हमीरपुर।। देवभूमि का एक और लाल देश की रक्षा में शहीद हो गया। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर का जवान जम्मू-कश्मीर के पुंछ में बारूदी सुरंग फटने से शहीद हो गया। ग्राम पंचायत लगमनवी के गांव घुमारली का रहने वाला शहीद कमल वैद्य डोगरा रेजिमेंट में तैनात था।
शहीद जवान अप्रैल में छुट्टी काट कर ड्यूटी पर लौटा था। 27 वर्षीय जवान की अक्तूबर माह में शादी तय थी। घर पर विवाह की तैयारियां चल रही थीं। जवान बेटे की शहादत की खबर सुनकर मां रो रोकर बेहाल है, तो भाई बेसुध है। शहीद अपने पीछे माता-पिता, बड़े भाई और दो बहनों को छोड़ गया है।
कमल पुंछ जिला के कृष्णा घाटी सेक्टर में गश्त के दौरान सुरंग में हुए धमाके की चपेट में आ गया। सेना के अधिकारियों ने बताया कि सिपाही कमल वैद्य बेहद बहादुर और अनुशासित जवान था, जिसे सेना ने खो दिया।
कमल वैद्य साल 2015 में हमीरपुर में 15 डोगरा रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। पहली से दसवीं की पढ़ाई लुद्दर महादेव स्कूल में हुई, जबकि जमा दो तक की पढ़ाई सीनियर सेकेंडरी स्कूल भोरंज में हुई। कालेज में दाखिला लिया था, लेकिन इस दौरान वह सेना में भर्ती हो गए थे।
शहीद की पार्थिव देह आज शाम साढ़े तीन बजे हेलीकॉप्टर के माध्यम से आईआईटी हमीरपुर के मैदान में पहुंचेंगी। इसके बाद कुछ देर में घर में रखने के बाद साढ़े चार बजे के करीब शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश की एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। ऐसे में खबरें निकलकर आ रही हैं कि उपचुनाव की तारीख का एलान इसी महीने हो सकता है।
मंडी लोकसभा सीट के अलावा जुब्बल कोटखाई, फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने हैं। सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग कोरोना और मौसम के अनुमानों को देखते हुए सितंबर के पहले हफ्ते में सभी उपचुनाव वाले क्षेत्रों में मतदान करा सकता है।
देशभर में करीब 90 विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। चुनाव आयोग सभी जगह एक साथ उपचुनाव की तारीखों का एलान करेगा, ऐसी संभावना जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश की बात करें तो चुनाव आयोग ने अर्की को छोड़कर मंडी लोकसभा और जुब्बल कोटखाई व फतेहपुर विधानसभा सीटों में उपचुनाव को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। पहले ही हरियाणा से एम 3 श्रेणी की ईवीएम और वीवीपैट मशीनें मंगवा ली है। इसके साथ ही मशीनों की पहले चरण की चेकिंग भी कराई जा चुकी हैं।
वही संभावना हैं कि इसी हफ्ते अर्की के लिए भी हरियाणा से ईवीएम और वीवीपैट मशीनें पहुंच जाएगी। इसके बाद इनकी भी पहले चरण की चेकिंग यानी फर्स्ट लेवल क्लीयरेंस (एफएलसी) होगी। सभी जगह कर्मचारियों का पूरा डाटा तैयार कर रैंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर में अपडेट किया जा चुका है।
सूत्रों की मानें तो चुनाव की अधिसूचना के बाद 15 अगस्त के बाद उप चुनाव की प्रक्रिया चरम पर पहुंच जाएगी। आदर्श आचार संहिता लगने के 28 दिन के भीतर मतदान होगा। संभव है कि अगले दो दिन में मतगणना के बाद परिणाम जारी हो जाएगा।
फिलहाल, हिमाचल प्रदेश का मुख्य निर्वाचन कार्यालय सभी तैयारियों को पूरा कर दोबारा चेकिंग करने की रणनीति पर काम कर रहा है
शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। जिसमें सभी स्वास्थ्य केंद्रों व बिस्तरों की संख्या, एम्बुलेंस, मानसिक अस्पतालों की संख्या व उनमें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने को कहा गया है। इसमें अलग से बच्चों अर्थात् बाल रोगियों के लिए निर्धारित सुविधाओं की जानकारी देने को भी कहा गया है।
हाई कोर्ट ने सरकार को कोरोना से जुड़ी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार कोरोना से संबंधित गतिविधियों जैसे लगाए गए टीकों की संख्या, लगाए जाने वाले टीकों की संख्या और राज्य में कोविड से हुई मौतों का विवरण संबंधित वेबसाइट पर अपलोड करना जारी रखें।
