे और लोग हिमाचल आने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हिमाचल आएंगे तो भी प्रदेश की सीमा पर उन्हें 14 दिन क्वारंटीन रहना होगा। इसलिए ऐसे लोगों से आग्रह है कि वे कुछ वक्त और गुजारें।”

पूरा वीडियो संदेश देखें-

समस्त प्रदेशवासियों से अपील ।#IndiaFightsCorona

Jairam Thakur ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 16, 2020

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

लॉकडाउन के बीच दिल्ली से घर पहुँचे सांसद रामस्वरूप शर्मा, उठे सवाल

मंडी।। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद रामस्वरूप शर्मा को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। वह कोरोना वायरस संकट को टालने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बीच दिल्ली से हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित अपने होमटाउन जोगिंदर नगर पहुँच गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कैसे उन्हें इसकी इजाज़त मिली और क्यों इन्हें बॉर्डर पर ही क्वॉरन्टीन नहीं किया गया।

दरअसल रामस्वरूप शर्मा 11 अप्रैल को दिल्ली से जोगिंदर नगर पहुँचे थे। यहाँ उनकी जाँच की गई और घर जाने की जगह जोगिंदर नगर में पार्टी कार्यालय में रुक गए। यहाँ पर उन्हें 14 दिनों तक क्वॉरन्टीन रहना है। मगर सवाल यह उठाए जा रहे हैं कि कैसे बाहर से आए एक व्यक्ति को सीधे हिमाचल के अंदरूनी इलाक़े में आने दिया गया। सांसद का कहना है कि उन्होंने इसकी परमिशन ली थी।

सांसद रामस्वरूप शर्मा हुए क्वारंटाइन
14 अप्रैल को दैनिक जागरण ने रामस्वरूप शर्मा के जोगिंदर नगर पहुँचने की ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें सांसद दैनिक जागरण अख़बार पढ़ते दिख रहे थे। यानी घर पहुँचकर उन्होंने बाक़ायदा पत्रकार से फ़ोटो भी खिंचवाई। उनके हाथ में 13 अप्रैल का अख़बार है। (Image: Dainik Jagran)

दरअसल बाहर से आया कोई व्यक्ति अपने साथ कोरोना न लेकर आए, इसके लिए किसी को भी हिमाचल में प्रवेश की इजाज़त नहीं है। इसी कारण हज़ारों हिमाचली इस समय बाहरी राज्यों में फँसे हैं और हिमाचल सरकार ने उन्हें घर लाने में असमर्थता जताई थी। सीएम ने भी गुज़ारिश की थी कि अभी हिमाचली जहां हैं, वहीं पर रहें।

इसके बाद से किसी को भी हिमाचल में आने की इजाज़त नहीं दी गई है और जो अपने स्तर पर यहां आने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें प्रदेश की सीमा पर ही क्वॉरन्टीन सेंटरों में रखा जा रहा है ताकि वे गलती से भी संक्रमित न हुए हों और अंदरूनी इलाक़ों में कोरोना लेकर न चले जाए। ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि नियमों को ताक पर रखकर सांसद को क्यों सीमा पर बाक़ी लोगों की तरह क्वॉरन्टीन नहीं किया गया।

कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। इस पर सांसद ने कहा है कि वह दिल्ली से इजाज़त लेकर अपने संसदीय क्षेत्र आए हैं। उनका कहना है कि वह चुने हुए प्रतिनिधि हैं और इन हालात में उनका अपने इलाक़े में होना ज़रूरी है। सांसद ने कहा है कि वह जोगिंदर नगर पहुँचते ही पार्टी के कार्यालय के कमरे में क्वॉरन्टीन हो गए हैं और किसी से मुलाक़ात नहीं कर रहे।

साथ आए स्टाफ़ के तीन लोग?
सोशल मीडिया पर एक लेटर भी शेयर किया जा रहा है जिसमें दिल्ली पुलिस की ओर से एक अनुमति पत्र जारी हुआ है। इसमें सांसद की ओर से लिखे पत्र की प्रति भी संलग्न है जिसमें उन्होंने अपने चुनावक्षेत्र जाने के लिए मूवमेंट पास माँगा है। इसमें उन्होंने अपने वाहन का नंबर दिया है और साथ ही अपने स्टाफ़ के तीन लोगों का भी ज़िक्र किया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना संकट को देखते हुए फ़ैसला किया गया है कि वाहनों में भी सोशल डिस्टैंसिंग हो और लोग क़रीब न बैठें। इसी कारण बाइक में एक और कारों में दो से ज़्यादा लोग नहीं हो सकते। उसमें भी आगे सिर्फ़ ड्राइवर और पीछे उसकी विपरीत वाली तरफ़ यात्री बैठक सकता है।

