11 साल की बच्ची ने माता-पिता से मांगी एक करोड़ की रंगदारी

उत्तर प्रदेश।। गाजियाबाद में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। पहले यहाँ एक इंजीनियर, उनकी पत्नी और 11 साल की बेटी के व्हाट्सएप्प पर अभद्र भाषा के स्टेटस लगे। उसके बाद एक करोड़ की रंगदारी मांगी गई। फिर सात साल के बेटे की हत्या की धमकी मिली। यह देखकर परिवार वाले डर गए और साहिबाबाद थाने में मामले की शिकायत कर दी।

पुलिस जांच में जब मामले की हकीकत सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया। पूरे परिवार को धमकी देने वाला कोई बाहरी नहीं बल्कि उनकी 11 साल की बेटी ही थी। सातवीं क्लास में पढ़ने वाली यह बच्ची पढ़ाई को लेकर माता-पिता की पड़ने वाली डांट से नाराज थी।

इस बारे साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि शुरू में तो इस पर शक नहीं हुआ पर जांच के बाद साफ हो गया कि बच्ची ही ऐसा कर रही थी। पोल खुलने के बाद उसने पैरंट्स को सॉरी बोला और आगे ऐसा नहीं करने की बात कही। जिसके बाद पैरंट्स ने लिखित में पुलिस से माफी मांगी है।

पूछताछ में सामने आया है कि बच्ची कोरोना काल को लेकर काफी परेशान थी। पैरंट्स ने ऑनलाइन क्लास के लिए उसे नया मोबाइल लेकर दिया था। लॉकडाउन में बाहर नहीं जाने देने पर बच्ची ने नाराज होकर अभद्र भाषा का प्रयोग कर अपने वॉट्सऐप पर एक स्टेटस लगा दिया था। जब पैरंट्स ने यह देखा तो बच्ची को डांट लगाई। इस पर बच्ची मोबाइल हैक होने की बात कही। जिसे उन्होंने मान लिया।

इसके बाद बच्ची ने पैरंट्स के वॉट्सऐप का एक्सेस वेब ऑप्शन से लैपटॉप पर लिया और उनके मोबाइल पर भी अभद्र स्टेट्स लगा दिए। इसके साथ ही परिवार के लोगों को भी गलत तरीके से मैसेज भेजना शुरू कर दिया। ऐसे में पैरंट्स को लगा कि उनके मोबाइल भी हैक हो गए हैं।

वॉट्सऐप स्टेट्स पर अभद्र भाषा व एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने तक तो परिवार टेंशन में था। लेकिन जब पैसे नहीं देने पर सात साल के बेटे की हत्या तक की बात लिखी तो परिवार के लोग डर गए और उन्होंने साहिबाबाद थाने में इसकी शिकायत कर दी।

साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। उन्होंने पैरंट्स और बच्ची के मोबाइल को फॉर्मेट कर उसके पासवर्ड भी बदल दिए। इसके बाद बच्ची ने वॉट्सऐप का प्रयोग नहीं किया। उसने एक पेपर पर किल लिखकर गेट से अंदर डाल दिया। लेकिन परिवार ने हाल ही सीसीटीवी लगवाए थे, जिसमें वह ऐसा करते हुए पकड़ी गई।

जब बच्ची से पूछताछ की गई तो पहले उसने पड़ोस के युवक, मौसी समेत कई लोगों के कहने पर ऐसा करने की बात कही। हालांकि बाद में उसने सच बता दिया। पढ़ाई के लिए पड़ने वाली डांट और लॉकडाउन में घर से बाहर नहीं जाने देने के कारण ऐसा करने की बात कही।

ऐसी घटनाओं पर क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

ऐसी घटनाओं पर मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन का असर सभी पर पड़ा है। जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन इन पर अक्सर चर्चा नहीं होती है। ऑनलाइन क्लास ने बच्चों को सीधे इंटरनेट से जोड़ दिया है। पैरंट्स बिजी होने के कारण उन पर कम ध्यान देते हैं। ऐसे में बच्चों से बात नहीं करने पर वह उनसे दूर होते हैं। उनकी मन की बात भी पता नहीं चलती है। इस दौरान बच्चों को समझने के लिए इन बातों का खासा ध्यान रखने की जरूरत है।

