धर्मपुर: शिलान्यास के ढाई साल बाद भी नहीं बना पीएचसी भवन

रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। “ना खुदा मिला, न विसाल-ए-सनम”, ऐसा ही कुछ चरितार्थ हुआ है प्रदेश के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की गृह पंचायत में, जहां पर शिलान्यास के ढाई सालों बाद भी ना तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ पाया और ना ही आज तक भवन का निर्माण कार्य शुरू हो पाया है।

सबसे बड़ी हैरानी इस बात की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मढ़ी के भवन के साथ-साथ आवासीय परिसर के निर्माण का शिलान्यास प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 24 जनवरी 2019 को स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार और जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की उपस्थिति में किया था। परंतु दुख की बात है कि इन भवनों का निर्माण शुरू होना तो दूर, आज तक इसका दर्जा भी नहीं बढ़ पाया है। वहीं जो पुराना भवन था, विभाग ने उसे भी गिरा दिया है। अब यह किराए के भवन में चल रहा है।

हैरानी इस बात की है कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ना बन पाने से क्षेत्र की ध्वाली, विंगा, कमलाह, सरी, सकलाना, समौड़, सिद्धपुर, खनौड, टौरखोला पंचायतों के हजारों लोगों को गर्मी सर्दी बरसात में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, धर्मपुर क्षेत्र की आधा दर्जन पंचायतों की सेहत सुधारने वाली पीएससी मढ़ी को सीएससी का दर्जा मढ़ी जनस्वास्थ्य संघर्ष समिति द्वारा पूर्व में की गई 15 दिनों की भूख हड़ताल का नतीजा था। संघर्ष समिति द्वारा पीएचसी की अवस्थाओं के खिलाफ मुंह खोलना मंत्री के आगे भारी पड़ा था और 25 महिलाओं पर केस दर्ज किए गए थे। इसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सीएम ने बढ़ा तो दिया, परंतु आज तक इसे लेकर ना तो कोई अधिसूचना जारी की जा सकी है और ना ही भवन व आवासीय परिसर को बजट प्रदान किया जा सका है। स्वास्थ्य केंद्र किराए पर चल रहा है। यहाँ आने वाले रोगियों को भी उपचार के लिए भारी दिक्कतें उठानी पड़ती है।

सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि ये सीएचसी चार-चार विभागों के सबसे वरिष्ठ मंत्री के घर से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। जहां पर वे हर सप्ताह आते-जाते हैं। लेकिन अभी तक इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं करवा पाए हैं।

किसान सभा ने दी आंदोलन की धमकी

हिमाचल किसान सभा क्षेत्रीय कमेटी मढ़ी के प्रधान सुख राम ठाकुर, रोशन लाल, भूप सिंह, देश राज मिंटू, लबली कुमार, कृष्ण चन्द, देवराज सोनी, सुनील कुमार, चेत राम, नेक राम, बालम राम, नरेंद्र कुमार, चंद्रपाल, संजू, सोहन सिंह, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, किला चन्द आदि ने मांग की है कि पीएचसी मढ़ी के भवन का निर्माण कार्य जल्दी शुरू किया जाए अन्यथा हिमाचल किसान सभा इसके लिए धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।

सरकार की कोरी घोषणाओं का जीता-जागता उदाहरण : भूपेंद्र

पूर्व जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पीएचसी मढ़ी मुख्यमंत्री व जल शक्ति मंत्री की कोरी घोषणाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति उदासीनता व नकारात्मक सोच का जीता-जागता उदाहरण है। ढाई वर्षों बाद भी घोषणा पूरी होना तो दूर, पीएचसी और आवासीय परिसर भवन की एक भी ईंट नहीं लग पाई है। जनता चुनावों में इसका बदला चुकाएगी।

अभी तक जारी नहीं हुई अधिसूचना : सीएमओ

सीएमओ मंडी देवेंद्र कुमार शर्मा ने कहा की मढ़ी पीएचसी के पुराने भवन को गिराया जा रहा है। यहां पर करोड़ों रुपए की लागत से नया भवन और आवासीय परिसर बनाया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अधिसूचना जारी होते ही यहां पर स्टाफ और अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।

