प्रधानमंत्री के दौरे के चलते चंबा में 10 किलोमीटर के दायरे में सभी स्कूल बंद

चंबा।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चंबा दौरे के कारण चंबा के चौगान के 10 किलोमीटर के दायरे के सभी सरकारी और निजी स्कूल आज बंद रखे गए हैं। डीसी चंबा की ओर से बुधवार को ही ऐसे आदेश जारी किए गए थे।

ऊना में वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने, ट्रिपल आई का उद्घाटन करने और बल्क ड्रग फार्मा पार्क का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री चंबा पहुंचेंगे।

यहां वह दो हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट्स का शिलान्यास किया जाएगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण का शुभारंभ किया जाएगा।

कांग्रेस और मुकेश अग्निहोत्री क्यों ले रहे फेक न्यूज का सहारा?

इन हिमाचल डेस्क।। चुनाव आते ही नेताओं द्वारा फर्जी पोर्टलों और प्रॉपगैंडा पेजों के आधार पर जनता को गुमराह करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। कुछ पाठकों ने हमें लिंक भेजकर हमसे गुजारिश की थी कि नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री द्वारा शेयर की गई एस पोस्ट और एक अन्य फेसबुक पेज पर डाले गए वीडियो की सच्चाई बताएं। पड़ताल करने के बाद हमने पाया कि दोनों ही पोस्ट्स प्रामाणिक नहीं हैं।

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने अपने फेसबुक पेज पर एक स्क्रीनशॉट डाला है और लिखा है कि ‘बीजेपी खुद मान रही है कि भाजपा के जीतने की संभावना नहीं है।’

Hello Himachal वास्तव में कांग्रेस द्वारा चलाया जा रहा है

अग्निहोत्री ने ‘हेलो हिमाचल’ नाम के पेज की रिपोर्ट को शेयर करते हुए लिखा है कि अब तो भाजपा खुद मान रही है। मगर पड़ताल करने पर पता चला कि हेलो हिमाचल नाम का यह पेज वास्तव में कांग्रेस के लिए काम कर रही एक एजेंसी द्वारा संचालित किया जा रहा है। यानी नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस संचालित पेज पर पोस्ट कॉन्टेंट को एक रिपोर्ट बताते हुए जनता को एक तरह से गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

हेलो हिमाचल पेज पर DEVOUT GROWTH MEDIA PVT LTD नाम की कंपनी कांग्रेस समर्थक पोस्ट्स डालकर उन्हें विज्ञापन के तौर पर बूस्ट कर रही है। इनमें कांग्रेस के नेताओं के बयान हैं जिन्हें प्रचारित किया जा रहा है। नीचे इस पेज की ऐड लाइब्रेरी पर बूस्ट की जा रही पोस्ट्स देखें-

हेलो हिमाचल द्वारा चलाए जा रहे विज्ञापन

आप स्वयं भी यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं कि Hello Himachal पेज फेसबुक पर पेड प्रमोशन करके क्या चला रहा है।

कांग्रेस समर्थित पेज पर फर्जी वीडियो
यही नहीं, कांग्रेस समर्थित एक पेज अपना हिमाचल, अपनी कांग्रेस में खुद से वीडियो बनाकर खबर की तरह से एक वीडियो डाला गया है जिसमें सर्वे में बीजेपी की हार का दावा किया गया है। मगर यह वीडियो भी फर्जी है।

Himachal Breaking का लोगो लगाकर चलाया जा रहा फर्जी वीडियो

वीरभद्र की तस्वीर लगे इस पेज पर शेयर किए गए इस वीडियो में न तो किसी चैनल का जिक्र है, न किसी एजेंसी का कि सर्वे किसने किया। इसमें Himachal Breaking का एक लोगो लगाया गया है मगर इस नाम का कोई चैनल हमें तलाश करने पर नहीं मिला।

दरअसल, इस पेज के संचालक ‘जोइया मामला सुनदा नहीं’ नाम का पेज भी चलाते हैं जिसमें मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने, लात मारने, रावण व गजनी के रूप में दिखाने वाले वीडियो डाले जा रहे हैं। इस पेज को ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि इसे कर्मचारी चलाते हैं, मगर वास्तव में इसे अमित कुमार सिंह नाम के व्यक्ति चला रहे हैं जो पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं।

मुख्यमंत्री को लात मारने वाले वीडियो के बाद फिर विवाद में आया कांग्रेस संबंधित पेज

आपको भी यदि किसी सोशल मीडिया पोस्ट या खबर आदि पर संदेह तो inhimachal.in@gmail.com पर हमें भेजें। हम कोशिश करेंगे कि यथाशीघ्र उनका फैक्ट चेक करके सही जानकारी लोगों तक पहुंचाएं।

भाजपा 25 तो कांग्रेस इन 23 सीटों पर बदल सकती है प्रत्याशी, देखें

इन हिमाचल डेस्क।। चुनाव आचार संहिता लगने में कुछ ही दिन का समय बचा है लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी ने टिकटों की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस इस मामले में सबसे आगे लग रही थी मगर अब तक उसने किसी भी सीट पर टिकट का एलान नहीं किया है। भारतीय जनता पार्टी तो पहले ही कह रही थी कि आचार संहिता लगने के बाद ही उसकी ओर से टिकट दिए जाएंगे। लेकिन इतना तय है कि इस बार दोनों प्रमुख पार्टियां बड़े पैमाने पर प्रत्याशी बदलने जा रही है।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में साढ़े तीन दशक बाद ऐसा माहौल बनता दिख रहा है जिसमें विश्लेषक, पत्रकार और राजनेता; सभी की राय बंटी हुई है। कुछ का कहना है कि सरकार बदलने का रिवाज बना रहेगा तो कुछ का मानना है कि इस बार रिवाज बदलने की संभावना है। मगर भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि उनके आंतरिक सर्वे साफ संकेत दे रहे हैं कि सत्ता में आना है तो इस बार बड़े फैसले करने होंगे, कई सारी सीटों पर प्रत्याशी बदलने होंगे।

