अब बंबर ठाकुर ने रामलाल ठाकुर पर लगाया करोड़ों के करप्शन का आरोप

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में घमासान मचा हुआ है। पहले प्रदेश कांग्रेस महासचिव रामलाल ठाकुर ने बिलासपुर सदक के एमएलए बंबर ठाकुर पर 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। अब बंबर ने पलटवार करते हुए रामलाल ठाकुर और उनके बेटे पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप जड़ा है। उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाते हुए रामलाल ठाकुर को चुनौती दी कि सीबीआई और कोर्ट को लिखित शिकायत दें और उसपर मैं भी दस्तखत करूंगा। बंबर ने रामलाल के बेटे पर आरोप लगाया कि कीरतपुर से धराड़सानी तक का फोरलेन निर्माण का जो ठेका लिया है, उसके लिए रेत-बजरी और पत्थर कहां से आ रहे हैं।

बंबर ठाकुर ने कहा, ‘खाला खड्ड से रेत-बजरी रामलाल के लोग निकाल रहे थे और नाम मेरा लिया जा रहा था। मामला तब सामने आया जब एसएचओ बरमाणा ने कार्रवाई की और ट्रकों को पकड़ा पकड़े गए सभी लोग रामलाल ठाकुर और रणधीर शर्मा के थे। रही बात खैर कटान मामले की तो हाईकोर्ट के जज से जांच करने की मांग मैंने खुद की थी। राम लाल ठाकुर ने तो सीमेंट कंपनी में अपने बेटे की 200 बोगियां लगा गरीब लोगों के रोजगार का हक मारा है। उनमें नियमों को ताक पर रखकर ओवरलोडिंग की जा रही है। नौ टन की जगह 40 टन लाया जा रहा है, उसका टैक्स कौन भरेगा?’

बंबर ने कहा, ‘श्री नयना देवी के पांच ब्लॉकों में खैर के हजारों पेड़ काटे गए। रामलाल ठाकुर ने इसकी जांच की मांग क्यों नहीं की?” बंबर ने कहा कि रामलाल ठाकुर, सुरेश चंदेल और रणधीर शर्मा की मिलीभगत है। राम लाल और सुरेश चंदेल ने बस अड्डे के पास जमीन पर बहुमंजिला भवन तैयार किया है जिससे 10 लाख किराया आता है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा के सुरेश चंदेल के साथ मिलकर रामलाल मुझे बदनाम करने का षड्यंत्र रचते रहे हैं। अब उन्होंने आरोप लगाकर साफ कर दिया है कि षडयंत्रकारी कौन है।

रामलाल ने कहा, ‘मैंने एमएलए बनने से पहले एक बस खरीदी, कारोबार बढ़ता गया और पांच बसें हो गईं। इसके बाद हैंडपंप लगाने वाली मशीनें खरीदी और जेसीबी भी खरीदी। विधायक बनने से पहले मैंने करोड़ों कमाए और लोगों में बांट भी दिए। मगर रामलाल ठाकुर बताएं कि वह एमएलए बनने से पहले क्या थे और उनके पास करोड़ों-अरबों की जायदाद कहां से आई?’ इसके जवाब में रामलाल ठाकुर ने कहा, ‘मेरे बेटे के कारोबार की बीजेपी सात बार जांच करवा चुकी है। मेरा बेटा कारोबारी है और किसी संवैधानिक पद पर नहीं है। बेटे की कंपनी पंजीकृत है। सभी बोगियां फाइनांस कंपनी से लोन लेकर खरीदी गई हैं। बस अड्डे के पास जो दुकान है, सोसायटी की है। विधायक अपनी खाल बचाने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।’

गौरतलब है कि कांग्रेस के इन नेताओं का एक-दूसरे की पोल खोलना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। पहले ही मुख्यमंत्री के करप्शन के मामले में बैकफुट पर आई कांग्रेस अब और नुकसान झेलती दिख रही है। रामलाल ठाकुर ने बंबर पर 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। यही नहीं, रामलाल ने आरोप लगाया है कि बंबर ठाकुर के पंजाब के तस्करों से रिश्ते है। उन्होंने बंबर पर फोरलेन हाइवे के एक ऑफिसर से 1 लाख रुपये बतौर कमिशन लेने का भी आरोप जड़ा। उन्होंने कहा कि बंबर खैर के पेड़ो के कटान से लेकर अवैध खनन में जुटे हैं और मेरे पास पूरे सबूत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की है कि इन आरोपों की जांच सीबीआई से करवाई जाए।

पढ़ें: बंबर ठाकुर पर रामलाल ठाकुर ने लगाए गंभीर आरोप

कंडाघाट थाने के 18 पुलिकर्मियों का तबादला: बाबा अमरदेव की पहुंच का असर?

