हिमाचल में जमीन से ‘दूध’ और ‘दही’ निकलने का रहस्य क्या है

मंडी।। मंडी जिले की चौहार घाटी की रोपा पद्धर पंचायत में जमीन से दूधिया पानी क्या निकलने लगा, लोगों ने इसे चमत्कार का नाम दे दिया। न सिर्फ चमत्कार का नाम दिया बल्कि धूप-अगरबत्ती जलाकर पूजा-अर्चना भी करने लग गए। पूजा-अर्चना करने वालों में न सिर्फ बड़े-बुजुर्ग बल्कि पढ़े लिखे युवा व बुद्धिजीवी वर्ग भी शामिल हैं। यही नहीं लोग यह भी कह रहे हैं कि जमीन से निकला दूध दही में परिवर्तित ही रह है।

इस लेख में इन हिमाचल आपको विस्तार से बताएगा कि जमीन से दूधिया पानी किसी चमत्कार की वजह से नहीं, बल्कि एक रासायनिक प्रक्रिया के तहत निकलता है। चौहार घाटी का यह इलाका पुराने समय से ही नमक और चूने के भंडार के लिए प्रसिद्ध है। गुम्मा से लेकर द्रंग तक नमक और चूने के भंडार है। गुम्मा का नमक प्रदेश व देश भर में प्रसिद्ध है। गुम्मा व द्रंग दोनों जगह नमक व चूने वाला पानी निकलता है।

किस वजह से दूधिया होता है रंग

जब भी चूने के पानी वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के सम्पर्क में आता है तो पानी का रंग दूधिया हो जाता है। यह एक रासायनिक प्रक्रिया है, कोई चमत्कार नहीं। साइंस में यह चीज़ अक्सर पढ़ाई जाती है। अगर चूने के पानी में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुजारी जाए तो पानी का रंग दूधिया हो जाता है।

कार्बन डाइऑक्साइड एक रंगहीन व गन्धहीन गैस है। धरती पर यह गैस प्राकृतिक रूप से पायी जाती है।वायुमण्डल में यह गैस लगभग 0.03 से 0.04 प्रतिशत पाई जाती है। यही नहीं यह गैस पृथ्वी पर जीवन के लिये अति आवश्यक है। सामान्य तापमान व दबाव पर यह गैसीय अवस्था में रहती है।

आइये साइंस की भाषा में इसे समझते हैं। चूने के दो प्रकार होते हैं। बुझा हुआ चूना और बिना बुझा हुआ चूना। साइंस में बिना बुझे हुए चूने को कैल्शियम ऑक्साइड और बुझे हुए चूने को कैल्शियम हाइड्रोक्साइड कहा जाता है। चूने का पानी भी कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ही कहलाता है।

रासायनिक प्रक्रिया

जब चूने के पानी में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुजारी जाती है तो रिएक्शन होता है। रिएक्शन में कार्बन चूने में मौजूद कैल्शियम की जगह ले लेता है। रिएक्शन के बाद कैल्शियम कार्बोनेट और पानी बनता है। कैल्शियम कार्बोनेट का रंग सफेद होता है और इस वजह से पानी दूधिया दिखाई देता है। इस कैल्शियम कार्बोनेट को क्रिस्टल या प्रेसिपिटेट कहा जाता है। लेकिन जब यह पानी बह रहा होता है तो कैल्शियम कार्बोनेट जमीन की सतह पर रह जाता है। ये वही प्रेसिपिटेट हैं जिन्हें चौहार घाटी में लोग दूध से दहीं बनना बता रहे हैं।

लेकिन हकीकत ये है कि न तो वो कोई दूध है और न ही कोई दूध से बनी दही। यह एक रासायनिक प्रक्रिया है। लेकिन साइंस का ज्ञान न होने के कारण लोग इसे चमत्कार का नाम दे रहे हैं। यह एक अव्यवहारिक बात है और कहीं न कहीं इससे अंधविश्वास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