इस बार दोनों ही पार्टियां 35 से 40 प्रतिशत सीटों पर अपने प्रत्याशी बदल सकती है। जिन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट दिया गया था, उनकी जगह नए प्रत्याशी को उतारने के मामले में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों की ही स्थिति एक जैसी नजर आ रही है। जमीनी परिस्थितियों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि भारतीय जनता पार्टी 25 तो कांग्रेस 23 सीटों पर नए उम्मीदवार उतार सकती है।

पहले बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी की। बीजेपी अभी सत्ता में है और स्वाभाविक है कि उसके विधायकों को सत्ता विरोधी भावना का ज्यादा सामना करना पड़ेगा। ये हैं वे 25 सीटें, जहां पार्टी टिकट बदल सकती है-

1.भरमौर
2.चम्बा सदर
3.कांगड़ा
4.धर्मशाला
5.ज्वालाजी
6.देहरा
7.पालमपुर
8.फतेहपुर
9.करसोग
10.नाचन
11.जोगिंदर नगर
12.सरकाघाट
13.आनी
14.बंजार
15.कुल्लू
16.हरौली
17.ठियोग
18.रामपुर
19.जुब्बल-कोटखाई
20.नालागढ़
21.रेणुकाजी
22.बड़सर
23.हमीरपुर
24.भोरंज
25.सुजानपुर 

इसी तरह कांग्रेस भले विपक्ष में है लेकिन वह जानती है कि उसके पास रिवाज के आधार पर सत्ता में आने का मौका है। लेकिन यह मौका छिन सकता है, अगर कैंडिडेट कमजोर हुए। तो जिन 2३ सीटों पर टिकट बदले जा सकते हैं, वे इस तरह से हैं:

  1. चुराह

  2. इंदौरा

  3. देहरा

  4. जयसिंहपुर

  5. सुलह

  6. नगरोटा बगवां

  7. कांगड़ा

  8. शाहपुर

  9. मनाली

  10. बंजार

  11. करसोग

  12. नाचन

  13. जोगिन्दर नगर

  14. भोरंज

  15. हमीरपुर

  16. बिलासपुर सदर

  17. झंडूता

  18. चिंतपूर्णी

  19. नालागढ़

  20. पच्छाद

  21. चौपाल

  22. ठियोग

  23. शिमला अर्बन

बहरहाल, कुछ दिनों में दोनों पार्टियों की लिस्ट जारी हो जाएगी और स्पष्ट हो जाएगा कि कहां से कौन प्रत्याशी होगा। टिकटों का बंटवारा हिमाचल प्रदेश में बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूरे हिमाचल में किसी एक नैरेटिव या मुद्दे के आधार पर मतदाताओं का रुझान तय नहीं होता। हर सीट के अपने समीकरण होते हैं। ऐसे में हर बार की तरह सरकार उसी पार्टी की बनेगी जो जिताऊ कैंडिडेट को टिकट देने के साथ-साथ अपने लोगों को बागी होने से रोक पाएगी।

मनाली में मुरारी बापू से मिले सीएम जयराम ठाकुर, कंगना के साथ किया नाश्ता

कुल्लू।। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के समापन पर पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार सुबह मनाली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मनाली में आए भारत के प्रसिद्ध संत मुरारी बापू के दर्शन किए। फिर सिमसा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत से मिलने पहुंचे। इस दौरान कंगना रनौत के माता-पिता भी उपस्थित रहे और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनके साथ सुबह का नाश्ता भी किया।

मुख्यमंत्री के साथ मनाली के स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने कंगना रनौत के साथ भेंट की। आधा घंटा से ज्यादा दोनों के बीच मंत्रणा हुई है। हालांकि इस मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई, इस बारे में कुछ सामने नहीं आ पाया है। लेकिन चुनाव की दहलीज़ पर खड़े हिमाचल प्रदेश में इस मुलाकात को राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बीते दिनों ही कंगना रनौत सुकून के पल बिताने मनाली पहुंची हैं।

कंगना ने मनाली के सिमसा में अपना आशियाना बनाया हुआ है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की किसी को खबर नहीं थी। अचानक सुबह पौने नौ बजे सीएम का काफिला मनाली सर्किट हाउस से निकला और सीधे सिमसा जाकर रुका। लोगों को लगा कि काफिला शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के घर जा रहा है। लेकिन काफिला सीधा कंगना रनौत के घर पहुंच गया।

कंगना भी दो दिन पहले ही पहुंची हैं सिमसा
बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत के घर के आसपास रहने वाले लोग सुबह सुबह सीएम के काफिले को सिमसा में देख हैरान हाे गए। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने आधा घंटा कंगना से शिष्टाचार भेंट की। हालांकि शिक्षा मंत्री तो पड़ोसी होने के नाते कंगना से मिलते रहते हैं। लेकिन सीएम मोदी पहली बार कंगना से मिलने सिमसा पहुंचे।

गौर रहे कि  कंगना रनौत का भारतीय जनता पार्टी की ओर झुकाव ज्यादा है। वह पीएम मोदी से भी काफी प्रभावित हैं व कई बार उनके कार्यों की तारीफ कर चुकी है। अब चुनावी बेला में मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर की अचानक बॉलीवुड अभिनेत्री से मुलाकात कई तरह के कयास लगा रही है। चर्चा यह भी तेज हो गई है कि क्‍या कंगना चुनाव लड़ने जा रही हैं।

सरकाघाट में फिलहाल बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल है जीत की राह

