शिमला केस में सीबीआई ने दर्ज की दो एफआईआर

एमबीएम न्यूज, शिमला।। कोटखाई में छात्रा की रेप के बाद हत्या और आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है। इन मामलों में सीबीआई ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। छात्रा की दुष्कर्म ओर हत्या में आईपीसी की धाराओं 302, 376 ओर पोक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया है जबकि आरोपी की हिरासत में हत्या मामले में आईपीसी की धारा 302 के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ है।

 

सीबीआई ने इन मामलों की जांच के लिए एसपी, एएसपी ओर डीएसपी के अधिकारियों की एसआईटी गठित कर दी है। एसआईटी ने इस पूरे मामले को लेकर जांच आज अपने अधीन ले ली है ओर इस मामले में सीबीआई द्वारा अब आगामी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। अब इस मामले में सबकी नजरें सीबीआई की जांच पर टिकी है।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

गौरतलब है कि कोटखाई में 16 वर्षीय छात्रा को अपराधियों ने रेप के बाद मौतके घाट उतार दिया था। बीते 6 जुलाई को उसका शव कोटखाई के जंगल मे नग्न अवस्था मे बरामद हुआ था। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। चूंकि आरोपियों में ज्यादातर नेपाली ओर उत्तराखण्ड के मज़दूर थे, लिहाज़ा पुलिस की जांच पर सवाल उठे थे।

आरोपियों में से एक कि पुलिस हिरासत में हत्या के बाद गुस्साए लोगों ने कोटखाई थाने को जलाने की कोशिश की थी।  राज्य सरकार ने केस की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। दो दिन पहले हाई कोर्ट ने भी सीबीआई को इन दोनों केसों की जांच के आदेश दिए थे। उधर सीबीआई ने दो अलग -अलग मामले दर्ज होने की पुष्टि अधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में की है। फ़िलहाल सीबीआई ने बयान में एसआईटी के अधिकारियो के नाम नहीं बताये है ,केवल रैंक का ही जिक्र किया गया है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क की है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

बीजेपी के प्रदर्शन को लोगों ने बताया राजनीति, धूमल के वीडियो की आलोचना

शिमला।। शिमला के कोटखाई में हुई वारदात को लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए तो बीजेपी भी सक्रिय हुई और उसने शिमला बंद का आह्वान कर दिया। बीजेपी द्वारा जगह-जगह किए गए और अब भी किए जा रहे प्रदर्शनों को जनता ने ‘राजनीति’ करार देना शुरू कर दिया है। इस मामले में लोगों ने जहां सरकार को निशाने पर लिया, वहीं विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। जनता के गुस्से के निशाने पर मुख्यमत्री वीरभद्र सिंह के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार धूमल हैं। धूमल ने हमीरपुर से एक वीडियो शेयर किया था जिसे लेकर उन्हें जबरदस्त आलोचना का सामना करना पड़ा।

 

बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर एक वीडियो डाला गया है जिसमें वह नारे लगाते नजर आ रहे हैं। नारों की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है- गुड़िया हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं। इसके बाद वीरभद्र सिंह इस्तीफा दो और हम क्या चाहते- इंसाफ के नारे लगे। आगे नारा लगता है- जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।

इस वीडियो पर नजर डालें तो टॉप कॉमेंट्स में दूर-दूर तक समर्थन वाला कॉमेंट नहीं दिखता। अधिकतर लोगों ने आलोचना की है और कहा है कि इस मामले में राजनीति न की जाए। एक यूजर ने लिखा है कि आप सीएम होते तो क्या करते। एक अन्य ने लिखा है कि मैं बीजेपी का समर्थन करता हूं मगर यह गलत है। आगे एक यूजर ने लिखा है- धूमल जी शर्मिंदा तो आफ लोग हैं, आप कॉलेज के लड़के नहीं हो कि ऐसे नारे लगा रहे हो।

