क्या है प्राइवेट स्कूल फीस बिल, क्यों खुश हैं पैरंट्स, क्यों नाराज हैं स्कूल

अंकित कुमार, मंडी।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों में फीस संरचना को विनियमित करने के लिए एक कानून लाने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में निजी स्कूलों द्वारा फीस और अन्य शुल्कों में बार-बार बढ़ोतरी करने पर अभिभावकों के आक्रोश के बाद सरकार ने यह ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।

अगर यह क़ानून लागू हो जाता है तो हिमाचल उत्तर भारत का ऐसा कानून लाने वाला दूसरा राज्य होगा। इससे पहले दिल्ली सरकार ने ऐसा कानून लाया है। इस कानून का नाम हिमाचल प्रदेश प्राइवेट विद्यालय (फीस और अन्य संबंधित मामलों का विनियमन) विधेयक, 2021 रखा गया है।

क्या है प्रदेश प्राइवेट विद्यालय (फीस और अन्य संबंधित मामलों का विनियमन) विधेयक, 2021

ड्राफ्ट के अनुसार, यह प्रस्तावित किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों को प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत से 60 दिन पहले फीस का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा और नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित करना होगा। यह भी कहा गया है कि अगर कोई प्राइवेट स्कूल फीस वृद्धि करता है तो कोई भी स्कूल शैक्षणिक सत्र में छह प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता है। इसके अलावा, छात्रों को खुले बाजार से किताबें, बैग और वर्दी आदि खरीदने की स्वतंत्रता होगी। स्कूलों द्वारा छात्रों को किसी भी प्रकार से बाध्य नहीं किया जा सकता। प्राइवेट स्कूल किताबें, लेखन सामग्री, स्कूल बक़ग और वर्दी आदि न तो खुद बेच सकते हैं और न ही छात्रों व अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामग्री लेने को कहेंगे।

साथ ही प्राइवेट स्कूल अपने परिचालन खर्च, सुविधाओं में वृद्धि, बुनियादी ढांचे के विस्तार और शिक्षा के विकास के लिए छात्रों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के आधार पर ही अपनी फीस संरचना का निर्धारण करेंगे।

क्या है स्कूल संचालकों का कहना?

हमने जोगिंदर नगर स्थित शांति निकेतन स्कूल के प्रबंधक विकास गुप्ता से बात की। उनका कहना है कि वह इस बिल के कुछ बिंदुओं से सहमत हैं लेकिन कुछ बिंदुओं से आपत्ति भी रखते है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पहले से ही शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत से पहले फीस के विवरण नोटिस बोर्ड पर लगा दिए जाते हैं। उन्हें फ़ीस का विवरण 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने में कोई आपत्ति नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी माना कि छात्र खुले बाजार से किताबें, बैग और वर्दी आदि खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। छात्रों को स्कूलों द्वारा किसी भी प्रकार से बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और न ही उनके स्कूल द्वारा बाध्य किया जाता है।

स्कूल संचालकों को किस बात से है आपत्ति?

स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि के सवाल पर उन्होंने कहा फीस बढ़ाना स्कूलों की मजबूरी होती है। क्योंकि निजी स्कूलों को सरकार की तरफ किसी भी तरह का फंड नहीं दिया जाता है। स्कूल के सारे खर्चे फीस से ही पूरे होते है। चाहे अध्यापकों की सैलरी हो या फिर स्कूल में बच्चों को उपलब्ध करवाई गई सुविधाएं, सब फीस से सम्भव होता है। इसलिए सरकार द्वारा इस बिल में रखी गयी शर्त कि कोई भी स्कूल शैक्षणिक सत्र में छह प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता है, अगर इसमें छह की जगह दस प्रतिशत तक कर दिया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि हम अभिभावकों का दर्द समझते हैं इसलिए जितना जायज़ हो उतनी ही फीस वृद्धि की जाती है।

