मंत्री-विधायक सिफारिश कर सकते हैं, जरूरी नहीं तबादला कर ही दिया जाए: हाई कोर्ट

शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक तबादले के संबंध में एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने महज राजनीतिक दल के सदस्य की सिफारिश के आधार पर जारी तबादला आदेश भी रद्द कर दिए।

खंडपीठ ने कहा कि यह बड़े खेद का विषय है कि तबादला आदेश जारी या रद्द उन लोगों की सिफारिश से हो रहे हैं, जिनका प्रशासनिक विभाग में कोई स्थान नहीं है। इस तरह का कृत्य प्रशासन के सिद्धांतों के लिए पूरी तरह से घातक है।

कोर्ट ने कहा कि तबादला होना किसी कर्मचारी के लिए जरूरी घटना है, मगर यह तबादला आदेश तय सिद्धांतों या दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही होने चाहिए न कि ऐसे व्यक्ति के कहने पर, जिसका प्रशासनिक तंत्र से कोई लेना देना नहीं होता। एक अच्छे प्रशासन के लिए बार-बार तबादला आदेश का भय स्वच्छ प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न करता है। कोर्ट ने तबादला आदेश को कानून के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि तबादला नीति में कर्नाटक राज्य की तर्ज पर अतिरिक्त प्रावधान जोडऩे की आवश्यकता है। जहां पर कर्मचारी अधिकार के तौर पर तबादला करने की न तो मांग कर सकता है और न ही राजनीतिक दबाव के चलते किसी के तबादला आदेश जारी किए जा सकते हैं।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी विधायक, सांसद या मंत्री के पास किसी कर्मचारी की शिकायत पाई जाती है तो उनके पास तबादला करने की सिफारिश करने का अधिकार है। मगर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल प्रशासनिक विभाग के पास ही है। कोर्ट ने तबादला आदेशों को कानून के विपरीत पाया और रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में तबादला मामलों की संख्या को कम करना जरूरी है।

कोर्ट ने पहले के एक अन्य मामले में दिए सुझाव का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार भी हरियाणा की तर्ज पर अपने विभागों, बोर्डों व निगमों जिनमें कर्मचारियों की संख्या 500 से अधिक है उनके लिए ऑनलाइन स्थानांतरण नीति बनाए। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि निर्णय की प्रतिलिपि को प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजा जाए, ताकि तबादला नीति में जरूरी संशोधन किया जा सके।

चम्बा में सात दिन जंगल में बेसुध पड़े रहने के बाद भी जिंदा बच गया शख्स

चम्बा।। ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’। ये कहावत आपने कई बार सुनी होगी। लेकिन ये कहावत हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला में साकार हुई है। जी हाँ, जंगल में सात दिन घायल अवस्था में बेसुध पड़े रहने के बाद भी व्यक्ति जीवित बच गया। घायल चम्बा मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन है। व्यक्ति की पहचान हंसराज निवासी गुआड़ी गांव, डाकघर तरेला के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि बीते आठ जुलाई को हंसराज अपने घर आ रहे थे। पांगी से तीसा की तरफ आते हुए रानीकोट में वह जंगल की तरफ गए। लेकिन पांव फिसलने से बेहोश होकर गहरे नाले में गिर गए। जब हंसराज घर नहीं पहुंचे तो परिवार को चिंता होने लगी। परिजनों ने तलाश शुरू कर दी। रिश्तेदारों से भी पूछा। लेकिन हंसराज का कहीं पता नहीं चल पाया।

जब परिजनों को हंसराज को ढूंढने में असफलता हाथ लगी तो 13 जुलाई को उन्होंने पुलिस में हंसराज के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस भी हंसराज की तलाश जुट गई। 15 जुलाई को परिजन व अन्य ग्रामीण हंसराज को ढूंढते हुए रानीकोट के जंगल पहुंचे। वहां उन्होंने हंसराज को घायल अवस्था पाया।

हंसराज को टांग में गंभीर चोट की वजह से उपचार के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है। डॉक्टरों ने उनकी टांग के ऑपरेशन की बात कही है। चिकित्सा अधीक्षक देवेंद्र ने बताया कि जंगल में घायल अवस्था में मिले व्यक्ति का उपचार मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है।