देवेंद्र।। विधानसभा चुनावों के लिए दो प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा व कांग्रेस में टिकट आवंटन को लेकर जैसे-जैसे इंतजार लंबा खिंच रहा है, वैसे ही अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं व मतदाताओं की धड़कने भी तेज़ होती जा रही हैं। जिन क्षेत्रों में टिकट आवंटन को लेकर स्थिति साफ है, वहां तो दोनों दलों को कोई दिक्कत नहीं। लेकिन जहां टिकटों को लेकर आपसी खींचतान व असमंजस की स्थिति है, वहां कांग्रेस तथा भाजपा के लिए हार व जीत का संशय भी बिल्कुल इसी तरह बरकरार है। मंडी जिले के सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो पिछले कुछेक चुनावों से यह सीट लगातार प्रदेश के लिए हॉट सीट बनी हुई है।

सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र से 7 बार प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रंगीला राम राव को पिछले चुनाव में विधानसभा टिकट नहीं मिल पाया लेकिन इस बार टिकट के लिए वे अपनी दावेदारी जता चुके हैं। वर्तमान विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर भाजपा के टिकट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और चौथी बार भी टिकट को लेकर अपनी दावेदारी जता रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस के टिकट से पिछली बार चुनाव लड़ने वाले पवन ठाकुर मान रहे हैं कि इस बार भी उन्हीं को टिकट मिलेगा। जबकि प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष यदुपति ठाकुर ने भी टिकट को लेकर ताल ठोक दी है। कांग्रेस में युवाओं को टिकट मिलने की फेहरिस्त में उनका नाम भी चर्चा में चला हुआ है।

भाजपा में मौजूदा विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर के अलावा जिला पार्षद चंद्र शर्मा भी बीजेपी से टिकट चाहते हैं। वहीं सरकाघाट में भाजपा संगठन को खड़ा करने वाले और संगठन के लिए चुपचाप बिना अपनी महत्वाकांक्षाओं को जाहिर किए काम करने वाले भाजपा जिलाध्यक्ष दलीप ठाकुर भी टिकट के दावेदार बताए जा रहे हैं। इसी तरह प्रदेश भाजपा सचिव के पद पर नियुक्त डाक्टर सीमा ठाकुर का नाम भी चर्चा के रूप में सामने आता है।

भाजपा को लेकर निराशा
सरकाघाट में कांग्रेस हो या भाजपा, किसी भी दल को जीतना है तो उसमें चेहरा बहुत अहम भूमिका निभाएगा। वर्तमान में विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर पर जिस तरह क्षेत्र की अनदेखी व क्षेत्र के विकास के लिए मौन रहने के आरोप लगते रहे हैं, उससे इस बार इनकी राह इतनी आसान नहीं लगती। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि जो विकास या जो कुछ काम सरकाघाट के लिए रंगीला राम राव के मंत्री रहते हुए, उसके बाद सरकाघाट में कुछ भी विशेष नहीं हो पाया।

कर्नल इंद्र सिंह

किसी समय प्रदेश में सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र अग्रणी होता था लेकिन आज अपने पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर से भी पिछड़ गया है। जहां भाजपा का एक गुट कर्नल से अभी भी नाराज है, वहीं बहुत से कार्यकर्ताओं का कहना है कि हमारी अनदेखी कर विरोधियों को तवज्जो दी गई। भाजपा अगर नाराज कार्यकताओं को साथ लाकर जीत दर्ज करना चाहती है तो वह नए चेहरे पर भी दांव खेल सकती है। वक कोई ऐसा चेहरा हो सकता है, जिसकी संगठन से लेकर पार्टी व आमजन तक पकड़ हो। इस लिहाज से दलीप ठाकुर का पलड़ा थोड़ा भारी लग रही है।

कांग्रेस की आपसी कलह
वहीं कांग्रेस की स्थिति यहां तब मजबूत हो सकती है, जब रंगीला राम राव को टिकट मिलता है। जिन लोगों को लगता है कि सरकाघाट की अनदेखी हुई है, वे राव के पीछे लामबंद हो सकते हैं। वह इसलिए कि अगर वे जीतते हैं और कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो कांग्रेस में वरिष्ठ होने के चलते उन्हें मंत्री पद अवश्य मिलेगा। लोगों में इस बात को लेकर भी कहीं न कहीं दर्द है कि कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर को तीन बार जिताने के बावजूद मंत्री पद नहीं मिला।

रंगीला राम राव

कांग्रेस की आपसी कलह जगजाहिर है। पिछली बार पवन ठाकुर बहुत कम मार्जन से हारे थे और इस हार का एक प्रमुख कारण गुटबाजी को भी माना गया। इस बार भी यदि पवन ठाकुर को टिकट मिलता है तो लगता नहीं कि रंगीला राम राव व यदुपती ठाकुर मन से उनके साथ चल पाएंगे।  लेकिन पार्टी यदि रंगीला राम राव को टिकट देती है तो पुराने कांग्रेसी मंत्री पद मिलने की उम्मीद में उनके साथ चल सकते हैं। लेकिन उस स्थिति में पवन और यदुपति की भूमिका भी अहम रहेगी।

स्थितियां टिकट आवंटन के बाद साफ हो जाएंगी। लेकिन इतना तय है कि सरकाघाट की राह दोनों ही प्रमुख दलों के लिए आसान नहीं दिख रही है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। उनसे jahubhamblabum@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है)

हिमाचलवासियों के लिए अनंत कष्टों के पहाड़ का अंत है एम्स का खुलना

राजेश वर्मा।। आज विजयादशमी के सुअवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर(एम्स) का लोकार्पण कर इसे प्रदेशवासियों को समर्पित किया। लगभग 5 साल 2 महीनों में बनकर तैयार हुआ यह संस्थान प्रदेशवासियों के लिए किसी सपने के साकार होने से कम नहीं। 2015-16 के आम बजट में हिमाचल में एम्स खोलने की घोषणा हुई थी। ऐसी घोषणा जिससे लगा प्रदेशवासियों के जख्मों को मरहम लग गया।

