लेख: शव के अपमान पर अफसरों और नेताओं से दो टूक

अवर्ण दीपक।। अगर तमाम मोटी किताबें, फर्राटेदार अंग्रेज़ी और महंगी तरबीयत आपको इंसानियत की इतनी सी इज़्ज़त करना नहीं सिखा सकता तो अच्छा ही होगा कि अपनी औलादों को डीसी, मेजिस्ट्रेट बनने की सपने ना देकर एक कुशल किसान ही बनाएं जो घर-गांव में अपने दुश्मन के घर हुई मौत को भी इससे बेहतर सम्मान देला सकता है.. और उस पर अब बच्चों की तरह अधिकारी आपस में लड़ रहे हैं..अपने मालिक को दिखा रहे हैं- हुजूर गलत मैं नहीं वो था..। किस काम का ऐसा प्रशासनिक ज्ञान जो आपको नौकरी बचाने से ज़्यादा और किसी काबिल नहीं बना सकता..। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने गलत नहीं कहा था- ‘शिक्षे! तुम्हारा नाश हो, तुम नौकरी के हित बनीं..’

कल्पना करके देखिए कोई तो वो रहा होगा जिसने डर से या लापरवाही से, किसी कुर्सी पर बैठे या अपने लॉन में टहलते या अपने बच्चों के साथ सोफे पर टीवी देखते अनुमोदन दिया होगा या आदेश जारी किया होगा- ‘रातो-रात जला दो’। पूछना बनता है जिन्हें ये धतकर्म करने भेजा, उन्हें कैसे बिना किसी सुरक्षा किट के मरने झोंक दिया आपने..आप ये भी पूछिए इन हाकिमों से, क्या उनकी पूरी ट्रेनिंग उन्हें आईपीसी की धारा 297 के बारे में नहीं बता पाई, जिसके मुताबिक एक शव तो क्या कब्रगाह या श्मशान घाट का अपमान भी आपको साल भर के लिए जेल पहुंचा सकता है?

आर्टिकल 21 जो गरिमामयी जीवन का हक देता है, वो तो दसवीं क्लास में पढ़ाया जाता है? इस मरहूम के पिता जब-जब अपने चश्मो-चिराग के आखिरी अपमान को याद करेंगे, क्या वो गरिमा के साथ आईने में अपनी शक्ल देख पाएंगे? इस अनुभव के बाद उसके भाई से आज्ञाकारी नागरिक होने की उम्मीद करने का हक होगा आपको? महान हिंदू धर्म का ज्ञान तो हमें बचपन से ही मिल जाता है. उसी के ग्रंथों का मान रख लेते..जिनमें सूरज ढलने के बाद अंतिम संस्कार की इजाज़त नहीं होती..।

और मां…क्या कोई भी ये अंदाज़ा लगा सकता है कि इस वक्त उसके मन में 21 साल के बेटे को खोने का ग़म ज़्यादा हावी होगा या फिर खुद की रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद अपने बेटे जैसे ही अंजाम का डर? काश उस मां के आंसू किसी ऋषि के कमंडल से निकले छींटे बनकर सभी दोषियों पर गिरें और उन्हें रोज़ सपने में डीज़ल से जली अधजली लाश दिखने का श्राप दें..।
और हमारे मालिक, हमारे आका..अपने दरबारियों पर लगी लॉकडाउन तोड़ने की तोहमत से ध्यान हटाने के लिए पहले खुद ही प्रदेश के दरवाज़े खोले.. उस वक्त तो आपने खूब फुटेज ली, बाहर फंसे बच्चों के दयावान गार्डियन बने आप..। उसके बाद सीमा पर टेस्टिंग का कोई इंतज़ाम नहीं कर सके..और जब बच्चे अपने घर, अपने गांव में बीमारी का शिकार हो ही गए तो उनसे ऐसा सलूक..। फिर आप रोज़ फरमान निकालेंगे कि बीमारी छिपाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा..। अगर आप मिसाल ही ऐसी पेश करेंगे तो कोई कैसे खुद चलकर आएगा और कहेगा कि वो बीमार है..।