ड्राफ्ट से अभिभावक खुश

मंडी से अभिभावक लेखराज ने कहा, मैं धन्यवाद करना चाहूंगा आदरणीय शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर जी का जिन्होंने निजी स्कूलों के ऊपर नजर रखने के लिए बिल ड्राफ्ट तैयार किया है। बहुत बारीकी से पढ़ने के पश्चात ज्ञात हुआ कि ड्राफ्ट बहुत ही बहुत ही अच्छे ढंग से बनाया गया है। इसमें आम अभिभावकों के अंदर एक आशा की किरण जगती है। जिस तरह से मनमाने ढंग से निजी संस्थान स्कूल फीस व अतिरिक्त सर चार्ज वसूल करते थे या फिर वर्दी/किताबों की बात कहें इसमें अभिभावक पूरी तरह से स्वतंत्र है कि उन्हें कहां से वर्दी या किताबें लेनी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सारे ऐसे छोटे या मझले दर्जे के स्कूल है, जहां पर प्राइमरी के पश्चात मिडिल की मान्यता के लिए अप्लाई किया है और स्कूल बिना मान्यता के ही धड़ाधड़ चल रहे हैं और स्कूल में सरकारी आदेशों के अनुसार कोई भी शर्तें लागू नहीं है।

उन्होंने कहा कि पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन भी नाम मात्र की एसोसिएशन रखी होती है जिसमें अपने कुछ चहेते लोगों को चुना जाता है। यहां तक की कई बार तो ऐसी एसोसिएशन के चुनाव सिर्फ कागजों में ही होते हैं। बाकी फीस का स्ट्रक्चर भी मनमाने ढंग से चलाते हैं। जो स्कूल प्राइमरी से मिडिल के लिए मान्यता अप्लाई किए हुए हैं, वे प्राइमरी की तुलना में मिडिल वाले बच्चों से बहुत कम फीस वसूल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट विधेयक बनने के पश्चात सरकार का सीधा चेक निजी स्कूलों पर रहेगा जोकि होना भी चाहिए।

साथ ही साथ उन्होंने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर अच्छी सुविधाएं प्रदान की जाए, जिससे आम जनता को फायदा मिल सके। एक आम गरीब का बच्चा यह महसूस ना करें कि मैं सरकारी स्कूल में पढ़ रहा हूं और मध्यवर्गीय या अमीर लोगों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

बालीचौकी से अभिभावक महेंद्र राणा ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी बंद करने के लिए यह विधेयक बहुत जरूरी है। प्राइवेट स्कूलों को रेगुलेट करने के लिए कमीशन होना चाहिए ताकि स्कूल किसी भी तरह की अपनी मनमानी न कर सकें।

एएसपी बृजेश सूद को फिर मिला मुख्यमंत्री की सुरक्षा का ज़िम्मा

शिमला।। कुल्लू का थप्पड़ कांड जो पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। जिसके बाद कुल्लू के तत्कालीन एसपी आईपीएस गौरव सिंह और सीएम के पीएसओ बलवंत सिंह की सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सुरक्षा से हटाए गए एएसपी बृजेश सूद पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी।

लेकिन आज एएसपी बृजेश सूद क्लीन चिट मिल गयी है। एएसपी बृजेश सूद अब फिर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सुरक्षा का ज़िम्मा संभालेगे। थप्पड़ कांड के बाद उन्हें अस्थायी तौर पर पुलिस हेडक्वार्टर शिमला में तैनात किया गया था। सरकार ने अब फिर से सूद को सीएम सुरक्षा का इंचार्ज नियुक्त किया है।

हिमाचल में अपहरण के 75% मामलों में स्कूली छात्राएं हुईं शिकार

शिमला।। अपहरण की घटनाएं देश में होती ही रहती है। हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। कुछ मामले तो दर्ज हो जाते हैं लेकिन कई मामले दर्ज भी नहीं हो पाते। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो पिछले साल प्रदेश में अपहरण के करीब 344 मामले दर्ज किए गए थे। ये मामले प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज हुए थे। सबसे अधिक मामले शिमला जिला में दर्ज हुए थे। अधिकारियों द्वारा इनमें से 283 मामलों का विश्लेषण किया गया।

विश्लेषण में सामने आया कि 283 मामलों में से 213 नाबालिग लड़कियों से जुड़े थे। ये भी सामने आया कि ऐसे ज्यादातर मामले प्रेम-प्रसंग से सम्बंधित थे। अधिकतर मामलों में लड़की स्वेच्छा से अपने साथी के साथ थी। लेकिन लड़की के नाबालिग होने का कारण अपरहण के मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद अब सरकार युवाओं के लिए काउंसलिंग पर भी विचार कर रही है।

