सेब के घटते दामों पर एकजुट होने लगे सभी दलों के नेता

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की मंडियों में सेब के दामों में आ रही गिरावट को लेकर सभी किसान संगठन एकजुट हो गए हैं। प्रदेश में उगने वाली फसलों को एमएसपी के दायरे में लाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेता संयुक्त मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।

सोमवार को शिमला के कालीबाड़ी हॉल में किसान-बागवानों से जुड़े मुद्दों को लेकर किसान संवाद का आयोजन किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के तहत यह संवाद आयोजित हुआ। इसमें बागवानों के अलावा किसान सभा, भाजपा, कांग्रेस व सीपीएम के नेता एक मंच पर इकट्ठा हुए।

किसान सभा के राज्य अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि केंद्र सरकार जिन 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है, उनमें हिमाचल में उगने वाले मुख्य फल और सब्जियां शामिल नहीं है। प्रदेश में किसान अदरक, टमाटर, लहसुन, गोभी आदि फसलें उगाते हैं। इन्हें बाजारों में फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाया है। जिस कारण लागत मूल्य की वसूली भी नहीं हो पाई है। ऐसे में ये किसान तबाह हुए हैं।

अब प्रदेश में सेब सीजन चरम पर है। मंडियों में एकाएक सेब के दाम गिर रहे हैं। ये इस बात का दर्शाता है कि सेब ख़रीदने वाली कम्पनियों, आढ़तियों, लदानियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वे अपनी मनमर्जी से दाम घटाते और बढ़ाते हैं। प्रदेश के बागवान परेशान हैं और सरकार मूकदर्शक बनकर देख रही है।

इस मौके पर कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बागवानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उनका पहला कर्तव्य है। वह विधायक होने के साथ-साथ एक बागवान भी है। बागवानों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर वह इस संयुक्त किसान मंच की बैठक में शामिल हुए हैं। विक्रमादित्य ने कहा कि सेब के दाम गिर रहे हैं और बागवानी मंत्री ने चुप्पी साध रखी है। सरकार पर पल्ला झाड़ रही है। इसका खामियाजा सरकार को आने वाले उपचुनाव में भुगतना पड़ेगा।

काम के दम पर लोगों के बीच निकलने वाला हूँ, रास्ता लोग तय करेंगे : अनिल शर्मा

मंडी।। सीएम के कोटली दौरे के दौरान सदर विधायक अनिल शर्मा तीखे व्यंग करते नज़र आए। इस दौरे में सीएम जयराम ठाकुर के साथ जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर व अन्य विधानसभा क्षेत्रों के विधायक भी साथ थे। अनिल शर्मा ने मंच संभालते ही अपने संबोधन की शुरुआत पंडित सुखराम के ज़िक्र साथ की। पंडित सुखराम की टेलीफोन क्रांति का ज़िक्र किया। मंचों पर खुद को नजरअंदाज किये जाने की बात भी की।

अनिल शर्मा अपनी बात कह रहे थे कि भीड़ में से सीएम जयराम ठाकुर के समर्थन में नारेबाजी शुरू हो गई। जब चुप करवाने पर भी कार्यकर्ता चुप नहीं हुए तो अनिल शर्मा बोले कि नारों से कुछ नहीं मिलता। लोगों का मन नारों से नहीं जीता जाता।

अनिल शर्मा ने कहा कि यदि मैं दो साल बाहर नहीं निकला तो उसका कारण था। मैं ईमानदार आदमी हूँ। मैंने मुख्यमंत्री को कहा कि मेरे हाथ से बात निकल चुकी है। मैंने कभी पीठ के पीछे वार नहीं किया। एक बाप की मजबूरी हो सकती है। इसी मजबूरी के कारण मैं लोगों के बीच नहीं आ पाया। अनिल ने कहा कि मुझे लगता था इलाका सदर अपना रास्ता ढूंढ रहा है, परंतु कुछ लोग कहते हैं कि आप निकलिए। अनिल ने हिमाचल विकास कांग्रेस का जिक्र करते हुए कहा कि महेंद्र सिंह जानते हैं कि उस समय भी हम घर बैठ गए थे। लेकिन जब लोगों ने कहा कि पंडित जी आप निकलिए तो हम निकले और एक तूफान बनकर बीजेपी की सरकार बनाने के लिए साथ चले।