इस वीडियो पर आए कुछ कॉमेंट्स इस तरह से हैं-

इस मामले में अन्य टिप्पणियों को आप वीडियो पर जाकर पढ़ सकते हैं। बहरहाल, बीजेपी पर राजनीति करने के आरोप तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पार्टी की तरफ से 20 तारीख को शिमला बंद का आयोजन हो गया था और अब सीबीआई ने भी मामला संभाल लिया है तो उसके बाद भी प्रदर्शनों का क्या मतलब है। गौरतलब है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक राजीव बिंदल नाहन में डीसी ऑफिस में घुसकर भाषण देने के बाद वहीं धरने पर बैठ गए तो पालमपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं पर बस चालक को पीटने का आरोप लगा है। वहीं प्रदर्शन के दौरान एक पार्षद पर सचिवालय पर पथराव करने का आरोप भी लगा है।

सौम्या सांबशिवन: सख्त मगर संवेदनशील पुलिस अधिकारी

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में उठ रहे सवालों को देखते हुए शिमला के एसपी समेत कई अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। अब सौम्या सांबशिवन को एसपी शिमला बनाया गया है जो इससे पहले सिरमौर की एसपी थीं और उनका ट्रांसफर कांगड़ा किया गया था। सौम्या सांबशिवन के रूप में शिमला को 72 साल में पहली महिला एसपी मिली हैं। सौम्या शिमला की 53वीं एसपी हैं।

 

आईपीएस ऑफिसर सौम्या को शिमला की जिम्मेदारी ऐसे वक्त मिली जब प्रदर्शनों का दौर जारी था। गुरुवार उन्होंने कार्यभार संभाला और कुछ ही समय में सचिवालय की तरफ चली गईं क्योंकि वहां प्रदर्शन शुरू हो गया था। दिन भर वह मौके सो संभालतीं और पुलिसकर्मियों को जरूरी निर्देश देती नजर आईं।

कौन हैं सौम्या
सौम्या सांबशिवन मूल रूप से केरल की हैं। अपने पैरंट्स की इकलौती बेटी हैं सौम्या। वह बायॉलजी में ग्रैजुएशन करने के बाद एमबीएम फाइनैंस कर चुकी हैं। इसके बाद एक मल्टीनैशनल बैंक में भी काम किया। उनकी इच्छा थी लेखिका बनने की मगर बीच में उन्होंने सिलिल सर्विसेज के एग्जाम दिए और IPS अधिकारी बन गईं।

SP सौम्या सांबशिवन

सख्त मगर संवेदनशील ऑफिसर की है छवि
सिरमौर में एसपी रहने से पहले सौम्या शिमला में एएसपी भी रही हैं। यहां पर सीआईडी में भी सेवाएं दे चुकी हैं। साल 2006 का में एक प्रदर्शन के दौरान एक नेता को सौम्या ने हटने को कहा मगर जब वह हटा नहीं तो सौम्या ने खुद उसे पकड़कर हटाया और जेल भेजा। वहीं कुछ मामलों में जब लोग पुलिस पर भड़के तो उन्होंने मौके पर खुद जाकर लोगों से बात की और समझाया भी।

सिरमौर में तोड़ी नशे के कारोबार की रीढ़
सिरमौर की सीमाएं हरियाणा और उत्तराखंड से लगती हैं। ऐसे में यहां पर नशे के कारोबार से लेकर कई मामले सामने आते रहते हैं। मगर सौम्या के नेतृत्व में पुलिस ने यहां पर कई बड़े कारोबारियों को पकड़ा और नशीली चीजें भी बरामद कीं।

सौम्या सांबशिवन ने सिरमौर मे नशे के कारोबार की रीढ़ तोड़कर रख दी है

कई मर्डर मिस्ट्रीज़ को किया हल
एक काबिल पुलिस अफसर की पहचान यह होती है कि वह ब्लाइंड मर्डर केस को कैसे हल करता है। सिरमौर में रहते हुए उन्होंने 6 मर्डर मिस्ट्रीज हल की हैं जिनमें दो ब्लाइंड मर्डर केस थे। इनमें से एक अपराधी तो इतना शातिर था कि उसने तिहाड़ से छूटने के बाद अपराध किया था।

