संवैधानिक मर्यादा भूल राष्ट्रपति के सामने ‘राजनीति’ कर गए अग्निहोत्री

शिमला | राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद चार दिवसीय हिमाचल दौरे पर हैं। इस दौरान उनके संबोधन के लिए हिमाचल विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। यह हिमाचल के इतिहास में तीसरा मौका था जब राष्ट्रपति द्वारा हिमाचल विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया गया।

इससे पहले 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी हिमाचल विधानसभा को संबोधित कर चुके हैं। हिमाचल अपने गठन को स्वर्णिम वर्ष के रूप में मना रहा है। इसी के उपल्क्षय पर इस विशेष सत्र का आयोजन किया गया था। इस विशेष सेशन में पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक भी शामिल हुए, लेकिन विधानसभा के इस सत्र को नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संबोधन के दौरान एक राजनीतिक मंच बना दिया।

कलाम और मुखर्जी के विशेष सत्र की बातें

इस तरह से जब भी विधानसभा के विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं तो उनकी एक गरिमा रहती है। यह आम विधानसभा सत्र की तरह नहीं होता। इसमें राष्ट्रपति संबंधित प्रदेश की जनता के लिए कुछ रोड मैप बताते हैं। मसलन, 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने अपने संबोधन में हिमाचल को आगे बढ़ने के लिए 9 मिशन बताए थे। 2013 में प्रणब मुखर्जी ने चार ‘डी’ पर बात की थी।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (बाएं) व प्रणब मुखर्जी (दाएं)

प्रणब मुखर्जी ने एक विधानसभा की भूमिका और कार्यों को तीन डी यानी डिबेट (बहस), डिसेंट (असहमति) और डिसीज़न (निर्णय) के रूप में वर्णित किया। उन्होंने चौथा ‘डी’ यानी डिसर्प्शन (व्यवधान) को बताया था और उससे बचने के लिए कहा था। ऐस विशेष सत्र में इसी तरह विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अपने संबोधन में एक पॉलिटिकल और राजनीतिक चाल चलन पर बात होती है, लेकिन मुकेश अग्निहोत्री ने इसके उल्ट विशेष सत्र को रैली में तबदील कर दिया।

नेता विपक्ष होने पर भी संवैधानिक ढांचे की समझ कम

मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में पहले तो हिमाचल के गठन को लेकर बात कही, लेकिन फिर वो एकाएक हिमाचल रेजिमेंट, सेब के आयात शुल्क जैसे मुद्दों पर आ गए। राजनीति और संवैधानिक ढांचे पर सामान्य सी समझ रखने वाला नागरिक भी यह जानता है कि यह मुद्दे राष्ट्रपति के स्तर पर नहीं सुलझाए जाते और विशेष तौर पर किसी विधानसभा के स्पेशल सेशन में तो हरगीज इस पर बात नहीं होती। यह सरकारी कार्यक्रम का मंच नहीं था जहां केंद्र से कोई बड़ा मंत्री उद्घाटन करने आया हो और उस कार्यक्रम में मंत्री के संबोधन से पहले आप विपक्षी नेता के तौर पर अपना डिमांड चार्टर या मुद्दे गिनवाने लगें।

मुकेश अग्निहोत्री ( फाइल फोटो )

यह विधानसभ का विशेष सत्र था। अब सवाल यह आता है कि आखिर मुकेश अग्निहोत्री महामहिम राष्ट्रपति के लिए आयोजित हुए विशेष सत्र को भी राजनीतिक मंच क्यों बना गए। दरअसल, हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद कांग्रेस के नेताओं में वर्चस्व की एक जंग सी छिड़ी है।

बजट सत्र में ऐसी ही मर्यादाओं का लांघ गए थे मुकेश अग्निहोत्री

वीरभद्र सिंह ने अपने रहते ही मुकेश अग्निहोत्री को विपक्ष का नेता बनवाया था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में हिमाचल में कांग्रेस चारों खाने चित हुई। कांग्रेस हिमाचल में एक भी सीट नहीं जीत पाई। बीजेपी ने हिमाचल में देश भर में सबसे ज्यादा रिकॉर्ड मार्जिन से सीटें जीतीं। कुछ सीटों में तो जीत का अंतर ही चार लाख के पार चला गया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों के भीतर मुकेश को हटाने के स्वर उठने लगे। काफी दौर चला और यह दौर आज भी चल ही रहा है।

बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण के बाद हुई धक्का मुक्की के दौरान (फाइल फोटो)

अब चूंकि कांग्रेसी कुनबे के सबसे बड़े नेता वीरभद्र सिंह का निधन हो चुका है तो हर नेता अपने आप को साबित करने में लगा है। इसका उदाहरण इस वर्ष बजट सत्र के दौरान कांग्रेसी विधायकों द्वारा किया गया हंगामा था, जिसमें तत्कालीन राज्यपाल के साथ दुर्व्यवहार तक हुआ।

पहले दो विशेष सत्र में नहीं हुआ था नेता विपक्ष का संबोधन

मुकेश अग्निहोत्री खुद को साबित करने के लिए और अपने आप को भावी नेता प्रोजेक्ट करने के लिए इतने उग्र हैं कि वो मंच की मर्यादा लगातार भूल रहे हैं। राष्ट्रपति के विधानसभा सत्र संबोधन का कार्यक्रम हो या कोई अन्य जगहें वो इसी तरह से व्यवहार करते आ रहे हैं।

जीएस बाली, सुक्खू, कौल सिंह, हर्षवर्धन के बीच गुटों बंटी कांग्रेस में मुकेश खुद को स्थापित करने के लिए इतने उतारू हैं कि अब उन्हें मंच की भी परवाह नहीं। जबकि एक रोचक तथ्य यह है कि ना तो 2004 में और ना ही 2013 के विशेष सत्र में राष्ट्रपति के सामने नेता विपक्ष का संबोधन हुआ था।

विशेष मौके पर मुकेश ने व्यर्थ कर दी अपनी ‘अग्नि’

इसके उल्ट इस बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार ने राष्ट्रपति के सामने नेता विपक्ष को भी बोलने का स्थान दिया। लेकिन वीरभद्र सिंह के बाद कांग्रेस के शेष नेताओं के बीच खुद को इक्कीस साबित करने के लिए मुकेश इसे सियासी मंच समझ बैठे। यदि मुकेश अग्निहोत्री को खुद को साबित करना ही था तो अपने संबोधन में राजनीतिक चाल-चलन समेत और भी बातें थी जिन्हें कहकर वो जनता को अपना कायल बना सकते थे।

हिमाचल हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे मोहम्मद रफीक

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। मोहम्मद रफीक हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायधीश होंगे। इससे पहले वह मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य न्यायधीश के पद पर सेवाएं दे रहे थे। वहीं, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायधीश आर मलिमथ को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया है।

बता दें मोहम्मद रफीक राजस्थान के मूल निवासी हैं। 25 मई, 1960 को जन्मे मोहम्मद रफीक ने जयपुर यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई की। 24 साल की आयु में राजस्थान हाई कोर्ट से वकालत शुरू की। उसके बाद 15 मई 2006 को वह राजस्थान हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुए।

मोहम्मद रफीक दो बार अलग-अलग समय पर राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश रहे हैं। 13 नवंबर 2019 को वह मेघालय हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बनें। इसके चार महीने बाद ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस मोहम्मद रफीक कोअहम जिम्मेदारी देते हुए ओडिशा हाईकोर्ट में तबादले की सिफारिश की।

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मोहम्मद रफीक अप्रैल 2020 में ओडिशा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे। वह ओडिशा हाई कोर्ट के 31वें चीफ जस्टिस थे। इसके बाद जनवरी 2021 को उन्होंने मध्य प्रदेश के 26वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली थी। अब उन्हें स्थानांतरित कर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

शादीशुदा व्यक्ति से करवा दी नाबालिग बच्ची की शादी, चाइल्डलाइन ने किया रेस्क्यू

बिलासपुर।। बाल विवाह एक कुप्रथा और कानूनी अपराध है। इसके बावजूद भी प्रदेश में बाल विवाह के मामले देखने को मिल ही जाते हैं। हाल ही में बिलासपुर जिले से बाल विवाह का मामला सामने आया है। चाइल्डलाइन की टीम ने बच्ची को रेस्क्यू कर लिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर जिले के विकासखंड झंडुत्ता के अंतर्गत आने वाले एक गांव में नाबालिग बच्ची की शादी करवाने की सूचना चाइल्डलाइन को मिली। चाइल्डलाइन को बताया गया कि नाबालिग बच्ची की शादी करवाई गई है। युवक बालिग है और पहले से शादीशुदा भी है।

