अब महीने में ज़्यादा सरकारी सफर कर सकेंगे बीडीसी अध्यक्ष

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में अब पंचायत समिति (बीडीसी) अध्यक्ष भी मंत्रियों और विधायकों की तरह अपने क्षेत्रों में खुलकर गाड़ियों में घूम सकेंगे। सरकार ने अब बीडीसी अध्यक्षों के लिए अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के निरीक्षण और सरकारी कार्यों के लिए गाड़ी में सफर करने की तय सीमा बढ़ा दी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से इसके आदेश भी जारी हो चुके हैं।

बता दें कि बीडीसी अध्यक्षों को पहले एक महीने में 500 किलोमीटर गाड़ी में सरकारी सफर करने की अनुमति थी, लेकिन अब सरकार ने इस तय सीमा को बढ़ाकर 1000 किलोमीटर कर दिया है। बीडीसी अध्यक्षों द्वारा बार-बार इसकी मांग की जा रही थी, जो सरकार ने अब पूरी कर दी है।

बीडीसी अध्यक्ष मांग कर रहे थे कि उन्हें भी मंत्रियों और विधायकों की तरह फील्ड में जाना होता है। एक बीडीसी अध्यक्ष के पास भी उतना ही क्षेत्र होता है, जितना एक विधायक के पास होता है। उनकी मांग थी कि इसके लिए 500 किलोमीटर की तय सीमा बेहद कम है। इसी के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के निदेशक रुग्वेद मिलिंद ठाकुर ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पंचायत समिति सदस्यों को गाड़ी हायर करने की व्यवस्था 20 फरवरी, 2019 को कर दी थी।

हिमाचल: जल्द ही सौ फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ चल सकती हैं बसें

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में जल्द ही सौ फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ बसें चल सकती हैं। हिमाचल सरकार सौ फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ बसें चलाने की तैयारी में है। इस बारे में परिवहन निगम प्रबंधन ने भी सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

पिछले करीब एक महीने से बसों में 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ बसें चलाई गई हैं। लेकिन अब प्रदेश सरकार कोरोना के मामलों में कमी और परिवहन निगम को लगातार हो रहे घाटे को देखते हुए सौ फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ बसें चलाने का फैसला ले सकती है।

परिवहन निगम लगातार घाटे में चल रहा है। निगम का कोष खाली है। यहाँ तक कि निगम के पास कर्मचारियों को देने के पैसे तक नहीं है। इस समय परिवहन निगम के पास करीब 3400 बसें हैं। फिलहाल करीब 2100 रूटों पर बसें चल रही हैं, जबकि करीब 1000 रूट बन्द हैं।

इसके अलावा बाहरी राज्यों के लिए भी निगम की ओर से बसें चलाई जा रही हैं। इस समय करीब 400 बसें बाहरी राज्यों के रूटों पर चल रही हैं। बाहरी राज्यों के ये सभी रूट फायदे वाले हैं। लेकिन बसों में 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी के चलते कमाई कम हो रही है।

परिवहन निगम के अनुसार करीब एक महीने से बसें 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ चल रही हैं। इससे निगम को प्रतिदिन करीब एक करोड़ तक कमाई हो रही है। निगम का कहना है कि जब बसें सौ फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ चलती थीं, तो निगम को प्रतिदिन ढाई करोड़ तक कमाई होती थी।

इस बारे परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि परिवहन निगम की ओर से यह मामला उठाया गया है। इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा की जरूरत पड़ी, तो कैबिनेट में भी इस मामले पर चर्चा की जा सकती है।

माँ की ममता शर्मसार: महिला ने खड्ड में फेंक दी दो जुड़वां बच्चियां

मंडी।। रविवार को मंडी शहर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जिसने मां की ममता को ही शर्मसार कर दिया। एक मां ने अपनी दो नवजात जुड़वां बच्चियों की जान ले ली। महिला ने अपनी तीन महीने की दो जुड़वां बच्चियों को सकोहड़ी खड्ड में फेंक दिया, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई।

मिली जानकारी के मुताबिक, महिला एक साल पहले अपने पति को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ चली गई थी। लेकिन अब वह दोबारा अपने पति के घर वापस आना चाहती थी। ऐसे में घर वापस लौटने के लिए यह दोनों बच्चियां बाधा ना बनें, इसलिए महिला ने अपनी दोनों मासूम जुड़वा बच्चियों को खड्ड में फेंक दिया। महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आरोपी महिला को धारा 317, 304 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं, महिला के प्रेमी से भी पूछताछ की जाएगी।

एसपी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पुलिस ने पाया है कि महिला प्रेमी के साथ खटपट होने के बाद महिला बस से मंडी पहुंची थी। उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। सोमवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा।