पाठ्यक्रम में हैं शामिल

यह प्रक्रिया स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल है। सीबीएसई में यह दसवीं क्लास में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यह एक रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) का प्रश्न भी है, जो अक्सर यूपीएससी, एसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है। साल 2011 में आयोजित एसएससी की परीक्षा में भी यह सवाल पूछा गया था।

स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा टांडा मेडिकल कॉलेज

कांगड़ा।। प्रदेश में स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले एक साल में, 50 से अधिक स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट नौकरी छोड़ चुके हैं या उच्च अध्ययन पर चले गए हैं।

इस समय प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट के 100 से ज्यादा पद खाली हैं। इसमें राज्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने वाला कांगड़ा जिला का टांडा मेडिकल कॉलेज सबसे अधिक प्रभावित है।

टांडा मेडिकल कॉलेज से पिछले छह महीनों में छह डॉक्टर चले गए हैं, जिनमें से अधिकांश सुपर-स्पेशलिस्ट हैं। इनमें से अधिकांश डॉक्टर एम्स बिलासपुर में भर्ती हुए थे। कॉलेज छोड़ने वाले डॉक्टरों में रेडियोलॉजी विभाग के डॉ लोकेश राणा भी शामिल हैं, जो एमआरआई, ट्रस बायोप्सी, एमआर आर्थ्रोग्राम और अल्कोहल एब्लेशन के स्पेशलिस्ट हैं। ये टेक्नोलॉजी प्रोस्टेट और हड्डी के कैंसर का पता लगाने में सहायक हैं।

पहले ऐसे मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स नई दिल्ली जाना पड़ता था। हालांकि, डॉ राणा ने टांडा मेडिकल कॉलेज में यह सुविधाएं दी थीं। लेकिन अब उन्होंने भी एम्स, बिलासपुर में प्रवेश ले लिया है।

इनके अन्य डॉक्टर जी टांडा मेडिकल कॉलेज छोड़कर एम्स, बिलासपुर में गए हैं, उनमें फिजियोलॉजिस्ट डॉ रूपाली, एंडोक्रिनोलॉजी में सुपर-स्पेशलिस्ट डॉ प्रियंदर सिंह ठाकुर, न्यूरो-फिजिशियन डॉ आशीष शर्मा और प्लास्टिक सर्जन डॉ नवनीत शामिल हैं। इनके अलावा प्रशासनिक अधिकारी डॉ विक्रांत कंवर भी एम्स में शामिल हो गए हैं। बाल रोग विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉ स्मृति गुप्ता ने भी टांडा मेडिकल कॉलेज छोड़ दिया है।

अफगानिस्तान में फंसे हिमाचल के नवीन को मिली फ्लाइट

मंडी।। अफगानिस्तान में फंसे मंडी जिले के सरकाघाट निवासी नवीन ठाकुर जल्द ही घर पहुंच जाएंगे। वह अफगानिस्तान से डेनमार्क के लिए आने वाली फ्लाइट में आ गए हैं। डेनमार्क पहुंचने के बाद सभी उन्हें स्वदेश पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

नवीन ठाकुर अफगानिस्तान में एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले कई दिनों से वह काबुल के एयरपोर्ट पर फंसे हुए थे। उनके परिजनों ने उन्हें सकुशल हिमाचल लाने के लिए सीएम जयराम ठाकुर से भी गुहार लगाई थी।

नवीन के अफगानिस्तान से वापस आने की बात सुनकर उनकी मां पदमा देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सुखद पल है। पिछले कई दिनों से उन्हें इसी बात की टेंशन थी कि नवीन सकुशल भारत लौट भी पाएगा या नहीं।

उनकी मां का कहना है कि वह लगातार भगवान से यही प्रार्थना कर रही थी कि किसी तरह से नवीन अफगानिस्तान से बाहर निकल जाए। उन्होंने कहा कि भगवान ने उनकी प्रार्थना सुन ली है। पिछले 3 दिनों से वह एयरपोर्ट के अंदर ही बैठे हुए थे और लगातार फ्लाइटों के निकलने में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