मामले की सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन की टीम ने तुरंत ग्राम पंचायत और स्थानीय पुलिस की मदद से बच्ची को रेस्कयू किया कर आगामी कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति बिलासपुर को सौंप दिया है।

चाइल्डलाइन जिला बिलासपुर समन्वयक रविंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए स्थानीय समुदाय का सहयोग एवं भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को अपने आसपास ऐसा कोई मामला मिलता है, जिसमें बाल विवाह, बाल मजदूरी, बाल तस्करी, मारपीट, गुमशुदा, घर से भागे हुए बच्चे व ऐसे बच्चे जिन्हें मेडिकल व देखरेख की आवश्यकता है, तो चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर 1098 के माध्यम से इसकी जानकारी दी जा सकती है।

उन्होंने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन 24 घंटे सातों दिन निशुल्क सेवा है। इसमें 0 से 18 वर्ष के बच्चों से जुड़ी समस्याएं बताई जा सकती है।

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को दो किश्तों में लेनी होगी ट्यूशन फीस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को ट्यूशन फीस दो किश्तों में लेनी होगी। यूनिवर्सिटी प्रबंधन एक किश्त में ट्यूशन फीस देने का दबाव नहीं बना सकेंगे। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में मेडिकल कोर्सों के लिए फीस निर्धारित कर दी गई है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से प्रताव प्राप्त हुए थे, जिन पर कई दिन तक विचार करने के बाद गुरुवार को उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव ने फीस का ढांचा जारी कर दिया है।

इसमें स्पष्ट किया है कि कोर्स पूरा होने फीस में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कोर्स पूरा होने तक नया फीस ढांचा ही लागू रहेगा। इसमें यह भी साफ किया गया है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पहले की तरह बिल्डिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट फंड विद्यार्थियों से नहीं वसूलेंगे। अगर किसी संस्थान द्वारा इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।

सरकार को हर साल नया सत्र शुरू होने से पहले फीस ढांचा तय करना होता है। नए फीस ढांचे के अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटीज सरकार की मंजूरी के बिना कोई भी नया कोर्स शुरू नहीं कर सकेंगीं। वहीं, अगर कोई ऐसा कोर्स है जिसे सरकार की मंजूरी नहीं मिली है और फीस कमेटी ने उसका फीस ढांचा तय कर दिया है तो ऐसा कोर्स मान्य नहीं होगा।

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को यूजीसी के निर्देशानुसार ही शिक्षक भर्ती करनी पड़ेगी। वहीं, विद्यार्थियों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी देनी होंगी। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी को हिमाचली बोनाफाइड, बीपीएल, आईआरडीपी विद्यार्थियों के लिए दस फीसदी सीटें आरक्षित रखनी होंगी। साथ ही इनसे ट्यूशन फीस भी नहीं ली जाएगी। वहीं, जो विद्यार्थी पहले से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, उन पर नया फीस ढांचा लागू नहीं होगा।

इन यूनिवर्सिटीज के लिए तय हुआ फीस ढांचा

नया फीस ढांचा एपी गोयल यूनिवर्सिटी, महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी, महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी, अभिलाषी यूनिवर्सिटी, श्री साईं यूनिवर्सिटी, शूलिनी यूनिवर्सिटी ऑफ बायो टेक्नालॉजी और मैनेजमेंट स्टडी, अरनी यूनिवर्सिटी, बद्दी यूनिवर्सिटी ऑफ इमर्जिंग साइंस एंड टेक्नालॉजी, बाहरा यूनिवर्सिटी, आईईसी यूनिवर्सिटी, कैरियर प्वाइंट यूनिवर्सिटी, इंडस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, चितकारा यूनिवर्सिटी, आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी और इटरनल यूनिवर्सिटी के लिए तय किया गया है।

जड़ी-बूटियाँ इकट्ठा करने की अनुमति न मिलने से आदिवासी परेशान

कांगड़ा।। कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल और छोटा भंगाल क्षेत्रों के आदिवासी परेशान हैं, क्योंकि वन अधिकारी उन्हें आसपास के जंगलों में जड़ी-बूटियों की कटाई की अनुमति नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार सदियों से जंगलों से जड़ी-बूटियां इकट्ठा करते रहे हैं। वन अधिकार अधिनियम उन्हें वन उपज इकट्ठा करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