प्रदेश में एम्स जैसे संस्थान की जरूरत आज से नहीं बल्कि पिछले कई दशकों से महसूस की जा रही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अक्तूबर 2017 को इसकी आधारशिला रखी थी । 250 एकड़ भूमि में फैले एम्स कैंपस लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है, जिसमें 750 बिस्तरों वाला अस्पताल होगा। शुरू में भले ही 150 बेड की ही सुविधा मिलेगी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाया जाएगा। एम्स में आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण 15-20 सुपर स्पेशिलिटी विभाग होंगे। 25 ओपीडी एम्स अस्पताल में पहले से ही शुरू हो चुकी हैं और अब एम्स में आईपीडी सुविधा शुरू होना प्रदेशवासियों  के लिए गौरव की बात है।

अभी तक केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों में केवल आयुष्मान योजना के तहत ही लाभान्वित को निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध थी लेकिन अब हिमकेयर योजना के तहत पंजीकृत 25 लाख से ज्यादा आबादी को 5 लाख रुपये तक के सालाना निःशुल्क उपचार की सुविधा भी एम्स में मिलेगी। अत्याधुनिक उपकरणों व तकनीक से सुसज्जित इस संस्थान में सभी प्रकार के टैस्ट व स्कैन जैसे एमआरआई थ्री टेस्ला आदि स्थापित किए गए हैं। ये वे टैस्ट व स्कैन हैं जिन्हें करवाने के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली तक जाना पड़ता था। अब अपने क्षेत्र में होंगे इस राहत को वही समझ सकता है जो इस पीड़ा से गुजरा हो।

प्रदेश वासी टकटकी लगाए देख रहे थे कि यह संस्थान अब खुलता कब खुलता। प्रदेश के लिए यह सौभाग्य की बात है कि वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे तब उनकी प्रदेश के प्रति संवेदनशीलता की वजह से ही आज राष्ट्रीय स्तर के स्वस्थ्य संस्थान का सपना प्रदेशवासियों के लिए साकार हुआ। बहुत कम राजनेता ऐसे हैं जो इस बात को समझते हैं कि प्रदेश में मौजूदा स्वास्थ्य संस्थानों की क्या हालत है यहाँ के कई जोनल अस्पताल ऐसे हैं जिनकी हालत पीएचसी से भी बदत्तर है, हर छोटी से छोटी बीमारी के लिए भी यहां से लोगों को या तो पीजीआई चंडीगढ़, आईजीएमसी शिमला या फिर टांडा के लिए रैफर कर दिया जाता है।

एम्स बिलासपुर

किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित या दुर्घटना में घायल व्यक्ति को किसी नजदीकी अस्पताल में लाया जाता है तो उसे वहां प्राथमिक उपचार देने के बाद सीधे ही जोनल अस्पताल में रैफर कर दिया जाता है। आगे जब उसी व्यक्ति को जोनल अस्पताल में लाया जाता है तो वहां से भी उसे आगे रैफर कर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर बात करें हमीरपुर जोनल अस्पताल की तो वहां से टांडा के लिए रैफर किया जाता है भले ही व्यक्ति की हालत वहां तक पहुंचने के लायक हो या न हो आगे टांडा पहुंचने के बाद भी गांरटी नहीं की व्यक्ति को वहां उचित उपचार मिल पाएगा वहां से भी उसे शिमला या चंडीगढ़ के लिए रैफर कर दिया जाता है और इस रैफर के चक्कर में आप खुद ही समझ सकते हैं कि उस व्यक्ति के बचने के कितने प्रतिशत चांस होंगे।

जिस व्यक्ति को हमीरपुर या मंडी से टांडा होते हुए फिर वापस उसी रास्ते शिमला से पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया हो उसके व उसके परिवार के लिए प्रदेश में इससे दुर्भाग्यशाली और क्या होगा की एक बेहतर स्वास्थ्य संस्थान न होने के कारण उनके किसी सदस्य को जान से हाथ धोना पड़ा तथा असहनीय मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। शायद यह जगत प्रकाश नड्डा ही थे जिन्होंने इस दर्द को अपना दर्द समझ कर एम्स जैसा संस्थान यहाँ खोलने की तरफ़ पहल ही नहीं की बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचाया।

प्रदेशवासी शुक्रगुज़ार हैं उनके इस जनहित कार्य के लिए। आज भी प्रदेश के बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहां 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटो लग जाते हैं। जहां लोगों को जिला अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है वहीं शिमला चंडीगढ़ या टांडा पहुंचने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकते।

प्रदेशवासी स्वास्थ्य सेवाओं से  ही लाभान्वित नहीं होंगे बल्कि इसके साथ ही हमारे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी यह संस्थान नए अवसर व खुशियां लेकर आया है। प्रदेश के वे युवा जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से चिकित्सक या पैरामेडिकल की पढ़ाई करके अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा पाले हुए हैं उनके लिए प्रदेश में खुले एम्स संस्थान में यह अवसर उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं के सपनों को नए पंख लगेंगे।

एम्स जैसे संस्थान को खुलने को लेकर भी शुरू में जमकर राजनीति हुई कोई कहता था मंडी खुले तो कोई कहता हमीरपुर लेकिन एक आम नागरिक के लिए एम्स का खुलना सर्वोपरि है न कि यह मायने रखता है कि एम्स कहां खुला? एक छोटे से पहाड़ी प्रदेश में इस तरह की राजनीति कतई सहन नहीं की जा सकती थी। यदि जगत प्रकाश नड्डा की एम्स के प्रति संवदेनशीलता नहीं होती तो यह भी आज राजनीति की भेंट चढ़ चुका होता। ठीक है जनप्रतिनिधियों के लिए तो देश में कहीं भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए प्रदेश में ऐसे संस्थान खुलना किसी सपने से कम नहीं बशर्ते राजनीतिज्ञ ऐसे सपनों को पूरा होने दें।