दिल्ली से आई टीम ने सरकाघाट में दबोचा तेंदुए के अंगों का तस्कर

रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। मंडी जिले के सरकाघाट में पुलिस ने तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले एक तस्कर को पकड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक निजी होटल में छापेमारी करके तस्कर को दुर्लभ प्रजाति के तेंदुए की खाल, नाखून और दांतों के साथ गिरफ्तार किया है।

दिल्ली से वाइल्ड लाइफ की एक टीम दुर्लभ प्रजाति के तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले तस्कर को पकड़ने के लिए मंडी पहुंची थी। टीम ने जिला पुलिस की मदद से तस्कर को गिरफ्तार करवाने में सफलता हासिल की है। एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने मामले की पुष्टि की है।

मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली की वाईल्ड लाईफ टीम को मंडी जिला के सरकाघाट क्षेत्र के एक व्यक्ति द्वारा तेंदुए की खाल और अन्य अंगों की तस्करी करने की गुप्त सूचना मिली थी। गुप्त सूचना के आधार पर वाइल्ड लाइफ टीम मंडी पहुंची और अपनी सूचना को पुख्ता करना शुरू कर दिया।

वाइल्ड लाइफ टीम ने जिला पुलिस के ध्यान में मामला लाया। उसके बाद सरकाघाट पुलिस थाना की टीम के साथ सरकाघाट के एक नीजि होटल में दबिश दी गई। दबिश में सरकाघाट के थौना निवासी राम सिंह को दो तेंदुए की खालों, 14 नाखूनों और 10 दांतों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। बरामद किए गए तेंदुए के अंगों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपए है।

जानकारी देते हुए थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि यह खालें दुर्लभ प्रजाति के तेंदुओं की है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इनकी क़ीमत लाखों रुपए है। उन्होंने बताया कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क होने का अंदेशा है। पुलिस द्वारा हर पहलू की जांच की जा रही है।

एसएचओ ने बताया कि पुलिस तमाम पहलुओं से छानबीन कर रही है। होटल मालिक और आरोपी के संबंधों को भी जांच के दायरे में लिया जाएगा। आरोपित के मोबाइल को भी जप्त कर लिया है। किन-किन लोगों के साथ संपर्क हुआ है। पुलिस तमाम रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है। आरोपी की पहचान राम सिंह ग्राम पंचायत थौना के गाँव गैहरा के रूप में हुई है। आरोपी को बरामद किये गए तेंदुए के अंगों के साथ कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

एसएचओ ने बताया कि यह सरकाघाट क्षेत्र की पहली घटना है। इससे पहले भी यहां पर वन्य प्राणियों की अवैध शिकार के कई मामले सामने आ चुके हैं। समझा जा रहा है यह किसी बहुत बड़ी गैंग का काम है और यह मात्र एक मोहरा है।

मामले की पुष्टि करते हुए एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि आरोपी को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 51 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है।

रणदीप गुलेरिया बोले- भारतीय बच्चों की इम्युनिटी मजबूत, स्कूल खोले जाने चाहिए

नई दिल्ली।। भारतीय बच्चों की इम्युनिटी मजबूत होती है। इसलिए स्कूल खोले जाने चाहिए। यह बात एम्स निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कही। वहीं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा किये गए चौथे सीरो सर्वे में खुलासा हुआ है देश के 68% लोगों में कोरोना के प्रति एंटीबॉडी मौजूद हैं। लेकिन अभी भी करीब 40 करोड़ लोगों के कोरोना संक्रमित होने का खरता बना हुआ है। जो पूरी आबादी का एक तिहाई है। करीब दो तिहाई लोगों में ही कोरोना के प्रति एंटीबॉडी मौजूद हैं। सीरो सर्वे में इस बार 6 से 17 साल के बच्चों को भी शामिल किया गया था।

कोरोना की दूसरी लहर से देश अभी उभर रहा है। वहीं, तीसरी लहर के आने की आशंका भी जताई जा रही है। कोरोना कि तीसरी लहर बच्चों के लिए ज़्यादा खतरनाक बताई जा रही थी। तीसरी लहर में बच्चों के बीमार पड़ने की सम्भावना जताई जा रही थी। इसी सिलसिले में एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया का बयान आया है।

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि अब समय आ गया है कि स्कूलों को फिर से खोलने पर सहमत हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बच्चे के संपूर्ण विकास में स्कूली शिक्षा का बहुत महत्व है। ऑनलाइन क्लास से ज्यादा बच्चों का स्कूल जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना से संक्रमित बच्चों के मामले बहुत कम है। जो बच्चे इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। उनकी इम्युनिटी अच्छी होने के कारण वह जल्दी ठीक भी ही रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीरो सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि बच्चों के पास वयस्क लोगों की अपेक्षा ज्यादा बेहतर एंटीबॉडीज हैं, इसलिए स्कूल खोले जाने चाहिए।

रोहड़ू में खुदाई के दौरान निकला साढ़े चार फीट का शिवलिंग

शिमला।। जिला के रोहड़ू में खुदाई के दौरान साढ़े चार फीट ऊंचा शिवलिंग निकला है। रोहड़ू के कलोटी में देवरा नामक जगह पर यह शिवलिंग मिला है। इसके साथ ही खुदाई के दौरान पत्थर पर बनी गणेश की मूर्ति और कार्तिकेय की मूर्ति भी मिली है।

खुदाई के दौरान मिले शिवलिंग को सावन मास के पहले सोमवार को गांव में स्थापित किया गया। वहीं गांव में शिवलिंग को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। गांव वालों ने शिवलिंग को स्थापित कर दिया है। जिस स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया गया है, उसे पवित्र मानकर गांव वालों ने मंदिर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार कई वर्षों से इस शिवलिंग का थोड़ा सा हिस्सा दिखाई पड़ता था। लेकिन यह पता नहीं था कि यह पत्थर एक विशालकाय शिवलिंग है। स्थानीय लोग इसे भीम की गदा समझा करते थे।

दुपट्टे का झूला बन गया मौत का फंदा, सात वर्षीय बच्ची की मौत

हमीरपुर।। हमीरपुर जिले में एक सात वर्षीय बच्ची की दुपट्टे से बने झूले में फंसने से मौत हो गयी। जिले की अवाहदेवी पुलिस चौकी के तहत यह मामला सामना आया है।

जानकारी के अनुसार अनिल कुमार और उसकी पत्नी सुनीता देवी गांव बज्र मैड़ी तहसील दातागंज जिला बदायूं उत्तर प्रदेश तीन बच्चों सहित अवाहदेवी कस्बे में एक कमरे में रहते हैं। दोनों लोग यहाँ मजदूरी करते हैं। सोमवार सुबह वह अपने कमरे से निकलकर ऊपर की मंजिल में कार्य करने आ गए। इनकी बड़ी बेटी बबिता उम्र सात साल, बेटा अमन उम्र पांच साल और कंचन उम्र एक साल कमरे में थे।

बबिता अंदर से कमरा बंद करके दोनों छोटे भाई और बहन के साथ खेलने लगी। उसने दुपट्टे को खिड़की के साथ बांधकर झूला बनाया और उसमें झूलने लगी। लेकिन यह झूला उसके गले का फंदा बन गया। कमरे से छोटे भाई और बहन के रोने की आवाज़ सुनकर माता-पिता कमरे की तरफ भागे। कमरा अंदर से बंद था। जैसे-तैसे कमरे को खोलकर अंदर गए तब तक बबिता की मौत हो चुकी थी।

इसकी सूचना पंचायत प्रधान देशराज चंदेल और उपप्रधान अनिल कुमार को दी गई। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। मामले की पुष्टि करते हुए चौकी प्रभारी ज्ञान चंद ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सीएम जयराम ठाकुर की पर्यटकों को नदी-नालों के किनारे न जाने की सलाह

शिमला।। सीएम जयराम ठाकुर ने पर्यटकों से नदी, नालों और पानी वाली जगहों के पास न जाने की अपील की है। सीएम ने कहा कि जहां भी बारिश के कारण सड़क अवरुद्ध होती है, उसे रिस्टोर किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आने वाले पर्यटकों पर सरकार की नज़र है। पर्यटकों से आग्रह किया जा रहा है कि कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करें। इसके अलावा होटल और होम स्टे मालिकों से पर्यटकों का स्वागत करते समय उचित एहतियाती कदम सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