उनका यह भी आरोप है कि वन विभाग द्वारा उन्हें कानूनी रूप से जड़ी-बूटियाँ इकट्ठा करने की अनुमति देने में विफलता के कारण जड़ी-बूटियों का अवैध व्यापार हो रहा है।

बड़ा भंगाल क्षेत्र निवासी पवना का कहना है कि वन अधिकारी आदिवासियों को जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करके खुले बाजारों में ले जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। जिस कारण बड़ा और छोटा भंगाल के निवासी अवैध रूप से वन क्षेत्रों से इकट्ठा की गई जड़ी-बूटियों को व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

आदिवासियों के वन अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक कार्यकर्ता अक्षय जसरोटिया का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम के अनुसार, आदिवासियों को जानवरों को चराने और वन उपज एकत्र करने का अधिकार है। वन अधिकार अधिनियम को लागू करने के लिए कांगड़ा में गठित जिला स्तरीय समिति ने भी आदिवासियों के जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करने और बेचने के अधिकारों का समर्थन किया है।

अधिनियम के तहत, पंचायतों को अपने निवासियों को वन और अभ्यारण्य क्षेत्रों से जड़ी-बूटियाँ एकत्र करने के लिए परमिट जारी करने का अधिकार है। हालांकि, वन रक्षकों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों सहित क्षेत्र स्तर के वन अधिकारी अभी भी स्थानीय लोगों को वन क्षेत्रों से जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करने और बेचने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि इससे जड़ी-बूटियों का अवैध कारोबार हो रहा है।

धर्मशाला के डीएफओ संजीव शर्मा का कहना है कि वन या अभ्यारण्य क्षेत्रों से जड़ी-बूटियों के संग्रह को विनियमित किया गया है। वन विभाग जड़ी-बूटियों के अति-निष्कर्षण से बचने के लिए हर चार साल में केवल एक बार वन क्षेत्रों से जड़ी-बूटियों के निष्कर्षण की अनुमति देता है।

उनका कहना है कि वन क्षेत्रों से जड़ी-बूटियां निकालने के लिए व्यापारियों को वन विभाग में पंजीकरण कराना होगा। उन्हें जड़ी-बूटी निकालने के लिए वन विभाग से एक्सपोर्ट परमिट लेना होगा। पंचायतों के अपने आसपास के जंगलों से जड़ी-बूटी निकालने की अनुमति देने के अधिकार के बारे में डीएफओ का कहना है कि पहले पंचायतों को कुछ जड़ी-बूटियों के निष्कर्षण के लिए परमिट देने की इजाजत थी। हालाँकि, अब उन अधिकारों को वापस ले लिया गया है और वन विभाग से परमिट प्राप्त करना होगा।

कुछ जड़ी-बूटियाँ जिनका औषधीय महत्व है जैसे तेजपत्ता, काला ज़रा, रतनजोत, कशमल और मीठा तेलिया आमतौर पर हिमाचल के जंगली इलाकों में पाई जाती हैं। हालांकि, दवा कंपनियों द्वारा अत्यधिक दोहन को देखते हुए ऐसी 55 जड़ी-बूटियां विलुप्त होने के कगार पर हैं।

हालांकि, आदिवासियों का आरोप है कि वे सदियों से जंगलों से जड़ी-बूटियां ले रहे हैं और उनका कभी भी अधिक दोहन नहीं किया। इसके बजाय, व्यावसायिक हितों वाले वन ठेकेदार जंगलों से जड़ी-बूटियाँ निकाल रहे हैं।

कांग्रेस सरकार जाते-जाते भी कर गईं घोषणाएं: सीएम

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज सोलन जिले के लोगों को करोड़ों की सौगातें दी। मुख्यमंत्री ने सोलन में 110 करोड़ की विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन किए।

मुख्यमंत्री ने सोलन में बनने वाले क्षेत्रीय अस्पताल के नए भवन की अधारशिला रखी। इसके अलावा सोलन में ब्लॉक एजुकेशन का ऑफिस, अटल आदर्श विद्यालय खोलने व चायल में बिजली बोर्ड का सब डिविजिन खोलने समेत अन्य कई घोषणाएं की।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोलन बस स्टैंड पर एक जनसभा को भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझसे पहले प्रदेश में पांच मुख्यमंत्री और रहे और उन्हें सामान्य परिस्थितियों में काम करने का मौका मिला, लेकिन जब मैं सीएम बना तो शायद भगवान ने भी मेरी परीक्षा लेनी थी और साढ़े तीन साल के कार्यकाल में से भी दो वर्ष कोविड-19 के दौर से गुजरे। इस दौरान जो काम करने का मौका हमें मिला वो उन्हें (पूर्व मुख्यमंत्रियों को) नहीं मिला।

विपक्ष से भी मांगना पड़ेगा हिसाब

विपक्ष पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हमारे कुछ मित्र हमसे हिसाब पूछते हैं तो हमें भी उनसे हिसाब पूछना पड़ेगा। आप 30 वर्ष से ज्यादा समय तक सत्ता में रहे आप हमको बताइए कि आपने कितने अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए?

