उपचुनाव टालने का निर्णय चुनाव आयोग का, सत्तापक्ष की तैयारी पूरी: सीएम

शिमला।। उपचुनाव टलने के बाद विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सीएम जयराम ठाकुर ने खारिज किया है। सीएम ने कहा कि उपचुनाव टालने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उपचुनावों को टालने का निर्णय चुनाव आयोग का है।

सीएम ने कहा कि सत्तापक्ष उपचुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने खुद मंडी संसदीय क्षेत्र के एक विधानसभा क्षेत्र को छोड़ अन्य सभी का दौरा कर लिया है। इसके अलावा वह उपचुनाव वाले तीन विधानसभा क्षेत्रों जुब्बल-कोटखाई, अर्की और फतेहपुर का दौरा भी कर चुके हैं।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं, लेकिन शनिवार को चुनाव आयोग ने उपचुनावों पर रोक लगा दी है। कोरोना संकट को देखते हुए फिलहाल उपचुनाव निरस्त किए गए हैं।

मनकोटिया ने किया 2022 में चुनाव लड़ने का ऐलान

कांगड़ा।। पूर्व मंत्री एवं भूतपूर्व सैनिक लीग के प्रदेशाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ने का खुला ऐलान कर दिया है। मनकोटिया ने अपने निवास स्थान तियारा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बात कही है।

मनकोटिया ने कहा कि वह 2022 के विधानसभा चुनाव में शाहपुर से हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से भी कांग्रेस में वापसी के प्रस्ताव आया है। वह इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर निर्णय लेंगें।

मनकोटिया से जब शाहपुर में फोरलेन से पैदा हो रही समस्या के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने नेशनल हाइवे फोरलेन विभाग के निदेशक से दूरभाष पर बात की है। उन्हें शीघ्र शाहपुर क्षेत्र का दौरा कर कोई ऐसा रास्ता निकालने को कहा है जिससे शाहपुर के दुकानदारों व लोगों को उजड़ना पड़े।

मनकोटिया ने बताया कि निदेशक की निदेशक की ओर से उन्हें एक या 2 दिन में शाहपुर क्षेत्र का दौरा करने का आश्वासन मिला है। मनकोटिया कहा कि किसी भी कीमत पर शाहपुर के वाशिंदों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

अपनी ही गाड़ी की चपेट में आने से युवक की मौत

शिमला।। शिमला जिला के उपमंडल मुख्यालय कुमारसैन में रविवार रात 8 बजे के करीब एक कार दुर्घटना का शिकार हो गई। इस कार दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक एसडीएम ऑफिस के नजदीक अपने घर के पास ही एक युवक कार को पार्क करते समय अचानक अपनी ही कार की चपेट में आ गया। कर की चपेट में आने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

स्थानीय लोग घायल युवक को उपचार के लिए सिविल अस्पताल कुमारसैन ले गए, जहाँ उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने युवक के निधन पर गहरा शोक जताया है।

कॉलेज नहीं वसूल सकेंगे एक साथ छह महीने की हॉस्टल-मेस फीस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कॉलेज अब एक साथ छह महीने की हॉस्टल और मेस फीस नहीं वसूल सकेंगे। प्रदेश सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी कॉलेजों के प्रिंसिपलों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। यह निर्देश सभी सरकारी और निजी कॉलेजों पर लागू होंगे।

इस बारे उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश के कई डिग्री, बीएड, लॉ और संस्कृत के निजी और सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों से छह महीने या उससे अधिक समय की हॉस्टल और मेस फीस लेने की शिकायतें मिली हैं।

कोरोना संकट के चलते कई अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कई अभिभावक एक साथ छह महीने की फीस चुकाने में असमर्थ हैं। ऐसे में अब विद्यार्थियों से अब एक साथ फीस नहीं वसूली जाएगी। एक बार में एक या दो महीने की हॉस्टल और मेस फीस ही लेने को कहा गया है।

शिल्पकारों की दुकानें बंद, कारीगर दिहाड़ी लगाने को मजबूर

कुल्लू।। कोरोना के चलते हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है। हर व्यवसाय पर इसका असर पड़ा है। कुल्लू जिला में कई पारम्परिक कारीगर और शिल्पकार हैं, जो कोरोना के चलते प्रभावित हुए हैं।