कोरोना के प्रसार को रोकने के आग्रह को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह आदेश पारित किए। मामले पर सुनवाई 28 को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमथ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष याचिकोपर सुनवाई हो रही है।
सुनवाई के दौरान, भारत के सहायक सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा ने कहा कि भारत सरकार को कोविड से निपटने के लिए 240 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रस्ताव भेजा गया है।
बता दें कोर्ट ने पहले उपायुक्तों की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जिला निगरानी समितियों का गठन किया था और उन्हें कोविड के संबंध में स्थिति का पता लगाने के लिए कस्बों, शहरों और गांवों का दौरा करने का निर्देश दिया था। समितियों को यह पता लगाने का भी निर्देश दिया गया था कि क्या सरकार द्वारा दी गई सहायता चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त है।
रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट पर उनके सम्मान में सम्मान समारोह आयोजित किया जाता है। अन्य कर्मचारियों और लोगों द्वारा उन्हें तोहफे भी प्रदान किए जाते हैं। लेकिन यहाँ एक एचआरटीसी के डीएम साहब को सरकार द्वारा दिया गया वीआईपी नंबर और मोबाइल इतना पसंद आ गया कि साहब रिटायर होने पर अपने साथ ही ले गए।
एचआरटीसी के डीएम मंडी अमरनाथ सलारिया रिटायर होने के बाद अपने साथ सरकार द्वारा दिया गया वीआईपी मोबाइल नंबर और मोबाइल भी ले गए हैं। साहब को रिटायर हुए पूरे दो महीने हो गए हैं, परंतु वह अभी भी सरकारी फोन और नंबर का प्रयोग कर रहे है। साहब द्वारा इस नंबर का प्रयोग किए जाने का खामियाजा रोज़ाना हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। साहब न तो सवारियों के फोन उठाते हैं, अगर उठा भी लें तो इसे अपना व्यक्तिगत बताते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग भी करते है। साथ ही उन्हें ड़ीएम के दूसरे नंबर पर फोन करने को कहते हैं।
बता दें कि डीएम मंडी का मोबाइल नंबर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी के करीब 700 बसों पर अंकित किया गया है। इसमें साफ लिखा है कि किसी भी परेशानी के लिए सवारियां डीएम या आरएम से इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
यहां बताते चलें कि पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान परिवहन मंत्री जीएस बाली ने परिवहन निगम के सभी डीएम और आरएम से लेकर आला अधिकारियों को वीआईपी श्रेणी के मोबाइल नंबर के साथ-साथ एंड्रॉयड फोन भी प्रदान किए थे।यह फोन इसलिए दिए गए थे ताकि रात दिन अधिकारी सवारियों के फोन अटेंड कर सके। बकायदा यह नंबर प्रदेश की सभी बसों पर अंकित किए गए थे। ऐसा ही डीएम मंडी का नंबर 9418000516 भी सरकार ने उन्हें दिया था।
बस में लिखे नम्बर
पोस्टपेड सिम वाले इस नंबर का बिल सरकार द्वारा भरा जा रहा है और यह नंबर कुल्लू, केलांग, मंडी, सरकाघाट, सुंदरनगर, धर्मपुर डिपो की करीब 700 बसों पर अंकित किया गया है।
अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिरकार किस ने डीएम को वीआईपी नंबर और फोन ले जाने की इजाजत दी। अगर डीएम का यह व्यक्तिगत नंबर है या ऐसा कोई सरकार के पास नियम है जिसके तहत कर्मचारी सरकार द्वारा दिए गए नंबर को रिटायर होने के बाद या ट्रांसफर होने के बाद अपने पास रख सकता है तो इसका खामियाजा कौन भुक्तेगा।
कौन करेगा खर्च की भरपाई
डीएम मंडी का मोबाइल नंबर 6 डिपो की क़रीब 700 बसों पर अंकित है। अगर अब यह नंबर वह अपने पास रखते हैं और दूसरे डीएम का नंबर अंकित किया जाता है तो 700 बसों पर इसे मिटाने और दोबारा लिखने के खर्च की भरपाई कौन करेगा।
यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2 महीने पहले डीएम रिटायर हो चुके है। इस दौरान चार्ज दूसरे अधिकारी के पास था और अब डीएम का चार्ज किसी और के पास है। ऐसे में इस नंबर को लेकर जांच क्यों नहीं गई। यह भी एक सवालिया निशान है।
किसने क्या कहा
डीएम मंडी अमरनाथ सलारिया 30 मई 2021 को एचआरटीसी से रिटायर हुए हैं। तब से लेकर इस माह तक चार्ज सुंदरनगर डिपो के आरएम विनोद कुमार के पास था। उन्होंने कहा कि चार्ज मेरे पास था। मुझे ना तो कोई मोबाइल दिया गया था। ना ही उन्हें नंबर के बारे में मालूम है।
डीएम मंडी डॉक्टर संतोष कुमार ने कहा कि मुझे चार्ज लेते दौरान बताया गया कि यह नंबर उनका पर्सनल नंबर था। ना तो उन्हें कोई फोन दिया गया, ना ही कोई नंबर। इतना जरूर है कि निगम की सभी बसों और मंडी डिपो पर यही नंबर अंकित है।
उधर, रिटायर्ड डीएम अमरनाथ सलारिया ने कहा कि मेरे पास एचआरटीसी प्रबंधन ने कोई भी फोन नहीं दिया था। सिम सरकार की जरूर थी, परंतु मैंने यह नंबर अपने नाम पर रिटेंन करवा लिया है। मेरे से पहले वालों ने भी ऐसा किया है, मैं अकेले थोड़े हूं।
मामले की होगी जांच : एमडी
एचआरटीसी के एमडी संदीप कुमार ने कहा की निगम ने सभी डीएम,आरएम और अन्य आला अधिकारियों को एक ही सीरीज के मोबाइल नंबर और एंड्रॉयड दिए हैं, जिनका बिल निगम भर रहा है। रिटायर होने के बाद डीएम ने फोन और सिम क्यों नहीं लौटाई इस मामले को लेकर जांच की जाएगी।
मंडी।। सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा पर बहू द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद परिवार की आंतरिक लड़ाई अब सोशल मीडिया के माध्यम से बाहर आ गई है। वीरवार शाम को आश्रय शर्मा की पत्नी राधिका गंभीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर अपने ससुर अनिल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भले ही आश्रय शर्मा ने पत्नी का अकाउंट हैक होने की बात कहकर आरोपों पर पर्दा डालने की कोशिश की हो। लेकिन उसके बाद आई अनिल शर्मा की पोस्ट ने परिवार की अंतर्कलह को जगजाहिर कर दिया। अनिल शर्मा ने अपनी छोटी बहू यानी सलमान खान की बहन अर्पिता खान शर्मा की तरफ से भेजे गए संदेश को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर शेयर किया है। अब हर तरफ यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ एक नोटिस से, जो अनिल शर्मा ने अपनी बहू राधिका शर्मा को भेजा था। दरअसल, अनिल शर्मा परिवार का मंडी शहर में रीजेंट पाल्म्स होटल है। इसी होटल में राधिका पिछले 33 महीनों से सैलून चला रही है। उन्हें 33 महीनों का किराया जमा करवाने के लिए नोटिस भेजा गया था। नोटिस का फोटो राधिका ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भी शेयर किया था।
बता दें रीजेंट पाल्म्स होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से इनकी कम्पनी भी है। इसी कम्पनी की ओर से राधिका को यह नोटिस भेजा गया था। यहाँ गौर करने लायक बात ये है कि राधिका को नोटिस भेजने वाली कम्पनी में उनके पति आश्रय शर्मा भी एडिशनल डायरेक्टर है।
यह कम्पनी साल 2009 में रजिस्टर्ड हुई है। अनिल शर्मा और उनकी पत्नी सुनीता शर्मा कंपनी के डारेक्टर और बेटा आश्रय शर्मा एडिशनल डायरेक्टर है। अनिल और सुनीता 2009 से ही कंपनी के डायरेक्टर हैं। लेकिन आश्रय को 2019 में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया है जो कि गौर करने लायक बात है। जिस वक्त आश्रय को कम्पनी में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया उससे पहले से ही राधिका यहाँ अपना सैलून चला रहीं थी।
Source: Zauba Corp
आश्रय और राधिका 6 साल पहले एक-दूसरे के साथ परिणय सूत्र में बंधे थे। लगभग पिछले 33 महीनों से राधिका इसी होटल में सैलून चला रही हैं।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश में उपचुनावों की सरगर्मियां तेज हो गयी है। एक लोकसभा व तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सभी राजनीतिक दल उपचुनावों की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को पति वीरभद्र सिंह की विधानसभा सीट अर्की से उतारने की तैयारी की जा रही है। मंडी संसदीय सीट से उपचुनाव लड़ाने की अटकलों के बीच अब उन्हें अर्की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की चर्चा सामने आ रही है।