नवीन अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में डेनिस कंपनी में सुरक्षा अधिकारी थे, डेनमार्क की इस कंपनी ने अपने सभी कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए व्यवस्था की थी। अब जैसे ही वह डेनमार्क पहुंचेंगे वहां से इन्हें भारत भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

बता दें कि मंडी जिला के सरकाघाट उपमंडल के दो युवा अफगानिस्तान में छिड़े गृह युद्ध के दौरान वहां फंस गए हैं। ऐसे में उनके परिजनों ने राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है। नवीन ठाकुर अब डेनमार्क के लिए आने वाली फ्लाइट में अफगानिस्तान से आ रहे हैं, जबकि राहुल बुराड़ी पुत्र बलवंत बुराड़ी निवासी रोपा कालोनी सरकाघाट अभी भी अफगानिस्तान में ही फंसा हुआ हैं।

एक ओर राखी दूसरी तरफ खाकी, एक ओर करवाचौथ दूसरी तरफ हॉल्टीकल्चर की जॉब

नेरचौक। एक ओर राखी तो दूसरी तरफ खाकी। एक ओर करवाचौथ तो दूसरी ओर हॉल्टीकल्चर की जॉब। अब बहनें और बीवियां किसे चुनेंगी। यह कशमकश इसलिए है क्योंकि परीक्षाएं आयोजनकर्ता उस दिन तारीख और त्यौहार देखना भूल गए थे। अब इस वजह से सैकड़ों महिलाएं पसोपेश में हैं। इस वजह से परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों और परीक्षाओं के लिए बनाए गए सेंटरों में सेवाएं देने वाले अध्यापक-अध्यापिकाओं ने सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं।

दरअसल, प्रदेश में 22 अगस्त को रक्षाबंधन वाले दिन ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर तथा 24 अक्टूबर करवा चौथ वाले दिन हॉल्टीकलचर परीक्षा का आयोजन होना है। परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं एवं चिन्हित स्कूलों के अध्यापक-अध्यापिकाएं इन तिथियों के निर्धारण से असमंजस में हैं कि इन त्यौहारों के दिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथियां घोषित करना आयोजनकर्ताओं का क्या सही निर्णय है।

himachal traffic police test

22 अगस्त रक्षा बंधन वाले दिन ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर टेस्ट की तिथि वाले त्यौहार वाले दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा का पवित्र धागा कैसे बांधेगीं तथा 24 अक्टूबर को करवाचौथ वाले दिन हॉल्टीकलचर टेस्ट वाले दिन अपने पतियों की लंबी उम्र का कठिन व्रत कैसे रख कामना करेेंगी। वहीं जिन स्कूलों में सेंटर निश्चित किए गए हैं वहां भी विशेष रूप से महिला गुरुजन पसोपेश में हैं कि त्यौहार वाले दिन कैसेे मैनेज करेंगे।

सरकार की तरफ से रहती है छुट्टी

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा रक्षाबंधन तथा करवाचौथ त्योहार वाले दिन विशेषकर महिला कर्मियों के लिए विशेष रूप से अवकाश घोषित जाता है, ताकि उन्हें इन त्यौहारों को मनाने में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी का सामना न करना पड़े और हर्ष उल्लास एवं खुशी खुशी वे अपने परिवार संग इन त्यौहारों का आनंद उठा सकें, लेकिन आयोजकों द्वारा प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तिथियां इस प्रकार से घोषित करना लोगों की भावनाओं को समझने के बजाय ठेंगा दिखाता प्रतीत हो रही है।

क्लर्क भर्ती के लिए हिमाचल से बाहर बना दिया सेंटर

यही नहीं, हिमाचल प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक द्वारा क्लर्क भर्ती के लिए 25 अगस्त को ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन होना। है। इस ऑनलाइन परीक्षा में भी आयोजकों द्वारा बहुत ही विचित्र निर्णय लिया गया है। प्रदेश स्तरीय इस भर्ती के लिए आयोजित की जाने वाली ऑनलाइन परीक्षा के लिए प्रदेश से बाहर चंडीगढ़ में सेंटर बनाया गया है। यह निर्णय भी परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं की समझ से परे हो गया है।

