मंडी के सांसद पंडित रामस्वरूप शर्मा का दिल्ली में निधन

नई दिल्ली।। मंडी के सांसद राम स्वरूप शर्मा का निधन हो गया है। अभी तक आ रही खबरों के अनुसार, उनके खुदकुशी करने की आशंका भी जताई जा रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी है कि उसे सांसद के स्टाफ की ओर से सूचना मिली थी। सांसद के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और वह फंदे से लटके हुए पाए गए।

पूरी खबर पढ़ें- 

राम स्वरूप शर्मा के खुदकुशी करने की आशंका, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

इस बीच, इस खबर के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आज होने वाली पार्ल्यामेंट्री पार्टी मीटिंग को रद्द कर दिया है।

बीजेपी नेता राम स्वरुप शर्मा का जन्म 10 जून 1958 को हुआ था। वह भारत के हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर से संबंध रखते थे।

बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मंडी सीट से उतारा था जिसमें उनकी जीत हुई थी। उन्होंने कांग्रेस की प्रतिभा सिंह के खिलाफ 39,796 वोटों के मार्जिन से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने उन्हीं पर विश्वास किया था और जीत हासिल की थी।

सांसद बनने से पहले वह मंडी जिला बीजेपी और बाद में हिमाचल प्रदेश राज्य भाजपा के आयोजन सचिव भी रहे थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। वह आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे।

जगह-जगह अवैध ढंग से किसान भवन बना रहे हैं जलशक्ति मंत्री: अग्निहोत्री

शिमला।। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को विधानसभा में आरोप लगाया कि जलशक्ति मंत्री पेयजल योजनाओं के फंड से गलत ढंग से किसान भवन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेस्ट हाउस बनाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेनी होती है, इसलिए मंत्री ने एक अलग रास्ता निकालते हुए अपने आप ही पेयजल योजनाओं के पैसे से विश्राम गृह बनवाकर उन्हें किसान भवन नाम दे दिया है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, “मंत्री जी, आप अब विश्राम गृह बना रहे हैं और शौक से बना रहे हैं। पता नहीं आपने कितने बना दिए। आपने इनका नाम बदल दिया है क्योंकि अगर विश्राम गृह बनवाएंगे तो कैबिनेट से अप्रूवल चाहिए और कैबिनेट से बचने का रास्ता निकालने के लिए आपने इन्हें किसान भवन नाम दे दिया। अप आब छह छह और आठ आठ विश्राम गृह बना रहे हैं। आप दूसरे हलकों का भी ख्याल कीजिए क्योंकि वहां तो रिपेयर करने के लिए भी पैसे नहीं हैं।”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “पेयजल की योजनाओं में कहां से बीच में किसान भवन आ गए? डीपीआर आप ऐसे बना रहे हैं कि कोई सर्वे नहीं हो रहा। आपने कहा और सुबह डीपीआर तैयार हो जाती है। कोई प्रोविज़न का ख्याल नहीं रखा जा रहा।”

अग्निहोत्री ने जल जीवन मिशन को लेकर भी सवाल किए और सरकार पर पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जलशक्ति मंत्री यह जानकारी नहीं दे रहे कि इस मिशन के लिए सरकार के पास कितना कुल पैसा है मगर टेंडर जारी कर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फंड न होने के बावजूद इस तरह के टेंडर निकालना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को जानकारी देनी चाहिए कि उसे केंद्र से कितना पैसा मिला। यह जानकारी लिखित होनी चाहिए न कि यह कहना चाहिए कि केंद्र सरकार ने वादा किया है।

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

पक्षपात के आरोपों पर बोले सीएम- आपने भी तो अपने यहां काम करवाए थे

शिमला।। जलशक्ति विभाग में फंड के आवंटन और भर्तियों में असंतुलन के आरोपों में घिरी हिमाचल सरकार को विधानसभा में असहज होना पड़ा है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि नौकरियां देने और योजनाओं का फंड देने में जलशक्ति विभाग सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्रों को तरजीह दे रहा है जबकि बाकी 66 क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है।

जलशक्ति विभाग में फंड और भर्तियों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा

मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में सरकार से जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के लिए बजट के बंटवारे पर श्वेत पत्र लाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन का बजट बस दो-तीन हलकों में ही बांट दिया गया है जो सही नहीं है। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने मुकेश अग्निहोत्री को टोका और कहा, “बार-बार ऐसी गलत बयानी करना सही नहीं।”