अब चूँकि, जिस गाड़ी के लिए मूवमेंट पास की अनुमति जारी हुई थी, वह होंडा WRV है जिसकी सीटिंग कैपैसिटी पांच है। अब चार लोग इस गाड़ी में कैसे सोशल डिस्टैंसिंग की पालन करके आए होंगे, यह भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में इस लेटर के आधार पर लोग सोशल मीडिया पर सवाल पूछ रहे हैं कि पांच सीटर गाड़ी में चार लोगों को कैसे आने दिया गया? लोग ये भी पूछ रहे हैं कि सांसद के साथ आए बाकी के लोग कहां हैं।

बहरहाल, इस पूरे मामले को लेकर ये सवाल भी खड़े होने लगे हैं कि सत्ताधारी लोगों और आम लोगों के नियम अलग क्यों हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इसे बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गई है।

जानें, किस राज्य में कितने हैं कोरोना के मरीज़, कितने हुए ठीक

शिमला।। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में इज़ाफ़ा हो रहा है। अब तक भारत में 8532 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इनमें 278 की जान चली गई है। हालाँकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ठीक होकर घर लौट रहे हैं।

भारत के अलग-अलग राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण की क्या स्थिति है, यह आप नीचे दिए गए टेबल में देख सकते हैं। इसमें राज्यों के नाम अंग्रेज़ी वर्णमाला के क्रम में दिए गए हैं।

फिर उन राज्यों में सामने आए कुल मामले, ठीक हुए लोगों की संख्या और जान गंवाने वाले लोगों की संख्या दी गई है। इनमें भारतीय और विदेशी, दोनों नागरिक शामिल हैं।

क्रम राज्य अब तक दर्ज कुल मामले ठीक हुए लोग
1. आंध्र प्रदेश 381 11 6 की मौत
2. अंडमान निकोबार 11 10 0
3. अरुणाचल प्रदेश 1 0 0
4. असम 29 0 1 की मौत
5. बिहार 64 19 1 की मौत
6. चंडीगढ़ 19 7 0
7. छत्तीसगढ़ 25 10 0
8. दिल्ली 1154 25 24 की मौत
9. गोवा 7 5 0
10. गुजरात 432 44 22 की मौत
11. हरियाणा 185 29 3 की मौत
12. हिमाचल प्रदेश 32 6 1 की मौत
13. जम्मू-कश्मीर 224 6 4 की मौत
14. झारखंड 17 0 1 की मौत
15. कर्नाटक 226 37 6 की मौत
16. केरल 372 142 2 की मौत
17. लद्दाख 15 10 0
18. मध्य प्रदेश 564 0 36 की मौत
19. महाराष्ट्र 1,761 208 127 की मौत
20. मणिपुर 2 1 0
21. मिजोरम 1 0 0
22. ओडिशा 54 12 1 की मौत
23. पुदुचेरी 7 1 0
24. पंजाब 151 5 11 की मौत
25. राजस्थान 700 21 3 की मौत
26. तमिलनाडु 969 44 10 की मौत
27. तेलंगाना 504 43 9 की मौत
28. त्रिपुरा 2 0 0
29. उत्तराखंड 35 5 0
30. उत्तर प्रदेश 452 45 5 की मौत
31. पश्चिम बंगाल 134 19 5 की मौत
कुल संख्या 8532* 765 273  की मौत

(ये आँकड़े रविवार रात तक के हैं)

जानें, किस राज्य में कितने हैं कोरोना के मरीज़, कितने हुए ठीक

होम क्वॉरन्टीन तोड़ा तो FIR के साथ भेजे जाएंगे क्वॉरन्टीन सेंटर

शिमला।। कोरोना की आशंका टालने के लिए होम क्वॉरन्टीन किए गए लोगों द्वारा नियम तोड़कर बाहर निकलने की शिकायतें आने के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने कड़ा कदम उठाने का फ़ैसला किया है।

अगर होम क्वॉरन्टीन किया गया कोई शख़्स घर से बाहर निकलता है तो उसके ऊपर न सिर्फ़ एफआईआर होगी बल्कि उसे इस्टीट्यूशनल क्वॉरन्टीन किया जाएगा। यानी ऐसा करने वालों को घर से ले जाकर क्वॉरन्टीन करने के लिए बनाए गए केंद्रों में रखा जाएगा।

यह नियम सोमवार से लागू होगा। होम क्वॉरन्टीन तोड़ने वालों को 14 दिनों तक क्वॉरन्टीन सेंटर में रखा जाएगा।

शिमला पुलिस ने ट्विटर और फ़ेसबुक पेज पर रविवार को पोस्ट किया है, “कल से जो होम क्वांरटाइन से बाहर जाएगा उसको एफआईआर के साथ साथ 14 दिन इंस्टीट्यूशनल क्वांरटाइन भी भेजा जाएगा।”