विपक्ष ने किया वॉकआउट, बिंदल ने “घेरी” अपनी ही सरकार

शिमला।। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में माकपा विधायक राकेश सिंघा ने सदन में मोर्चा संभाला। सिंघा के अलावा सत्ता पक्ष के विधायक ही सरकार से सवाल करते रहे।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और नाहन के भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल अपनी ही सरकार को घेरते नज़र आये। बिंदल ने अपनी ही सरकार से इन्वेस्टर मीट और प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के संबंध में कडे़ सवाल किए। उन्होंने पूछा कि इन्वेस्टर मीट और इसकी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के बाद हिमाचल प्रदेश में कितने लोगों को उद्योगों में प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

प्रश्नकाल में सवाल करते हुए बिंदल ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि रोजगार सृजन के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बहुत अच्छी इन्वेस्टर मीट की थी। क्या हिमाचल प्रदेश में रोजगार संभावनाओं के अनुरूप हम तीन बरसों में गए हैं? एक वर्ष में कितना रोजगार देने की उम्मीद रखते हैं।

इसके जवाब में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर की बात कर रहे हैं तो 14500 करोड की पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के बाद 70 फीसदी उद्योगों ने अपना काम शुरू कर लिया है। सितंबर महीने में 10 हजार करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग करने जा रहे हैं। तीन हजार 444 प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ही स्थापित किए गए। 9,435 लोगों को रोजगार दिया है। और इससे भी ज्यादा रोजगार दिया जाएगा।

इस पर बिंदल ने पूछा कि दोनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के बाद अगर 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा तो इससे कितना रोजगार प्रत्यक्ष रूप से मिल पाएगा। इस पर मंत्री बोले कि 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने भी जिला मंडी में स्थापित उद्योगों की जानकारी मांगी।

सरकार ने बताया, इतनों को लीज पर दी सरकारी जमीन

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन साल में कुल 260 उद्यमों या उद्योगों को लीज पर सरकारी जमीन दी गयी है। यह जानकारी सरकार की ओर से सामने आई है। विधानसभा के मानसून सत्र में माकपा विधायक राकेश सिंघा ने यह सवाल पूछा था। सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल न होने पर यह जानकारी लिखित जवाब के रूप में सरकार की ओर से रखी गई है।
सवाल था कि 30 जनवरी, 2021 तक कितने लोगों, संस्थाओं, सोसायटीज, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमों को सरकारी जमीन लीज पर दी गई है?

राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि 31 जनवरी 2021 तक 260 मामलों में लीज पर जमीन विभिन्न संस्थाओं या उद्योगों को दी गई है। इनमें कुछ लीज 40 साल के लिए है, कुछ 99 साल के लिए और कुछ 10 साल के लिए। इसके अलावा बीच की अवधि के भी कुछ मामले हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतम लीज के मामले उद्योगों से संबंधित हैं। ऊर्जा विभाग और पशुपालन विभाग को भी कुल तीन लीज दी गई है।

मंत्री ने बताया कि इनमें से सिर्फ 7 मामलों में धारा 118 के तहत लोगों ने अप्लाई किया था और उन्हें मंजूरी दी गई। जहां तक औद्योगिक उपयोग के लिए दी गई जमीन की बात है, तो उसमें धारा 118 की अनुमति से छूट है। 23 सितंबर 2014 को दी यह छूट गई थी।

जहां तक लीज के बाकी मामलों का सवाल है तो लीज मंजूर होने के बाद जमीन को उपयोग करने के लिए दो साल की अवधि दी जाती है और लीज अमाउंट में भी सरकार द्वारा किए जाने वाले बदलाव लागू हो जाते हैं। लीज डीड संबंधित उपायुक्त को करनी होती है और उन्हीं के द्वारा लीज मनी की कलेक्शन भी की जाती हैं।

राजस्व मंत्री ने बताया कि एक बार लीज पर दी गई जमीन हमेशा लीज पर रहती है। इसलिए लीज प्राप्त करने वाला कभी भी जमीन का मालिक नहीं बन सकता।