कुल्लू जिला के कई स्थानों पर यह शिल्पकार लोहे, लकड़ी, बांस, मिट्टी और सोने-चांदी की पारंपरिक कारीगरी करते हैं। कुल्लू, बंजार, मनाली सहित अन्य जगहों पर ये लोग छोटी दुकानें लगाकर सामान बेचकर परिवार चलाते थे, लेकिन कोरोनाकाल में ये शिल्पकार बेरोजगार हो गए हैं।

कोरोना के चलते जिले में करीब 100 शिल्पकारों की दुकानें बंद हो गई हैं। अब ये शिल्पकार मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। कई कारीगर गांवों में मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिवार के पालन पोषण के लिए सेब के बगीचों में काम कर रहे हैं।

इस बारे में प्रगतिशील विश्वकर्मा कल्याण सभा के प्रदेशाध्यक्ष उदय डोगरा ने कहा कि इन कारीगरों का पारंपरिक काम था। इनके उत्पादों की समाज को जरूरत होती है। यह आम घरों में इस्तेमाल होते हैं। सरकार को चाहिए कि वह कोरोना में बेरोजगार हो चुके हस्त शिल्पकारों को प्रोत्साहित करे।

सराजियों ने पूरा जिम्मा अपने कंधों पर लिया है: पीएम मोदी

शिमला, विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल।। हिमाचल प्रदेश में सभी वयस्कों को कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ लगाने का लक्ष्य हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य के कोरोना योद्धाओं और प्रदेश सरकार की पीठ थपथपाई है। वर्चुअल माध्यम से ‘वैक्सीन संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान राज्य सरकार के प्रयासों को सराहा और साथ ही अभियान को सफल बनाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कुछ कोरोना वॉरियर्स और लाभार्थियों से भी संवाद किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सबसे पहले शिमला के सुदूर इलाके डोडरा क्वार अस्पताल में तैनात डॉक्टर राहुल ने बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह के मुश्किल रास्तों को तय करके स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सुदूर गांवों के लोगों को वैक्सीन लगाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉक्टर राहुल को इस बात के लिए बधाई दी कि कैसे उनकी टीम और पूरे हिमाचल प्रदेश ने इतनी चुनौतियों के बावजूद वैक्सीन का एक भी डोज़ को बर्बाद नहीं होने दिया।

सराजियों ने पूरा जिम्मा अपने कंधों पर लिया है

इसके बाद मंडी के थुनाग के दयाल सिंह से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब वह हिमाचल प्रदेश में थे तब उनका मंडी बहुत आना-जाना लगा रहता था। उन्होंने कहा, “आप मुख्यमंत्री के क्षेत्र से हैं। लगता है सराजियों ने पूरा जिम्मा अपने कंधों पर ले रखा है।” इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंडयाली धाम का जिक्र करते हुए कहा, “मैं मंडयाली धाम मिस करता हूं, मुझे भरोसा है कि मंडयाली धाम का स्वाद आज भी वैसा ही होगा।”

मलाणा की आशा वर्कर निरमा देवी ने प्रधानमंत्री को बताया कि यह जमदग्नि ऋषि की धरती है और यहां पर टीकाकरण अभियान को शुरू करने पहले उनकी इजाज़त ली गई थी। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि मलाणा ही नहीं, कुल्लू सहित हिमाचल के हर कोने में देवी-देवताओं में बहुत विश्वास है। उन्होंने कहा, “कुल्लू देवों की धरती है और मलाणा देवगण लोकतंत्र है। मैं आपको कुल्लू जिला प्रशासन को और मेडिकल से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं। जो मॉडल आपने अपना है वो बहुत बड़ी प्रेरणा है। दूसरी डोज के लिए भी इसी जनून से आगे बढ़ना है और हिमाचल का आगे रखना है।”

बुजुर्ग महिला से लिया आशीर्वाद

स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा प्रधानमंत्री ने वैक्सीन लगवाने वाले लोगों से भी बात की। इन्हीं में से एक हमीरपुर की 84 साल की निर्मला देवी ने अपना अनुभव प्रधानमंत्री से साझा किया और बताया कि उन्हें वैक्सीन लगवाने से कोई समस्या नहीं हुई, बल्कि संयोग से उनकी एक पुरानी समस्या भी ठीक हो गई। निर्मला देवी ने बताया कि पहली डोज़ उन्हें अस्पताल में लगी और दूसरी डोज़ स्वास्थ्यकर्मियों ने घर पर आकर ही लगाई।