छात्राओं को देती हैं आत्मरक्षा की ट्रेनिंग
सौम्या छात्राओं को आत्मरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास की ट्रेनिंग भी देती हैं। वह बच्चियों को बताती हैं कि कैसे ऐसा स्प्रे तैयार किया जाए जिससे हमलावर को कुछ मिनटों के लिए अंधा किया जा सकता है। इस स्प्रे को घरेलू साजो-सामान से आसानी से बनाया जा सकता है और यह बहुत कारगर है।

HPS ऑफिसर DSP मनोज जोशी ने की थी शुरुआती जांच, जनता ने जताया था विश्वास

एमबीएम न्यूज, शिमला।। कोटखाई में हुई वारदात ने हिमाचल प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन हिमाचल में पहले भी हुए हैं, मगर इस घटना में भारी जन-सैलाब उमड़ा। दरअसल लोगों की नाराजगी पुलिस की कार्रवाई को लेकर है। बीजेपी नेताओं समेत कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि असल आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है। मगर इस मामले में एक अधिकारी ऐसा भी है, जिसकी जांच पर जनता को विश्वास था। दरअसल शुरुआती जांच एचपीएस ऑफिसर मनोज जोशी (डीएसपी ठियोग) कर रहे थे।

 

2011 बैच के एचपीएस अधिकारी मनोज जोशी 29 सितंबर 1981 को नाहन में जन्मे हैं। इससे पहले वह कांगड़ा में डीएसपी रह चुके हैं। 2008 में उन्होंने HAS की परीक्षा पास की, लेकिन एचपीएस में आने का मौका नहीं मिला। लिहाजा नौकरी के साथ-साथ एचएएस की तैयारी में जुटे रहे। तीन साल बाद उस वक्त सफलता मिली, जब एचएएस में चयन हुआ, मगर प्रशासनिक अधिकारी बनने की बजाय मनोज ने एचपीएस की राह को चुना।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले जोशी अपने स्वभाव, निष्पक्षता व ईमानदारी के कारण लोगों का दिल जीत लेते हैं। दीगर है कि जहां सोशल व प्रिंंट मीडिया में प्रशासन की किरकिरी हो रही थी, वहीं डीएसपी मनोज जोशी के प्रति लोगों ने कोई नाराजगी जाहिर नहीं की। अपनी प्रोफेशनल दक्षता में जोशी काफी माहिर हैं। गुडिया प्रकरण की जांच के दौरान भी हर कदम फूंक-फूंक कर तो रख ही रहे थे, साथ ही अपने स्तर पर मेहनत में लगे रहे। इसी साल मार्च में कोटखाई में हुए एक डबल मर्डर केस को भी उनकी टीम ने 12 घंटों के अंदर सुलझाकर आरोपी को दबोच लिया था (पढ़ें)।

कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में आरोप यह लगा था कि एसआईटी के गठन के बाद जांच प्रभावित हुई है और इससे पहले जोशी के नेतृत्व में जांच ठीक चल रही थी। इस बारे सोशल मीडिया में सैंकड़ों कमेंटस भी लिखे गए। बहरहाल अब इस मामले की जांच युवा डीएसपी मनोज जोशी को नहीं करनी है, क्योंकि अब मामला सीबीआई के पास है और उसने तफ्तीश शुरू कर दी है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क का आर्टिकल है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)

शिमला केस: CBI ने दर्ज की FIR, जांच के लिए शिमला पहुंची टीम

शिमला।। कोटखाई में हुए रेप ऐंड मर्डर केस की जांच के लिए सीबीआई शिमला पहुंच गई है। इस मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ में केस दर्ज किया है और जांच के लिए टीम का गठन भी कर लिया गया है। शनिवार से इस मामले की विधिवत जांच शुरू होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि पुलिस पहले इस मामले में अब तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की फाइलें देखेगी और उसके बाद जांच शुरू करेगी।

