उपचुनावों में कांग्रेस ने दिए अपने बेस्ट कैंडिडेट, अब बीजेपी की बारी

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनावों के लिए कांग्रेस ने टिकटों की घोषणा कर दी है। जिन चेहरों को कांग्रेस ने टिकट दिया है, वह विनेबिलीटी यानी जीत की संभावना के आधार पर पार्टी के बेस्ट कैंडिडेट माने जा रहे हैं। उनकी जीत होगी या नहीं, यह तो जनता तय करेगी। मगर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कांग्रेस ने अपने पास उपलब्ध विकल्पों में सही चुनाव किया है। अब बीजेपी को भी उम्मीदवार तय करने में तगड़ी माथापच्ची करनी पड़ेगी।

मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस ने पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को टिकट दिया है। टिकट की घोषणा होते ही प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर पोस्टर डाला जिसमें कहा गया था- वोट नहीं श्रद्धांजलि। यह दिखाता है कि इस बार कांग्रेस की तैयारी दिवंगत वीरभद्र सिंह के नाम पर सहानुभूति वोट बटोरने की है।

इस बात का पता इससे भी चलता है कि कांग्रेस ने जब अपने  उम्मीदवारों के नाम जारी किए, उसमें प्रतिभा सिंह का नाम प्रतिभा वीरभद्र सिंह लिखा हुआ है। जबकि यह नाम उन्होंने पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया, 2014 के चुनावों में उनके हलफनामे में भी उनका नाम प्रतिभा सिंह ही लिखा हुआ था।

इन सभी बातों को देखें तो प्रतिभा सिंह कांग्रेस की सबसे मजबूत उम्मीदवार हैं। सहानुभूति वोट मिलेंगे या नहीं, यह तो अलग बात है मगर पहले भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वह कर चुकी हैं। ऐसे में वह आश्रय शर्मा, कौल सिंह या अन्य किसी भी उम्मीदवार से कहीं मजबूत चॉइस हैं।

विधानसभा उपचुनावों में भी मजबूत उम्मीदवार
जुब्बल-कोटखाई में होने जा रहे उपचुनाव में पूर्व विधायक रोहित ठाकुर को कांग्रेस ने टिकट दिया है। उन्हें पहले से ही कांग्रेस का तय उम्मीदवार माना जा रहा था क्योंकि उन्होंने 2017 में हार के बाद भी वह अपने क्षेत्र में एक्टिव रहे थे और अपनी राजनीतिक जमीन पर पकड़ बनाए रखी थी। उनके अलावा कांग्रेस का और कोई चेहरा टिकट की दौड़ में शामिल नहीं था। वैसे भी पिछले चुनावों में वह मात्र 1062 वोटों से हारे थे। बीजेपी की ओर से यहां चेतन बरागटा का टिकट लगभग तय माना जा रहा है। ऐसा हुआ तो नीलम सरैक की नाराजगी भी बीजेपी को भारी पड़ सकती है।

फतेहपुर में भवानी सिंह पठानिया
भवानी सिंह पठानिया वह शख्स हैं जिन्होंने कुछ साल पहले फेसबुक पर लिखा था कि नेता पुत्रों को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। मगर आज वह पिता सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद खुद चुनाव लड़ने जा रहे हैं। पिता सुजान सिंह पठानिया की तरह जनता का प्यार उन्हें मिलेगा या नहीं, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। वहां कांग्रेस के कई धड़े हैं, कई नेता हैं जो टिकट मांग रहे हैं। मगर चुनावी राजनीति जीत की संभावना का खेल है। ऐसे में सबसे ज्यादा विनेबिलिटी भवानी सिंह पठानिया की ही थी।

अर्की में संजय अवस्थी ही कांग्रेस की चॉइस
भले ही टिकटों की घोषणा के बाद कांग्रेस में कई कार्यकर्ताओं ने पद छोड़ दिए और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की मगर संजय अवस्थी के अलावा कांग्रेस किसी और को टिकट देने की स्थिति में नहीं थी। ऐसा इसलिए क्योंकि संजय अवस्थी ही कांग्रेस के वह नेता हैं जो लगातार लोगों के बीच एक्टिव थे। हालांकि पार्टी के ही लोगों की नाराजगी अवस्थी को नाराज कर सकती है। लेकिन अगर हम यह सोचें कि अवस्थी की जगह किसी और टिकट दिया जाता तो अवस्थी की नाराजगी तो कांग्रेस को और ज्यादा भारी पड़ सकती थी।

कुल मिलाकर बात यह है कि अब भारतीय जनता पार्टी को भी इन सभी सीटों पर मजबूत उम्मीदवार देने होंगे। आज रात तक बीजेपी की ओर से एलान होने की उम्मीद है। उसके बाद थो़ड़ा अंदाजा लग पाएगा कि किस सीट पर किसे आसानी से जीत मिलने की संभावना है और कहां पर मुकाबला कांटे का होगा।

हिमाचल: नौवीं से बारहवीं तक रेग्युलर क्लास चलाने की तैयारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने 11 अक्तूबर से नौवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल बुलाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों की रेग्युलर कक्षाएं लगेंगी।

पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाने का फैसला दशहरे के बाद हो सकता है। इस बीच पहली से आठवीं क्लास के बच्चों की परीक्षाएं भी होनी हैं। ये परीक्षाएं आठ अक्तूबर से शुरू होंगी और ऑनलाइन मोड में होंगी।

प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों की परीक्षाएं पंचायतीराज चुनावों के चलते स्थगित हो गई थीं। इन परीक्षाओं का आयोजन 11 अक्तूबर से करवाने का शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

तो क्या विक्रमादित्य को कांग्रेस कार्यालय हॉली लॉज में खोलने का किराया चाहिए?

