90 दिनों के अंदर हो पुलिस भर्ती पेपर लीक होने की जांच: सुक्खू

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस चुनाव समित के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की जांच 90 दिन के अंदर पूरी करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ‘बेचारे मुख्यमंत्री’ करार देते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों से लेकर पुलिस कर्मचारियों की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।

सुक्खू ने कहा कि अब तक की जांच से कांग्रेस पार्टी असंतुष्ट है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को तीन महीने के अंदर दूध का दूध और पानी का पानी करने के बाद सच जनता के सामने रखना चाहिए।

हमीरपुर पहुंचे सुक्खू ने कहा कि यहां लोगों का जोश देखकर लगता है कि सरकार ने हमीरपुर की अनदेखी है और जनता इसका जवाब देने के लिए तैयार है।

डॉ. हंस राज ने छात्र को मारा थप्पड़, छात्र-छात्राओं से अभद्रता से की बात

चंबा।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. हंस राज एक बार फिर विवाद में फंस गए हैं। चंबा के चुराह विधानसभा क्षेत्र के रैला के स्कूल की एक क्लास में जाकर उन्होंने छात्र-छात्राओं से बात की, जिसका वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में वह एक छात्र को थप्पड़ मारते और छात्र-छात्राओं से तू-तड़ाक वाली भाषा में बात करने दिख रहे हैं।

वायरल वीडियो में दिखता है कि जब हंस राज छात्रों से बात कर रहे हैं, तभी एक छात्र मुस्कुराने लगता है। इस पर आपत्ति जताते हुए हंस राज ने इस छात्र के सिर पर थप्पड़ मार दिया। फिर कहते हैं कि ‘क्या यहां मदारी का खेल चला हुआ है?’


इसी बीच अचानक वह पूछते हैं कि मोबाइल कौन लाया है। फिर वह एक छात्रा को खड़ी करके उससे मोबाइल दिखाने को कहते हैं। फिर वह दूसरी लड़की से पूछते हैं कि वह मोबाइल क्यों लाई है। छात्रा बताती है कि मोबाइल खराब हो गया था तो वह उसे बनवाने (रिपेयर करवाने) लाई है। इस पर हंस राज कहते हैं- तो तूने काहे को बनवाना, अपने बाप को बोल, अपने ब्रदर को बोल।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि छात्र पर मामूली बात पर हाथ उठाना और फिर छात्र-छात्राओं से अभद्रता से बात करना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर कार्रवाई करने की भी मांग हो रही है।

गौरतलब है कि यह वीडियो उस समय सामने आया है जब आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में यह घटना भारतीय जनता पार्टी की दिक्कतें बढ़ा सकती है।

डीसी और एसपी से माफी मंगवाने पर तुले विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज

शिमला के कुपवी में मिला बछड़े का सिर, पुलिस ने जारी किया बयान

शिमला।। शिमला के कुपवी में बछड़े का सिर मिलने की खबर सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक युवक ने कुपवी के छाड़ियार में जंगल में गाय का कटा हुआ सिर मिलने मिलने के बारे में बताया था। पुलिस का कहना है कि इस सूचना पर थाना कुपवी की पुलिस ने रौत को ही मौके का मुआयना कर लिया था।

पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर जानकारी देते हुए कहा है कि आज गुरुवार को एसपी शिमला ने FSL टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। वहां पर गाय के एक छोटे बच्चे का सिर पाया गया है और इससे थोड़ी दूरी पर उसका कंकाल, खाल सहमित मिला है। वहीं कुछ दूरी पर अलग-अलग जगहों में हड्डियां मिली हैं और घसीटने के साक्ष्य पाए हैं।

पुलिस के इस बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि संभवत: किसी ने मरे हुए बछड़े या बछिया के शव को दफनाने के बजाय यूं ही खुले में छोड़ दिया है। हालांकि, विस्तार से इस संबंध में कोई जानकारी पुलिस की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इलाके में स्थिति शांतिपूर्ण है।

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जांच और कार्रवाई तो ठीक है मगर पेपर लीक होते ही क्यों हैं?

