गड़बड़झाला: फ्लैट बनाने की परमिशन लेकर बेच दिए प्लाट

सोलन।। सोलन जिले के बद्दी में फ्लैट बेचने मि मंजूरी लेकर प्लाट बेचने का मामला सामने आया है। इस पर डीसी सोलन जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, सरकार ने भी मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। इस जमीन की सरकारी भूमि घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मामला बद्दी के अमरावती अपार्टमेंट का है। जानकारी के अनुसार, अपार्टमेंट संचालकों ने सरकार से फ्लैट बनाकर बेचने की परमिशन ली थी, लेकिन उन्होंने फ्लैट बेचने के बजाय लोगों को सीधे प्लाट ही बेच दिए। यही नहीं, अपार्टमेंट ने जो पहले फ्लैट बनाकर बेचे हैं, उनमें भी कुछ की न तो परमिशन ली है और न टीसीपी के कंपलीशन सर्टिफिकेट हैं।

जब इसकी परमिशन लेने के लिए प्रशासन को लिखा तो डीसी कार्यालय की ओर से इस पर ऑब्जेक्शन लगाकर सरकार के प्रमुख सचिव (राजस्व) को भेजा गया।

प्रमुख सचिव (राजस्व) ने इसे पूरी तरह धारा 118 का उल्लंघन बताया है और डीसी सोलन मो कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। राजस्व विभाग ने इस जमीन पर दो साल के भीतर टावर खड़ा करके यहां पर फ्लैट बनाने का समय निर्धारित किया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद संचालकों ने खाली प्लाट 40 लोगों को बेच दिए और इनके साथ एग्रीमेंट भी बना लिए।

डीसी सोलन कृतिका कुल्हारी ने इस मामले की शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हिमाचल: अब एंटीना पर प्रसारित नहीं होगा दूरदर्शन, सात टावर बंद

शिमला।। अब एंटीना पर दूरदर्शन का प्रसारण नहीं होगा। डीटीएच और केबल तकनीक आने के चलते यह निर्णय लिया गया है। हिमाचल प्रदेश में दूरदर्शन के सात टावर बंद किए जा रहे हैं। अब प्रसार भारती ने स्थलीय प्रसारण बंद करने का निर्णय लिया है।

इसकी पुष्टि करते हुए दूरदर्शन शिमला के केंद्र निदेशक विकास भट्ट ने बताया कि 31 अक्तूबर 2021 से कुल्लू टावर के स्थलीय प्रसारण बंद हो जाएंगे। वहीं, 31 मार्च, 2022 तक सभी टावर बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब तकनीक काफी बदल गई है। दूरदर्शन का प्रसारण सेटेलाइट और केबल टीवी के माध्यम से हो रहा है। इसी के चलते ये टावर बंद किए जा रहे हैं।

बता दें कि प्रदेश में दूरदर्शन के स्थलीय प्रसारण के लिए सात टॉवर लगाए गए हैं। इनमें एचपीटी के तीन टावर शिमला, कसौली और धर्मशाला में हैं। एलपीटी टावर बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और मनाली में हैं।

ये टावर बंद होने से तकनीकी कर्मचारियों पर तबादले की गाज गिर सकती है। स्थलीय प्रसारण बंद करने से दूरदर्शन के 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में इन कर्मचारियों को हिमाचल से बाहर भी ट्रांसफर किया जा सकता है। इसी वजह से कर्मचारी टावर बंद करने का विरोध भी कर रहे हैं।

हिमाचल: दुर्गम क्षेत्रों में जीवनयापन आसान बनाने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की तैयारी

शिमला।। प्रदेश सरकार दुर्गम इलाकों में राशन और दवाइयों जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा नई ड्रोन पॉलिसी लाई गई है। ड्रोन पॉलिसी को और अधिक लचीला बनाने और सरकारों को लोगों को इसका प्रयोग बढ़ाने की बात कहने के बाद मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने इस संबंध में एक बैठक की है।

बैठक के बाद अब एक एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। जिसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक मुकेश रेपसवाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है। एक्शन प्लान के लिए उन राज्यों से भी संपर्क किया जाएगा। जिन राज्यों ने किसी भी तरह की सेवा के लिए ड्रोन का सफल उपयोग किया है। जिन क्षेत्रों में ड्रोन की सेवाएं ली जा सकती हैं, उन्हें प्लान में शामिल किया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में बहुत से दुर्गम क्षेत्र हैं। जहाँ पहुंचने के रास्ते भी बेहद मुश्किल और खतरनाक हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में राशन, दवा, कृषि व बागवानी में इस्तेमाल होने वाले छिड़काव, आपदा के समय किसी भी तरह की सप्लाई व पीडब्ल्यूडी जैसे महकमों में सर्वे के लिए ड्रोन के प्रयोग की संभावनाओं की एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

जल्द ही यह रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। जिसके बाद ड्रोन की मदद से हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में जीवनयापन को आसान बनाने का प्रयास किया जाएगा।

खुद को कुंवारा बताकर की कोर्ट मैरिज, पता चलने पर महिला ने पुलिस में दी शिकायत

चंबा।। एक शादीशुदा व्यक्ति द्वारा खुद को कुंवारा बताकर दूसरी शादी करने का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। मामला चंबा जिला का है।

महिला ने अपने पति पर पर शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। चंबा जिला के एक गांव की रहने वाली महिला ने पुलिस में बयान दिया है कि राजपुरा के एक व्यक्ति ने खुद को कुंवारा बताकर नवंबर 2019 में उसके साथ कोर्ट मैरिज की, जबकि उसकी शादी पहले हो चुकी थी।

महिला के अनुसार व्यक्ति का एक बच्चा भी है। उसे इस बात का पता शादी के बाद लगा। उसने जब इस बारे में अपने पति से पूछा, तो वह उसे शारीरिक तौर पर प्रताड़ित कर रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।

महिला ने पुलिस थाना चंबा में इसकी शिकायत दर्ज करवाई है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एसपी अरुल कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

जेई भर्ती: अपने नकारेपन का ठीकरा फोड़ रही कांग्रेस- बिक्रम ठाकुर

शिमला।। जेई भर्ती में अन्य राज्यों के अभ्यार्थियों को नियुक्ति देने को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने पलटवार किया है। उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदेश की पूर्व वीरभद्र सरकार ने अपने कार्यकाल में गंभीरता से निर्णय लिए होते तो आज हिमाचल के युवाओं को ये दिन नहीं देखने पड़ते। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में इंटरव्यू की व्यवस्था को खत्म किया तो वीरभद्र सरकार ने 2017 के चुनावी वर्ष में आनन-फानन में यह फैसला हिमाचल में भी लागू कर दिया। युवा वोट बैंक की लालसा में कांग्रेस सरकार ने यह फैसला लागू तो कर दिया लेकिन कुछ नियमों को सुनिश्चित करना भूल गई।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार को चाहिए था कि इंटरव्यू खत्म होने के साथ ही कुछ नए राइडर भर्तियों में लगाए जाते। जैसे पंजाब में पंजाबी भाषा है तो वहां पर टेस्ट में उम्मीदवारों के लिए पंजाबी जरूरी कर दी जाती है। अन्य राज्यों ने भी कुछ ना कुछ राइडर लगाए हैं, लेकिन पूर्व सरकार ने कोई राइडर लगाए ही नहीं। विभाग ने पिछली सरकार में ही अपनी जरूरतें बता दी थीं। दिसंबर 2017 में भाजपा की सरकार बनी। विभाग और जनता की जरूरतों को समझते हुए छह महीने के भीतर ही भर्ती विज्ञापित कर दी गई। अब इंटरव्यू जब खत्म हो चुके थे, भर्तियों में लिखित परीक्षा और दस्तावेजों के सत्यापन से ही मैरिट तय होने लगी।

उद्योग मंत्री ने कहा कि हिमाचल के पास अपनी कोई भाषा नहीं है इसलिए हम भाषा के आधार पर कोई राइडर नहीं लगा सकते। इस तरह के मामले पहले भी आए थे इसलिए हमारी सरकार ने नवंबर 2019 में ही नियमों में बदलाव किया था। इसमें तृतीय श्रेणी की भर्ती के लिए आवेदक का हिमाचल से 10वीं और 12वीं पास होना जरूरी किया गया था। चतुर्थ श्रेणी के लिए भी आठवीं और दसवीं हिमाचल से पास होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जिस भर्ती को लेकर विपक्षी ज्यादा सवाल कर रहे हैं, वह पुरानी अनुशंसाओं के आधार पर ही विज्ञापित हुई थी। मौजूदा प्रदेश सरकार ने तो पूर्व सरकार की गलती में सुधार किया है ताकि आगे कभी हिमाचली युवाओं के मौके कम न हों।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकारों में भी अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलती रही है। कांग्रेस के नेताओं को पूछा जाना चाहिए कि उनके राज में कितने लोगों को नौकरियां दी गईं और वह भी तब, जब हिमाचल में इंटरव्यू भी होते थे। उन्होंने कहा कि यह कहना कि लोगों को सरकार लगा रही है, यह बयान ही पूरी तरह से गलत है। यह कांग्रेस सरकार नहीं जहां सिफारिश से नियुक्ति होती है तथा जो भी नियुक्तियां हुई है, उनके लिए बाकायदा परीक्षाएं हुईं हैं।

जयराम सरकार दे रही है रिकाॅर्ड रोजगार
उद्योग मंत्री ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार युवाओं को लगातार रोजगार देने के लिए प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार ने हिमाचल में निवेश के लिए इन्वेस्टर मीट का आयोजन किया जिसमें 96 हजार करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए। हालांकि बाद में कोरोना के कारण डेढ़ साल से इस प्रक्रिया में अल्पविराम लग गया था। कोरोना के मामले कम होते ही इस कार्य में तेजी लाई गई है।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि इन्वेस्टर मीट के बाद पहली ग्राउंड ब्रेकिंग 13 हजार 500 करोड़ की हुई है। इसमें करीब 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। अगले महीने 15 हजार करोड़ रुपये की दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग है। इसमें भी करीब 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत युवाओं को रोजगार के लिए ऋण दिया जा रहा हैं। इसमें भी करीब 4 हजार यूनिट्स से करीब 10 से 12 हजार लोगों को रोजगार मिला है। साथ ही साथ अन्य विभागों में लगातार भर्तियां निकाली जा रही हैं।

मंत्री ने कहा कि इस साल बजट में करीब तीस हजार नौकरियां देने की बात कही गई है। अध्यापकों की भर्ती को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मल्टी टास्क वर्कर्स भी भरने को मंजूरी दी जा चुकी है। हिमाचल सरकार अब तक के इतिहास में किसी भी सरकार से ज्यादा नौकरियां लोगों को दे रही है। कांग्रेस को चाहिए कि अपने कार्यकाल के समय में लोगों को रोजगार देने के आंकड़े लोगों के सामने रखे।

जेई भर्ती विवाद : ‘नौकरियां चाहिए तो हिमाचली युवाओं को बढ़ानी होगी काबिलियत’

0

ठाकुर वी. प्रताप || भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जो एक संविधान से चलता है। यह संविधान सभी को कुछ मौलिक अधिकार देता है, जिसे कोई भी संकीर्णता छीन नहीं सकती है, उनमें से एक है देश में कहीं योग्यता के आधार पर नौकरी करने का अधिकार। हिमाचल में भी अन्य राज्यों से कुछ लोगों को योग्यता के आधार पर नौकरी लग गई। इसका हमारी देश की सबसे पुरानी पार्टी ने विरोध किया। ऐसे ही देश बांटा जाता है। ऐसे ही हिंदुस्तान में हिंदुस्तानी बाहरी की तरह आइडेंटीफ़ाई होते हैं।

अब मुद्दे पर आते हैं नौकरी कैसे लग गई?