आप तो 70 लाख के परिवार के मुखिया हैं. आपने तो सुना होगा अमेरिका ने अपने दुश्मन नंबर एक को भी समुद्र में ही सही, रस्मो-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार का हक दिया था..। सेना की आप कसमें खाते हैं, उनसे ही सीख लेते, किस तरह भारी हिंसा का जोखिम उठाकर भी चरमपंथियों को उनके गांवों में दफनाए जाने की इजाज़त कश्मीर में दी जाती है..। अच्छा, करगिल की जीत का झंडा तो आपकी ही पार्टी के सबसे आला नेता के हाथ ने उठाया था..उस जंग की वो तस्वीरें याद हैं आपको जब दुश्मन की लावारिस लाशों को पूरे ऐहतराम के साथ दफनाया था हमने..।

उस वक्त मुझ जैसे हर हिंदुस्तानी का सिर फख़्र से ऊंचा हुआ था..वक्त मिले तो खुद से पूछिएगा, क्या इस मामले में महज़ जांच का झुनझुना थमा देने से भी वो सिर ऊंचा हो सकता है? क्या कम से कम जांच होने तक जो भी ज़िम्मेदार हैं, उनकी छुट्टी नहीं होनी चाहिए? जो दरियादिली आपने इतना बड़ा जोखिम उठाकर प्रदेश के बच्चे-बच्चियों को वापस बुलाने में दिखाई थी, वही दरियादिली आपको इस बच्चे के परिवार से माफी मांगकर नहीं दिखानी चाहिए..। अगर सच्चे राम भक्त हैं तो जानेंगे ऐसी माफियों से कद घटते नहीं, बढ़ते ही हैं…।

(लेखक पत्रकार हैं, यह लेख उनकी फेसबुक टाइमलाइन से साभार लिया गया है)

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

शिमला: कोरोना संक्रमित का शव डीजल से जलाने पर सरकाघाट में रोष

शिमला।। आईजीएमसी शिमला में जान गंवाने वाले कोरोना संक्रमित युवक का रात को आनन फानन में अंतिम संस्कार कर दिए जाने को लेकर सरकाघाट में रोष फैल गया है। यह युवक मूलतः यहीं का था और उसकी मां को भी अब कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। लोगों में गुस्सा है कि युवक के शव को ‘लावारिस’ क्यों बताया गया और आधी रात को डीजल से जलाने की क्या नौबत आई। यह WHO की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है जिसके तहत मृतकों का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ होना चाहिए। वे फेसबुक और व्हाट्सऐप पर इस संबंध में नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं।

इस मामले को लेकर सरकाघाट के कांग्रेस नेता यदोपति ठाकुर ने भी गंभीर सवाल उठाए हैं। फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा है, “ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि आधी रात को संस्कार करना पड़ा? क्या उसके लिए सुबह तक का इंतज़ार नहीं किया जा सकता था यह कोई लावारिस बच्चा नहीं सरकाघाट व प्रदेश का बेटा था।”

आगे वह लिखते हैं, “माँ-बाप को अगर आइसोलेट कर दिया था तो उसके ओर भी रिश्तेदार थे जिनकी देखरेख में संस्कार किया जा सकता था। बेटे के माँ-बाप को अंतिम संस्कार के बाद भी तो आइसोलेट किया जा सकता था। ऐसी क्या मजबूरी थी कि उसकी बॉडी को अन-क्लेमेड घोषित कर के लावारिस की तरह आधी रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार करना पड़ा? WHO की गाइडलाइंस हैं कि अंतिम क्रिया कर्म को मृतक के धर्म के अनुसार उसके परिवार की सहमति से किया जाना चाहिए।यहां सारे नियम कायदे दरकिनार कर दिए गए”

यदोपति ने लिखा है, “हिंदू या किसी ओर धर्म के अनुसार भी अंतिम क्रिया कर्म भारत मे सूरज ढलने के बाद नहीं किया जाता। आधी रात को तो बिल्कुल भी नहीं किया जाता भले ही लाश गल सड़ गई हो। और तो और सरकार के पास क्या लकड़ी नहीं थी जो केरोसिन का इस्तेमाल करना पड़ा? हद तो यह कि केरोसिन एक बार खत्म होने पर फिर से लाया गया। क्या सरकार की संवेदनाएं मर चुकी है या फिर मुख्यमंत्री की पत्नी का जन्मदिन सरकार के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण था?”