सोलन।। सोलन के कंडाघाट के रामलोक के विवादित बाबा अमरदेव ने आखिरकार अपनी राजनीतिक पहुंच का असर दिखा दिया है। एक महिला को तलवार से हमला करके घायल करने वाले इस बाबा की स्थानीय लोगों ने पिटाई कर दी थी। इस बाबा के दरबार कई केंद्रीय मंत्री घुटने टेका करते थे मगर खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीरें सामने आई थीं जिसमें वह बाबा का हालचाल जानने अस्पताल आए थे। सीएम से मुलाकात के 48 घंटों के अंदर ही कंडाघाट पुलिस स्टेशन पर तैनात 18 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया गया है। पूरे इलाके में लोग पुलिसकर्मियों के इस तबादले को बाबा अमरदेव के हिमाचल सरकार के एक मंत्री से रिश्ते और मुख्यमंत्री से मुलाकात के साथ जोड़ रहे हैं। एसपी सोलन ने कंडाघाट के एसएचओ दलीप सिंह समेत 18 पुलिस कर्मियों का तबादला किया है। एसआई संदीप कुमार को एसएचओ कंडाघाट लगाया गया है। चूंकि, रविवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अस्पताल जाकर बाबा अमरदेव से मुलाकात की थी। ऐसे में इस कार्रवाई को उस मुलाकात के असर के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि यह वही बाबा है जिसके ऊपर सरकारी जमीन पर कब्जा करने, जंगली जानवरों के अंगों और अवशेषों की तस्करी का आरोप है। पुलिस और सीआईडी की टीम ने यहां छापा मारकर तेंदुए की चार खालें और बहुत सी तलवारें बरामद की थीं। इसके बाद ग्रामीणों का आरोप है कि इस बाबा ने महिला पर तलवार से हमला कर दिया जिसमें वह बुरी तरह जख्मी हो गई। इसके बाद गुस्साए लोगों ने बाबा पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है और मौजूदा सरकार के कई मंत्रियों की शह मिली हुई है। लोगों का कहना है कि अब ये आरोप सही साबित होते नजर आ रहे है।

ठाकुर कौल सिंह (बाएं) और शांडिल के साथ बाबा अमरदेव

चर्चा है कि बाबा अमरदेव ने कंडाघाट पुलिस की शिकायत सीएम से की और एक मंत्री ने भी मुख्यमंत्री पर दबाव डाला। इसके बाद आनन-नन में कंडाघाट पुलिस के हरेक कर्मचारी का तबादला कर दिया गया है। इस कदम से पुलिसकर्मियों मे भी नाराजगी देखे को मिल रही है। ‘एमबीएम न्यूज नेटवर्क’ के पास आई ट्रांसफर लिस्ट को देखें तो सोलन में 63 पुलिसकर्मियों के तबादले हुए है। यह भी कहा जा रहा है कि महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं बख्शा गया है।

कौन है बाबा अमरदेव
स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर स्थित बाबा के दरबार में कई बड़े मंत्री और अधिकारी हाजिरी लगाने आते रहते हैं, जिनमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री व सोलन के विधायक डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल भी हैं। बाबा अमरदेव की संदिग्ध गतिविधियों पर ग्रामीणों की नजर काफी दिनों से है। कई बार पुलिस में इसके खिलाफ सूचना भी दी जाती रही थी। इस साल अप्रैल में पुलिस और सीआईडी की टीम ने सटीक जानकारी मिलने के बाद मंदिर में संयुक्त रूप से छापेमारी की।

पुलिस जब मंदिर के भीतर घुसी तब बाबा तेंदुए की खाल पर बैठा हुआ था। जब उनको आसन से उठाया गया तब उस पर और तीन खालें बिछी हुई थीं। इसके बाद मंदिर में से एक और खाल बरामद की गई। गिरफ्तार किए जाने पर बाबा अपने बचाव में इसे भक्तों का दिया हुआ उपहार बता रहा था।

बाबा अमरदेव तेंदुओं की खालों के साथ

सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप, मंत्री की शह
गौरतलब है कि रामलोक मंदिर कुछ ही वक्त पहले बनना शुरू हुआ है, अब तक इसमें लाखों रुपये लगाए जा चुके हैं। मंदिल के लिए सरकारी जमीन कब्जाने का भी आरोप है। यहां पर राम परिवार की विशाल मूर्तियों के अलावा हनुमान जी की साढ़े 10 फुट ऊंची 11 मुखी मूर्ति की स्थापना की गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ ही समय पहले प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं सहकारिता मंत्री ने यहां के मंदिर की 108 सीढ़ियों के लिए अपने बजट से मुहैया कराया था। बाबा इस घटना के बाद फिर अपने आश्रम लौट आया और कुछ ही दिनों बाद महिला पर तलवार से हमला करने की घटना सामने आ गई।

