नए साल के जश्न से पहले खाली करवाया रिज, पुलिस ने बताई वजह

शिमला।। नए साल के जश्न के लिए शिमला में जुटे सैलानी उस वक़्त हैरान रह गए जब उन्हें रिज मैदान खाली करने को कहा गया। माना जाने लगा कि ओमिक्रोन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने ऐसा करवाया। मगर कुछ देर में स्निफर डॉग्स को रिज पर देख लगने लगा कि मामला गंभीर है।

अब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पंजाब से आई एक इंटेलिजेन्स इनपुट के आधार पर यह कदम उठाया गया। पुलिस की ओर से जारी लेटर में बताया गया है कि ऐसी सूचना थी कि आतंकवादी शिमला के रिज में नए साल के जश्न पर ब्लास्ट कर सकते हैं। पंजाब पुलिस ने यह अपने भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से कहा था कि इस साजिश के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं।

पंजाब पुलिस ने इस खतरे को देखते हुए हिमाचल पुलिस को सावधान रहने को कहा था।  31 दिसम्बर को ही आई यह इनपुट पुलिस को सम्भवतः देर शाम मिली होगी, ऐसे में रिज को खाली करवाने का काम भी देर शाम शुरू हुआ।

1 जनवरी 2022 को घटना के संबंध में कुछ और स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

मंडी की संस्कृति का अपमान करने लगे हैं हताश कांग्रेसी: राकेश जम्वाल

शिमला।। भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि चुनाव साल में प्रवेश करते ही कांग्रेसी नेताओं ने जुबान पर से संयम खो दिया है। प्रदेश भाजपा के महामंत्री और सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस के नेता बीजेपी का विरोध करते-करते हिमाचल की संस्कृति और परंपराओं का अपमान करने पर उतर आए हैं, यह शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता प्रकाश चौधरी ने सेपू बड़ी, कचौड़ी और बदाणे के व्यंजनों के विरोध में जो नारेबाजी की, वह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी में किस तरह की बदहवासी छाई है। कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर का खुद को बहादुर बताना भी इसी कड़ी का हिस्सा है जबकि वह खुद चैलेंज लेते हैं और खुद ही मुकर जाते हैं।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री ने कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर को बयानवीर और पलटने में माहिर करार दिया। दरअसल कौल सिंह ठाकुर ने कहा था कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रधानमंत्री से कुछ मांगने की हिम्मत नहीं कर पाए। इस पर राकेश जम्वाल ने पलटवार करते हुए कहा कि मांगने और मांगों को खारिज करने की परंपरा कांग्रेस की रही है। उन्होंने कहा कि आज केंद्र की मोदी सरकार के सहयोग से हिमाचल में लाखों करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं। हिमाचल को आज कुछ मांगना नहीं पड़ता, अपने आप केन्द्र विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं को मंजूरी भी कर रहा है और आर्थिक सहयोग भी दे रहा है।

भाजपा महामंत्री ने कहा कि कौल सिंह याद करें कि जब वह मंत्री थे और केन्द्र में यूपीए की सरकार थी, तब हिमाचल को झुनझने के अलावा कुछ नहीं मिला। प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह छोड़िए, केन्द्रीय मंत्री तक हिमाचल आने से कतराते थे। यह हमारी डबल इंजन की सरकार में ही संभव हुआ है कि हिमाचल को किसी तरह की कमी महसूस नहीं होती। प्रधानमंत्री खुद यहां पर हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के लिए आते हैं।

राकेश जम्वाल ने कहा कि 27 दिसंबर को भी प्रधानमंत्री ने 12 हजार करोड़ की पनबिजली परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन किए। हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी प्रधानमंत्री ने 12 हजार करोड़ से ज्यादा की योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास एक साथ किए हों। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में हिमाचल में दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत 28 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे हैं, क्या कांग्रेस के कार्यकाल में यह संभव हो पाता?शायद यही बात कौल सिंह और प्रकाश चौधरी जैसे कांग्रेसी नेताओं को हजम नहीं हो रही।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री और मंडी संसदीय क्षेत्र के सह प्रभारी राकेश जम्वाल ने कहा कि खुद को डेयरिंग बता रहे कौल सिंह वास्तव में बयानवीर हैं। उनको बड़बोलेपन में चैलेंज लेना बहुत पसंद हैं। वह बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद चैलेंज लेते हैं और फिर बाद में खुद ही बड़ी बेशर्मी से मुकर जाते हैं।