अनिल ने आगे कहा कि मैं आज भी घर बैठने वाले नहीं हूँ।मैं लोगों के बीच निकलूंगा। काम किया है और उस काम के दाम पर लोगों के बीच निकलने वाला हूँ। रास्ता और पार्टियां लोग तय करेंगे। और अगर लोग कहेंगे कि घर बैठ जाओ तो मैं घर बैठने से भी गुरेज नहीं करूंगा।

अनिल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री कई बार बुरा मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि मैं विरोध कर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि मैं विधानसभा में नहीं बोलता हूँ। वहाँ पर चुप बैठा रहता हूँ। अनिल ने कहा कि मैंने विधानसभा में देखा है कि जो विधानसभा में बहुत बोलते थे पांच साल बाद पता नहीं चला कहाँ गए।

अनिल ने कहा जब मैंने कोटली तहसील बनाई थी। उस समय एक लाख की आबादी में तहसील दी गयी थी, कोटली में 25 हज़ार की आबादी में तहसील दे दी गई। सरकार की क्षमता हो और सरकार चाहे तो कुछ भी किया जा सकता है। अनिल ने कहा कि जब जुब्बल-कोटखाई में दो एसडीएम दफ्तर खुल सकते हैं, तो हमारे यहाँ भी एसडीएम दफ्तर होना चाहिए।

अनिल ने कोटली बस अड्डे की बात करते हुए कहा कि महेंद्र सिंह जी नाराज हो जाते हैं। इनको हर चीज़ में गुस्सा आ जाता है। जब धर्मपुर में बस अड्डे के अंदर पानी आ गया था तो इन्होंने मुझे कहा था कि तूने भी तो नाले में बनाया है। अनिल ने कहा कि हम लोग बरसात में बैठे हैं। अगर यहां बस अड्डा नहीं होता तो आज कोटली के अंदर सभा करने के लिए स्थान नहीं मिलता।

अनिल ने सड़कों की बात करते हुए कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि विधायक बोलता नहीं है। अगर बोलता नहीं है तो सड़कें कैसे आईं। सड़कों की प्राथमिकताएं मैंने रखी जिनका फाउंडेशन स्टोन सीएम सीएम के हाथों रखे गए।

अनिल ने कहा कि राजनीति में क्या होगा, क्या नहीं। इसका मुझे डर नहीं है। जब मेरे बेटे ने चुनाव लड़ा तो मैं बिल्कुल कमजोर था। लोगों ने कहा कि क्या हुआ। मेरे अंदर एक ऐसी पीड़ा थी जिसे मैं बयान नहीं कर सकता था। परंतु उसके बाद मेरे मन में बात आई कि इंसान जो मर्जी कर ले, ऊपर वाला बैठा है। जो करना होगा, वो करेगा। अनिल ने कहा कि मैंने प्रयास किया कि मैं लोगों के बीच जाऊंगा और अपनी बात करूंगा। मैं अपनी बात कह सकता हूं, परिवार की बात नहीं कह सकता। अनिल ने कहा कि जो रास्ता लोग तय करेंगे, मैं उस रास्ते पर चलूंगा।

अनिल ने कहा कि मुझे सीएम से उम्मीद हैं। जैसी दरियादिली वे दूसरे क्षेत्रों में करते आये हैं। वैसी ही दरियादिली का इंतजार यहां के लोगों को भी है।

हिमाचल में तीन बेहतरीन स्टेडियम, स्थानीय खिलाड़ियों के लिए नो एंट्री

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में दुनिया के तीन बेहतरीन खेल मैदान हैं। दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित क्रिकेट स्टेडियम भी हिमाचल में ही हैं। लेकिन इन खेल मैदानों में हिमाचल के स्थानीय खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं। न ही इन मैदानों पर कोई स्थानीय मैच हो पाते हैं।

इन तीन खेल मैदानों में से दो सेना के पास हैं, जबकि एक स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (साई) के पास है। इनमें से एक स्टेडियम शिमला के शिलारू में बना हॉकी का मैदान है। दूसरा भी शिमला शहर में स्थित बेहतरीन अनाडेल मैदान हैं। तीसरा सोलन के चायल में स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड है।