 

उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीआई की टीम आज घटनास्थल का मुआयना कर सकती है और साथ ही मृतक छात्रा के परिजनों से भी बात कर सकती है। हिदी अखबार पंजाब केसरी के मुताबिक सीबीआई की जांच टीम का नेतृत्व एसपी राम गोपाल करेंगे और वह शिमला पहुंच गए हैं।

बताया जा रहा है कि सीबीआई टीम शुक्रवार को ही शिमला पहुंच गई थी। इनमें से एक दस्ता कोटखाई पहुंच चुका है और दूसरा शिमला में है। खबरों के मुताबिक पुलिस हिरासत में मारे गए नेपाल मूल के आरोपी सूरज की पत्नी से भी सीबीआई टीम ने जानकारी हासिल कर ली है और उसे सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है।

मृतक आरोपी के शरीर पर मिले डंडे और बेल्ट के निशान: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। कोटखाई में पुलिस हिरासत में लॉकअप में मारे गए नेपाल पूल के आरोपी सूरज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर नई जानकारी सामने आई है। हिंदी अखबार दैनिक जागरण के पहले पन्ने पर छपी खबर के मुताबिक सूरज की पीठ व अन्य हिस्सों पर बेल्ट के निशान थे। अखबार ने लिखा है कि पुख्ता सूत्रों के मुताबिक ऐसा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल रहा है। सिर पर किसी तेज हथियार से हमला करने के बारे में कोई भी सबूत नहीं है। सूरज के गुप्तांग में मामूली चोटें रिपोर्ट में साफ जाहिर हुई हैं। (कवर इमेज सांकेतिक है)

 

अखबर लिखता है कि आरोपी को जेल के अंदर रखा जाता है तो उसकी बेल्ट, कलम या अन्य संवेदनशील वस्तुओं को अलग रख लिया जाता है। ऐसे में सूरज के शरीर पर ये निशान कैसे आए, यह प्रश्न बना हुआ है। अखबार लिखता है कि उसकी दोनों टांगों में डंडों के निशान भी मिले हैं। प्रश्न उठाते हुए अखबार लिखता है- सवाल उठ रहा है कि सूरज की मौत कहीं पुलिस रिमांड में मारपीट से तो नहीं हुई। हालांकि पुलिस महानिदेशक ने किसी भी आरोपी को थर्ड डिग्री से इन्कार किया था।

आगे सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि पहले सूरज को दो आरोपियों सुभाष और राजू से अलग रखा था, लेकिन मौत से करीब एक घंटे पूर्व ही इन्हें एक लॉकअप में लाया गया। जिस लॉकअप में शव मिला था, वहां खून के निशान भी नहीं पाए गए। अगर राजू का सिर जमीन पर पटका गया तो फिर सिर से खून क्यों नहीं निकला।’

दूसरी तरफ इस मामले में अमर उजाला अखबार में छपी खबर में कहा गया है कि सूरज की मौत एक नहीं बल्कि तीन वजहों के कारण हुई थी। अखबार लिखता है- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार पुलिस कस्टडी में मौत सिर पर चोट लगने, गला दबाने और प्राइवेट पार्ट पर वार से हुई है। ईजीएमसी शिमला में शुक्रवार को जज की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा के बीच हुए सूरज के पोस्टमॉर्टम में यह खुलासा हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सूरज से हिरासत में जमकर मारपीट की बात सामने आई है।

होशियार सिंह केस: जहर को लेकर पुलिस की जांच पर उठे सवाल

शिमला।। शिमला के कोटखाई में हुए जघन्य अपराध के मामले में पुलिस पर उठ रहे सवालों पर भले ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश पुलिस को सक्षम बताते हुए कहते हैं कि वह हर जांच में समर्थ है, होशियार सिंह मामले में अब तक कई जांच टीमें बदलने के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। पहले तो मीडिया और जनता के बीच ही पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे थे, मगर अब मामले का स्वत: संज्ञान लेने वाले हाई कोर्ट में भी पुलिस की जांच पर कई सवाल खड़े हुए हैं।