नौकरियों में बढ़ते भ्रष्टाचार, सिफ़ारिश, भाई-भतीजावाद और पैसे के खेल को देखते हुए मोदी सरकार ने योजना बनाई कि कम से कम तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में इंटरव्यू ख़त्म कर दिया जाए तो ऊपर के जितने खेल हैं सभी खुद बंद हो जाएंगे। इसलिए इंटरव्यू खत्म कर दिया गया। अब जो काबिल है जो लिखित परीक्षा में ज़्यादा अंक पाएगा वही सिलेक्ट होगा। भारत केवल लोकतांत्रिक देश ही नहीं एक लाजवाब संघीय ढांचा भी है।

इसलिए अनारक्षित पदों पर किसी को भी अप्लाई करने से मना नहीं किया जा सकता है। इस बीच हिमाचल की ये विवादिद भर्ती आई। इंटरनेट से जुड़ी दुनिया में ऑनलाइन अप्लाई करना था। कहीं से भी लोगों ने अप्लाई कर दिया। एग्जाम दिया, कम्प्यूटर द्वारा निष्पक्ष आंकलन किया गया और मेरिट लिस्ट जारी कर दी।

हुआ वही
अब हवाएं ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दीये में जान होगी बस वही रह जाएगा

इस भर्ती प्रक्रिया में चयनित होने वाले एक-एक आदमी से जाकर पूछा जा सकता है, भाई किसकी सिफ़ारिश लगाए गए हो? किस नेता के पैर पड़े हैं आपके मां-बाप या फिर आपने? कितने रुपए दिए हैं? सारे सवालों का जवाब सिफर आएगा।

अगला सवाल इसे कैसे रोका जाए?

इसे सीधे रोका ही नहीं जा सकता असंवैधानिक प्रक्रिया है। हां, कुछ रिजनेबल रिस्ट्रिक्शन जरूर लगाए जा सकते हैं। जैसे अन्य राज्यों में इस राज्य की स्थानीय भाषा आनी चाहिए। वह क्वॉलिफ़ाइंग होती है। चाहे आप बाकी सब्जेक्ट में टॉप कर जाएं, लेकिन उसमें पास नहीं हुए तो आप फेल।

कोस-कोस पर पानी तीन कोस पर बानी के सबसे सटीक उदाहरण हिमाचल के संदर्भ में यह संभव नहीं है। यहां की कोई ऐसी भाषा है ही नहीं जिसमें सारे हिमाचली कम्फ़्टर्बेल हों।

सवाल यह हैं कांग्रेस ने हिमाचली हित के लिए क्या किया?

सितंबर, 2015 में मोदी सरकार द्वारा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में इंटरव्यू की व्यवस्था ख़त्म करने के बाद बाक़ी राज्यों पर भी इस तरह का नैतिक दबाव बना। तो हिमाचल प्रदेश में भी स्वर्गीय वीरभद्र सिंह सरकार में 17 अप्रैल 2017 को प्रदेश के लिए केंद्रीय व्यवस्था लागू कर दी।

यहां तक कि जो भर्तियां प्रक्रियागत थी उसके लिए अनुपूरक विज्ञप्ति लाकर इंटरव्यू ख़त्म कर दिया गया, लेकिन इस बारे में बिलकुल नहीं सोचा कि आख़िर हिमाचली हितों की रक्षा कैसे हो। भौगोलिक विविधता वाले हिमाचल में कैसे यह सुनिश्चित हो सके कि यहां के ही लोगों को रोज़गार मिले। इसके लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।

यह समस्या सामने आई सचिवालय के लिए हुई भर्ती में। मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसे रोकने के लिए आर एंड पी रूल्ज़ में संशोधन किया।

फिर कैसे हुआ बाहरी राज्यों के लोगों का चयन?