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले प्रदेश के केवल दो बड़े अस्पतालों टांडा और आईजीएसी में ही ऑक्सीजन प्लांट थे। हमने अपने कार्यकाल में 15 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट फंक्शनल कर दिए और इस महीने के अंत तक इनकी संख्या 28 हो जाएगी।

कोविड-19 मैनेजमेंट में हिमाचल ने बेहतर काम किया

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “कोविड-19 मैनेजमेंट में हिमाचल ने बेहतर काम किया है। कोरोना काल में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो ऑक्सीजन मिली, वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी तो वेंटिलेटर मिला, बेड की जरूरत पर बेड मिले।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोलन के साथ अन्य राज्यों पंजाब और हरियाणा की सीमाएं भी लगती हैं। कोरोना काल में इन सीमाओं के साथ लगते अस्पतालों में बाहरी राज्यों के लोग अपना इलाज करने के लिए पहुंचे क्योंकि हिमाचल में बेड पर्याप्त संख्या में उपलब्ध थे। हमने कहा नागरिक कहीं का भी हो अगर हिमाचल आया है तो हम उसका इलाज करेंगे।

कांग्रेस के पास 30 साल तक थी सत्ता, वेंटिलेटर भी 30-32

कोरोना काल के समय पैदा हुई परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कोरोना काल में हिमाचल के पास केवल 50 वेंटिलेटर ही थे, जिसमें से केवल 30-32 ही उपयोग लायक थे। विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली पार्टी के कार्यकाल के समय केवल 30-32 वेंटिलेटर ही काम के थे। इसे लेकर हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखा और 15 दिन के भीतर 500 वेंटिलेटर हिमाचल को मिले। आज हिमाचल में 850 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं।

लॉकडाउन में अन्य राज्यों में फंसे हिमाचलियों को घर पहुंचाया

मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों में फंसे हिमाचलियों को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए। राजस्थान के कोटा में पढ़ने बच्चों को वहां से अपने घर सुरक्षित पहुंचाने के लिए एचआरटीसी की 8 बसें भेजी गई। इसके अलावा गोवा में काम करने गए हजारों युवाओं को वहां से लाने के लिए पांच स्पेशल ट्रेनों को चलाया गया और एचआरटीसी की बसों से उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाया गया। पूरे देश भर से मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों से ढाई लाख लोगों हिमाचल लाया गया।

विपक्ष ने कोरोना और वैक्सीनेशन पर भी की राजनीति

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके नेता विधानसभा के अंदर व बाहर दोनों जगह शोर करते हैं, यह उनका अधिकार है, लेकिन कोरोना जैसी महामारी पर राजनीति तो मत करिए। यहां तक कि विपक्ष के मित्रों ने वैक्सीनेशन पर भी राजनीति करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमारी सरकार ने बड़ा भंगाल जैसे दूर-दराज क्षेत्र, जहां पहुंचने के लिए 6 दिन लगते हैं, वहां पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से वैक्सीन पहुंचाई गई। शिमला जिले के डोडरा क्वार और कुल्लू के मलाणा में वैक्सीनेशन अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज में हिमाचल पूरे देश में पहले स्थान पर रहा और अब दूसरी डोज में भी हिमाचल पहले स्थान पर ही रहेगा। अभी तक प्रदेश 38 फीसदी आबादी को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने विरोधियों को घेरते हुए कहा कि हमारे मित्र महंगाई को लेकर आक्रोश रैलियां कर रहे हैं। महंगाई और किसान की बात करते हैं, क्या उनके कार्यकाल में महंगाई खत्म हो गई थी? हमारी सरकार तो किसानों को सम्मान निधि से 6 हजार उनके खाते में डाल रही है।