शिमला के शिलारू में स्थित हॉकी मैदान स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के अधीन है। यह समुद्र तल से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां टीम इंडिया के खिलाड़ी ही अभ्यास और कैंप लगाते हैं। शिलारू हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान का निर्माण वर्ष 1986-87 में 3 करोड़ 53 लाख रुपये से किया गया। यहां 92 लाख से बहुउद्देशीय हॉल, एक करोड़ 3 लाख रुपये की लागत से छात्रवास भी बनाया गया है।

8000 हजार फीट की ऊंचाई पर यह एस्ट्रोटर्फ इसलिए बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों का स्टेमिना बढ़े। मैदानों में 12 घंटे का प्रशिक्षण और यहां के छह घंटे एक बराबर होते हैं। साल 2015 में यहां भारतीय हॉकी टीम परीक्षण के लिए आई थी।

शिमला का अनाडेल मैदान और सोलन के चायल में स्थित क्रिकेट स्टेडियम सेना के पास हैं। इसमें सैनिक स्कूल के खिलाड़ी ही ज्यादातर खेल पाते हैं। अनाडेल मैदान को भी सेना ही इस्तेमाल करती आ रही है। इस ग्राउंड को हिमाचल को देने की मांग भी कई बार उठ चुकी है।

चायल क्रिकेट स्टेडियम 2444 मीटर की ऊंचाई पर है। यह दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित क्रिकेट स्टेडियम है। साल 1893 में पटियाला के राजा भूपिंद्र सिंह ने इस स्टेडियम का निर्माण किया था। पहले यहां राजा क्रिकेट खेला करते थे। अब यह सेना के अधीन है। यहां भी स्थानीय खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं।

शातिर ने खुद को चीफ इंजीनियर बताकर ठगे 57 लाख से अधिक

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। एक शातिर व्यक्ति ने खुद को चीफ इंजीनियर बताकर लाखों की ठगी को अंजाम दिया है। ठगी करने वाला यह शख्स मध्य प्रदेश का रहने वाला बताया जा रहा है। शातिर खुद को केंद्रीय सड़क परिवहन और उच्चमार्ग का चीफ इंजीनियर बताता था। ठेकेदारों को सड़क निर्माण का काम दिलाने का झांसा देकर 57 लाख से अधिक की ठगी कर डाली।

इस संबंध में शिमला के नौ ठेकेदारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। ठेकेदारों के कहना है कि मध्य प्रदेश के रहने वाले कन्हैया लाल ने प्रोसेसिंग व अन्य फीस के नाम पर उनसे 57.62 लाख की राशि हड़प ली। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

शिकायतकर्ताओं जगदीश, किशन, बलवान, संजय, मनोज कुमार, काशी राम, अनुराग, संदीप और महेंद्र सिंह के मुताबिक वे पांच से नौ लाख की ठगी के शिकार हुए हैं। छोटा शिमला पुलिस ने इस मामले में आईपी की धारा 420 में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

कुरियर से भेजा था राष्ट्रपति पुरस्कार, हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

शिमला।। हिमाचल हाई कोर्ट ने राष्ट्रपति सम्मान को कुरियर से भेजने के मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि बहादुरी और साहस के कार्यों को बढ़ावा देने के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा ही दिए जाते हैं। ऐसे में यह पुरस्कार सिर्फ गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस समारोह पर ही दिए जाएं।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को शौर्य पदक के अलावा अन्य पदक विजेताओं की तरह सुविधाएं और लाभ भी मिलने चाहिए। हाई कोर्ट ने यह लाभ-सुविधाएं तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं।

विकास शर्मा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने पाया कि महाप्रबंधक भारत सरकार टकसाल कोलकाता के अलीपुर में कार्यरत प्रतिवादी के साथ काम करने वाले संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इस चूक के लिए जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने वीरता पुरस्कार प्रदान करने में हुई देरी के लिए भी खेद जताया। साथ ही केंद्र सरकार की कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई करने का आदेश दिया।