शिमला वालों का दिल जीत गए राष्ट्रपति, व्यवस्थित रहा दौरा

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। राजधानी में रोज हजारों लोग सरकारी कामों से पहुंचते हैं और सैकड़ों मरीज और तीमारदार आईजीएमसी और अन्य अस्पतालों में इलाज करवाने पहुंचते हैं। वीवीआईपी मूवमेंट के कारण रास्ते बंद होने से उन्हें असुविधा हो सकती थी। मगर संक्षिप्त कार्यक्रम और कम मूवमेंट के कारण अहम सड़कें बंद नहीं हुईं, न ही शहर में जाम की स्थिति बनी।

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का चार दिवसीय शिमला प्रवास यादगार रहा। प्रदेश की जयराम सरकार के प्रयासों से राष्ट्रपति के दौरे पर लोगों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति निवास द रिट्रीट में ठहरना था, लेकिन उनकी सुरक्षा की बजह से जनता को कोई असुविधा न हो इसके लिए उन्होंने होटल ओबेरॉय सेसिल में ठहरने की सहमति जताई।

प्रदेश सरकार ने शिमला जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को पहले ही निर्देश दिए थे कि राष्ट्रपति के दौरे के समय जनता को कोई भी असुविधा का सामना करने की नौबत न आए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बार-बार स्वयं जायजा लेते रहे।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम और 2013 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का शिमला दौरा रहा तो यहां की जनता को यातायात से लेकर अन्य असुविधाओं का सामना करना पड़ा था। मगर इस बार जनता को कोई भी परेशानी नहीं हुई। यहां तक कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को ऐतिहासिक रिज पर लोगों से बात की। इस दौरान उन्हांने लोगों से बात करते हुए असुविधा के लिए खेद भी जताया, मगर लोगों ने उन्हें साफ कह दिया कि उन्हें कोई असुविधा नहीं हुई।

प्रदेश की जनता ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शिमला प्रवास को यादगार बताते हुए जयराम सरकार और पुलिस प्रशासन की तारीफ की।

बता दें कि भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गत 16 सितंबर को शिमला पहुंचे और हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व दिवस के स्वर्णिम वर्ष पर आयोजित 17 सितंबर को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कोविड-19 वैक्सीनेशन में 18 से 45 वर्ष तक की आयु वाले शत-पतिशत लोगों को पहली डोज लगाने के लिए जयराम सरकार को शाबाशी भी दी।

बीते 18 सितंबर को राष्ट्रपति ने शिमला में राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी द्वारा आयोजित भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवाएं बैच 2018 और 2019 के प्रशिक्षु अधिकारियों के विदाई समारोह के अवसर पर मेधावी प्रशिक्षु अधिकारियों को पदक देकर सम्मानित भी किया।

इस कार्यक्रम का स्थान और इससे हिमाचल प्रदेश विधानसभा उस जगह से चंद मीटर की दूरी पर है जहां राष्ट्रपति ठहरे थे। इस वजह से भी जनता को असुविधा नहीं हुई।

वो योजनाएं जिसने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बेस्ट परफॉर्मर बनाया था

शिमला। हिमाचल की बीजेपी सरकार को चार साल पूरे होने में अभी कुछ महीने बाकी हैं। दिसंबर में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे हैं। जाहिर है सरकार चार साल पूरे होने पर खास कार्यक्रम का भी आयोजन करेगी, लेकिन कुछ उपलब्धियां हैं जिनकी चर्चा अभी से लोगों के बीच लगातार हो रही है। दरअसल हिमाचल ने हाल ही में कोविड वैक्सीनेशन की पहली डोज सभी व्यस्कों को लेकर देश भर में नंबर एक का स्थान हासिल किया था। इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले कोई भी अभियान हों, हिमाचल हमेशा इक्कीस ही साबित होता रहा है।

इसी तरह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खुद की सोच से कुछ योजनाओं को भी जनता के लिए शुरू किया। आयुष्मान योजना की तर्ज पर हिम केयर योजना चलाई गई। बिस्तर पर दिन गुजार रहे गंभीर रोगियों के लिए सहारा योजना की शुरुआत हुई। वृद्धों की दिक्कतों को देखते हुए पेंशन के लिए आयु सीमा घटाई गई। महिलाओं की पेंशन के लिए तो आयु सीमा घटाकर 65 कर दी गई।

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ये सभी सीधे आम आदमी के लिए चलाई गई योजनाएं हैं। इन योजनाओं की चर्चा तो हो ही रही बल्कि हिमाचल भी विकास की गाथा लिख रहा है। स्वास्थ्य के साथ शिक्षा को लेकर भी जयराम सरकार अभूतपूर्व कार्य कर रही है। नौवीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए मुफ्त में ही नीट-जेईई कोचिंग की शुरुआत की गई है। इसके अलावा श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दी जाने वाली राशि में 300 से 30 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है।