कांग्रेस नेता ने लिखा है, “माननीय मुख्यमंत्री एक संवेदनशील इंसान हैं कम से कम वो ऐसा गुनाह नहीं कर सकते।फिर वो कोन लोग हैं जिन्होंने आधी रात को यह कृत्य किया? सारे प्रदेश ने लाइव वीडियो पर यह सब आधी रात को देखा और महसूस किया होगा कि एक मोत ने सरकार के दिमागी संतुलन को बिगाड़ दिया है तो अगर ज्यादा मौतें हो गई तो? तब तो सरकार कहीं डेड बॉडीज को खड्डों में न वहा दे य फिर इसे ही मिट्टी के तेल से सामूहिक संस्कार कर दे।”

“सरकार के पास अगर अंतिम संस्कार करने का सामर्थ्य नहीं है तो आम जनता पैसा इकट्ठा कर के यह काम विधि पूर्वक करवा सकती है।भगवान उस बच्चे की आत्मा को शांति दे पर जब उसके परिजनों को पता चला होगा तो उनपर क्या बीती होगी? ऐक तो आधी रात को क्रिया कर्म दूसरा मिट्टी के तेल के साथ। हमारे आपके किसी बच्चे के साथ ऐसा किया जाए तो हमारे ऊपर क्या बीतेगी? जलाने ओर मंत्र पढ़ने वाले पंडित तक बिना PPE किट के जबरदस्ती लाये गए थे तभी सब कुछ आनन फानन में बिना पूरा संस्कार हुए भाग गए।”

वह लिखते हैं, “जब सरकार अपनी उच्च अधिकारी SDM को किट नहीं दे रही तो पंडित ओर जलाने आये कर्मचारियों के बारे में आप सोच भी नहीं सकते। अगर मीडिया वहां न पहुंचता तो सब कुछ खामोशी से निपटा दिया गया होता। क्या यह है ” हिमाचल मॉडल ” ? अगर यही हिमाचल मॉडल है तो लानत है इस पर। देश विदेश में ऐसी बहुत सी संस्थाएं हैं जो अन-क्लेमड बॉडी का संस्कार करती हैं ।सरकार अगर असमर्थ है तो उन संस्थाओं को अंतिम क्रिया कर्म की जिम्मेदारी सौंपे पर इस तरह आधी रात को मिट्टी के तेल से अंतिम संस्कार न करे।हमारे रीति रिवाजों ओर संस्कारों में अंतिम क्रिया कर्म को भी उच्च स्थान हासिल है। अगर सही से संस्कार न हो तो माना जाता है कि मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिलती है।भगवान ! सरकार चलाने वाले लोगों को सद्बुद्धि दे।”

उनके अलावा भी बहुत से लोगों और प्रदेश के कई पत्रकारों ने इस घटनाक्रम पर नाखुशी जताई है।

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

शिमला में बिना पास पकड़े गए नोएडा से आए लोग, बॉर्डर पर कैसे हो रही चेकिंग?

शिमला।। एक ओर जहां बाहर से लौटे लोगों में कोरोना के मामले मिलने से हिमाचल प्रदेश में चिंता का माहौल पैदा हो गया है, वहीं कुछ ख़बरें ऐसी आ रही हैं जो बता रही हैं कि पुलिस की ओर से भी चूक हो रही है।

दरअसल शिमला के शोघी नाके पर बुधवार को एक गाड़ी को पकड़ा गया जो जिसपर सवार लोग नोएडा से यहाँ तक पहुँचे थे। इसमें रूसी महिला समेत चार लोगों थे जो कुल्लू के निरमंड जा रहे थे। पुलिस के पूछने पर ड्राइवर पास नहीं दिखा पाया।

पुलिस ने जब इस मामले की जानकारी शिमला के डीसी को दी गई। इनके ऊपर संबंधित क़ानून के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।

मगर यह घटना चिंता का कारण है क्योंकि शिमला तक आने के बीच कई राज्यों की सीमाएँ हैं और प्रदेश में भी कई जगह नाकेबंदी है। अगर इन लोगों के पास परमिशन नहीं थी तो वे शोघी तक कैसे पहुँच गए? क्यों इन्हें राज्य के अन्य हिस्सों में नहीं पकड़ा गया?