ऐसी खबरें हैं कि सलाहकारों ने सूबे में वीरभद्र परिवार का वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की है। पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को मंडी लोकसभा सीट से उतारने का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत से खाली हुई अर्की सीट को उनके लिए सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। इस सीट से उन्हें कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।
वीरभद्र सिंह की किचन कैबिनेट के नेताओं भी का यही मत है। उनका मानना है कि यदि अर्की से प्रतिभा सिंह उम्मीदवार होंगी, तो इस सीट पर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है। वहीं प्रतिभा सिंह को सांसद बनाने की बजाय प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रखने और वीरभद्र परिवार को मजबूत करने के लिए यह योजना तैयार की गई है।
इसके पीछे जानकारों का कहना है कि यदि विक्रमादित्य सिंह और प्रतिभा सिंह एक साथ प्रदेश की राजनीति में होंगे तो इसका फायदा 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को होगा। विक्रमादित्य और प्रतिभा सिंह ही वीरभद्र सिंह के निजी वोट को एक साथ रख सकेंगे।
इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस का एक धड़ा अर्की से संजय अवस्थी की पैरवी कर रहा है। संजय ने 2012 में भी अर्की से चुनाव लड़ा था। उस दौरान दो हज़ार से अधिक वोटों से संजय की हार हुई थी। इसके बाद 2017 में संजय अवस्थी ने वीरभद्र सिंह के लिए अपनी दावेदारी छोड़ दी थी। इस दौरान संजय ने पूरी सक्रियता से वीरभद्र सिंह के लिए चुनाव प्रचार किया था।
यह भी माना जा रहा है कि अर्की में भाजपा की गुटबाजी का लाभ प्रतिभा सिंह को मिल सकता है। क्योंकि भाजपा में टिकट के लिए लड़ाई शुरू हो चुकी है। जहां एक ओर पूर्व विधायक गोविंद शर्मा ने मोर्चा खोला हुआ है। वहीं अर्की से चुनाव लड़ चुके भाजपा नेता रत्नपाल सिंह ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
धर्मशाला।। प्रोफेसर एसपी बंसल हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी के नए कुलपति नियुक्त किए गए हैं। इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दी गई हैं। इससे पहले वह टेक्निकल यूनिवर्सिटी हमीरपुर में कुलपति के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
साल 2020 में प्रोफेसर बंसल की नियुक्ति टेक्निकल यूनिवर्सिटी में बतौर कुलपति की गई थी। एक वर्ष के लिए उनकी नियुक्ति हुई थी। इसके बाद जून 2021 में राज्य सरकार ने प्रोफेसर एसपी बंसल को आगामी एक साल के लिए दोबारा से कुलपति नियुक्त किया था।
बता दें की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अप्रैल माह से कुलपति का पद खाली चल रहा था। वर्तमान में डॉ. रोशन लाल के पास कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार है। उन्हें अब इस कार्यभार से मुक्त कर दिया जाएगा।
मंडी।। सुखराम परिवार की अंतर्कलह सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर हुई है। पिछले कल से मंडी का सुखराम परिवार चर्चा में बना हुआ है। एक ओर जहां सुखराम शर्मा के बेटे और सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा पर उनकी बड़ी बहू राधिका ने गंभीर आरोप लगाए। वहीं दूसरी ओर छोटी बहू अर्पिता ससुर अनिल शर्मा के बचाव में उतरी है। सोशल मीडिया पर छाए इस घटनाक्रम में इस बात के पूरे संकेत मिल रहे हैं कि सुखराम परिवार में सबकुछ ठीक नहीं है।
