22 दिन आग से घिरी जगह पर रहेंगे बाबा अमरदेव, सिर्फ गंगाजल पिएंगे

सोलन।। महिला पर हथियारों से हमला करने, जानवरों की खालें रखने और सरकारी जमीन पर कब्जा करने समेत कई आरोपों से घिले सोलन के विवादित बाबा आग से घिरी हुई जगह पर बैठ गए हैं। हिंदी अखबार अमर उजाला के पोर्टल में लगी खबर में बताया गया है कि बाबा 22 दिन आग से घिरे रहेंगे और इस दौरान केवर गंगाजल पिएंगे। लोग बाबा के इस काम को नाटक बता रहे हैं। (कवर इमेज File Photo है)

 
गौरतलब है कि बाबा अमरदेव उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद सोलन से बाहर थे और वह सोमवार को यहां पहुंचे हैं। मंगलवार से कथेड़ बाईपास में आयकर भवन के पास उन्होंने 22 दिन तक समाधि में जाने का फैसला किया है। इसी वजह से वह यहां आग से घिरी जगह पर बैठे हैं।

 

खास बात यह है कि बाबा अमरदेव महंगी गाड़ियों से सोलन पहुंचे हैं। अखबार का कहना है कि कथेड़ बाइपास पर जहां बाबा बैठे हैं, वहां महंगी गाड़ियों का काफिला है। बाबा अमर देव का कहना है कि मैंने ग्रामीणों पर भरोसा कर करोड़ों रुपये मंदिर और मूर्ति स्थापित करने मे लगा दिए मगर ग्रामीणों ने विश्वास तोड़ दिया।

मुख्यमंत्री ने शेयर कर दीं संदिग्धों की तस्वीरें, विरोध होने पर हटाईं

शिमला।। हर कोई इंतजार कर रहा है कि शिमला में हुई दुखद घटना में पुलिस कब आरोपियों का पता लगाती है और सबूत जुटाती है। मगर इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने 4-5 लोगों की तस्वीरें शेयर करना शुरू कर दिया। फेसबुक और व्हाट्सऐप पर भेजे जा रहे इन संदेशों में लिखा जा रहा था कि ये वही लोग हैं जिन्होंने रेप को अंजाम दिया है और पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया है। मगर हकीकत यह है कि खबर लिखे जाने तक पुलिस ने आधिकारिक रूप से कोई खबर नहीं दी है कि उसने मामला सुलझा लिया है या अंजाम देने वाले आरोपियों को पकड़ लिया है। बावजूद ये तस्वीरें कौन शेयर कर रहा है और इसके पीछे किसका दिमाग है? इससे पहले कि कहीं और जाएं, नीचे का स्क्रीनशॉट देखें:

मुख्यमंत्री पेज से शेयर तस्वीरें  (हमने पहचान छिपाने के लिए चेहरे इस स्क्रीनशॉट में धुंधले कर दिए हैं।)

यह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पोस्ट है जिसमें दावा किया गया है कि पुलिस ने इस मामले में चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है। यही नहीं, मुख्यमंत्री ने उनकी तस्वीरें भी डाल दीं। लोगों ने कॉमेंट करके आपत्ति जताई तो पोस्ट एडिट करके तस्वीरें हटा दी गईं। वैसे यह भी नहीं पता कि ये तस्वीरें उन्हीं लोगों की हैं या नहीं, जिनसे पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि न तो पुलिस ने इन्हें आरोपी बनाया है और न ही यह साक्ष्य मिले हैं कि इन लोगों ने घटना को अंजाम दिया है। पुलिस ने खबर लिखे जाने और मुख्यमंत्री द्वारा इस पोस्ट को लिखे जाने तक इन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। ऐसे में कानूनन दोषी पाए जाने तक किसी की तस्वीरों को शेयर कर दिया जाना न सिर्फ नैतिक रूप से बल्कि कानून के हिसाब से भी गलत है। नतीजा यह निकला कि लोगों ने मुख्यमंत्री की प्रोफाइल से तस्वीरें डाउनलोड करके वायरल कर दीं, कुछ इस स्क्रीनशॉट को भी शेयर कर रहे हैं।