यह जाँच का विषय है क्योंकि ये तो लोग तो शोघी में इसलिए पकड़े गए क्योंकि इन्हें निरमंड जाना था। अगर इन्हें पहले ही कहीं रुकना होता तो पुलिस को पता तक नहीं चलता। अगर इसी तरह से सीमाओं पर चेकिंग हो रही है तो एक शंका यह पैदा होती है कि इस तरह से न जाने कितने लोग अंदर आए होंगे जिन्हें ट्रेस करना मुश्किल होगा।

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

जहां से शव वाहन गुजरा, नगर निगम शिमला वो सड़क ही कर डाली ‘सैनिटाइज़’

शिमला।। कोरोना के कारण जिस समय पूरा देश एक-दूसरे के सहयोग के लिए आगे आ रहा है, उस समय हिमाचल प्रदेश में सरकारी महकमों के बीच टोपी ट्रांसफर का खेल चल रहा है। आईजीएमसी में कोरोना पीड़ित युवक की मौत के बाद जब दाहसंस्कार की बारी आई तो अजीब हाल देखने को मिला।

आईजीएमसी की टीम रात लगभग 11 बजे सरकाघाट के युवक के शव को श्मशान घाट छोड़ आई। नगर निगम शिमला भी शुरुआत में टालमटोल करता रहा। देर रात तक एसडीएम सिटी नीरज चांदला वहाँ रहीं। उन्होंने अधिकारियों को जानकारी दी तो नगर निगम के कर्मचारी पीपीई किट पहनकर वहाँ पहुँचे। इसके बाद देर रात अंतिम संस्कार हो पाया।

इस पूरे मामले को लेकर अब नगर निगम के आयुक्त ने सफाई में जो बातें कही हैं, वे हैरान करने वाली हैं। इससे ये भी पता चलता है कि कैसे महकमे अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं और कोरोना को लेकर या तो उन्हें ज्ञान नहीं है या फिर पता होते हुए भी सरकारी पैसे की बर्बादी कर रहे हैं। इनमें से एक है- सड़क को ही ‘सैनिटाइज’ कर देना।

क्या किया नगर निगम ने
बुधवार को पूरे हिमाचल के मीडिया में यह मामला उछला कि नगर निगम ने युवक के अंतिम संस्कार से दूरी बना ली। इसे लेकर निगम के संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने एक समाचार पत्र से कहा है कि उन्होंने गाइडलाइन के अनुसार काम किया है। उन्होंने कहा, “रात नौ बजे तक जिला प्रशासन की ओर से संपर्क नहीं किया। जब एक वेबसाइट से हमें जानकारी मिली तो तैयारी की। दस बजे ही एक अधिकारी की अगुवाई में छह कर्मचारी मौके पर भेजे थे। आईजीएमसी से लेकर कनलोग तक की सड़क को सैनिटाइज किया। सुबह भी सैनिटाइजेशन की है।”

अजीत भारद्वाज ने कहा कि सड़क को आईजीएमसी से लेकर शवदाहगृह तक सैनिटाइज किया गया है। यह हैरानी की बात है कि ऐसा करने की आखिरी जरूरत क्या थी। जब शव को वाहन में ले जाया गया तो सड़क को सैनिटाइज़ क्यों किया गया? क्या नगर निगम के अधिकारियों को नहीं मालूम कि वायरस कैसे फैलता है, कैसे नहीं? जहां शव को रखा गया,जिस वाहन में ले जाया गया, उन्हें सैनिटाइज़ करना तो समझ आता है। ऐसा तो था नहीं कि शव से वायरस सड़क पर फैल रहा हो। ऐसा किस दिशानिर्देश के तहत किया गया?

आईजीएमसी से कनलोग की दूरी लगभग आठ किलोमीटर है। इतनी लंबी सड़क को ढंग से सैनिटाइज यदि करना भी हो तो कितना पानी (जिसमें ब्लीचिंग पाउडर घोला जा रहा है) लगेगा, यह आप अंदाज़ा लगा सकते हैं। और नगर निगम के लॉजिक के हिसाब से अगर सड़क में वायरस हो सकता है तो आसपास के वाहनों और घरों में भी तो हो सकता है। फिर वहाँ आपने क्या किया?