इसके अलावा बेटियों के जन्म पर 51 हजार रुपए की एकमुश्त राशि देने की योजना हो या गरीब बेटियों की शादी पर 31 हजार रुपए की शगुन योजना। ये सभी योजनाएं आम जनता के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से शुरू की गई। साधारण पृष्टि भूमि से जुड़े मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ये योजनाएं आम आदमी की पसंद बन चुकी हैं।

हिमाचल ने कोरोना काल में बेहतरीन प्रबंधन का उदाहरण पेश किया था। प्रदेश के अस्पतालों में पीएसए ऑक्सीजन प्लांट की संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है जो कि इस महीने के अंत तक 28 हो जाएगी। कम संसाधनों वाला हिमाचल आत्मनिर्भरता के पग उठा रहा है।

बीते साल भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल नेतृत्व के चलते उन्होंने एक सर्वे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पीछे छोड़ दिया था। यह सर्वे आईएएनएस-सी वोटर की ओर से किया गया था। बीते वर्ष हुए इस सर्वे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बीजेपी शासित सरकारों के मुख्यमंत्रियों के बीच बेस्ट परफार्मिंग सीएम चुने गए थे।

हिमाचल: 21 सितंबर से छात्रों के लिए खुल जाएगी सेंट्रल यूनिवर्सिटी

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी 21 सितंबर से छात्रों के लिए खुल जाएगी। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति ने यूनिवर्सिटी खोलने की अधिसूचना जारी कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार, 21 सितंबर से यूनिवर्सिटी में 50% छात्रों की संख्या के साथ कक्षाएं लगेंगी।

इस संबंध में कुलपति ने सभी विभागाध्यक्षों व परिसरों के समन्वयकों व अन्य अधिकारियों को अपने-अपने विभाग की समय-सारणी तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।

इस बारे हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. विशाल सूद ने बताया कि इस दौरान केंद्रीय सरकार द्वारा कोविड 19 से संबंधित समय पर जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा ।

वहीं, हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने विभिन्न स्नातकोत्तर अध्ययन कार्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया है। सेंटल यूनिवर्सिटी द्वारा यह परीक्षा 11 सितम्बर को विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर करवाई गई थी।

इस बारे में परीक्षा नियंत्रक डाॅ. सुमन शर्मा ने बताया कि संबंधित विभाग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों की प्रथम चयन सूची 20 सितम्बर को यूनिवर्सिटी के नोटिस बोर्ड व यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी।

हिमाचल: विदेशी सेब के पौधे बेचने वाली तीन नर्सरियों के सर्टिफिकेट रद्द

शिमला।। हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग ने सेब के पौधे बेचने वाली तीन नर्सरियों पर हिमाचल सरकार नर्सरी एक्ट के तहत कार्रवाई की है। यह तीनों नर्सरियां विदेशी सेब के पौधे बेचती थी। अब विभाग ने इन पर पाबंदी लगा दी है और इनमें सेब के पौधे आयात करने के सर्टिफिकेट भी रद्द कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 में शिकायत के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इन नर्सरियों द्वारा सेब के पौधे विदेशों से आयात करने के बाद एक साल तक क्वारन्टीन नहीं किए गए थे और गलत तरीके से बागवानों को बेचे जा रहे थे। सोशल मीडिया पर भी सेब के पौधों का प्रचार किया जा रहा थ, जिस पर विभाग ने नकेल कसी है।

इस बारे बागवानी विभाग के निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि विदेशों से आयात किए गए सेब के पौधे बिना क्वारंटीन किए बागवानों को बेचे जा रहे थे। इससे बगीचों में वायरस आने का खतरा रहता है।

उन्होंने बताया कि जब विभाग के अधिकारी जांच के लिए मौके पर गए, तो पता चला कि नियमों के विपरीत जाकर सेब के पौधे बेचे जा रहे थे। जिसके बाद विभाग ने इन नर्सरियों पर रोक लगा दी है। साथ ही उनके विदेशों से सेब के पौधे आयात करने के लिए जारी सर्टिफिकेट भी रद्द कर दिए हैं।

हिमाचल: वरिष्ठ नागरिकों के साथ अपराध के मामले हुए दोगुना

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं। एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी किए गए वर्ष 2020 के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन सालों में हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं में दोगुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है