पढ़ें: जिम्मेदार बनें, पीड़ित और संदिग्धों की तस्वीरें शेयर न करें

बाद में कुछ लोगों ने आपत्ति जताई तो मुख्यमंत्री ने लीपापोती करते हुए तस्वीरें हटा दीं, मगर एडिट हिस्ट्री में जाने पर तस्वीरों के ट्रेल्स अभी तक देखे जा सकते हैं। वेरिफाई करके खुद देखने और एडिट हिस्ट्री पर जाने के लिए यहां पर क्लिक करें और पोस्ट के दाहिने किनारे पर टॉप में नीचे की तरफ दिखने वाले छोटे से तीर के निशान पर क्लिक करें। फिर पॉप खुलने पर बीच में दिखने वाले तीन बिंदुओं … पर क्लिक करें।

 

एडिट हिस्ट्री में तस्वीरें ऐड करके हटाने के निशान हैं।

पुलिस इनमें से किसी को आरोपी बनाती है और किसी के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तब भी कोर्ट तय करेगा कि वे दोषी हैं या नहीं। मगर मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह से किसी की तस्वीर शेयर करना और उसे पूरे प्रदेश में फैला देना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। अगर इनमें कोई बेकसूर है तो उसकी छवि को खराब हो गई। लोग अंधाधुंध उन तस्वीरों को शेयर कर रहे हैं। ऐसे में बदनामी के डर से कोई उल्टा-सीधा कदम उठा दे तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? उस वक्त अगर कोई प्रश्न उठाएगा तो क्या उन्हें भी मुख्यमंत्री कहेंगे कि ज्यादा होशियार बन रहे हैं? क्या इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत के लिए मुख्यमंत्री पर कार्रवाई होगी? बहरहाल, इस तरह के प्रश्न बेमानी हैं।

पढ़ें: CBI जांच की मांग करने वालों को CM ने बताया होशियार

शिमला रेप & मर्डर केस में पुलिस ने 4 को हिरासत में लिया

शिमला।। शिमला रेप ऐंड मर्डर केस में नई जानकारी सामने आती दिखती है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फेसबुक पेज पर जानकारी दी है कि इस मामले में 4 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और आगे की जांच जारी है। उन्होंने कहा है कि मैं आश्वस्त हूं कि जल्द ही दोषी कानून की जद में होंगे। इससे पहले News 18 Himachal ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि इस मामले में पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र ने लिखा है-  I would like to inform the people of Himachal Pradesh that four suspects have been taken into Police Custody and further investigation is being conducted. The State Police team under IGP Zahoor Zaidi and SP Shimla DW Negi is vigorously pursuing the matter with the cooperation of the local people and I am sure that the Guilty will be brought to justice very soon.

हिंदी में इसका अर्थ हुआ- मैं हिमाचल प्रदेश के लोगों को बताना चाहूंगा कि पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है और आगे की जांच जारी है। आईजीपी जहूर जैदी और एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी की अगुवाई में स्थानीय पुलिस के सहयोग से टीम मामले की जांच कर रही है और मैं आश्वस्त हूं कि दोषी जल्द ही कानून की जद में होंगे।

गौरतलब है कि आज ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने डीजीपी हिमाचल प्रदेश को अपने निवास स्थल पर बुलाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री फेसबुक पर स्टेटस डालकर जानकारी दी है कि मैंने डीजीपी को कहा है कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर लिखा था- कोटखाई में हुए गुड्डीया हत्या मामले मे जल्दी से जल्दी मुल्जिमों को पकड़ा जाए । आज सुबह ही पुलिस महानिदेशक को मैंने आदेश दिये हैं कि इस मामले मे किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। गुड्डीया के मुल्जिमों के साथ किसी प्रकार की नरमी सहन नहीं होगी। मुझे दोषी शीघ्र सलाखों के पीछे चाहिए।