छात्र छात्राओं का कहना है कि कोविड के दौर में इस प्रकार का निर्णय लेना उनकी सेहत से तो खिलवाड़ है ही साथ में ही उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक में क्लर्क भर्ती की परीक्षा का केंद्र चंडीगढ़ में बनाना बिल्कुल भी न्यायोचित नहीं है। बैंक की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं ने भी प्रदेश मुख्यमंत्री से चंडीगढ़ में चिंहित सेंटर को कैंसल कर प्रदेश में बनाए जाने की मांग की है।

परिवार पर बेटियों से देह व्यापार करवाने का आरोप

एमबीएम न्यूज़, सोलन।। हिमाचल प्रदेश में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। मामला सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल का है। जहां पैसों के लालच में माता-पिता अपनी ही बेटी से देह व्यापार करवा रहे थे। यही नहीं, इस शर्मनाक घटना में भाई-बहन का पवित्र रिश्ता भी शर्मशार हुआ है। इस कृत्य में माता-पिता के साथ पीड़िता के भाई भी शामिल पाए गए हैं।

इस शर्मनाक घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब अचानक युवती की हालत बिगड़ी। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने युवती को यमुनानगर में उसकी बुआ के घर छोड़ा और फरार हो गए। इस समय पीड़िता का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

महिला थाना पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है। जिसके बाद उसके मां-बाप, चाचा व दो भाइयों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी शिकायत में 20 वर्षीय युवती ने बताया कि वो अपने पिता, मां, चाचा, दो भाई के साथ हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ क्षेत्र में रहती थी।

पीड़िता ने इस बात का भी खुलासा किया कि उसकी दो बड़ी बहनें भी यही काम करती हैं। वहीं, आरोप है कि बेटी को देह व्यापार में धकेलने वाले पीड़िता के अलावा उसकी बुआ-फूफा को भी जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।

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पीड़िता का आरोप है कि उसके माता-पिता व भाईयों ने उस पर देह व्यापार करने का दबाव बनाया। उसे जबरन देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता था। इंकार करने पर उसे पीटा जाता था। डीएसपी नवदीप ने कहा कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

मंडी : डिपो होल्डर ने मृतकों को बांट दिया 1.18 लाख का राशन

मंडी।। जिले की बल्ह घाटी में एक राशन डिपो होल्डर द्वारा मृतकों को राशन बांटने का हैरतअंगेज मामला सामने आया है। डिपो होल्डर द्वारा 9 मृतकों के नाम पर 134 किलो आटा, चावल, दाल, तेल, चीनी व नमक आदि राशन बंटा हुआ दिखाया गया है। मृतकों के नाम पर राशन बंटा दिखाकर कुल 1 लाख 18 हज़ार 156 रुपये के गोलमाल का भंडाफोड़ हुआ है।

यहाँ रोचक बात ये है कि सालों से चल रहा यह गोलमाल विभाग के रूटीन निरीक्षण या फिर ऑडिट में नहीं पकड़ा गया है। एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा बार-बार शिकायत किये जाने के बाद जब जांच की गई, उसमें यह गोलमाल सामने आया है।

जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले लक्ष्मण सिंह कनेट के जारी पत्र में बताया कि स्थानीय निवासी हेम सिंह सकलानी ने 27 सितंबर 2020 व उसके बाद 17 फरवरी 2021 को इस संदर्भ में शिकायत की गई थी। गोपालपुर के निरीक्षक पंकज शर्मा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने शिकायत की जांच की।

उन्होंने बताया कि यह डिपो मनोरमा देवी के नाम पर है, जो गांव स्टोह कुम्मी में है। जांच में पाया गया कि 9 लोग जिनकी कुछ साल पहले मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम पर राशन बांटा दिखाया जाता रहा। जांच के बाद जिला नियंत्रक ने डिपो होल्डर को 1 हफ्ते में पूरी रकम सरकारी खजाने में जमा करने के आदेश दिए हैं।

