मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के चुल्ला में ऊहल जलविद्युत परियोजना-3 का पैनस्टॉक ट्रायल के दौरान फट गया। पानी के पाइप का ये वो हिस्सा होता है जहां से पानी को टरबाइन तक ले जाने के लिए नीचे की ओर मोड़ा जाता है।
इस पाइप के फटने से पावर हाऊस को काफी नुकसान हुआ है। घटना रात करीब एक बजे की है। परियोजना में टेस्टिंग के दौरान पैनस्टॉक पाइप फटने से पावर हाउस में पानी भर गया। इस दौरान वहां 20 कर्मचारी मौजूद थे जो बाल-बाल बचे। शुक्र है कि अधिकतर पानी इधर-उधर बह गया। तेजधार ताकतवर पानी सीधा पावरहाउस से टकराता तो कर्मचारियों को गंभीर खतरा हो सकता था।
अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए करीब छह घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। परियोजना प्रंबधक दिनेश चौधरी ने हादसे की पुष्टि की है और एसडीएम अमित मेहरा ने बताया कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।
इस परियोजना पर 30 से अधिक सालों से काम चल रहा है मगर कई अनियमितताओं के कारण आज तक यह कमीशन नहीं हो पाई। बताया जा रहा है कि इस पर 1900 करोड़ से अधिक रकम खर्च हो चुकी है जो मूल अनुमानित लागत से कई गुना है।
पाइप का टुकड़ा
ऊहल नदी के पानी को रणा खड्ड के पानी के साथ मिलाकर टनल के माध्यम से जोगिंदर नगर से चुल्ला लाया गया है। मगर रिजरवायर और पानी से पाइप लीक होने की खबरें पहले भी यहां से आती रही हैं।
टॉप में दिख रहा पैनस्टॉक फट गया।
अब इसका काम लगभग पूरा होने का दावा किया गया था और 100 मैगावाट की इस परियोजना की एक मशीन में ट्रायल के तहत बिजली उत्पादन का काम शुरू हुआ था। रात करीब 11:35 बजे लगभग 15 मैगावाट बिजली उत्पादन भी हो चुका था मगर रात 12:35 बजे हादसा हो गया।
अनिरुद्ध शर्मा, नादौन क्वॉरन्टीन सेंटर से।। मैं 42 दिन मैं बेंगलुरु में अपने कमरे में बंद रहकर क्वॉरन्टीन रहा। हिमाचल सरकार ने लोगों को वापस लाने की अच्छी पहल की है मगर आगे क्या? क्या आपको लगता है कि वापस ला देने भर से आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई? कृपया देखिए क्वॉरन्टीन सेंटर की हालत क्या है। ये बदहाल है, कोई कैसे यहां रह सकता है। अब मुझे लगने लगा है कि वापस आने का फैसला मेरी बेवकूफी थी।
हमें सिद्धार्थ कॉलेज नादौन में रखा गया है जहां नहाने तक के लिए जगह नहीं है। वॉशबेसिन और टॉयलट जाम हो रहे हैं। हमें इमारत से बाहर भी निकलने नहीं दिया जा रहा, गेट को बंद कर दिया गया है। हमें पतले से गद्दे, एक चादर और कुछ चीजें दी हैं जिनका कोई मतलब नहीं है। हम यहां क्या करेंगे?
Image: Anirudh Sharma
चार्जिंग करने की सुविधा नहीं है। कैंपसे के सभी कमरों को बारी-बारी चेक किया और फिर जहां प्लग काम करते मिले, वहां मोबाइल चार्ज करने के लिए बारी का इंतजार करना पड़ता है। कमरों में सिगनल भी नहीं आता। अपने माता-पिता को फोन करके बता भी नहीं सकते जो हमारे बारे में सोचकर परेशान हैं। बस हम एक-दूसरे के मास्क लगे चेहरों को देखते रहते हैं।
एक कमरे में कम से कम 10 लोग हैं। अगर इनमें से एक को भी कोविड 19 हो तो पूरा कैंपस संक्रमित हो सकता है। क्या इस तरह से आप खुद या किसी को क्वॉरन्टीन करेंगे? जहां हम ठहराए गए हैं, वहां फर्श तक का ढंग से साफ नहीं किया गया। ब्रश करते समय लोग पास-पास खड़े होते हैं, खुले में थूमते हैं। ऐसे कैसे सोशल डिस्टैंसिंग बनेगी? इन हालात में मैं कैसे सुरक्षित रहूं?