‘प्रकाश चौधरी की टिप्पणियां शर्मनाक’
राकेश जम्वाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिमाचल से विशेष जुड़ाव है और अगर वह यहां के व्यंजनों को पसंद करते हैं तो कांग्रेस को इससे आपत्ति क्यों है? भाजपा नेता ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार से हो रहे विकास को पचा नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा और विकास के विरोध में कांग्रेसी इतनी नासमझी पर उतर आए हैं कि अब वो हमारी संस्कृति, हमारे खान-पान के विरोध पर उतर आए हैं। कांग्रेस के लोग नारे लगा रहे हैं कि सेपू बड़ी-बदाणा नहीं चलेगा। तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंडी आकर सेपू बड़ी और बदाणे की जगह इटैलियन पास्ता का जिक्र करते?

भाजपा नेता राकेश जम्वाल ने कहा कि हमारा खान पान हमारी संस्कृति का हिस्सा है राजनीति के चक्कर में अपनी संस्कृति का विरोध उचित नहीं है। जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस के लोगों की ये मानसिकता दर्शाती है कि वो सोचने समझने की क्षमता खो चुके हैं। आपको अगर विरोध करना ही है तो राजनीतिक तौर पर विरोध करें, यूं अपनी ही संस्कृति का या फिर अपने पारंपरिक भोजन का विरोध करना शर्मनाक है।

राकेश जम्वाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल शानदार रहा है और मंडी में हुई प्रधानमंत्री की रैली में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है। प्रधानमंत्री की मंडी रैली सफल होने से कांग्रेस नेताओं की नींद उड़ गई है। कांग्रेस नेताओं को ये समझ में नहीं आ रहा है कि वो प्रदेश सरकार का विरोध करें भी तो कैसे? जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस के नेता रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर इतने हताश हो चुके हैं कि अंट-शंट बयानबाजी पर उतर आए हैं।

हिमाचल कांग्रेस ने शिमला मुख्यालय में मनाया स्थापना दिवस, नहीं पहुंचा एक भी विधायक

शिमला। कांग्रेस आज स्थापना दिवस मना रही है। एक ओर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के पार्टी झंडा फहराने के दौरान पार्टी ध्वज ही नीचे आ गिरा, तो दूसरी ओर हिमाचल कांग्रेस मुख्यालय का कार्यक्रम भी चर्चा का विषय बन गया। दरअसल शिमला में भी कांग्रेस का स्थापना दिवस पार्टी मुख्यालय में मनाया गया, लेकिन इस कार्यक्रम में एक भी कांग्रेसी विधायक नहीं पहुंचा। ऐसे में फिर से कांग्रेस पार्टी के भीतर की गुटबाज़ी को हवा मिल गई।

दरअसल शिमला जिला की बात करें तो यहां से कांग्रेस के पांच विधायक हैं। शिमला ग्रामीण से विक्रमादित्य सिंह, जुब्बल कोटखाई से रोहित ठाकुर, रोहड़ू से मोहनलाल ब्राक्टा, रामपुर से नंदलाल, कुसुम्पटी से अनिरुद्ध सिंह कांग्रेस के विधायक हैं, लेकिन एक भी विधायक कार्यक्रम में नहीं पहुंचा। पार्टी का स्थापना दिवस मनाने के लिए हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

ऐसे में फिर से कांग्रेस की भीतरी गुटबाज़ी को लेकर चर्चा शुरू हो गई। दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के ख़िलाफ़ लगातार दूसरा गुट माहौल बना रहा है। पार्टी के अध्यक्ष पर 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद से कुछ भीतरी ही सवाल उठा रहे थे। हालाँकि यह माहौल हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद कुछ शांत हुआ, लेकिन कुलदीप सिंह राठौर लगातार यह बयान देते रहते हैं कि उनकी अध्यक्षता में ही हिमाचल विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा।