अर्जुन बोले : हाथ छूटा और बह गईं दोस्त विनीता

कुल्लू।। बादल फटने से कुल्लू में आई बाढ़ ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया था। वहीं कुछ लोग इस भयानक मंज़र से जिंदा बच निकले थे। जिनमें दिल्ली के रहने वाले अर्जुन भी शामिल हैं। अर्जुन ने इस तबाही को बिल्कुल करीब से देखा था। लेकिन इस हादसे में उनकी बिजनेस पार्टनर और दोस्त गाजियाबाद की विनीता चौधरी अभी भी लापता हैं।

28 जुलाई की सुबह ब्रह्मगंगा नाले में आए अचानक सैलाब से विनीता ने अर्जुन को तो बाहर निकाल लिया था, लेकिन वह खुद बह गईं। पत्थरों से टकराकर अर्जुन घायल हुए थे। इलाज के बाद अब ठीक हैं। लेकिन तबाही का वो भयानक मंज़र अभी भी उनकी आंखों के सामने है।

इस घटना के बारे में अर्जुन कहते हैं कि 28 जुलाई की सुबह साढ़े पांच बज रहे थे। उनकी दोस्त और रिसॉर्ट मैनेजर मॉर्निंग वॉक कर रही थीं। वह जल्दी उठ गई थीं, शायद ब्रह्मगंगा नाले में आई बाढ़ के पानी की तेज आवाज उसे सुनाई दे गई थी।

उस वक्त कैंपिंग साइट में करीब 30 से ज्यादा लोग सो रहे थे। विनीता ने सभी कमरों के दरवाजे नॉक किए और अंदर सो रहे पर्यटकों को जगाकर जल्द से जल्द रिसॉर्ट छोड़कर भागने के लिए कहा। ज्यादातर पर्यटक वहां से निकल चुके थे। इसी दौरान पानी रिसॉर्ट के ऊपर आ गया। टेंट, गाड़ी, रिसॉर्ट जो कुछ भी पानी के रास्ते में आया वो तिनके की तिनके बहने लगे।

अर्जुन ने आगे बताया कि वह अपनी बिजनेस पार्टनर विनीता चौधरी का हाथ पकड़कर भाग रहे थे। लेकिन पानी में उनका पैर फिसला और वे जमीन पर गिर गए। दोनों का हाथ छूट गया और पानी के तेज बहाव में बह गए। उनके हाथ में एक पाइप आ गया। उन्होंने उसे पकड़े रखा। कुछ देर में स्थानीय लोगों ने उन्हें खींच लिया। लेकिन विनीता कहां-किधर बह गईं, कुछ पता नहीं चला।

उन्होंने कहा कि पैर फिसलने से उनके सिर में चोट लगी। उन्हें सिर्फ इतना याद है कि जब स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाया, उसके बाद करीब पांच घंटे तक बेहोश रहे। जब आंख खुली तो खुद को पीजीआई चंडीगढ़ में पाया।

कुल्लू की पार्वती वैली में ‘कसौल हाइट्स’ नाम से अर्जुन का रिसॉर्ट है। जिसमें विनीता बतौर मैनेजर काम कर रही थीं। अर्जुन उनके बिजनेस पार्टनर हैं। विनीता चौधरी उप्र के गाजियाबाद जिले में लोनी थाना क्षेत्र स्थित निस्तौली गांव की रहने वाली हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी भी विनीता के लौटने की उम्मीद है।

खुद बहने से पहले बिजनस पार्टनर की जान बचा गईं विनीता

सड़क रिस्क मैनेजमेंट रिपोर्ट का पालन करने में हिमाचल प्रदेश विफल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और अचानक बाढ़ नियमित रूप से कहर बरपा रहे हैं। इसके बावजूद भी अधिकारी 2015 की उस रिपोर्ट के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने में विफल रहे हैं, जिसमें सड़कों, बिजली परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के निर्माण के लिए कुछ इंजीनियरिंग उपायों का सुझाव दिया गया था।

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भूस्खलन और बाढ़ के कई दृश्य देखने को मिले हैं। कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सिरमौर जिला में बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिली हैं। कांगड़ा और कुल्लू जिला में अचानक बाढ़ का रौद्र रूप भी देखने को मिला है। इन सारी घटनाओं में कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी है।