आगे मुख्यमंत्री ने लिखा है-  हम गुडिड्या के परिवार के दुख को समझते हैं और पूरी तरह उनके साथ हैँ। आज पुलिस महानिदेशक को घर पर बुलाकर समझा दिया है कि गुड्डीया के कातिलों को जल्द पकड़ा जाए। इस दुःख की घड़ी मे मैंने गुड्डिया के परिवार को पांच लाख रुपए देने के भी आदेश दे दिए हैं। दोषी जल्द पकड़े जाएं, इसके लिए विशेष जांच दल का गठन भी किया गया है।

इस बीच छात्रा के स्कूल में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। वहीं ठियोग बार एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि पीड़िता के परिजनों को मुख्त कानूनी सहायता दी जाएगी।

जिम्मेदार बनें, जल्दबादी में पीड़ित और आरोपियों की तस्वीरें शेयर न करें

इन हिमाचल डेस्क।। इन हिमाचल को जानकारी मिली है कि कुछ लोग WhatsApp और फेसबुक पर कुछ लड़कों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और उनके परिजनों का नाम लिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इन्हें शिमला रेप मामले में गिरफ्तार किया है। ध्यान दें, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है। न्यूज 18 हिमाचल समेत कुछ अन्य मीडिया आउटलेट्स ने सूत्रों के हवाले से यह जरूर लिखा है कि कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत मे लिया गया है। बावजूद इसके कुछ लोगों की तस्वीरें वायरल करके उनकी छवि खराब की जा रही है।

बिना सच जाने आंख मूंदकर कुछ लोगों को रेपिस्ट बताकर उनकी तस्वीरें Facebook और WhatsApp पर शेयर करने वाले ध्यान दें, अगर कल इनमें से कोई बेकसूर शर्मिंदा होकर आत्महत्या कर ले तो कौन जिम्मेदार होगा? आप सब। वैसे भी किसी को बदनाम करने के लिए आप सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह तर्क नहीं चलेगा कि आपने तो सिर्फ फॉरवर्ड किया था मेसेज। जिम्मेदार नागरिक बनें, साबित करें कि आप पढ़े-लिखे हैं। उदाहरण के लिए साथ में लगाई गई तस्वीर ही देख लें जिसमें अपनी तस्वीर शेयर किए जाने से परेशान एक शख्स ने पोस्ट डाली है। हमने उसकी पहचान भी छिपा दी है।

इससे पहले कुछ लोग पीड़िता की तस्वीर भी शेयर कर चुके हैं और यहां तक की उसका नाम पता भी। किसी ने तो उसकी तस्वीर रिज मैदान में ही लगा दी थी। ऐसा करना कानूनन अपराध है। जो लोग इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं या तथाकथिक आरोपियों की तस्वीर शेयर कर रहे हैं, वे अपराध कर रहे हैं और उसी समाज का हिस्सा बन रहे हैं जो गैर-जिम्मेदार है।

ध्यान दें, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए In Himachal कभी भी इस तरह के मामलों में पीड़ित, उसके गांव, परिजन, स्कूल या किसी अन्य पहचान के बारे में नहीं लिखता ताकि उसके बारे में पता न चले। यह जिम्मेदारी हम सभी की बनती है ताकि लोग विक्टिम या उसके परिवार को जज न करें और कोई अवधारणा आदि बनाकर किसी तरह की दिक्कत उनके लिए पेश न करें।

आइए, थोड़े से जिम्मेदार बनें। खुद न तो ऐसा काम करें और अगर कोई अपना इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा हो, उसे भी रोकें। शेयर भी करें ताकि जिन्हें पता न हो, उन्हें भी पता चले।

