IGMC शिमला की जगह अब मंडी में लगेगा PSA प्लांट

शिमला।। हिमाचल में पीएम केयर फंड के तहत लगने वाला पीएसए यानी प्रेशर स्विंग एड्जॉर्पशन प्लांट अब आईजीएमसी शिमला की जगह मंडी में लगेगा। आईजीएमसी परिसर में चयनित जगह पर न पहुंच पाने के कारण अब यह प्लांट मंडी शिफ्ट किया जाएगा।

सरकार ने यह प्लांट मंडी शिफ्ट करने का फैसला किया है। जिसकी पुष्टि आईजीएमसी प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह ने की है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन की समस्या देखने को मिली थी। जिसे देखते हुए आईजीएमसी शिमला के लिए अतिरिक्त प्लांट स्वीकृत किया गया था।

जिला प्रशासन, डीआरडीओ और टाटा द्वारा अस्पताल परिसर में जगह का चयन कर यह प्लांट स्थापित किया जाना था। लेकिन जब यह प्लांट अस्पताल पहुंचा तो मेडिकल कॉलेज से अस्पताल परिसर लाना मुश्किल हो गया है। जिसे देखते हुए अब इस प्लांट को मंडी शिफ्ट करने के लिए कहा गया है।

सूत्रों के हवाले से यह जानकारी भी निकलकर सामने आ रही है कि जब अस्पताल में यह प्लांट लगाया जाना था। उस समय इसमें अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी भी तकनीकी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया। जिस वजह से अधिकारी नहीं समझ पाए कि यहां पर प्लांट कैसे लाया जाएगा। यही कारण है कि अब यह प्लांट दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है।

हिमाचल: स्वास्थ्य विभाग में तबादलों पर फिर लगी रोक

शिमला।। प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सरकार ने भी कोरोना से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार की ओर से एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही डॉक्टरों, नर्सों की प्रतिनियुक्तियां भी रद्द कर दी गई हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को निर्देश भी जारी हो चुके हैं।

मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने सभी जिला उपायुक्तों, मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों, सीएमओ को कोरोना महामारी के प्रति सतर्क रहने के निर्देश भी दिए हैं। हाल ही में इस संबंध में एक बैठक भी हुई है। जिसमें मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सचिव से कोरोना पर फीडबैक भी लिया गया है।

स्वास्थ्य सचिव की ओर से बताया गया है कि इस समय प्रदेश में 11 हज़ार ऑक्सीजन युक्त बिस्तर तैयार कर लिए हैं। इनमें से 1080 आईसीयू बिस्तर शामिल हैं। वहीं, कोरोना वार्ड में ऑक्सीजन लगाने और उतारने के लिए 1400 स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

अक्तूबर व नवंबर में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका है। तीसरी लहर में 60,000 लोगों के संक्रमित होने का अंदेशा है। इसको लेकर तैयारियां रखने को कहा गया है।

स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि हिमाचल में तरह-तरह के वैरिएंट आ गए हैं। प्रदेश में 18 साल से ऊपर की उम्र के लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग गई है।

IAS अधिकारियों को 11 फीसदी डीए, लाखों कर्मचारियों को झटका

शिमला।। आईएएस और भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अन्य अधिकारियों को 11 फीसदी डीए मिलेगा। हिमाचल सरकार ने बुधवार को केंद्रीय निर्देश पर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इससे प्रदेश के करीब पौने तीन लाख कर्मचारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि कुछ दिन पहले ही प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को छह फीसदी डीए देने की अधिसूचना जारी की है।

बता दें कि सीएम जयराम ठाकुर ने 15 अगस्त प्रदेश के कर्मचारियों को छह फीसदी डीए देने की घोषणा की थी। कुछ दिन पहले इसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। हालांकि कर्मचारियों को उम्मीद दी कि जेसीसी की बैठक में 11 फीसदी डीए बहाली पर फैसला होगा, लेकिन इसे भी आगे टाल दिया गया।

वहीं, बुधवार को भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों को डीए देने की अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत डीए की दर 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दी गई है। डीए यह एक जुलाई से देय होगा। एक जुलाई से लेकर 31 अगस्त तक का एरियर कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में जमा किया जाएगा।

दरअसल, मोदी सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते को एक जुलाई 2021 से बढ़ाकर 28 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक जुलाई से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए डीए में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जिससे केंद्र सरकार के 48 लाख से अधिक कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को फायदा हुआ था। अब केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अब डीए की नई दर 17 फीसदी से बढ़कर 28 फीसदी हो गई है।

यही कारण है कि प्रदेश सरकार के कर्मचारी भी 11 फीसदी डीए बहाली की मांग कर रहे हैं। बीते दिनों हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर भी कर्मचारियों को 11 फीसदी डीए बहाल करने की मांग उठा चुके है।