Image: Anirudh Sharma
हम घर लौटने की उम्मीद लेकर आए थे। अगर आप हमें क्वॉरन्टीन ही करना चाहते है तो ढंग की सुविधाएं भी दीजिए। हमें ऐसा अहसास तो मत करवाइए कि हमने घर लौटकर गलती कर दी। हम कैदी नहीं है और हमारे साथ कैदियों जैसा सलूक करना बंद करिए।
हमे खाना भी ढंग से नहीं दिया जा रहा। वहा उन्होंने बेंच रखा है जिसपर वे डिस्पोज़ेबल प्लेट रखते है और खाना डाल देते हैं। फिर वे हमें कहते हैं कि इस खाने को लेकर अपनी सीट पर जाकर खाइए। यह किस तरह की तहज़ीब है?
Image: Anirudh Sharma
और पुलिसवालों के रवैये से मुझे लगने लगा है कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि मै ं पराये शहर में कैसे जिंदा रहा होऊंगा। उन्होंने मान लिया है कि हम लोगों को कोरोान है। वे हमसे 15 फुट दूरी से बात करते हैं। कोई बिल्डिंग के आसपास भी नहीं फटकता। वे कैंपस के बाहर एक छोटी सी दुकान पर बैठकर कोरोना पेशंट मान लिए गए लोगों का शो देखते रहते हैं। क्या यही तरीका है हमारे साथ व्यवहार का? वे कहते हैं कि उन्हें सिर्फ़ यह देखना है कि कोई बिल्डिंग से बाहर न निकले।
या तो हमें सुविधाएं दीजिए या फिर घर भेज दीजिए। मुझे पता है कि अपना ख्याल कैसे रकना है। मैं गंभीरता से ये बात कह रहा हूं और सरकार को इस बारे मे ंसोचना चाहिए। मैं हिमाचल इसलिए लौटा हूं ताकि संकट की इस घड़ी में अपने प्रियजनों के साथ समय बिता सकूं। इसलिए नहीं कि कोरोना से मरना था यहां आकर।
(अनिरुद्ध नादौन के रहने वाले हैं और बेंगलुरु से लौटे हैं। उन्होंने अपनी व्यथा फ़ेसबुक पर डाली है और ‘इन हिमाचल’ को भी बताया कि क्वॉरन्टीन सेंटर की हालत क्या है। उन्होंने बताया कि अव्यवस्था का आलम यह है कि लोग अगर एक भी व्यक्ति वाक़ई कोरोना संक्रमित हो तो वह बाक़ी स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर देगा। उनका कहना है कि बाथरूम में नहाने की सही व्यवस्था नहीं है और पानी रुक जाने बीमारियाँ फैलने का ख़तरा है। उन्होंने यह भी बताया कि लोगों की संख्या ज़्यादा है जबकि टॉयलट भी कम हैं। वह बताते हैं कि वह सिर्फ़ अपनी बात कह रहे हैं और इस पर भी लोग उन्हें उलाहनाएं दे रहे हैं कि क्या आपको फ़ाइव स्टार होटल में ठहरा दिया जाए। अनिरुद्ध ने कहा कि उन्हें क्वॉरन्टीन किए जाने से दिक़्क़त नहीं है, वह तो चाहते हैं कि अनहाइजीनिक माहौल में स्वस्थ व्यक्ति भी किसी दूसरे से संक्रमित न हो जाएं और क्वॉरन्टीन किए जाने का मक़सद ही ख़त्म न हो जाए।)
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शिमला।। जीएस बाली के साथ-साथ पूर्व कांग्रेस सांसद विप्लव ठाकुर ने भी मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा पर निशाना साधा है। दरअसल रामस्वरूप शर्मा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम, पूर्व राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर, पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा और जीएस बाली पर चोरी-छिपे दिल्ली से लौटने का आरोप लगाया था। सुधीर शर्मा ने सांसद पर एफआईआर की मांग की है और उनके एक समर्थक ने पुलिस को शिकायत भी दी है। वहीं जीएस बाली ने रामस्वरूप की टिप्पणी को गरिमाहीन बताया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा की पूर्व सांसद विप्लव ठाकुर ने एक बयान में कहा है कि एक जिम्मेदार सांसद होने के नाते रामस्वरूप शर्मा को बिना पूरी जानकारी के ऐसे आरोप लगाना शोभा नहीं देता है। विप्लव ने कहा कि ‘सांसद उन पर लॉकडाउन में चोरी-छिपे दिल्ली से लौटने का गलत आरोप लगा रहे हैं जिसके लिए वह उनसे माफी मांगें।’