परिवहन मंत्री की चिट्ठी लीक, CM से कहा- देवभूमि में खराब हुई कानून-व्यवस्था

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के परिवहन मंत्री जी.एस. बाली का मुख्यमंत्री को लिखा लेटर लीक हो गया है। इसकी एक प्रति इन हिमाचल के हाथ भी लगी है। कई मुद्दों पर बेबाकी से राय रखने के लिए पहचाने जाने वाले बाली ने इस मुद्दे पर भी खरी-खरी सुनाई है। इस चिट्ठी में उन्होंने कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पुलिस की ढील पर दुख प्रकट किया है। यही नहीं, उन्होंने लिखा है कि पिछले कुछ महीनों से शांत माने जाने वाले प्रदेश, जिसे पूरे देश में देवभूमि कहा जाता है, में कानून-व्यवस्था खराब हो गई है। उन्होंने लिखा है कि शिमला में छात्रा के रेप और मर्डर ने लोगों की आत्मा हिला दी है। इन हालात में हमारा प्रशासन विक्टिम के परिजनों को न्याय दिलाने में अक्षम नजर आ रहा है। (लीक हुए लेटर की प्रतियां एकदम नीचे हैं).

इस लेटर के कुछ अंश हम अनुवाद करके आपको बता रहे हैं। इसमें लिखा है, ‘इस घटना से हमारे प्रदेश की जनता की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। मैं पिछले कुछ दिनों ये यह सोचकर बेचैन रहा कि इस बुरी घटना से विक्टिम के परिजनों पर क्या गुजरी होगी। जब मैंने उसकी दादी को उन सपनों और ख्वाबों को लेकर बात करते देखा जो उसने अपनी पोती के लिए देखे थे, मैं दुख और गुस्से से भर गया।’

पुलिस की अक्षमता पर प्रकट की नाराजगी
आगे लेटर में उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘मैं विक्टिम के परिजनों को प्रभावी, निष्पक्ष और संतुलित जांच दिला पाने में हमारी अक्षमता पर भी नाराज हूं। पांच दिन हो गए हैं और पुलिस कोई कड़ी ढूंढने और गिरफ्तार करके अपराधियों का पता लगाने में नाकामयाब रही है। ऐसे मामलों में समय बहुत अहमियत रखता है। जल्दी कार्रवाई हो तो घटनास्थल से सबूत से छेड़छाड़ से बचाव तो होता ही है, जनता की नाराजगी का भी सामना नहीं करना पड़ता।

दिल्ली के निर्भया गैंगरेप की घटना का हवाला देते हुए लिखा है- कुछ साल पहले दिल्ली में ऐसा ही दिल दहलाने वाला अपराध हुआ था और पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए 48 घंटों मे आरोपी पकड़ लिए थे।

आगे उन्होंने लिखा है, ‘न्याय दिलाना सरकार का अहम कर्तव्य है। मैं इस चिट्ठी के जरिये आपके गुजारिश करता हूं कि तुरंत ऐक्शन लें ताकि न्याय दिलाया जाए। हमें अपने पास मौजूद सभी संसाधनों को लगाकर इस केस की जांच करनी होगी और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना होगा।

शिमला केस में केंद्रीय मंत्री नड्डा ने की सीबीआई जांच की मांग

बिलासपुर।। केद्रीय स्वास्थ्य मत्री जेपी नड्डा ने कोटखाई में छात्रा की रेप के बाद हत्या के मामले में रोष प्रकट किया है। न्यूज 10 हिमाचल के मुताबिक नड्डा ने कहा है कि पुलिस इस मामले में खाली हाथ है। यही नहीं, उन्होंने फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की संदिग्ध हालात में मौत का मामला भी उठाया।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कोटखाई हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग की है।

इसके साथ ही नड्डा ने मंडी के करसोग में वनरक्षक होशियार के मामले में कहा कि इसमें जांच के नाम पर लीपापोती हुई है।

बीजेपी में शामिल होने को लेकर जी.एस. बाली ने बढ़ाया सस्पेंस

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। हिमाचल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री जीएस बाली ने बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर गोलमोल जवाब देकर रहस्य को बरकरार रखा है।  मीडिया के सवाल पर बाली खुद के भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर अपना रूख स्पष्ट नहीं कर पाए। बाली ने मंगलवार को पत्रकारों के सवाल पर कहा कि वर्तमान में वह कांग्रेस के मंत्री हैं और भविष्य में क्या होगा, वे नहीं जानते।