जलशक्ति विभाग ने 35 पंप ऑपरेटर किए बर्खास्त

शिमला।। जलशक्ति विभाग ने 35 पंप ऑपरेटरों को नौकरी से बर्खास्त कर बड़ा झटका दिया है। ये सभी करीब ढाई साल से नौकरी कर रहे थे, लेकिन जलशक्ति विभाग ने अब इन्हें बर्खास्त कर दिया है। नौकरी से निकालने से पहले विभाग ने इन सभी पंप ऑपरेटरों को 15 दिन का नोटिस देने का निर्णय भी लिया है।

जलशक्ति विभाग ने यह कार्रवाई प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की संशोधित मेरिट लिस्ट और हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले के बाद की है। ये सभी पंप ऑपरेटर प्रदेश सरकार की तीन साल के सेवाकाल के बाद नियमितीकरण की शर्त को पूरा करने जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही विभाग ने इन्हें बर्खास्त कर दिया।

बता दें कि अक्तूबर 2016 में प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने जलशक्ति विभाग में जूनियर टेक्नीशियन और पंप ऑपरेटर के 250 पदों को भरने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। आवेदन आने के बाद आयोग ने 9 जून 2017 को प्रदेशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर लिखित परीक्षा का आयोजन किया। जिन अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा पास की, आयोग ने उनके लिए 14 अंकों की मूल्यांकन परीक्षा ली।

जुलाई 2018 में परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। आयोग ने चयनित हुए 187 अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी की। कोर्ट केस के चलते 62 पद खाली रखे गए। वहीं, दो पदों के लिए कोई भी योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला। जलशक्ति विभाग ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेशभर के विभिन्न अधीक्षण अभियंता सर्कल के तहत नियुक्तियां प्रदान कर दी थीं।

लेकिन, इसी साल हिमाचल हाई कोर्ट से याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला आया। जिसके बाद 22 जुलाई 2021 को कर्मचारी चयन आयोग ने दोबारा परीक्षा परिणाम संशोधित किया। संशोधित परीक्षा परिणाम में 248 अभ्यर्थी चयनित हुए। इनमें केवल 152 पुराने अभ्यर्थी ही चयनित हुए, जबकि पहले चयनित 35 अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए।

जब संशोधित मेरिट लिस्ट जलशक्ति विभाग के पास पहुँची तो विभाग के सरकार से परामर्श किया। परामर्श के बाद जलशक्ति विभाग ने इन 35 पंप ऑपरेटरों बर्खास्त करते हुए उनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है।

इस बारे जलशक्ति विभाग के इंजीनियर इन चीफ नवीन पुरी ने बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद चयन आयोग ने मेरिट सूची में संशोधन किया है। जिसके चलते 35 पंप ऑपरेटरों को अयोग्य करार दिया है।

प्रतिभा सिंह ने हाईकमान पर छोड़ा मंडी लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का फैसला

शिमला।। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह मंडी लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने उपचुनाव लड़ने का फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है। उन्होंने हाईकमान तक यह संदेश पहुँचा दिया है कि जी हाईकमान का आदेश होगा, वह उसका पालन करेंगी।

प्रतिभा सिंह ने दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी संगठन के महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की है। वेणुगोपाल के माध्यम से प्रतिभा सिंह ने यह संदेश हाईकमान तक पहुँचा दिया है। इस दौरान उनके साथ उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह भी मौजूद रहे।

हालांकि अभी तक प्रतिभा सिंह का मंडी लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का कोई विचार नहीं था। लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, वेणुगोपाल से मुलाकात कर उन्होंने साफ शब्दों में हाईकमान तक संदेश पहुँचा दिया है कि जी भी हाईकमान का आदेश होगा, वह उसका पालन करेंगी। यानी प्रतिभा सिंह उपचुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार हैं, बस उन्हें हाईकमान के आदेश का इंतजार है।

बता दें कि प्रदेश कांग्रेस प्रतिभा सिंह को मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव के लिए पार्टी का सबसे दमदार प्रत्याशी करार दे चुकी है। इसके अलावा मंडी संसदीय क्षेत्र की जिला कमेटियों ने भी पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को मजबूत प्रत्याशी पाया है।

कोरोना से माता-पिता खोने वाले प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों की फीस होगी माफ

शिमला।। कोरोना संक्रमण के कारण हिमाचल प्रदेश में बहुत से लोगों ने अपनी जान गंवाई है। बहुत से बच्चों ने अपने माता-पिता खोए हैं। ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों की फीस माफ होगी।

यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं, जिन्हें लागू करने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने बुधवार को निर्देश जारी कर दिए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और प्रिंसिपलों को लिखित निर्देश जारी किए गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 के बाद से अभी तक हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले चार बच्चों के माता-पिता दोनों और 280 बच्चों के एक अभिभावक की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है।

इस बारे जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश आए थे। इन आदेशों को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए जिला अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए हैं। दो-तीन दिन के भीतर इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करवाने और रिपोर्ट निदेशालय को देने के लिए कहा गया है।

वहीं, बीते दिनों शिक्षा विभाग को महिला एवं बाल विकास निदेशालय की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से अवगत करवाया गया है। महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने 22 ऐसे विद्यार्थी चिन्हित किए हैं, जिनके माता-पिता दोनों की मौत कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 के बाद हुई है। इनमें से चार विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। वहीं, 736 विद्यार्थी ऐसे भी चिंहित किए गए हैं, जिनके एक अभिभावक की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई है। इनमें से 280 विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसे विद्यार्थियों की इस शैक्षणिक स्तर की फीस माफ करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास निदेशालय की ओर से इस बात की जानकारी मांगी गई है कि कितने विद्यार्थियों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है और उन्हें दोबारा स्कूहलों में लाने के लिए विभाग द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं। यह जानकारी 25 सितंबर तक मांगी गई है। यह जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट को दी जानी है।

तोहफों की पोटली के साथ वैक्सीन भी क्वार ले गए सीएम जयराम

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बुधवार को जिला शिमला के अति दुर्गम क्षेत्र क्वार पहुंचे। यहां उन्होंने करोड़ों के उद्घाटन और शिलान्यास किए। जनता की मांगों पर मुख्यमंत्री ने कुछ घोषणाएं भी की। इन सौगातों से इतर यहां एक और बात भी चर्चा में रही। मुख्यमंत्री अपने साथ इस सुदूर क्षेत्र के लिए कोविड वैक्सीन की खेप भी ले गए थे।

डोडरा क्वार में भी प्रदेश के बाकी हिस्सों की तरह सभी पात्रों को कोविड वैक्सीन की पहली डोज देने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और अब दूसरी डोज देने का अभियान तेजी से जारी है। ऐसे में, संपूर्ण वैक्सीनेशन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए 30 नवंबर के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मुख्यमंत्री की इस पहल को अहम कदम माना जा रहा है।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां काफी विषम हैं। यहां बड़ा भंगाल और पांगी जैसी जगहें हैं, जो बर्फबारी के कारण दुनिया से कट जाती हैं। इसी तरह शिमला जिला का डोडरा क्वार भी अति दुर्गम क्षेत्र है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपने साथ शिमला से कोविड वैक्सीन की 2500 डोज लेकर क्वार पहुंचे। ऐसा करने के पीछे इरादा यह था कि सुदूर क्षेत्र के लोगों के लिए कम समय पर सुरक्षित ढंग से वैक्सीन पहुंचाई जा सके।

हिमाचल अपनी पात्र आबादी के सभी व्यस्कों को कोविड-19 की पहली डोज देने में देशभर में अव्वल रहा है। इस उपलब्धि के लिए हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल की जनता के साथ ‘वैक्सीन संवाद’ किया था। इस दौरान उन्होंने डोडरा क्वार के दुर्गम क्षेत्र में सेवाएं दे रहे डॉक्टर के साथ भी बातचीत की थी, जिन्होंने वैक्सीनेशन अभियान में पहली डोज के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई थी।

बड़ा भंगाल भी हेलीकॉप्टर से भेजी गई थी वैक्सीन

कोविड वैक्सीनेशन अभियान में जब बड़ा भंगाल जैसे अति दुर्गम क्षेत्र के लोग छूट रहे थे तो हिमाचल सरकार के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था। हेलीकॉप्टर के माध्यम से ही डीसी कांगड़ा, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ को बड़ा भंगाल भेजा गया था। ऐसे में सरकार का हेलीकॉप्टर भी जनता के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। लाहौल स्पीति में रेस्क्यू ऑपरेशन में भी इसे इस्तेमाल किया गया था।

सीएम ने पुलिस विभाग के 61 वाहनों को दिखाई हरी झंडी

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। सीएम जयराम ठाकुर ने सरकारी आवास ओक ओवर से हिमाचल पुलिस विभाग के 61 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिनमें 58 बुलेट, दो ट्रक और एक बस शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस विभाग का एक जागरूकता वीडियो भी जारी किया, जो “से नो टू ड्रग्स” थीम पर आधारित है। यह वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया गया है।