कुमार अनुग्रह।। हिमाचल पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। पेपर लीक होने की सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज कर एसआईटी गठित करने की जानकारी भी खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 6 मई को सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी थी। अब सीबीआई को मामला सौंपने की जानकारी भी खुद मुख्यमंत्री ने ही एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 17 मई को दी।

इन 11 दिनों में हिमाचल प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने करीब 73 आरोपियों को धर दबोचा। इनमें से 10 अन्य राज्यों के थे। मामले का विस्तार हुआ तो सीएम ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर डाली। जानकारों का मानना है कि पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले को सीबीआई को सौंपना मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का मास्टर स्ट्रोक है। इसकी दो वजहें हैं- एक तो यह कि चुनावी साल में जयराम ठाकुर चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए ताकि राज्य सरकार पर किसी तरह की जांच न आए। दूसरी यह कि अब कांग्रेस के हाथ से एक मुद्दा छिन गया है।

लेकिन इस पूरे मामले में राजनीतिक पहलू से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है- युवाओं की उम्मीदें और उनका विश्वास। सवाल यह है कि विभिन्न भर्तियां लटकने और कुछ के पेपर लीक होने के बाद कहीं युवा नाउम्मीद तो नहीं हो गए हैं? कहीं सरकार और व्यवस्था पर से उनका भरोसा कम तो नहीं हो गया है?

पुलिस और एसआईटी का अच्छा काम
यदि पहली बार हिमाचल में इतने बड़े स्तर पर किसी भर्ती लीक में इतनी गिरफ्तारियां हुई हैं तो पुलिस की तारीफ करनी होगी कि उसने अपने विभाग के मामले को दबाया नहीं। मुख्यमंत्री को इस संबंध में तुरंत जानकारी दी और सरकार ने तुरंत भर्ती को रद्द करने का फैसला किया। इसके बाद तुरंत उन्होंने एफआईआर के आदेश देकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बताया कि उन्होंने लिखित परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। इस तरह जयराम ठाकुर इस मामले में पारदर्शिता अपनाने के लिहाज से शुरू में फ्रंट फुट पर रहे।

चुनावी वर्ष होने के बावजूद इस तरह का फैसला लेना एक बड़ा कदम था। वह भी तब, जब पुलिस की आंतरिक जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं थी। यह देखा गया है कि सरकारें तब किसी भर्ती की जांच करती हैं, जब कोर्ट का आदेश हो या बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हों। लेकिन यहां सरकार ने खुद आगे बढ़कर लिखित परीक्षा दोबारा करवाने का फैसला किया।

सीबीआई जांच का फैसला एक दूसरी वजह से भी मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है क्योंकि इससे कांग्रेस के हाथ से सरकार को घेरने का एक मुद्दा छिन गया है। क्योंकि भर्तियों के पेपर तो कांग्रेस शासित राजस्थान में भी लीक हुए हैं। संयोग ही है कि वहां भी इस समय पुलिस भर्ती पेपर लीक प्रकरण चल रहा है। वहां कांग्रेस पूरी तरह से बैकफुट पर है। जबकि हिमाचल में जयराम सरकार ने जिस एसआईटी का गठन किया था, उसने तुरंत छह दर्जन संदिग्धों से पूछताछ की और जब मामले के तार अन्य राज्यों से जुड़े तो सीबीआई को जांच सौंप दी क्योंकि केंद्रीय एजेंसी होने के कारण वह अंतरराज्यीय जांच अभियान सहजता से चला सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर राज्य पुलिस निष्पक्षता से जांच करती, तब भी विपक्ष यह आरोप लगाता कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई है। खास बात यह है कि सीएम ने सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला तब लिया, जब कहीं से भी बड़ा दबाव नहीं था। ऐसे में अब विपक्ष के पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है। रही बात पेपर फिर से करवाने की तो पेपर भी इसी महीने के अंत तक करवाने की बात कही गई है। हां, इस बार जरूर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। इस बार की लिखित परीक्षा में कहीं पर भी किसी भी तरह की चूक हुई तो पुलिस विभाग ही नहीं, प्रदेश सरकार को भी संभलना मुश्किल हो जाएगा।

मामलों को दबाने की कोशिशें
पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार में चुनावी वर्ष में कई घटनाक्रम हुए थे लेकिन मामले को हैंडल करने के तरीक बिलकुल अलग रहे। पिछली सरकार में पुलिस चुनाव के कुछ महीने पहले ही एक तथाकथित साधु के यहां रेड डालती है। बाबा के यहां के तेंदुए की खाल, वायरलेस सेट जाने क्या-क्या बरामद होता है, लेकिन सरकार के मुखिया पुलिस को शाबाशी देने के बजाय अगले ही दिन पूरे थाने के कर्मचारियों की ट्रांसफर कर देते हैं। जब यह साधु स्थानीय लोगों से मारपीट करता है और घायल होता है तो मुख्यमंत्री स्वयं इस साधु से मिलने अस्पताल जाते हैं।