इसके साथ ही उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा ने विभाग के अधिकारियों के साथ डेटा साझा करते हुए उन्हें लड़कियों को जागरूक करने के लिए कहा है। साथ ही कार्यवाही की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।

अगर पिछले कुछ सालों की बात करें तो प्रदेश में 2018 में अपहरण के 476 मामले, 2019 में 454 मामले और 2020 में 344 मामले दर्ज हुए। हालांकि ये मामले कुछ कम जरूर हुए हैं लेकिन आंकड़ा अभी भी बहुत ज़्यादा है।

इस पूरी अवधि के दौरान, शिमला जिला में कुल 252 मामले दर्ज हुए जो प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर मंडी जिला रहा जहाँ 226 मामले सामने आए और कांगड़ा में भी 203 मामले दर्ज किए गए।

इस बारे एसपी शिमला मोहित चावला ने कहा कि हालांकि ज्यादातर मामले प्रेम-प्रसंग के कारण भाग जाने से संबंधित थे। जिसमें लड़की स्वेच्छा से अपने साथी के साथ थी। लेकिन ज्यादातर लड़कियों के नाबालिग होने के मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में महिला एवं बाल विकास विभाग को युवाओं की काउंसलिंग करने के लिए कहा गया है।

हिमाचल में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला

शिमला।। अभी कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट आने से प्रदेश को राहत मिली ही थी कि डेल्टा प्लस वेरिएंट की दस्तक ने फिर चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में एक मामले में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर से कुछ सैम्पल जांच के लिए दिल्ली भेजे गए थे। इन सैंपलों में से एक में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। यह कांगड़ा जिला की रहने वाली एक महिला है। सीएमओ कांगड़ा ने बताया कि महिला मरीज़ सुरक्षित है और तेजी से रिकवर कर रही है।

बता दें जिनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए प्रदेश से दिल्ली भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट आनी शुरू हो गई है। हिमाचल प्रदेश से दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजिजिज कंट्रोल लैब में जांच के लिए 1113 सैंपल भेजे गए थे।

गत दिनों ही प्रदेश से भेजे गए 76 सैंपलों में डेल्टा वेरिएंट पाया गया था। इसके साथ ही 109 सैंपलों में यूके स्ट्रेन की भी पुष्टि हुई थी। वहीं आठ सैंपलों में कप्पा स्ट्रेन भी पाया गया था। प्रदेश में बाहरी देशों के स्ट्रेन के मामले आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गयी है।

विशेषज्ञों की माने तो डेल्टा प्लस वैरिएंट कोरोना के बाकी वेरिएंट के मुकाबले फेफड़ों तक जल्दी और आसानी से पहुंच जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये वेरिएंट ज्यादा संक्रामक है या इससे गंभीर कोरोना हो सकता है।

वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश पूरी तरह से पर्यटकों के लिए खुल चुका है। प्रदेश में पर्यटकों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली, चंडीगढ़ समेत गुजरात और महाराष्ट्र से सैलानी यहां घूमने आ रहे हैं। ऐसे में जाने-अनजाने में डेल्टा प्लस वेरिएंट के प्रदेश पहुंचने से भी नकारा नहीं जा सकता है।

लगभग डेढ़ साल बाद दिल्ली-लेह रूट पर चली एचआरटीसी की बस

लाहौल-स्पीति। देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद लेह जाने वाले सैलानियों की संख्या में एकदम इजाफा हुआ है। जिसके चलते 1 जुलाई से दिल्ली-लेह रूट पर एचआरटीसी बस सेवा शुरू कर दी गई है।

दिल्ली-लेह रुट देश का सबसे लंबा और ऊंचाई वाला रूट है। कोरोना के चलते करीब डेढ़ साल तक बंद रहने के बाद गुरुवार को इस रुट पर केलांग डिपो की बस रवाना हुई। सैलानियों को बस में दिल्ली से लेह तक सफर करने के लिए 1548 रुपये किराया चुकाना होगा।

पहले यह रुट 1072 किमी लंबा था। लेकिन अटल टनल रोहतांग खुलने के बाद दिल्ली से लेह की दूरी अब 46 किलोमीटर कम हो गयी है। अब इस रुट की दूरी 1026 किलोमीटर रह गई है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मनाली से लेह की तरफ रोजाना औसतन 2500 वाहन जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर एचआरटीसी केलांग डिपो ने दिल्ली-लेह के बीच बस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है।