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी धर्मशाला में हेड वार्डन के पद पर कार्यरत हैं। उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए मनोनीत हुआ था क्योंकि उन्होंने सितंबर 2005 में धर्मशाला जेल के जेलर को कैदी अमरीश राणा के चंगुल से बचाया था। अन्यथा वह उन्हें जान से मार देता। उन्हें यह अवार्ड 26 जनवरी, 2007 को मिलना था। आरटीआई के माध्यम से मांगी गयी जानकारी के आधार पर उन्हें इस बात का पता चला।

अप्रैल 2009 को गवर्नमेंट प्रेस कोलकाता ने यह अवार्ड कुरियर से उनके घर भेज दिया। जब उन्होंने यह मामला एडीजीपी जेल के समक्ष उठाया तो 15 अप्रैल 2010 को हिमाचल दिवस समारोह में रोहड़ू में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल नेे उन्हें यह सम्मान दिया। प्रार्थी ने याचिका में यह आरोप लगाया था कि उन्हें यह सम्मान केवल राष्ट्रपति की ओर से दिया जाना चाहिए था।

32 वर्षीय युवक पर 95 वर्षीय बुजुर्ग से दुष्कर्म के प्रयास का आरोप

एमबीएम न्यूज़, कांगड़ा।। कांगड़ा जिला में एक 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने 32 वर्षीय युवक पर दुष्कर्म का प्रयास करने का आरोप लगाया है। बुजुर्ग का यह भी आरोप है कि युवक ने उसके साथ मारपीट कर मरने के लिए छोड़ दिया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के बाद भी आरोपी युवक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इस संबंध में पीड़ित पक्ष ने गुरुवार को डीएसपी से मुलाकात की और आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई करने की मांग की। पीड़ित पक्ष के अनुसार घटना रक्षाबंधन के दिन की है। बुजुर्ग महिला अपने पुराने मकान में रहती है। जहाँ उसी क्षेत्र के 32 वर्षीय युवक ने उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। जब महिला ने चिल्लाने कोशिश की तो उसके मुंह मे कपड़ा डालकर मारपीट की और वहीं छोड़कर फरार हो गया।

पीड़िता के अनुसार काफी देर बाद जब उसे होश आया तो उसने बहू व बेटियों को सारी घटना बताई। बुजुर्ग की हालत ठीक न देखकर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उधर, धीरा पुलिस ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ घर में घुसने व मारपीट का मामला तो दर्ज कर लिया है लेकिन दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज नहीं किया।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

पीड़ित पक्ष ने डीएसपी गुरबचन सिंह से मुलाकात की और उन्हें सारी घटना की जानकारी दी। पीड़ित पक्ष ने कार्रवाई की मांग की है। इस बारे डीएसपी गुरबचन सिंह का कहना है कि उनके पास शिकायत आई है। घटना की जांच गंभीरता से की जाएगी।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

हिमाचल में भी उठी गोरखधंधा शब्द को प्रतिबंधित करने की मांग

एमबीएम न्यूज़, शिमला।। हिमाचल प्रदेश में गोरखधंधा शब्द को प्रतिबंधित करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ भाजपा महासचिव रामबीर भट्टी एवं अखिल भारतीय योगी नाथ अध्यक्ष समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी तेजपाल सिंह ने सीएम जयराम ठाकुर से मुलाकात की। प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर के नेतृत्व में सीएम से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।

हरियाणा के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी गोरखधंधा शब्द को प्रतिबंधित करने की मांग उठी है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि यह शब्द महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर प्रचलित है। इसलिए हरियाणा की तरह हिमाचल में भी यह शब्द बैन किया जाए। हरियाणा में इस शब्द को प्रतिबंधित किया गया है।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

भट्टी ने कहा कि गोरखधंधा शब्द का गलत, अनैतिक तरीके से प्रयोग कर नाथ संप्रदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक सौहार्द को खतरा पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। गुरु गोरखनाथ जी ने रसशास्त्र की रचना की, जिसे नाथ संप्रदाय में गोरखकीमिया के नाम से जाना जाता है। हिमाचल में भी सभी जिलों में इस समुदाय के लोग रहते है और इस मांग से उनकी भावनाएं भी जुड़ी हैं।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