यही नहीं, वनरक्षक होशियार सिंह मामले को भी हाई कोर्ट के दखल के बाद सीबीआई को सौंपा गया था। इसी तरह गुड़िया बलात्कार एवं हत्याकांड के दौरान कांग्रेस सरकार के फैसले और उस समय के पुलिस अधिकारियों की कारगुजारियां अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। उस समय के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर मामले को दबाने के लिए गलत व्यक्ति को हिरासत में मारने और अपने महकमे के कर्मचारियों पर दबाव डालने तक के मामले चले हैं। कांग्रेस सरकार ने अधिकारियों को पूरा संरक्षण दिया मगर लीपापोती सामने आने पर जांच सीबीआई के हाथ में चली गई थी।

युवा भरोसा करें भी तो कैसे?
हिमाचल प्रदेश पहले भी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में धांधली के आरोपों से जूझता रहा है। 2006 के पीएमटी परीक्षा पेपर लीक मामले ने पूरे देश में हिमाचल की किरकिरी करवाई थी। तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने पहले मामले में कोई भी गड़बड़ होने से इनकार कर दिया था मगर बाद में हाई कोर्ट के दखल के बाद एसआईटी बनाई गई थी। जांच में पता चला था कि तत्कालीन सरकार में एक मंत्री के रिश्तेदार भी इसमें शामिल थे। जब दोबारा टेस्ट करवाया गया तो पहले टॉपर रहे कई अभ्यर्थी फेल हो गए। इसके अलावा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में इंटरव्यू के नाम पर चहेतों को भर्तियां करवाने के आरोप भी पूर्व सरकार पर लगे थे। वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया है।

अब पुलिस भर्ती प्रकरण को लेकर एक सवाल का जवाब तलाशना जरूरी है कि जब परीक्षा पुलिस विभाग खुद आयोजित कर रहा था तो पेपर सेट होने से लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचाने तक की प्रक्रिया में यह लीक आखिर कहां से हुआ। इसकी जांच सीबीआई कर ही लेगी और अगर विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल हुआ तो उसका भी पता देर-सवेर चल ही जाएगा। लेकिन पेपर लीक हो ही क्यों? इतना बड़ा देश, हर लिहाज से सक्षम, फिर भी हर साल असंख्य परीक्षाओं के पेपर लीक होते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि देश में एक परीक्षा माफिया उभर आया है जिसे किसी बात का खौफ नहीं।

हर कोई जानता है कि सभी को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है। फिर भी युवा मेहनत करते हैं और हजारों अभ्यर्थियों से स्पर्धा करते हैं। उनकी मेहनत पर पानी नहीं फिरना चाहिए। जरूरत है कि फूल-प्रूफ सिस्टम बनाने की ताकि परीक्षाओं और भर्तियों में किसी भी तरह का लूप-होल न रहे। इससे इस तरह का माफिया खुद ब खुद खत्म हो जाएगा। वरना ऐसा न हो कि युवाओं का सरकारों और सरकारी परीक्षाओं पर ही भरोसा खत्म हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो यह बेहद खराब स्थिति होगी। किसी पार्टी की सरकार के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने CBI को सौंपी पुलिस भर्ती पेपर लीक की जांच

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। मंगलवार दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी और कहा कि एसआईटी ने इस संबंध में जांच करके पाया है कि मामले के तार अन्य प्रदेशों से जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है और उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस के सहयोग से वाराणसी से एक अभियुक्त को पकड़ा गया है जो इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड हो सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एसआईटी की अब तक की जांच अच्छी रही है लेकिन अब तक 10 लोग प्रदेश के बाहर से पकड़े गए हैं। इसलिए सरकार ने तय किया कि इसकी जांच सीबीआई को करनी चाहिए ताकि व्यापक स्तर पर जांच की जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जैसे कि पुलिस ने बताया था कि भर्ती को लेकर कुछ गड़बड़ हो सकती है तो हमने तुरंत मामला दर्ज किया था और भर्ती को तुरंत रद्द किया था। इसके बाद एसआईटी बनाई थी जिसने दिन-रात मेहनत करके काफी कुछ सामने रख दिया है। अब चूंकि सीबीआई को मामला सौंपने का फैसला किया है और हैंडओवर की प्रक्रिया में समय लग सकता है, तब तक एसआईटी अपनी जांच जारी रखेगी।”

हिमाचल का सही नाम क्यों नहीं लिख रही है आम आदमी पार्टी?