दरअसल सोमवार को कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया था कि जलशक्ति विभाग में भर्तियों में मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र सिराज और जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के चुनाव क्षेत्र धर्मपुर के लोगों को तरजीह दी गई है। इसके बाद एक सवाल के जवाब में जलशक्ति मंत्री ने जो आंकड़े दिए थे, उनसे पता चला था कि जल जीवन मिशन का सबसे ज्यादा पैसा भी इन्हीं दो क्षेत्रों में खर्च हुआ है।

जल जीवन मिशन: आधी रकम जलशक्ति मंत्री और सीएम के इलाक़ों में खर्च

इसे लेकर विपक्ष लगातार आक्रामक है। नेता प्रतिपक्ष के सवाल करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष गलत बयान दे रहा है। उन्होंने कहा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र में पहले कई समस्याएं थीं। अगर यहां कुछ काम किए गए तो इसे अन्यथा नहीं लेना चाहिए।” उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री की ओर इशारा करके कहा कि जब वह मंत्री थे तो उन्होंने भी अपने हलके में काम करवाए हैं।

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

जलशक्ति विभाग में फंड और भर्तियों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा

शिमला।। बजट सत्र के 12वें दिन विपक्ष ने सरकार को जलशक्ति विभाग में बजट के आवंटन और भर्तियों में असंतुलन को लेकर घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सिंचाई, जलापूर्ति और सफाई पर कटौती प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष और डलहौजी से कांग्रेस की विधायक आशा कुमारी ने बजट आवंटन और भर्तियों में असंतुलन पर सवाल उठाए।

भाजपा विधायक रमेश धवाला के एक सवाल के जवाब में जलशक्ति मंत्री ने जो आंकड़े दिए थे, उनके हवाले विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि सिर्फ दो हलकों में आधा बजट खर्च किया जा रहा है। अग्निहोत्री ने सदन में सरकार से जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के लिए बजट के बंटवारे पर श्वेत पत्र लाने की बात कही। अग्निहोत्री ने कहा कि दो-तीन हलकों में ही बजट बांट दिया गया है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा- प्रदेश में संतुलित नौकरियां मिलनी चाहिए। दो ही क्षेत्रों में नौकरियां दी गईं। उन्होंने कहा कि पहली बार बिना पैसे के टेंडर किए जा रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने भी सरकार पर बजट आवंटन में भेदभाव के आरोप लगाए। उन्होंने मुख्यमंत्री और जलशक्ति मंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि ‘प्रदेश में देश की ही तरह हम दो हमारे दो की तर्ज पर काम किया जा रहा।’

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

जल जीवन मिशन: आधी रकम जलशक्ति मंत्री और सीएम के इलाक़ों में खर्च

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत हुए खर्च में अजीब सा असंतुलन देखने को मिला है। पूरे प्रदेश में खर्च की गई रकम का 47 प्रतिशत यानी लगभग आधा हिस्सा सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्रों में खर्च कर दिया गया। ये क्षेत्र हैं- धर्मपुर और सिराज। धर्मपुर जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह का चुनाव क्षेत्र है और सिराज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का। इसमें भी सबसे ज़्यादा रकम मंत्री के अपने इलाके में खर्च हुई है।

यह जानकारी विधानसभा में प्रश्न काल के दौरान सामने आई है। ये आंकड़े जुलाई 2020 तक के हैं। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर बीजेपी के विधायक रमेश धवाला के सवाल का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने पूछा था कि उनके इलाके में इस मिशन के तहत एक ही टेंडर क्यों लगा। मंत्री ने इस संबंध में कहा कि जुलाई 2020 के बाद धवाला के क्षेत्र में और योजनाओं के लिए भी टेंडर निकले हैं। फिर मंत्री ने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हिमाचल ने पूरे देश में जल जीवन मिशन के तहत बेहतरीन काम किया है और इसके लिए उसे केंद्र से इन्सेन्टिव भी मिला है।