आंकड़ों से पता चला है कि हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के साथ विभिन्न तरह के अपराध के वर्ष 2018 में 195 मामले सामने आए थे। 2019 में 166 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2020 में मामलों की संख्या बढ़कर 394 हो गई। इन मामलों में चोरी से लेकर गंभीर रूप घायल करने, दुष्कर्म, धोखाधड़ी और अन्य तरह के अपराध शामिल हैं।

वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस के आला अधिकारी विशेष ध्यान देने की बात करते रहते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाने की बातें भी होती हैं। उसके बावजूद भी वरिष्ठ नागरिकों के साथ अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के साथ होने वाले अपराध के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। साल 2018 कुल 130 मामले दर्ज हुए थे। 2019 में मामलों की संख्या बढ़कर 189 हो गई। वहीं, 2020 में कुल 251 मामले दर्ज हुए हैं। साल 2018 की तुलना में 2020 में अनुसूचित जाति वर्ग के साथ होने वाले अपराध के 121 मामले ज्यादा दर्ज हुए हैं।

बीड़-बिलिंग और धर्मशाला में पैराग्लाइडिंग को फिर से शुरू करने की अनुमति

कांगड़ा।। सरकार ने बीड़-बिलिंग और धर्मशाला में पैराग्लाइडिंग को फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। कोविड के कारण पैराग्लाइडिंग पर रोक लगा दी गई थी।

हालांकि, सरकार द्वारा पैराग्लाइडिंग की अनुमति देने के बावजूद इस पेशे से जुड़े लोगों का कहना है कि अक्तूबर के दूसरे हफ्ते तक परिचालन फिर से शुरू होने की संभावना नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में भारी बारिश हो रही थी। चूंकि अक्तूबर के पहले हफ्ते तक बारिश जारी रहने की संभावना है, इसलिए बहुत से पर्यटक क्षेत्र की यात्रा नहीं कर रहे थे।

बीड़ में पैराग्लाइडिंग स्कूल चलाने वाले गुरप्रीत ढींडसा ने कहा कि सितंबर पैराग्लाइडिंग के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि आसमान में बादल छाए रहते हैं और इस क्षेत्र में भारी बारिश होती है। अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में बीड़ में पैराग्लाइडिंग का संचालन शुरू होने की संभावना है, जब खेल के लिए मौसम आदर्श हो जाएगा।

टैंडेम पैराग्लाइडिंग, जिसमें पर्यटक पैराग्लाइडिंग पायलटों के साथ आसमान पर जाते हैं, बीड़ क्षेत्र की जीवन रेखा है। बीड़-बिलिंग विश्व की दूसरी सबसे ऊंची पैराग्लाइडिंग साइट है, जो दुनिया भर से साहसिक खेल प्रेमियों को आकर्षित करती है। इस क्षेत्र ने पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप और कई प्री-पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप की मेजबानी की है। लगभग 150 प्रशिक्षित पायलट बीड़ क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग से अपनी आजीविका कमाते हैं।

बीड़ निवासी राकेश कुमार ने कहा कि हालांकि पिछले लगभग दो वर्षों से महामारी के कारण कोई पैराग्लाइडिंग नहीं हुई थी, लेकिन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई है। लगभग दो हज़ार आईटी और अन्य पेशेवर हैं जो बीड़ चले गए हैं और होमस्टे में रह रहे हैं। वे बीड़ से ऑनलाइन काम कर रहे हैं और उन्होंने क्षेत्र में होमस्टे और रेस्तरां में व्यवसाय को बनाए रखने में मदद की है। बीड़-बिलिंग क्षेत्र में पर्यटन विभाग के पास लगभग 200 होमस्टे पंजीकृत हैं।

पैराग्लाइडिंग में शामिल लोग आसमान के साफ होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे आसमान पर जा सकें और लोगों को साहसिक खेल की ओर आकर्षित कर सकें।

पत्नी मायके में, पति ने फंदा लगाकर दी जान

मंडी।। मंडी जिले में एक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। मामला जिले के जोगिंद्रनगर उपमंडल की भराडू पंचायत का है। यहाँ एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। व्यक्ति के पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें ब्लैकमेलिंग का ज़िक्र किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, बीते रोज गुरूवार शाम को भराडू पंचायत के नागदयाडा गांव के 52 वर्षीय मदन लाल ने अपने मकान के साथ पेड से लटक कर आत्महत्या कर ली। जिस समय व्यक्ति ने फंदा लगाया, उस समय उसकी पत्नी मायके गई हुई थी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। सुसाइड नोट में मृतक ने कुछ लोगों का नाम लिख उसके साथ ब्लैकमेलिंग का भी ज़िक्र किया है।

मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पधर लोकेंद्र नेगी ने बताया कि सुसाइड नोट में ब्लैक मेलिंग की जो बात कही गई है, उसमें मृतक की लिखावट का मेल करने के उपरांत ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।