पूर्व सांसद विप्लव ने कहा कि ‘वह 30 मार्च को दिल्ली से हिमाचल लौटी थीं। इसके लिए उन्होंने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल सरकार की मंजूरी ली थी। हिमाचल आने के लिए दिल्ली व हरियाणा सरकार ने तो उनको अपने बॉर्डर तक पायलट वाहन भी दिया।’
विप्लव ने बताया कि उन्होंने डीसी कांगड़ा और डीसी ऊना से भी अनुमति ली थी, ‘ऐसे में मंडी के सांसद का बयान गैर-जिम्मेदाराना व तथ्यों से परे है।’
इससे पहले पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने भी रामस्वरूप शर्मा के बयान को स्तरहीन बताते हुए नसीहत दी थी कि वह पद की मर्यादा के अनुरूप आचरण करें।
कांगड़ा।। पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने मंडी के सांसद रामस्वरूप के उस बयान को गरिमाहीन बताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जीएस बाली और अन्य कांग्रेस नेता चोरी-छिपे लॉकडाउन में हिमाचल लौटे हैं। बाली ने कहा कि यह स्तरहीन टिप्पणी पद की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
जीएस बाली ने कहा कि वह स्वास्थ्य सम्बन्धित कारणों से डॉक्टरों से कन्सल्ट करने दिल्ली गए थे और मार्च महीने में ही भारत सरकार द्वारा तय पूरे नियमों का पालन करके लौटे आए थे।
उन्होंने फेसबुक पेज पर लिखा है कि अगर किसी को भी लॉकडाउन के बीच आपात कारणों से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कहीं जाना पड़ता है तो वह जा सकता है और यह नियम सभी के लिए है।
मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद लॉकडाउन के बीच दिल्ली से लौटे थे, जिसके लिए उनकी आलोचना हो रही थी। इस मामले पर कुल्लू में बोलते हुए उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर चोरी से आने का आरोप लगाया था और पूछा था- इन्हें अनुमति किसने दी?
मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने हिमाचल सरकार पर ही उठाए सवाल? बोले- कांग्रेस के बड़े नेता चोरी-छिपे घुसे हिमाचल में।…
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने लिखा है, “मैं भद्रपुरुष सांसद से पूछना चाहता हूँ क्या हिमाचल सरकार चोरी छिपे आने दे रही थी? इस तरह की स्तरहीन टिप्पणी ईमानदारी से काम कर रहे प्रशासन पर भी सवालिया निशान लगाती है।”
मंडी के भद्रपुरुष सांसद श्री राम स्वरूप शर्मा जी का मेरे ऊपर मीडिया में दिया गया व्यक्तव सुना और सुनकर बहुत हैरानी भी…
आखिर में बाली लिखते हैं, “सांसद महोदय से अनुरोध है वो मीडिया सोशल मीडिया में रोज़-रोज़ स्तरहीन शिगूफ़ो और बचकानी टिप्पणियों से इतर प्रदेश की तरक़्क़ी और जनता के हित पर अपना ध्यान लगाएँ और पद की गरिमा के अनुसार व्यवहार, वाणी और सोच रखें।”
कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा ने सांसद पर एफआईआर की मांग की है और उनके एक समर्थक ने पुलिस को शिकायत भी दी है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद विप्लव ठाकुर ने भी रामस्वरूप शर्मा से माफी मांगने को कहा है।
बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं पुलिस स्टेशन में सेवाएं दे रहे कॉन्स्टेबल अजय कुमार के स्थानांतरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कॉन्स्टेबल अजय कुमार को घुमारवीं से गड़ामोड़ इसलिए स्थानांतरित कर दिया गया क्योंकि कुछ दिन पहले उन्होंने घुमारवीं बाजार में शॉपिंग कर रहे स्थानीय विधायक के बेटे को मास्क पहनने के लिए कहा था।