एक शोधकर्ता के अनुसार इन घटनाओं ने परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और पीडब्ल्यूडी सहित विभिन्न एजेंसियों के कथित ढुलमुल रवैये को उजागर करने का काम किया है। उन्होंने आकस्मिक दृष्टिकोण से लोगों की जान जाने का भी आरोप लगाया।

हालांकि ‘भूस्खलन जोखिम और जोखिम प्रबंधन’ अध्ययन 2015 में किया गया था, लेकिन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रिपोर्ट में सुझाए गए जरूरी इंजीनियरिंग उपायों की ओर बहुत कम ध्यान दिया गया है।

एक पर्यावरणविद के अनुसार सड़क परियोजनाओं को ठेकेदारों को आबंटित किया था और वे नाजुक पारिस्थितिकी की परवाह किये बगैर लापरवाही से पहाड़ियों को काट रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि “2015 की रिस्क रिपोर्ट” के अनुसार, हिमाचल में आठ नेशनल हाईवे की 1,628 किलोमीटर लंबाई में से 993 किलोमीटर उच्च संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। वहीं 2,178 किलोमीटर लंबे स्टेट हाईवे के लिए यह आंकड़ा 1,111 किलोमीटर था। आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2014 से एनएचएआई को हिमाचल में विभिन्न सड़क परियोजनाओं के लिए 83,320 पेड़ गिराने की अनुमति दी गई थी।

जबकि एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का दावा है कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले गहन वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक अध्ययन किए गए थे। राज्य में आई आपदाओं ने एक अलग तस्वीर पेश की है।

पर्यावरणविद का कहना है कि जिस तरह से एनएचएआई ने पांवटा-शिलाई-हाटकोटी नेशनल हाईवे-707 पर प्राकृतिक नालों में मलबा डाला है, वह एक आपदा के लिए एक आदर्श नुस्खा है।

इस बारे एक विशेषज्ञ ने कहा कि भूस्खलन के उभरते जोखिम को कम करने के लिए किसी क्षेत्र के खतरे की रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए सड़क काटने और विकास गतिविधियों को अंजाम दिया जाना चाहिए।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विवेक पांचाल ने दावा किया कि भूस्खलन संभावित स्थलों का आकलन करने के लिए एक वैज्ञानिक अध्ययन किया गया था और एनएच-707 को चौड़ा करते समय उचित उपाय किए गए थे।

वहीं हिमधारा कलेक्टिव के शोधकर्ता और कार्यकर्ता प्रकाश भंडारी का कहना है कि पहाड़ों की संवेदनशील प्रकृति और बड़े पैमाने पर कटाई की आवश्यकता के कारण फोरलेन परियोजनाएं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाया जाएगा “नंद घर”, होगी ये खासियत

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित कर “नंद घर” बनाया जाएगा। जिसकी शुरुआत हमीरपुर जिला से हो चुकी है। माडर्न प्ले स्कूलों की तर्ज पर प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित किया जाएगा। इन आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘नंद घर’ का नाम दिया गया है।

बता दें कि ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मदर एंड चाइल्ड एनजीओ और वेदांता फाउंडेशन के सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित किया जा रहा है। एनजीओ ने हमीरपुर जिला से इसकी शुरुआत कर दी है। हमीरपुर जिला में 25 आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित किया गया है।

एनजीओ के स्टेट हेड डॉ. गौरव सेठी ने बताया कि इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ वेदांता फाउंडेशन का एमओयू साइन हुआ है। हिमाचल के अलावा अन्य प्रदेशों में भी ऐसे ‘नंद घर’ बनाए जा रहे हैं। स्थानीय पंचायत व लोगों के सहयोग से एनजीओ इनका रखरखाव करेगा।

‘नंद घरों’ में क्या है खास

ये ‘नंद घर’ देखने में आकर्षक हैं। लर्निंग के लिए एलईडी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुचारु रखने के लिए सोलर पैनल, इनवर्टर और बैटरी लगाई गई हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग्स बनाई गई हैं। यहां बच्चों के सीखने के लिए बढ़िया माहौल तैयार किया गया है। बच्चों के अभिभावक भी इसकी सराहना कर रहे हैं। आंगनबाड़ी में पंखे, वाटर प्योरीफायर, हर्बल किचन गार्डन आदि भी स्थापित किए गए हैं।