बीमारी या दुर्घटना किसी को पूछ कर नहीं आती न ही यह अमीर गरीब देखती है। न ही बीमारी यह देखती है कि आप सत्ताधारी दल से हैं या विपक्ष से। आज सभी को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान की जरूरत है चाहे वे कोई मजदूर हो या कोई बड़ा अधिकारी या राजनेता, आप ताउम्र चंडीगढ़ या दिल्ली में ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं उठा सकते पता नहीं कब आपको या आपके परिवार को भी प्रदेश में किस वजह से बेहतर स्वास्थ्य संस्थान की जरूरत आन पड़े।

भविष्य में भी प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों व जनप्रतिनिधियों को प्रदेशवासियों के हित के लिए मिलकर कुछ करना चाहिए यदि ये लोग सोचते हैं की कुछ बनने से दूसरे नेता या दल को लाभ मिलेगा तो यह इनकी भूल है। एम्स प्रदेशवासियों के लिए ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों के लिए भी मददगार साबित होगा। हम अब फख्र से कह सकते हैं कि स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रदेश आत्म निर्भर बनने की ओर अग्रसर हो चुका है।

इतने कम समय में यहां की विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद एम्स का प्रदेश के लोगों की सेवा में शुरू होना सचमें ही अभूतपूर्व व अकल्पनीय सपना साकार होने के बराबर है। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि पहाड़ी प्रदेश में एम्स का खुलना प्रदेशवासियों के लिए पहाड़ जैसे दुखों का अंत होगा।

(स्वतंत्र लेखक राजेश वर्मा लम्बे समय से हिमाचल से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे vermarajeshhctu@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

शुरू में टांडा मेडिकल कॉलेज को ही AIIMS बनवा रहे थे वीरभद्र और कौल सिंह

डेस्क।। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर एम्स का उद्घाटन करने जा रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस नेताओं, विशेषकर प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर एक वीडियो डालकर कहा है कि 2014 में वीरभद्र सिंह ने एम्स को मंजूरी दे दी थी और आज उनका सपना पूरा हो रहा है। लेकिन रोचक बात यह है कि 2017 के आखिर तक वीरभद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे कौल सिंह ठाकुर दावा कर रहे थे केंद्र सरकार द्वारा की गई एम्स की घोषणा हवा-हवाई है। फिर सवाल उठता है कि 2014 में वीरभद्र ने किस एम्स को मंजूरी दे दी थी और वह एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते एक केंद्रीय संस्थान AIIMS को कैसे मंजूरी दे सकते थे?

दरअसल, 2014 में जब केंद्र ने एम्स के लिए जगह ढूंढने की चिट्ठी भेजी तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार की अदूरदर्शिता ही कही जाएगी कि उन्होंने नया संस्थान लेने के बजाय पहले से मौजूद टांडा मेडिकल कॉलेज को AIIMS बनाने की सिफारिश कर डाली थी।

क्या है यह पूरा मसला, आइए एक-एक पॉइंट को लेकर समझें।

दिसंबर 2014 में विंटर सेशन चल रहा था। उस समय राज्य में वीरभद्र सिंह की सरकार थी और केंद्र में मोदी सरकार बने छह महीने हो चुके थे। प्रश्न काल के दौरान तत्कालीन बीजेपी विधायक गुलाब सिंह ठाकुर ने एम्स को लेकर सवाल किया था। उस पर जवाब देते हुए सरकार की ओर से बताया गया कि अब तक इस मामले में क्या-क्या डिवेलपमेंट हुआ। जानकारी दी गई कि 12 डीसी से कहा गया है कि वे बताएं कि उनके जिले मे कहां पर एम्स बनाया जा सकता है। आखिरी फैसला लेने के बाद उस जमीन को केंद्र को दे दिया जाएगा।

उस साल का घटनाक्रम बिंदुवार इस तरह से है:

1. केंद्र ने संस्थान के लिए जगह ढूंढने को कहा
जून 2014 में जब मोदी सरकार बनी थी, तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 राज्यों को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वे अपने यहां एम्स जैसे संस्थान के निर्माण के लिए 200 एकड़ जमीन तलाश करें।

2. हिमाचल सरकार नहीं ढूंढ पाई जमीन
केंद्र से आई इस चिट्ठी का जवाब एक महीने के अंदर दिया जाना था। यानी एक महीने के अंदर प्रदेश सरकार को जमीन फाइनल करके केंद्र सरकार को उसकी जानकारी देनी थी। मगर वीरभद्र सरकार जमीन ही नहीं ढूंढ पाई।

3. हिमाचल सरकार ने दिया अनोखा सुझाव
तय वक्त पर जमीन ढूंढ पाने में नाकाम रही हिमाचल सरकार ने केंद्र को अनोखा सुझाव दे दिया। वीरभद्र सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखी चिट्ठी में सुझाव दिया कि अगर एम्स बनाना है तो क्यों न टांडा मेडिकल कॉलेज को ही एम्स में बदल दिया जाए।

4. केंद्र ने ठुकराया हिमाचल सरकार का प्रस्ताव
टांडा मेडिकल कॉलेज को एम्स में बदलने का प्रस्ताव केंद्र ने ठुकरा दिया। केंद्र ने कहा कि पहले से ही मेडिकल कॉलेज को कैसे एम्स में बदल दिया जाए। केंद्र का कहना था कि बात नए एम्स जैसे संस्थान की स्थापना की हो रही है, न कि किसी पुराने संस्थान को अपग्रेड करके एम्स बनाने की।

5. 2014 में टल गया एम्स का प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तय वक्त में जमीन का चुनाव न कर पाने और फिर उसके सुझाव के खारिज हो जाने का नतीजा यह निकला कि हिमाचल में एम्स के मुद्दे पर साल 2014 में कोई प्रगति नहीं हो सकी। प्रदेश सरकार फिर जमीन ढूंढने में लग गई और 12 जिलों के डीसी को अपने यहां एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन तलाश करने को कहा गया।