आरोप है कि चार मई को विधायक का बेटा बिना मास्क पहने घूम रहा था। कॉन्स्टेबल ने जब उन्हें इस बात के लिए टोका था तो कथित तौर पर बहस हुई थी। अब आरोप है कि इस घटना के बाद स्थानीय विधायक ने कॉन्स्टेबल को घुमारवीं पुलिस स्टेशन से गड़ामोड़ स्थानांतरित करवा दिया।
हालांकि,विधायक राजेंद्र गर्ग इन आरोपों को निराधार बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस नियम अनुसार कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, “पुलिसकर्मी को विभाग ने डेपुटेशन पर भेजा गया है जो विभाग का अपना मामला है। मेरा इससे कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस घटिया राजनीति कर रही है। पुराने मामले को डेपुटेशन से जोड़ कर छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है।”
इस पुलिसकर्मी के साथ कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को भी कुछ दिन की शिफ्ट की हिसाब से गड़ामोड़ भेजा गया है और इसके बाद वे घुमारवीं लौट आएंगे। यानी तबादला नहीं हुआ है। मगर कथित तौर पर इसे विधायक के बेटे के साथ हुई बहस से जोड़ा जा रहा है।
सरकाघाट।। सरकाघाट उपमण्डल की चौक पंचायत के लगभग दो दर्जन युवाओं और महिलाओं ने अर्पित पालसरा के परिवार के खेतों में खड़ी फसल की कटाई कर मिसाल पेश की है। गांववालों ने सोशल डिस्टेंसिंगबक पालन करते हुए न सिर्फ कणक काटी बल्कि ढुलाई भी कर दी।
21 वर्षीय अर्पित पालसरा किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे हर कोरोना संक्रमित होने के बाद उनका निधन हो गया था। आईजीएमसी में उनकी मौत के बाद माता जी और ताया जी को भी आईशोलेशन में भर्ती कर दिया था।
शोकाकुल परिवार के जो सदस्य घर पर हैं, वो दुख की घड़ी में भी नियमों का पालन करते हुए घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मौसम की बेरुखी और परिवार की दयनीय हालत को देखते हुए ब्राड़ता गांववासियों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
गांव के विक्रांत, विकास, अंकेश, लीला, बीना, पूजा, बिमला, शांता, रमिता आदि जिन महिला और युवाओं ने संकट की इस घड़ी में इस परिवार के जो किया है, उसकी पूरे इलाके में तारीफ हो रही है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश कैबिनेट कोरोना संकट को देखते हुए राज्य के खजाने से बोझ कम करने के लिए बुधवार को कुछ फैसले लिए। इनमें अहम फैसला है- इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले उपभोक्ताओं को राशन में मिलने वाली सब्सिडी रोकना। इस समय राज्य में 18 लाख के करीब राशन कार्ड उपभोक्ता है।
अब आयकर देने वाले डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को एक साल तक सब्सिडाइज़्ड राशन नहीं मिलेगा। आयकर देने वाले डेढ़ लाख उपभोक्ताओं की सब्सिडी खत्म होने का लाभ कम आय वाले डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को होगा जो बीपीएल उपभोक्ताओं की तरह सस्ता राशन ले पाएंगे।
इस कैटिगरी में शामिल करने के लिए आय सीमा को भी बढ़ाकर करीब 45 हजार रुपये कर दिया गया है। इससे एपीएल के करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को बीपीएल की तरह 3.30 रुपये प्रति किलो आटा और चावल 2 रुपये प्रति किलो मिल पाएगा।
बीपीएल राशनकार्ड धारकों को पहले की तरह की सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि, सभी उपभोक्ताओं की चीनी, दाल और तेल की सब्सिडी में भी थोड़ी-थोड़ी कटौती की गई है
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बिलासपुर के 26 वर्षीय युवक हंसराज की मौत के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही बिलासपुर से शिमला आईजीएमसी रेफर किये जाने और आईजीएमसी में शव को सही से न रखे जाने की भी जांच होगी।