सीएम जयराम ठाकुर सोमवार को अपने दो दिवसीय दिल्ली दौरे से हिमाचल पहुंचे हैं। इस दौरान सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में हिमाचल में आगामी उपचुनावों पर भी चर्चा हुई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में एक लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव हैं। इस संबंध में पीएम से जानकारी साझा की गई है।

सोमवार को शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसा नहीं है कि वह केवल सौगात के लिए ही दिल्ली जाते हैं। दिल्ली में उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात कर हिमाचल की विकास परियोजनाओं के बारे में चर्चा की है। पीएम ने हिमाचल में बरसात के मौसम की स्थिति और अन्य मुद्दों पर भी जानकारी ली है। स्वाभाविक रूप से उपचुनाव के सिलसिले में भी थोड़ी बहुत बातचीत हुई है।

संजय कुंडू के बाद किसे मिलेगी हिमाचल के डीजीपी की जिम्मेदारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में संजय कुंडू के बाद अगला पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कौन होगा। डीजीपी के पद पर नए अफसर की नियुक्ति को लेकर मंथन शुरू हो गया है। क्योंकि हिमाचल के वर्तमान डीजीपी संजय कुंडू ने केंद्र में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख के पद के लिए आवेदन कर दिया है। उन्होंने सरकार से अनुमति लेकर ही यह आवेदन किया है।

केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों के डीजीपी से इस पद के लिए आवेदन मांगे गए थे। हालांकि अभी आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। लेकिन कुंडू के बाद हिमाचल के नए डीजीपी के नाम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

बता दें कि 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू के अलावा राज्य में एक भी डीजी रैंक का अधिकारी मौजूद नहीं है। डीजीपी की तैनाती के लिए 30 वर्ष का सेवाकाल जरूरी है। चर्चा है कि इस स्थिति में राज्य सरकार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे कुंडू के ही बैच के संजीव रंजन ओझा या 1990 बैच के श्याम भगत नेगी को ताजपोशी के लिए बुला सकती है। यह भी संभव है कि सरकार प्रदेश में सेवा दे रहे अधिकारियों में किसी को पदोन्नति दे दे।

चूंकि, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से अफसर को बुलाना आसान है। वहीं अधिकारी भी डीजीपी बनने के लिए प्रदेश लौटने में हिचकेंगे नहीं। ऐसे में पदोन्नति की उम्मीद कम ही है। चर्चा है कि ओझा या नेगी में किसी को इस पद पर बिठाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए पहले संजय कुंडू की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में तैनाती जरूरी है।

लगातार हो रही बारिश से धंसते रिज पर बढ़ रहा है खतरा

शिमला।। शिमला का रिज मैदान जिसे शहर का दिल कहा जाता है। इसके धंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। रिज का कुछ हिस्सा पहले ही धंस चुका है। यहां का मुख्य पेयजल टैंक पहले ही कमजाेर अवस्था में आ गया है। इसमें दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में लगातार हो रही बारिश से रिज मैदान को और खतरा हो गया है।

साेमवार काे हुई मूसलाधार बारिश के चलते सारा पानी धंसे हुए रिज की दराराें में रिसता गया। इससे अब रिज मैदान की नींव और ज्यादा कमजाेर हाे रही है। प्रदेश में मॉनसून सीजन जारी है। लगातार लगातार बारिश का दौर चला हुआ है। माैसम विभाग की ओर से आने वाले दिनाें में भी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में हालात और ज्यादा खराब हाे रहे हैं।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, लाेक निर्माण विभाग फाॅरेस्ट क्लीयरेंस में ही उलझ कर रह गया है। और भारी बारिश में रिज के धंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। शिमला के पूर्व मेयर संजय चाैहान ने भी अब धंसते रिज काे लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