प्रधानमंत्री ने निर्मला देवी से कहा, “हमीरपुर से मुझे बुजुर्ग आशीर्वाद लेने का मौका मिल रहा है। मैं आपके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं।” प्रधानमंत्री निर्मला देवी का आशीर्वाद मांगा तो उन्होंने कहा, “आप जो भी कर रहे हैं वो अच्छा है, और आगे भी जो करेंगे वह भी अच्छा ही करेंगे। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों अच्छा काम कर रहे हैं।”

कर्मयोगी हैं करमो जैसी बहनें

अकेले 22 हजार टीके लगाने वालीं ऊना की महिला स्वास्थ्यकर्मी करमो देवी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा, “आपने फ्रैक्चर के बावजूद आठ दिनों में ड्यूटी ज्वाइन कर ली, जबकि रेस्ट लंबा कहा गया था। आप जैसी बहनें सही मायने में कर्मयोगी हैं, इसीलिए आपका नाम आपके माता-पिता ने करमो देवी रखा।”

लाहौल-स्पीति के नवांग उपासक से भी प्रधानमंत्री ने संवाद किया। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा, “शाहासुर गोंपा आस्था का केंद्र है. आध्यात्मिक गुरुओं की ओर से संदेश जाता है तो उसका बहुत महत्व होता है। आपने अपनी भूमिका कैसे निभाई?”

नवांग उपासक ने बताया, “कोरोना के कारण गोंपा बंद हो गए थे। वैक्सीन आने पर लोग आशंकित थे कि इससे कोई दिक्कत न हो जाए। तब हमने कहा कि पूजा-पाठ से कोरोना नहीं जाएगा। इसलिए गांवों के गोंपा से फरमान जारी करवाए कि वैक्सीन लगवाना जरूरी है। बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने भी वैक्सीन लगाई। उनके वीडियो का भी हमने प्रसार किया।”

नवांग से प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि अटल टनल बन जाने के बाद वहां के लोगों के जीवन में क्या बदलाव आए हैं। उपासक ने कहा कि अब लाहौल-स्पीति से कुल्लू आना बहुत आसान हो गया है। उन्होंने कहा, “अब यहां पर्यटन को प्रोत्साहन मिला है और फसलों को बाहर ले जाने में सुविधा हुई है।”

उनसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “आप जैसे साथियों के प्रयास के कारण ही लाहौल-स्पीति भी सबसे तेजी से टीकाकरण करने वाला जिला बना है। इसके लिए आपको बहुत बधाई।”

कोरोना लड़ाई में चैंपियन बनकर सामने आया हिमाचल: पीएम मोदी

शिमला, विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल।। कोरोना योद्धाओं और वैक्सीन के लाभार्थियों से संवाद के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश की जनता को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, “हिमाचल प्रदेश ने आज एक प्रधान सेवक के नाते ही नहीं बल्कि परिवार के सदस्य होने के नाते मुझे गर्व का अवसर दिया है।”

