शिमला।। प्रदेश कैबिनेट की बैठक में दसवीं, 11वीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोलने का फैसला लिया गया है। इन कक्षाओं के लिए 2 अगस्त से स्कूल खोल दिए जाएंगे।

वीरवार को सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में पीटरहॉफ शिमला में प्रदेश कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों लिए 2 अगस्त से स्कूल खोलने का फैसला लिया गया है। स्कूलों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बनाए गए एसओपी का पालन करना होगा।
कैबिनेट बैठक: 2 अगस्त से इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे स्कूल
बोह त्रासदी: मौत को सामने देखकर भी विचलित न हुई नन्ही सरवाइवर की सेहत में सुधार
एमबीएम न्यूज़, कांगड़ा।। बीते दिनों कांगड़ा की बोह घाटी में जल प्रलय से हुई त्रासदी में कई लोग मलबे के नीचे दब गए थे। इस हादसे में में कई लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। इसी त्रासदी में एक आठ वर्षीय बच्ची भी मलबे की चपेट में आ गयी थी। लेकिन इस नन्ही बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी। 12 घंटे तक मलबे में दबी रही। उसके बाद रेस्क्यू टीम द्वारा बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बोह त्रासदी की सरवाइवर इस 8 वर्षीय बच्ची का नाम अवंतिका है। अवंतिका को बाजू व टांग में चोट आई थी, जिस कारण उसे पीजीआई रैफर किया गया था। अभी पीजीआई में बच्ची का इलाज चल रहा है। अवंतिका की सेहत में सुधार हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव केवल सिंह पठानिया मंगलवार को अवंतिका से मिलने पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे थे। उसके बाद अवंतिका के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी सामने आई। अवंतिका की बाजू का ऑपरेशन हुआ है। टांग में प्लास्टर लगा हुआ है। अवंतिका की बाजू व टांग में चोट पर उसे पीजीआई रैफर किया गया था।
12 जुलाई को आई इस त्रासदी में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची वंशिका अपनी बहन अवंतिका व माता-पिता के साथ मलबे में फंस गई थी। लेकिन बच्ची ने ऐसे हालात में भी हिम्मत नहीं हारी। चूंकि फोन हाथ में था, इसलिए उसने अपने शिक्षक सुरेंद्र को फोन कर हादसे की सूचना दे दी। यही कारण था कि रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले ही गांव वाले परिवार को बचाने में जुट गए थे।
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बता दें कि इस भयानक मंज़र में भी विचलित न होने वाली वंशिका स्वस्थ है और अपनी नानी के घर पर है। कांगड़ा प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही प्रशासन अवंतिका के उपचार के लिए जरूरी इम्दाद मुहैया करवाएगा। इसके साथ ही उसकी 8 साल की बहन वंशिका के नाम का अनुमोदन राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए किया जाएगा।
(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)
मिड डे मील वर्कर ने पीएम को पत्र लिखकर कहा, 87 रुपये में तो रिफाइंड भी नहीं मिलता
सिरमौर।। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों एक मिड डे मील वर्कर द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र चर्चा में है। महिला ने पीएम को पत्र लिखकर अपना दुखड़ा सुनाया है। मिड डे मील वर्कर महिला का नाम उर्मिला रावत है। वह सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के तहत आने वाले सांगना गांव की निवासी है।

महिला ने पत्र में लिखा है कि वह पिछले 16 साल से दोपहर भोजन योजना में सेवाएं दे रही है। महज 87 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनकी सेवा का भुगतान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री बताएं कि महंगाई के इस दौर में क्या 87 रुपये में कोई अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर सकता है। जबकि, इस राशि में बाजार से रिफाइंड भी नहीं मिल पाता।
पंचायत सचिव भर्ती: साल गुजर गया, मगर एचपीयू नहीं करवा पाया परीक्षा