शिमला।। एक वॉल राइटिंग में हिमाचल प्रदेश का नाम हिमचल लिखने के बाद अब आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश के लिए बनाए अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर हिमाचल का नाम हिमचाल लिख दिया है। दिल्ली के सीएम और पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की तस्वीर के साथ बनाए गए इस बैनर पर हिमाचल को हिमचाल लिखा हुआ है।

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वॉल राइटिंग की तस्वीर वायरल हुआ थी, जिसमें हिमाचल को हिमचल लिखा हुआ था। यह एक सामान्य चूक हो सकती है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब हिमाचल को हिमचाल लिखना आम आदमी पार्टी की सोची-समझी चाल भी हो सकती है।

वॉल राइटिंग की यह तस्वीर वायरल हो गई थी।

मिस्ड कॉल वाला नंबर
यह माना जा रहा है कि मुफ्त में पब्लिसिटी के लिए AAP ने यह तरीका अपनाया है। जिस तरह पिछली बार हिमाचल को हिमचल लिखने पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों के ही कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधकर उनकी वॉल राइटिंग को वायरल कर दिया था, संभवत: उसके बाद से AAP के रणनीतिकारों ने फिर यह गलती की है ताकि विरोधी पार्टियों के कार्यकर्ता उनके ऊपर निशाना साधने के चक्कर में उस नंबर का भी प्रचार कर दें, जो इस बैनर में लिखा हुआ है। यह नंबर मिस्ड कॉल देकर आम आदमी पार्टी से जुड़ने के लिए दिया गया है।

AAP हिमाचल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर लगाए गए बैनर में हिमाचल को लिखा है ‘हिमचाल’

हालांकि, लोग इस बात के लिए भी AAP की खिल्ली उड़ा रहे हैं कि जिस दिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने हिमाचल आकर दिल्ली के शिक्षा मॉडल का प्रचार किया और हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधा, उसी दिन डाले गए बैनर में खुद एक राज्य का नाम गलत लिख दिया। इससे ऐसा संदेश भी जा रहा है कि आम आदमी पार्टी इतनी भी गंभीर नहीं है कि जिस राज्य में पैर पसारने की कोशिश कर रही है, उस राज्य का नाम भी सही से लिख सके।

मनीष सिसोदिया बोले- हिमाचल में शिक्षा का बंटाधार हो गया है

शिमला।। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शिमला में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की सरकारों ने शिक्षा का बंटाधार कर दिया है। उन्होंने कहा, “ज्यादा पीछे नहीं जाना चाहता, पिछले पांच साल में ही बीजेपी ने सरकारी स्कूलों को बर्बाद कर दिया है।”

सिसोदिया ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार सरकारी स्कूलों की दशा खराब कर निजी स्कूलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की फीस, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और सुविधाओं की कमी और इस संबंध में सरकार की कथित उदासीनता पर भी सवाल खड़े किए।

शिमला के एक निजी होटल में हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था पर आयोजित कार्यक्रम में पहले कुछ स्कूल संचालकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों ने अपनी बात रखी और प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर असंतोष जताया। इसके बाद सिसोदिया ने ‘अरविंद केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ की चर्चा करते हुए बताया कि कैसे उनकी सरकार ने दिल्ली में स्कूलों की दशा और दिशा बदल दी।

सिसोदिया ने कहा कि प्रदेश सरकार कहती है कि उसके पास पैसा नहीं है। अगर ऐसा है तो कैसे एक मंत्री के पास 500 बीघा जमीन है और कैसे एक मंत्री जो पहले दो कमरों के कच्चे मकान में रहते थे, उनके बेटे की रिसेप्शन फाइव स्टार होटलों में रही। यह पैसा स्कूलों पर लग सकता था।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर हिमाचल की जनता आम आदमी पार्टी को मौका देती है तो पांच साल में हिमाचल के हर स्कूल की काया पलट दी जाएगी।

किन्नौर: 13 वर्षीय लड़की की हत्या, बेड बॉक्स में मिला शव

शिमला।। किन्नौर जिले के भावानगर में एक शख्स पर 13 वर्ष की लड़की की हत्या का आरोप लगा है। नेपाली मूल की इस किशोरी का शव एक बंद कमरे के बेड बॉक्स में मिला है। पुलिस ने मृतक किशोरी के परिजनों से शिकायत मिलने के बाद सिक्किम के एक व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है मामला
किशोरी की मां ने 14 मई की रात को भावानगर पुलिस स्टेशन पहुंचकर बेटी के लापता होने की सूचना देते हुए पड़ोस में रहने वाले सिक्किम के एक व्यापारी पर शक जाहिर किया था। यह व्यापारी भावानगर स्थित लुतुक्सा में ही किराये पर रह रहा था। पुलिस ने पाया कि आरोपी के किराये के मकान पर ताला लगा हुआ था। ताला तोड़ने पर देखा कि अंदर बेड बॉक्स में किशोरी का शव था।

पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए युवक के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया और विशेष टीम का गठन किया। फिर दिल्ली पुलिस की मदद से इसे गिरफ्तार कर लिया गया। जब पूछताछ की गई तो उसने हत्या करने की बात कबूल कर ली।

नहीं रहे भारत में ‘दूरसंचार क्रांति के मसीहा’ कहलाने वाले पंडित सुखराम

मंडी।। पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने पांच बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा चुनाव जीता था। मंडी नगर परिषद में बतौर सचिव सेवाएं देने के बाद पंडित सुखराम ने मंडी से ही अपना सियासी सफर शुरू किया था।पंडित सुखराम 1963 से 1984 तक मंडी विधानसभा सीट से विधायक रहे, 1984 में मंडी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और राजीव गांधी की सरकार में राज्य मंत्री बने। 1996 में फिर मंडी लोकसभा सीट से जीते और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री बने।

पंडित सुखराम को भारत में टेलिफोन क्रांति लाने का श्रेय भी दिया जाता है मगर 1996 में लगे करप्शन के आरोपों ने उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा दाग लगा दिया था। बावजूद इसके वह मंडी जिले, खासकर मंडी सदर विधानसभा और आसपास के कुछ इलाकों में प्रासंगिक बने रहे।

हिमाचल कांग्रेस में वीरभद्र सिंह और सुखराम के बीच प्रतिद्वंद्विता का भी एक दौर रहा

दूरसंचार घोटाला और सज़ा
साल 1996 में जब देश में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार थी, तब  दूरसंचार मंत्री सुखराम के घर पर सीबीआई के छापे पड़े। उनके दिल्ली और मंडी के घरों से नोटों से भरे सूटकेस और बैग मिले जिनमें चार करोड़ रुपये से ज्यादा की बरामदगी हुई। इन पैसों का वैध स्रोत न बता पाने पर वह फंस गए। उनका आरोप था कि उन्हें पार्टी की आंतरिक राजनीति का शिकार होना पड़ा है। गिरफ्तारी के बाद सुखराम को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और कांग्रेस ने भी उन्हें निकाल दिया।

2002 में उन्हें तीन साल की सजा हुई। मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी को सामान सप्लाई करने का ठेका दिया जिससे सरकार को 1.66 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया और बदले में तीन लाख रुपये की रिश्वत ली। एक कंपनी को उन्होंने दूरसंचार विभाग को 30 करोड़ रुपये के केबल बेचने के लिए ठेका दिया था और इसके एवज में पैसा लिया।

2011 में उन्हें दोषी पाया गया और पांच साल की सजा दी गई। इससे पहले सुखराम को आय से अधिक संपत्ति के मामले में 2009 में दोषी ठहराया गया। उन पर 4.25 करोड़ रुपये अवैध तरीके से कमाने के आरोप लगे थे। सुखराम को सजा दिलाने में कांग्रेस नेताओं का ही बड़ा रोल था। पीवी नरसिम्हा राव और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने CBI को बयान दिया था कि बरामद किया गया पैसा सुखराम का ही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम

कभी इधर, कभी उधर
इससे पहले, पार्टी से निकालने जाने के बाद पंडित सुखराम ने 1997 में हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई और 1998 के विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर भाजपा से गठबंधन कर सरकार में शामिल भी हुए। सुखराम सहित पांच विधायक मंत्री बने। बेटे अनिल शर्मा 1998 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 2003 में सुखराम मंडी से फिर जीते और इस बार कांग्रेस से हाथ मिलाया। 2017 में सुखराम ने बेटे के साथ भाजपा जॉइन की लेकिन दो साल में ही कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की। पोते आश्रय को कांग्रेस के टिकट से मंडी लोकसभा चुनाव लड़वाया जिसमें पाते की जमानत जब्त हो गई। अभी सुखराम के बेटे अनिल शर्मा मंडी से भाजपा विधायक हैं लेकिन पार्टी से दूरियां बनी हुई हैं।