एम्स बिलासपुर

इस पूरे प्रकरण से न सिर्फ राज्य सरकार के कामकाज के तौर-तरीके का पता चलता है, बल्कि यह भी साफ होता है कि वह कितनी अदूरदर्शी रही। इसलिए, क्योंकि:

  1. सरकार ने कभी नहीं सोचा कि अगर कोई बड़ा संस्थान बनाना हो तो उसके लिए जमीन कहां-कहां उपलब्ध है। अगर सरकार के पास विजन होता तो वह पहले से ही हर जिले में जगहें ढूंढकर अपने रेकॉर्ड में रखती।
  2. सरकार के पास विज़न नहीं था। अगर जगह तय नहीं हो पाई थी, तो वह केंद्र से कह सकती थी कि थोड़ा और वक्त दिया जाए। मगर बजाय इसके यह लिखा गया कि टांडा मेडिकल कॉलेज को एम्स बना दिया जाए।
  3. उसे महसूस नहीं हुआ कि अगर एक और उच्च स्तरीय हॉस्पिटल खुलेगा तो यह लोगों के लिए फायदेमंद ही है। डांटा मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने का सुझाव देने से साफ होता है कि प्रदेश सरकार ने अपने सिर से बला टालनी चाही।

इसके बाद हुई प्रगति
तपोवन में विधानसभा सत्र के समापन के बाद 2014 के आख़िरी सप्ताह में वीरभद्र कैबिनेट ने बिलासपुर के कोठीपुरा में चिह्नित 200 एकड़ जमीन को एम्स के लिए देने की मंजूरी दी।

फिर मई 2015 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने जगह का दौरा किया और अतिरिक्त जमीन मांगी। राज्य सरकार ने इसके बाद अतिरिक्त जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की।

इसके बाद तीन साल तक विशेष प्रगति नहीं हुई। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह देरी के लिए केंद्र सरकार को कोसते रहे। पत्रकारों के सवाल पर वह कहते कि हमने तो सब कर दिया, नड्डा जी से पूछो। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तो यह कह दिया था कि चुनाव नजदीक होने के कारण शिलान्यास नहीं हो रहा।  इस बीच सांसद अनुराग ठाकुर भी जेपी नड्डा को चिट्ठियां लिखते रहे जिसकी खबरें प्रकाशित होती रहीं। वहीं नड्डा का कहना था कि कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं

फिर लंबे समय बाद, 3 अक्तूबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया और 4 जनवरी 2018 को केंद्रीय कैबिनेट ने इस एम्स के लिए बजट भी मंजूर कर दिया। अब 5 अक्तूबर 2022 को इसका उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर आ रहे हैं। इससे पहले 5 दिसंबर 2021 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ओपीडी का उद्घाटन किया था।

यह आर्टिकल 2014 को  इन हिमाचल पर प्रकाशित इस लेख पर आधारित:

क्या एम्स भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा?

पीएम दौरे को लेकर ‘बीजेपी के चरित्रहीन नेता’ ट्वीट कर घिरीं अलका लांबा

बिलासपुर।।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिलासपुर दौरे से ठीक पहले कांग्रेसी नेत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा का एक ट्वीट विवादों में आ गया है। उन्होंने एक खबर को ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘बीजेपी के चरित्रहीन नेता हिमाचल के चरित्रवान पत्रकारों के कैरेक्टर सर्टिफिकेट माँग रहे हैं – वाह मोदी जी वाह।’

दरअसल बिलासपुर पुलिस की ओर से यह सूचना जारी हुई थी कि प्रधानमंत्री के दौरे की कवरेज के लिए आ रहे पत्रकारों के पास एसपीजी के मानकों के आधार पर क्लियरेंस के लिए चरित्र प्रमाण पत्र होना चाहिए। हालांकि, बाद में हिमाचल पुलिस प्रमुख संजय कुंडू ने ट्वीट करके बताया कि इसकी आवश्यकता नहीं होगी और पुलिस पत्रकारों के साथ हर तरह का सहयोग करेगी। संबंधित पत्र को वापस भी ले लिया गया है।

मगर अलका लांबा के ट्वीट पर भारतीय जनता पार्टी ने आपत्ति जताई है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप ने अलका लांबा के ट्वीट को कोट करते हुए लिखा है कि अलका लांबा क्या चाहती हैं। उन्होंने अलबा लांबा की भाषा को लेकर भी आपत्ति जताई है।

सुरेश कश्यप ने लिखा है- “अलका लांबा स्पष्ट करें कि उनका आशय क्या है? हिमाचल आने के बाद वह लगातार अमर्यादित टिप्पणियां कर रही हैं। प्रधानमंत्री जी के प्रति कांग्रेस की दुर्भावना छिपी नहीं है। मगर इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना शर्मनाक और निंदनीय है।”

 

कौन हैं कौल सिंह के ‘हनुमान’ बामन देव ठाकुर जो अचानक चर्चा में आ गए हैं

आई. एस. ठाकुर।। आचार संहिता लगने में अब शायद दो हफ्ते का ही समय बचा है लेकिन आम आदमी पार्टी को छोड़कर किसी भी पार्टी ने टिकटों की घोषणा नहीं की है। ऐसी खबरें आई थीं कि कांग्रेस ने अधिकतर टिकट फाइनल कर लिए हैं और लिस्ट भी जारी होने वाली है। लेकिन किसी तरह का असंतोष न भड़के, यह सोचते हुए लिस्ट जारी नहीं की गई। माना जा रहा है कि इस लिस्ट में कई ऐसे नाम गायब हो सकते हैं, जो अपना टिकट तय मानकर चल रहे हैं। कांग्रेस सर्वे के आधार पर कुछ नए चेहरों को टिकट देने की घोषणा तो पहले ही कर चुकी है।