हिमाचल प्रदेश की मुश्किल भौगौलिक स्थिति का वर्णन और वैक्सीनेशन अभियान को सफल बनाने में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “ मैंने छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए जूझते हिमाचल को भी देखा है और आज विकास की गाथा लिखने वाले हिमाचल को भी देख रहा हूं। ये सरकार के प्रयास और जन-जन की जागरूकता से संभव हो पाया है। मैं पूरी टीम का आभार व्यक्त करता हूं। हिमाचल ने एक टीम के रूप में काम किया। मेरी ओर से आप सभी को बधाई।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि, “100 साल की सबसे बड़ी महामारी के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश चैंपियन बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा, “देश भर में हिमाचल पहला राज्या बना जिसने पात्र लोगों को पहली डोज़ लगा दी, जबकि दूसरी डोज़ के मामले में भी हिमाचल एक तिहाई आबादी को कवर कर चुका है। हिमाचल के इस कदम ने अहसास दिलाया है कि आत्मर्निर्भर होना कितना जरूरी है।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत इस समय एक दिन में सवा करोड़ टीके लगाने का रिकॉर्ड बना रहा है। हिमाचल ने खुद की क्षमता पर, अपने स्वास्थ्य कर्मियों और वैज्ञानिकों पर विश्वास किया। यह उपलब्धि इन सभी के बुलंद हौसले का ही परिणाम है। यह डॉक्टर, पैरामैडिकल स्टाफ और हिमाचल की महिलाओं की सफलता है। हिमाचल में हर वो बाधा थी जो कोरोना टीकाकरण को प्रभावित कर सकती थी। यहां लॉजिस्टिक, कोल्ड चेन सहित तमाम अन्य चनौतियां थी, लेकिन हिमाचल ने एक टीम के रूप में कार्य किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में मलाणा गांव की आशा वर्कर निरमा देवी से हुए संवाद का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि मलाणा ने लोकतंत्र को दिशा देने में हमेशा अहम भूमिका निभाई है। जनभागीदारी और जन संवाद, पांगी भरमौर, बड़ा भंगाल में भी यह नीति काम आई। लाहौल-स्पीति के इलाके अटल टनल बनने से पहले महीनों महीनों कटे रहते थे।

उन्होंने कहा, “हिमाचलवासियों ने किसी भी अफवाह को टिकने नहीं दिया। हिमाचल इस बात का गवाह है कि ग्रामीण समाज दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण को सशक्त कर रहा है। इसका लाभ हिमाचल के टूरिज्म को भी होगा, लेकिन ध्यान रहे कि हमें टीके के बावजूद मास्क का इस्तेमाल नहीं छोड़ना है। जिस तरह हम हिमाचल में स्नो फॉल के बाद संभलकर चलते हैं, टीका लगवाने के बाद भी उसी तरह से संभलकर चलना होगा।”

तकनीक से हिमाचल को होगा लाभ

प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में केनेक्टिविटी बढ़ाने और विकास कार्यों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ड्रोन हिमाचल के दुर्गम इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकता है, इसलिए ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े निमयों में बदलाव किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “ड्रोन हिमाचल में हेल्थ से लेकर कृषि और बागवानी तक में काम आ आएगा। इसका काम जमीन के सर्वे में तो किया ही जा रहा है, इसके अलावा दुर्गम इलाकों में जीवनरक्षक दवाएं और महत्वपूर्ण सामान आसानी से भेजने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।”

हिमाचल को ऑरगैनिक बनाने का दिया संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव और समाज को जोड़ने से कई सार्थक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि यही तरीका वन संपदा को लेकर भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “जड़ी-बूटी को लेकर हिमाचल के जंगलों में काफी संभावना है। गांवों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ाए जाने की जरूरत है। हमारी बहनें वन संपदा से होने वाले लाभ को वैज्ञानिक रूप से कई गुना बढ़ा सकती हैं।”

प्रधानमंत्री ने ‘आजादी के अमृत वर्ष’ में हिमाचल के किसानों और बागबानों से आग्रह किया कि वे आने वाले 25 सालों में हिमाचल को पूरी तरह ऑरगैनिक बनाएं। हमारी मिट्टी और बेटे-बेटियों का स्वास्थ्य अच्छा रहना चाहिए। मुझे हिमाचल के लोगों पर विश्वास है कि हिमाचल के जवान जिस तरह से सीमा की सुरक्षा में अग्रणी रहते हैं, वैसे ही हिमाचल के लोग मिट्टी की सुरक्षा में अग्रणी हों।”

हिमाचल : सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को JEE, NEET की फ्री कोचिंग

शिमला।। प्रदेश सरकार नीट और जेईई की कोचिंग पर 5 करोड़ तक खर्च करने जा रही है। इसका उद्देश्य हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को मुफ्त में जेईई और नीट की कोचिंग देना है। जी हां, अब हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रदेश सरकार की ओर से मुफ्त जेईई और नीट की कोचिंग दी जाएगी। नौवीं से 12वीं कक्षा क्लास के हर विद्यार्थी को यह कोचिंग मिलेगी।