पत्रकारों से बात करते हुए बाली ने कहा कि मैं ज्योतिषी नहीं हूं कि कल के बारे में भविष्यवाणी करूं। बस इतना कहना चाहूंगा कि इश वक्त मै कांग्रेस का मंंत्री हूं और आगे कुछ नहीं करना चाहता। उन्होंने यहां तक कह दिया कि भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, इस बारे वह कुछ नहीं जानते। बाली बोले कि वह एआईसीसी के निर्वाचित सदस्य हैं और बतौर मंत्री कांग्रेस सरकार के विभागों को ईमानदारी से चला रहे हैं।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

बाली ने कहा कि उनके कांग्रेस के इलावा अन्य राजनीतिक पार्टियों के लोगों से व्यक्गित रिश्ते हैं। लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कुल मिलाकर भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर बाली मीडिया को खुलकर नहीं बता सके। आपको बता दें कि बाली की गिनती वीरभद्र विरोधी धड़े से होती है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने बाले मेजर विजय सिंह मनकोटिया के बारे में पूछे जाने पर बाली ने कहा कि मनकोटिया उनके पुराने मित्र और पड़ोसी हैं तथा उनके साथ पारिवारिक संबध भी हैं।

(यह स्टोरी MBM News Network की है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

अनुराग ठाकुर के खिलाफ केस में हिमाचल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका

नई दिल्ली।। हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने हिमाचल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अनुराग को आपराधिक मामले में बरी करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति एके गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने पिछले साल 30 मई को हिमाचल हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में दखल देने से मना कर दिया था। उससे पहले राज्य सरकार के वकील ने पीठ के सामने कहा कि अनुराग समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकद्दमा निरस्त करने का हाईकोर्ट का फैसला दोषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अनुराग और अन्य 250 लोगों ने साल 2013 में धर्मशाला में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर में जबरन घुसकर सरकारी कामकाज में रुकावट डाली थी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अनुराग और अन्य लोगों को आरोपियों के रूप में तलब करने वाली ट्रायल कोर्ट को इस मामले में ऐसा करने का अधिकार नहीं था। किसी सरकारी नौकर या वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं की थी।

KCC बैंक की परीक्षा को लेकर फिर विवाद, प्रश्नपत्र WhatsApp पर लीक होने का आरोप

सोलन।। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक यानी केसीसी बैंक की भर्ती परीक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे है। सोलन में कुछ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और इस परीक्षा का आयोजन करवाने वाले शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र को whatsapp पर डाल दिया गया था। आरोप लगाया गया है कि परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल का प्रयोग किया गया और whatsapp के माध्यम के प्रश्न पत्र को बाहर पहुंचाया गया और फिर सही जवाब के आगे निशान लगाकर अंदर भेज दिया गया।

हिंदी अखबार पंजाब केसरी में छपी खबर के मुताबिक उम्मीदवारों द्वारा भेजी गई इस चिट्ठी में कहा गया है कि प्रश्न पत्र पर सही जवाब के आगे निशान लगे कई फोटो उन्हें whatsapp पर मिली है। ऐसे में शक है कि कुछ लोगों ने नौकरी हासिल करने के लिए हेराफेरी की। आरोप यह भी लगा है कि जब सभी केंद्रों पर परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र वापस ले लिए गए तो फिर ये whatsapp पर कैसे पहुंच गए। शक जताया गया है कि नकल के लिए ये प्रश्न पत्र व्हाट्सऐप पर डाले गए थे। यह बताना जरूरी है कि In Himachal को इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली है, इसलिए हम इसकी पुष्टि नहीं कर रहे। मगर विभिन्न अखबार और पोर्टल ऐसा होने का दावा कर रहे हैं।

इस बीच केसीसी बैंक को लेकर बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने हिमाचल के सहकारी बैंकों में भर्तियों के नाम पर व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने मंडी डिग्री कॉलेज में कांगड़ा केंद्रीय बैंक की लिखित परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र न मिलने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल सहकारी बैंकों में एक भी परीक्षा ऐसी नहीं हुई है, जिसमें धांधली, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप न लगे हों।

बीजेपी के नेताओं ने कहा कि सहकारी बैंक की परीक्षा के दौरान केवल एक सेंटर पर पेपर शीट्स न मिलने का मामला नहीं है। बल्कि कई अन्य तरह की गड़बड़ियों की सूचना राज्यभर से देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि ज्यादा फीस के बावजूद भी अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र नहीं दिए गए जो अपने आप में ही धांधली का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक में हुई इस परीक्षा को रद्द कर आईबीपीएस को जिम्मेदारी देनी चाहिए।

लेख: मुख्यमंत्री जी, हम हिमाचलियों को आखिर किसने ‘होशियार’ बनाया?