बुजुर्ग ने किया था अनशन, सीएम ने निभाया फोन पर किया वादा

कांगड़ा।। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर आमरण अनशन करने वाले देशबंधु शर्मा की मांग पूरी हो गई है। लगभग दो महीने पहले उन्होंने सीएचसी रक्कड में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की समस्या उठाई थी औऱ कहा था कि यहां पर आपातकालीन स्थिति में इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। देशबंधु काफी मान-मनौव्वल के बाद भी अनशन तोड़ने को राजी नहीं हुए थे। फिर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने फोन पर उनसे बात करके मांगें मानने का आश्वासन दिया था। अब सीएचएसी रक्कड़ को 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं देने वाले संस्थान के तौर पर अपग्रेड कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला
दरअसल देशबंधु इस मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रक्कड़ में 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए। उनकी मांग की थी कि यहां 24 घंटे आपातकालीन सेवा में डॉक्टर रहना चाहिए। 76 वर्षीय बुजुर्ग देशबंधु शर्मा जब अनशनल कर रहे थे तो सरकार से लेकर पार्टी तक कई पदाधिकारी उन्हें मनाने पहुंचे थे, मगर वह चाहते थे कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती, वह अनशन नहीं तोड़ेंगे। वर्तमान और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की गुजारिश के बावजूद वह अनशन नहीं तोड़ना चाह रहे थे।

उद्योग मंत्री और स्थानीय विधायक विक्रम ठाकुर भी देशबंधु से मिलने पहुंचे थे। उनके काफी देर तक मनाने के बाद भी जब देशबंधु नहीं माने तो उन्होंने पहले सीएम जयराम ठाकुर, पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार से बात करवाई थी। सीएम ने उस वक्त भी उनसे कहा था कि आपकी मांगों को पूरा किया जाएगा मगर वह चाह रहे थे कि तुरंत ऑर्डर किए जाएं।

उसके बाद भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा ने उन्हें फोन पर विश्वास दिलाया था कि अगली कैबिनेट बैठक में उनकी मांग पूरी कर दी जाएगी। तब जाकर उन्होंने करीब 80 घंटों बाद अनशन तोड़ा था। बाद में उन्होंने शाहपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी। अब, मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उनकी मांग पूरी कर दी गई है। कैबिनेट ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रक्कड़ को 24 घंटे सेवाएं प्रदान करने वाले आपातकालीन चिकित्सा संस्थान के रूप में स्तरोन्नत करने की स्वीकृति प्रदान की है।

कौन हैं देशबंधु शर्मा, जिन्हें वर्तमान व दो पूर्व मुख्यमंत्री भी नहीं मना पाए

एसपी मंडी की अंगूठियां गायब, 4 से पूछताछ, एक ने खाया जहर

एमबीएम न्यूज, मंडी।। एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री के सरकारी आवास से उनकी सोने की दो अंगूठियां गायब होने के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जानकारी मिली है कि इस संबंध में एसपी के घर काम करने वाले जिन कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी, उनमें से एक जहर निगल लिया है।

क्या है मामला
सप्ताह भर पहले जब दो अंगूठियां जब घर से गायब हुई तो शालिनी ने उन्हें अपने स्तर पर खूब तलाशने की कोशिश की। ये अंगूठियां उन्हें शादी में उपहार स्वरूप मिली थीं। जब ये अंगूठियां नहीं मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत सदर थाना में दी। इसके बाद सदर थाना पुलिस की टीम ने भी घर पर आकर तलाशी करने के साथ-साथ घर पर काम करने वाले कर्मचारियों से भी पूछताछ की।

जिन कर्मियों से पूछताछ की गई थी उनमें से एक महिला ने पिछले कल जहर खा लिया। महिला को परिवार वाले सुंदरनगर अस्पताल ले गए जहां से फिर उसे जोनल हास्पिटल मंडी लाया गया। यहां पर महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है। सदर थाना पुलिस को भी सिर्फ अपनी अंगूठियां गुम होने की सूचना दी है। महिला ने जहर क्यों खाया इस बारे में भी पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

विधायक और मंत्री की लड़ाई में उलझा सरकाघाट बाज़ार के सुंदरीकरण का काम

रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल, सरकाघाट।। सरकाघाट शहर के मेन बाजार में करीब 45 लाख की लागत से होने वाले सुंदरीकरण का काम अब अधर में लटक गया है। सौंदर्यकरण का टेंडर लेने वाले ठेकेदार ने तमाम मशीनरी और सामान समेट लिया है। ठेकेदार ने विभाग को बाकायदा पत्र लिखकर टेंडर छोड़ने और फाइनल बिल बनाने की मांग की है।