संजय चौहान ने कहा कि सरकार, नगर निगम और लाेक निर्माण विभाग कोई भी धंसते रिज काे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हमने 2015 में लगभग 30 करोड़ का कॉम्प्रेसिव प्लान बनाया था। जो कि सिर्फ सेल्फ फाइनांसिंग के तहत ही पूरा हाेना था। इसके लिए सरकार व किसी अन्य की मदद की भी जरूरत नहीं थी।

इस प्लान के तहत तिब्बतियन मार्केट से लेकर रिज मैदान तक 100 दुकानें बनाई जानी थी। जबकि ये प्लान नगर निगम ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। संजय चाैहान का कहना है कि अगर रिज मैदान धंसा ताे इसकी पूरी जिम्मेवारी सरकार की हाेगी।

इसलिए रिज काे खतरा

1830 में रिज के नजदीक सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए जाने लगे। जिसके बाद 1887 में अंग्रेजों द्वारा यहां गेयटी थियेटर का निर्माण करवाया गया। गेयटी थियेटर के निर्माण के समय सारा मलबा तिब्बती मार्केट की ओर फेंका गया। फिर टाउनहॉल का निर्माण हुआ।

साल 1880 में रिज मैदान के नीचे पानी के टैंकों का निर्माण किया गया था। टैंक बनाने के लिए हुई खुदाई से निकली सारी मिट्टी भी तिब्बतियन मार्केट की तरफ ही फेंकी गई। साल 2011 में रिज का एक हिस्सा एकदम से बैठ गया। निरीक्षण करने पर पाया कि इसमें दरारें पड़ रही हैं और इसके नीचे का मलबा लगातार बह रहा है।

बिना प्रिंसिपल के चल रहे हिमाचल के 47 प्रतिशत सरकारी कॉलेज

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कम से कम 66 सरकारी कॉलेजों में नियमित प्रिंसिपल नहीं है। यह संख्या प्रदेश के कुल सरकारी कॉलेजों की संख्या का 47 प्रतिशत से अधिक है। हिमाचल प्रदेश में कुल 138 सरकारी कॉलेज हैं।

47 प्रतिशत कॉलेजों में नियमित प्रिंसिपल न होने का कारण विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) है। डीपीसी पिछले कुछ वर्षों में एक भी बैठक आयोजित करने में विफल रही है। यहां तक ​​​​कि कई पात्र शिक्षक बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए हैं।

कॉलेजों में प्रिंसिपल की यह वैकेंसी शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डालने के अलावा, राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त करने में बाधा पैदा कर रही हैं, जो छह या उससे अधिक साल पहले स्थापित कॉलेजों के लिए अनिवार्य है।

यूजीसी और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत अनुदान प्राप्त करने के लिए कॉलेजों के लिए एनएएसी मान्यता अनिवार्य है। क्योंकि इसके लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे और स्टाफ की आवश्यकता है। राज्य में केवल कुछ मुट्ठी भर ग्रेड ए सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से अधिकांश संस्थानों ने या तो मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है या आवश्यकता को पूरा नहीं कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (एचजीसीटीए) के महासचिव डॉ आरएल शर्मा ने कहा कि 66 सरकारी कॉलेज नियमित प्रिंसिपल के बिना हैं, 19 में कार्यवाहक प्रमुख हैं और शेष 53 संस्थानों में नियमित प्रिंसिपल हैं।

एचजीसीटीए द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार कांगड़ा जिले में 28 में से 12, शिमला में 20 में से 14, मंडी में 18 में से नौ, सोलन में 12 में से सात, सिरमौर में 14 में से नौ, कुल्लू में सात में से तीन, चंबा में 10 में से पांच, बिलासपुर में चार में से एक, ऊना में 10 में से चार, लाहौल-स्पीति में दो में से एक और किन्नौर में एक में से एक पद खाली है। सिर्फ हमीरपुर जिले में प्रिंसिपल के सभी छह पद भरे गए हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि सरकार यूजीसी के मानकों के अनुसार योग्य प्रिंसिपल्स को बढ़ावा देने और प्रोफेसरों के नए पद बनाने की उनकी मांग पर ध्यान देने में विफल रही है।

इस बारे उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा का कहना है कि मामला विचाराधीन होने के कारण प्रिंसिपल के पद नहीं भरे गए थे। दो मामले अदालत में लंबित थे।