बाबा अमरदेव ने सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी और कोर्ट के आदेश पर सरकार ने सुरक्षा पर भी दी है। स्थानीय लोगों का कहना है बाबा बनावटी बातें करता है और मासूम लोगों को धर्म और आस्था के नाम पर ठग रहा है। ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो बाबा को गलत मानने को तैयार नहीं है।

प्रश्न यह है कि क्या मंदिर, धर्म के नाम पर किसी को भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने, मासूम जानवरों को मारकर उनकी खाल पर विराजने और महिलाओं पर तलवार से हमला करने का लाइसेंस मिल जाता है? क्या ऐसा करने वाले लोग ही धर्म और आस्था के लिए खतरा नहीं हैं? इस मामले में जांच की जरूरत है मगर जब सरकार के मंत्री ही ऐसे तत्वों से करीबी रिश्ते रखेंगे और पुलिसकर्मियों के तबादले होंगे तो किससे उम्मीद रखी जाए।

पढ़ें: नए विवाद में फंसा सोलन का हाई प्रोफाइल बाबा

(एमबीएम न्यूज नेटवर्क से ली गई जानकारी के साथ)

लजीज ही नहीं, सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं ‘आक्खे’ या ‘येलो हिमालयन रास्पबेरी’

प्रतीक बचलस।। हिमाचल प्रदेश प्राचीन काल से ही जड़ी बूटियों से समृद्ध रहा है।  यहां कई जड़ी-बूटियां तथा बड़े ही दुर्लभ प्रकार के फल भी पाए जाते हैं। आज हम सब एक ऐसे ही फल के बारे में जानेंगे। आक्खे (Yellow Himalayan Raspberry) हिमाचल में पाई जाने वाली एक बेरी है। यह मुख्यत: उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, नेपाल,असम तथा कश्मीर में पाए जाते हैं। इसका बोटैनिकल नाम Rubus ellipticus है। इसके पौधे 700 – 2000 मी. तक कि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इसके पौधों में फूल मुख्यत: फरबरी के अंत और मार्च की शुरुआत तक आते हैं। मार्च और अप्रैल से लेकर मई तक इसमें फल लगते रहते हैं जो देखने में लजीज होती हैं। ध्यान रहे, इसकी टहनियां कंटीली होती हैं।

आक्खे सेहत के लिए भी अच्छे हैं। शोध में इसमें कई गुणकारी चीजे जैसे कि विटामिन सी , फ़ास्फ़रोस, कैल्शियम, मैग्नीशियम व आयरन पाए गए हैं। इन सब से हम ये पता लगा सकते है कि ये एक बहुत अच्छा ऐंटीऑक्सिडेंट हो सकता है क्योंकि ऐंटीऑक्सिडेंट मुख्यता विटामिन ए(A),सी (C), ई(E) व क (K) में पाए जाते हैं व इसमे विटामिन सी(C) पाया गया है। ऐंटीऑक्सिडेंट हमारे शरीर मे मौजूद फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है। ये फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर के लिए बहुत हानिकारक होते है। इनसे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा होता है। इनमे से कैंसर मुख्य बीमारी है।य दि हम ऐंटीऑक्सिडेंट्स का पर्याप्त मात्रा में सेवन करते हैं तो हम स्वस्थ रहेंगे। इसके अलावा विटामिन सी ऐंन्टी एजिंग यानी कि बुढ़ापा आने से रोकने में सहायक है। विटामिन सी शरीर की त्वचा को बूढ़ा करने वाले फैक्टर को कम करता है और त्वचा जवान रहती है। इस सब से हमे ये पता चलता है कि ये कितना गुणकारी है।

आक्खे

यदि सरकार का ध्यान इसकी खेती की तरफ जाए तो शायद किसानों को कुछ लाभ हो सकता है।सरकार ने फलों की खेती पर ठीक ध्यान दिया है, उन्होंने 1985 में डॉक्टर वाई .एस .परमार विश्वविद्यालय बागवानी व वानिकी शिक्षा संस्थान की स्थापना की है व वहाँ कई शोध हो रहे हैं जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे है। परंतु इस फल को अनदेखा किया जा रहा है। इसे महज एक घास-फूस और कंटीली झाड़ी समझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदेश सरकार हमेशा से ही फलों उगाने के लिए बागवानों को प्रेरित करती रही है। अभी सरकार सेब की बागवानी या अन्य फलों की बागवानी को प्रोत्साहित कर रही है। ऐसा नहीं है कि सरकार गलत कर रही है। ऐसे प्रयासों की सराहना होनी चाहिए मगर सरकार को आक्खों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। इसपर रिसर्च भी करना चाहिए ताकि पुष्टि हो जाए कि यह फायदेमंद है या नहीं।