बच्चों को मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग घर के किसी व्यक्ति के सामने ही करने दें। अकेले में कम रहने दें। बच्चों को समझाने के स्थान पर उनको समझने और सुनने का प्रयास करें। कोरोना के चलते लगी पाबंदियों के कारण बच्चों को बाहर लेकर नहीं जा सकते हैं, लेकिन उन्हें कम से कम कुछ देर के लिए बाहर जरूर टहलाएं। घर के माहौल को बढ़िया रखें, जिससे बच्चे बाहर जाने की जिद भी कम करें। बच्चों को जिस काम के लिए बार-बार कहते हैं, उसे अपने ऊपर भी लागू करें।

 

कौन है हिमाचल पर कब्जे की धमकी देने वाला जीएस पन्नू

शिमला।। लोगों को कॉल करके प्री रिकॉर्डेड ऑडियो मेसेज के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को तिरंगा न फहराने देने की अपील करने वाले जीएस पन्नू के खिलाफ हिमाचल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जीएस पन्नू खालिस्तान समर्थक है और घोषित आतंकवादी है। इस समय वह अमेरिका में है जहां से पंजाब के युवाओं में अलगाववाद की भावना बढ़ाने के लिए अभियान चला रहा है।

सिख फॉर जस्टिक (SFJ) नाम के प्रतिबंधित संगठन के संस्थापक जीएस पन्नू का पूरा नाम गुरपतवंत सिंह पन्नू है। पिछले साल जुलाई में ही भारत ने इसे यूएपीए कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था। गुरपतवंत सिंह पन्नू पर भारत विरोधी और अलगाव वादी अभियान चलाने और सिख युवाओं को हिंसा का रास्ता अपनाने के लिए भड़काने का आरोप है।

वांछित आतंकवादी
इसी साल चार फरवरी को विदेश मंत्रालय ने बताया था कि SFJ और इसके नेताओं के खिलाफ अमेरिकी सरकार से अनुरोध किया था। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट को भारतीय एजेंसियों ने म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट के तहत सारी जानकारियां भेजी हैं और कार्रवाई करने की मांग की थी।

गुरपतवंत सिंह पन्नू

जनवरी में एनआईए ने सिख फॉर जस्टिस मामले में गुरपतवंत सिंह पन्नू समेत 10 खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया था। एनआईए ने पंजाब में 2017-18 के दौरान हुई आगजनी और हिं-सा की श्रृंखला पर आरोप पत्र दाखिल किया था। उस दौरान इन आतंकवादियों ने सिख फॉर जस्टिस और रेफरेंडम 2020 के नाम से ऑनलाइन अभियान चलाया था। शुरू में पंजाब पुलिस ने अमृतसर में केस दर्ज किया था और बाद में एनआईए ने जांच संभाली थी।

हिमाचल पर कब्जे की धमकी
कुछ नंबरों पर अमेरिका के नंबर से आए फोन पर पन्नू की ओर से आए मेसेज में न सिर्फ लोगों से किसानों के समर्थन में आने की अपील की गई थी बल्कि कहा गया था कि वे हिमाचल के मुख्यमंत्री को तिरंगा न फहराने दें। यहां तक कहा गया था कि पंजाब में रेफरेंडकम करवाया जाएगा और फिर हिमाचल के उन हिस्सों पर कब्जा किया जाएगा जो पहले पंजाब का हिस्सा थे।

अब हिमाचल प्रदेश पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है और वह केंद्रीय जांच एजेंसियों का भी सहयोग ले रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि वह इस तरह की धमकियों से नहीं डरने वाले और ऐसी धमकियों का जवाब हिमाचल की जनता हर घर में तिरंगा फहराकर देगी।

पाकिस्तान में दो जगह मिली हिमाचल की जमीन

अंकित कुमार, शिमला।। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की दो जगहों पर हिमाचल की जमीन निकली है। कराची के ल्यालपुर और गुजरांवाला के गोजरा के कई जमीन के टुकड़े हिमाचल के नाम हैं। पाकिस्तान की इन जमीनों पर हिमाचल प्रदेश सरकार का मालिकाना हक निकला है। इन जमीनों की रजिस्ट्रियां भी हिमाचल सरकार के नाम हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (एचपी एसआईडीसी) के नाम इन ज़मीनों रजिस्ट्रियां दर्ज हैं। ऐसे में एचपीएसआईडीसी ने भी पाकिस्तान में निकली हिमाचल की जमीन की जांच शुरू कर दी है।