‘जहर को लेकर जांच नहीं’
शुक्रवार को होशियार सिंह केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की तरफ से नियुक्त न्याय मित्र (Amicus Curiae) ने पुलिस और एसआईटी की जांच पर कई सवाल खड़े किए। न्याय मित्र ने कहा कि पुलिस ने जांच में यह नहीं जोड़ा कि होशियार सिंह ने कथित तौर पर जो जहर खाया, वह आया कहां से। यह जांच नहीं की गई कि इसे किसने बेचा और किसने खरीदा।

मौत के सही समय पर उठे सवाल
यही नहीं, न्याय मित्र ने सवाल किया कि अगर 5 जून को सुबह करीब 9 बजे होशियार सिंह ने एक अध्यापक के घर दाल चावल और आलू-मटर खाए थे, तब 10 तारीख हो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी होशियार के पेट में यही चीजें पाई गईं। चूंकि मेडिकल साइंस कहती है कि खाना आमतौर पर 4 से 6 घंटों में पच जाता है, मगर जहर खाने पर यह प्रक्रिया देरी से पूरी होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि होशियार की मौत का सही वक्त क्यों है, क्योंकिं इससे मौत की असल वजह जानने में सहायता मिलेगी।

उल्टियों को लेकर भी प्रश्न
एमिकस क्यूरी ने यह सवाल भी उठाया कि घटनास्थल पर बारिश हुई थी या नहीं, इस बारे में भी पुलिस ने कोई जांच नहीं की क्योंकि इसका कथित तौर पर होशियार सिंह द्वारा की गई उल्टियों के धुलने से इसका सीधा रिश्ता हो सकता है।

‘वन माफिया पर कार्रवाई नहीं हुई’
यही नहींं, वन माफिया पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और न ही कोई बड़ी गिरफ्तारी हुई, जिससे की मौत की वजह पता चल सके। गौरतलब है कि होशियार सिंह की मौत के मामले में पुलिस की प्रारंभिक जांच में हत्या का मामला दर्ज किया गया था, मगर बाद में इसे यह कहते हुए आत्महत्या के मामले में तब्दील कर दिया गया था कि होशियार सिंह के सुसाइड नोट मिले हैं। मगर पुलिस यह बताने में नाकाम रही थी कि आखिर होशियार सिंह ने अगर जहर ही खाया था, तो उसका शव पेड़ पर ऊंचाई पर उल्टा कैसे लटका हुआ था। सवाल यह भी उठे थे कि इलाके में बारिश होने के बाद भी बैग में सुसाइड नोट गीले या खराब क्यों नहीं हुए थे। इन्हीं सवालों को लेकर जनता आंंदोलन भी कर चुकी है।

बता दे कि इससे पहले सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने मांग की थी कि हाईकोर्ट होशियार सिंह मौत मामले की जांच की निगरानी खुद करे। इस पर सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा था कि अगर मामले की जांच पर कोई सवाल खड़े होते हैं तो किसी अन्य एजेंसी से जांच करवाने में उसे कोई आपत्ती नहीं होगी।

2 अगस्त को अगली सुनवाई
शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की बेंच ने सभी पक्षकारों को एमिकस क्यूरी द्वारा उठाए गए सवालों और सुझावों पर एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को होगी।

शिमला में बीजेपी पार्षद पर लगा प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी करने का आरोप

शिमला।। गुरुवार को शिमला में बीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक पार्षद पर पत्थरबाजी करने का आरोप लगा है। कई मीडिया आउटलेट्स ने बताया है कि भीड़ का नेतृत्व करते हुए बीजेपी के यह पार्षद नारे लगाते हुए प्रदेश सचिवालय की तरफ बढ़ रहे थे। तभी उन्होंने भीड़ से कुछ कदम आगे चलकर पत्थर फेंका। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है।