आक्खों की खेती का एक फायदा यह भी है कि इसपर ज्यादा खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। इसे कहीं भी लगाया जा सकता है। खाद की भई जरूरत नहीं होती क्योकि कहीं भी उग सकता है। इससे किसानों को फायदा होगा। इनका जूस, शेक और आइसक्रीम बनाकर आर्थिक लाभ लिया जा सकता है।

(लेखक हिमाचल प्रदेश के ऊना से हैं और नैशनल ऐग्री फूड बायोटेक्नॉलजी रिसर्च इंस्टिट्यूट में सेवाएं दे चुके हैं। उनसे prateekdcoolest120@gmail com पर संपर्क किया जा सकता है।)

बंबर ठाकुर पर रामलाल ठाकुर ने लगाया 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप

बिलासपुर।। अक्सर विवादों में रहने वाले बिलासपुर सदर से कांग्रेस के विधायक बंबर ठाकुर पर उन्हीं की पार्टी के प्रदेश महासचिव रामलाल ठाकुर ने 200 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। यही नहीं, रामलाल ने आरोप लगाया है कि बंबर ठाकुर के पंजाब के तस्करों से रिश्ते है। उन्होंने बंबर पर फोरलेन हाइवे के एक ऑफिसर से 1 लाख रुपये बतौर कमिशन लेने का भी आरोप जड़ा। उन्होंने कहा कि बंबर खैर के पेड़ो के कटान से लेकर अवैध खनन में जुटे हैं और मेरे पास पूरे सबूत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की है कि इन आरोपों की जांच सीबीआई से करवाई जाए। बंबर ठाकुर ने इन आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि जांच से मुझे कोई परहेज नहीं है।

रामलाल ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बंबर को घेरते हुए पूछा कि बिलासपुर में तय माइनिंग क्षेत्र न होने के बावजूद फोरलेन के लिए रेत-बजरी और पत्थर कहां से आ रहा है और इसके अनुमति पत्र किसके नाम पर हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बंबर ने सरकार को पिछले 4 साल में 200 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। उन्होंने कहा कि फोरलेन के कामों में किसके टिप्पर लगे हैं, यह भी चेक होना चाहिए। राम लाल ठाकुर ने कहा, ‘इससे पहले कि एक व्यक्ति की वजह से पार्टी को नुकसान हो, मुख्यमंत्री को कड़े कदम उठाने चाहिए।’ नीचे देखें एक पेज द्वारा शेयर किया गया वीडियो:

रामलाल ठाकुर ने विधायक पर दादागिरी के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई आवाज उठाए तो उसे धमकाया जाता है या फिर उसका तबादला कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ‘महिला RTO को धमकाने और DFO से मारपीट का मामला सबको पता है। पंजाब के तीन-चार लोग खैर की तस्करी में लगे हैं। इस बारे में पंजाब के एक विधायक ने शिकायत भी की थी कि ये लोग बीजेपी से जुड़े हैं मगर उनका बिलासपुर सदर के विधायक के साथ है।’ रामलाल ठाकुर ने कहा कि सभी विभागों के अधिकारी डर के मारे कुछ नहीं बोल रहे हैं और सबसे खराब हालत पुलिस की है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बंबर ठाकुर के बेटे पर मारपीट के आरोप लगे थे। इसके बाद लोगों ने आंदोलन भी किया था मगर अब वह मामला गोल हो गया है। इस बार उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बंबर पर आरोप लगाए हैं जो काफी संगीन हैं। जानें, अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक रामलाल ठाकुर ने बंबर पर कौन से 10 मुख्य आरोप लगाए हैं:

  1. बंबर ठाकुर ने 200 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।
  2. बंबर के रिश्ते पंजाब के तस्करों से हैं।
  3.  फोरलेन हाइवे के एक अफसर से 1 लाख रुपये कमिशन लिया।
  4. खैर के पेड़ों की तस्करी करने वालों से हैं विधायक के रिश्ते।
  5. अवैध खनन में जुटे हैं विधायक, मेरे पास इसके सबूत भी हैं।
  6. 4 साल में सरकार को लगाया 200 करोड़ का चूना।
  7. फोरलेन के कामों में किसके टिप्पर लगे हैं, जांच हो।
  8. दादागिरी करते हैं विधायक, धमकाया जाता है और तबादले किए जाते हैं।
  9. महिला RTO को धमकाया गया, DFO से मारपीट की गई।
  10. सभी विभाग दहशत में, पुलिस की हालत भी पतली है।

पढ़ें: बंबर ठाकुर के बेटे पर मारपीट के आरोप के बाद तनाव

आय से अधिक संपत्ति केस में वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह बतौर आरोपी समन

नई दिल्ली।। आय से अधिक संपत्ति के मामले में स्पेशल कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को आरोपी के तौर पर समन भेजा है। सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए अदालत ने वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह समेत 9 आरोपियों को 22 मई को हाजिर होने के लिए कहा है।