सिर्फ डिस्मेंटल करवाने का हुआ टेंडर : एसडीओ

लोक निर्माण विभाग धर्मपुर के मढ़ी सब डिवीजन के एसडीओ योगेश चंद्र ने कहा कि पीएचसी भवन को डिस्मेंटल करवाने को लेकर टेंडर जारी किया जा चुका है। नए भवन की ड्राइंग, डिजाइन और साइट प्लान भेजा जा चुका है। चीफ़ ऑफिस से बजट मिलते ही टेंडर जारी कर दिया जाएगा।

माँ के अंधविश्वास ने छीन लिए दो बच्चे, बाद में खुद कर ली आत्महत्या

चम्बा।। चम्बा जिले में एक माँ के अंधविश्वास ने उसके बेटे और बेटी को उससे छीन लिया। जिसके बाद मां ने भी फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। आज के आधुनिक युग में अंधविश्वास से जुड़ी ऐसी खबर सामने आना सच में चौंका देने वाला है।

मामला चंबा जिला के पांगी क्षेत्र के अंतर्गत रेई पंचायत के मझरौऊ गांव का है। मिली जानकारी के अनुसार अंधविश्वास की वजह से दो बच्चों की मौत हो गई। जिसके बाद उनकी मां ने भी फंदा लगा लिया। मृतका की पहचान 42 वर्षीय प्यार देई पत्नी बेदब्यास के रूप में हुई है।

प्यार देई खुद को चेलन यानी माता का रूप मानती थी। यही कारण था कि जब उसके बड़े बेटे की तबीयत खराब हुई तो उसे अस्पताल नहीं ले गए। जिस वजह से घर में ही उसकी मौत हो गई। महिला को विश्वास था कि उसके बेटे को भगवान दूसरी दुनिया में ले गए हैं और वापस छोड़ जाएंगे।

इसी बीच महिला की बेटी की भी तबीयत बिगड़ गई। महिला ने उसे भी अस्पताल ले जाने से मना किया। पिता बेद ब्यास पत्नी के मना करने की वजह से काफी देर से बेटी को इलाज के लिए चंबा अस्पताल ले गए। जहां उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई।

जैसे ही महिला को बेटी की मौत की खबर मिली, तो उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मामले की सूचना पुलिस को मिलने के बाद घर से बेटे का शव बरामद किया गया, जो लगभग चार-पांच महीने पुराना था। स्थानीय लोगों के अनुसार महिला का पूरा परिवार अंधविश्वास में जकड़ा था। सालों से उनके घर किसी का आना-जाना नहीं था।

स्थानीय लोगों ने ही इस बात की आशंका जताई कि बेटे की मौत चार-पांच महीने पहले ही हो गई थी। पत्नी के कहने पर न तो किसी को घर आने देते थे और न ही किसी के घर जाते थे। लड़कियों को भी जबरदस्ती अस्पताल लेकर गया था। जिनमें छोटी लड़की की मृत्यु हो गई है व बड़ी का चंबा मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।

मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी नितिन चौहान ने बताया कि मां और बेटे के शव कब्‍जे में ले लिए हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

खुद बहने से पहले बिजनस पार्टनर की जान बचा गईं विनीता

कुल्लू।। कुल्लू जिले में मणिकर्ण से कुछ किलोमीटर दूर ब्रह्म गंगा में आई बाढ़ में कई लोग बह गए थे। इनमें एक गाजियाबाद की रहने वाली विनीता चौधरी भी थीं। लेकिन कुछ लोग इस दुनिया छोड़ने से पहले दूसरे लोगों के लिए कुछ ऐसा काम कर जाते हैं कि वे मरने वाले शख्स को ताउम्र नहीं भूल पाते। विनीता ने भी कुछ ऐसा ही काम किया है।

विनीता ब्रह्म गंगा के पास “कसोल डिलाइट्स” नाम से कैंपिंग साइट्स चलाने वाले दिल्ली के अर्जुन फारसवाल के साथ पार्टनर थीं। बादल फटने के बाद जब ब्रह्मगंगा नाले में सैलाब आ गया। तो विनिता ने अपने बिजनस पार्टनर को तो बचा लिया, मगर खुद मौत के मुंह में चली गईं।

जब नाले में आई बाढ़ के कारण पानी कैंपिंग साइट की तरफ बढ़ने लगा, तो यह देखकर विनिता अपने बिजनस पार्टनर अर्जुन फारसवाल को बचाने के लिए दौड़ीं। विनीता की इस दौड़ ने अर्जुन को तो बचा लिया, मगर खुद पानी के बहाव में बह गईं। अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। वहीं पानी के सैलाब में अर्जुन भी घायल हो गया है, जो फिलहाल कुल्लु अस्पताल में भर्ती है।

25 वर्षीय विनिता चौधरी पुत्री विनोद डागर, गांव निस्तौली, नियर टिला मोड, लोनी रोड, गाजियाबाद की रहने वाली थीं। विनिता ने पर्यटन व्यवसाय में कोर्स किया था और यहां बतौर मैनेजर काम देख रही थीं। इस हादसे के एक दिन बाद यानी बुधवार को वह दिल्ली के लिए रवाना होने वाली थीं। उसके बाद यहाँ दूसरे लोगों की शिफ्ट लगनी थी। लेकिन अफसोस बाढ़ ने पानी ने विनीता को अपना शिकार बना लिया।

हिमाचल प्रदेश के सभी कॉलेजों को अगस्त में मिल सकते हैं प्रिंसिपल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में खाली चल रहे प्रिंसिपल के पदों को जल्द ही भर दिया जाएगा। मौजूदा समय में लगभग 47 प्रतिशत कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद खाली चल रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने इन पदों को भरने की पूरी तैयारी कर ली है।

शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी कॉलेजों से उन एसोसिएट प्रोफेसरों की सूची मंगवाई है, जो सीनियरिटी लिस्ट में हैं। दो दिन के भीतर कॉलेजों को यह डेटा ई-मेल के ज़रिए भेजने के लिए कहा गया है। विभाग का दावा है कि अगस्त महीने के दूसरे हफ्ते तक पदोन्नति की सूची जारी कर दी जाएगी।

मौजूदा समय में हिमाचल प्रदेश में 138 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से 66 कॉलेजों में प्रिंसिपल नहीं है। वहीं 19 कॉलेजों में अस्थाई व्यवस्था अपनाते हुए कार्यकारी प्रिंसिपल लगाए गए हैं। वहीं 10 कॉलेज ऐसे हैं जिनमें प्रिंसिपल दिसंबर महीने तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में अगर जल्द ही विभाग द्वारा पदोन्नति सूची जारी नहीं की जाती है तो ये कॉलेज भी प्रिंसिपल के बिना ही हो जाएंगे।

बता दें कि प्रिंसिपल का पद संस्थान का महत्वपूर्ण पद होता है। जब नैक की टीम कॉलेज आती है तो प्रिंसिपल ही उस टीम के साथ होता है। ऐसे में जब कॉलेज में प्रिंसिपल ही नहीं होगा, तो कॉलेज का ग्रेड गिरना स्वभाविक है।

निदेशक उच्चतर शिक्षा डॉ अमरजीत शर्मा ने कहा कि कॉलेजों को दो दिन के भीतर रिकॉर्ड भेजने को कहा गया है। रिकॉर्ड आने के बाद पदोन्नति के लिए पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा।

वहीं देखा जाए तो विभाग के इस निर्णय के पीछे कॉलेज प्रोफेसरों का दबाव एक मुख्य कारण है। प्रोफेसरों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। कॉलेज प्रोफेसर पिछले एक हफ्ते से काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दो दिन तक मूल्यांकन का भी बहिष्कार किया था। साथ ही उन्होंने अपने आंदोलन को तेज करने की भी चेतावनी दी है।