उपचुनाव के बाद जीत के जश्न के बाद हिमाचल कांग्रेस सहप्रभारी संजय दत्त भी एकजुटता को लेकर सार्वजनिक रूप से बातें कह चुके हैं। ऐसे में देखना होगा कि चुनाव से पहले कांग्रेस की गुटबाज़ी क्या करवट लेती है।

 

रिश्वत और चिट्टा केस में आरोपी पूर्व एसएचओ को हाईकोर्ट ने दी अंतरिम अग्रिम जमानत

पीएम मोदी से जयराम ठाकुर का वादा- 2022 में रीपीट करेंगे सरकार

मंडी।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में 1985 से चल रहा बार-बार सरकार बदलने का सिलसिला बदलने वाला है। प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने के अवसर पर मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 2022 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रिपीट होगी। सीएम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वादा करते हुए कहा, “मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जनता और पार्टी के सहयोग व आपके नेतृत्व में हम फिर से भाजपा की सरकार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

हिमाचल सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर हिमाचल आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न पन बिजली परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए। उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट की दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत 28 हजार करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। आज पहली बार प्रधानमंत्री एक साथ, एक जगह पर 11 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन कर रहे हैं। हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आज ही हिमाचल सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस कार्यकाल में हमारी सरकार ने गरीब व्यक्ति की मदद करने की दिशा में प्रयत्न किया है।”

इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्र और हिमाचल सरकार की विभिन्न योजनाओं और उनके लाभार्थियों के बारे में भी बताया। सीएम ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब लोगों का पांच लाख तक का इलाज हो रहा है। हिमाचल में भी इस योजना से लाखों लोग स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से प्रेरणा लेकर हिमाचल सरकार ने हिमकेयर योजना शुरू की थी जो आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा “पर्यावरण संरक्षण और हर घर में गैस के चूल्हे के सपने को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना शुरू की थी। इसी तरह हिमाचल सरकार ने गृहिणी सुविधा योजना शुरू की। आज यहां हर घर में चूल्हा है और हिमाचल देश का पहला धुआंमुक्त राज्य बना।”

प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस योजना से लाभ लेकर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का अच्छे घर का सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने अटल टनल रोहतांग और बिलासपुर एम्स के लिए भी प्रधानमंत्री को धन्यवाद अदा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जून 2022 में एम्स बिलासपुर का उद्घाटन करने का न्योता भी दिया।

काशी की तर्ज पर मंडी में शिवधाम का निर्माण
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी हिमाचल आते हैं आप हमें अपने होने का एहसास दिलाते हैं। आपने एक लंबे समय तक हिमाचल में काम किया, आप यहां के सैकड़ों लोगों को नाम से जानते हैं। आज बड़ी काशी बहुत बड़ा आस्था का केंद्र बनी है। हिमाचल में भी इस दिशा में काम किया जा रहा है। छोटी काशी मंडी में शिवधाम की स्थापना करने जा रहे हैं जो आस्था और पर्यटन का केंद्र होगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ देर में पहुंचेंगे मंडी, करेंगे 11 हजार करोड़ के शिलान्यास और उद्घाटन

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में 11,000 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन करने आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही देर में मंडी के पड्डल मैदान पहुंचेंगे। इस दौरान वह ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट की सेकंड ग्राउंड सेरिमनी का भी शुभारंभ करेंगे और फिर जनसभा को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिमाचल दौरा उस समय हो रहा है जब हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। इस आयोजन के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं।

प्रधानमंत्री 7,000 करोड़ की रेणुका बांध परियोजना और 1,800 करोड़ की 210 मेगावाट से अधिक की लुहरी स्टेज-1 पनबिजली परियोजना की आधारशिला रखेंगे। 700 करोड़ रुपये से बनने वाली 66 मेगावाट की धौलासिद्ध पनबिजली परियोजना का शिलान्यास करेंगे। पीएम 2,000 करोड़ रुपये की  111 मेगावाट की सावड़ा कुड्डू पनबिजली परियोजना का भी लोकार्पण करेंगे।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट की दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए 200 निवेशक भी मंडी पहुंचे हुए हैं। इस दौरान पीएम 27000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे।

हिमाचल में जब पूर्ण बहुमत की सरकार है तो हर साल जश्न का लॉजिक क्या?

रिश्वत और चिट्टा केस में आरोपी पूर्व एसएचओ को हाईकोर्ट ने दी अंतरिम अग्रिम जमानत

शिमला । रिश्वत और चिट्टा केस में आरोपी नादौन थाना के पूर्व एसएचओ नीरज राणा को अंतरिम अग्रिम जमानत मिल गई है। अब विजिलेंस 31 दिसंबर तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। हिमाचल हाईकोर्ट ने नीरज राणा को 31 दिसंबर तक अंतरिम अग्रिम जमानत देने के साथ ही केस का रिकॉर्ड तलब किया है। आरोपी पूर्व एसएचओ को विजिलेंस जांच में सहयोग करना होगा।

प्रार्थी नीरज राणा की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट में अधिवक्ता के जरिए अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी। इसमें दलील दी गई है कि नीरज राणा पर लगाए गए आरोप गलत हैं। प्रार्थी नीरज राणा की ओर से दायर तीन जमानत याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायाधीश सीबी बारोवालिया ने अंतरिम अग्रिम जमानत दी।

क्या है पूरा मामला

आरोप है कि 21 दिसंबर को नीरज राणा मवेशियों को पठानकोट ले जाने वाली गाड़ी का परमिट देने के एवज में 25 हजार रुपये रिश्वत लेने पहुंचा था। इस दौरान विजिलेंस टीम ने जब उसे गिरफ्तार करना चाहा तो नीरज राणा ने अपनी गाड़ी से टीम के लोगों को कुचलने का प्रयास किया और मौके से फरार हो गया।

इसके बाद पुलिस को आरोपी नीरज राणा की गाड़ी से चिट्टा भी बरामद किया गया। आरोपी नीरज राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार नीरज राणा 2010 में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुआ था। उसका प्रोबेशन ट्रेनिंग पीरियड भी हमीरपुर और नादौन थाने में ही था। बाद में वह विजिलेंस विभाग शिमला में भी तैनात रहा। इसके बाद नीरण राणा को कांगड़ा जिले के जवाली थाना में बतौर प्रभारी तैनाती दी गई और 2020 में उसे नादौन थाने का एसएचओ तैनात किया गया।

देवता जमलू के आदेश; मलाणा में चंबा के लोगों के ठहरने पर लगा प्रतिबंध, लोगों ने उठाए सवाल

 

 

 

महेंद्र सिंह ठाकुर की बिगड़ी तबीयत, मंडी में टेस्ट के बाद नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती

मंडी। राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती करने से पहले उनके जोनस अस्पताल मंडी में टेस्ट किए गए। गौरतलब रहे कि हिमाचल में बीजेपी सरकार 27 दिसंबर को कार्यकाल के चार वर्ष पूरे करने जा रही है।

मंडी में इस मौके पर मंडी में कार्यक्रम भव्य कार्यक्रम होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। इसी के चलते सरकार के वरिष्ठ मंत्री और संगठन के बड़े नेता मंडी में डटे हुए हैं। इसी बीच राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर एक मीटिंग के लिए जा रहे और उन्हें चक्कर आ गया। इसके तुरंत बाद उन्हे जोनल अस्पताल मंडी पहुंचाया गया। यहां टेस्ट करवाने के बाद उन्हें नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है।

 

 

देवता जमलू के आदेश; मलाणा में चंबा के लोगों के ठहरने पर लगा प्रतिबंध, लोगों ने उठाए सवाल

कुल्लू । कई तरह की गतिविधियों के लिए देश ही दुनिया में विख्यात कुल्लू ज़िले के मलाणा गाँव एक बार फिर चर्चा में है। चर्चा की वज़ह है मलाणा गाँव के देवता जमलू ( जमदग्नि ऋषि) की ओर से दिए गए आदेश। आदेश में कहा गया है कि मलाणा गाँव में चंबा ज़िले के लोग नहीं ठहर सकते। हालाँकि प्रदेश अन्य 11 ज़िले के लोगों को गाँव में ठहरने के लिए किराया पर कमरे दिया जा सकता है, लेकिन चंबा के लोगों पर पाबंदी रहेगी।

अब चंबा के लोगों को भी पर्यटकों को तरह मलाणा से एक किलोमीटर दूर ठहरना होगा। इससे कुछ दिन पहले ही देवता जमलू के आदेश पर गाँव में अंडा, चिकन और शराब के सेवन और बेचने पर भी बैन लगा दिया गया था।

देवता जमलू ( जमदग्नि ऋषि) का मंदिर

दैनिक जागरण में प्रकाशित मलाणा के प्रधान राजूराम और पूर्व प्रधान भागीराम के बयान के मुताबिक़ देवता की ओर से दिए गए आदेशों को सख़्ती से पालन किया जाएगा। यदि कोई इन नियमों की अवहेलना करता है तो उस व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना अदा ना करने की सूरत में हुक्का पानी बंद कर दिया जाएगा।

अंडा, चिकन और शराब को लेकर कुछ दिन पहले जारी किए आदेशों की तो लोग तारीफ़ कर रहे थे, लेकिन अब एक विशेष ज़िले के लोगों को गाँव में ठहरने से प्रतिबंधित करने पर कई तरह के सवाल उठना शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि एक संबंधित ज़िले के लोगों को इस तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

इससे पहले भी 2017 में इस तरह के पर्यटकों और बाहरी लोगों को गाँव में ठहरने पर देवता जमलू ने बैन कर दिया था। इस ख़बर का लिंक नीचे दिया गया है।

देवता का आदेश, बाहरी लोग नहीं ठहर पाएंगे मलाणा गांव में

भाजपा-कांग्रेस के लोगों की शक्लों से नफरत, छाती लट्ठ गाड़कर लिया आयोग : रुमित सिंह ठाकुर

सोलन । इतिहास में पहली बार ऐसा कोई कदम उठाया गया। देवभूमि क्षत्रिय संगठन के नाम पर लोग हंसते थे। संगठन का नाम सुनकर लोग बोलते थे कि ये क्या कर लेंगे। ये बात देवभूमि क्षत्रिय संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर ने कही है।

रुमित सिंह ठाकुर ने कुनिहार में कहा कि हम भाजपा कांग्रेस की छाती लट्ठ गाड़कर आए हैं। मुझे भाजपा कांग्रेस के लोगों की शक्लों से मुझे नफरत है। बहुत से लोगों को ये गलतफहमी है कि भाजपा सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बाद रिपीट हो जाएगी। ये आयोग हमारा अधिकार है। ये आयोग हमने मांग कर नहीं तुम्हारी छाती पर लट्ठ गाड़ कर लिया है। अपनी ताकत के दम पर छीन के लिए। भाजपा-कांग्रेस ने हमें ये नहीं दिया। हम एक साल से इनके पीछे थे। भाजपा-कांग्रेस की जय जयकार करने वाला एक व्यक्ति हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ।

रूमित ठाकुर ने कहा कि जब तक आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं होता, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। अपने अधिकार लेने के लिए सामान्य वर्ग आयोग सवर्ण समाज का पहला कदम है। रूमित ठाकुर ने कहा कि सवर्ण समाज 10 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाएगा। दस दिन बाद लोगों और सरकार का धन्यवाद करने के लिए फिर यात्रा शुरू की जाएगी।

हिमाचल में विपक्ष को बदलनी होगी बात-बात पर वॉकआउट की रणनीति

 

 

हिमाचल में विपक्ष को बदलनी होगी बात-बात पर वॉकआउट की रणनीति

इन हिमाचल डेस्क।। विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आयोजन धर्मशाला में करने के लिए सामान्य से कई गुणा अधिक खर्च बैठता है। पूरा का पूरा सेटअप शिमला से धर्मशाला शिफ़्ट करना पड़ता है। अधिकारियों, कर्मचारियों और पत्रकारों आदि के ट्रांसपोर्ट से लेकर उन्हें ठहराने तक भारी-भरकम रक़म खर्च की जाती है। लेकिन किसलिए? वॉकआउट के लिए?