नयन रांगटा।। स्कूल से घर जाती एक बच्ची लापता हो जाती है और दो दिन बाद उसकी लाश निर्वस्त्र मिलती है। पोस्टमॉर्टम में पता चलता है कि इस बच्ची के साथ रेप हुआ हुआ है और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई है। इस घटना ने हर संवेदनशील हिमाचली की आंखों को नम किया है। वह बच्ची एक परिवार की बेटी नहीं थी, हिमाचल का हर परिवार महसूस कर रहा है मानो उसकी बेटी के साथ ऐसा हो गया हो। एक डर हर हिमाचली के मन में बैठ गया है कि क्या हालात ऐसे हो गए हैं कि बेटियां सुरक्षित नहीं? लोग मांग कर रहे हैं कि इस घटना की जांच सीबीआई से हो। आखिर क्यों लोग सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं?

पढ़ें: जरूरत से ज्यादा होशियार हैं कोटखाई के लोग- वीरभद्र

हर कोई चाहता है कि ऐसे मामलों में अपराधी तुरंत सलाखों के पीछे हों ताकि कानून का डर बना रहे। मगर प्रदेश की हालत देखें और हाल ही की कुछ घटनाओं को देखें तो पता चलता है कि कानून का यह डर खत्म होता चला जा रहा है। अगर पुलिस आनन-फानन में बला टालने के लिए या अपनी अयोग्यता की वजह से पता न लगा पाने या गलत जांच हो जाने की वजह से हत्या को आत्महत्या में बदलकर मामला निपटा दे तो अपराधियों की हिम्मत तो बढ़ती ही है। तब और मेसेज जाता है जब साफ पता चल रहा हो कि मामला कुछ और था मगर पुलिस ने कुछ और कहा। इससे पुलिस पर लोगों की यकीन घटता है। जल्दबाजी में होशियार सिंह केस में क्या हुआ, यह सबने देखा। पुलिस ने अपना मखौल बनाने के अलावा अब तक इस केस में कुछ नहीं किया है।

जब पुलिस से मामला सुलझने की उम्मीद न हो, तब जनता और परिजनों की ओर से सीबीआई जांच की मांग होती है। और आजकल तो हर संगीन मामले की जांच लोग सीबीआई से करवाने की मांग करते हैं। सोचने की बात है कि आखिर पुलिस से भरोसा किस वजह से उठा है जनता का? कहीं इसके लिए पुलिस की जिम्मेदार तो नहीं? समाजशास्त्र कहता है कि जब शासक चुस्त न हों तो पूरा सिस्टम ही ढीला हो जाता है। यही वजह है कि पुलिस के इस तरह के मामलों में हाथ-पैर फूल जाते हैं। कम अनुभव होने और इस तरह के मामलों को टैकल करने का अनुभव न होने की वजह से अनाड़ी गलतियों पर गलतियां करते चले जाते हैं। क्राइम सीन को मच्छी बाजार बना दिया होता है जहां कोई भी चला आता है। जनता तो है ही ढक्कन। फोटो लेने के लिए आतुर होती है। जबकि क्राइम सीन में किसी को घुसने नहीं दिया जाना चाहिए। आपने देखो होगा कि क्राइम सीन को सबसे पहले रस्सी से घेरा जाता है जिसके अंदर हर कोई नहीं जा सकता। मगर ऐसा देखने को नहीं मिलता।