जब कांग्रेस ने लिस्ट जारी नहीं की तो ऐसी खबरें आईं कि वरिष्ठ नेताओं के टिकट भी होल्ड पर हैं, भले ही वो जिताऊ क्यों न हों। इन में दो नाम सोशल मीडिया पर छाए रहे। एक- पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर और दूसरे हैं- पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा। बताया जा रहा है कि दोनों के नाम कथित तौर पर होल्ड पर जाने के लिए अलग कारण हैं। सुधीर शर्मा की वजह तो यह बताई गई कि पार्टी को उन्होंने दो मौकों पर चुनाव लड़ने से मना किया था- एक तो लोकसभा चुनाव के दौरान कांगड़ा से लड़ने के लिए और फिर धर्मशाला सीट पर हुए उपचुनाव से लड़ने के लिए। वहीं कौल सिंह ठाकुर को लेकर यह तर्क दिया गया कि वह G 23 नाम से जाने जाने वाले कांग्रेस नेताओं से उस समूह में शामिल थे, जिन्होंने खत लिखकर एक तरह से गांधी परिवार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे। चूंंकि उस समूह के ज्यादातर नेता या तो हाशिये पर हैं या पार्टी छोड़ चुके हैं, वैसे में कौल सिंह ठाकुर को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका टिकट कट सकता है।

कौल सिंह ठाकुर

इस बीच सवाल उठने लगा कि कौल सिंह ठाकुर नहीं तो और कौन? यह चर्चा सोशल मीडिया पर होने लगी कि कौल सिंह को अगर किसी स्थिति में टिकट नहीं मिलता है तो इस बार बामन देव ठाकुर को मौका मिल सकता है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में रह रहे लोग भले इस नाम को न जानते हों मगर  बामन देव ठाकुर दरंग और जोगिंद्र नगर में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं और वह लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय हैं। अभी भी वह दरंग ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। कौल सिंह ठाकुर के करीबी और उनके हनुमान कहे जाने वाले बामन देव ठाकुर पिछले कम से कम दो चुनावों से दरंग से टिकट के दावेदार माने जाते हैं। मगर कौल सिंह ठाकुर ने दो बार अपना आखिरी चुनाव बताया और फिर मैदान में आ गए और बामन देव ठाकुर के हाथ से मौका जाता रहा।

जमीन पर पहचान
वरिष्ठ और जिताऊ होने के कारण कौल सिंह के टिकट को कभी चुनौती नहीं मिल पाई और बामन देव ठाकुर ने भी कभी खुलकर टिकट की मांग नहीं की। संभवत: बामन देव भी यही चाहते होंगे कि जब कौल सिंह राजनीति से खुद हटेंगे, तभी वह आगे आएंगे। इसलिए भी क्योंकि वह कौल सिंह ठाकुर के हनुमान कहे जाते हैं और उनके राजनीतिक सलाहकार भी हैं। ग्राउंड पर कौल सिंह का चुनाव प्रबंधन देखने का काम हमेशा से बामन देव ठाकुर के हाथ रहा है। वह चौहार घाटी के जटिल भौगोलिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। ठेकेदार हैं और साथ ही एक एनजीओ के माध्यम से भी सामाजिक कार्यों में जुड़े रहे हैं।  कौल सिंह ठाकुर के बाद बामन देव के अलावा दरंग कांग्रेस में और कोई ऐसा नेता नहीं माना जाता जो जनता के बीच पहचाना जाता हो।

एनजीओ के माध्यम से सामाजिक कार्य भी करते रहे हैं बामन देव ठाकुर

राजनीतिक समझ के मामले में भी वह बाकी प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ते हैं। अगर आज ओल्ड पेंशन हिमाचल के चुनावों में मुख्य मुद्दा बना है तो राजनीतिक विश्लेषक इसके लिए भी बामन देव ठाकुर को श्रेय देते हैं। यह कौल सिंह ठाकुर ही थे जिन्होंने उस समय से ओल्ड पेंशन की मांग को समर्थन देना शुरू किया था, जब कांग्रेस का और कोई नेता इस पर बात नहीं करता था। कौल सिंह लगातार इस मुद्दे पर अड़े रहे और आज ने सत्ता में आने के लिए इसी को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। माना जा रहा है कि कौल सिंह ठाकुर को इस मुद्दे का महत्व समझाने और आगे उठाने के लिए मनाने वाले भी बामन देव ठाकुर ही थे, जो जानते थे कि कर्मचारियों के लिए यह विषय कितना संवेदनशील है।

आज स्थिति यह है कि कांग्रेस ने की 10 गारंटियों में पहली गारंटी ओल्ड पेंशन बहाली है और भारतीय जनता पार्टी को इसकी कोई काट नहीं मिल रही। और बीजेपी के आसपास हुई घेराबंदी इतनी मजबूत है कि न तो बीजेपी के नेता खुलकर इसका विरोध कर पा रहे हैं, न ही समर्थन। एक ओर कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर बनी हुई है, दूसरी ओर कर्मचारी भी सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक इस मांग पर अड़े हुए हैं। खास बात यह है कि ओल्ड पेंशन की मांग को इतना व्यापक बनाने और कर्मचारियों को लामबंद करके विधानसभा के बाहर पहुंचाने में जिन प्रदीप ठाकुर का महत्वपूर्ण योगदान है, वह बामन देव ठाकुर के बेटे हैं।

गांधी जयंती पर कुछ यूं नजर आए प्रदीप ठाकुर

‘वोट फॉर ओपीएस’ अभियान
एनपीएस कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर लंबे समय से ओपीएस मांग रहे कर्मचारियों का शांतिपूर्वक ढंग से सफल नेतृत्व कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि जुझारूपन, नेतृत्व क्षमता और धैर्य – ये सब इन्हें विरासत में मिले हैं। एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि आज अगर ओपीएस मुख्य चुनावी मुद्दा बना है तो इसमें पिता-पुत्र की जोड़ी का भी अहम योगदान है। अब तो प्रदीप ठाकुर के नेतृत्व में ओल्ड पेंशन के लिए संघर्षरत कर्मचारियों ने ‘वोट फॉर ओपीएस’ का अभियान भी शुरू कर दिया है। ऐसे में अगर ओपीएस की बहाली होती है तो इसका श्रेय कर्मचारियों की एकजुटता के साथ-साथ उनके नेता प्रदीप ठाकुर को तो मिलेगा ही, कौल सिंह ठाकुर और उनके जरिये इसे बड़ा मंच देने वाले बामन देव ठाकुर को भी जाएगा।