शिमला: बंदूक लेकर सड़क पर खड़ा हो गया भाजपा नेता से नाराज कर्मचारी

शिमला।। जल शक्ति विभाग के एक कर्मचारी द्वारा भाजपा नेता पर हमला करने का मामला सामने आया है। मामला शिमला जिला से संबंधित है। बताया जा रहा है कि यहां जल शक्ति विभाग में तैनात एक सरकारी कर्मचारी अपने तबादले से इतना खफा हो गया कि उसने भाजपा नेता पर हमला कर दिया।
मामला रविवार का है। कसुम्पटी भाजपा मंडलाध्यक्ष जितेंद्र भोकटा पौधरोपण कार्यक्रम से घर लौट रहे थे। मंडल अध्यक्ष के साथ कसुम्पटी मंडल के उपाध्यक्ष समेत 3 व्यक्ति सवार थे। जैसे ही वे चुरट के पास पहुँचे तो वहाँ एक व्यक्ति बंदूक लेकर खड़ा था। जब गाड़ी को नहीं रोका गया तो उसने गाड़ी पर बंदूक दे मारी। जिसके बाद गाड़ी रोककर लोगों ने आरोपी को काबू किया और उससे बंदूक छीन ली। इसके बाद आरोपी पत्थरों की बौछार करते हुआ मौके से फरार हो गया।

ढली थाना में मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस ने बंदूक को कब्जे में ले लिया है और आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोपी में जल शक्ति विभाग में कार्यरत है। पिछले दिनों उसकी ट्रांसफर हो गई थी। उसे अंदेशा था कि उसकी ट्रांसफर के पीछे भाजपा मंडल अध्यक्ष का हाथ है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने मंडल अध्यक्ष के साथ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी है।

वहीं बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में भी आरोपी और भाजपा मंडलाध्यक्ष के बीच बहस हुई थी। मंडल अध्यक्ष शहर से सटे ग्राम पंचायत पटगैहर में पौधरोपण कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां मौजूद आरोपी कर्मचारी अपनी ट्रांसफर को लेकर मंडल अध्यक्ष से उलझ गया था। लेकिन वहां मौजूद लोगों ने विवाद को शांत कर दिया। जिसके बाद कर्मचारी वहां से चला गया था और रास्ते में गाड़ी के सामने आ पहुंचा।

मामले की पुष्टि करते हुए एसपी शिमला मोहित चावला ने कहा कि शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बंदूक को कब्जे में ले लिया गया है। आरोपी कर्मचारी की तलाश की जा रही है।

एचआरटीसी बोली- अवैध निजी बसों से हो रहा नुकसान

शिमला।। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का कहना है कि कुछ निजी बस ऑपरेटर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अवैध रूप से बसें चला रहे हैं। जिस कारण एचआरटीसी को नुकसान हो रहा है। इस बारे एचआरटीसी ने एसपी शिमला को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की है।

इस पत्र में एचआरटीसी के एक अधिकारी ने उन निजी ऑपरेटरों के नाम बताए हैं जो ‘स्टेज कैरिज’ के रूप में काम कर रहे हैं। भले ही वे ‘कॉन्ट्रैक्ट कैरिज’ के रूप में पंजीकृत हों। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि हरियाणा और यूपी में पंजीकृत ये बसें आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किए बगैर शिमला-दिल्ली, मनाली-दिल्ली और धर्मशाला-दिल्ली जैसे इंटरस्टेट रूटों पर ‘स्टेज कैरिज’ के रूप में चल रही हैं।

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अधिकारी ने यह भी लिखा है कि इन अवैध कार्यों के कारण, एचआरटीसी को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। जो राज्य सरकार के राजस्व को प्रभावित कर रहा है।

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क्या होता है स्टेज कैरिज और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, स्टेज कैरिज परमिट वाहन अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने से पहले अपने रास्ते के विभिन्न स्टेशनों से यात्रियों को बिठा सकता है। जबकि कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट में ऐसा नहीं होता। कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट के साथ चलने वाले वाहनों को यात्रा के शुरुआती स्टेशन पर अपने सभी यात्रियों को लेने की आवश्यकता होती है। यह यात्रियों को रास्ते में नहीं बिठा सकता।