इस मौके पर सीएम ने कहा कि पुलिस विभाग राज्य के लोगों को सेवाएं प्रदान करने के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है। राज्य सरकार पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण और प्रभावी कामकाज के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में कानून व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए पुलिस विभाग को नवीनतम तकनीक और बेहतर सुविधाएं देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

सीएम ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य सरकार ने नए वाहनों की खरीद के लिए 13 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब चार करोड़ रुपये से 99 वाहन खरीदे जा चुके हैं।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, महापौर नगर निगम शिमला सत्या कौंडल, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू और पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस न रखने पर पीएनबी ने वसूले 170 करोड़

नई दिल्ली।। आज लगभग हर व्यक्ति का बैंक में खाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाते में मिनिमम बैलेंस न रखनेे पर बैंक पैसे काटकर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। जी हाँ, यह बिल्कुल सच है। लगभग हर बैंक द्वारा खातों के लिए कुछ मिनिमम बैलेंस निर्धारित किया गया होता है। अगर उपभोक्ता बैंक खाते में यह मिनिमम बैलेंस मैंटेन नहीं करते हैं तो बैंक कुछ रुपये चार्ज के रूप में काटते हैं। अधिकतर बैंक तीन महीने के आधार पर चार्ज लगाते हैं।

ताजा जानकारी सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक से आ रही है। पीएनबी ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वाले ग्राहकों से चार्ज के रूप में 170 करोड़ रुपए वसूले हैं। यह जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई थी। बैंक ने जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक ने खातों में मिनिमम बैलेंस मैंटेन न करने पर ग्राहकों से 286.24 करोड़ रुपए वसूलें हैं।

आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार बैंक ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में मिनिमम बैलेंस न मैंटेन करने पर चार्ज के रूप में ग्राहकों से 35.46 करोड़ रुपए वसूले थे। वहीं, दूसरी तिमाही में बैंक ने इस तरह का कोई शुल्क नहीं लगाया। तीसरी तिमाही में बैंक ने 48.11 करोड़ और चौथी तिमाही में 86.11 करोड़ रुपए की राशि चार्ज के रूप में वसूली।

इसके अलावा बैंक ने वित्त वर्ष 2020-21 में एटीएम चार्ज में रूप में 74.28 करोड़ रुपए एकत्रित किए। वहीं, 2019-20 में बैंक ने इस शुल्क से 114.08 करोड़ रुपए की राशि जुटाई थी। आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बैंक से मांगी थी।

कुल्लू: पहले खुद किया धर्म-परिवर्तन फिर पत्नी पर बनाने लगा दवाब, मामला दर्ज

कुल्लू।। कुल्लू जिला में पुलिस ने एक व्यक्ति पर महिला का धर्म परिवर्तन करने का दवाब बनाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। खुद महिला ने ही मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। आरोपी व्यक्ति पार्वती जल विद्युत परियोजना में कार्यरत है।

मिली जानकारी के अनुसार, कुल्लू जिला के शमशी भुंतर की रहने वाली महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी शादी साल 2008 में पंजाब के फगवाड़ा के रहने वाले जसवंत राय से हुई थी। हिन्दू रीति-रिवाज के साथ दोनों परिवारों की आपसी रजामंदी से शादी हुई थी। जसवंत एनएचपीसी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है।

साल 2012-2013 में उसकी तैनाती कश्मीर के बांदीपूरा में हुई व परिवार वहां चला गया। साल 2015 में इनके एक बेटी पैदा हुई। इस बीच जसवंत राय मुस्लिम धर्म को मानने लगा व महिला को धमकाया कि यदि बेटी को हिन्दू धर्म सिखाया तो दोनों को खत्म कर देगा। इसके बाद से लगातार महिला को मुस्लिम रिति-रिवाज पहनावा आदि अपनाने के लिए तंग करने लगा। साल 2017 में दोबारा जसवंत का तबादला पार्वती प्रोजेक्ट में हुआ व परिवार कश्मीर से शमशी आकर रहने लगा।

अधिकारिक तौर पर पति ने जुलाई 2021 में धर्म बदलकर अपना नाम मोहम्मद जुनैद दर्ज करवा लिया, लेकिन महिला अपना धर्म नहीं बदलना चाहती थी। इसलिए उसने पुलिस में इसकी शिकायत की। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी पर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 व 4 और आईपीसी की धाराओं 506, 298 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

इस बारे एसपी कुल्लू गुरदेव शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भी मामला कोर्ट को भेजा जाएगा।  उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा 2019 में हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया गया है। इसके प्रावधानों के अन्तर्गत किसी लालच, दबाव, प्रताड़ना द्वारा धर्म-परिवर्तन करना या करवाना या प्रयास करना गैर जमानती जुर्म है।