शिमला।। राज्य में पंचायत सचिव की भर्ती के लिए आवेदन करने वाले 20 हज़ार शिक्षित बेरोजगार खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। आवदेन किये हुए एक साल होने वाला है, लेकिन अभी तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने यह भर्ती करवाने की जिम्मेदारी कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को न देकर हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी को दी थी। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि हमीरपुर आयोग से भर्ती करवाने में ज़्यादा समय लग जायेगा। इसके बावजूद भी अभी तक भर्ती नहीं हो पाई है।
पिछले साल सितंबर महीने में एचपीयू ने पंचायती राज विभाग में पंचायत सचिव के 239 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। क़रीब 20 हज़ार बेरोजगारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। लेकिन एचपीयू अभी तक परीक्षा की तिथि भी तय नहीं कर पाया है।
पहले तो कोरोना का हवाला देकर अभी तक भर्ती परीक्षा नहीं हुई। लेकिन अब जब सभी आयोग भर्ती परीक्षाएं आयोजित कर रहे हैं, उसके बावजूद भी एचपीयू ने भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की है। अब कहा जा रहा है कि दोबारा ईसी से मंजूरी लेनी होगी और एक्सटेंशन देनी होगी, क्योंकि एक साल पूरा होने वाला है।
ऐसे में अब हज़ारों अभ्यर्थियों ने विभाग व एचपीयू की लेटलतीफी पर सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि अब तो हिमाचल में कोरोना की स्थिति भी सामान्य हो चुकी हैं। उपचुनावों की भी तैयारी जोरों से चली है। इसके बावजूद भी एचपीयू भर्ती परीक्षा नहीं करवा रहा है।
बता दें कि पहले इस भर्ती की फीस को लेकर भी विवाद था। हमीरपुर आयोग में लड़कियों की फीस नहीं ली जाती है। जबकि एचपीयू ने इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया। बीच मे विभाग ने फीस न लेने के बारे में लिखित में भी दिया था। लेकिन ईसी के फैसले के नाम पर उसे अनसुना कर दिया गया।
इस बारे पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभाग ने एचपीयू से बात की थी। हमें बताया गया है कि जल्द भर्ती हो जाएगी। ईसी में दोबारा मैटर ले जाने की बाध्यता क्यों है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है। उन्होंने कहा कि इस बारे में वह एचपीयू से बात करेंगे क्योंकि प्रदेश में पंचायत सचिवों की सख्त जरूरत है।
वहीं एचपीयू के रजिस्ट्रार सुनील शर्मा ने बताया कि पहले कोरोना के कारण परीक्षा नहीं करवाई जा सकी। अब भर्ती का मामला दोबारा ईसी में ले जाना पड़ेगा, क्योंकि अब परीक्षा करवाने पर एक साल का समय पूरा हो जाएगा। दोबारा परीक्षा कब होगी यह ईसी में ही तय हो पाएगा। फिलहाल इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
सरकार के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं, जिससे पता चले ऑक्सीजन की कमी से कितनी मौतें हुईं
नई दिल्ली।। कोरोना की दूसरी लहर में हजारों लोगों ने अपने करीबियों को खोया है। कई लोगों की मौत तो स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और ऑक्सीजन न मिलने के कारण हुई है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से बहुत से लोगों ने अपनों को अपने सामने दम तोड़ते देखा। लेकिन केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई। हालांकि केंद्र सरकार ने ये भी कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और ये जानकारी राज्यों से मिले आंकड़ों पर ही आधारित है।

ऑक्सीजन या फिर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से एक भी मौत न होने के बाद हर कोई अलग-अलग तर्क दे रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों को इसे लेकर जरा भी हैरानी नहीं है। क्योंकि इन्हें पहले से ऐसे जवाब की उम्मीद थी। इसके पीछे कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास ऐसा कोई सिस्टम ही नहीं है जिसके आधार पर बताया जाए कि दूसरी लहर में कितने लोगों की मौत ऑक्सीजन न मिलने या अस्पताल में भर्ती नहीं होने से हुई?