इस बारे एचआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त समन्वय समिति के सचिव खेमेंद्र गुप्ता का कहना है कि निजी ऑपरेटर कई वर्षों से नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ शायद ही कोई कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि अवैध संचालन की जाँच के लिए समितियाँ हैं, लेकिन अपराधियों के खिलाफ शायद ही कोई कार्रवाई की जाती है।

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उन्होंने कहा कि ऑपरेटरों को स्टेज कैरिज परमिट की तुलना में कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट के लिए बहुत कम टैक्स देना पड़ता है। निजी ऑपरेटरों के कई वाहनों के पास कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट है, लेकिन वे स्टेज कैरिज के रूप में काम करते हैं। ऐसा करके, वे बहुत अधिक टैक्स की चोरी कर रहे हैं, जिससे सरकार को भारी नुकसान हो रहा है।

निजी वॉल्वो से HRTC को करोड़ों का चूना; अब प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर बादलों का एकाधिकार

नए सरकारी चॉपर ने आते ही लाहौल-स्पीति से एयरलिफ्ट किए लोग

लाहौल-स्पीति।। लाहौल-स्पीति के उदयपुर में फंसे सभी पर्यटकों व स्थानीय लोगों को रविवार को रेस्क्यू कर लिया गया। बीते मंगलवार को बादल फटने से नालों में आई बाढ़ से 194 लोग यहां फंसे हुए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन में रेस्क्यू टीम ने प्रदेश सरकार के नए हेलीकॉप्टर की भी मदद ली।

हेलीकॉप्टर की मदद से एक गर्भवती महिला सहित 19 लोगों को एयरलिफ्ट कर तांदी हेलीपैड पहुंचाया गया। उसके बाद सभी को एचआरटीसी की बस से मनाली पहुंचाया गया। इसके अलावा आईटीबीपी, पुलिस और दमकल विभाग ने शांशा और जाहलामा नाले में जाहलामा, थिरोट और उदयपुर से सीढ़ी, रस्सियों और जिप लाइन की मदद से लगभग 175 लोगों को निकाला और केलांग ले जाया गया।

बता दें कि यह प्रदेश सरकार का वही हेलीकॉप्टर है जिसे कोरोना संकट के दौर में रशिया से मंगाया गया था। एमआई 171ए-2 स्काई वन कंपनी का हेलीकॉप्टर है, जिसे पांच साल के लिए लीज पर लिया गया है।

जब यह हेलीकॉप्टर लीज पर लिया गया था तो प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। विपक्ष ने भी जमकर आरोप लगाए थे। लेकिन हेलीकॉप्टर ने हिमाचल पहुंचते ही पहली उड़ान लाहौल-स्पिति में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए भरी।

हिमाचल का वो गांव जहां वीरभद्र सिंह को ऊंट पर करना पड़ा था सफर

एमबीएम न्यूज़, नाहन।। कुछ हफ्ते पहले जब हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निधन हुआ तो दिवंगत मुख्यमंत्री की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुईं जिनमें वह ऊंट पर बैठे हुए थे। ये वो ‘‘भेड़ों’’ गांव है, जहां पहुंचने के लिए दिवंगत वीरभद्र सिंह ने बतौर सीएम अपनी दूसरी पारी में ऊंट का इस्तेमाल किया था। हालांकि नवंबर 2015 में वह दोबारा इस गांव में आए। लेकिन इस बार उन्हें नेशनल हाईवे से संपर्क मार्ग पर भेड़ों तक पहुंचने के लिए ऊंट का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा, क्योंकि वो अपने वादे के मुताबिक गांव तक सड़क का निर्माण करवा चुके थे।

लोग ऊंट पालने के शौकीन हैं। हिमाचल में शायद ये ही एकमात्र ऐसी जगह है, जहां ऊंट पाले जाते हैं। कुछ साल पहले एक ऊंटनी को भी राजस्थान से प्रशासन के द्वारा लाया गया था। ऊंटनी ने बच्चे को भी जन्म दिया। मगर गांव की बदकिस्मती देखिए, लंबे अरसे से इस सड़क को अनदेखा किया जा रहा है। हालांकि कुछ अरसा पहले सड़क को पक्का करने की औपचारिकताएं तो पूरा कर दी गई, लेकिन सफर को सुरक्षित बनाने का प्रयास नहीं हुआ।