जयराम सरकार द्वारा आर एंड पी रूल्ज़ में संशोधन नवंबर 2019 में हुआ, लेकिन यह भर्ती प्रक्रिया 2018 में शुरू हो गई थी और उसी वर्ष ही लिखित परीक्षा भी हो गई। जिसके कारण यह बदलाव जेई की भर्ती पर लागू नहीं हुआ।

तो ऐसे इसे कैसे रोका जा सकता है?

सचिवालय में हुई भर्ती में यही मुद्दा था तो इसके लिए जयराम सरकार एक नियम बनाया तृतीय क्लास के नॉन हिमाचली के लिए हिमाचल से दसवीं और बारहवीं, चतुर्थ क्लास के लिए आठवीं और दसवीं की परीक्षा पास करना अनिवार्य पात्रता शर्त कर दी गई।

तो काबिल तो बनना पड़ेगा!

हिमाचल युवाओं को यह भी समझना होगा जयराम सरकार का यह नियम कोई स्थाई समाधान नहीं हैं। क्योंकि हिमाचल में हज़ारों मज़दूरों का परिवार भी रहता है, जिनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा यहीं से हो रही हैं। तो आगे वह लोग चुनौती बनेंगे ही। और सरकारें चाहकर भी ऐसा नियम नहीं ला सकती कि नॉन हिमाचली को नौकरी नहीं मिलेगी।

यह मामला जैसे ही कोर्ट में जाएगा तो जस्टिस सरकार को डांटकर ऐसे नियम रद्द कर देगी। तो नौकरी के लिए काबिल बनना पड़ेगा। अब नौकरियां राजघराना नहीं आपकी क़ाबिलियत तय करेंगी। या फिर हिमाचल को उसी राह पर लौटना होगा। जहां युवाओं का मुस्तकबिल इंटरव्यू तय करेंगे।

इसके उलट भी मैं आपको बता देता हूं हिमाचल घूम के देख लो 90 प्रतिशत ऐसे लोग मिल जाएंगे जो रिटन में टॉपर थे और सिलेक्शन हुआ इस नेता के चमचे का उस नेता के बेटे का। जो ना टॉप 10 में। था और ना टॉप 100 में तो आख़िर ऐसा क्या परफॉर्म कर दिया उसने इंटर्व्यू में जो आंधी की तरह आया और तूफ़ान की तरह सबको बर्बाद करके अपना सिलेक्शन करवाया और चला गया।

भर्तियां कैसे होती थी यह समझने के लिए सिर्फ़ यह देखना चाहिए कि राजा साहब के समय में चयनित हुए दो जजेज की सेवाएं 8 साल बाद हाई कोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई और हाई कोर्ट की जज की टिप्पड़ियां इतनी तल्ख़ की कानों से लहू निकल आए।

चलते चलते एक नामी शे’र’ और बात ख़त्म

अब उजाला दे दे शायद ठोकरें ही
रात जंगल में शम्मआ जलाने से रही

( ये लेखक के निजी विचार हैं)

शिमला: साल 2015 में पीलिया फैलने की विभागीय जांच पूरी

शिमला।। दिसंबर 2015 में शिमला शहर में पीलिया फैलने से हज़ारों लोग बीमार हुए थे और दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी। जिसके बाद राज्य सरकार ने विभागीय जांच के आदेश दिए थे, जो अब पूरी हुई है। जांच पूरी होने के साथ ही रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है।

जांच में मिले तथ्यों के आधार पर अब सरकार जल शक्ति विभाग के तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर फैसला लेगी। सूत्रों के अनुसार, मामले में कई अभियंताओं के खिलाफ विभागीय जांच में लापरवाही के सबूत मिले हैं।