ठाकुर वी प्रताप ।। विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया, जिसमें लिखा कि

“हमारे परिवार ने किसी भी टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है, ना ही ऐसी कोई महत्वाकांक्षा और लालसा  है, हम हमेशा पार्टी की विचारधारा के साथ खड़े हैं। सन 1977 में जब प्रदेश कार्यालय में ताला लग गया था, उस समय 4 साल पार्टी कार्यालय हमारे निजी निवास हॉली लॉज से चला है। पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगी हम उसका सम्मान करेंगे पर धरातल की वास्तविक स्थिति भी हम उन्हें अवगत करवाते रहेंगे। सब चंगा सी वाली बोली हमारी नहीं”

लाल रंगों में रंगी चार लाइनों से कांग्रेस में भीतर के भीतर घमासान मचा है, जो एक-दो दिन में सतह पर आ ही गया। विक्रमादित्य के इस दांव से कांग्रेस चौतरफा घिर रही है। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने इस पोस्ट के बाबत कहा कि विक्रमादित्य सिंह उस जमाने की बात कह रहे हैं जब वह पैदा भी नहीं हुए थे।

आखिर वह किस बात का एहसान जता रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी चार साल वीरभद्र सिंह के आवास से चली है तो वीरभद्र सिंह भी इसी कांग्रेस से छह मर्तबा मुख्यमंत्री रहे हैं और वह देश की राजनीति में छह दशक तक छाए रहे, उसी कांग्रेस की वजह से जिस पर वह एहसान जता रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंहं का घर हॉली लॉज

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने तल्ख़ शब्दों में कहा आखिर यह बता कर वह जताना क्या चाहते हैं। वह साफ़-साफ़ कहें. “उस चार साल का” वह और उनका परिवार कितना किराया वसूलना चाहती है। राजा साहब इसी पार्टी से सांसद बने, फिर सीधा मुख्यमंत्री बने, केंद्र में मंत्रीं बने, रानी प्रतिभा सिंह सांसद बनी, विक्रमादित्य स्वयं एमएलए बने और अब खुद को सीएम की गद्दी पर देखना चाहते हैं ।

यह सब हो क्यों रहा है इस पर जरा तफसील से नज़र डालते हैं

प्रदेश में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी दावेदार टाल ठोक रहे हैं। अपने इष्ट आराध्यों की परिक्रमा राजनीति में टिकट हासिल करने का प्रथम मापदंड बन चुका है। बीजेपी में मंथन चल ही रहा है, वहीं पूर्व सीएम राजा वीरभद्र सिंह की पत्नी रानी प्रतिभा सिंह और शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह दिल्ली पहुंच गए और आलाकमान से मिले। बाकायदा यह फोटो भी सोशल मीडिया पर साझा की गई।

संदेश साफ़ था कि रामस्वरूप शर्मा के निधन से खाली हुई लोक सभा सीट पर अपनी दावेदारी ठोंक दी गई है । प्रतिभा सिंह मंडी से के एक बार उपचुनाव जीत चुकी हैं, दूसरी उनकी अपनी रियासत भी मंडी लोक सभा के अंतर्गत आती है । दूसरी तरफ उनके समर्थक उन्हें अभी से मंडी में कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी मान चुके हैं।

बात निकलती है तो दूर तलक जाती है। पिछली मर्तबा 2019 के आम लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पंडित सुखराम ने अपने पोते को सेट करने के लिए ने अपने बेटे अनिल शर्मा का मंत्री पद तक दांव पर लगा दिया। यह बात अलग है वह सीट मंडी से रिकॉर्ड वोटों से हार गए ।

ये खींचतान में सिर्फ सुखराम और स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के बीच रहती तो ठीक था । लेकिन मौके पर चौका मारते हुए बाकी कांग्रेसी नेता भी इस कलह में शामिल हो गए। टिकट को किसी का पुश्तैनी हक मानने के बजाय आलाकमान, नियम और लोकतान्त्रिक प्रक्रिया का हवाला देने लगे।

कांग्रेस पार्टी के जिम्मेदारों का कहना है कि टिकट किसे दिया जाएगा यह आलाकमान तय करेगा। पंजाब की कलह में उलझी पार्टी के लिए सुखराम, विक्रमादित्य और बाकी नेताओं की नूराकश्ती आलाकमान के लिए भी परेशानी सबब बनेगी।

दिल्ली दौरे की नूराकश्ती अभी चल ही रही थी विक्रमादित्य सिंह ने एक बयान दिया है जिसके उतने गंभीर मायने हैं जितना गंभीरता से सोचा  जाए। बकौल विक्रमादित्य…