हालांकि सरकारों के पास अस्पतालों का ब्यौरा मौजूद है। इस ब्यौरे को ऑडिट करवाया जा सकता है। लेकिन बहुत से लोगों की मौत अस्पतालों के बाहर व घरों में भी हुई है। जिसे इन कागजों तक लाना काफी मुश्किल है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सरकार के इस बयान पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। पात्रा ने कहा कि यह रिपोर्ट राज्य सरकारों द्वारा भेजे गए आंकड़ों पर आधारित है। किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर हुई मौत पर कोई आंकड़ा नहीं भेजा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने राज्यों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ही सदन में यह बात कही थी। केंद्र खुद डेटा तैयार नहीं करता है।
कंगना रणौत की मांग, हिमाचल में सैमुअल स्टोक्स के नाम पर बने स्मारक
शिमला।। बॉलीवुड की पंगा क्वीन अभिनेत्री कंगना रणौत एक बार फिर सुर्खियों में आई है। कंगना ने सीएम जयराम ठाकुर से किसी स्मारक या लैंडमार्क का नाम सैमुअल स्टोक्स के नाम पर रखने की मांग की है। कंगना ने इस बारे में अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखी है। कौन है सैमुअल स्टोक्स? यह भी आपको बताएंगे। लेकिन उससे पहले पढ़िए कंगना ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में क्या लिखा है।

कंगना ने लिखा है कि सैमुअल स्टोक्स भारतीय नहीं थे, लेकिन उन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश सरकार के देशद्रोह के आरोपों का सामना किया। वह एक अमीर अमेरिकी क्वेकर परिवार से थे, उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया, संस्कृत सीखी, हिंदू बने, एक स्कूल स्थापित किया और हिमाचल प्रदेश में सेब लाए।
वह आगे लिखती हैं कि हिमाचली किसानों की ज्यादातर कमाई सेब के बागों से होती है, लेकिन उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं हमारे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी से अनुरोध करती हूं कि हिमाचल में एक प्रमुख स्थल का नाम श्री सैमुअल स्टोक्स के नाम पर रखे। हमें यह उपकार स्वयं पर करना चाहिए। क्योंकि सैमुअल ने जीवन भर हिंदू धर्म का पालन किया और पितृपूजा (पूर्वजों के लिए आभार) का हमारी संस्कृति में सर्वोच्च महत्व है और हमें इस व्यक्ति को अपना सम्मान देना चाहिए। उसके कार्य, कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता आज तक हिमाचल में लाखों लोगों को रोजगार दे रही है।
कौन हैं सैमुअल स्टोक्स
साल 1905 में सैमुअल इवांस स्टोक्स नाम का एक युवक अमेरिका से हिमाचल आया था। स्टोक्स ने शिमला के लोगों को बीमारी और रोजी-रोटी से जूझते हुए देखा। यह देखकर उन्होंने यहीं पर रहकर लोगों की सेवा करने का निर्णय कर लिया। इसके बाद स्टोक्स ने यहीं पर स्थानीय युवती से शादी कर ली और आर्य समाजी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने अपना नाम भी बदलकर सत्यानंद स्टोक्स रख लिया। कोटगढ़ में उस दौर में स्कूल भी खोला था।
स्टोक्स ने साल 1916 में अमेरिका से रेड डेलीशियस प्रजाति का पौधा लाकर कोटगढ़ की थानाधार पंचायत के बारूबाग में सेब का पहला बगीचा तैयार किया। इसके बाद जल्द ही कोटगढ़ से यह प्रजाति प्रदेश के दूसरे इलाकों में भी फैल गई। इसकी अन्य उन्नत किस्में प्रदेश में बड़े पैमाने पर लगाई गई।
हालांकि स्टोक्स को सेब की खेती के बारे में जानकारी नहीं थी। वे किताबों से पढ़कर इसकी खेती करने लगे। स्टोक्स ने दो बीघा जमीन पर सेब के पौधे लगाए थे। 1921 में जब इस बगीचे में सेब के पौधे फल देने लगे तो स्टोक्स ने बगीचे का एरिया बढ़ा दिया। 1930 के दशक के शुरू में गोल्डन सेब के पौधे भी लगा दिए गए। 1946 में सत्यानंद स्टोक्स की मृत्यु हो गई थी। बता दें कि सैमुअल स्टोक्स हिमाचल कांग्रेस की दिग्गज नेता, पूर्व मंत्री और विधायक विद्या स्टोक्स के ससुर थे।
मंडी : फिर सामने आया पर्यटकों द्वारा स्थानीय युवक से मारपीट का मामला
मंडी।। हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों द्वारा हुड़दंग करने का एक और मामला सामने आया है। मामला मंगलवार रात का है। एक बार फिर मंडी में पर्यटकों ने स्थानीय युवक के साथ मारपीट की घटना को भी अंजाम दिया है।