हालाँकि, यह स्पष्ट है कि यह वायरस स्वतंत्र रूप में हवा में ट्रैवल नहीं करता। व्यक्तियों के छींकने, खाँसने या उनके थूक आदि शारीरिक द्रव्यों के संपर्क में आने पर ही कोरोना संक्रमण फैलने का ख़तरा होता है। इस संबंध में सरकार ने भी कहा है कि WHO के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। ये दिशा निर्देश कहते हैं कि यदि किसी की मौत कोरोना या से हुई है तो उसका पोस्टमॉर्टम करते समय फेफड़ों को सही से हैंडल करना चाहिए। साथ ही, अंतिम संस्कार के समय भी सावधानी बरतनी चाहिए और शरीर से निकले किसी भी तरल के संपर्क में नहीं आना चाहिए। ऐसा कोई दिशा निर्देश नहीं है कि सड़क को भी सैनिटाइज किया जाए क्योंकि यह बेतुका काम है। अगर शव दाहगृह 50 किलोमीटर होता तो क्या पूरी सड़क पर छिड़काव करती फिरती नगर निगम की टीम?

बहरहाल, नगर निगम के अधिकारी भारद्वाज ने अखबार को दिए इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में कहा कि निगम का केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार कोई रोल नहीं है और दिल्ली में भी ऐसा हो चुका है। उन्होंने कहा कि ‘केंद्र और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों में यह स्पष्ट है कि नगर निगम सैनिटाइजेशन करेगा और पीपीई किट मुहैया करवाएगा।’

फिर जब उनसे पूछा गया कि ऐसा था तो आपने बाद में कर्मचारी क्यों भेजे, तो उनका कहना था कि यह लड़ाई का समय नहीं, हमें मिलकर काम करना है और आगे भी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि नगर निगम का काम पीपीई किट देना है। मगर जब उनसे पूछा गया कि शवदाहगृह के कर्मचारियों के पास किट नहीं थे तो उन्होंने कहा, “ये शवदाहगृह हमारे अधीन नहीं हैं, कमेटियों के अधीन हैं। इन्हें पीपीई किट न देने का सवाल है तो ये बात पहले बतानी चाहिए थी। हमने कर्मचारियों को ये किट मुहैया करवाई है और एक-दो दिन में सभी शवगृहों के कर्मचारियों को देंगे।”

इस घटनाक्रम से साफ़ है कि सरकार को पहले तो अपने अधिकारियों को बताना चाहिए कि कहां उन्हें क्या करना है, क्या नहीं। इससे पहले तो ये बताया जाए कि वायरस कैसे फैलता है, कैसे नहीं।

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

अब कांगड़ा में सामने आया कोरोना संक्रमण का नया मामला

धर्मशाला।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कोरोना का एक नया मामला सामने आया है। जामानाबाद कांगड़ा के एक व्यक्ति की कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बताया जा रहा है कि दुबई से लौटा युवक दिल्ली में था और फिर 27 अप्रैल को वहां से चार अन्य लोगों के साथ हिमाचल लौटा था।

इस शख्स को कांगड़ा के पास छेब स्थित क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। मरीज को टांडा मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही हिमाचल में अब तक 43 कोरोना पॉजिटिव मामले आ चुके हैं।इस तरह अब सक्रिय मामलों की संख्या तीन हो गई है।

सिरमौर जिले का एक कोरोना पॉजिटिव मरीज सोलन के काठा अस्पताल में भर्ती है। दूसरा मरीज जोगिंद्रनगर का नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। दो मरीजों की मौत हो चुकी है। प्रदेश के पांच जिले शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और किन्नौर में कोरोना वायरस का कोई मामला नहीं है।

राज्य में अब तक 15777 लोगों को निगरानी में रखा गया। इनमें से 6831 लोगों ने 28 दिन की जरूरी निगरानी अवधि को पूरा कर लिया है और सभी स्वस्थ्य हैं। राज्य में अब तक 7893 लोगों की कोरोना को लेकर जांच की गई है। 34 लोग स्वस्थ होकर घर चले गए हैं। इसके अलावा चार लोग हिमाचल से बाहर चले गए हैं।

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

डॉ. आशीष नड्डा।। ये बात है 1978-79 के हिमाचल की। उस समय सड़क परिवहन में सार्वजनिक यातायात के साधन इतने विकसित नहीं हुए थे। ज़िला हमीरपुर की बड़सर तहसील में एक गाँव है- बरोटी, जो समताना उखली इलाक़े के पास है। आजकल वो गाँव शायद बिझड़ तहसील में होगा।