इस विभागीय जांच में हर अफसर की अलग-अलग आरोपों की समीक्षा करने के बाद उनके जवाबों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की गई है। बता दें कि जेई से लेकर एक्सईएन स्तर के अधिकारियों की जांच की गई है। फिलहाल यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है। सरकार इस पर जल्द ही फैसला ले सकती है।

2015 में हुई जांच में पता चला था कि उस समय जिस अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई की जा रही थी, वहां पर लगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रयोग नहीं लाया जा रहा था। मामले पर जमकर हंगामा हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। वहीं, इसके साथ ही विभागीय जांच भी शुरू हुई थी, जो अब पूरी हुई है।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी: प्रवेश परीक्षा में माइनस पांच अंक, मिल गया दाखिला

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एमए के न्यू मीडिया विभाग में जब एससी वर्ग की सभी सीटें खाली रहीं, तो यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने प्रवेश परीक्षा माइनस पांच अंक लेने वाले अभ्यर्थी को दाखिला दे दिया। प्रबंधन का मानना है कि सीटें खाली न रहें, इसलिए अभ्यर्थी को प्रवेश दिया है।

बता दें कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एमए के न्यू मीडिया विभाग में एससी वर्ग की चार सीटें हैं। एससी वर्ग की यह चारों सीटें ही खाली गईं। प्रवेश परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग होती है। ऐसे में अभ्यर्थी को माइनस पांच अंक आए। सीटें खाली न रहें, इसलिए यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इस अभ्यर्थी को दाखिला दे दिया।

डिपार्टमेंट ऑफ न्यू मीडिया की ओर से जारी की गई मेरिट लिस्ट में इस अभ्यर्थी का नाम भी है। मेरिट लिस्ट में सामान्य वर्ग से सबसे अधिक 21.5 अंक लेने वाले अभ्यर्थी को शार्टलिस्ट किया गया है, जबकि 6.75 अंक अर्जित करने वाला अभ्यर्थी वेटिंग लिस्ट में हैं। वहीं, दूसरी ओर एससी वर्ग के लिए आरक्षित की गई सीटों में एक सीट के लिए ऐसे अभ्यर्थी को शार्टलिस्ट किया गया है, जिसको एंट्रेंस में निगेटिव मार्किंग के कारण माइनस पांच अंक हासिल हुए हैं। इस वर्ग में अभी भी सीटें खाली रह गई हैं।

बता दें कि पहली मेरिट लिस्ट में सामान्य वर्ग से 20 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में स्थान दिया गया है। वेटिंग लिस्ट में 6.75 अंक लेने वाला अभ्यर्थी टॉप पर है। वेटिंग लिस्ट में अंतिम स्थान पर माइनस एक अंक हासिल करने वाला अभ्यर्थी है।

इस बारे सेंट्रल यूनिवर्सिटी की परीक्षा नियंत्रक डॉ सुमन शर्मा ने कहा कि सीओई का कार्य प्रवेश परीक्षा को करवाना और अभ्यर्थी की ओर से प्राप्त अंकों को संबंधित डिपार्टमेंट को भेजना होता है। इससे आगे की प्रक्रिया संबंधित विभाग की द्वारा की जाती है।

वहीं, न्यू मीडिया के विभागाध्यक्ष प्रो प्रदीप नायर ने कहा कि आरक्षित वर्ग से संबंधित सीट को अभ्यर्थी के होते हुए खाली नहीं रखा जा सकता। इसके चलते नेगेटिव अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को भी आरक्षित वर्ग से शार्टलिस्ट किया गया है।