मंगलवार रात को पुलिस चौकी कमांद से लगभग 300 मीटर की दूरी पर चार पर्यटकों ने स्थानीय युवक से मारपीट की है। इनमें दो पंजाब और दो हमीरपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 341 व 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पीड़ित युवक ने पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज करवाया है। युवक का नाम भास्कर शर्मा है और नांडी गांव का रहने वाला है। पुलिस को दिए बयान में पीड़ित ने बताया है कि वह कमांद सड़क पर पशुओं से भरी गाड़ी को चेक करने के लिए गए। वह जैसे गाड़ी के पास पहुंचे, तभी गाड़ी नंबर PB 07 Z 0059 में मनाली की तरफ से लौट रहे चार युवकों ने पास देने को लेकर बहस शुरू कर दी।
जब उन्होंने इन युवकों को समझाने की कोशिश की तो गाली गलौज और मारपीट पर उतर आए। उन्होंने उन्हें मारना पीटना शुरू कर दिया। वे लोग उसकी गाड़ी की चाबी लेकर फरार हो गए। भास्कर बताया उसके बाद उन्होंने अपने साथियों को फोन कर घटना के बारे में बताया। साथ ही पुलिस चौकी कमांद को भी फोन कर घटना की जानकारी दी। चारों युवकों को पुलिस ने कुछ दूरी पर पकड़ लिया।
थाना प्रभारी पधर अनिल कुमार ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मारपीट करने वाले चारों पर्यटकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी आरोपियों को पधर थाने लाया गया है। मारपीट में घायल स्थानीय युवक का मेडिकल करवाकर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों द्वारा गुंडागर्दी और मारपीट करने की यह कोई पहली घटना नहीं हैं। इस तरह की घटनाएं प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे पहले भी मंडी और मनाली में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
मंडी जिले का एक परिवार 30 वर्षों से बिना बिजली के कर रहा जीवन यापन
मंडी।। हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य जो पंजाब, हरियाणा समेत कई पड़ोसी राज्यों को बिजली मुहैया करवाता है। यकीन करना मुश्किल होगा लेकिन ये सच है कि यहाँ एक परिवार ऐसा भी है जो 30 वर्षों से बिना बिजली के रह रहा है।

मंडी जिला के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टिहरी के तांदी गांव में किशन चंद का परिवार बिजली से कोसों दूर है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। बिजली का कनेक्शन लेने के बदले जमा होने वाली सिक्योरिटी राशि जमा करवाने के लिए भी परिवार के पास पैसे नहीं है।
हालांकि, यूं तो सरकार इस बात का दावा करते नहीं थकती कि प्रदेश में हर घर को बिजली की सुविधा मुहैया करवा दी है। लेकिन ग्राउंड लेवल पर देखने से पता चलता है कि हकीकत कुछ और ही है।
इस परिवार की मुखिया 71 वर्षीय दोपाली देवी है। उन्होंने बताया कि उनके पास बिजली का कनेक्शन लेने के लिए सिक्योरिटी पैसे नहीं थे, जिस कारण उन्होंने कनेक्शन नहीं लिया। वहीं उनके बेटे किशन चंद ने बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए उन्हें आज दिन तक कोई मदद नहीं मिली। यहां तक कि पंचायत ने भी उनकी कोई मदद नहीं की।
किशन चंद के परिवार में चार लोग हैं, जिनमें 71 वर्षीय बूढ़ी मां, एक विकलांग बेटी और एक बेटा है। उनकी पत्नी का काफी समय पहले देहांत हो चुका है। बेटी की मानसिक स्थिति कुछ ठीक नहीं है। बेटा भी गरीबी के कारण आगे नहीं पढ़ पा रहा है।
किशन चंद ने बताया कि 30 वर्ष पहले उसके पिता को पंचायत की तरफ से घर बनाने के लिए पैसे मिले थे। उन पैसों से उस वक्त कच्चा मकान बनाया था जिसमें यह परिवार आज जीवन यापन कर रहा है। हालांकि पंचायत ने कुछ समय पहले शौचालय का निर्माण करके दिया गया है, लेकिन पक्के मकान के लिए पैसा नहीं मिल पाया है। किशन चंद का परिवार बीपीएल श्रेणी में शामिल है।
बीडीसी सदस्य परमा नंद ने परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए बिजली का कुनेक्शन निशुल्क मुहैया करवाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने परिवार को पक्के घर के लिए भी जल्द पैसा दिए जाने की मांग की है।