प्रोफेसरों की चेतावनी के बाद ही मंगलवार को शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर निकाला है। जिसमें कॉलेजों से दो दिन के भीतर पदोन्नति के लिए सारा रिकॉर्ड माँगा है।

बिना प्रिंसिपल के चल रहे हिमाचल के 47 प्रतिशत सरकारी कॉलेज

हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के तबादलों पर फिर लगी रोक

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एक बार फिर डॉक्टरों के तबादलों पर रोक लगा दी गई है। अब कुछ विशेष परिस्थितियों में मुख्यमंत्री की अनुमति से ही तबादले हो सकेंगे। न सिर्फ डॉक्टरों, बल्कि नर्सों और फार्मासिस्ट के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी।

इस विषय पर सरकार का मानना है कि प्रदेश में अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है। अभी भी कोरोना के मामले लगातार आ रहे हैं। पहले जहां 50 से 70 के बीच मामले आ रहे थे, वहीं अब इनकी संख्या सौ से ऊपर जा रही है। वहीं अक्तूबर में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका है।

स्वास्थ्य विभाग कोरोना से निपटने की तैयारियों मेें जुटा है। कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए अधिक खतरनाक बताई जा रही है। इसलिए अस्पतालों में बच्चों के वार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही ऑक्सीजन युक्त बिस्तरों की व्यवस्था भी की जा रही है। ऐसे में  सरकार स्टाफ को इधर-उधर नहीं करता चाहती है। विभाग का मानना है कि इससे व्यवस्था पर असर पड़ेगा।

बता दें कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब हिमाचल में कोरोना के मामलों में कमी आई है। इसके बाद डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ मनपसंद स्टेशन में सेवाएं देना चाहते हैं। ऐसे में विधायकों और नेताओं के नोट लगाकर तबादलों की सिफारिश की जा रही है। सरकार के पास तबादलों की फाइलें आ रही हैं, लेकिन इन्हें पेंडिंग में डाला जा रहा है। अदला-बदली में भी तबादले नहीं होंगे।

इस बारे स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही तबादले किए जाएंगे। कोरोना काल है, प्रतिदिन मामले आ रहे हैं। जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किया है, उन्हें वहीं सेवाएं देनी होंगी।

हिमाचल प्रदेश में बनेंगे 100 क्लस्टर स्कूल, 200 से दो हज़ार छात्रों के लिए होगी व्यवस्था

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने के लिए 100 क्लस्टर स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। विभिन्न जिलों में यह क्लस्टर स्कूल बनेंगे। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी डिप्टी डायरेक्टर को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

यह क्लस्टर स्कूल छठी से बारहवीं कक्षा के बच्चों के लिए बनाए जाएंगे। प्राइमरी स्कूलों को क्लस्टर स्कूलों से बाहर रखा जाएगा। मुख्य स्कूल से आठ किलोमीटर के दायरे में क्लस्टर स्कूल होगा। इसमें छात्रों की संख्या 200 से लेकर 2000 तक होगी।

शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि क्लस्टर स्कूल के लिए एजुकेशन ब्लॉक नहीं बदलेगा। केवल जरूरी कारणों के चलते ही तथ्य के साथ एजुकेशन ब्लॉक बदला जाएगा। सभी भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही क्लस्टर स्कूल बनाया जाएगा। साथ ही क्लस्टर स्कूल बनाते समय संस्थान के मुखिया को ब्लॉक स्तर पर भी इसकी जानकारी उपलब्ध करवानी होगी।

शिक्षा विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर को निर्देश जारी किए हैं कि एक सप्ताह के भीतर सभी क्लस्टर स्कूलों की सूची भेजें। निदेशक उच्चतर शिक्षा डॉ अमरजीत शर्मा की ओर से यह आदेश जारी किए गए हैं।