NIT हमीरपुर: आउटसोर्स पर तैनात 7 पूर्व सैनिक नौकरी से बर्खास्त

एमबीएम न्यूज़, हमीरपुर।। एनआईटी हमीरपुर में आउटसोर्स आधार पर सेवा दे रहे सात पूर्व सैनिकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। सभी पूर्व सैनिक हमीरपुर जिला के ही रहने वाले हैं। सालों से वह एनआईटी हमीरपुर में बतौर सिक्योरिटी गार्ड और सिक्योरिटी सुपरवाइजर सेवाएं दे रहे थे। अधिकतर की नौकरी तीन से छह महीने की ही बची थी। लेकिन सभी को एक ही झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

नौकरी से निकाले गए सभी पूर्व सैनिक हमीरपुर में मीडिया से रूबरू हुए। सभी ने उन्हें एक बार फिर नौकरी दिए जाने की मांग उठाई है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि स्क्रीनिंग कमेटी ने इंटरव्यू के दौरान इनकी नौकरी को सुचारू रखने की बात कही थी, लेकिन अब उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। पिछले साल 12 अगस्त को नई सिक्योरिटी कंपनी को टेंडर आबंटित किया गया था, जिसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।

उनका कहना है कि महीने तक उन्होंने एनआईटी हमीरपुर के निदेशक और रजिस्ट्रार के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कोर्ट के माध्यम से लीगल नोटिस भी एनआईटी हमीरपुर को भिजवाया है, लेकिन अभी तक उसका भी कोई जवाब नहीं मिला है।

इस बारे में एनआईटी हमीरपुर के निदेशक ललित अवस्थी ने कहा कि एनआईटी हमीरपुर में इस काम के लिए किसी भी स्क्रीनिंग कमेटी का गठन नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि यह काम कंपनी को आउटसोर्स किया गया है।कर्मचारियों को कंपनी ने नौकरी पर रखा है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की सेवाओं को सुचारू रखने के लिए कंपनी अधिकारियों से बात की गई है।

एनआईटी हमीरपुर में बतौर सिक्योरिटी गार्ड काम करने वाले पूर्व सैनिक करमचंद का ने बताया कि वह पिछले 14 वर्षों से एनआईटी हमीरपुर में बतौर सिक्योरिटी गार्ड सेवाएं दे रहे थे। अगस्त महीने में नई कंपनी को टेंडर दिया गया था। 12 अगस्त को एनआईटी हमीरपुर की स्क्रीनिंग कमेटी ने उनका इंटरव्यू दिया था। उस दौरान उनकी नौकरी को सुचारू रखने की बात कही गई थी।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को जब वह ड्यूटी पर पहुंचे तो ड्यूटी रोस्टर में उनका नाम ही नहीं था। रातों-रात नए लोग ड्यूटी पर रख लिए गए और उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया गया।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

नौवीं से 12वीं के स्कूल खुले, तीन-तीन दिन ही लगेंगी कक्षाएं

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। कोरोना के कारण बंद चल रहे स्कूलों को आखिरकार हिमाचल सरकार ने खोलने का फैसला कर लिया है। शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्कूल खोलने को लेकर हरी झंडी दिखा दी गई है। अभी नौवीं से 12वीं तक ऑफनाइन कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया गया है।

हालांकि नौवीं से 12वीं तक की कक्षाओं भी एकसाथ नहीं लगेंगी। चारों कक्षाओं के लिए दिन विभाजित किए गए हैं। सप्ताह में तीन दिन तक 10वीं और 12वीं की कक्षाएं, जबकि तीन दिन नौवीं और 11वीं की कक्षाएं लगाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में अहम फैसले लिए गए। प्रदेश में 27 सितंबर से विद्यार्थियों के लिए दोबारा स्कूल खोले जाएंगे। सप्ताह के पहले तीन दिन 10वीं और 12वीं के विद्यार्थी बुलाए जाएंगे शेष 3 दिनों में नवीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं लगेंगे। जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों को अपने गृह जिलों में तबादले करवाने के लिए अब पांच साल का ही इंतजार करना होगा।