यहां सवाल यह उठता है कि विभाग के अंदरूनी ऑडिट करने वाले या फिर अन्य स्तर पर होने वाले ऑडिट व निरीक्षण करने वाले क्या देखते हैं। इस तरह के गोलमाल विभाग के ऑडिट में क्यों सामने नहीं आते हैं। अगर यहाँ भी स्थानीय व्यक्ति हिम्मत करके बार-बार शिकायत करके जांच का दबाव नहीं बनाता तो शायद यह मामला भी उजागर नहीं हो पाता। सरकार को इस तरह की घपलेबाजी पर सख्त रवैया अपनाने की जरूरत है।

शिमला का हो सकता है अपना “मिनी रॉक गार्डन”

शिमला।। चंडीगढ़ की तरह शिमला का भी अपना एक “मिनी रॉक गार्डन” हो सकता है। चंडीगढ़ का रॉक गार्डन बनाने वाले महान मूर्तिकार नेक चंद के बेटे अनुज सैनी ने इस संबंध में नगर निगम शिमला को प्रस्ताव भेजा है। अगर अनुज का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो शिमला का अपना एक लघु रॉक गार्डन हो सकता है।

अनुज सैनी ने कहा, “मैं शिमला एमसी को रॉक गार्डन शैली में रिज और माल रोड के बीच एक छोटी सी जगह पर माल रोड पर लाइव स्क्रीन के पास मूर्तियों को प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भेज रहा हूं।” उन्होंने कहा कि हम इसे अच्छा लुक देने के लिए जगह की लैंडस्केपिंग भी करेंगे।

संयोग से नेकचंद ने करीब चार दशक पहले शिमला नगर निगम को कुछ मूर्तियां भेंट की थीं। इनमें से करीब 10 से 15 शिमला में अलग-अलग जगहों पर लगाई गई हैं। सालों से इन मूर्तियों के ढहने और टूटने के बाद, नगर निगम ने इन टुकड़ों को मरम्मत के लिए नेक चंद के बेटे अनुज सैनी के पास भेज दिया है। सैनी ने कहा, “मैं अगले दो महीनों में इन मूर्तियों की मरम्मत और उनके मूल आकार को बहाल कर दूंगा और उन्हें वापस नगर निगम शिमला को भेज दूंगा।”

सैनी चाहते हैं कि पहले के बजाय इन मूर्तियों को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में अच्छा होगा यदि ये सभी एक ही स्थान पर प्रदर्शित हों। जहां तक ​​सुरक्षा और रखरखाव का संबंध है, उन्हें विभिन्न स्थानों पर स्थापित करना आदर्श नहीं है।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत से लोग नहीं जानते थे कि ये नेक चंद द्वारा बनाए गए थे। यदि उन्हें एक साथ प्रदर्शित किया जाता है, तो हम उल्लेख कर सकते हैं कि इन्हें नेक चंद द्वारा तैयार किया गया था।”

इस बारे शिमला नगर निगम के कमिश्नर आशीष कोहली का कहना है कि यह सुनिश्चित नहीं है कि उन्हें इन सभी मूर्तियों को रिज या मॉल में एक ही स्थान पर प्रदर्शित करने के लिए जगह मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हमने अभी तक नहीं सोचा है कि इन्हें कहां रखा जाए। लेकिन हम इन्हें रिज और माल रोड के पार्कों में प्रमुख स्थानों पर रखेंगे।

हिमाचल में 30 अगस्त तक स्कूल बंद, आदेश तुरंत प्रभाव से लागू

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में 28 अगस्त तक स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है। शुक्रवार को इस सम्बंध में आदेश जारी हो गए हैं। 29 और 30 अगस्त को रविवार और जन्माष्टमी की छुट्टी होने के चलते हिमाचल प्रदेश में अब 30 अगस्त तक स्कूल बंद रहेंगें।