ठेकेदार ने आरोप लगाते हुए कहा कि टेंडर लेने के बाद कई बार काम बंद करवा दिया गया। यहां तक कि 3 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक ना तो उसे ड्राइंग दी गई है और ना ही साईट से अतिक्रमण हटाए जा सके हैं, जिससे उसे लाखों का घाटा हो रहा है। ऐसे में वह काम छोड़ रहा है। काम बंद होने से शहर की जनता को ना खुदा मिला है, ना विसाल-ए-सनम मिला है।

बाज़ार से काम समेटती ठेकेदार की लेबर

बता दें कि 45 लाख की लागत से होने वाले सुंदरीकरण को लेकर विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर ने 6 जून को इसका शिलान्यास करके निर्माण को हरी झंडी दिखाई थी। निर्माणाधीन सुंदरीकरण के प्लान में शहर के बीचो बीच पार्क बनाया जाना था, परंतु 29 जून को जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने व्यापारियों के बुलाने के बाद बाज़ार का दौरा करके यह कहते हुए इस पार्क काम बंद करवा दिया था कि पार्क शहर में नहीं बल्कि रेस्ट हाउसों में बनते हैं। उन्होंने तुरंत इस पार्क का काम बंद करवाने के आदेश दिए थे।

अतिक्रमण हटाने को लेकर लोक निर्माण और राजस्व विभाग द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई में अवैध अतिक्रमण हटा दिए थे और ठेकेदार ने 6 जुलाई से काम शुरू कर दिया था। पहले चरण में बाजार में इंटरलॉक टाइल बिछाई जा रही थी। उसके बाद ही अन्य काम शुरू होना था। परंतु आज दिन तक ठेकेदार को विभाग ना तो इस सुंदरीकरण का मैप दे पाया है और ना ही पूरी तरह से अतिक्रमण हटा पाया है। इसी को लेकर ठेकेदार ने बीच मझधार में काम छोड़ दिया है।

अब का पार्क का काम बंद होने से पिछले दो हफ्तों से बाजार में जगह जगह मिट्टी पत्थरों के ढेर लगे पड़े हैं। जनता और व्यापारी परेशान हो रहे है। लोगों का कहना है कि ना तो प्रशासन अतिक्रमण हटाए जाने की पूरी कार्रवाई कर सका है और ना ही इस पार्क या सुंदरीकरण को तैयार करवा सका है।

मंत्री और विधायक की लड़ाई के कारण शहर की जनता में खासा आक्रोश उत्पन्न हो गया है। कई संगठनों ने इसकी शिकायत सरकाघाट दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से करने का भी निर्णय बना लिया है।

उधर, अतिक्रमण ना हट पाने को लेकर अधिवक्ता व पूर्व जिला परिषद सदस्य देशराज ठाकुर ने कहा है कि इस मामले को लेकर कोर्ट में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा।

वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजकुमार सैनी ने कहा कि ठेकेदार को दो-तीन दिनों में ड्राइंग दे दी जाएगी। ठेकेदार ने काम छोड़ने वाला लैटर कार्यालय अधीक्षक को सौंपा है। ठेकेदार काम नहीं करना  चाहता है तो नए सिरे से टेंडर कॉल किया जाएगा।

ठेकेदार द्वारा काम छोड़ने को लेकर लिखा गया पत्र

जब तक नहीं हटेगा अतिक्रमण तो कैसे करूंगा काम: ठेकेदार

सुंदरीकरण के निर्माण का ठेका लेने वाले ठेकेदार सुरेंद्र कुमार ने कहा की 3 महीनों में विभाग उन्हें साइट हैंड ओवर नहीं कर पाया है और ना ही ड्राइंग दी गई है। इसके अलावा जहां काम करना है, वहां से अतिक्रमण भी नहीं हटाया जा सका है, तो काम कैसे चलेगा। इसलिए काम छोड़ दिया है। ठेकेदार ने इसके लिए सरकार और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।