विधानसभा में रखी गई जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2020 तक इस मिशन के तहत कुल 9 अरब 36 करोड़ रुपये टेंडर प्रदेश में लगे। इनमें भी सबसे ज़्यादा रकम के टेंडर मंत्री के ही इलाके में लगे। धर्मपुर में लगे टेंडरों की वैल्यू थी- 2 अरब 63 करोड़ रुपये। इसके बाद नंबर आया सिराज का, जहां पर 1 अरब 80 करोड़ रुपये के टेंडर लगे। इन दो विधानसभा क्षेत्रों के अलावा और कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां पर लगे टेंडरों की संख्या अरब में पहुंची हो। इन दोनों के बाद नूरपुर का नंबर आता है जहां 35 करोड़ रुपये के टेंडर लगे। इससे पता चलता है कि कितनी विषमता है। जबकि पूरे प्रदेश में कई इलाक़े ऐसे हैं जहां पर पानी की समस्या है। सिर्फ धर्मपुर और सिराज में ही पानी का संकट नहीं है।

इस पूरे मामले में फंड के दुरुपयोग की भी पूरी आशंका है क्योंकि यह मिशन घर-घर नल के माध्यम से जल पहुंचाने का है। मगर मंत्री महेंद्र सिंह के क्षेत्र में जल जीवन मिशन के पैसे से एक्सईएन ने 27 लाख की इनोवा ली है जिसकी सवारी करने का आरोप मंत्री के बेटे पर लग चुका है।

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

जल जीवन मिशन के तहत 2020 तक कहां कितना खर्च हुआ, नीचे देखें।

विधानसभा में जलशक्ति मंत्री पर लगा नौकरियों में भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप

शिमला।। नादौन के विधायक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य सरकार पर चोर दरवाजे से भर्तियां करने का आरोप लगाया है। सोमवार को बजट पर चर्चा के अंतिम दिन सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार कर रही है और प्रदेश के बेरोजगार लोगों से अन्याय कर रही है।

सुक्खू ने कहा कि ‘जलशक्ति विभाग में चार हजार मल्टीटास्क वर्कर रखे गए हैं। इनमें से 1400 सिर्फ दो हलकों से हैं। इनमें जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के क्षेत्र से 800 और सीएम जयराम ठाकुर के इलाके से 600 पद भरे गए हैं।’ उन्होंने कहा प्रदेश में 14 लाख बेरोजगार चक्कर लगा रहे हैं लेकिन इन्हें अपने रिश्तेदारों की नौकरी की चिंता है।

सुक्खू के आरोपों का जलशक्ति महेंद्र सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। सुक्खू के बाद बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘सुक्खू ऐसे भाषण दे रहे हैं मानो हमीरपुर में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं।’

यह पहला मामला नहीं है जब जलशक्ति मंत्री पर इस तरह का आरोप लगा है। उनपर सरकारी वाहनों, फंड, पद और शक्तियों आदि के दुरुपयोग के कई आरोप लग चुके हैं। हाल ही में उनके बेटे को और खुद उन्हें भी लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। जब वे जिला परिषद चुनाव में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रहे थे तो लोगों ने उन्हें घेरकर नौकरियों को लेकर सवाल किया था कि ‘आपने सारे लोग अपने इलाके के रखे, क्या हमारे घरों में बेरोजगार नौजवान नहीं हैं।’

मंत्री महेंद्र सिंह से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

नरेंद्र मोदी भगवान राम की तरह पूजे जाएंगे: तीरथ सिंह रावत

देहरादून।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगवान से करने का सिलसिला हिमाचल से निकलकर अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पहुंच चुका है। हाल ही में त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर मुख्यमंत्री बनाए गए तीरथ सिंह रावत ने नरेंद्र मोदी को ‘भगवान के समान’ बता दिया।

मुख्यमंत्री हरिद्वार में नेत्र कुंभ का उद्घाटन करने के दौरान कहा, “त्रेता, द्वापर में जैसे राम और कृष्ण को पूजा जाता था, उसी तरह नरेंद्र मोदी को भी भविष्य में पूजा जाएगा।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा, “आने वाले समय में लोग नरेंद्र मोदी को भी उसी रूप में मानने लगेंगे। जैसे भगवार राम और कृष्ण ने समाज उत्थान के लिए काम किया था और हम उन्हें भगवान मानने लगे थे। उसी तरह नरेंद्र मोदी भी काम कर रहे हैं।”

तीरथ सिंह रावत ने कहा कि पहले दूसरे मुल्कों में भारत के प्रधानमंत्री को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद यह मुमकिन हुआ है।

इससे पहले हिमाचल के शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी कहा था कि मोदी वास्तव में भगवान शिव के अवतार पुरुष हैं। इस पर विपक्ष ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि ‘सुरेश भारद्वाज को लगता है कि उत्तराखंड की तरह नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो मोदी उन्हें भी कृपा करके सीएम बना सकते हैं।’

क्या दिल्ली तक पहुंच पाएगी सुरेश भारद्वाज की स्तुति की गूंज?

