बिलासपुर: बहन को न्याय के लिए भाई ने डाली ऑनलाइन याचिका

बिलासपुर।। बिलासपुर शहर के रौड़ा सेक्टर में पिछले दिनों क्षेत्रीय अस्पताल में तैनात फिजियोथेरपिस्ट ज्योति ठाकुर का शव क्वॉर्टर में फंदे पर लटका मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पहले परिजन जहां पोस्टमॉर्टम और फंदे पर लटककर खुदकुशी करने को लेकर सवाल उठा रहे थे, अब change.org पर एक ऑनलाइन याचिका डाली गई है।

 

इस ऑनलाइन याचिका में हमीरपुर के आशीष ठाकुर, जो खुद को ज्योति का भाई बताते हैं, ने कहा है कि वह पुलिस और प्रशासन से सारी उम्मीदें खो चुके हैं। वह आरोप लगाते हैं कि मेरी बहन की निर्ममता से हत्या हुई है। उन्होंने याचिका में अंग्रेजी में लिखा है- I am a citizen of district Hamirpur, himachal pradesh under grave stress and lost all hope in police and administrations.My sister was brutally murdered and local police and administrtaion are hell bent to prove that this is a case of sucide.it has been six days that we have not been postmortem and foresnic report.we urge you with deep sorrow to interfere in this matter get us justice.

इससे पहले शुक्रवार को मामले को लेकर एडवोकेट परवेश चंदेल के नेतृत्व में लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था। इस ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों ने उक्त फिजियोथेरपिस्ट के रात के समय आनन-फानन में हुए पोस्टमार्टम व फंदे पर लटक कर आत्महत्या करने पर सवाल उठाए थे।

 

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि मामले की सारी सच्चाई जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि गत 6 सितंबर को उक्त फिजियोथैरेपिस्ट रौड़ा सैक्टर स्थित निजी क्वार्टर में फंदे पर लटकी हुई पाई गई थी। उन्होंने कहा कि अज्ञात सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वहां पर पुलिस व फोरैसिक टीम ने जांच की थी । उसकी मृत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई है। जिसमें हत्या से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

Image: MBM News Network

उनका कहना था कि इतना ही नहीं, उसी शाम को करीब साढ़े 8 बजे क्षेत्रीय अस्पताल में उसके शव का पोस्टमॉर्टम कर दिया गया जबकि नियमानुसार सूर्यास्त के पश्चात शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जाता। संयोगवश उसी दिन शव गृह में रखे गए अन्य शव का पोस्टमार्टम चिकित्सक द्वारा 6 सितंबर की बजाय 7 सितंबर को किया गया । उन्होंने कहा कि 6 सिंतबर को तेज बारिश, आंधी व बिजली कट हुई थी। फिर भी पुलिस व चिकित्सकों द्वारा पोस्टमॉर्टम को अंजाम दिया गया।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि उक्त पोस्टमार्टम की गई वीडियोग्राफी और मृतक के कॉल डिटेल संदेह के घेरे में आए चिकित्सक की कॉल डिटेल की जांच भी की जाए ताकि न्याय मिल सके। इस संबंध में पूरी खबर आप यहां क्लिक करके हमारे सहयोगी पोर्टल ‘एमबीएम न्यूज नेटवर्क’ पर जाकर पढ़ सकते हैं।

बाली-सुधीर की मुलाकात की इस तस्वीर में कुछ खास दिखा आपको?

धर्मशाला।। रविवार को हिमाचल सरकार के कांगड़ा जिले से दो मंत्रियों की मुलाकात मीडिया में चर्चा का विषय बनी रही। परिवहन मंत्री जीएस बाली और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा न सिर्फ एक मंच पर आए बल्कि बाली ने सुधीर को छोटा भाई भी बताया। कहीं पर दोनों के बीच मीटिंग की चर्चा रही तो कहीं पर इसे ‘लंच डिप्लोमेसी’ का नाम दिया गया। राजनीतिक विश्लेषण तो आपको कहीं और भी पढ़ने को मिल जाएंगे, मगर हम आपका ध्यान राजनीति से थोड़ा हटाना चाहते हैं। नीचे की तस्वीर को ध्यान से देखिए। क्या आप समझ पाए कि बीच में बैठा शख्स क्या कर रहा है और मंत्री लोगों के हाथ में क्या है, जिसका वे लुत्फ उठा रहे हैं?

कुछ खास दिखा?