एक गाँव का एक बुज़ुर्ग और उनका एक नौजवान बेटा नीचे पहाड़ी उतरकर बिलासपुर-हमीरपुर रोड पर पैदल भोटा की तरफ़ चल रहे थे। शाम का समय था, लोग पशुओं को घरों की ओर हांक रहे थे। मैड़ गाँव का पुल पार करने पर एकदम घना जंगल शुरू होता था। दोनों व्यक्ति डूबते सूरज की अंतिम किरणों का फ़ायदा लेने के चक्कर में तेज़-तेज़ चल रहे थे।

सड़कों पर उस ज़माने में इक्का-दुक्का वाहन ही गुज़रा करते थे। टियाले-दा-घट मंदिर के पास उन्हें बिलासपुर की तरफ़ से आता एक वाहन दिखा। हेडलाइट ही चमक रही थी, गाड़ी क्या थी पता नहीं चल रहा था। दोनों ने कंधे पर रखा साफ़ा हाथ में पकड़ा और लिफ़्ट लेने के लिए हाथ बढ़ाकर लहरा दिया।

गाड़ी और इन लोगों को पीछे छोड़कर चंद कदमों की दूरी पर रुक गई। अंदर बैठे व्यक्ति से इन्होंने कहा कि हमें भोटा तक जाना है। गाड़ी वाले ने दोनों को बिठा लिया। कार में सफ़ारी सूट पहनकर बैठे भद्रपुरुष ने पूछा- क्या आप भोटा की तरफ़ के है, घर जा रहे हैं?

इस पर बुज़ुर्ग ने बताया वो बरोटी गाँव के हैं और उनका बड़ा बेटा भोटा डिस्पेंसरी में एडमिट है। बुजुर्ग ने बताया कि वो छोटे बेटे के साथ रात का खाना लेकर वहाँ रुकने जा रहे हैं। बस, इतनी सी बात हुई। बाक़ी सफ़र में गाड़ी के अंदर ख़ामोशी पसरी रही। गाड़ी में पीछे भद्रपुरुष के साथ दोनों पिता-पुत्र बैठे थे और आगे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर कोई और आदमी पहले से बैठा हुआ था।

जब गाड़ी भोटा चौक पर पहुँची तो नौजवान ने ड्राइवर से कहा कि आप यहीं हमें उतार दीजिए। ड्राइवर गाड़ी रोकने ही वाला था कि उनके साथ पिछली सीट पर बैठे भद्रपुरुष ने कहा कि हॉस्पिटल तो थोड़ा दूर ऊना की तरफ़ वाले रोड पर है। ड्राइवर इशारा भाम्प गया और गाड़ी हॉस्पिटल रोड की तरफ़ मुड़ गई।

गाड़ी जब परिसर के अंदर दोनों व्यक्तियों को छोड़ने पहुँची तो अँधेरा हो चुका था। बुज़ुर्ग और नौजवान ने गाड़ी से उतरकर अंदर बैठे लोगों का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया। इतने में फ़्रंट सीट पर बैठे शख़्स ने पूछा- “क्या आपने पिछली सीट पर बैठे महोदय को पहचाना?”

बुज़ुर्ग और नौजवान ने जब चेहरे पर अनभिज्ञता के भाव लाए तो प्रश्न पूछने वाले ने ही जबाब दिया, “ये आपके और हम सब के प्रदेश हिमाचल के मुख्यमंत्री श्री शांता कुमार हैं।“ इसी के साथ गाड़ी अपने रास्ते निकल गई।

ये वाक़या मुझे इन बुजुर्ग के पोते और अस्पताल में एडमिट रहे शख़्स के बेटे डॉक्टर नीरज जसवाल ने बताया। आज न नीरज जी के दादा इस संसार में हैं न पिताजी। नीरज भी दिल्ली में अपना हेल्थ सेंटर चलाते हैं। लॉकडाउन के दौरान इन दिनों वो भी घर पर हैं। इसी दौरान घर पर हुई चर्चा में अपने चाचाजी से उन्हें यह वाक़या सुनने को मिला जो उस शाम अपने पिताजी के साथ गाड़ी में बैठे थे।

(लेखक हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से हैं और लंबे समय से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। यह वाक़या उनकी फ़ेसबुक टाइमलाइन से साभार लिया गया है। इसे कोविड लॉकडाउन के दौर में पहली बार प्रकाशित किया गया था।)

https://inhimachal.in/interesting/story-of-a-leader-and-his-friend/

नगरोटा बगवां में रेल की पटरी के किनारे मिला अधजला शव

काँगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के नगरोटा बगवां में रेल ट्रैक पर एक अधजली लाश मिली है। स्थानीय लोगों ने सुबह शव पड़ा देखा तो पुलिस को ख़बर दी। पुलिस ने शव को क़ब्ज़े में लेकर छानबीन शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि जहां पर शव मिला है, वहाँ आग भी जली है। इससे ऐसा लग रहा है कि शव को जलाने की कोशिश की गई है। यह शव एचआरटीसी की वर्कशॉप के पास बरामद हुआ है।