सीएम ने मंगलवार शाम को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान बताया कि पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच होगी। इसका जिम्मा उन्होंने एडीएम बिलासपुर को सौंपा है।
सीएम ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह मृतक के परिजनों से भी बात करेंगे और जांच की रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
क्वारन्टीन सेंटर में जख्मी हुए बिलासपुर के युवक की मौत के मामले पर क्या बोले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, देखें।
बिलासपुर, एमबीएम न्यूज़।। बिलासपुर में एक डॉक्टर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। बीती रात रौडा सेक्टर पीएचसी में कार्यरत एक डॉक्टर को पाँच लोगों ने हमला करके घायल कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर निशांत बीती रात खाना लेकर सागर व्यू होटल से वापस आ रहे थे। इस दौरान बामटा के पास चार-पांच लोगों ने उनकी गाड़ी रोकी, उन्हें बाहर निकाला और पीट दिया। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए क्षेत्रीय बिलासपुर अस्पताल में भर्ती किया गया।
मेडिकल ऑफ़िसर एसोसिएशन ने जानकारी दी है कि डॉक्टर निशांत पर यह हमला साज़िश के तहत किया गया है। एसोसिएशन के मुताबिक़, एक आरोपी को कुछ दिन पहले डॉक्टर ने सार्वजनिक जगह पर थूकने से मना किया था। और अब हमला करने से पहले भी इन लोगों ने डॉक्टर के सामने थूकने हुए कहा- अब कर लो जो करना है।
बिमेडिकल आफिसर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डा. सतीश शर्मा एवं डा. तरूण ने डॉक्टर निशांत पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। वहीं बिलासपुर सदर थाना प्रभारी एवं प्रशिक्षु डीएसपी अजय ठाकुर ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
शिमला।। कैमरे के सामने मास्क, सैनिटाइजर, फेसशील्ड बांटने और पत्रकारों के सामने कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित करने जैसे स्टंट करने वाले नेता अब तक हिमाचल प्रदेश को कोरोना संकट से लड़ने के लिए तैयार नहीं कर पाए हैं। अब तक लिए गए उटपटांग फैसलों और कई बार यूटर्न लिए जाने के बाद यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि प्रदेश राम भरोसे ही है। आलम यह है कि सरकार इलाज करना और आपात हालात से निपटना तो दूर की बात है, अपने कर्मचारियों को ही कोरोना को लेकर जागरूक नहीं कर पाई।
कोरोना का डर कर्मचारियों और सरकारी अमले पर इतना हावी है कि मरीजों के साथ, उनके शवों के साथ और यहां तक कि क्वॉरन्टीन किए गए लोगों के साथ भी भेदभाव हो रहा है। इसी अज्ञानता या यूँ कहें कि जागरूकता में कमी के कारण एक युवक की मौत हो गई और जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं। जो युवक मरा है, वह कोरोना पॉज़िटिव नहीं था। यानी कोरोना से उसकी मौत नहीं हुई लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उसे लील लिया।
हुआ ये कि क्वॉरन्टीन सेंटर में एक युवक को चोट लग गई तो उसके साथ रखे गए शख़्स ने वहाँ तैनात कर्मचारियों से गुहार लगाई। इस शख़्स ने बताया कि पहले तो कोई उसकी बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। फिर एक डॉक्टर आया तो दूर से ही ‘मिर्गी का दौरा पड़ा है’ बोलकर चला गया। फिर हालत गंभीर हुई और ऐंबुलेंस बुलाई तो कोई उठाकर ऐंबुलेंस तक ले जाने को तैयार नहीं हुआ। इस दौरान वीडियो बनाने की कोशिश की गई तो कैमरा बंद करने के लिए कहा गया।