हिमाचल प्रदेश के मीडिया पर नजर डालें तो आए दिन पुलिस की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। सोशल मीडिया पर तो यह चर्चा है कि अगर किसी ने खुलेआम हत्या न की हो, खुलेआम किसी को किडनैप न किया हो, खुलेआम आत्महत्या न की हो या सुसाइड नोट न छोड़ा हो तो पुलिस को परिस्थितिजन्य और अन्य सबूत ढूंढने और कड़ियां जोड़ने में चक्कर आने लगते हैं। जहां मेहनत करके सबूत जुटाने हों और क्राइम को लिंक करना हो, वहां हिमाचल पुलिस ने कभी प्रभावित नहीं किया है। कहीं सुसाइड नोट मिल गया तो वहीं उसके आधार पर केस क्लोज। वरना केस या तो पेंडिंग हैं या कोर्ट में पुलिस को मुंह की खानी पड़ती है।

आज कोटखाई के लोग अगर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं तो इसके पीछे की वजह समझनी चाहिए। यह सही है कि पुलिस जांच कर रही है और हो सकता है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ भी ले। मगर जनता के मन में आक्रोश है। यह आक्रोश पुलिस की कार्यप्रणाली की वजह से ही है। लोग तो यह भी चर्चा कर रहे हैं कि शिमला के आला अधिकारी का नाम खुद आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आया है और मरने वाले ने सुसाइड नोट में उनका नाम लिखा है। जब उनके खिलाफ ही पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वह पुलिस और उस अधिकारी से क्या उम्मीद रखी जाए। अगर पुलिस ऐसे दोहरे मापदंड अपनाएगी तो जनता सवाल उठाएगी ही। क्योंकि होशियार सिंह के केस में तो सुसाइड नोट मिलते ही पुलिस ने मामले को हत्या से आत्महत्या बदल दिया था। फिर शिमला के एसपी के मामले में पुलिस क्यों चुप है।

पढ़ें: शिमला के एसपी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप 

लोग सदमे में हैं और उनकी सीबीआई जांच की मांग करना वाजिब या गैरवाजिब हो सकता है। मगर प्रदेश का मुखिया उन लोगों को “जरूरत से ज्यादा होशियार’ कर दे, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर न्याय की मांग करना होशियार होना है तो जब कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री जी के रिश्तेदार की हत्या हुई थी, तब क्यों वह सब छोड़-छाड़ वहां चले गए थे और क्यों परिजन सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे? क्या वे भी होशियार बन रहे थे? कम से कम ऐसे मामलों पर तो मुख्यमंत्री को वाणी पर संयम रखना चाहिए। अगर उम्र की वजह से ऐसा हो रहा है तो उन्हें जनता ने नहीं कहा है कि जबरन आप लगे रहिए। घर पर बैठकर आराम करें। कम से कम ऐसे बयानों से जले पर नमक तो न छिड़कें।

पढ़ें: वनरक्षक की मौत पर बोले सीएम- कई बार हो जाते हैं ऐसे केस

मुख्यमंत्री के बयान लोगों के सीने में चुभते हैं। गरीब परिवार का बेटा होशियार मरा, कैसे भी मरा, मुख्यमंत्री बोले- ऐसी एक दो घटनाएं हो जाती हैं। जहां स्वाइन फ्लू से मौत हो गई तो बोलते हैं कि आबादी होगी, वहां बीमारियां होंगी ही और ऐसा होगा ही। यह कैजुअल अप्रोच है यानी मुझे क्या फर्क पड़ता है वाली बात है। कहते हैं न- जाके पैर न फटे बिवाई, ओ का जाने पीर पराई। जिसका अपना खोता है, दर्द उसी को होता है। भगवान करे, आपके साथ ऐसा कुछ न हो। मगर समझें कि आपके लिए मरने वालों की संख्या सिर्फ नंबर होगी। आप सोचते होंगे कि फ्लां जगह 2 मरे, 1 मरा, एक के साथ रेप, 2 की हत्या… मगर जिसका एक भी जाता है, उसके दर्द की तो कल्पना कीजिए। आप कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम मुंह ही ताला लगा लें।