ग्रामीण महसूस करते है कि अगर 2017 में भी वीरभद्र सिंह को ही सूबे की कमान मिली होती तो आज ये दिन न देखने पड़ते। ग्रामीणों की मानें तो भेड़ों से शंभूवाला तक पहुंचने के लिए रोजाना हजारों लोगों को पैदल ही सफर करना पड़ता है। शायद ये यकीन करना हर किसी के लिए मुश्किल होगा कि मुख्यालय के समीप ये स्थिति है, वो भी तब जब भाजपा के तेजतर्रार नेता डॉ. राजीव बिंदल बतौर विधायक अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं।

निश्चित तौर पर खबर की शुरूआती पंक्तियां पढ़कर आपके जहन में सवाल उठ रहा होगा कि भई उस गांव में ऐसा क्या हो गया। दरअसल, लोक निर्माण विभाग ने सड़क का निर्माण तो करवाया, लेकिन बरसात के दौरान इस संपर्क मार्ग पर लगातार लैंड स्लाइड होता है। इस गांव के सीधे-सादे लोगों का व्यवसाय दूध उत्पादन से जुड़ा हुआ है। वो दूध को बेचने रोजाना नाहन आते हैं। अब इस सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है कि बाइक भी नहीं चलती, क्योंकि भूस्खलन के कारण सड़क पर मलबे के साथ-साथ बोल्डर गिरे हुए हैं।

2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने गांव में ही स्कूल का दर्जा माध्यमिक से बढ़ाकर सीनियर सैकेंडरी कर दिया था। 2017 के चुनाव से पहले उन्होंने अपने वादे को निभा भी दिया था। सड़क पर पैदल चलने का मतलब है कि अपने प्राणों को हथेली पर रखना, क्योंकि जानें कब किधर से भूस्खलन हो जाए।

सिरमौर के मुख्यालय से मात्र 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भेड़ों गांव अपने में एक अलग इलाका है। गुज्जर समुदाय के लोग अमूमन सामान्य जीवन से अलग-थलग रहने के आदी हैं। यह अलग बात है कि कुछ अरसे से बदलाव आए हैं। मातर व भेड़ों गांवों में शिक्षकों के नियमित तौर पर जाने से भी ये लोग जीवन की सामान्य धारा में शामिल हो रहे हैं। दिवंगत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को इस गांव से विशेष लगाव था। यही कारण था कि शिक्षा व सड़क से जोड़ने के वायदे को निभाने में पल भी नहीं लगाया।

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चूंकि अब इलाके में बाहर के लोगों की भी आवाजाही होने लगी है, लिहाजा सड़क की खस्ताहालत से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। जिसमें साफ जाहिर है कि शंभूवाला से भेड़ों तक के संपर्क मार्ग पर पैदल चलना भी किस कद्र जोखिम भरा है। खैर, उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही विभागीय नींद टूटेगी और सड़क को दुरुस्त किया जाएगा।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

भीड़ में बैठ सिसक रही थी बुजुर्ग महिला, सीएम ने मंच पर बुलाया

कांगड़ा।। फतेहपुर दौरे के दौरान सीएम जयराम ठाकुर ने जब एक बुर्जुग महिला को आँसू बहाते देखा, तो उन्हें मंच पर बुला लिया। सीएम से मिलने पहुंची यह बुजुर्ग महिला भीड़ में बैठ कर रो रही थी। जैसे ही सीएम की नज़र उन पर पड़ी तो उन्हें मंच पर बुला लिया।

महिला अपने बेटे की बीमारी को लेकर सीएम से मिलने के लिए आई थी। उनके बेटे को ब्रेन ट्यूमर है। जैसे ही सीएम ने उन्हें बुलाया तो उन्होंने अपनी व्यथा सीएम को सुनाई। सीएम ने उनकी व्यथा सुनी और मौके पर ही आर्थिक सहायता के लिए आदेश जारी कर दिया। महिला को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

सीएम जयराम ठाकुर शनिवार को कांगड़ा जिला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। यहाँ उन्होंने 43 करोड़ रुपये की लागत की नौ विकासात्मक परियोजनाओं के शिलान्यास किए।