पिता वीरभद्र की तरह दूसरों को नीचा क्यों दिखाते हैं विक्रमादित्य?

इन हिमाचल डेस्क।। हाल ही में हिमाचल विधानसभा में हुए हंगामे को लेकर शिमला से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य ने कहा था कि ‘ऐसा नहीं होना चाहिए था, हम लोग सभ्य हैं, ये हिमाचल है, यूपी-बिहार या झारखंड नहीं है।’ इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना हुई थी। अब उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज की एक तस्वीर को अपनी तस्वीर के साथ शेयर करते हुए तुलना करने को कहा है।

May be an image of 2 people, beard, people standing and text that says "Vikramaditya Singh 1h.$ 1h यें महाशय कहते हैं इनको हमसे जान का ख़तरा हैं, की विक्रमादित्य सिंह गुंडा हैं| कहते है एक तस्वीर हजारो शब्द बया करती है, अब आप ही तय कीजिए कौन क्या हैं| जय श्री राम विक्रमादित्य सिंह विधायक"

अप्रत्यक्ष तरीके से उन्होंने हंसराज को ‘गुंडा’ दिखाने की कोशिश की है। मगर यह तरीका बेहद अपमानजनक है और किसी की दिखावट की वजह से उसपर टिप्पणी करना एक तरह से ‘रेसिस्ट’ टिप्पणी है। खासकर उस नेता के लिए, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से आता है।

लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब विक्रमादित्य ने ऐसी टिप्पणी की है। उनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं कि वह भले ही लोकतांत्रिक देश में बतौर जन प्रतिनिधि चुने गए हैं लेकिन राजशाही के गुरूर से उबर नहीं पाए। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने जयराम सरकार पर ‘संघियों और भंगियों के ग्रिप में’ होने की बात कही थी।

पहली नज़र में यह स्लिप ऑफ टंग लग सकता है यानी जुबान का फिसलना लग सकता है मगर वीरभद्र परिवार के इतिहास को देखें तो लगता है कि यह सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं बल्कि फ्यूडल मानसिकता का नतीजा है। यही बात उनके पिता को लेकर भी कही जाती रही है क्योंकि वह भी कई नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर चुके हैं।

वैसे तो कई बार वीरभद्र सिंह ने अजीब टिप्पणियां की हैं, मगर उनमें से कुछ आगे दी जा रही हैं। आप लिंक पर क्लिक करके पूरी खबर भी पढ़ सकते हैं।

  1. ज्वालामुखी दौरे पर बौतर मुख्यमंत्री गए वीरभद्र सिंह ने अध्यापकों को भरी सभा में मकरझंडू कहा।
  2. वीरभद्र सिंह ने सतपाल सत्ती को नीचा दिखाने के लिए गद्दी समुदाय का हवाला लेते हुए कहा था – प्रेजिडेंट हैं तो क्या हुआ, प्रेजिडेंट तो गद्दी सभा के भी होते हैं
  3. भोरंज उपचुनाव में प्रचार के दौरान बीजेपी के दिवंगत नेता आई.डी. धीमान को नकल करवाने वाला प्रिंसिपल करार दिया था।
  4. रभद्र सिंह ने रविंद्र रवि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मैं तो तब से जानता हूं जब वह खोखे में अंडरगारमेंट्स बेचा करता था।
  5. विधायक बलवीर शर्मा के लिए कहा था- वो तो एक ठेकेदार का मुंशी था, उसे तो कमाई का चस्का है।
  6. बीजेपी को नीचा दिखाने के लिए कहा था- ये गंदगी उठाने वाले लोग हैं, यही काम करेंगे। इन्हें चाहिए कि म्यूनिसिपल कमेटी में नौकरी के लिए दरख्वास्त दें।
  7. जब वह सिरमौर दौरे पर गए थे तो बिंदल पर हमला करने के लिए कह दिया था- बिंदल कोई सुंदर नारी नहीं कि नाहन की जनता उनपर मोहित हो जाए।
  8. गुड़िया रेप ऐंड मर्डर केस की CBI जांच की मांग पर भड़ककर उन्होंने कोटखाई की जनता को ‘होशियार’ बता दिया था।
  9. महेश्वर सिंह को कहा था कि उनपर तो उनकी पत्नी भी यकीन नहीं करती।
  10. मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बदतमीज लड़का बता दिया था।
  11. सुक्खू पर हमला करते हुए यहां तक कह दिया था कि मुझे तो वो दिन भी याद है जब सुक्खू पैदा हुए थे।
  12. वनरक्षक होशियार सिंह की मौत होने पर उन्होंने कहा था- इस तरह के एक-दो मामले होते रहते हैं
  13. स्वाइन फ्लू से हिमाचल में मौतें हुईं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था- ऐसा तो होता रहता है