इन हिमाचल से बातचीत में एचपी एसआईडीसी के एमडी राकेश प्रजापति ने बताया कि पाकिस्तान में दो जगहों पर हिमाचल की जमीन निकली है। पाकिस्तान की यह जमीनें नाहन के राजा ने नाहन फाउंड्री के लिए खरीदी थी, जिसको बाद में भारत सरकार को बेच दिया था। उन्होंने कहा कि विधि विभाग से पाकिस्तान में मिली हिमाचल की जमीनों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। जिसके आधार पर यह मामला राज्य व केंद्र सरकार के ध्यान में लाया जाएगा और आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बता दें कि पाकिस्तान की यह जमीनें नाहन के राजा ने नाहन फाउंड्री के लिए खरीदी थी। 27 मार्च, 1952 को नाहन के राजा ने नाहन फाउंड्री की सभी संपत्तियां 30 लाख रुपये में भारत सरकार को बेच दी थी। नाहन फाउंड्री के कंपनी एक्ट में आने के कारण यह संपत्तियां बेची गयी थीं। हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद राष्ट्रपति के सचिव ने 27 सितंबर, 1962 को विशेष अधिसूचना जारी की। इसमें नाहन फाउंड्री की सभी संपत्तियों को सेल डीड सहित हिमाचल सरकार के नाम कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में वर्ष 2012 में हिमाचल सरकार ने नाहन फाउंड्री कंपनी को एचपी एसआईडीसी में मर्ज कर दिया।

इसके बाद हिमाचल सरकार ने एचपी एसआईडीसी को नाहन फाउंड्री की विवादित संपत्तियों के निपटारे के निर्देश दिए थे। जिसके बाद अब एचपी एसआईडीसी प्रदेश के बाहर की अपनी संपत्तियों को खोज रही है।

इस आधार पर यह भी सामने आया है कि हरियाणा के बहादुरगढ़, पंजाब के लुधियाना और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर के शाहपुर में एचपीएसआईडीसी की संपत्तियों का विवाद चल रहा है। उत्तराखंड के रइसी में भी एचपी एसआईडीसी का 1100 वर्ग मीटर का भूखंड है। लेकिन एचपी एसआईडीसी के अधिकारी उस समय दंग रह गए, जब लिटिगेशन के दौरान पाकिस्तान के जमीन के सौदों की सूची सामने आई।

जानकारी के अनुसार एचपी एसआईडीसी के अधिकारी लुधियाना की संपत्ति का केस कोर्ट में लड़ने के लिए रिकॉर्ड लेकर वहां पहुंचे थे। इसी दौरान रिकॉर्ड की छानबीन करते हुए ल्यालपुर और गोजरा के जमीन की रजिस्ट्रियां उनके हाथ लगी। जिसे देख अधिकारियों को इस बात का पता चला कि हिमाचल का मालिकाना हक पाकिस्तान में भी है।

सीएम की रैली में आने वाले लोगों की होगी रैंडम सैंपलिंग

शिमला।। सीएम जयराम ठाकुर की रैलियों और कार्यक्रमों में आने वाले लोगों की अब रैंडम सैंपलिंग होगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रैली या कार्यक्रम के स्थान पर ही कोरोना के रैपिड टेस्ट के लिए काउंटर लगाया जाएगा। प्रदेश में कोरोना से दोबारा गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो, इसके चलते प्रदेश सरकार यह व्यवस्था करने जा रही है।

कुछ ही समय में प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों अर्की, फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और मंडी संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव होना है। ऐसे में सीएम की रैलियों में लोगों की भीड़ उमड़ना स्वाभाविक है। इसलिए रैली स्थल पर ही लोगों की रैंडम सैंपलिंग होगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रैली वाली जगह पर ही रैपिड टेस्ट के लिए काउंटर लगाया जाएगा।

प्रदेश में एक बार फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी होने लगी है। मंडी जिला एक्टिव मामलों की संख्या में नंबर वन पर आ गया है। जिन-जिन क्षेत्रों से यह मामले आए हैं, सरकार ने सीएमओ मंडी को वहां कांट्रेक्ट ट्रेसिंग करवाने के निर्देश दे दिए हैं। इसके साथ ही जिले में सैम्पलिंग बढ़ाने को भी कहा गया है।