रविवार को शिक्षक दिवक के उपलक्ष्य पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने इस योजना का शुभारंभ किया है। योजना को स्वर्ण जयंती अणु शिक्षण योजना नाम दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मेडिकल और इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए तैयार करना है। इससे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज की कोचिंग का खर्चा बचेगा, जो अपने बच्चों को कोचिंग संस्थानों में नहीं भेज सकते हैं। योजना के तहत विद्यार्थियों को यह कोचिंग मुफ्त कराई जाएगी।

इस योजना के तहत विद्यार्थियों को बेसिक चीजों की जानकारी दी जाएगी। नौवीं से 12वीं क्लास के हर विद्यार्थी को यह कोचिंग अनिवार्य होगी। यह योजना दो चरणों मे चलेगी। पहले चरण में गणित और विज्ञान की कोचिंग दी जाएगी। नीट और जेईई का पेपर किस तरह का होता है। पेपर में किस तरह के प्रश्न आते हैं। टेस्ट की तैयारी के लिए कौन-कौन सी किताबें पढ़नी चाहिए, यह जानकारी भी दी जाएगी।

इस कोचिंग में अध्यापकों की भूमिका काफी अहम होगी, क्योंकि छात्रों के सवालों के जवाब अध्यापकों को ही देने होंगे। जब बच्चे 11वीं क्लास पास कर लेंगे तो उनका टेस्ट लिया जाएगा। जो बच्चे इस टेस्ट को पास करेंगे, केवल वही फाइनल कोचिंग के लिए चयनित होंगे। इसमें छात्रों की रूचि भी देखी जाएगी कि 12वीं के बाद बच्चे इंजीनियरिंग या मेडिकल में जाना चाहते हैं या नहीं।

लंगर विवाद: समर्थन में उतरे विक्रमादित्य मगर ‘बॉबी समर्थकों’ ने घेरा

शिमला, विनोद भार्गव, फॉर इन हिमाचल।। आईजीएमसी लंगर विवाद में शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह भी कूद गए हैं। उन्होंने शाम पांच बजे रिज पर लोगों को विरोध करने के लिए बुलाया है। लेकिन इस संबंध में उन्होंने जो पोस्ट डाली है, उसमें समर्थन के साथ-साथ विरोध वाले कॉमेंट भी आए हैं।

हैरानी की बात ये है कि विरोध करने वाले भी सरबजीत सिंह बॉबी के समर्थन में बात कर रहे हैं। कुछ लोग कॉमेंट कर रहे हैं कि इस पूरे मामले के लिए विक्रमादित्य भी जिम्मेदार हैं क्योंकि जिस समय बॉबी को लंगर के लिए यह जगह अलॉट की गई थी, तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी मगर प्रक्रिया को कानूनी रूप नहीं दिया गया था। इसी बात को लेकर लोग विक्रमादित्य पर सवाल उठा रहे हैं।

एक यूजर ने कॉमेंट किया कि ‘वैसे तो विक्रमादित्य वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से करीबी का हवाला देते हैं और आज सुबह ही इस संबंध में उन्होंने एक पोस्ट डाला है, फिर भी उन्होंने बॉबी की समस्या को सुलझाने की कोशिश नहीं की।’ हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस तरह के विरोध वाले कॉमेंट अब विक्रमादित्य के पेज से गायब हो चुके हैं या संभवत: डिलीट कर दिए गए हैं।

Virbhadra Singh in IGMC
ससुराल में बहू सुदर्शना के पहले जन्मदिन पर बॉबी के लंगर में पहुंचे थे वीरभद्र सिंह

बॉबी को करीब से जानने वाले एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि बॉबी लंबे समय से विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। इस सिलसिले में उन्होंने विक्रमदित्य समेत अन्य कई नेताओं के साथ मुलाकात की थी मगर हर ओर से  आश्वासनों के अलावा जमीन पर कोई समाधान नहीं निकला। अब लंबे समय की खींचतान के बाद बीती शाम आईजीएमसी प्रशासन ने पुलिस की मदद से वह जगह खाली करवा दी जहां यह लंगर चल रहा था।

इस मामले को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है मगर आईजीएमसी प्रशासन का कहना है कि बॉबी की संस्था भले परोपकारी काम कर रही हो मगर वह जगह लंगर की जगह 108 के ड्राइवरों के लिए बनी थी और उस पर अवैध कब्जा है। आरोप है कि बॉबी की संस्था के पास वहां बिजली और पानी का वैध कनेक्शन भी नहीं है।

राजनीतिक पहलू की चर्चा
दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी रहे बॉबी शिमला सिटी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के भी इच्छुक बताए जाते हैं, हालांकि बॉबी ऐसे दावों को खारिज करते रहे हैं। गौरतलब है कि बॉबी ने इस साल 22 जनवरी को रिज पर धरना दिया था तो 31 मार्च तक लंगर वाली जगह खाली करने की बात कही थी। अस्पताल प्रशासन उन्हें लंगर के लिए नई जगह देने को तैयार था मगर उन्होंने यह जगह खाली नहीं की।

Himachal Ex. CM Virbhadra Singh Viral Video hpvk – News18 Hindi

शिमला में एक वर्ग में यह भी चर्चा है कि जानबूझकर बॉबी ने यह जगह खाली नहीं की ताकि इस मामले पर वह भावनात्मक समर्थन बटोर सकें। एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें हैरानी नहीं होगी अगर इस हंगामे के बाद बॉबी यह एलान कर दें कि वह ‘सिस्टम के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए 2022 का चुनाव लड़ेंगे।’

हालांकि एक बड़े वर्ग का मानना है कि ऐसी बातें यूं ही फैलाई जा रही हैं और बॉबी निस्वार्थ भावना से परोपकारी कार्यों में जुटे हुए हैं। उनका यह भी कहना है कि अगर अवैध या गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ ही कार्रवाई करनी हो तो सभी जगह समान रूप से की जाए, किसी को निशाना न बनाया जाए।

जयराम सरकार का फैसला- बेटियों के जन्म पर मिलेंगे 51 हजार रुपये

विनोद भार्गव फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। शनिवार को हुई राज्य कैबिनेट की मीटिंग में जयराम सरकार ने बेटियों और छात्रों के लिए कई अहम निर्णय लिए। अब बेटियों के जन्म पर राज्य सरकार की ओर से 51 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ ही श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में आने वाले खर्च को ध्यान में रखते हुए उन्हें दी जाने वाली आर्थिक सहायता 84 हजार रुपये तक बढ़ा दी गई है।

प्रदेश सचिवालय में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि बेटियों के जन्म पर राज्य सरकार 51 हजार रुपये का फ़िक्स्ड डिपॉज़िट देगी। बालिका जन्म उपहार नाम की इस योजना का लाभ दो बेटियों के जन्म तक मिलेगा।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में श्रमिकों के बच्चों और शोध करने वाले छात्रों तक के लिए भी कई अहम निर्णय लिए गए। श्रमिकों के बच्चों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि कई गुना बढ़ा दी गई है।

सरकार द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए गए निर्णय

श्रमिकों के जो बच्चे पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा 8400 रुपये प्रतिवर्ष आर्थिक सहायता दी जाएगी। पहले इस योजना के तहत लड़कियों को 8 हजार और लड़कों को 5 हजार रुपये मिलते थे।

इसी तरह पहले 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये मिलेंगे। पहले यह राशि लड़कियों के लिए 11 हजार जबकि लड़कों के लिए आठ हजार रुपये थी।

स्नातक में पढ़ने वाले श्रमिकों के बच्चों को सरकार सालाना 36 हजार रुपये देगी। इससे पहले स्नातक में पढ़ने वाली लड़कियों को 16 हजार और लड़कों को 12 हजार रुपये मिलते थे।

स्नातकोत्तर में पढ़ने वाले छात्रों को जयराम सरकार प्रति वर्ष 60 हजार रुपये देगी। इससे पहले लड़कियों को 36 हजार और लड़कों को 27 हजार रुपये मिलते थे।

पीएचडी करने वालों को अब 1 लाख 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इससे पहले छात्राओं को 36 हजार और छात्रों को लिए 27 हजार रुपये दिए जाते थे।

शगुन योजना भी चला रही है सरकार

प्रदेश सरकार बेटियों के विवाह के लिए शगुन योजना भी चला रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत बेटियों की शादी पर सरकार की ओर से 31 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इस योजना की शुरुआत इसी वर्ष से हुई है।

इसके अलावा कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों को सरकार 20000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे। इसके लिए 50 प्रतिशत या उससे अधिक अक्षमता वाले बच्चे पात्र रहेंगे।