लॉकडाउन के कारण ट्रेन सर्विस बंद होने के कारण यह माना जा रहा है कि किसी ने हत्या करके शव को यहाँ फेंका होगा। हालाँकि, पुलिस अभी तक कुछ नहीं कह पाई है। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद मामला थोड़ा साफ़ होने की उम्मीद है।

सीएम ने की हिमाचल भवन चंडीगढ़ के काम की तारीफ

शिमला,  एमबीएम न्यूज।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोलन में उद्योग विभाग के महाप्रबंधक और हिमाचल भवन चंडीगढ़ के ओएसडी राजीव कुमार को प्रशंसा पत्र जारी किया है।

मुख्यमंत्री ने प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार ने हिमाचलियों को वापस लाने का फैसला लिया था, जिसे धरातल पर क्रियान्वित किया गया। उन्होंने एचएएस अधिकारी राजीव कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही चंडीगढ़ में फंसे लोगों की घर वापसी सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जाहिर की कि वो भविष्य में भी इस तरह की सेवाएं प्रदान करते रहेंगे। चंडीगढ़ से अब तक 3945 हिमाचलियों की घर वापसी सुनिश्चित हुई है।

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3, 4 व 5 मई को क्रमश: 1314, 1239 व 1006 को वापस लाया गया। इससे पहले 25 व 26 अप्रैल को 386 लोग वापस पहुंचे थे।

(यह खबर सिंडिकेशन के तहत प्रकशित की गई है)

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अब पंजाब से हिमाचल में नहीं लाया जा सकेगा पशुओं का चारा

हमीरपुर।। अब पंजाब से चारा नहीं लाया जा सकेगा। पशुओं के लिए अगर कोई चारा लाने के पंजाब जाना चाहता है या वहां के व्यापारी हिमाचल आना चाहते हैं तो इस संबंध में पहले जारी किए गए पास मान्य नहीं होंगे। दरअसल नांदेड़ से लौटे पंजाब के कुछ श्रद्धालुओं में से कई कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के पंजाब जाने पर पाबंदी लगाई है।

कहां से लाते हैं चारा
हिमाचल प्रदेश के पशुपालक तूड़ी, फीड लाने के लिए पंजाब के अमृतसर, दसूहा सहित अन्य स्थानों पर जाते हैं। लॉकडाउन में पशुपालकों को चारे की समस्या के मद्देनजर विभाग ने इनके कर्फ्यू पास जारी किए थे, लेकिन अब पंजाब में कोरोना पॉजिटिव मामले बढ़ने के बाद पशुपालन विभाग ने फिलहाल पशुपालकों की अंतर राज्य आवाजाही पर पाबंदी लगा दी है।

पशुपालन विभाग हमीरपुर में सहायक उप निदेशक डॉ. विपिन का कहना है कि फिलहाल पंजाब जाने के लिए पशुपालकों पर रोक लगा दी है। नांदेड़ से लौटे लोगों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में अगले आदेश सरकार की ओर से जारी किए जाएँगे।

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मेजर अनुज सूद की पार्थिव देह को देर तक एकटक निहारती रहीं पत्नी

चंडीगढ़।। हंदवाड़ा में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले मेजर अनुज सूद को परिजनों ने आज आख़िरी विदाई दी गई। एक तस्वीर बेहद भावुक करने वाली है। मेजर सूद की पत्नी देर तक उनके पार्थिव शव को एकटक निहारती रहीं।

मेजर अनुज सूद की शादी कुछ महीने पहले ही काँगड़ा ज़िले की आकृति से हुई थी।

बिलखते हुए आकृति कह रही थीं, “उन्होंने जल्द ही घर आने का वादा किया था. आज लौटे हैं तो इस कदर कि हमेशा के लिए किसी दूसरी दुनिया में चले गए।”

हंदवाड़ा: जरूर पढ़ें शहीद मेजर अनुज सूद की जीवन पर लिखी यह बात