इस केस में अन्य आरोपियों के नाम चुन्नी लाल चौहान, जोगिंदर सिंह घाल्टा, प्रेम राज, वकामुल्ला चंद्रशेखर, लवण कुमार रोच और राम प्रकाश भाटिया हैं। सीबीआई की 500 पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि 82 साल के वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय के ज्ञात स्रोतों  से इतर अवैध ढंग से 10 करोड़ रुपये जुटाए।

इस मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र और 8 अन्य के खिलाफ 225 गवाहों और 442 के आधार पर दंडनीय अपराधों की धाराएं लगी हैं। रिपोर्ट में एलआईसी अजेंट आनंद चौहान का भी नाम है जो अभी न्यायिक हिरासत में है। चौहान को ईडी ने पिछले साल 9 जुलाई को इस मामले से संबंधित मनी लॉन्डरिंग के अन्य मामले में गिरफ्तार किया था।

कोर्ट से मिले इस झटके के बाद अब वीरभद्र सिंह और हिमाचल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं क्योंकि अब तक मुख्यमंत्री और उनका परिवार इस केस को जेटली और अनुराग की राजनीतिक साजिश बता रहा था। मगर अब कोर्ट द्वारा आरोपी के रूप में बुलाए जाने के बाद बीजेपी को हमलावर होने का मौका मिल गया है।

150 साल पहले ऐसी नजर आती थी हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश आज से 150 साल पहले कैसा था, कभी सोचा है? इंटरनेट की अच्छी बात यह है कि उस दौर में कुछ लोगों ने जो तस्वीरें खींची थीं, अब इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। वरना बाहर के फटॉग्रफर्स की खींची ये तस्वीरें उनकी अलबमों में कैद रह जातीं। ऐसी ही कुछ तस्वीरें आए दिन विभिन्न पेज शेयर करते हैं। एक फेसबुक पेज ने 1860 के दशक की कुल्लू घाटी की तस्वीरें शेयर की हैं। इनसे पता चलता है कि घाटी तो वैसी ही है, बस निर्माण बेतहाशा हो गया है। इनमें से कुछ तस्वीरों से हमें अपने पूर्वजों के रहन-सहन की भी झलक मिलती है। तस्वीरें तब की हैं जब ‘हिमाचल’ नाम के प्रांत का अस्तित्व तक नहीं था। ये तस्वीरें Tharah Kardu- ठारा करडू नाम के पेज से इंबेड की गई हैं। देखें:

नीचे दी गई तस्वीर में आपको मसक (mussock) दिखेंगे। दरअसल ये बड़े जानवरों की खाल होती थी जिसे फूंक मारकर फुलाया जाता था। इसके जरिए नदी पार की जाती थी क्योंकि यह डूबता नहीं था। ऐसी ही खालों में पानी भी भरकर ढोया जाता था। तस्वीर 1860 के आसपास की है। सैम्युअल बोर्न ने कुल्लू घाटी में ब्यास नदी के तट पर ली थी। (अगर आपको तस्वीरें नजर न आएं तो यहां क्लिक करके हमारी मोबाइल साइट पर जाकर देंखें)

ऐसी ही एक और तस्वीर। बैकग्राउँड में देखिए पुल बनाया जा रहा है। लंबे दरख्तों को एक के ऊपर एक लॉक करके पुल बनाए जाते थे। बरोट से आगे लुहारडी में ऐसा पुल अभी भी देखने को मिल जाएगा।

कुल्लू घाटी

बजौरा (1866)

मन मोह लेंगी हिमाचल प्रदेश की ये खूबसूरत तस्वीरें

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर देखने को मिल जाती हैं जो मन मोह लेती हैं। फेसबुक के फोटो शेयरिंग ऐप इंस्टाग्राम पर भी हिमाचल के कई लोग फोटो डालते है। इनमें से कुछ प्रफेशनल फटॉग्रफर हैं तो कुछ पर्यटक। कुछ ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैं जो विभिन्न फोटो डालते हैं। आज हम हिमाचल की कुछ ऐसी ही तस्वीरें शेयर करने जा रहे हैं। विभिन्न जगहों पर ली गईं ये तस्वीरें हिमाचल को बहुत खूबसूरती से दिखाती हैं।

नीचे हम जो तस्वीरें दिखा रहे हैं, उन्हें इंस्टाग्राम अकाउंट instagram.com/unravelhimachal/ से एंबेड किया गया है। देखें:

 

बिहार बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मंगल पांडे बने हिमाचल प्रभारी

शिमला।। बिहार में बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मंगल पांडे को भारतीय जनता पार्टी ने हिमाचल प्रदेश का प्रभारी नियुक्ति किया है। उनसे पहले श्रीकांत शर्मा यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे मगर अब वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बन गए हैं। इसके बाद हिमाचल के लिए नए प्रभारी की तलाश की जा रही थी जो मंगल पांडे पर आकर खत्म हुई है।