उद्योग मंत्री रहते स्वां के खनन पर सोए रहे मुकेश अग्निहोत्री अब जागे

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में नेताओं को गंभीर मसलों की याद तभी आती है जब वे विपक्ष में होते हैं। जब वे खुद सत्ता में आते हैं तो उन मामलों और मुद्दों को भूल जाते हैं। लेकिन विपक्ष में आते ही फिर उनकी नींद टूट जाती है और वो जोर-शोर से उन मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने लगते हैं। इस काम में हिमाचल प्रदेश में बारी-बारी से सरकारों में रही बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के नेता माहिर हैं। इन्हीं में से एक हैं- मुकेश अग्निहोत्री।

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने अपने फेसबुक पर उन लोगों को ब्लॉक करने का सिलसिला जारी रखा है, जो मर्यादित भाषा में उनकी पोस्ट्स पर कॉमेंट करके उनके दोहरे मापदंडों को एक्सपोज कर रहे हैं। पिछले दिनों जब उन्होंने मौजूदा सरकार पर फंड की बंदरबांट का आरोप लगाया था तो कॉमेंट करके कुछ यूजर्स ने वे खबरें पोस्ट कर दी थीं, जिनमें लिखा था कि कैसे उद्योग मंत्री रहते अग्निहोत्री पर भी ऐसा ही करने का आरोप लगा था।

अब, जब एनजीटी ने स्वां नदी में चल रहे खनन पर सख्ती की है, तब अग्निहोत्री ने इस हाल के लिए राज्य सरकार को कोसने वाली पोस्ट डाली है। मगर जब लोगों ने बताया कि उनके उद्योग मंत्री रहते भी ऐसे ही हाल थे, जबकि माइनिंग डिपार्टमेंट उनके ही मंत्रालय के अंतर्गत आता था। तो उनके कॉमेंट्स पेज से डीलीट कर दिए गए और यूजर्स को बैन कर दिया गया ताकि वे भविष्य में ऐसे कॉमेंट न कर पाएं।

क्या है मामला
स्वां नदी में हो रहे खनन को लेकर शिकायत मिलने पर एनजीटी ने एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी नदी का दौरा करेगी और पर्यावरण को हो रहे नुकसान की रिपोर्ट बनाकर एनजीटी को सौंपेगी।

इस बारे में मुकेश अग्निहोत्री ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है, “स्वां बचाने के लिए आदेश जारी करने पड़े। माफिया ने राजनीतिक संरक्षण में तमाम हदें पार कर दी और गुण्डागर्दी का साम्राज्य स्थापित किया। कहाँ रही सरकार? प्रशासन कहाँ रहा, क्या भारतीय प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा के अफ़सर भी लूट पर मौन थाम सकते हैं? सामान्य पुलिस क्या करती रही  ख़ासतौर पर थानों ब खनन विभाग की क्या भूमिका रही जब रोज़ाना एक हज़ार टिपर साठ- सतर टन लाद कर निकलता था? 1350 करोड़ की तटबंदी बचाने की लिए फ़्लड विभाग ने क्या किया? अब किन को लगेंगे भारी भरकम जुर्माने और किन की जाएँगी नौकरियां ?? पाप का घड़ा भरता है तो यही होता है। “जय सोमभद्रा””

अग्निहोत्री ने पूछा है, कहां रही सरकार, कहां रहा प्रशासन। लेकिन ये सवाल तब भी उठे थे जब हरोली से विधायक अग्निहोत्री पिछली सरकार में उद्योग मंत्री थे। तब हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट का शीर्षक था- उद्योग मंत्री के जिले में बेलगाम खनन माफिया। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निहोत्री ने तो इस मामले में जवाब देने से बचने के लिए फोन भी नहीं उठाए थे।

इस रिपोर्ट के पहले ही पैरा में लिखा था, “पौ फटते ही पहले सोमभद्रा नदी के किनारे बैलों के गले में बंधी घंटियों की आवाज मन को सुकून देती थी, लेकिन अब जेसीबी की कर्कश आवाज डराती है। प्रदेश में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है व उच्च न्यायालय ने ने भी इसे रोकने के लिए सरकार को आदेश दे रखा है, लेकिन उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिले में खनन माफिया का उत्पात किसी को नजर नहीं आ रहा। उस विभाग को भी नहीं, जो उद्योग मंत्रालय के अधीन है।”