वहीं जब इस बारे में विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता ई. मनोज पूरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम ये यह मामला उनके ध्यान में आया है। जल्द ही परिवार को बिजली का कनेक्शन दिलाया जाएगा और विभाग द्वारा परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री रोशनी योजना चलाई है। इसी योजना के तहत परिवार को बिजली का कनेक्शन दिलाया जाएगा।
हिमाचल में लागू हो गया नया मोटर व्हीकल एक्ट, नियमों का उल्लंघन करने पर अब लगेगा इतना जुर्माना
शिमला।। हिमाचल सरकार ने नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू कर दिया है। मंगलवार को परिवहन विभाग ने संशोधित जुर्माने और कंपाउंडिंग लिमिट के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। ऐसे में अब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन जेब पर भारी पड़ने वाला है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर अब भारी जुर्माना चुकाना पड़ेगा।

संशोधित नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब अपंग या किसी बीमार व्यक्ति के द्वारा वाहन चलाने पर भी खैर नहीं होगी। ऐसी परिस्थितियों में डेढ़ हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अगर वाहन चलाते समय मोबाइल फोन आदि का इस्तेमाल करते पाए गए तो पहली बार ढाई हजार रुपये जुर्माना चुकाना होगा। लेकिन अगर तीन साल के भीतर फिर इस्तेमाल करते मिले तो 15000 रुपये तक जुर्माना लगेगा।
सार्वजनिक स्थानों में तेज गति से वाहन चलाने या ट्रायल लेने पर 7500 रुपए जुर्माना, जबकि दूसरी बार यही गलती करने पर 15000 रुपए जुर्माना चुकाना होगा। बिना पंजीकरण वाहन को चलाने पर 7500 रुपए जुर्माना भरना पड़ेगा। बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर 5000 से 7500, बिना सही जानकारी दिए लाइसेंस हासिल करने पर 10000 से 15000, अयोग्य ठहराने के बावजूद कंडक्टर बनने पर पांच से 15 हज़ार तक जुर्माना लगेगा।
माल वाहनों का सामान बाहर लटकने या छत से ऊपर रखने पर 30000 रुपए जुर्माना, इन माल वाहनों को जांच के लिए न रोकने और तोल न करवाने पर 60 हजार रुपए का जुर्माना किया जाएगा। इसके साथ ही नए मोटर व्हीकल एक्ट में आईडल पार्किंग से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर वाहनों को खड़ा करने तक सभी वाहनों की दरें बढ़ा दी हैं।
परिवहन विभाग के निदेशक अनुपम कश्यप ने बताया कि संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट राज्य सरकार ने लागू कर दिया है। अब इसे तुरंत गजट में प्रकाशित करने के बाद यह एक्ट प्रदेश में लागू हो जाएगा।
कांगड़ा : नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सात साल की जेल
कांगड़ा।। जिले के ज्वाली क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने सात साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। इसके साथ ही 20 हज़ार रुपये जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को 6 महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

साल 2017 में पुलिस थाना ज्वाली में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। दुष्कर्म के आरोप सिद्ध होने पर स्पैशल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट पोक्सो जिला कांगड़ा स्थित धर्मशाला कृष्ण कुमार ने यह फैसला सुनाया है।
मामले की पैरवी करने वाले स्पैशल सरकारी वकील फास्ट ट्रैक कोर्ट पोक्सो धर्मशाला राम देव चौधरी ने बताया कि नौंवी कक्षा में पढऩे वाली पीड़िता 19 जून, 2017 को भारी बारिश के कारण अपने स्कूल नहीं गई थी। वह अपनी बहन के साथ जंगल में पशु चराने क्षेत्र के समीपवर्ती खड्ड के जंगल में चली गई। वहां गुरमीत उर्फ गोल्डी भी बकरियां चराने पहुंचा था। इस दौरान गुरमीत ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने इसकी शिकायत ज्वाली पुलिस थाना में दी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने 22 गवाह पेश किए। जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