शिक्षा विभाग का कहना है कि पूरे प्रदेश का सर्वे कर लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कोई भी एरिया इससे न छूटे। क्लस्टर स्कूलों में हर ब्लॉक को कवर किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में एक क्लस्टर बनाया जाएगा। कम संख्या वाले स्कूलों को इसमें मर्ज़ किया जाएगा।

किन्नौर – 20 दिन में तैयार हो जाएगा नया पुल, रविवार को पेश आया था बड़ा हादसा

किन्नौर।। जिला किन्नौर के बटसेरी में चट्टानें गिरने से टूटे पुल की जगह 20 दिन के भीतर नया पुल तैयार किया जाएगा। सांगला-छितकुल मार्ग सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग है। इस मार्ग पर क्षतिग्रस्त सड़क के 300 मीटर हिस्से की भी जल्द मरम्मत की जाएगी।

बता दें चीन-तिब्बत बॉर्डर पर भारतीय सेना और आईटीबीपी की तीन पोस्टें हैं। इसी मार्ग से इन पोस्टों के लिए सामग्री भेजी जाती है। यही कारण है कि सरकार इस मार्ग को खोलने में देरी नहीं करना चाहती है।

बीते रविवार को यहाँ भूस्खलन के कारण बड़ा हादसा पेश आया है। जिसमें 9 पर्यटकों की जान चली गयी है। पहाड़ से चट्टानें गिरने के कारण से करोड़ों का पुल भी टूट गया है। जिससे बटसेरी गांव का देश-दुनिया से संपर्क कट गया है।

लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा ने बताया कि 20 दिन के भीतर नया पुल तैयार हो जाएगा। सांगला-छितकुल मार्ग सेना के अलावा पर्यटकों और बागवानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इन दिनों सेब सीजन भी शुरू हो गया है। ऐसे में सरकार पुल और सड़क को बहाल करने में देरी नहीं करेगी।

शिमला में भूस्खलन की चपेट में आई कार, 15 घंटे से लगातार हो रही बारिश

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। राजधानी शिमला में पिछले 15 घंटों से लगातार बारिश हो रही हैं। मौसम विभाग ने पहले ही बारिश का रेड अलर्ट जारी कर दिया था। भारी बारिश से कई जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ रही है।

बुधवार सुबह पंथाघाटी-विकासनगर सड़क पर तेंजिन अस्पताल के पास भूस्खलन होने से सड़क किनारे खड़ी कार मलबे की चपेट में आ गई। मलबा व पत्थर गिरने से कार क्षतिग्रस्त हो गई है। हालांकि हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ हैं।

तहसीलदार अर्बन सिंह की टीम मौके पर पहुँच गई है। टीम द्वारा स्थिति का आंकलन किया जा रहा है। वहीं, छोटा शिमला में एक पेड़ भी गिर गया है। जिला में ऐसी कई भूस्खलन की छोटी घटनाएं हुई है। हालांकि किसी बड़ी घटना और नुकसान की कोई खबर नहीं है।

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राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार बारिश के कारण राज्य में दो लोगों की मौत हुई है और 13 अन्य लापता हैं। चम्बा और लाहौल-स्पीति के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। वहीं लाहौल-स्पीति में 9, कुल्लू में 3 औऱ चंबा में एक व्यक्ति लापता है। अगले 24 घंटों के लिए मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। 10 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

विक्रमादित्य सिंह ने संकेत तो दिए मगर कहां से चुनाव लड़ेंगी प्रतिभा सिंह?