हिंदी अखबार अमर उजाला की खबर के मुताबिक वीडियो में सफेद-कुर्ता पायजामा पहनकर पत्थर फेंकने वाला यह शख्स भाजपा पार्षद शैलेंद्र चौहान हैं। वह लगातार दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं और इस बार डिप्टी मेयर पद के लिए दावेदार भी थे। अखबार लिखता है कि पत्थर जेब से निकालकर फेंका गया। पहला पत्थर फेंकने के बाद कुछ और लोग पत्थर ढूंढते हुए वीडियो में नजर आ रहे हैं। नीचे देखें, एक शख्स द्वारा शेयर किया गया वीडियो।

अमर उजाला अखबार इस बारे में जब पार्षद शैलेंद्र चौहान से बात की तो उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शन में जरूर थे लेकिन उन्होंने पत्थर नहीं मारा। मगर अखबार लिखता है कि पार्षद की इस हरकत को मौके पर कई लोगों ने देखा और हैरान रह गए। क्या पार्षद पत्थर फेंककर भीड़ को उकसाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने पहले खुद पत्थर फेंक कर पहल की? यह जांच का विषय है। गौरतलब है कि अगर भीड़ पार्षद की तरह ही पत्थरबाज बन जाती तो मौके पर स्थिति बेकाबू हो सकती थी।

मुख्यमंत्री वीरभद्र के समर्थन में आए कौल सिंह ठाकुर

शिमला।। गुड़िया प्रकरण में पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। अभी तक इस मामले में सिर्फ मुख्यमंन्त्री वीरभद्र सिंह ही मीडिया के सवालों के जबाब दे रहे थे और बाकी मंत्री और सिपहसलार इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुप्पी धारण किये हुए थे। मगर अब कौल सिंह मुख्यमंत्री के समर्थन में आए हैं।

 

गौरतलब है कि जी.एस. बाली तो पहले से ही इस मामले में सरकार से अलग रुख अपनाये हुए थे परन्तु मुख्यमंत्री के खास सीपीएस नीरज भारती भी इस मामले में सरकार और मुख्यमंन्त्री के रुख से नाराज नजर आए। इसी बीच अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने सीएम वीरभद्र सिंह की बात का समर्थन किया और विपक्ष पर राजनीति का आरोप लगाया।

कौल सिंह ने कहा कि बीजेपी के विरोध प्रदर्शनों से गुड़िया की आत्मा को ठेस पहुंच रही है। साथ ही उन्होंने जोड़ा सरकार इस मामले में पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस का साथ देते हुए दोबारा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में पार्टी को सत्ता सौंपेगी।

शिमला केस में मृतक आरोपी की पत्नी ने दिया सनसनीखेज बयान

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस को लेकर हिंदी अखबार दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट नया ऐंगल लेकर आ गई है। अखबार लिखता है- ‘कोटखाई में बच्ची से दरिंदगी के एक आरोपी की लॉकअप में हत्या के बाद दैनिक भास्कर के संजीव महाजन ने उसकी पत्नी ममता से जाना कि आखिर हुआ क्या था। ममता ने जो कहा, वह इस केस में रईसजादों को बचाने की ओर इसारा करता है। पढ़िए ममता की जुबानी।’ अखबार की इस कटिंग को अखबार के ही एक अन्य पत्रकार नरेंदर चौहान ने शेयर किया है।

 

नरेंदर ने इससे पहले पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए थे और उनकी पोस्ट वायरल हो गई थी। नरेंदर द्वारा अपनी टाइमलाइऩ पर शेयर की गई कटिंग को हजारों लोग शेयर कर चुके हैं। पढ़ें, क्या कहता है अखबार:

अगर आप अपने फोन पर अखबार की इस रिपोर्ट को नहीं पढ़ पा रहे हैं तो नीचे देखें: