पालमपुर।। कांगड़ा के सांसद शांता कुमार ने कहा है कि वह नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने में पूरी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं 85 साल का जवान हूं और पार्टी का जो भी आदेश होगा, हर मोर्चे पर तैयार रहूंगा।
पहले चुनाव न लड़ने की बात कहना, फिर कहना कि मैं चुनाव लडूंगा लेकिन चेहरा कोई और होगा और आज कहा कि मैं चुनाव के लिए तैयार हूँ। पालमपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान मीडिया के सवाल का जवाव देते हुए शांता कुमार ने आखिर मान ही लिया की वह कांगड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
इससे पहले जब भी शांता कुमार से चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया था तो उनका जवाब न में या गोलमोल सा मिलता था लेकिन अब उनके मन ने हामी भर दी है। इस बार फिर से शांता कुमार चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि मोदी को दुबारा प्रधान मंत्री बनाने के लिए वह हर मोर्चे पर खड़े हैं।
भाजपा की तरफ से कई चेहरे इस सीट पर दावेदारी जता रहे हैं। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान शांता कुमार को ही उतारने का फैसला ले सकती है क्योंकि शांता कुमार जैसा और कोई दमदार और जिताऊ कैंडिडेट उभरकर सामने आता नज़र नहीं आया है।
चम्बा।। इस सीजन में चंबा में हुई भारी बर्फ़बारी से हालात सामान्य नही हो पाए है। जिले की दूर दराज की सड़कें बन्द है और बिजली गुल है। जगह-जगह पेड़ गिरे हुए है। कई पंचायतें अंधेरे के आगोश में हैं और बाकी क्षेत्रों से संपर्क कट चुका है। पानी की क़िल्लत बढ़ गई है और लोग बर्फ़ पिघलाकर पानी का इस्तेमाल कर रहे है।
कुछ पंचायतों में जरूरी सामान की कमी महसूस की जा रही है। विधानसभा उपाध्यक्ष हंस राज के पास लोग अपनी समस्याओं को लेकर संपर्क कर रहे हैं। लोगों की बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए बीते रोज हंस राज बर्फ़बारी के बीच पैदल की टेपा व देवी कोटी पंचायत का हाल जानने निकल पड़े थे लेकिन टेपा में ही फंस गए। वहां से वो बमुश्किल वापस आज चम्बा पहुंचे है।
भारी नुकसान
विधानसभा उपाध्यक्ष हंस राज ने कहा की जिले में बर्फ़बारी ने भारी तबाही मचाई है। जिसको पटरी पर लौटने में समय लग सकता है। जिला प्रशासन सड़को व बिजली की बहाली करने में युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। लेकिन मौसम की लगातार बेरुखी के चलते हालात सामान्य नही हो पा रहे है।
इस बार मौसम ने चम्बा जिला में करोड़ों की क्षति पहुंचाई है। बर्फ़बारी से 70 हज़ार सेब के पेड़ धराशायी हो गए है। 28 हज़ार सेब की पेड़ बर्बाद हो चुके है। कुल मिलाकर चम्बा में क़ुदरत का कहर तबाही बनकर टूटा है।
कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में धर्मशाला विकास खंड के तहत आने वाले गांव कंड कडियाणा में रहने वाले मनोहर लाल की मदद के लिए सरकार आगे आई है। वह स्पाइन संबंधित समस्या के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं जिससे उनके परिवार के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया था। यही नहीं, उनके मकान की स्थिति भी ठीक नहीं है।
एक समाजसेवी द्वारा डाली गई पोस्ट सोशल मीडिया के जरिये मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक पहुंची, जिसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन को तुरंत हरकत में आने को कहा। अब त्वरित आर्थिक सहायता दिए जाने के साथ-साथ न सिर्फ मनोहर का इलाज शुरू हुआ है बल्कि उनके घर को बनाने के लिए पैसा जारी हो रहा है।
क्या है मामला
मनोहर लाल स्पाइन में किसी दिक्कत के कारण 90 प्रतिशत विकलांग हैं। वह कलाकार थे और ढोल बजाया करते थे। मगर पथरी के ऑपरेशन के बाद उनके कमर से नीचे के भाग ने हरकत करना बंद कर दिया। चूंकि पहले वही परिवार चलाते थे, उनके बिस्तर पर पड़ जाने से घर के आर्थिक हालात दिनोदिन बिगड़ते चले गए। उनके पास न तो रहने के लिए ढंग का मकान है औऱ न ही परिवार बीपीएल की श्रेणी में था। जनवरी से उनके नाम पर अक्षमता पेंशन भी मिल रही थी मगर सोचिए उन्हें किसी ने इसकी जानकारी ही नहीं दी थी।
सीएम ने सोशल मीडिया से लिया संज्ञान
सोशल मीडिया के जरिए इस तरह के लोगों की आवाज उठाने वाले समाजसेवी संजय शर्मा का पोस्ट जब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा तो इसकी सूचना तुरंत मुख्यमंत्री को दी गई। इसके बाद सीएम जयराम ठाकुर की ओर से कांगड़ा के डीसी संदीप कुमार तुरंत मामले की पड़ताल करके जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। इसके बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। उपायुक्त कांगड़ी की ओर से एक टीम ने मनोहर के घर पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
दोस्तो आप सभी को बहुत बहुत बधाई,आपके प्रयासों के चलते कांगड़ा प्रशासन पहुंचा मनहोर जी के घर ,दी सभी सुविधाएं,,,,,,,धन्यवाद कांगड़ा प्रशासन,,,,,, आपका संजय
सरकार की ओर से तुरंत 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इसके साथ ही घर के लिए 75 हजार रुपये की पहली किश्त जारी की गई और मनोहर के स्वास्थ्य की जांच करवाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई है।
कांगड़ा।। उत्तर प्रदेश के आगरा के मलपुरा ड्रॉप जोन में पैराजंप के दौरान हिमाचल के उपमंडल नगरोटा बगवां की बड़ोह तहसील की बूसल पंचायत के रहने वाले पैराट्रूपर अमित कुमार (27) की पैराशूट नहीं खुलने पर मौत हो गई। उन्होंने वीरवार को जहाज एएन-32 से छह हजार फीट (1.89 km) की ऊंचाई से छलांग लगाई थी लेकिन उनका पैराशूट नहीं खुला।
अमित लगभग दो किलोमीटर की ऊंचाई से सीधे जमीन पर आ गिरे थे। इसके बाद उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। अमित कुमार भारतीय वायु सेना की यूनिट भुज नौ, गरुड़ गुजरात में सेवाएं दे रहे थे।
शनिवार को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में होगा। पैराट्रूपर अमित कुमार पुत्र शक्ति चंद वीरवार की शाम अभ्यास के लिए ड्रॉप जोन में आए थे। उन्होंने जहाज से छह हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई।
पैराशूट की रस्सियों के साथ उनका हाथ भी उलझ गया, जिससे पैराशूट नहीं खुल सका। वह सीधे जमीन पर आकर गिर गए और इससे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सैन्य अस्पताल लाया गया जहां उनकी मौत हो गई। थाना सदर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
दो बार पहले भी हुए हैं हादसे
इस हादसे की परिजनों को जानकारी दी गई थी लेकिन वे वहां नहीं पहुंच सके। इसके बाद पार्थिव शरीर को शुक्रवार दोपहर को पठानकोट पहुंचाया, वहां से कांगड़ा के लिए भेजा गया गया। इंस्पेक्टर थाना सदर ने बताया कि पैराशूट नहीं खुलने की वजह से हादसा हुआ था।
अमित कुमार 2010 में वायु सेना में भर्ती हुए थे। वह कुछ समय पूर्व ही छुट्टी काटकर घर से ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी शादी करीब दो साल पहले ही हुई थी। उनके दो भाई हैं। शुक्रवार को उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य गम में डूब गए।
उपायुक्त संदीप कुमार ने इस हादसे की पुष्टि की है। 23 मार्च, 2018 को पलवल, हरियाणा निवासी सुनील कुमार की पैराशूट नहीं खुलने से जान चली गई थी। उन्होंने आठ हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई थी। वहीं आठ नवंबर 2018 को भी पंजाब के पटियाला निवासी हरदीप सिंह की मौत हो गई थी। वह 11 हजार फीट की ऊंचाई से कूदे थे।
अमित पुरी, धर्मशाला।। धर्मशाला की रहने वाली अंजलि कांगड़ा जिले की पहली महिला टैक्सी चालक हैं। अंजलि ने बताया कि उन्होंने अपने भाई को टैक्सी चलाते देख प्रेरणा मिली थी।
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर विदेशी महिलाओं ने महिलाओं ओर लड़कियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया। एक संस्था ने लड़कियों को गाड़ी चलाना सिखाने का बीड़ा उठाया है।
अभी तक कांगड़ा जिले में महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा है। इस माध्यम से लड़कियां स्वरोजगार हासिल कर सकती हैं।
अंजलि ने बताया कि उन्होंने एक साल में टैक्सी चलाना सीख लिया। अब वह टैक्सी चला कर अपनी रोजगार कमा रही हैं। अंजलि अकेली टैक्सी चला कर सवारियों को उनके ठिकाने तक पहुंचाती हैं।
इन हिमाचल डेस्क।। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर हमने कोशिश की है हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाली उन महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाने की जिन्होंने प्रतिकूल हालात में कुछ ऐसा काम किया जिसकी मिसाल दी जा सकती है। आज हिमाचल प्रदेश की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में कामयाब हैं। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, राजनीति का, फिल्म और कला का, विज्ञान का या कारोबार का। ऐसे में सभी का नाम तो इस सूची में आ नहीं पाएगा। इसलिए हमने उन नामों को इसमें सम्मिलित किया है, जो उस समय प्रेरणा का स्रोत बने जब हालात आज के मुकाबले और भी सख्त और प्रतिकूल हुआ करते थे और उनके कामों ने न सिर्फ महिलाओं बल्कि पुरुषों और हर शख्स को प्रभावित किया।
किंकरी देवी
किंकरी देवी ऐसा नाम है जिन्होंने पर्यावरण बचाने को लेकर ऐसा संघर्ष किया कि पूरी दुनिया में उनके नाम की चर्चा हुई। सिरमौर के दूर-दराज इलाके में घांटो संगड़ाह में जन्मीं किंकरी देवी ने गिरिपार इलाके में अवैध और अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे खनन के खिलाफ आवाज उठाई थी। 1940 को जन्मीं किंकरी देवी ने विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल, ज्ञापन भेजकर लोगों को जागरूक किया कि ये जो अवैध ढंग से खदानों में खनन किया जा रहा है, यह ठीक नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि पैसे कम थे तो उन्होंने संघर्ष का खर्च निकालने के लिए मंगलसूत्र तक बेच दिया था।
80 के दशक के बीच में उन्होंने महिलाओं को एकजुट किया और अन्य संगठनों को साथ लेकर एक व्यापक अभियान छेड़ा था। उन्होंने ग्रामीणों को पढ़ाई-लिखाई और खासकर ल़ड़कियों को भी स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने खनन माफिया के खिलाफ सरकारों को कार्रवाई करने के लिए कहा। सरकारें तो ढीली रहीं मगर 1987 में दायर एक जनहित याचिका पर 1991 में फैसला आया और 50 से ज्यादा खदानें बंद हो गईं।
किंकरी देवी (बीच में)
आज हिमाचल की नई पीढ़ियां भले ही किंकरी देवी के बारे में न जानती हों मगर पूरी दुनिया ने उनको सराहा है। 2001 में भारत सरकार ने उन्हें स्त्री शक्ति नैशनल अवॉर्ड दिया था। मगर उससे पहले 1998 में चीन की राजधानी बीजिंग में हुए महिला सम्मेलन का शुभारंभ किंकरी देवी से ही करवाया गया था। 30 दिसंबर 2007 को बीमारी के बाद किंकरी देवी का निधन हो गया था मगर हिमाचल की नई पीढ़ियों पर हमेशा उनकी कर्जदारी रहेंगी।
गंभरी देवी
“खाणा-पीणा नंद लैणी हो गंभरिये…” गाने वाली गंभरी देवी। साल 1922 में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बंदला गांव में जन्मीं। बचपन से नाचने और गाने की शौकीन थीं। छोटी उम्र में शादी कर दी गई मगर अपने जुनून को कायम रखा। जब वो गातीं और अभिनय करते हुए नाचती तो हर कोई अलग ही दुनिया में पहुंच जाता। उनकी ख्याति अपने गांव, जिले से दूर पहुंची और लोग उन्हें कार्यक्रमों में बुलाने लगे। जिस किसी को पता चलता कि फ्लां जगह गंभरी आ रही हैं, वहां भीड़ जुट जाती।
गंभरी देवी
उनकी टीम में बसंता (बसंत पहलवान उर्फ पिस्तू) नाम के एक शख्स थे जो बहुत शानदार ढोलक बजाया करते। बसंता ढोलकी की थाप पर तान छेड़ते और गंभरी सुरीली आवाज से सुरों की ऐसी बारिश करतीं कि घंटों तक लोग मंत्रमुग्ध रहते। लंबे समय तक वह गाती रहीं, लोगों का मनोरंजन करती रहीं। साल 2013 में 91 साल की उम्र में उनका निधन हुआ। उनके गीत आज भी नई पीढ़ी के गायकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और जनता का मनोरंजन।
रानी खैरागढ़ी- ललिता
मंडी रियासत के राजा रहे भवानी सेन की पत्नी ललिता खैरागढ़ रियासत की राजकुमारी थीं, इसीलिए उन्हें रानी खैरागढ़ी कहा जाता था। साल 1912 में राजा भवानी सेन का निधन हो गया। राजा भवानीसेन और ललिता के कोई अपनी संतान नहीं थी मगर बालक जोगिंदर सेन को गोद लिया गया था। जोगिंदर सेन मंडी रियासत के वारिस तो थे मगर संरक्षक की भूमिका निभा रही उनकी मां ललिता ने पुत्रमोह के बजाय देशप्रेम को प्राथमिकता दी। रानी खैरागढ़ी ने क्रांति का रास्ता अपना लिया। उन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले लाला लाजपतराय के संगठन के लिए काम किया। उन्होंने आजादी के लिए संघर्ष करने वालों को आर्थिक योगदान तो दिया ही, खुद भी सक्रिय भूमिका निभाई।
बम बनाने का प्रशिक्षण भी उन्होंने लिया था। मंडी में गदर पार्टी के कई सदस्य सक्रिय थे और रानी खैरागढ़ी उनके संरक्षक की भूमिका में थीं। साल 1914 में योजना बनाई गई कि नागचला स्थित सरकारी खजाने को लूट लिया जाए। पंजाब से क्रांतिकारियों की तरफ से बनाए गए बम भी मंगवाए गए थे। क्रांतिकारी मंडी में अंग्रेज सुपरिटेंडेंट, वजीर और अन्य अंग्रेज अफसरों को उड़ाना चाहते थे। नागचला में खजाने को तो लूट लिया गया, मगर दलीप सिंह और पंजाब के क्रांतिकारी निधान सिंह पकड़े गए। पुलिस ने इन्हें भयंकर यातनाएं दीं और उन्होंने सभी सदस्यों के बारे में जानकारी दे दी।
बद्रीनाथ, शारदा राम, ज्वाला सिंह, मियां जवाहर सिंह और लौंगू नाम के क्रांतिकारियों को पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया। बात रानी खैरागढ़ी की आई तो उन्हें रियासत से निकाल दिया गया। कोई और होता तो हार मान लेता या झुक जाता, मगर रानी ललिता ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने लखनऊ में प्रवास के दौरान कांग्रेस में सक्रियता से हिस्सा लेना शुरू किया। उन्होंने असहयोग आंदोलन में भी हिस्सा लिया और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी चुनी गईं।
साल 1938 में मंडी रियासत का सिल्वर जुबली समारोह था। बेटे जोगिंद्रसेन, जो मंडी के राजा थे, ने मां को लखनऊ से मंडी बुलाया। मां चल दी, लेकिन मन में एक ही आग थी कि अंग्रेज दफा होने चाहिए इस देश से। आज के जोगिंद्रनगर (सुक्राहट्टी) में हराबाग नाम की जगह है, जहां पर क्रांतिकारियों के साथ वह बैठक कर रही थीं। गांववालों ने क्रांतिकारियों के लिए खाना भेजा मगर वह शायद खराब था। रानी को हैजा हो गया और उनका निधन हो गया। अफसोस कि देश को आजाद देखे बिना ही वह इस दुनिया से चली गई।
नोरा रिचर्ड्स
नोरा रिचर्ड्स हिमाचल में जन्मी नहीं थीं मगर हिमाचल उनकी कर्मभूमि रहा है। 1876 में आयरलैंड में जन्मीं नोरा अभिनेत्री थीं। थिएटर की दुनिया में उनका नाम बड़े अदब से याद किया जाता है। 60 साल उन्होंने पंजाब (जिसमें उस समय आज के हिमाचल का बड़ा हिस्सा शामिल था) में थिएटर को मजबूत करने का काम किया। 1920 में उनके पति की मृत्यु हुई तो इंग्लैंड चली गईं मगर 1924 में भारत आ गईं।
नोरा रिचर्ड्स
वो कांगड़ा घाटी में बसीं और अंद्रेटा में रहने लगीं। दरअसल कांगड़ा घाटी में कई अंग्रेजों ने जमीन जायदाद बना ली थी। ऐसे की एक अंग्रेज अधिकारी ने इंग्लैंड जाने से पहले नोरा को अपनी संपत्ति दे दी थी जिसका नाम वुडलैंड्ट एस्टेट था। नोरा गांव के लोगों में रहीं और मिट्टी का कच्चा मकान बनाया जैसा आम लोगों का था। घर का नाम उन्होंने रखा- चमेली निवास।
यहां उन्होने ड्रामा स्कूल खोला जहां पर खुले में उनके स्टूडेंट गांव वालों के सामने नाटक करते। पृथ्वीराज कपूर और बलराज साहनी जैसे बड़े नाम भी यहां आया करते। बाद में प्रोफेसर जय दयाल, चित्रकार शोभा सिंह और फरीदा बेदी जैसे लोग जो नोरा के दोस्त थे, वे भी वुडलैंड एस्टेट में रहे। जिस दौर में अंग्रेज और अंग्रेजीदां भारतीय यहां की परंपराओं का मजाक उड़ाया करते थे, नोरा अपने नाटकों के जरिये उन परंपराओं और मान्यताओं का समर्थन करती थीं। उन्होंने नाटकों के जरिये समाज में फैली बुराइयों को दूर करने का भी काम किया।
ये तो कुछ ही नाम हैं। इनके अलावा भी हिमाचल प्रदेश में जन्मीं या इसे अपनी कार्यभूमि बनाने वाली महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रही हैं। लेकिन सिर्फ नाम कमाना ही उपलब्धि नहीं है। विभिन्न स्थानों पर हर महिला का योगदान अहम है। एक बार फिर शुभकामनाएं- आप स्वतंत्र रहें, निर्भीक रहें और अपने सभी सपने पूरे करें।
अमित पुरी, धर्मशाला।। शाहपुर के चंबी मैदान में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही रैली के बहाने कांगड़ा लोकसभा सीट से टिकट की चाहत में कांगड़ा के कांग्रेसी नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जहां पूर्व सरकार में परिवहन मंत्री रहे जीएस बाली ने कछियारी से लेकर चंबी तक अपनी कार्यकर्ताओं के रैली स्थल तक पहुंचे वहीं कांगड़ा से कांग्रेस के मौजूदा विधायक पवन काजल ने भी अपनी ताकत को दिखाने की कोशिश की।
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कछियारी से चंबी मैदान तक अपनी कार्यकर्ताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किया वहीं लोकसभा चुनावों में टिकट की दौड़ में सबसे माने जा रहे बाली रैली के दौरान थोड़े मायूस से नजर आए। वहीं कांग्रेस के मौजूदा विधायक पवन काजल ने राहुल की रैली में सबसे ज्यादा भीड़ जुटाने का दावा करते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। कांगड़ा से टिकट के लिए जहां सुधीर और बाली दौड़ में है वहीं पवन काजल भी इस रेस में दौड़ते दिख रहे है।
जहां सुधीर शर्मा ने रैली आयोजन स्थल पर अपने कार्यकर्ताओं के हाथों में अपने व राहुल गांधी के पोस्टर बांट कर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश बैठे-बैठे ही की। बहरहाल, रैलियों में शक्ति प्रदर्शन और समर्थकों की भीड़ ही टिकट पाने का एकमात्र जरिया नहीं होती। लोगों में स्वीकार्यता, अपने इलाके से बाहर प्रभाव, संगठन में पहुंच और अपने स्तर पर चुनाव का खर्च उठा सकने की क्षमता भी मायने रखती है। ऐसे में शक्ति प्रदर्शन में भले कोई आगे, कोई पीछे नजर आया मगर असल दम उसी वक्त पता चलेगा जब आलाकमान टिकट का फैसला करेगा।
कार्यकर्ता हुए परेशान
शाहपुर के चंबी में आयोजित राहुल गांधी की रैली प्रदेश भर से आए कार्यकतार्ओं के लिए आफत बनी रही। प्रदेश भर से आए कार्यकर्ता रैली के दौरान भूख प्यास से तरसने के लिए मजबूर थे। कड़कड़ाती धूप में हजारों कार्यकर्ता पानी पीने के लिए परेशान रहे। सुबह से ही वे रैली स्थल पर राहुल गांधी का इंतजार कर रहे थे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जहां रैली में आने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को खाना व पानी की व्यवस्था करने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदेश कांग्रेस पार्टी की यह घोषणा रैली स्थल पर सिरे चढ़ती नहीं दिखी। हजारों कार्यकर्ता चमकती धूप में भूख-प्यास से व्याकुल होकर राहुल गांधी का इंतजार करते नजर आए।
2 बजे राहुल गांधी की रैली का समय तय किया गया था, लेकिन रैली करीब एक घंटा देरी से शुरू हुई। कांग्रेस की यह रैली कुल मिलाकर अव्यवस्थाओं की मार झेलती हुई दिखी। इस रैली में जहां हजारों की संख्या में लोग दूरदराज के क्षेत्रों से आए थे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के सभी व्यवस्थाओं के दावे आयोजन स्थल पर हवा हवाई होते दिखे।
राहुल की जुबान लड़खड़ाई राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मुद्दे को लेकर कई बार राफेल जहाजों की कीमत को लेकर सहज नहीं दिखे। उन्होंने एक बार राफेल की कीमत 16000 तो दूसरी बार 16 हजार करोड़ व तीसरी बार 1600 करोड़ बता दी। गांधी की राफेल जहाजों की कीमत की पूरी जानकारी ना होना रैली में चर्चा का विषय बना रहा। रैली खत्म होने के बाद रैली में आए कांग्रेस के ही कार्यकर्ता भी इसी का जिक्र करते नजर आए।
चंबा।। पूरे देश में स्वच्छता अभियान के तहत जगह-जगह पर शौचालय बनाए जा रहे हैं और सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते चम्बा के ऐतिहासिक चामुंडा मंदिर के पास कोई शौचालय नहीं।
लंबे अरसे से लोग शौचालय के लिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक यहां प्रशासन द्वारा शौचालय की सुविधा नहीं दी गई है। इस ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन करने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग देश-विदेश से आते हैं लेकिन यहां पर शौचालय की सुविधा ना होने की वजह से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुरुष तो यहां वहां खुले में कहीं भी मजबूरी में चले जाते लेकिन महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन पुरुषों का बाहर जाना भी तो ठीक नहीं।
यहां बाहर से आए पर्यटक श्रद्धालुओं ने बताया कि चामुंडा मंदिर बहुत ही सुंदर और रमणीक स्थान है यहां का वातावरण बहुत ही शुद्ध है मगर यहां पर शौचालय ना होने की वजह से लोगों को काफी दिक्कतें होती है। उन्होंने बताया कि उन्हें भी बाहर जाना था लेकिन उन्हें यहां शौचालय ना होने की वजह से काफी मुश्किल हुई।
पर्यटकों ने स्थानीय प्रशासन और सरकार से आग्रह किया है कि इस पवित्र स्थान पर शौचालय होना जरूरी है ताकि यहां आसपास कहीं गंदगी ना फैले और लोगों को इसकी सुविधा मिले।
अमित पुरी, धर्मशाला।। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा चुनावों के चलते कांग्रेस व भाजपा में टिकट को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे है। हालांकि अभी टिकट आवंटन नही हुआ है लेकिन कांग्रेस में मण्डी व हमीरपुर की सीटों को लेकर पूर्व सीएम का हस्तक्षेप पहले ही देखने को मिल रहा है।
हमीरपुर से पूर्व सीएम ने राजिंदर राणा के बेटे अभिषेक राणा का नाम सुझाया है। अब ऐसे में देखना तो यह होगा कि अब पार्टी क्या फैसला लेती है। कई बार ऐसा देखने को मिला है कि पार्टी हाईकमान ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की बात को नजरअंदाज किया है तो नतीजे भी पार्टी के विपरीत ही आए है। ऐसा क्यों होता है, इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठते रहे हैं।
ऐसे में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी ने एक बड़ा बयान दिया है कि वीरभद्र सिंह हिमाचल में पार्टी के अपने आप मे एक संस्थान है और पार्टी में वीरभद्र सिंह को बाजू नहीं किया जा सकता। पूर्व सीएम द्वारा हमीरपुर व मंडी संसदीय क्षेत्र में दखल के कयासों के जवाब पर पाटिल ने कहा कि वीरभद्र सिंह प्रदेश में छह बार सीएम रहे हैं और पार्टी के सम्मानीय नेता हैं, ऐसे में उनकी राय तो पार्टी में अहम रहेगी ही।
धर्मशाला में सोमवार को कांग्रेस की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के साथ प्रदेश कांग्रेस प्रचार समिति के चैयरमैन पूर्व मंत्री जीएस बाली के साथ काँग्रेस के सभी नेता मौजूद रहे। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की 7 मार्च को होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए नेता व कार्यकर्ता एक साथ काम कर रहे हैं।
7 मार्च को होने वाली राहुल की रैली को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल की पत्रकार वार्ता #congress #bjp #live
In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಮಾರ್ಚ್ 4, 2019
उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की नाकामियों को लेकर कांग्रेस जनता के बीच जाएगी। केंद्र सरकार ने चुनावों के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें स्वयं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जुमले कह चुके हैं।”
पाटिल ने कहा कि रैली को ऐतिहासिक बनाया जाएगा, जिसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को टारगेट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने चुनावों के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें धरातल पर नहीं उतारा गया है। पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार की असफलताओं बारे जनता को जागरूक किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक के मांगें जा रहे सबूतों बारे रजनी पाटिल ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले ही कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए और हम सब अपने नेता की बात पर अटल हैं। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति शहीदों का अपमान होगा, ऐसे में सर्जिकल स्ट्राइक पर हमें कुछ नहीं कहना है।
कांगड़ा।। टांडा अस्पताल में जहां लोग अपनी बीमारी को लेकर डॉक्टर को दिखाने पहुंच रहे थे वहीं अस्पताल की एसआरएल लैब के कर्मचारी बेसुध सोए मिले।
ये इसलिए क्योंकि ये कर्मचारी भांग के पकौड़े खाकर सोए पड़े थे। बता दें कि यह प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल है। टाण्डा अस्पताल में 4 से 5 जिलों के लोग इलाज करवाने के लिए आते है लेकिन यहां आज कर्मचारी बेसुध भांग के नशे में सोए मिले।