“हमारे परिवार ने किसी भी टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है, ना ही ऐसी कोई महत्वाकांक्षा और लालसा  है, हम हमेशा पार्टी की विचारधारा के साथ खड़े हैं ।

सन 1977 में जब प्रदेश कार्यालय में ताला लग गया था, उस समय 4 साल पार्टी कार्यालय हमारे निजी निवास हॉली लॉज से चला है ।

पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगी हम उसका सम्मान करेंगे पर धरातल की वास्तविक स्थिति भी हम उन्हें अवगत करवाते रहेंगे ।

सब चंगा सी वाली बोली हमारी नहीं”

कम शब्दों में भी समझे तो इसका यही मतलब है कि कांग्रेस में सब सही नहीं है, जो आलाकमान को यहां से बताया जा रहा है सच्चाई उसके इतर है। शुरुआत की लाइनों का जो सीधा मतलब यही है कि हमने टिकट नहीं मांगा है और ना मांग रहे। लेकिन किसी को भी टिकट देने से पहले इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कांग्रेस पर हमारे बहुत एहसान हैं।

जब कांग्रेस ऑफिस में ताला लग गया था तो कोई भी रहनुमा आगे नहीं आया था। आए थे तो राजा वीरभद्र सिंह जिनके घर में कांग्रेस का ऑफिस चला था। लिहाज़ा कोई भी निर्णय लेते समय इस एहसान का ध्यान रखा जाना चाहिए. विक्रमादित्य की यही बात पुराने और कद्दावर कांग्रेसी नेताओं को अखर रही है।

कई नेता इसे विक्रमादित्य द्वारा प्रदेश कांग्रेस और आलाकमान को आईना दिखाने की हरकत बता रहे हैं तो कई लोग उनकी अपरिपक्वता और बचकाना। कुछ सीनियर नेताओं का मानना है कि विक्रमादित्य सिंह का यह बयान उन लाखों कांग्रेसियों और पार्टी के नेताओं की आस्था और समर्पण पर हमला है जो स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह के पीछे 60 साल तक झंडा लेकर चलते रहे और जयकारे लगाते रहे।

चार साल तक हॉली लॉज में कांग्रेस पार्टी के चलने की बात अब देखो कहां तक जाती हैं यह तो वक़्त ही तय करेगा । लेकिन आलाकमान के मान पर उठ रहे प्रश्नों के बीच कांग्रेस का यह अंतर्कलह न तो कांग्रेस के हित में है न हिमाचल के हित में।

साठ साल से बुशैहर राज परिवार के लिए झंडा उठाने वाले समर्थकों की राजनीतिक अभिलाषाओं पर वसीम बरेलवी का यह शे’र’ और बात ख़त्म…

तुम्हारे राह में मिट्टी के घर नहीं आते

इसलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते

मोहब्बत के दिनों की यही खराबी है

ये रूठ जाए तो फिर लौटकर नहीं आते

 ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक से thakurvpratap@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

मंडी उपचुनाव: बीजेपी में टिकट लेने की होड़, कांग्रेस में न लेने के लिए भगदड़

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पहले एक बार टल जाने के बाद अचानक हुई घोषणा के बाद सबसे ज्यादा हड़बड़ी कांग्रेस के खेमे में देखने को मिल रही है। कांग्रेस के लिए सबसे असहज करने वाली स्थिति मंडी लोकसभा सीट पर है जहां से उसका कोई भी बड़ा नेता चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जता रहा। वहीं इस सीट पर टिकट लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच होड़ लगी हुई है।

कांग्रेस की स्थिति खराब
मंडी लोकसभा सीट पर पंडित सुखराम के बाद वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को ही कांग्रेस का सबसे सशक्त उम्मीदवार माना जाता रहा है। दोनों ही यहां से सांसद भी रहे हैं। लेकिन 2014 में मिली करारी हार के बाद वीरभद्र सिंह परिवार ने  2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से उतरने से इनकार कर दिया। वीरभद्र सिंह ने घोषणा की थी कि उनके परिवार का कोई सदस्य यहां से चुनाव नहीं लड़ेगा, कोई मकरझंडू ही यहां से लड़ेगा। फिर पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा को कांग्रेस ने यहां टिकट दिया जिन्होंने सबसे बड़े अंतर से हारने का रिकॉर्ड बनाया था।

2019 के चुनावों में कांग्रेस के सामने जो स्थिति थी, अब उपचुनाव में भी वही हालत देखने को मिल रही है। उस समय भी दिग्गज नेताओं ने हार की आशंका से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था और अब दोबारा ऐसा हो रहा है। उस समय ठाकुर कौल सिंह ने  किन्हीं मजबूरियों का हवाला दिया था और कहा था कि वह 2022 का विधानसभा चुनाव ही लड़ना चाहेंगे। कल उन्होंने फिर कह दिया कि उनकी इच्छा 2022 का चुनाव लड़ने की है और संसाधनों की कमी के कारण वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। हालांकि, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उनका यह बयान संसाधनों की नहीं बल्कि आत्मविश्वास की कमी के कारण आया है।