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। इससे पहले हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 22 अगस्त तक स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया था। लेकिन शुक्रवार को जारी नए आदेशों के तहत अब स्कूल 28 अगस्त तक बंद रहेंगे।

प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह की ओर से यह आदेश जारी किये गए हैं। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू माने जाएंगे। सरकारी अवकाश को छोड़कर शिक्षकों और गैर शिक्षकों को स्कूलों में नियमित तौर पर आना होगा। शिक्षक स्कूलों से ही विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाएंगे।

कैबिनेट बैठक में नई बंदिशों पर हो सकता है फैसला, सीएम ने दिए संकेत

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। इसी के चलते सरकार द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। सरकार ने पहले ही हिमाचल प्रदेश में एंट्री के नियम सख्त कर दिए हैं। वहीं मामलों में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

24 अगस्त को सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक भी बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए प्रदेश में पाबंदियां लगाने जैसे फैसले ले सकती है। वहीं सीएम जयराम ठाकुर ने भी इस बात के संकेत दिए हैं।

राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम ने कहा कि राज्य में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले चिंता का विषय है। राज्य के जनजातीय इलाके जहां न के बराबर मामले सामने आते थे, आज वहां भी तेजी से केस बढ़ रहे हैं। सीएम ने कहा कि सरकार परिस्थितियों पर नज़र बनाये हुए है। जो बंदिशें लगाई गई है उन्हें अभी नहीं हटाया जाएगा।

डेढ़ महीना पहले लगाई गई शहीद की गलत प्रतिमा अभी तक नहीं सुधरी

मंडी।। जिला एक्स सर्विस मैन लीग ने नेरचौक में स्यांह चौक पर 22 सालों बाद शहीद के नाम से लगाई गई गलत प्रतिमा के विरोध में अध्यक्ष कर्नल प्रताप सिंह की अध्यक्षता में डीसी मंडी अरिंदम चौधरी के माध्यम से प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।

कर्नल प्रताप सिंह ने बताया कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए सिपाही टेक सिंह की गलत तरीके से बनाई गई प्रतिमा लगाना बहुत ही अपमानजनक है। शहीदों का मान सम्मान करने के बजाय सरासर अपमान है। 7 डोगरा रेजिमेंट के सिपाही शहीद टेक सिंह को सेना की गलत ड्रेस के साथ स्थापित करना बेहद अपमानित करने वाली बात है, जिससे शहीद की पत्नी ही नहीं परिजनों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों व सैन्य परिवारों का भी अपमान है।

ज्ञापन सौंपते एक्स सर्विस मैन लीग के सदस्य

उन्होंने बताया कि शहीद की पत्नी व परिवार के साथ पूरा सैनिक समाज खड़ा है। स्थानीय भाजपा विधायक इंद्र सिंह गांधी को इस गलती को ठीक करना चाहिए था। मगर उन्होंने इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी दो बार ज्ञापन भेजे गए मगर कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई हैं।

जिला लीग इकाई के महासचिव कैप्टन हेतराम शर्मा ने बताया कि स्थानीय विधायक को शहीद की प्रतिमाएं लगाने से पहले सोल्जर बोर्ड व पूर्व सैनिकों को कॉन्फिडेंस में लेना चाहिए था। ताकि किसी प्रकार की गलती नहीं होती। शहीद की पत्नी वीना देवी ने बताया कि स्थानीय विधायक की ओर से डेढ़ माह का समय बीत जाने के बाद भी इस गलती पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाया गया है मगर अभी तक गलत प्रतिमा को नहीं हटाया गया है। जिस पर उन्हें व उनके परिवार सहित गांव के लोगों को भी कडा ऐतराज है।

पूर्व सैनिकों, शहीद की पत्नी, परिजनों व डिफेंस वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से शहीद की गलत तरीके से प्रतिमा लगाने पर कड़ा संज्ञानयद लेते हुए जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि शहीदों व उनके परिवारों को किसी भी तरह का अपमान न सहना पड़े।