कंगना रणौत ने इस्तेमाल की बेहद असभ्य भाषा, ‘शर्मिंदा’ हुए प्रशंसक

शिमला।। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वालीं अभिनेत्री कंगना रणौत ने बेहद अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। इसके साथ ही गीतकार जावेद अख़्तर और अभिनेत्री शबाना आज़मी को लेकर भी अभद्र शब्द लिखे हैं।

फेसबुक पर तस्वीर के साथ शेयर किए गए कॉन्टेंट में कंगना ने ऐसे शब्द इस्तेमाल किए हैं जिन्हें उनके कुछ प्रशंसक भी अमर्यादित बता रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि राजनीतिक विरोध और आलोचना करने का अधिकार सबको है मगर इस तरह की शर्मनाक भाषा से बचा जाना चाहिए।

क्या लिखा कंगना ने
कंगना के लिखे शब्दों को आगे यथावत प्रकाशित किया गया है। आप चाहें तो आर्टिकल को यहीं पर पढ़ना छोड़ सकते हैं

“कल शबाना आज़मी और जावेद अख़्तर जी ने बंगाल के मुख्यमंत्री जिसे सब ताड़का के नाम से जानते हैं, उनके साथ में एक strategic meeting की जिसके चलते हुए वो अब धीरे धीरे कई छोटी छोटी meetings जो हैं बॉलीदाऊद mafia के गली कूचों में host करेंगे ये खानों पे pressure डालेंगे और खान सब बड़े production houses के through सब छोटे से बड़े कलाकारों को अपनी चपेट में लेलेंगे, सब भांड मिलकर ताडका को देवी बना देंगे, दिन को रात और रात को दिन दिखाने का यह कार्यक्रम शुरू हो चुका है, लेकिन या मात भूलना मैं भी सब देशद्रोहियों को नंगा करूँगी ….. भांडों ज़रा संभलके।”

खुद को राष्ट्रभक्त और राष्ट्रवादी बताने वालीं कंगना अक्सर विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर निशाना साधती हैं। इस दौरान उनके शब्द तीखे होते हैं और कई बार वह मर्यादाएं भी लांघ जाती हैं। इसी कारण ट्विटर उनपर प्रतिबंध लगा चुका है।

राम स्वरूप शर्मा के खुदकुशी करने की आशंका, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

 

हिमाचल में इस जगह पहली बार मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस

कांगड़ा।। आजादी के बाद पहली बार बैजनाथ प्रशासन इस साल बड़ा भंगाल में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करेगा। डीसी कांगड़ा निपुण जिंदल ने एसडीएम सलीम आजम को बड़ा भंगाल में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का निर्देश दिया है।

प्रशासन की टीम को 60 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर बड़ा भंगाल पहुंचने में दो दिन लगेंगे। उन्हें घाटी के रास्ते में सबसे ऊंची चोटी थमसर दर्रे को पार करना होगा।

बड़ा भंगाल पहुंचना कोई आसान काम नहीं है। इस ट्रैक को राज्य में सबसे कठिन ट्रकों में से एक माना जाता है। ट्रैक पर हर साल कई लोगों के हताहत होने की खबर आती है।

वहीं एसडीएम व उनकी टीम जनता की शिकायतों को सुनने के लिए बड़ा भंगाल में ‘खुला दरबार’ भी आयोजित करेगी। प्रेम कुमार धूमल पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने 2010 में बड़ा भंगाल का दौरा किया था और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं थी।

बड़ा भंगाल घाटी की कुल आबादी लगभग 660 है। सर्दियों की शुरुआत से पहले अधिकांश निवासी बीड़ और बैजनाथ चले जाते हैं। घाटी नौ महीने तक बर्फ से ढकी रहती है। इस दौरान घाटी में बिजली की आपूर्ति नहीं होती है। राज्य सरकार ने ग्रामीणों को जनरेटर तो उपलब्ध कराया है, लेकिन वह खराब है।

हिमाचल प्रदेश में 4 दिन के लिए बारिश का यलो अलर्ट

शिमला।। स्थानीय मौसम विभाग ने 30 जुलाई से दो अगस्त तक किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर 10 जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश, गरज और बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं इस क्षेत्र में 4 अगस्त तक बारिश की पूर्वानुमान है।

लगातार बारिश और भारी बारिश के कारण भूस्खलन और पेड़ों के उखड़ने की चेतावनी देते हुए विभाग ने आम जनता और पर्यटकों को सलाह दी है कि वे नदी-नालों के किनारे न जाएं क्योंकि जल स्तर बढ़ सकता है।

बारिश और भूस्खलन की वजह से राज्य में कई सड़कें अवरुद्ध हैं। कई जगह ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं तो कहीं जल योजनाएं बाधित हैं। इसके अलावा बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या 209 हो गई है, जबकि 11 लोग अब भी लापता हैं।

‘खालिस्तान समर्थकों’ की हिमाचल को धमकी- सीएम को नहीं फहराने देंगे तिरंगा

शिमला।। तथाकथित ‘खालिस्तान समर्थकों’ ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को धमकी दी है। रिकॉर्डिंग में कहा गया है कि सीएम जयराम ठाकुर को 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देंगे। इस रिकॉर्डिंग में हिमाचल को पंजाब का हिस्सा बताया है।

हिमाचल पुलिस ने इस वायरल रिकॉर्डिंग को लेकर अपने ऑफिशल ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज पर पोस्ट डालकर कहा है कि वह ऐसे तत्वों से निपटने में सक्षम है।

ट्वीट में लिखा है, “हमें विदेशों से खालिस्तान समर्थक तत्वों का पूर्व-रिकॉर्डेड संदेश हिमाचल प्रदेश के कुछ पत्रकारों को भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। हिमाचल प्रदेश पुलिस राज्य की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के सहयोग से हिमाचल प्रदेश में शांति और सुरक्षा को विफल करने के वाले राष्ट्रविरोधी तत्वों को रोकने में भी पूरी तरह सक्षम है।”

https://inhimachal.in/special/educative/himachal-pradesh-foundation-day-ys-parmar/

बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन, कैसे होगी ऑनलाइन पढ़ाई

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में 18 हज़ार से अधिक छात्रों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। वहीं 225 स्कूल ऐसी जगहों पर हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी या तो बिल्कुल नहीं हैं या फिर बहुत बेकार है। ऐसे में इन छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई तक पहुंच बहुत कम है। जिस कारण वे दूसरों से पिछड़ रहे हैं।

जिन 225 स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है या बेकार है, ऐसे सबसे अधिक 46 स्कूल सिरमौर जिले में हैं। इसके अलावा कुल्लू में 45, लाहौल और स्पीति में 23, चंबा में 19, ऊना में 19, मंडी में 18, बिलासपुर में 17, हमीरपुर में 15, कांगड़ा में 12, किन्नौर में पांच, सोलन में पांच और शिमला जिला में ऐसा एक स्कूल है।

निदेशक उच्च शिक्षा डॉ अमरजीत शर्मा ने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों के साथ आभासी बातचीत के दौरान इस मुद्दे को शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के संज्ञान में लाया गया था कि छात्रों के एक वर्ग के पास स्मार्टफोन नहीं था, जबकि कुछ दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी एक समस्या है, जिसके बाद उन्होंने छात्रों को फोन उपलब्ध कराने के लिए “एक मोबाइल दान करें” अभियान लॉन्च किया। 1,000 से अधिक मोबाइल वितरित किए गए थे।

जो छात्र ऑनलाइन शिक्षा से वंचित थे, उन्हें कंप्यूटर जनरेटेड और हाथों से लिखी पाठ्य सामग्री प्रदान की गईं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नियमित अंतराल पर घर या सामान्य वितरण केंद्रों पर पाठ्य सामग्री देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं उन्होंने कहा कि पहले चरण में दसवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को स्मार्टफोन प्रदान किए जाएंगे। जहां इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है या नेटवर्क कमजोर है, वहां टावर लगाने के लिए बीएसएनएल और अन्य दूरसंचार कंपनियों के साथ भी बातचीत की जा रही है।

चकरू-बकरू: कहीं जानलेवा न बन जाए मशरूम का लालच

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि ‘चकरू-बकरू’ खाकर लोग बीमार पड़ गए। चंबा से लेकर मंडी जिले के कई पहाड़ी इलाकों में बरसात के मौसम में ऐसी घटनाएं आम हो जाती हैं। लोग घर के पास इधर-उधर उग आए खुंब यानी मशरूम की सब्जी बनाकर खाते हैं और फिर बीमार होकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। कई बार तो समय पर इलाज न मिलने से मौत तक हो जाती है।

क्या है चकरू-बकरू
चकरू बकरू एक तरह के मशरूम हैं जो बरसात के मौसम में ज़्यादा पाए जाते हैं। नम और मैली जगहों पर उग आने वाले ये छोटे मशरूम हिमाचल प्रदेश में सदियों से खाए जाते हैं। लेकिन हर मशरूम खाने लायक नहीं होता। कुछ मशरूम तो स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं मगर कुछ मशरूम बेहद जहरीले होते हैं। कुछ को खाने से नशा हो जाता है, कुछ को खाने पर अंदरूनी अंगों को इतना नुकसान पहुंचता है कि जान तक चली जाती है।

अमूमन हम लोग बाजार से लेकर जो मशरूम खाते हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित होते हैं। उन्हें विशेष केंद्रों में उगाकर मार्केट लाया जाता है। जंगल में पाई जाने वाली गुच्छी भी सुरक्षित मशरूम है। मगर उसे पहचानना आसान होता है क्योंकि वह दिखती ही अलग तरह की है। लेकिन जंगलों या घरों के आसपास उग आने वाले सफेद रंग की छतरी वाले मशरूमों में यह पहचान करना मुश्किल हो जाता कि कौन सा विषैला है और कौन का सुरक्षित।

कई बार बहुत अनुभवी लोग भी इस काम में गलती कर देते हैं। मशरूमों की पहचान को लेकर आम तौर पर हम जो बातें अपने पूर्वजों से सुनते आए हैं, वे भी गलत हो सकती हैं। क्योंकि एक ही प्रजाति में पाया जाने वाला जहर इस बात पर अलग हो सकता है कि उसे कहां से उखाड़ा गया और कब उखाड़ा गया। इसीलिए बहुत से लोग चकरू बकरू समझकर जहरीले मशरूमों को भी खा लेते हैं और बीमार पड़ जाते हैं।

Food Poisoning Symptoms
जानलेवा साबित हो सकते हैं विषैली मशरूम

वैसे, सभी तरह के जहरीले मशरूम खाने से उल्टियां शुरू हो जाती हैं और पेट में तेज दर्द उठने लगता है। लेकिन अलग-अलग तरह के मशरूम इन लक्षणों के अलावा भी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। आम तौर पर जहरीले मशरूम खाने के दो घंटे के अंदर ही लक्षण दिखने लगते हैं। अगर आपको खाने के कुछ ही घंटों बाद लक्षण दिख रहे हैं तो इसका मतलब है कि मशरूम कम जहरीला था। लेकिन छह घंटों के बाद आपको लक्षण दिख रहे हैं तो समझ लीजिए ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि मशरूम बहुत ज़्यादा जहरीला है। ये बात आपको जरूर अटपटी लगी होगी मगर है सच।

इन बातों पर ध्यान दें
अगर किसी व्यक्ति ने मशरूम खाया है तो उसकी पहचान जरूर करें। इससे इलाज करने में आसानी होती है क्योंकि कुछ मशरूमों के कारण कई दिनों बाद गंभीर समस्याएं हो जाती हैं। लेकिन ये भी समस्या है कि हर अस्पताल या हर जगह ऐसा व्यक्ति नहीं हो सकता जो मशरूमों के बारे में जानकारी रखता हो। इसलिए मशरूम खाने से होने वाली पॉइजनिंग का इलाज लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। कई बार (अमूमन विकसित देशों में) स्टूल टेस्ट करके जांचा जाता है पेशंट ने कौन सा मशरूम खाया था।

भारत में सब जगह ऐसी सुविधा नहीं है, इसलिए ज्यादातर मशरूम पॉइजनिंग के मामलों में लक्षणों के आधार पर ही इलाज किया जाता है। कई बार ऐक्टिवेटेड चारकोल का इस्तेमाल किया जाता है। मगर ध्यान रहे, जरा सी लापरवाही जानलेवा बन सकती है। आगे पढ़ें, क्या-क्या गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

पेट और आंत में समस्याएं
Chlorophyllum molybdites और घर के पास घास में उगने वाले छोटे भूरे रंग के मशरूम खाने से पेट में गड़बड़ होने लगती है। कई बार सिरदर्द और मतिभ्रम की स्थिति भी हो जाती है। दस्त लग जाते हैं और कई बार खून भी निकल आता है। डॉक्टर लक्षणों के हिसाब से उपचार करते हैं और आमतौर पर इन मशरूम के कारण पैदा हुई स्थिति 24 घंटों में ठीक हो जाती है।