वीरभद्र परिवार का खोया आत्मविश्वास
वीरभद्र सिंह के निधन को अभी कुछ दिन ही हुए थे कि उनकी बेटे विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर मां प्रतिभा सिंह की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था- जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है, मान लो तो हार होगी ठान लो तो जीत होगी।’ उस समय इसे घोषणा माना गया था कि प्रतिभा सिंह चुनाव लडेंगी। मगर यह तय नहीं था कि वीरभद्र सिंह के निधन के कारण खाली हुई अर्की विधानसभा सीट से या फिर मंडी लोकसभा सीट से, जहां से वह सांसद रह चुकी हैं। यह भ्रम अब तक बना हुआ है क्योंकि अर्की में 2017 में वीरभद्र सिंह की जीत का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं रहा था। अब परिस्थितियां बदल गई हैं और प्रतिभा सिंह व विक्रमादित्य सिंह का जनता के बीच वैसा रसूख नहीं है जैसा वीरभद्र सिंह का हुआ करता था।

मंडी में भी यही स्थिति है। यहां भी वीरभद्र सिंह को आम लोगों से जो प्यार और सम्मान मिलता था, वही प्यार उनके परिवार के सदस्यों को मिल पाएगा, ऐसा दिखता नहीं है। दरअसल, आम लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि छह बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह को कभी पैसों का मोह नहीं रहा। इसलिए उनपर जो मनी लॉन्डरिंग व आय से अधिक संपत्ति के मामले चले, वह उनके कुछ करीबियों के लोभ की देन थी। हाालंकि ये मामले अभी लंबित हैं और वीरभद्र परिवार कहता रहा है कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से ये बनाए गए हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों के वक्त वीरभद्र सिंह और विक्रमादित्य विधायक थे। उस समय प्रतिभा सिंह चुनाव लड़ सकती थीं मगर उन्होंने हार की आशंका के कारण चुनाव नहीं लड़ा और राजनीतिक जमीन खाली छोड़ दी। अब तक वही स्थिति बनी हुई है। इस बार फिर विक्रमादित्य ने कहा कि उनके परिवार से कोई टिकट नहीं मांगेगा मगर हाईकमान के आदेश का पालन करेगा। यह दिखाता है कि 2014 और फिर 2019 में इस सीट पर बीजेपी को मिली बड़ी जीत ने कांग्रेस ही नहीं बल्कि एक समय प्रदेश की सत्ता के केंद्र रहे वीरभद्र परिवार के आत्मविश्वास को भी डिगा दिया है।

आश्रय और कौल सिंह की स्थिति
इस पूरे खेल में कौल सिंह की स्थिति अजीब बनी हुई है। वह पिछली दो बार के विधानसभा चुनावों को अपना संभावित आखिरी चुनाव बताते रहे हैं। अब फिर कह रहे हैं कि अभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा है। यानी पार्टी और संगठन जिसने आपको मौका दिया, उसकी जरूरतों को नहीं समझेंगे, अपनी इच्छा के लिए चुनाव लडेंगे। 2019 चुनावों से पहले भी उन्होंने यही कहा था। आत्मविश्वास की यही कमी रही तो 2022 में शायद ही पार्टी उन्हें टिकट दे। इस बीच आश्रय कहते हैं कि उन्हें टिकट नहीं, सम्मान चाहिए। उनका तर्क है कि जब 2019 में सबने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था और उन्हीं ने मोर्चा संभाला था तो इस बार टिकट पर उन्हीं का हक है। मगर आलाकमान ने 2019 में देख लिया था कि आश्रय अपने दम पर तो कुछ कर नहीं सकते, उल्टा पार्टी कैडर का वोट भी उनके कारण शिफ्ट हो गया। ऐसे में उन्हें टिकट उसी स्थिति में दिया जा सकता है जब कोई और कैंडिडेट न मिलने की स्थिति में बस खानापूर्ति करनी हो।

निगम भंडारी बनाम यदोपती?
इस बीच हिमाचल यूथ कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी ने कहा है कि वह मंडी लोकसभा से टिकट की मांग करेंगे। उन्होंने परीक्षाओं को लेकर जो अभियान चलाया था, उसे सफल मानते हुए खुद को वह यूथ के बीच लोकप्रिय नेता समझने लगे हैं। हालांकि आम लोगों के बीच उनकी गंभीरता और समझदारी को लेकर संदेह है। खासकर सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट कर दिए जाने के कारण उन्होंने अपनी छवि एक अपरिपक्व शख्सियत की बनाई हुई है। लोग उनसे बेहतर विकल्प सरकाघाट से युवा नेता यदोपती ठाकुर को मानते हैं जो इस समय हिमाचल यूथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वीरभद्र सिंह के करीबी रहे यदोपती पूरे प्रदेश में एक जाना पहचाना चेहरा हैं। यह भी माना जा रहा है कि अगर वीरभद्र परिवार खुद चुनाव लड़ने आगे नहीं आया तो वह यदोपती की पैरवी कर सकता है। हालांकि इन दिनों यदोपती ने सोशल मीडिया पर प्रतिभा सिंह के पक्ष में अभियान चलाया हुआ है।