हिमाचल प्रदेश में फिर महंगा हुआ एलपीजी सिलिंडर, कल से बढ़ेंगे दाम

शिमला।। बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमतें भी लगातार आसमान छू रही है। हिमाचल प्रदेश में अब घरेलू रसोई गैस सिलिंडर 25.50 रुपये और व्यावसायिक सिलिंडर 82 रुपये महंगा हो गया है।

रसोई गैस की बढ़ी हुई यह कीमतें गुरुवार से प्रदेश में लागू हो गईं हैं। इस माह उपभोक्ताओं को घरेलू रसोई गैस सिलिंडर 931.50 रुपये में मिलेगा। इसमें होम डिलिवरी के 52.50 रुपये भी शामिल हैं।

वहीं व्यावसायिक सिलिंडर की बात की जाए तो जुलाई माह में इसकी कीमत 1705 रुपये हो गयी है। इसमें 59 रुपये डिलिवरी चार्ज के भी शामिल हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को 31 रुपये की सब्सिडी मिलेगी जो उनके बैंक खाते में लौटाई जाएगी।

वायरल बेनामी पत्र मामले में सीआईडी के हाथ लगे अहम सुराग

शिमला।। प्रदेश सरकार के मंत्री और एक महिला पर गंभीर आरोप लगाने वाले बेनामी पत्र के पीछे कौन था, जल्द इसका पता चल सकता है। जानकारी मिली है कि मामले की जांच कर रही सीआइडी को कुछ नए सुराग हाथ लगे हैं। इन सुरागों के आधार पर सीआईडी अब जल्द ही मामले को सुलझा सकती है।

राजधानी से सटे सोलन जिले के परवाणू से संबंध रखने वाले दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए शिमला साइबर थाना तलब किया है। इससे पहले जांच टीम ने परवाणू में दबिश दी थी। यहां कुछ व्यक्तियों के कंप्यूटर, लैपटाप और कुछ मोबाइल भी कब्जे में लिए गए थे।

ऐसी जानकारी मिली है कि जांच टीम को कई बातों का पता चला है जिनके आधार पर पत्र लिखने वाले का जल्द पता लगने उम्मीद जताई जा रही है। इस मामले में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई है।

कुछ दिन पहले मंत्री और महिला के खिलाफ एक बेनामी पत्र जारी हुआ था। इसमे नैतिक और आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इस वायरल पत्र के बाद प्रदेशभर में काफी हलचल पैदा हो गई थी। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने इस पत्र की जांच के आदेश दिए थे।

पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने जांच सीआईडी को सौंपी है। इससे पहले भी सीआईडी ऐसे ही एक पत्र मामले की जांच कर चुकी है और उसके असली लेखक को पकड़ चुकी है। इस संबंध में सीआइडी ने जांच तेज करते हुए कई लोगों से पूछताछ की है।

शिमला पुलिस ने पर्यटक को मारा थप्पड़, पर्यटकों पर गाली-गलौज का आरोप

शिमला।। वीरवार दोपहर करीब 12 बजे राजधानी की स्मार्ट पुलिस ने पर्यटक को थप्पड़ रसीद कर दिया। ये पर्यटक हरियाणा से शिमला घूमने पहुंचे थे।

पर्यटक जैसे ही सर्कुलर रोड पर विक्ट्री टनल के पास पहुंचे। पुलिस ने उनकी गाड़ी रुकवाई और कागज़ों के बारे में पूछताछ की। थोड़ी ही देर बाद ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात एक जवान आया और पर्यटकों को थप्पड़ रसीद कर दिया।

आरोप है कि विक्ट्री में तैनात ट्रैफिक कर्मी ने पर्यटकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन पर्यटक यहां नहीं रुके। पुलिस के साथ गाली-गलौज करने का भी आरोप है। आगे बढ़ने पर उन्हें विक्ट्री टनल के नजदीक बने ओवर ब्रिज के पास रोका गया। यहां पहुंच कर ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक कर्मी और पर्यटकों के बीच हाथापाई और धक्कामुक्की की भी स्थिति बनती दिखी।