इतना ही नहीं, इस घायल युवक को आईजीएमसी रेफर किया गया और कथित तौर पर उसकी रास्ते में मौत हो गई। ऐंबुलेंस वालों ने शव को अस्पताल में ज़मीन पर उतारा और वहाँ से चले गए। कई घंटों तक शव वहीं पड़ा रहा, किसी ने छुआ तक नहीं। अब आईजीएमसी का कहना है कि उन्हें सूचना दिए बग़ैर इसे रेफर किया गया था। आईजीएमसी ने तो यहाँ तक कह दिया कि इस व्यक्ति की मौत हो चुकी थी और शव को ही रेफर कर दिया गया था।
मरने वाला यह व्यक्ति कोई भी हो सकता था। ये आप हो सकते थे, आपका परिजन हो सकता था। आगे भी ऐसा किसी के साथ हो सकता है। सोचिए, इस शख़्स को अगर समय पर मदद मुहैया करवाई जाती तो पहले तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। और अगर जान चली भी गई थी तो शव को यूँ ही खुले में छोड़ना कहां तक सही है? और अब होगी लीपापोती। हो सकता है इस ख़बर को कवर करने वाले मीडिया संस्थानों और मृतक के साथ रखे गए युवक के ख़िलाफ़ सरकार कार्रवाई कर दे।
जानें, क्या है मामला
कई घंटों तक ज़मीन पर पड़ा रहा शव सोमवार सुबह लोग आईजीएमसी परिसर में एक बॉडी बैग में पड़ा शव देख डर गए। यह शव पाँच घंटों से भी ज़्यादा समय से यहाँ पर रखा हुआ था और बग़ल में पड़ी थी सलाइन की बॉटल। बाद में पता चला कि यह शव बिलासपुर से आईजीएमसी रेफर किए गए एक युवक का था जिसे क्वॉरन्टीन सेंटर में रखा गया था और घायल हो गया था। रास्ते में मौत हो जाने पर एंबुलेंस ने शव को परिसर में उतारा था और वापस चली गई थी। फिर सुबह नौ बजे के क़रीब सफ़ाई कर्मचारियों ने इसे शवगृह में रखा।
यह उसी शिमला में हुआ, जहां पर सरकाघाट के कोरोना पॉज़िटिव युवक के शव को जलाने के लिए कोई तैयार नहीं था और महिला एसडीएम को रात को श्मशान घाट में ंरुकना पड़ा था। ऐसी ख़बरें भी थीं शव को आनन-फ़ानन में डीज़ल से जलाया गया। एक हफ़्ता भी नहीं हुआ था कि फिर उसी शहर में, एक और शव का अपमान हो गया।
लेकिन इससे पहले इस युवक के साथ जो हुआ, वह जानकर आप दुख भी होगा और ग़ुस्सा भी आएगा। अगर समय पर प्रशासन हरकत में आता और कर्मचारियों को ढंग से जागरूक किया होता तो इस युवक की जान बचाई जा सकती थी। मरने वाले शख़्स का नाम था हंसराज। उम्र थी- महज़ 26 साल।
क्वॉरनटीन सेंटर में क्या हुआ था
बिलासपुर के बल्हचुराणी के रहने वाले हंसराज सात मई को मध्य प्रदेश के कोरोना रेड ज़ोन से स्वारघाट पहुँचे थे। उन्हें यहाँ पर फ़ॉरेस्ट विभाग के रेस्ट हाउस में इंस्टीट्यूशनल क्वॉरन्टीन किया गया था। एक ऑडियो वायरल हुआ है जो हंसराज के साथ क्वॉरन्टीन किए गए युवक और पत्रकार कमलेश रतन भारद्वाज के बीच बातचीत का है। इसमें युवक बताता है कि कैसे रविवार दिन में एक बजे बाथरूम में गिरने से हंसराज को चोट लगी और वो मदद के लिए पुकारते रहे मगर कोई नहीं आया जबकि अस्पताल बग़ल में ही था।
हेड इंजरी के कारण हंसराज को उल्टी भी हुई थी। एक डॉक्टर कुछ देर बाद आया भी तो हाथ लगाए बिना दूर से कहा- इन्हें मिर्गी का दौरा पड़ गया। फिर डॉक्टर चला गया। (पत्रकार कमलेश की मृतक के परिजनों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि हंसराज को कभी मिर्गी का दौरा नहीं पड़ा।)
युवक को बाद में पता चला कि हंसराज के सिर से खून निकल रहा था। युवक ने फिर चिल्लाकर नीचे खड़े पुलिसकर्मियों को बताया कि इसके सिर पर चोट आई है। युवक ने बताया कि उनसे कहा गया- आप उठाकर ले आओ, तब हम इसे ले जाएँगे। युवक का दावा है कि फिर जैसे तैसे घसीटते हुए इसे ये लोग ले गए।
सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो सुनें, आपको पता चल जाएगा कि क्या हाल हैं सेंटरों के। सात मिनट का यह ऑडियो रूह कंपा देने वाला है। आख़िर में इस शख़्स का गला रुंध जाता है। उसे मलाल है कि अगर सही समय पर अस्पताल ले जाया गया होता तो हंसराज की जान बच सकती थी।
युवक को चोट लगी थी दिन में एक डेढ़ बजे और शाम साढ़े पाँच से छह बजे उसे ऐंबुलेंस से ले जाया गया। बाद में बिलासपुर अस्पताल से उसे शिमला रेफर कर दिया गया।
शव को ही रेफर करने का आरोप
बिलासपुर सीएमओ डॉक्टर परविंदर ने मीडिया को बताया है कि युवक को मिर्गी का दौरा पड़ने के कारण सिर पर चोट लगी थी। और उसे जिला अस्पताल बिलासपुर से आईजीएमसी रेफर किया गया था। लेकिन ईटीवी भारत की एक ख़बर के मुताबिक़, आईजीएमसी के एमएस डॉ. जनक राज ने दावा किया है कि बिलासपुर से जीवित व्यक्ति को नहीं, शव को रेफर किया गया था।
डॉ. जनक राज के हवाले से लिखा गया है, “जब भी कोई संदिग्ध मरीज किसी क्षेत्र से भी रेफर किया जाता है तो सूचना दी जाती है मगर बिलासपुर से कोई सूचना नहीं दी गई और न ही एंबुलेंस चालक ने सीएमओ को इस बारे में बताया।” डॉक्टर जनक राज ने कहा कि एंबुलेंस चालक बिना बताए शव को उतारकर चला गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पहले कर्मचारी शव को उठाने में हिचक रहे थे मगर बाद में इसे शवगृह में रखा था।
यह भी बताया गया कि शव से सैंपल लेकर चेक किया गया तो कोरोना के लिए रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अगर यही टेस्ट जीते जी हो जाता तो न तो हंसराज उस मनहूस क्वॉरन्टीन सेंटर में रखा जाता, न नकारा सिस्टम के कारण उसकी जान जाती। आज हंसराज इस दुनिया में नहीं है। मगर उसकी मौत स्वाभाविक नहीं। घरवाले दुआ कर रहे होंगे कि काश, वो न ही आता बाहर से। ऐसा भी क्या लौटना हुआ कि कोई कभी अपने घर न आ सके।
खुली क्वॉरन्टीन सेंटरों की पोल
सरकार का कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वॉरन्टीन किया जाएगा यानी घर भेजने के बजाय किसी जगह पर सका जाएगा। ठीक वैसे, जैसे बिलासपुर के हंसराज को रखा गया था। मगर यह घटना दिखाती है कि क्वॉरन्टीन सेंटरों के हाल क्या हैं। हिमाचल प्रदेश में मेडिकल स्टाफ़ भी कितना डरा है। या तो उसके पास उपकरण नहीं हैं उन्हें अपने ज्ञान पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि हंसराज को डॉक्टर ने ढंग से चेक करने की ज़हमत नहीं उठाई। अगर तभी चेक कर लिया जाता तो शायद समय पर इलाज शुरू हो पाता।
साथ ही, क्वॉरन्टीन सेंटर के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों का रवैया भी सही नहीं था। उन्हें तुरंत हरकत में आना चाहिए था। वे टालमटोल करते गए और हंसराज की हालत गंभीर होती गई। अगर वे अपना काम सही से कर रहे होते तो वे हंसराज के साथ रह रहे शख़्स को वीडियो बनाने से न रोकते।
फिर बिलासपुर से बाद में हंसराज को शिमला रेफर किया गया। मान लेते हैं कि रास्ते में ही हंसराज की मौत हुई, तो फिर अस्पताल को बताए बिना यूँ शव को ज़मीन पर छोड़कर चले जाना कितना उचित है? या तो आईजीएमसी में किसी ने शव को रिसीवर नहीं किया और अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एक-दूसरे को दोष दे रहे हैं।
अभी भी समय है, कर्मचारियों को फिर से जागरूक करें और लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख़्त कार्रवाई करके उदाहरण पेश करें। वरना यह घटना बता रही है कि आने वाले दौर में अगर हालात ख़राब हुए और कोरोना के मरीज़ थोड़े से भी बढ़े, तो क्या हाल होने वाले हैं।