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में उपचुनावों से पहले राजनीतिक कयासों का दौर जारी है। इस बीच शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह के एक फेसबुक पोस्ट ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसमें उन्होंने अपनी मां प्रतिभा सिंह की एक तस्वीर पोस्ट की है और लिखा है- ‘जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है, मान लो तो हार होगी ठान लो तो जीत होगी।’उन्होंने ये बातें उस समय पोस्ट की हैं जब उनके पिता वीरभद्र सिंह के निधन से खाली अर्की विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है और साथ ही मंडी लोकसभा सीट पर भी, जहां से प्रतिभा सिंह दो बार सांसद रह चुकी हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि विक्रमादित्य के पोस्ट से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि प्रतिभा सिंह ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। हालांकि यह अभी तक साफ नहीं है कि वह अर्की से चुनाव लड़ेंगी या मंडी से।

FB/Vikramaditya Signh

क्या चाहती है कांग्रेस
हिमाचल प्रदेश में जल्द ही एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने है। कांग्रेस चाहती है कि इन उपचुनावों में जीत हासिल करके 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी को एक झटका दिया जाए। ऐसा करके कांग्रेस मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करके यह संदेश देना चाहेगी कि प्रदेश की बीजेपी सरकार से लोग खुश हैं।

कांग्रेस चाह रही है कि अर्की और मंडी, दोनों में से एक जगह पर प्रतिभा सिंह उतरेंगी तो सहानुभूति वोट मिलने से उनकी जीत की संभावनाएं बढ़ जाएगी।

कहां से चुनाव लड़ेंगी चुनाव?
‘इन हिमाचल’ पर कुछ समय पहले प्रकाशित एक राजनीतिक विश्लेषण में कहा गया था कि अगर ‘वफादारियां बनी रहीं तो हिमाचल में कांग्रेस का पावर सेंटर वीरभद्र परिवार ही रहेगा।‘ ऐसा इसलिए क्योंकि विक्रमादित्य भले पहली बार विधायक होने के कारण कम अनुभवी हों, मगर उनकी मां प्रतिभा सिंह पार्टी की वरिष्ठ नेत्री हैं और दो बार लोकसभा में मंडी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अगर वीरभद्र समर्थक नेता और विधायक उनके साथ आते हैं तो कांग्रेस की ओर से सीएम कैंडिडेट बनने की चाह देख रहे कई नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रतिभा सिंह अर्की सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगी क्योंकि अगर वो जीतती हैं तो ऐसे सदन में पहुंचेंगी जहां उनकी पार्टी विपक्ष में है और मुकेश अग्निहोत्री कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। अब कांग्रेस अचानक अग्निहोत्री को हटाकर प्रतिभा सिंह को तो जिम्मेदारी देगी नहीं।

ऐसे में प्रतिभा सिंह अगर चाहती हैं कि 2022 के विधानसभा चुनावों में वह सीएम कैंडिडेट या फिर संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर उभरें तो अर्की से विधायक बनने की जगह मंडी से लोकसभा के लिए चुनना उनकी प्राथमिकता होगा। मंडी चूंकि प्रतिभा के साथ-साथ वीरभद्र सिंह की भी लोकसभा सीट रही है, इसलिए यहां से भी उन्हें सहानुभूति वोट मिलना तय है। फिलहाल बीजेपी ने भी कोई चेहरा घोषित नहीं किया है जिससे आकलन किया जाए कि उसका कैंडिडेट कितना दमदार होगा।

लोकसभा उपचुनाव में उतरने के साथ प्रतिभा सिंह का सक्रिय राजनीति में आगमन होगा और इससे वीरभद्र समर्थक फिर से लामबंद होंगे। अगर उन्हें जीत मिल जाती है तो इससे उनका क़द और बढ़ जाएगा। पार्टी की सीनियर नेता और सांसद होने के कारण  2022 के विधानसभा चुनावों तक वह इस स्थिति में होंगी कि कांग्रेस की ओर से सीएम दावेदार बन जाएं। इस तरह वह पार्टी आलाकमान को भी संदेश दे पाएंगी कि प्रदेश में ‘वीरभद्र परिवार का राजनीतिक आधार’ मज़बूत है।

अगर ऐसी स्थिति बनी तो प्रतिभा सिंह 2022 में अर्की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। उस स्थिति में वीरभद्र खेमे के उन सभी लोगों को बैकफुट पर आकर प्रतिभा सिंह के पीछे चलना ही पड़ेगा जो कुछ दिन पहले ‘डिप्लोमेसी की तस्वीरें’ शेयर करके खुद कांग्रेस के संभावित सीएम कैंडिडेट बनने की योजना बना रहे थे।