बीजेपी में मची होड़
इससे इतर बीजेपी के नेताओं में मंडी से टिकट लेने ही होड़ मची हुई है। जाहिर है, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के जिले और उनके क्षेत्र की सीट है तो उनकी कोशिश रहेगी कि यहां से बीजेपी का उम्मीदवार भारी अंतर से जीते। यह चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री दो करीबी मंत्री पेशकश कर चुके हैं कि वे मंडी से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। इनमें एक मंत्री मंडी से है और एक कुल्लू से। जाहिर है, लोगों का इशारा महेंद्र सिंह और गोविंद ठाकुर की ओर है। लेकिन उनके अलावा भी कई ऐसे नेता हैं जो टिकट के चाहवान हैं। इनमें महेश्वर सिंह, पंडित रामस्वरूप शर्मा के कवरिंग कैंडिडेट रहने वाले ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह, बिहारी लाल शर्मा, पायल वैद्य, पंकज जमवाल, प्रियंता शर्मा और राम सिंह शामिल हैं। लेकिन बीजेपी का इरादा सिर्फ चुनाव जीतना नहीं बल्कि भारी मार्जन से चुनाव जीतना है। क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे और इन उपचुनावों को एक तरह से सेमीफाइनल समझा जाएगा। इसलिए बड़े अंतर से मंडी सीट पर जीत हासिल करने की कोशिश होगी ताकि पहले से ही कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाई जा सके। लेकिन यह काम आसान नहीं है क्योंकि महंगाई और कोरोना संकट के कारण काफी चीजें अब 2019 की तुलना में बदल गई हैं।

मंडी सीट पर तो पहले ही हार मान चुकी है कांग्रेस: जयराम ठाकुर

मंडी।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उपचुनाव के प्रचार का आगाज कर दिया है। आज गुरुवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुरने अपने गृह विधानसभा क्षेत्र सिराज में कई जगहों पर जनसभाएं की।

प्रदेश में उपचुनावों की घोषणा होने के बाद पहली बार अपने गृह क्षेत्र सिराज पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का स्थानीय जनता ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री चार जगहों पर लोगों से रूबरू हुए और उन्हें संबोधित भी किया।

अचानक तय हुए कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री को सुनने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जहां कार्यक्रम शाम को थे, वहां भी लोग उत्साह में सुबह ही पहुंच गए थे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार सुबह 10 बजे बागाचनोगी, दोपहर 12 बजे भाटकीधार, दोपहर बाद साढ़े तीन बजे शिलीबागी और साम पांच बजे थुनाग में लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से सीधा संवाद किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए कमर कसने को कहा।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस की ओर से कौन होगा, कौन नहीं होगा, कहना उचित नहीं है। वीरभद्र सिंह का हमें भी दुख है। हमें भी बहुत प्यार करते थे। तारीफ करते थे। इसलिए मुझे बहुत चीजों को छोड़कर बस इतना कहना है कि कांग्रेस की ओर से लोग आएंगे, उन्हें कहिए कि मेहरबानी करिए। बहुत अरसे के बाद, लंबे संघर्ष के बाद सराज आगे बढ़ रहा है, उसे आगे बढ़ने दो, इसमें बाधा मत डालो, इसे मत रोको।

हमें मौका मिला है, हम इतिहास बनाकर जाएंगे

उन्होंने कहा, “राजनीति में हमेशा कोई रहेगा, ऐसा संभव नहीं है, लेकिन हमें मौका मिला है तो हम इतिहास बनाकर जाएंगे। हिमाचल में सरकार बदलने की जो परंपरा रही है, हम उसे बदलकर फिर से सरकार रिपीट करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार की ओर से किए गए अभूतपूर्व विकास कार्यों के आधार पर चुनाव लड़ेगी और रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिराज समेत पूरे प्रदेश में पिछले साल वर्षों मे रिकॉर्ड विकास कार्य हुए हैं और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अच्छी तरह से जानती है कि ईमानदार और दूरदृष्टि भरा शासन क्या होता है और चुनावों में किसे जिताना है।

नहीं थमने दिया विकास

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार ने पूरे राज्य के हर क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को समझते हुए करोड़ों के विकास कार्य किए हैं और कोरोना जैसी महामारी आने के बावजूद विकास की रफ्तार को थमने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भले ही बंदिशों के कारण उनका जनता के बीच जाना कम हुआ, लेकिन फिर भी वर्चुअल माध्यम से उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों के लोकार्पण और शिलान्यास किए।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं से आम लोगों को सीधा लाभ पहुंचा है। कोरोना संकट का मुश्किल दौर आया, तब भी समय रहते जरूरी इंतजाम किए गए ताकि लोगों को समय पर अच्छा इलाज मिले। सबको मुफ्त वैक्सीन दी गई और दूर-दूर के इलाकों तक पहुंचाई गई।