वीरवार शाम करीब 7 बजे इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हुई। अनिल शर्मा के बड़े बेटे आश्रय शर्मा की पत्नी राधिका गंभीर शर्मा ने अपने सोशल मीडिया पेज से एक पोस्ट शेयर कर ससुर अनिल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके करीब आधे घंटे बाद राधिका के अकाउंट से यह पोस्ट डिलीट कर दी गई।
इसके बाद करीब सवा नौ बजे आश्रय शर्मा ने अपने सोशल मीडिया पेज से एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने पोस्ट में पत्नी राधिका का अकाउंट हैक होने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी ने उनके परिवार को बदनाम करने की साजिश की है। उनके परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा है।
लेकिन इसके बाद आई अनिल शर्मा की पोस्ट ने इस बात से खुद ही पर्दा हटा दिया कि उनके परिवार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। करीब सवा 10 बजे अनिल शर्मा ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में एक पोस्ट शेयर की। इस पोस्ट में उनकी छोटी बहू अर्पिता खान शर्मा का संदेश था जो उन्होंने मुंबई से मंडी वासियों के नाम भेजा था। हालांकि अनिल शर्मा ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल को लॉक किया है। इस वजह से केवल उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोग ही इस पोस्ट को देख सकते हैं। आइये आपको बताते हैं अर्पिता के इस संदेश में क्या लिखा है।
अर्पिता ने लिखा, “मैं यह संदेश बहू होने के नाते नहीं बल्कि बेटी होने के नाते लिख रही हूं। एक मुस्लिम होने के बाद भी पिछले 7 वर्षों से इस परिवार ने मुझे अपने बच्चे की तरह अपनाया है। अनिल शर्मा मेरे ससुर ही नहीं बल्कि मेरे पिता हैं और वे एक आदर्शवादी इंसान हैं। मैं हैरान हूं कि राधिका ने इस तरह के आरोप कैसे लगा दिए। हमारी शादी में दहेज जैसी कोई बात नहीं हुई थी। यहां तक कि अनिल शर्मा ने उपहार तक लेने से इनकार कर दिया था। राधिका ने अनिल शर्मा की वर्षों की मेहनत को मिट्टी करने की कोशिश की है। मेरे पास राधिका ने कई बार मंडी के प्रति अनाप शनाप बातें कही और आज वो उसी मंडी की जनता से सहयोग मांग रही है। प्रेगनेंसी के दौरान घर से बाहर निकलने की बात पूरी तरह से झूठी है। जबकि राधिका उस समय हमारे दिल्ली वाले निवास पर थी और उसका पूरा ख्याल रखा गया है। मेरी सास पहली इंसान थी जो डिलिवरी के बाद हास्पिटल पहुंची थी। परिवार की बातें बाहर करना हमारे उसूलों के खिलाफ है लेकिन राधिका की परवरिश शायद अलग माहौल में हुई है जो इस तरह की बातें सरेआम कर रही है। मैं अपने ससुर अनिल शर्मा के साथ खड़ी हूं और जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे बेबुनियाद और नीजि स्वार्थ के लिए ही हैं।”
मंडी।। मंडी का सुखराम परिवार बहू के सोशल मीडिया अकाउंट से हुई एक पोस्ट के बाद फिर सुर्खियों में आया है। वीरवार शाम को सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा की बड़ी बहू राधिका गंभीर शर्मा के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर हुई। जिसमें ससुर अनिल शर्मा पर दहेज प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। हालांकि कुछ ही देर बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया से गायब हो गई। लेकिन कहीं न कहीं इस पोस्ट से ये ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सुखराम परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
इस पूरे मसले को लेकर समाचार पत्र हिमाचल दस्तक में अनिल शर्मा की प्रतिक्रिया छपी है। जिसमें अनिल शर्मा ने कहा है कि बहू नादान है, उसने जो कुछ लिखा है, वह सच नहीं है। अनिल ने कहा, “यह पारिवारिक मामला है, जल्दी ही सुलझा लूंगा। मेरा उस पर कोई आरोप नहीं है। जोश से नहीं होश से काम ले बहू इसी में सबकी भलाई है।”
दरसअल, राधिका गंभीर शर्मा सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा की बहू और हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव आश्रय शर्मा की पत्नी है। राधिका के पिता राजीव गंभीर भी कांग्रेस के नेता हैं। वह दिल्ली से भाजपा सांसद व क्रिकेटर गौतम गंभीर की चचेरी बहन है।