बशर्ते…
बहरहाल, यह तो स्पष्ट है अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए गंभीर है तो वह नहीं चाहेगी कि दरंग, धर्मशाला या अन्य किसी सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक अपने नेताओं के टिकट काटकर किसी और को दें। क्योंकि ऐसी स्थिति में उन नेताओं की नाराजगी उसे महंगी पड़ सकती है। ऐसे में ज्यादा संभावना इसी बात की है कि दरंग में इस बार कौल सिंह ठाकुर को ही टिकट मिलेगा। ऐसी स्थिति में बामन देव को पांच साल और इंतजार करना पड़ सकता है। बशर्ते, अगली बार भी कौल सिंह अपना आखिरी चुनाव बताकर फिर मैदान में न उतर आएं।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश के विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

DISCALIMER: ये लेखक के निजी विचार हैं।

जसवां परागपुर: कैप्टन संजय पराशर ने पेश किया अपना विजन

परागपुर।। जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजसेवी कैप्टन संजय पराशर ने चुनावी हुंकार भर दी है। शनिवार को कैप्टन ने परागपुर के नक्की खडड से विजन डाक्यूमेंट 1.0 जारी कर जनता को बता दिया कि जनता ने साथ दिया तो वह किस तरह से कार्य करेंगे। पराशर ने कहा कि मैंने क्षेत्र की जनता की आदत डाल ली है, ऐसे में जनता को भी मेरी आदत डाल लेनी चाहिए। कैप्टन ने क्षेत्र की अधिकतर पंचायतों का दौरा करके जो समस्याएं सामने आई हैं, उनको आधार बनाकर विजन डाक्यूमेंट जारी किया है। पराशर हर आम, खास की समस्या समझते हैं, यही वजह है कि विजन डाक्यूमेंट में स्पष्ट किया है कि मेरे लिए राजनीति जनसेवा का मंच है। इसके अतिरिक्त विजन डाक्यूमेंट में जनकल्याण योजनाएं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, नारी शक्तिकरण, युवा वर्ग, पर्यटन, कृषि व पशुपालन, पेयजल, पंचायत स्तर पर व्यवस्था, सड़क व परिवहन, पारदर्शी प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण, गरीबी उन्मूलन, सिंचाई सुविधा, सामाजिक सरोकार और महत्वपूर्ण मुद्दों का भी संकल्प लिया है।

जनसमर्थन सभा को संबोधित करते हुए पराशर ने कहा कि क्षेत्र में जो काम होना चाहिए था, वो नहीं हो पाया है। हमने अपने संसाधनों से सुधार का प्रयास किया है और उसमें काफी हद तक सफल भी हुए हैं। यदि हम अपने संसाधनों से इतना कर सकते हैं तो क्षेत्र की जनता विधानसभा भेजती है तो इससे कई गुणा अधिक काम करके दिखाएंगे। पराशर ने कहा कि क्षेत्र की जनता ही मेरी टिकट है और जनता जनार्दन जिसके साथ होती है, जिसे आशीर्वाद देती है, वो हमेशा सफल होता है।

पराशर ने कहा कि मैं विधानसभा पहुंचा तो क्षेत्र की जनता की बेटा, भाई, भतीजा, भांजा बनकर सेवा करूंगा। अपने वेतन को गरीबों के मकान निर्माण में लगाउंगा। सरकारी योजनाएं, जिनकी आम जनता को जानकारी नहीं मिल पाती, उन योजनाओं की जानकारी पंचायत स्तर तक पहुंचाने के लिए काम किया जाएगा।

बेसहारा गौवंश की समस्या काफी ज्यादा है। ऐसे में गौवंश की समस्या से निपटने के लिए इस तरह की व्यवस्था की जाएगी, जहां पर 4000 बेसहारा गौवंश को आश्रय मिल सके। जसवां परागपुर में यह समस्या काफी अधिक है, ऐसे में आपका बेटा संजय पराशर समस्याओं के समाधान को आगे आएगा।

पराशर ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से जसवां परागपुर को विकसित किया जाएगा। जैसे लोग कुल्लू-मनाली या विदेश घूमने जाते हैं, मेरा सपना है कि उसी तरह लोग जसवां परागपुर भी घूमने आएं। जनता ने विधायक बनाया तो पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, इस तरह की स्थितियां होंगी कि विदेशी गोरे और गोरियां भी वीजा लगाकर जसवां-परागपुर घूमने आने को ललायित होंगे।

पराशर ने कहा कि मैं विधायक बना तो हर तीन माह बाद अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखूंगा कि मेरे द्वारा क्षेत्र में तीन माह में कौन-कौन से कार्य किए गए हैं। साथ ही हर छह माह में पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा। हर तीन माह बाद विकास कार्यों की समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। क्षेत्र के विकास के लिए भविष्य की योजनाएं क्षेत्रवासियों के परामर्श व मार्गदर्शन से तैयार की जाएंगी।

कैप्टन ने कहा कि मैं जन सेवा के लिए राजनीति उतरा हूं, ऐसे में जनता के आशीर्वाद से विधायक बना तो साल के 365 दिनों में से मात्र 15 दिन परिवार को दूंगा, बाकी 350 क्षेत्र की जनता की सेवा में 24 घंटे जुटा रहूंगा। क्षेत्र की जनता से अपार प्यार मिल रहा है, यही प्यार हमारा विधानसभा का मार्ग प्रशस्त करेगा।