कांग्रेस ने की सतही घोषणाएं

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने कई सतही घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते प्रदेश में 60 डिग्री कॉलेज खोल दिए, वह भी तब जब उनकी विदाई की शहनाई बज गई थी।”

उन्होंने कहा कि आज देश में कांग्रेस की ऐसी स्थिति है कि एक कोने से दूसरे कोने तक कांग्रेस कहीं देखने को नहीं मिलती। उन्होंने कहा, “जब मैं दिल्ली जाता हूं तो भी वो बोलते हैं, दिल्ली से आता हूं तो भी बोलते हैं, मानो मुझे उनसे परमिशन लेनी पड़ती हो।”

2022 में भाजपा फिर से आएगी सत्ता में

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एलान किया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा फिर से सत्ता में आएगी। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावी नतीजे की याद दिलाते हुए कांग्रेस अवगत करवाया कि भाजपा ने सभी 68 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी। उन्होंने जनता से 2022 के विधानसभा चुनाव में चट्टान की तरह साथ रहने की अपील की।

देश में सबसे पहले कोरोना को हराने की ओर हिमाचल प्रदेश

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। हिमाचल के मजबूत स्वास्थ्य ढांचे, स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयास और सरकार की मेहनत के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। हिमाचल देश में सबसे पहले कोरोना के खिलाफ जंग जीतने की ओर बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीरो सर्वे के मुताबिक, हिमाचल में इस समय छह जिलों के 85 फीसदी लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज़ बन चुकी है। एंटीबॉडीज़ बनने का साधारण शब्दों में अर्थ है- कोरोना के खिलाफ लड़ने की क्षमता विकसित होना।

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में सीरो सर्वे करवाया गया था। यह सर्वे पहली सितंबर से 14 सितंबर तक चला था। अब तक आए छह जिलों के आंकड़ों से साफ हुआ है कि यहां के क़रीब 85 फीसदी लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज़ तैयार हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि बाकी जिलों के नतीजे भी इससे अलग नहीं होंगे।

हिमाचल देश भर में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर नंबर एक पर चल रहा है। हाल ही में हिमाचल ने सभी वयस्कों को पहली डोज लगाने का लक्ष्य हासिल किया था और 38% पात्रों को सेकंड डोज भी लगाई जा चुकी है। सीरो सर्वे से सकारात्मक नतीजों का श्रेय हिमाचल प्रदेश में चल रहे प्रभावी वैक्सीनेशन अभियान को भी दिया जा रहा है।

कांगड़ा और शिमला के नतीजे शामिल

सीरो सर्वे में किसी खास व्यक्ति को चुनकर सैंपलिंग नहीं की गई थी। इसमें रैंडम सैंपलिंग अभियान चलाया गया था। इसी सीरो सर्वे में जिन जिलों के आंकड़े सामने आए हैं उनमें कांगड़ा, चंबा, बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू और शिमला शामिल हैं।

अभी बाकी जिलों से सैंपलिंग की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन ये आंकड़े इसलिए भी राहत दे रहे हैं क्योंकि अब तक जिन जिलों से रिपोर्ट सामने आई है, उनमें प्रदेश का सबसे बड़ा जिला कांगड़ा शामिल है। इसके अलावा तीसरे बड़े जिला शिमला की रिपोर्ट भी इसमें शामिल है।

12 जिलों से लिए गए 4800 सैंपल

लोगों में एंटी बॉडी का पता लगाने के लिए स्पेशल अभियान में अलीसा टेस्ट किए गए हैं। पहली सितंबर से 14 सितंबर तक चले अभियान में करीब 4800 लोगों के सैंपल लिए गए। इन सैंपल में से आधे जिलों की रिपोर्ट आ चुकी है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद हिमाचल इसे राष्ट्रीय संस्था आईसीएमआर को भेजेगा। अब स्वास्थ्य विभाग मंडी सोलन, किन्नौर, लाहौल स्पीति, सिरमौर और ऊना जिला की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

अब गोविंद सागर झील में भी होंगी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियाँ

ऊना।। ऊना जिले के बंगाणा उपमंडल के तहत गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियाँ शुरू करने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। इसके लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग सयुंक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में यहाँ साहसिक खेलों के क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स के ट्रायल शुरू किए गए हैं।