पढ़ें: स्वाइन फ्लू को लेकर मुख्यमंत्री ने दिया अजीब बयान

मुख्यमंत्री कहते हैं कि हमारी पुलिस सीबीआई से भी अच्छा काम करती है। हो सकता है सामान्य मामलों में उसने अच्छा काम किया हो। मगर शिमला के युग कांड को जनता भूली नहीं है जिसमें किडनैपर पुलिस के साथ घूमता रहा और बच्चे का पता लगाना तो दूर, उसका कंकाल मिला पानी की टंकी से। पंडोह में एक लड़का और लड़की लापता हो जाते हैं, फिर मृत पाए जाते हैं और पुलिस जांच में सामने आता है कि दोनों ने खुदकुशी कर ली। आज भी स्थानीय लोग पुलिसपर शक करते हैं। राजधानी में कभी नाले में शव सड़ी हुई हालत में मिलता तो कभी कोई पार्षद को पीट जाता है। अगस्त 2016 में सिरमौरी ताल के पास युवक-युवती के शव नग्न हालत में मिलते हैं। उसे लेकर भी लोगों के मन में प्रश्न बरकरार हैं। पुलिस के पास उपलब्धियां कई होंगी मगर एक भी केस अगर गड़बड़ हो जाए तो उसकी सारी मेहनत बरकरार। मगर प्रदेश का मुखिया होने के नाते पुलिस को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी किसी और की नहीं, मुख्यमंत्री की है। इसलिए जबरन यह कहने के कि पुलिस बेस्ट है, जरूरी है कि पुलिस को वाकई बेस्ट बनाया जाए।

होशियार सिंह केस समेत कई घटनाएं चीख-चीखकर बताती है कि हमारी पुलिस काबिल नहीं है। न तो एक्सपर्ट पुलिस ऑफिसर हैं और न ही मॉडर्न फरेंसिंक ट्रेनिंग पाए हुए एक्सपर्ट। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वह पुलिस को आधुनिक ट्रेनिंग देने का इंतजाम करे। और अगर ऐसी ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है, अक्षमता की वजह से ऐसा नहीं हुआ है तो इसता मतलब है कि डिपार्टमेंट अयोग्य और लापरवाह लोगों की वजह से बदनाम हो रहा है। ऐसे में भ्रष्ट, अयोग्य और ढीले अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए। मगर ऐसा होता हुआ नजर नहीं आया।

यह हिमाचल का दुर्भाग्य है कि नैशनल मीडिया हिमाचल की खबरों को प्राथमिकता नहीं देता। वरना शिमला जैसे केस में मुख्यमंत्री को कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त करना ही पड़ता। ऐसे मामलों में किसी और राज्य का मुख्यमंत्री कोताही बरतता तो उसे इस्तीफा ही देना पड़ जाता है। खैर, इस्तीफा देना और सस्पेंड करना किसी के अपने जमीर का फैसला होता है। अगर कोई और न फैसला न ले तो फैसला जनता भी लेती है। खासकर वह जनता, जो ‘होशियार’ बन चुकी है। ठीक उस ‘होशियार’ की तरह, जिसे न्याय मिलना अभी बाकी है। रही बात सीबीआई जांच की, आपकी निजी खुन्नस हो सकती है, हम उसपर नहीं जा रहे। मगर यह आपका निजी मामला नहीं, प्रदेश की जनता की बात है। न जाने कितने ही मामलों में सीबीआई ने वक्त रहते खुलासा किया है। उदाहरण के लिए यूपी के बदायूं में दो बहनों के साथ रेप का मामला, जिसमें पुलिस जांच नहीं कर पाई थी तो तत्कालीन सीएम अखिलेश ने सीबीआई को मामला सौंपा था। ऐसे असंख्य उदाहरण हैं। पुलिस से ही जांच करवाना प्रतिष्ठा का विषय नहीं होना चाहिए। मामला न्याय का है और जो जितनी जल्दी मिले, उतना ही अच्छा।

(लेखक हिमाचल प्रदेश के शिमला से हैं और बैंगलोर में एक स्टार्टअप के साथ जुड़े हैं।)

DISCLAIMER: ये लेखक के निजी विचार हैं, इनके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।