 मोबाइल लाने की प्रेरणा
पंडित सुखराम 1993 से 1996 तक दूरसंचार मंत्री थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे भारत में मोबाइल टेक्नोलॉजी लाई गई। 31 जुलाई 1995 को पहली बार भारत में मोबाइल कॉल की गई थी। मोबाइल से यह बातचीत केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बीच हुई थी। फोन नोकिया का था। उन्होंने बताया था कि एक बार वह दूरसंचार मंत्री की हैसियत से जापान गए थे। उन्होंने देखा कि ड्राइवर ने अपनी जेब में मोबाइल फोन रखा है। यह देखकर उन्हें लगा कि अगर जापान के पास यह तकनीक हो सकती है तो भारत में क्यों नहीं। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी इस बात का क्रेडिट देते थे, जो भारत में कंप्यूटर और टेलिफोन को घर-घर पहुंचाना चाहते थे।

हिमाचल जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेशों के लोग आज भी पंडित सुखराम को याद करते हैं। अगर दूर कहीं एक घर पर भी फोन लगाना होता था तो उसके लिए मीलों तक खंबे लगाकर फोन के तार लगाए जाते थे। जब कांग्रेस से निकाले जाने के बाद पंडित सुखराम ने हिमाचल में हिमाचल विकास कांग्रेस नाम से पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था, तब उन्होंने टेलिफोन चुनाव चिह्न मांगा था और उन्हें यह मिला भी था। चुनाव प्रचार के लिए हिविकां ने गानों की एक कैसेट भी लॉन्च की थी जिसमें कुछ गाने थे। एक गाने के बोल थे- बहुत हो गई नारेबाज़ी काम होना चाहिए, अबकी बार मुख्यमंत्री सुखराम होना चाहिए।

मुकेश अग्निहोत्री ने किया भिंडरावाले की फोटो वाली टीशर्ट पहनने का बचाव

ऊना।। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने खालिस्तान के नक्शे पर भिंडरावाले की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनने का बचाव करते हुए कहा है कि जिस लड़के ने टीशर्ट पहनी है, वह साधारण परिवार का है और अगर सरकार को किसी चीज पर आपत्ति है तो उसे इस पर रोक लगानी चाहिए। दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने मुकेश अग्निहोत्री के एक कार्यक्रम की तस्वीर पर आपत्ति उठाई थी जिसमें मुकेश के साथ एक युवक खड़ा था, जिसने भिंडरावाले की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनी हुई थी। मुकेश अग्निहोत्री ने इस तस्वीर को तीन अप्रैल 2022 को अपने फेसबुक पर पोस्ट किया था।

राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा इस संबंध में सवाल उठाने के बाद मुकेश अग्निहोत्री ने फेसबुक पर पौने आठ मिनट लंबा एक संदेश पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहीं पर भी इस टीशर्ट को पहनने की निंदा नहीं की है। उन्होंने यह आरोप जरूर लगाए कि इस तस्वीर पर सवाल उठाकर भाजपा की सांसद और मुख्यमंत्री ने ऊना जिले के लोगों को आतंकवादी कहा है और गुरु नानक के वंशजों की धरती का अपमान किया है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस टूर्नामेंट में वह गए थे, वह नशे के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि जिस लड़के ने टीशर्ट पहनी है, वह साधाऱण परिवार का है, कोई आतंकवादी नहीं। अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि अगर इस तरह की चीजों से सरकार को आपत्ति है तो वह सत्ता में है, इन्हें बैन करे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कहीं गलत हो रहा है तो सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने धर्मशाला में विधानसभा परिसर में झंडे लगाए जाने की घटना को लेकर भी सरकार को घेरा।

एक ओर जहां मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार को ऐसी तस्वीरें आदि बैन करने के लिए चुनौती दी है, मगर दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ऐसे सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने इतने लंबे संदेश में एक बार भी खालिस्तान के नक्शे पर भिंडरावाले की तस्वीर वाली टीशर्ट पहने जाने की आलोचना क्यों नहीं की। उल्टा इस पूरे प्रकरण को सिख धर्म और ऊना जिले से लोगों से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में मर्यादाएं लांघते हुए भाजपा सांसद इंदु गोस्वामी को भी निशाने पर लिया है।

इस ट्वीट में उन्होंने पिछले चुनावों में अपने प्रतिद्वंदी रहे भाजपा नेता प्रो. राम कुमार की एक तस्वीर लगाई है। इसमें भी एक युवक भिंडरावाले की टीशर्ट पहने खड़ा है।