डेढ़ महीने में 23 विधानसभाओं के दौरे

मुख्यमंत्री ने कहा, “अब महामारी की स्थिति में सुधार हुआ है तो पिछले डेढ़ महीने में मैं 23 विधानसभा क्षेत्रों में गया। इस दौरान कहीं 200 करोड़, कहीं 250 करोड़ तो कहीं 300 करोड़ के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास हुए। कोई विधानसभा क्षेत्र ऐसा नहीं जहां 100 करोड़ से कम के विकास कार्य हुए हों। इसी को विकास कहा जाता है, इसी को विकास का नजरिया कहा जाता है।”

रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल करेगी भाजपा

उन्होंने जीत का दावा करते हुए कहा, “मंडी लोकसभा सीट हमने 2014 में बड़े मार्जन से जीती, 2019 में भी ऐतिहासिक मार्जन से जीती। अब रामस्वरूप जी के न रहने पर हमें फिर चुनावों में जाना पड़ रहा है। मगर हम फिर इस सीट को रिकॉर्ड मतों के अंदर से जीतेंगे, इसमें कोई शक नहीं है।”

साथ ही उन्होंने कहा कि जुब्बल कोटखाई सीट पर तो बीजेपी के विधायक थे। इन उपचुनावों में बीजेपी जुब्बल के साथ-साथ अर्की और फतेहुपर में भी फतेह हासिल करेगी।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता ये अच्छी तरह से जानती है कि उन्हें किसे अपने नेता के रूप में चुनना है, वो किसी के बहकावे में आने वाली नहीं है। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार मंडी की जनता हमें उससे भी बड़ी जीत का तोहफा देगी।

उन्होंने कहा कि ये मंडी हमारी थी, हमारी है और हमारी ही रहेगी। इसके अलावा तीन विधानसभा सीटों अर्की, फतेहपुर और जुब्बल कोटखाई में भी भाजपा की जीत को सुनिश्चित बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार में बहुत विकास हुआ है। केंद्र से किसी तरह की कमी हिमाचल को नहीं आने दी गई है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी का जो भी प्रत्याशी तय होगा उसके लिए सभी लोग एकजुट होकर कार्य करेंगे। उन्होंने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्षी खेमे की हालत तो ऐसी है कि वहां पहले उनका नेता ही तय नहीं हो रहा। प्रत्याशी कहां से तय होंगे। उन्होंने कहा कि मंडी सीट पर कांग्रेस हार मान चुकी है। इनके नेता अपने प्रत्याशी के लिए एक-दूसरे का नाम आगे कर रहे हैं।

सिराज का एक-एक आदमी जयराम बनकर करे काम

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सिराज के एक-एक आदमी को जयराम बनकर काम करना होगा। मैं आप लोगों को ये जिम्मेदारी सौंप कर निश्चिंत होकर जा रहा हूं, अब आप लोगों को इसे संभालना होगा। मुख्यमंत्री ने सिराज की जनता से कहा, “सिर्फ जीत नहीं शानदार जीत चाहिए।”

अब तो पीएम भी कहते हैं सिराजियों के कंधों पर प्रदेश की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा प्रदेश सरकार चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली है और आज तक कोई भी हम पर उंगली नहीं उठा पाया। लोग पहले सिराज को पिछड़ा हुआ मानते थे, लेकिन आज देश के प्रधानमंत्री बोल रहे हैं कि हिमाचल प्रदेश की जिम्मेदारी सराजियों के कंधे पर है।

हमारी तो वीरभद्र भी करते थे तारीफ

जयराम ठाकुर ने कहा कि मंडी लोकसभा से कई सांसद रहे। वीरभद्र भी रहे, महेश्वर भी रहे और प्रतिभा सिंह भी, लेकिन मंडी में आज दिन तक 4 लाख से ज्यादा के मार्जन से कोई नहीं जीत पाया। रामस्वरूप शर्मा पांच लाख से ज्यादा के मार्जन से विजयी रहे।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि वीरभद्र जी भी हमारी तारीफ करते थे। साथ ही साथ उन्होंने कांग्रेस कार्यकाल में तत्कालीन सीएम के सिराज दौरे का किस्सा भी सुनाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपके पास कांग्रेस के लोग आएंगे, लेकिन उन्हें कहें अब रहने दो।

एक अक्तूबर को मुख्यमंत्री सुबह 10 बजे बगस्याड़ में सिराज मंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में वे कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति बनाएंगे।

अल्का जी, जब आंकड़े बड़े हों तो समझिए काम भी बड़ा हो रहा है

ठाकुर वी प्रताप ।। जब आंकड़ों में नशे का सामान ज्यादा बरामद होने लगे तो उसका यह मतलब नहीं है कि सरकार चरस, गांजा और ड्रग्स बिकवा रही है। ना ही इसका मतलब ये है कि पुलिस उन नशा तस्करों की सरपरस्ती कर रही है । इसका सीधा और साफ़-साफ़ मतलब है कि सरकार नशे के खिलाफ़ जीरो टालरेन्स की नीति पर चल रही है और पुलिस नशा तस्करों पर कहर बनकर टूट रही है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश में नशे के कारोबारी जेल के अंदर पहुंच रहे हैं।