विपक्ष के पास काफ़ी समय रहता है कि वह सत्र शुरू होने से पहले ही गंभीर सवाल तैयार करे ताकि उनके आधार पर विधानसभा में सरकार को घेरा जाए। सत्र से ठीक पहले या सत्र के दौरान अचानक कोई विषय आ जाए तो उसे उठाया जा सकता है। मगर देखिए, विपक्ष ने पहले दिन यह कहकर हंगामा कर दिया कि पहले अविश्वास प्रस्ताव पर बात हो, फिर बाक़ी काम होंगे।

विपक्ष के काबिल नेताओं का तर्क था कि हाल ही में हुए उपचुनावों में सभी सीटों पर बीजेपी की हार हुई है, जनता का विश्वास सरकार पर से खो चुका है, इसलिए सरकार को नैतिक अधिकार नहीं है सत्ता पर बने रहने का। और जब एक तिहाई सदस्यों की संख्या न होने पर यह प्रस्ताव खारिज हो गया तब भी हंगामा। फिर आज दूसरे दिन वही हुआ, जिसके लिए विपक्ष हर बार बेसब्री से विधानसभा के सत्रों का इंतज़ार करता है- वॉकआउट।

उपचुनावों के नतीजों के आधार पर सत्ताधारी पार्टी को घेरने के लिए इधर उधर भाषण देना और प्रेस कॉन्फ़्रेंस करना तो समझ आता है, मगर प्रदेश के करोड़ों रुपये बर्बाद कर देना कहां तक सही है? सवालों के जवाब तैयार करने में लगे संसाधन, पूरे सिस्टम को शिमला से धर्मशाला शिफ़्ट करने व्यय पानी में। वह भी उन उन नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के नेतृत्व में जिन्हें एक दिन पहले सरकारी पैसे की बेक़द्री और प्रदेश के क़र्ज़ में डूबने की बड़ी चिंता हो रही थी।

यह दिखाता है कि हिमाचल प्रदेश का विपक्ष या यूँ कहें कि हिमाचल प्रदेश के अधिकतर नेता वास्तव में नेता कहलाने लायक़ ही नहीं हैं। क्योंकि सत्ता में होते हुए उन्हें यह नहीं पता होता कि प्रदेश के लिए क्या अच्छा करना है और विपक्ष में जाने पर उन्हें यह नहीं पता होता कि सरकार को कैसे घेरा जा सकता है। और यह बात कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के लिए लागू होती है। वॉकआउट का यही सिलसिला तब बीजेपी की ओर से जारी रहता था जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।

शायद हिमाचल के विधायकों के मन में एक ही बात बैठी हुई है कि हंगामा करके बाहर आकर मीडिया के सामने नारे लगाने पर उनकी फ़ोटो छपेगी और अगले दिन के अख़बारों में बड़े अक्षरों में लिखा होगा- विपक्ष ने किया वॉकआउट।

शायद प्रासंगिक बने रहने के लिए उन्हें यही एक तरीक़ा नज़र आता है। लेकिन वे भूल गए कि जब राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामा करने पर मुकेश अग्निहोत्री आदि को सदन से निष्कासित किया था, तब उन्हीं की पार्टी के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य ने सदन ने अंदर किस तरह ज़ोरदार ढंग से बातें रखी थीं और तर्कसंगत बातों से कैसे सरकार को असहज कर दिया था।

बेहतर होगा विपक्ष अगर सदन के अंदर जनता से जुड़े विषय उठाए, पूरी तैयारी करके सरकार को घेरे। सरकार हो बर्बाद और हाय थू जैसे वाहियात नारे लगाते हुए सदन से निकलकर मीडिया के सामने हंसते हुए बयान देना फूहड़ लगता है। आप चुने हुए प्रतिनिधि हैं, न कि बिना लक्ष्य के हंगामा करने वाले लोग।