बिहार के सीवान जिले के भृगु बलिया गांव में जन्मे मंगल पांडे का राजनीति सफर साल 1989 में शुरू हुआ था। 2005 में वह बिहार भाजपा के महासचिव बने थे। 2012 में वहां विधान परिषद के सदस्य भी बने। साल 2013 में पार्टी ने अचानक उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बनाया था। वह महज 44 साल की उम्र में प्रदेशाध्यक्ष बने थे। बाद में 2016 में उनका कार्यकाल खत्म होने पर नित्यानंद राय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी जो ओबीसी समुदाय से हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि बिहार में साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के वक्त मंगल पांडे की प्रदेशाध्यक्ष थे। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मंगल पांडे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा तय किए गए मिशन 185 के लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी थी। उस वक्त पार्टी की सीटें पिछले चुनावों के मुकाबले कम हो गई थीं।  2010 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 91 सीटें मिली थीं मगर 2015 में ये घटकर 53 रह गई थीं।

बिहार विधानसभा चुनावों की तुलना

इनमें से 27 सीटें शहरी इलाकों की थीं। इससे संकेत मिला था कि बिहार में बीजेपी अपने पारंपरिक सपॉर्ट बेस में सिमट गई थी जो शहरों मे रहता है। बीजेपी बिहार के ग्रामीण इलाकों में पहुंच बनाने में नाकाम रही थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिहार में सिर्फ 11.3 पर्सेंट आबादी ही शहरी इलाकों में रहती है, जो कि भारत में हिमाचल के बाद दूसरे नंबर पर है।

41 साल का शख्स 3 साल से कर रहा था 16 वर्षीय बेटी का बलात्कार

केलांग।। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर शर्मनाक मामला सामने आया है। एक नाबालिग लड़की का आरोप है कि उसका पिता पिछले 3 साल से उसका रेप कर रहा था। किसी तरह हिम्मत करके लड़की ने अपने करीबी रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दी। मामला पुलिस तक पहुंच गया है और आरोपी पिता को अरेस्ट कर लिया गया है।

घटना लाहौल स्पीति के केलांग थाना के तहत आने वाले गांव सरखंग सिसु का है। पुलिस का कहना है कि 41 साल का एक शख्स अपनी 16 साल की बेटी से करीब 3 साल से दुष्कर्म कर रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपी की पत्नी 6 साल पहले उसे छोड़कर चली गई थी और तबसे वह अपनी बेटी और बेटों के साथ रह रहा था। मासूम बेटी काफी समय से पिता की इस हरकत का शिकार हो रही थी।

एक दिन पीड़ित लड़की ने अपनी करीबी रिश्तेदारों को बताया कि पिता क्या करता है। रिश्तेदारों ने केलांग पुलिस स्टेश में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आईपीसी की धारा 376, 506 और POCSO ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। लड़की का मेडिकल करवाया गया है जिसमें रेप की पुष्टि होने की खबर है।

सरकार रिपीट करने के लिए कांग्रेस काट सकती है 23 नेताओं और विधायकों के टिकट

मोदी- शाह के दौरों के बाद हिमाचल प्रदेश की सियासी फिजाओं में भी उफान आ गया है। यूं तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पिछले कुछ अरसे से अकेले ही चुनावी माहौल में आ गए थे परन्तु आज कांग्रेस विधायक मंडल की बैठक बुलाकर उन्होंने सबको कमर कसने के लिए कह दिया है। बैठक के मायने यही निकाले जा रहे हैं कि कांग्रेस भी अब इलेक्शन मोड में आ चुकी है।  देश में परिवर्तन की जिस राह पर बीजेपी चली है, उसी को देखते हुए कांग्रेस भी अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। इस बार का चुनाव मुख्यमंत्री के लिए बहुत अहम है। जांच एजेंसियों से चौतरफा घिरे मुख्यमंत्री खुद अगले चुनाव में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और इस बात को कांग्रेसी दिग्गज भी पुख्ता कर चुके हैं।

यह चुनाव मुख्यमंत्री के बेटे और युवा कांग्रेस के प्रधान विक्रमादित्य सिंह का भी पहला चुनाव होगा। शिमला ग्रामीण से उनके लड़ने की बात बार-बार दोहराई जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि आज धर्मशाला में मुख्यमंत्री ने कहा है की कांग्रेस नए चेहरों को मौक़ा दे सकती है। विक्रमादित्य सिंह भी अपने बयानों में बार-बार कहते आए हैं कि युवा वर्ग को टिकट दिए जाएंगे। वह कहते रहे हैं कि जहां कांग्रेस अरसे से हार रही है, वहां नए कैंडिडेट को इस बार तरहीज दी जाएगी। कोटा सिस्टम से टिकट नहीं देने की वकालत विक्रम और अम्बिका सोनी ने पहले भी की है।ऐसा हुआ तो टीम विक्रमादित्य की लॉटरी इस बार निकलने वाली है।

कांग्रेस भी इसी नीति पर चली तो बहुत से दिग्गजों का चुनावी राजनीति से संन्यास लगभग तय ही माना जाना चाहिए। कांग्रेस के इन बड़े नेताओं के ब्यानो से निष्कर्ष निकाला जाए तो सम्भावना बनती है की कम से कम 20 नेता इस बार टिकटों से महरूम हो सकते हैं या सदा के लिए टिकट की दौड़ से बाहर जा सकते हैं। ऐसे ही कुछ संभावनाएं देखते हुए ‘इन हिमाचल’ ने एक विश्लेषण किया है। नए चेहरे और बार-बार हार के समीकरणों पर नजर दौड़ाएं तो पहले वे सीटें है, जिनमें या तो नए चहेरे उतारे जाएंगे या फिर वे नेता हैं, जिनके कांग्रेस में टिकट के चांस इस बार शून्य ही नजर आ रहे हैं:

1. कमल किशोर ( इंदोरा ): बड़े मार्जन से हारने की वजह से नया चेहरा उतारा जा सकता है। वर्तमान विधायक (निर्दलीय) मनोहर धीमान दुविधा में हैं कि किस पार्टी में जाएं। वह किस पार्टी में जाते हैं, यह देखना होगा।

2. संजय अवस्थी (अर्की ): युवा नेता है परन्तु चर्चा है कि वीरभद्र सिंह अर्की से अगला चुनाव लड़ सकते हैं। इसलिए टिकट कट सकता है। ठाकुर धर्मपाल के बाद कांग्रेस अपने गढ़ की इस सीट को दो बार गंवा चुकी है।

3. प्रोमिला देवी (भोरंज ): बेशक युवा हैं पर अभी-अभी उपचुनाव हार चुकी हैं। प्रेम कौशल का टिकट अंत में कटकर इनकी झोली में आया था। वीरभद्र सिंह की पसंद अब प्रेम कौशल हो सकते हैं।

4. पवन नैय्यर ( चम्बा ): पूर्व आईएएस बी.के. चौहान से दो बार से लगातार कांग्रेस हार रही है। हर्षवर्धन खुद इस बार मोर्चा संभाल सकते हैं।

5. ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह राणा (देहरा ): पूर्व में बुरी तरह से इस सीट पर हारी कांग्रेस देहरा सीट से नए खिलाड़ी को मौक़ा दे सकती है।

6. हमीरपुर: हमीरपुर सीट से लेकर पूरा जिला कांग्रेस के लिए बड़ा सपना रहा है। सदर सीट से खुद पूर्व मुख्यंमंत्री प्रेम कुमार धूमल लड़ते आए हैं। नरिंदर ठाकुर (वर्तमान में सुजानपुर के विधायक) को टिकट देकर कांग्रेस ने बेशक धूमल की लीड कम करने में सफलता पाई थी परन्तु इस बार कांग्रेस को वहां से नया कैंडिडेट हर हाल में देना ही पड़ेगा। अनिता वर्मा यहां से अपनी बाट जोह सकती हैं। वहीं बीजेपी से कांग्रेस में आईं उर्मिल ठाकुर अपने या अपने बेटे के लिए यहां से टिकट की मांग कर सकती हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू के ख़ास रहे पूर्व जिला अध्यक्ष भी यहाँ से प्रबल दावेदार हैं। वीरभद्र खेमे से भी कुलदीप पठानिया चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हैं।

7. बीरु राम किशोर ( झंडूता): बिलासपुर जिले की इस सीट से कांग्रेस दो बार से लगातार हार रही है। बीरु राम किशोर वैसे तो मुख्यमंत्री के ख़ास हैं परन्तु नए पन की ओर बढ़ने की चाहत दिखाती हुई कांग्रेस यहां से टीम विक्रमादित्य के युवा तुर्क विवेक कुमार पर दांव खेल सकती है।

8. सुरेंद्र ठाकुर (जोगिंदर नगर): जोगिंदर नगर से कांग्रेस लगातार दो बार से हार रही है। इस बार सुरेंद्र पाल ठाकुर का टिकट कटा हुआ ही माना जा रहा है। कांग्रेस के सब धड़े अपने आपने आदमी को वहां बिठाने के लिए तैयार हैं। जीवन ठाकुर से लेकर चौहान तक टिकट के कई तलबगार हैं।

9. कुटलैहड़: कुटलैहड़ सीट से कांग्रेस की हार का सिलसिला रसे से नहीं थमा है। राम दास मलांगड़ की मृत्यु के बाद अब यहां से नया उमीदवार आना तय ही है।

10. कुश परमार (नाहन ): कुश परमार के आप जॉइन करने की अटकलों के बीच तय माना जा रहा है कि कांग्रेस यहां से किसी नए चहेरे को मौका दे सकती है।

11. गंगू राम मुसाफिर ( पच्छाद ): सपने समय के दिग्गज नेता और वीरभद्र सिंह के ख़ास गंगू राम मुसाफिर का टिकट भी इस बार कटना तय ही माना जा रहा है।

12. पावंटा साहिब : इस सीट पर तीसरे नंबर पर खिसक चुकी कांग्रेस किरनेश जंग को अपनी तरफ करने की कवायद में है।

13. सरकाघाट ( रंगीला राम राव ): मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रंगीला राम राव दो बार से लगातार हार रहे हैं। टीम विक्रम की तरफ से यदुपति ठाकुर उन्हें इस बार रिप्लेस कर सकते हैं।

14. तारा ठाकुर ( सिराज ): सिराज सीट भी कांग्रेस के लिए दूर की कौड़ी है तारा ठाकुर का टिकट कटना भी तय ही माना जा रहा है।

15. मेजर मनकोटिया ( शाहपुर ): फायर ब्रैंड नेता और बगावती तेवरों के लिए जाने जाते रहे मेजर मनकोटिया भी इस बार टिकट से महरूम रह सकते हैं उनकी जगह केवल सिंह पठानिया को तरजीह मिल सकती है।

16. लखविंदर राणा (नालागढ़): नालागढ़ सीट से लखविंदर सिंह राणा का टिकट भी कटता ही नजर आ रहा है।

उपरोक्त सीटों के बाद भी कुछ सीट ऐसी हैं जहां जीत को जारी रखने या अन्य कारणों से कांग्रेस चेहरे बदल सकती है। और कुछ ऐसे नेता भी फायदे में रह सकते है जिन्हे हार के बावजूद सेकंड लाइन लीडरशिप न होने का फायदा मिल सकता है। ये सीटें इस तरह से हैं:

1. राम लाल ठाकुर ( नैना देवी ): राम लाल ठाकुर वीरभद्र सिंह के ख़ास हैं और लगातार चुनाव हार रहे हैं। मगर नैना देवी में सेकं लाइन ऑफ लीडरशिप न होने के कारण उनका टिकट बच भी सकता है।

2. ठाकुर सिंह भरमौरी ( भरमौर) : ऐंटी इंकमबेंसी को रोकने के लिए कांग्रेस भरमौरी का टिकट काट सकती है। कांग्रेस के दूसरे धड़े ने यहाँ नौजवान भरमौरी सर नेम वाले शख्स के लिए ही जोर लगाना शुरू कर दिया है

3. बृज बिहारी लाल बुटेल ( पालमपुर) : स्वास्थय कारणों से बुटेल यह चुनाव स्किप कर सकते हैं परन्तु अपने बेटे आशीष बुटेल के लिए वो टिकट की मांग कर सकते है। उन्हीं के परिवार के मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल टिकट के प्रबल दावेदारों में से हैं और चुनाव लड़ने की मंशा भी जता चुके हैं। वहीं कांग्रस जनजातीय मोर्चा के उपाध्यक्ष बेनी प्रसाद भरमौरिया भी गद्दी वोट बैंक में पकड़ के बल पर टिकट की दावेदारी पेश करने में लगे हैं।

4. किशोरी लाल ( बैजनाथ ): कांग्रेस की सिटिंग सीट पर ऐंटीइंनकमबेंसी रोकने और जिला कांगड़ा के ही एक युवा नेता के दबाब के कारण यहां से टिकट बदला जा सकता है।

5. चौधरी सुरेंद्र कुमार ( कांगड़ा ): कभी वीरभद्र सिंह के ख़ास थे मगर अब बाली खेमे में हैं। अब पवन काजल भी गुड बुक्स में हैं और वर्तमान में विधायक हैं। काजल क्या फैसला लेते हैं, इस कारण भी यह सीट संशय में हैं। डाक्टर राजेश शर्मा भी यहाँ से टिकट की मांग करते रहे हैं।

6. नादौन ( सुखविंदर सिंह सुक्खू ): सुक्खू का टिकट भला कौन काटेगा परन्तु चर्चा है कि सुक्खू यह चुनाव स्किप कर सकते हैं और किसी महिला नेत्री को अपनी जगह उतार सकते हैं। सुक्खू शिमला सिटी से भी चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जाते रहे हैं।

7. विद्या स्टोक्स ( ठियोग) : विद्यास्टोक्स उम्र के इस पड़ाव पर भी अभी चुनावी राजनीति से नहीं हटना चाहती है। स्वेच्छा से अगर वो हट भी जाती हैं तो अपने किसी खास को ही टिकट की मांग रखेंगी। यहाँ से वीरभद्र गुट में गए विद्या के पूर्व सिपहसलार केहर सिंह खाची भी दावा जता रहे हैं।

 

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