वीरवार शाम को राधिका के सोशल मीडिया अकाउंट से सुसर अनिल शर्मा पर आरोप लगाते हुए एक पोस्ट शेयर हुई। पोस्ट में लिखा था कि आज मेरे ससुर ने मुझे हमारे होटल में सैलून चलाने के लिए नोटिस भेजा है। दहेज प्रताड़ना के 6 साल बाद जब मेरे परिवार ने उनसे और पैसे देने से मना कर दिया तो उन्होंने मुझे यह नोटिस भेजा है।आज मेरे ससुराल वालों से मेरे सारे संबंध टूट गए हैं। यह सब सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने मंत्रालय से इस्तीफा देना पड़ा था। पैसे और सत्ता की भूख व सब जानते हैं। 9 महीने की गर्भवती होने पर उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया। एक शख्स जो 93 साल की उम्र के अपने ही पिता को घर से निकाल सकते हैं और अपने ही बेटे के साथ ऐसा कर सकते हैं, मैं उससे क्या उम्मीद कर सकती हूं। लेकिन अगर मेरा परिवार यानी सदर के लोग मेरे साथ खड़े हैं तो मुझे किसी बात का डर नहीं है। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हालांकि इसके कुछ ही देर बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया से गायब हो गई। लेकिन तब तक लोग इसके स्क्रीनशॉट ले चुके थे और यह पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो चुकी थी। इसके थोड़ी देर बाद आश्रय शर्मा ने अपने अकाउंट से एक पोस्ट डाली। आश्रय ने अकाउंट हैक होने की बात कर मामले पर पर्दा डालना चाहा।
आश्रय ने लिखा, “जरूरी सूचना, मेरी पत्नी राधिका गंभीर शर्मा का फेसबुक अकाउंट हैक हो गया है। उस अकाउंट से किसी ने हमारे पूरे परिवार को बदनाम करने की साजिश रचि है। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप उस अकाउंट से डाली गई पोस्ट को गंभीरता से न लें। हमारा परिवार पूरी तरह से एकजुट है और ऐसी कोई भी बात नहीं है जो उस पोस्ट के माध्यम से कही गई है।”
मंडी।। वीरवार शाम को कांग्रेस के प्रदेश महासचिव आश्रय शर्मा की पत्नी राधिका शर्मा के फेसबुक पेज से एक पोस्ट शेयर हुआ। इस पोस्ट में राधिका शर्मा द्वारा अपने ससुर व भाजपा के सदर विधायक अनिल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि कुछ ही देर में यह फ़ेसबुक पोस्ट डिलीट कर दी गई।
इस पोस्ट के साथ कथित तौर अनिल शर्मा द्वारा भेजे गए नोटिस का फोटो भी शेयर किया गया था। लेकिन अब यह पोस्ट फ़ेसबुक से गायब है।
राधिका शर्मा के फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि ‘आज मेरे ससुर ने मुझे हमारे होटल में सैलून चलाने के लिए नोटिस भेजा है। दहेज प्रताड़ना के 6 साल बाद जब मेरे परिवार ने उनसे और पैसे देने से मना कर दिया तो उन्होंने मुझे यह नोटिस भेजा है।’
“आज मेरे ससुराल वालों से मेरे सारे संबंध टूट गए हैं। यह सब सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने मंत्रालय से इस्तीफा देना पड़ा था। पैसे और सत्ता की भूख व सब जानते हैं। 9 महीने की गर्भवती होने पर उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया।”
“एक शख्स जो 93 साल की उम्र के अपने ही पिता को घर से निकाल सकते हैं और अपने ही बेटे के साथ ऐसा कर सकते हैं, मैं उससे क्या उम्मीद कर सकती हूं। लेकिन अगर मेरा परिवार यानी सदर के लोग मेरे साथ खड़े हैं तो मुझे किसी बात का डर नहीं है। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
इसके बाद आश्रय शर्मा ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट शेयर करके लिखा कि उनकी पत्नी का फ़ेसबुक अकाउंट हैक हो गया था।
आश्रय ने लिखा, “जरूरी सूचना, मेरी पत्नी राधिका गंभीर शर्मा का फेसबुक अकाउंट हैक हो गया है। उस अकाउंट से किसी ने हमारे पूरे परिवार को बदनाम करने की साजिश रचि है। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप उस अकाउंट से डाली गई पोस्ट को गंभीरता से न लें। हमारा परिवार पूरी तरह से एकजुट है और ऐसी कोई भी बात नहीं है जो उस पोस्ट के माध्यम से कही गई है।”