खनन विभाग उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इस रिपोर्ट में लिखा गया है, “इस संबंध मे पक्ष लेने के लिए उद्योग मंत्री से लगातार संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया व प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।”

सरकार बदल गई, लेकिन खनन का सिलसिला जारी रहा। एक बार उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर ने स्वां नदी पर खनन करने वालों को मौके पर पकड़कर कार्रवाई भी की थी मगर हालात सुधरे नहीं। स्वां नदी के तटीकरण पर करोड़ों रुपये भी खर्च किए जा चुके हैं लेकिन अवैध खनन को रोकने को लेकर को कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। हालांकि, इस पर राजनीति खूब हो रही है। आज जो बीजेपी सत्ता में है, विपक्ष में रहते हुए वह भी खूब इस मुद्दे को उठाती थी। मगर आज सत्ता में आने के बाद शायद उसके नेताओं की भी स्मृति का लोप हो गया है।

 

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए केंद्र सरकार ने मंजूर किए 740 करोड़

धर्मशाला।। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए लगभग 740 करोड़ मंजूर किए हैं। इस संबंध में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद किया है।

अनुराग ठाकुर ने कहा, “2010 से ही मैं छात्रों को शिक्षा की सुविधा मुहैया करवाने के लिए प्रतिबद्ध हूं और हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए भी मैंने प्रयास किए। छात्रों को राज्य से बाहर जाए बिना अब विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा मिलेगी।”

कांगड़ा के धर्मशाला और हमीरपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाले देहरा में इस यूनिवर्सिटी के दो कैंपस बनने हैं, जिनपर यह रकम खर्च होगी। मंत्रालय ने 512.37 करोड़ रुपये नॉन-रिकरिंग और 210.55 करोड़ रुपये रिकरिंग व्यय के लिए मंजूर किए हैं। इनमें 2019-20 में खर्च हुए 17.87 करोड़ रुपये भी हैं।

अनुराग ठाकुर ने कहा, “दिख रहा है कि कैसे राज्य और केंद्र की डबल इंजन की सरकार हिमाचल में एजुकेशन सेक्टर को नई दिशा में ले जा रही है ताकि औद्योगिक क्रांति की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।”

अभी तक केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए जमीन के आवंटन का काम पूरा नहीं हुआ है। कांगड़ा के जदरांगल में भी 600 कनाल वन भूमि का ट्रांसफर एनवायरनमेंट क्लियरेंस न मिलने के कारण अटका हुआ है। देहरा में 300 कमाल जमीन के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस मिल चुका है लेकिन जमीन अभी भी यूनिवर्सिटी के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुई है।

हिमाचल: बेरहमी से मारी गई अजगर के पेट में थे 50 अंडे

एमबीएम न्यूज, अंब।। अंब उपमंडल के एक गांव में अजगर की जान लेने के मामले में नई जानकारी सामने आई है। अजगर का पोस्टमॉर्टम करने पर पता चला है कि अजगर मादा थी औऱ उसके पेट में लगभग 50 अंडे थे।

पोस्टमॉर्टम में यह पता भी चला है कि अजगर को बेरहमी से पीटकर मारा गया है। उसका सिर कुचल दिया गया था और उसके शरीर पर नुकीली चीजों से वार किए गए थे। पुलिस ने पहले ही इस मामले में पांच लोगों के नाम दर्ज किए हैं।

दरअसल, बुधवार शाम को डीएसपी अंब सृष्टि पांडे अपने वाहन से कहीं जा रही थीं। इसी दौरान सड़क पर एक जगह उन्हें भीड़ दिखी। उन्हें पता चला कि एक अजगर धीरे धीरे सड़क पार कर रहा है। इस पर उन्होंने लोगों को हटाकर अजगर को सड़क पार करने दी। लेकिन कुछ समय बाद जब वह उसी सड़क से लौटीं तो अजगर को मरा हुआ पाया।

घटना से आहत और नाराज डीएसपी ने तुरंत जांच शुरू की और अजगर को मारने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

इस मामले में वन विभाग के रेंज अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान मादा अजगर के पेट से करीब 49 अंडे बरामद किए गए हैं। हालांकि, पोस्टमॉर्टम की विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)