Chlorophyllum molybdites नाम का ये मशरूम आपको घरों के आसपास आम मिल जाएगा। मगर ये जहरीला होता है।

न्यूरोलॉजिक लक्षण (दिमाग़ पर असर)
कुछ मशरूम न्यूरोलॉजिक लक्षण भी पैदा करते हैं। जैसे कि आपको मतिभ्रम हो जाएगा। आपको नशे जैसी अनुभूति होगी और उटपटांग चीजें दिखने या सुनाई देने लगेंगी। बहुत से लोग ऐसे मशरूमों को नशे के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। ये स्थिति Psilocybe जीनस के मशरूम खाने से होती है जिनके अंदर दिमाग को भ्रम में डालने वाला केमिकल psilocybin होता है।

Psilocybe किस्म के मशरूम नशीले होते हैं

इस तरह के मशरूम खाने के 15 से तीस मिनट के अंदर ही नशा होने लगता है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हालांकि इससे घातक नुकसान कम होता है। ऐसी स्थिति वैसे तो अपने आप सुधर जाती है मगर डॉक्टर हालत सुधारने के लिए नींद की दवा दे सकते हैं।

मस्करीन के कारण गंभीर नुक़सान
मस्करीन (muscarine) ऐसा पदार्थ है जो Inocybe और Clitocybe मशरूम की किस्मों में पाया जाता है। इसके कारण कारण 30 मिनट के अंदर असर दिखने लगता है।

Inocybe मशरूम सांस लेने में दिक्कत पैदा करते हैं।

आंक की पुतली सिकुड़ जाती है, थूक और बलगम ज्यादा बनने लगता है, सांस लेने पर आवाज आने लगती है और अंगों में फड़कन होने लगती है।

Clitocybe मशरूम भी सांस लेने में दिक्कत पैदा करते हैं

अमूमन 12 घंटों के अंदर ये लक्षण ठीक हो जाते हैं। मगर डॉक्टर के पास ले जाना ज़रूरी है।

देर से होने वाले जानलेवा असर
जैसा कि हमने ऊपर बताया, कुछ मशरूमों के लक्षण देरी में आते हैं और वे ज्यादा जहपरीले होते हैं। Amanita, Gyromitra, और Cortinarius किस्मों के मशरूम ऐसा करते हैं। Amanita phalloides नाम के मशरूम के कारण ही दुनिया भर में मशरूम से होने वाली 95 प्रतिशत मौते होती हैं।

खाने के 6 से 12 घंटों के अंदर पेट में गड़बड़ हो सकती है। हो सकता है कुछ दिन के लिए आप ठीक हो जाएं। फिर अचानक लीवर या किडनी फेल होने का खतरा बना रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस मशरूम में पाने जाने वाले जहर से शरीर के अंदर शुगर का स्तर बहुत कम हो जाता है। इसलिए मशरूम से होने वाली पॉइज़निंग के दौरान ब्लड शुगर चेक करते रहना चाहिए।

Amanita smithiana खाया तो किडनी फ़ेल

इसी तरह Amanita smithiana किस्म के मशरूम भी छह से 12 घंटे बाद लक्षण दिखाते हैं और एक से दो हफ्तों के अंदर किडनी फेल हो जाती है। फिर डायलिसिस ही रास्ता बचता है।

Gyromitra मशरूम भी ब्लड शुगर कम कर देते हैं। इसके अलावा दौरे पड़ना और गुर्दों और लिवर में दिक्कत आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

Gyromitra भले देखने में गुच्छी की तरह लगे मगर ये खतरनाक होता है।

पेट गड़बड़ होने की समस्या तो तीन दिन में ठीक हो सकती है मगर मशरूम खाने के 3 से 20 दिन के बाद अचानक पेशाब की मात्रा घट सकती है। गुर्दे को पहुंचने का वाला नुकसान कई बार अपने आप ठीक हो जाता है।

इसलिए, जरा भी शक हो तो अनजान मशरूम न खाएं। पैसों की बचत करके भले बाजार से मशरूम का पैकेट ले आएं मगर जंगली मशरूम की गलत पहचान करके आत्मघाती क़दम उठाने से बचें।