मामले पर डीएसपी हेडक्वार्टर कमल वर्मा ने कहा कि पर्यटक मनाली जाना चाहते थे। लेकिन विक्ट्री टनल से पहले यू-टर्न अलाउड नहीं था। बस इसी बात को लेकर बहसबाजी हुई और पयर्टकों ने गाली-गलौज किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इनका चालान काटा है।

वहीं पुलिस अधीक्षक शिमला मोहित चावला ने कहा कि यह काफी दुखद है। लेकिन गाड़ी रोकने के लिए इशारा भी किया गए था जिसके बाद भी वाहन नहीं रोका गया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मी को लाइन हाजिर किया गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। फिलहाल, टूरिस्ट की ओर से शिकायत नहीं आई है।

दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित पेट्रोल पंप में पेट्रोल के दाम 100 के पार

लाहौल-स्पीति।। देश में पहले ही पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतें आसमान छू रही है। लेकिन अब हिमाचल प्रदेश में भी गाड़ियों में तेल भरवाना महंगा हो गया है।

 

जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के काजा स्थित पेट्रोल पंप प्रदेश का पहला पेट्रोल पंप है जहाँ पेट्रोल की कीमतों ने शतक लगा दिया है। काजा समुद्र तल से 3800 मीटर ऊंचाई पर बसा एक छोटा सा कस्बा है। यहाँ भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित पेट्रोल पंप भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित पेट्रोल पंप है।

 

बुधवार को इस पंप पर पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए। वहीं लाहौल के छुरपक स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल के दाम शतक के करीब है। प्रदेश की राजधानी शिमला से काजा की दूरी करीब 425 किलोमीटर है।

आज से हिमाचल में सस्ती होगी शराब, जानिए क्या है नई आबकारी नीति

शिमला।। एक जुलाई यानी आज से हिमाचल प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू हो रही है। इसके तहत नौ महीने तक शराब बिक्री और सप्लाई का काम होगा। यह नौ महीने 31 मार्च, 2022 को पूरे होंगे। नई नीति लागू होने से लाइसेंस फीस और एक्साइज ड्यूटी कम होंगी जिस कारण देशी व भारत में निर्मित विदेशी शराब के कम कीमत वाले ब्रांड सस्ते होंगे।

नई आबकारी नीति लागू होने से शराब की कीमतों में कटौती करने, पड़ोसी राज्यों से शराब तस्करी रोकने के साथ-साथ सरकारी राजस्व में वृद्धि करने के उद्देश्य से खुदरा आबकारी ठेकों को यूनिट, ठेके की कीमत के तीन प्रतिशत की नवीनीकरण फीस पर 2021-22 के लिए ठेकों का नवीनीकरण किया जाएगा।

अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, शराब उत्पादक कंपनियों को नई नीति में ईएनए की कंपल्सरी टेस्टिंग के प्रावधानों में छूट की व्यवस्था की गई है। वहीं डिपार्टमेंटल स्टोर में भी इस साल कुछ शर्तों के साथ शराब बिक सकेगी। इसके अलावा अब वाइन की कीमत आबकारी विभाग द्वारा निर्धारित की जाएगी। साथ ही एमआरपी से अधिक दाम पर शराब बेचने वाले विक्रेता पर कम जुर्माना लगेगा।

वहीं थोक विक्रेताओं को अब किसी स्टेट कस्टम बांडेड वेयरहाउस से शराब लेने की छूट दी गई है ताकि विदेशी और महंगी शराब की उपलब्धता बनी रहे। इसके साथ ही इस साल एक्साइज पुलिस का गठन भी किया जाएगा जिसका काम शराब की गुणवत्ता, अवैध बिक्री पर नकेल और तस्करी रोकना होगा।

राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त यूनुस के अनुसार नई नीति के लागू होने से सरकार को राजस्व में इज़ाफ़ा होगा। नई नीति से सरकार को करीब 1829 करोड़ का राजस्व अर्जित होगा जो पिछले साल की तुलना में 228 करोड़ रुपये अधिक है। एथनॉल उत्पादन के लिए पहली बार पेट्रोलियम कंपनियों को सप्लाई करने के लिए अलग से नए लाइसेंस का प्रावधान किया है। इससे प्रदेश में एथनॉल के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।