जरूरत पड़ी तो कंगना को सुरक्षा दी जाएगी: जयराम ठाकुर

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि यदि जरूरत हुई तो हिमाचल सरकार कंगना रणौत को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करवाएगी।

ढलियारा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने कंगना रानाउत को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करवाई है। लेकिन हिमाचल सरकार भी जरूरत पड़ने पर सुरक्षा दे सकती है।

कंगना रणौत ने महाराष्ट्र के अंदर कोर्ट में चल रहे मामलों को हिमाचल प्रदेश के अंदर शिफ्ट करने कि इच्छा जाहिर की है। इसपर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है और इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उनके लिए उचित नहीं होगा।

कोरोना के मामले बढ़े तो सख्ती बढ़ाएगी सरकार: मुख्यमंत्री

शिमला।। देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। इस बीच, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार किसी भी तरह के हालात के लिए तैयार। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में मामले बढ़े तो सरकार उसी हिसाब से सख्ती करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस संबंध में एक दो दिन में फैसला ले लेगी। चार मार्च को होने वाली कैबिनेट की बैठक में भी इस बारे में चर्चा हो सकती है। सीएम जयराम ठाकुर मंगलवार को प्रदेश विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उसी दौरान उनसे कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर सवाल किया गया था।

सीएम ने कहा कि इस बारे में सरकार गंभीर है और अगर मामले बढ़ते हैं तो एहतियातन फैसले लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की है।

सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं हंसराज: यदोपती ठाकुर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष यदोपती ठाकुर ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष हंसराज आए दिन विधानसभा में गुंडागर्दी करके सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि हंसराज यह सब इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह सत्ता का दुरुपयोग करके ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अंबानी और अडाणी की तरह सुरक्षा पाने की चाहत रखते हैं।’

हंसराज ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपनी जान को खतरा बताया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी है। इस पर यदोपती ठाकुर ने ‘इन हिमाचल’ से कहा, “हंसराज ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा को शर्मसार किया है। अगर ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा दी जाती है तो ये बेहद हैरानी और दुख की बात होगी।”

यूथ कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा, “जिस तरह हंसराज आए दिन कांग्रेस विधायकों के साथ बदतमीजी कर रहे हैं, उससे सरकार भी बैकफुट पर जा रही है। अगर विधानसभा में इसी तरह का गुंडाराज चलता रहा तो आने वाले समय में युवा कांग्रेस झंडे-डंडे सहित विधानसभा का घेराव करेगी।”

यदोपती ने कहा, “जब तक कांग्रेस विधायकों का निलंबन रद्द नहीं किया जाता, तब तक युवा कांग्रेस भाजपा सरकार का निरंतर विरोध करेगी।”

विक्रमादित्य ने मेरे पास आकर कहा- देख ले, तू शिमला में है: हंसराज

कांग्रेस के विधायकों ने इतना बड़ा जुर्म नहीं किया कि निलंबित किए जाएं: वीरभद्र सिंह

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि कांग्रेस के विधायकों ने इतना बड़ा जुर्म नहीं किया कि उन्हें विधानसभा के बजट सत्र से ही निलंबित कर दिया जाए।

दरअसल, राज्यपाल का रास्ता रोकने के दौरान हुए हंगामे के बाद नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के पांच विधायकों को पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि विधायकों का निलंबन अवैध है।

अब, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी अपनी पार्टी के विधायकों के निलंबन को गलत बताया है। वीरभद्र ने कहा, “हालांकि, उस समय मैं सदन में नहीं था और मुझे नहीं पता कि उस दौरान क्या हुआ, लेकिन कांग्रेस के विधायक जिम्मेवार हैं और कायदे से बाहर नहीं जाएंगे।

मंगलवार को शिमला में अपने निवास स्थान होली लॉज पहुंचे पूर्व सीएम एवं विधायक ने पत्रकारों से कहा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस गतिरोध को खत्म कर लेंगे।

राज्यपाल से बदसलूकी, अग्निहोत्री समेत 5 कांग्रेस MLA निलंबित

NSUI से ‘धमकियां’ मिलने के बाद सरकार ने बढ़ाई हंसराज की सुरक्षा

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा उपाध्यक्ष और चुराह से बीजेपी विधायक हंसराज की सुरक्षा बढ़ा दी। हंसराज का कहना है कि उन्हें एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं से धमकियां मिल रही हैं। इसके बाद ही उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई है।