जयराम सरकार द्वारा स्पेशल टास्क फ़ोर्स बनाई गई। थी। ये स्पेशल टास्क फोर्स नशे के खिलाफ़ डेडीकेट होकर काम कर रही है और पैडलर पकड़े जा रहे हैं। अब जिन्हें अपराधी पकडे़ जाने से दर्द होने लगे तो हमें उसकी मंशा समझ में आ जानी चाहिए कि आखिर नशे के खिलाफ जयराम ठाकुर द्वारा किए गए प्रयासों और पुलिस द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई से उनके खेमे में हलचल क्यों हैं। आखिर वह चाहते क्या हैं।

कल मैं अल्का लांबा को सुन रहा था। उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश में रोजगार भेजने के बजाय नशा भेज रहे हैं, चरस और चिट्टा भेज रहे हैं। ये बयान अपने आप में बेहद शर्मनाक है। देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी में इतने ऊंचे पद पर पहुंच कर हिमाचल का देश भर में मान बढ़ाने वाले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी उन्होंने मिलाजुला कर ड्रग पैडलर ही कहा।

साथ ही साथ जयराम सरकार को नशा रोकने में नाकाम बता दिया। यह राजनितिक रूप से भी शर्म की बात है। राजनीति में आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन आरोप लगाते समय स्तर और मर्यादा का ध्यान रखा जाता है। उससे ज्यादा इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि इससे वहां की जनता पर इसका क्या फर्क पड़ेगा।

किसकी क्या उपलब्धि है? किस नेता ने क्या किया? मुझे इस बारे में बात नहीं करनी क्योंकि मैं किसी का वकील नहीं हूं । हालांकि एक आम हिमाचली शहरी होने के नाते यह जानता हूं कि नशे के फैलते मकड़जाल को तोड़ने के लिए जयराम ठाकुर ने सीएम की कुर्सी संभालते ही सभी पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने की पहल की।

चार राज्यों को साथ लेकर केंद्र की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नशे के खिलाफ अहम अभियान छेड़ा। जिसकी गवाही जेलें, अखबारें और पुलिस के आंकड़े साफ तौर पर दे रहे हैं। इसके अलावा उनके द्वारा शुरू की गई सैकड़ों जन हितैषी योजनाएं और हज़ारों करोड़ के विकास कार्य से जुड़ी परियोजनाएं हैं, जिससे हिमाचल के लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

अनुराग ठाकुर ने नशा नहीं भेजा लेकिन देश भर में प्रदेश का नाम रौशन जरूर किया है। धर्मशाला में बना अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम आज पूरी पूरी दुनिया में हिमाचल का नाम रौशन कर रहा है। अभी तो उन्हें मंत्री पद मिला है, जिसमें हिमाचल के लिए भी असीम संभावनाएं हैं।

रहा सवाल जेपी नड्डा का तो उन्होंने क्या काम किया है इस बात का जवाब बिलासपुर में बन रहा देश का उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान एम्स खुद देगा। जो बहुत जल्दी अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदेश की सेवा करेगा। मैं दावा नहीं करता कि सभी नेताओं ने ऐसा कुछ कर दिया गया है जो आगे नहीं हो सकता है, लेकिन अतीत में नहीं हुआ है।

मुझे पता है जो हो रहा है इससे बेहतर भी हो सकता है, बहुत बेहतर। लेकिन वह तब हो सकता है जब विपक्ष भी जिम्मेदार बने, वह बेशक सरकार की तारीफ़ न करे, लेकिन कैसे कुछ बेहतर हो सकता है उसका सुझाव दे सके। अगर वह भी न दे सके तो ठीक है, लेकिन केंद्रीय मंत्री के पदों पर आसीन बेदाग छवि के नेताओं को कम से कम ड्रग पैडलर ना कहे । मौसम की तरह पार्टियां बदलने वाले अल्का ज़ी के लिए बशीर बद्र का यह शे’र’ और बात ख़त्म

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाये तो शर्मिन्दा न हो

यह लेखक के निजी विचार हैं

टिकट के लिए दिल्ली पहुंचे आश्रय शर्मा, निगम भंडारी ने भी जताई दावेदारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में उपचुनावों का ऐलान होते ही राजनीतिक दलों में हलचल मच गई है। मंडी लोकसभा सीट हॉट सीट बनी हुई है। हर कोई कोई टिकट के लिए अपनी दावेदारी जताने में लगा हुआ है। कांग्रेस से जहाँ एक ओर पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी व मंडी से पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह प्रबल दावेदार हैं और उनका नाम लगभग तय माना जा रहा है।

वहीं, पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा भी टिकट के सिलसिले में दिल्ली गए हैं। खराब स्वास्थ्य के चलते पंडित सुखराम पहले से ही दिल्ली में हैं। अब बताया जा रहा है कि वे अपने पोते के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलेंगे।

ऐसे में युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष निगम भंडारी ने भी मंडी लोकसभा सीट से टिकट के लिए अपनी दावेदारी जताने के फैसला ले लिया है। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निगम भंडारी ने कहा कि दो अक्तूबर को प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी संजय दत्त ने बैठक बुलाई है।

इस बैठक में मंडी संसदीय उपचुनाव लड़ने के इच्छुक चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। निगम भंडारी मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले किन्नौर जिला से संबंध रखते हैं।