तो अभी अर्की से कौन?
वीरभद्र परिवार के समर्थक तो चाहते हैं कि अगर प्रतिभा मंडी से लड़ें तो अर्की से वे अपनी बहू और विक्रमादित्य सिंह की पत्नी सुदर्शना सिंह को लड़वाएं। यह एक संभावना तो दिखती है मगर मजबूत नहीं। इसकी वजह यह है कि अभी वीऱभद्र परिवार की ओर से सुदर्शना को राजनीति में लाने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। ऊपर से कांग्रेस इसके लिए तैयार हो जाएगी, यह भी पक्का नहीं कहा जा सकता। ऐसी स्थिति में अर्की सीट वीरभद्र परिवार नहीं, बल्कि कांग्रेस का विषय बन जाएगी। यानी यह कांग्रेस को देखना होगा कि यहां से वह किसे उतारती है और उसे जिताने के लिए क्या करती है।

बहरहाल, ये सभी राजनीतिक कयास हैं। आने वाले कुछ ही दिनों के अंदर स्पष्ट हो जाएगा कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा, कहां से नहीं। लेकिन तब तक महफिलों, जमघटों और सोशल मीडिया में चर्चाओं और अटकलों का दौर चलता रहेगा।

‘वफ़ादारियां’ जिंदा रहीं तो वीरभद्र परिवार ही रहेगा कांग्रेस का पावर सेंटर

ग्राम पंचायतें अपने नियंत्रण वाली सरकारी जमीन पर लगाएंगी फलों के बगीचे

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में ग्राम पंचायतें अपने नियंत्रण की सरकारी जमीन पर सेब या अन्य फलों के बगीचे लगाएंगी। जहां बगीचे पहले से उगे हैं, उन्हें और दुरुस्त किया जाएगा। इन बगीचों से प्राप्त आमदनी को विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा।

कुछ पंचायतों में सेब या अन्य फलों के बगीचे लगे हैं। इनसे बहुत अच्छी आमदनी हो रही है। इसी को देखते हुए राज्य के छठे वित्तायोग ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों से इस संबंध में ब्योरा मांगा है।

किस पंचायत के पास किसी फल का कितना बड़ा बगीचा है। उससे कितनी आय होती है। घास की नीलामी कितनी होती है। दान या अन्य स्रोतों से क्या आय होती है। कितनी जमीन खाली है। सर्वेक्षण के लिए 22 पन्नों का एक प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें बारीक से बारीक बात की जानकारी मांगी है। बता दें प्रदेश में कुल 3615 पंचायतें हैं। इन सभी पंचायतों को यह प्रारूप भरने को कहा गया है।

आइये इसे उदाहरण के तौर पर समझते हैं। शिमला जिला की ग्राम पंचायत क्यारी में करीब 40 बीघा जमीन पर सेब का बगीचा है। इसमें मौसम के अनुकूल रहने पर हर साल 1000 से 3000 पेटियां होती हैं। हर साल इस बगीचे से फलों की नीलामी होती है। 10 से 15 लाख तक कुल आय होती है।

इसके साथ ही इस बात की भी जानकारी मांगी है कि ग्राम पंचायतों ने नाजायज कब्जे तो नहीं किए हैं। अगर ऐसा है तो कब्जा बहाली के लिए उठाए गए कदम के बारे में भी जानकारी देने को कहा है। पटवारी से प्रमाणित ऐसी भूमि की भी जानकारी मांगी गई है, जिसमें कोई भवन निर्मित न हो। दुकानें, सराय आदि स्थायी संपत्ति का भी ब्योरा मांगा गया है। गलियों की सफाई, पशुओं के पंजीकरण, शादी पंजीकरण आदि कई योजनाओं पर लिए जाने वाले शुल्क का भी विवरण मांगा गया है।