हंसराज ने कहा, “मेरी जान को खतरा है। खासकर विधानसभा में कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य के व्यवहार को देखते हुए।”

दरअसल, सदन में विक्रमादित्य और हंसराज के बीच बहस हो गई थी। बाद में हंसराज ने आरोप लगाय था कि विक्रमादित्य ने उन्हें धमकी दी और छूने की कोशिश की।

हंसराज कहते हैं कि विधानसभा के अंदर किए गए व्यवहार के लिए विक्रमादित्य के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। हालांकि, विक्रमादित्य का कहना है कि उन्होंने कुछ नहीं किया, उल्टा हंसराज ने उनके साथ बहस की।

विक्रमादित्य ने मेरे पास आकर कहा- देख ले, तू शिमला में है: हंसराज

आउटसोर्स्ड कर्मियों को मर्ज करना बेरोजगारों से भद्दा मजाक

  1. इन हिमाचल डेस्क।। दूरदृष्टिहीन नेताओं की निशानी- बेरोजगार युवाओं को नौकरी के समान अवसर न देना और बैकडोर से किसी और की भर्ती करके वाहवाही लूटना। जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि विभाग में आउटसोर्स पर रखे 989 कर्मचारियों को विभाग में मर्ज किया जाएगा।

पहले सरकारें कहती हैं- रेगुलर भर्ती के लिए पैसे नहीं हैं, हम आउटसोर्स कर्मी रखेंगे। मजबूर युवा औने-पौने मेहनताने पर कंपनियों से जुड़ जाते हैं। ये कंपनियां (ठेकेदार) सरकार से पैसे लेकर अपने जो कर्मचारी रखती है, उन्हें कम वेतन देती है। युवा इस उम्मीद में अपना शोषण करवाते हैं कि किसी दिन पक्के हो जाएंगे।

उधर, दूसरी ओर बाकी बेरोजगार आस लगाते हैं कि आउटसोर्स की व्यवस्था तो टेम्पररी है, किसी दिन पक्की भर्ती निकलेगी और हमें आवेदन का मौका मिलेगा। मगर फिर किसी दिन कोई मंत्री एलान करता है कि आउटसोर्स पर रखे गए कर्मचारी महकमे में मर्ज किए जाएंगे। फिर किसी दिन वे रेगुलर भी हो जाएंगे।

इस तरह असंख्य बेरोजगारों का सपना टूट जाता है। बिना कम्पीट किए वो नौकरी की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। जबकि आउटसोर्स में लगने वाले कर्मचारी, जो स्वेच्छा से यह जानते हुए निजी कम्पनी या ठेकेदार के पास लगे थे कि उनकी नौकरी सरकारी नहीं है, वे सरकारी मुलाजिम बन जाते हैं।

पिछली सरकार को दोष दिया जाता है कि ये व्यवस्था उसने की थी। अजी, आपाने क्यों सत्ता में आने के बाद ये बन्द नहीं की? अब आपको चिंता हो रही है कि इनके साथ शोषण न हो, इसलिए हम इन्हें महकमे में शामिल कर रहे हैं। आपको इनके शोषण की चिंता है, बाकी बेरोजगारों की नहीं?

और फिर सरकार का वो शुरुआत वाला लॉजिक भी धरा का धरा रह जाता है कि ‘हम रेगुलर भर्ती करके लोग इसलिए नहीं रख रहे कि पैसा नहीं है।’ अरे जब पक्का ही करना था तो शुरू से ढंग से भर्ती निकालकर लोगों को कम्पीट करने का मौका देते! क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं सबको समान अवसर देने की?

हर महकमे में यही हो रहा है। इसे कहते हैं बैकडोर भर्तियां। चहेतों को नौकरी देना, भले उनसे कहीं ज्यादा लायक लोग बेरोजगार रह जाएं। शिक्षा विभाग इसका उदाहरण है। और इस तरह की नाइंसाफी के लिए पहले धूमल और वीरभद्र की सरकारें जिम्मेदार थीं, अब मौजूदा सरकार भी उसी राह पर चल रही है।

इस बीच, सीएम का 2 साल पहले का बयान पढ़िए:

आउटसोर्स्ड कर्मचारी रेग्युलर नहीं किए जा सकते: मुख्यमंत्री

 

विक्रमादित्य ने मेरे पास आकर कहा- देख ले, तू शिमला में है: हंसराज

शिमला।। विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य और विधानसभा के डेप्युटी स्पीकर हंसराज के बीच तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए। दोनों के बीच गहमागहमी हुई और सीट पर जाकर बहसबाजी की गई। यह पूरा विवाद शुक्रवार के घटनाक्रम को लेकर हुआ जब विपक्ष ने राज्यपाल के वाहन को रोकने की कोशिश की थी।

कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि सदन के बाहर हुई घटना पर उसके पांच विधायकों को पूरे सत्र से निष्काषित करना अवैध है। उनकी मांग यह है कि कार्रवाई करनी है तो हंसराज पर भी की जाए जो बाद में धक्कामुक्की करते और राज्यपाल के वाहन के आगे उछलकूद कर रहे नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री को खींचते नज़र आए थे।

हंसराज ने कहा कि विपक्ष की अजीब हरकत से राज्यपाल घबराए हुए थे। उन्होंने कहा, “उनकी गाड़ी और दरवाजे को जैसे तोड़ने की कोशिश की तो मुझे दखल देना पड़ा। अगर हमारे विपक्ष के विधायकों के साथ कोई और ऐसा कर रहा होता, तो भी मैं इसी तरह दखल देकर उनका बचाव करता।”

इसी मामले मे बहस काफी बढ़ गई। बाद में विक्रमादित्य ने सदन बाहर आकर कहा कि ‘हंसराज का अभद्र भाषा का रिकॉर्ड रहा है और आज भी उन्होंने ऐसे ही भाषा में तू-तड़ाक का इस्तेमाल किया।’ विक्रमादित्य ने कहा, “मैं तो सिर्फ यह कह रहा था कि इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती, ये सदन है।”

हालांकि, हंसराज ने मीडिया को बताया कि विक्रमादित्य ने हाउस के अंदर उनकी सीट के पास आकर उन्हें धमकी दी। हंसराज ने कहा, “उन्होंने मेरे नजदीक आकर कहा- तू बैठ जा, देख ले, तू शिमला में है। व्यक्तिगत तौर पर मैं डरता नहीं हूं, लेकिन मेरा परिवार यहीं है। इस तरह की धमकी जब ये मुझे दे रहे हैं जब मैं सरकार में हूं तो बाकियों के साथ ये क्या करते हैं।”

हंसराज ने कहा कि विक्रमादित्य ने उन्हें छूने की कोशिश की है। उन्होंने कहा “अगर हाउस के अंदर वो ऐसा कर सकते हैं तो बाहर कुछ भी कर सकते हैं। इस तरह का व्यवहार कभी भी कर सकते हैं। मैंने स्पीकर से इस मामले को देखने की अपील की है।”

15 साल से टंकी में रह रहा परिवार; न बिजली का कनेक्शन, न पानी का

कुल्लू।। यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जो पिछले 15 सालों से पानी की एक पुरानी टंकी में रह रहा है। आनी उपमंडल की कुठेड़ पंचायत के जिया लाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ यहां रहते हैं। खाली पड़ी छह बाई आठ फुट की टंकी के ऊपर अस्थायी छत डालकर ये झोपड़ी सी बनाई गई है।

दरअसल, जिया लाल जब परिवार से अलग हुए तो अपने हिस्से का जमीन का टुकड़ा तो मिल गया मगर पैसे इतने नहीं थे कि अपने लिए मकान बना सकें। इसलिए उन्होंने खेत में बनी भू संरक्षण विभाग की खंडहरनुमा टंकी को आशियाना बना लिया। गांव वालों के सहयोग से टंकी पर अस्थायी छत का इंतज़ाम हो गया। फिर भी बरसात में अंदर पानी भर जाता है।

Image: अमर उजाला से साभार

जब जिया लाल इस टंकी में आए तो साथ में पत्नी रीता देवी ही थीं। फिर दो बच्चों का जन्म भी यहीं हुआ। बेटा 13 साल का हो गया है और बेटी 12 की है। अब चूंकि ये घर तो है नहीं। इसलिए यहां पर न बिजली का कनेक्शन है और न पानी का। बच्चे दिन ढलने के बाद पढ़ाई तक नहीं कर सकते।

अब जबकि हिंदी अखबार अमर उजाला के पत्रकार हरिकृष्ण शर्मा ने ये खबर उठाई, तब प्रशासन की नींद जगी है। कुल्ली की डीसी ऋचा वर्मा ने आनी के एसडीएम चेत सिंह को मामले की जांच के आदेश दिए। एसडीएम का कहना है कि पंचायत को निर्देश जारी किए गए हैं कि अगर जिया लाल की हालत बीपीएल की शर्तों के अनुरूप है तो उन्हें इस श्रेणी में डाला जाए।