हिमाचल प्रदेश में मंडी संसदीय क्षेत्र के अलावा तीन विधानसभा क्षेत्रों में भी उपचुनाव होना है। कांग्रेस प्रदेश चुनाव समिति द्वारा मंडी संसदीय क्षेत्र, अर्की, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान के पास तीन-तीन नामों का पैनल भेजा जाएगा।

इस बारे में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि 2 अक्तूबर को सुबह साढ़े 11 बजे कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक होगी। बैठक में चर्चा और मंथन के बाद तीन-तीन नामों का पैनल तय होगा, जो पार्टी हाईकमान को भेजा जाएगा।

हिमाचल: चीफ इंजीनियर बन लाखों ठगने वाला शातिर राजस्थान से गिरफ्तार

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। खुद को चीफ इंजीनियर बताकर सात ठेकेदारों से लाखों ठगने वाले शातिर को पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है। उक्त शातिर ने खुद को राजस्थान अथॉरिटी का चीफ इंजीनियर बताकर राजधानी शिमला के सात ठेकेदारों से 57 लाख से अधिक की ठगी को अंजाम दिया था।

हाई प्रोफाइल ठगी का यह मामला साल 2019 का है। शातिर ने शिमला के सात ठेकेदारों को काम दिलाने का झांसा देकर ठगी को अंजाम दिया था। पीड़ित ठेकेदारों ने 27 अगस्त को पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी।  ठेकेदारों ने शिकायत में बताया था कि आरोपी ने प्रोसेसिंग व अन्य फीस के नाम पर उनसे 57.62 लाख रूपये की राशि हड़प ली।

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शिकायत मिलते ही शिमला पुलिस ने धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने अब मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार जगदीश, किशन, बलवान, संजय, मनोज कुमार, काशी राम, अनुराग, संदीप और महेंद्रा सिंह पांच से 9 लाख रूपये की ठगी के शिकार हुए हैं। सिर्फ सात ठेकेदारो ने ही पुलिस में शिकायत दी है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

शातिर ने खुद को चीफ इंजीनियर बताकर ठगे 57 लाख से अधिक

हिमाचल: चार कक्षाओं के लिए सेमेस्टर सिस्टम शुरू

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में नौवीं से 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को अब साल में दो बार बोर्ड की परीक्षाएं देनी होंगी। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है। बोर्ड ने इस संदर्भ में अधिसूचना जारी कर इस बात की जानकारी दी है।

हिमाचल प्रदेश में अब नौवीं से 12वीं क्लास के विद्यार्थियों के लिए सेमेस्टर सिस्टम की शुरुआत होने जा रही है। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के तहत यह फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में इसी साल यानी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से सेमेस्टर सिस्टम शुरू हो जाएगा।

सेमेस्टर सिस्टम के तहत नौवीं से 12वीं क्लास के विद्यार्थियों के लिए नवंबर महीने में टर्म एक की परीक्षाएं आयोजित होंगी। टर्म दो की परीक्षाओं का आयोजन मार्च 2022 में किया जाएगा।

जानकारी देते हुए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सुरेश सोनी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत नवंबर 2021 और मार्च 2022 में परीक्षाएं आयोजित करने के आदेश जारी किए गए हैं। ये परीक्षाएं 50:50 पाठ्यक्रम के आधार पर होंगी। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में पिछले शैक्षणिक सत्र 2020-21 के अनुसार 30 फीसदी की कटौती भी की जाएगी।

शिमला: अलका लांबा ने नशे के कारोबार पर घेरी सरकार

शिमला।। उपचुनाव की घोषणा के बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा शिमला पहुंची। यहाँ उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान अलका लांबा ने सरकार को जमकर घेरा।

अलका लांबा ने बीजेपी सरकार पर देश में नशे के कारोबार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने गुजरात के अडानी पोर्ट पर मिली हज़ारों करोड़ की हेरोइन की जांच की मांग की।

अलका लांबा ने कहा कि हिमाचल के दो बड़े चेहरे नड्डा और अनुराग दिल्ली में बैठे हैं। अडानी पोर्ट पर तीन हजार किलोग्राम हेरोइन पकड़ा गया है। हिमाचल में भी तीन सौ किलो ड्रग्स पकड़ा गया है। हिमाचल में बेरोजगारी बढ़ रही है। सरकार ने रोजगार देने के बजाए नशे को बढ़ावा दिया है। युवा सरकार से रोजगार न मांगें, इसलिए उन्हें नशे के दलदल में धकेला जा रहा है।

अलका लांबा ने कहा कि प्रदेश में 30 अक्तूबर को होने वाले उपचुनावों में प्रदेश की जनता को इसका जवाब देना है। मोदी सरकार के दौरान पुलवामा हमले में आरडीएक्स कहाँ से आया सरकार इसका जवाब अभी तक नही दे पाई।

जब अलका लांबा से पंजाब में मची सियासी खलबली पर सवाल पूछा गया तो वे इस पर कुछ भी बोलने से बचती नज़र आईं। उन्होंने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताकर टाल दिया।