ट्रायल की शुरुआत करते हुए स्थानीय विधायक और प्रदेश के कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने सबसे पहले खुद मोटर बोट की सवारी की। इसके बाद अन्य ट्रायल आयोजित किये गए। गोविंद सागर झील में पैडल बोटिंग, वाटर स्कूटर और स्कीइंग जैसे खेलों के ट्रायल किए गए। यहाँ पर वाटर स्पोर्ट्स को तकनीकी कमेटी की हरी झंडी मिल चुकी है। जिसके बाद अब साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

गोविंद सागर झील में गुरुवार को वाटर स्पोर्ट्स का ट्रायल आयोजित किया गया। गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स का यह पहला ट्रायल था। हालांकि, यहाँ पर पहले पैराग्लाइडिंग का सफल ट्रायल किया जा चुका है।

इस मौके पर कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि जब वह कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने थे, उसके बाद से ही उनका लक्ष्य रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में साहसिक खेलों को स्थापित किया जाए। इस दिशा में समय-समय पर प्रयास किये जाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहां पैराग्लाइडिंग का सफल ट्रायल हो चुका है और अब वाटर स्पोर्ट्स को स्थापित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाटर स्पोर्ट्स का भी सफल ट्रायल हुआ है। अब विधानसभा क्षेत्र में विधिवत तरीके से वाटर स्पोर्ट्स को स्थापित किया जाएगा।

धूमल के खिलाफ मानहानि का मामला होगा वापस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला अब वापस होगा। हिमाचल हाई कोर्ट ने यह मामला वापस लेने की अनुमति दे दी है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की ओर से दायर किया गया था।

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की अदालत के समक्ष मामले पर सुनवाई हुई। वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह की स्टेटमेंट के बाद हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत से मामला वापस लेने की अनुमति दे दी है।

बता दें कि वीरभद्र सिंह की ओर से प्रेम कुमार धूमल और अरुण जेटली के खिलाफ अपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवाया गया था। लेकिन 27 मई 2014 को उन्होंने अरुण जेटली के खिलाफ यह मामला वापस ले लिया था। 26 सितंबर 2014 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला ने इस मामले में गवाहों के प्रारंभिक बयान दर्ज करवाए थे। उसके बाद प्रतिवादियों को तलब किया गया था।

प्रेम कुमार धूमल और अन्य ने उनके खिलाफ दायर इस आपराधिक मानहानि मामले में निचली अदालत की ओर से जारी समनिंग आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने धूमल के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले की सुनवाई पर रोक लगाई थी।

राष्ट्रपति आज पहुंचेंगे शिमला, चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा

शिमला।। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के चार दिवसीय दौरे के लिए शिमला शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस, सीआईडी ​​और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारियों को सभी संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। शिमला को नो फ्लाई जोन बनाया गया है। वाहनों की आवाजाही पर पैनी नज़र है। राष्ट्रपति 16 सितंबर को दोपहर 12 बजे शिमला के अनाडेल मैदान में सेना के हेलीकॉप्टर से उतरेंगे। इसलिए अन्नाडेल मैदान में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

अन्नाडेल से ओबरॉय सिसिल तक हर कुछ मीटर पर वर्दी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। ओबेरॉय सेसिल में एसपीजी कर्मियों को तैनात किया गया है और होटल के 43 कमरे खाली करवा दिए गए हैं। इस होटल में केवल राष्ट्रपति, उनके संबंधी और उनका स्टाफ ठहरेगा।

यह रहेगा राष्ट्रपति का शेड्यूल

16 सितंबर दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति शिमला पहुंचेंगे। 17 सितंबर को 11 बजे से 12 बजे के बीच राज्य की स्वर्ण जयंती के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करेंगे। उसके बाद 18 सितंबर को भारतीय लेखा परीक्षा अकादमी में प्रशिक्षु अधिकारियों के विदाई समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 19 सितंबर को शिमला से वापस नई दिल्ली लौटेंगे।

विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होने वालों के पास कोरोना आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट होना जरूरी है। बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष परमार के अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राधारमण शास्त्री, मंत्रियों, विधायकों, पूर्व मंत्रियोें, पूर्व विधायकों, विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों ने भी टेस्ट करवाए हैं।

डीसी आदित्य नेगी ने कहा राष्ट्रपति के शिमला दौरे के चलते कैनेडी चौक से बालूगंज सड़क वाया चौड़ा मैदान सभी तरह के वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दी गई है। राष्ट्रपति के ओबरॉय सिसिल होटल में ठहरने के चलते सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस सड़क को बंद रखा जाएगा।