लेकिन एसडीएम कहते हैं कि जिया लाल के पिता 10 साल तक आईआरडीपी में रहे। उन्होंने कहा कि ‘जिया लाल और उनके भाई बिट्टू राम, दोनों को ही घर बनाने के लिए मदद दी गई थी। बिट्टू ने तो घर बना लिया मगर जिया लाल ने काम पूरा नहीं किया।’

Image: अमर उजाला से साभार

एसडीएम बताते हैं कि कल्याण विभाग ने जियालाल के घर के लिए 2016 में 75 हजार की रकम मंजूर की थी और इसके तहत 37500 रुपये की किश्त जारी की थी। इसके तहत जिया लाल काम पूरा करना था जिसमें टॉइलट और बाथरूम भी बनाना था। लेकिन जब यह काम पूरा नहीं किया तो दूसरी किश्त जारी नहीं हुई।

लेकिन लोगों का कहना है कि सरकारी मदद ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है। लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या कोई आज के दौर में 37,500 रुपये में एक मकान बना सकता है जिसमें बाथरूम और टॉइलट भी हो? और सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जब सरकार ने 2016 में ऐसा घर बनाने को कहा जिसमे ंटॉइलट भी हो, तो 2014 में कैसे कुल्लू जिले को खुला शौच मुक्त घोषित कर दिया गया था? क्योंकि आज भी इस परिवार के पास शौचालय नहीं है।

इस बीच आनी के बीडीओ जीसी पाठक ने भी जिया लाल की टंकी का मुआयना किया। बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि पंचायत ने कई बार जिया लाल से सहयोग के लिए कहा मगर उसने सहयोग नहीं किया। एक बार फिर उनसे अपील की गई है कि पंचायत से सहयोग करें। उन्होंने कहा है कि वो परिवार की हर संभव मदद करेंगे और अप्रैल में होने वाली ग्रामसभा में इस परिवार को बीपीएल सूची में शामिल किया जाएगा।

7 साल पुराने बयान से पलटकर चुनाव लड़ेंगे भवानी सिंह पठानिया?

कांगड़ा।। पूर्व मंत्री सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद खाली हुई फतेहपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। बीजेपी और कांग्रेस ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बीच, कांग्रेस की ब्लॉक कमेटी ने यहां से सुजान सिंह पठानिया के बेटे भवानी सिंह पठानिया का नाम आगे भेजा है और मांग की है कि उन्हें ही टिकट दिया जाए।

इस बाबत मंझार स्थित शिव मंदिर में बैठक हुई। ब्लॉक अध्यक्ष कैप्टन जीत कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से स्वर्गीय सुजान सिंह पठानिया के बेट भवानी सिंह पठानिया का नाम पार्टी हाईकमान को भेज दिया गया है।

फतेहपुर ब्‍लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व सदस्‍य बैठक के बाद।

लेकिन इस बीच भवानी सिंह पठानिया का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है। ज्यादातर लोग इसे नया बयान समझ रहे है, जबकि यह सात साल पुराना है। इसमें उन्होंने कहा था कि नेताओं के बेटों को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। मई 2014 में हिमाचल दस्तक में छपी खबर के मुताबिक भवानी पठानिया ने तब कहा था- “नेताओं की औलादों को टिकटें देने का रिवाज कांग्रेस को तुरंत बंद करना होगा।”

दरअसल, तब छपी खबर के मुताबिक, लोकसभा चुनावों के बाद अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर भवानी सिंह पठानिया ने एक पोस्ट डालकर कांग्रेस के हार के कारणों की समीक्षा करते हुए कुछ नसीहतें दी थीं। इनमें नेताओं के बच्चों को टिकट देने के रिवाज को बंद करने के लिए कहा था।

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मई, 2014 की ‘हिमाचल दस्तक’ की खबर

सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद से फतेहपुर विधानसभा उपचुनाव की चर्चा गर्म होते ही लोगों ने फिर इस खबर को शेयर करना शुरू कर दिया। यह समझते हुए कि यह किसी ताज़ा अखबार की कटिंग है और भवानी सिंह पठानिया ने कहा है कि वह उप चुनाव नहीं लड़ना चाहते। ऐसे हालात इसलिए भी हैं, क्योंकि लोग अक्सर पूरी खबर पढ़ने की जगह हेडिंग देखकर राय बना लेते हैं। वरना वे अंदर खबर में यूपीए का जिक्र पढ़कर समझ जाते कि बात 2014 की हो रही है।

खैर, अब देखना यह है कि खुद भवानी सिंह पठानिया क्या करते हैं। अपने बयान पर कायम रहते हुए फतेहपुर में लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कांग्रेसी को चुनाव लड़ने का मौका देते हैं या फिर खुद चुनाव लड़ने को हामी भरते हैं।