बीच में बैठे शख्स और लोगों के हाथों को गौर से देखिए। अगर आप नहीं समझ पाए तो आपको बता दें कि बीच में बैठे शख्स मलाई-बर्फ तैयार करते हैं और इस सभागार में मौजूद सभी लोग मलाई बर्फ का लुत्फ उठा रहे हैं। अगर आप समझ गए तब तो ठीक, मगर नहीं समझे तो हम आपको बता देते हैं कि मलाई बर्फ क्या है।

दरअसल हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मियों के दिनों में कुछ लोग आपको गले में एक बक्सा लिए घूमते मिल जाएंगे। इनके बक्से में दो रोल होंगे, जिसमें दूध या खोए की बनी आइसक्रीन होगी, एक छूरी होगी, हो सकता है छोटी सी तरकड़ी (तुला) भी तौलने के लिए और कुछ पत्ते होंगे। आमतौर पर टोर, बड़ (वटवृक्ष) या फेगड़े के पत्ते इस्तेमाल होते हैं।

कांगड़ा के गरली और आसपास के गांवों में इनकी मलाईबर्फ बहुत लोकप्रिय रही है।
कांगड़ा के गरली और आसपास के गांवों में इनकी मलाईबर्फ बहुत लोकप्रिय रही है।

छूरी से छोटी-छोटी सिल्लियां काटी जाती हैं और उन्हें पत्तों में सर्व किया जाता है। इसे खाने का मज़ा ही कुछ और है। ये हिमाचल में उस दौर से बिका करती हैं, जब क्वॉलिटी वॉल्स, वेडीलाल, मदर डेयरी या अन्य कंपनियों की आइसक्रीम नहीं मिला करती थी। बस अड्डों से लेकर मंदिरों और मेलों तक में मलाई बर्फ या खोया बर्फ़ नाम से इसकी खूब बिक्री होती थी। आज भी प्रदेश के कई हिस्सों में मलाई बर्फी बेचने वाले मिल जाएंगे मगर लोगों की बेरुखी के कारण अब इसका चलन कम हो रहा है। उन्हें पैक्ड चीज़ें ज्यादा पसंद आने लगी हैं। मलाई बर्फ खाना उन्हें शायद ‘लो स्टैंडर्ड’ लगने लगा है और इसके पीछे वे हाइजीन को वजह बताने लगे हैं।

मगर इस तरह से एक कार्यक्रम में भुलाई जाने वाली चीज़ को संजोने और प्रोत्साहन देने के लिए आयोजक बधाई के पात्र हैं। साथ ही पाठकों से कहना चाहेंगे कि कभी इस तरह से किसी को मलाई बर्फ बेचते देखें, तो एक बार ट्राई ज़रूर करें। यकीन मानिए, एक अलग तरह का मज़ा आएगा।

जानें, In Himachal शव या मृतकों की तस्वीर क्यों नहीं दिखाता

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कुछ दिन पहले जब गुड़िया प्रकरण के दौरान पीड़िता की तस्वीरें शेयर कर रहे थे, In Himachal ने एक बार भी उस बच्ची की तस्वीर शेयर नहीं की। उस दौरान हमने बताया था कि यौन अपराधों के मामले में और खासकर जब पीड़ित या आरोपी तक नाबालिग हों, उनकी तस्वीर सार्वजनिक नहीं की जा सकती और ऐसा करना अपराध भी है। इस बारे में आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। साथ ही हम मामले से जुड़े गवाहों की भी तस्वीरें ब्लर कर देते हैं या नहीं दिखाते ताकि कहीं उन्हें किसी तरह का खतरा पैदा न हो। मगर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि In Himachal क्यों शवों की तस्वीर प्रकाशित करने से बचता है और यदि हम इस्तेमाल करते भी हैं, तब उसे ब्लर यानी धुंधला क्यों किया जाता है।

 

दरअसल In Himachal उन आदर्श मूल्यों का अनुसरण करने की कोशिश करता है जो हर पत्रकार को करने चाहिए। खून के धब्बे, शव, हादसों के वीभत्स चित्र… ये सब सभी पाठकों के लिए अनुकूल नहीं होते। कुछ पाठक विचलित हो सकते हैं। हो सकता है कि ज्यादातर पाठक मजबूत दिल वाले हों, मगर सभी के साथ ऐसा नहीं होता। हमें यह भी पता नहीं होता कि हमारे आर्टिकल को कौन किस वक्त पढ़ रहा है। इसलिए खून या भयावह दृश्य या विचलित करने वाली तस्वीरों की जगह हम प्रतीकात्मक तस्वीरें इस्तेमाल करते हैं या फिर उन्हें धुंधला कर देते हैं।

 

शव की तस्वीर दिखाना क्यों सही नहीं?
मृत व्यक्ति अगर इस दुनिया में नहीं रहा तो इसका मतलब यह नहीं कि हम उसे कैसे भी ट्रीट करें। मृत व्यक्तियों के शव से कैसा व्यवहार करना है, यह न सिर्फ नैतिक बल्कि कानूनी रूप से भी सम्मानजनक होना चाहिए। मृत व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखना जरूरी होता है। उसके शव से सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, फिर वह जीवित होते हुए कैसा भी रहा हो। इसीलिए हादसे, हत्या, आत्महत्या या अन्य परिस्थितियों में मृत व्यक्ति की ऐसी तस्वीर प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, जो सही नहीं हो। जो एक तरह से अपमानजनक हो। यह भी सोचिए कि उस व्यक्ति की वैसी तस्वीर देखकर उसके करीबी परिजनों पर क्या बीतेगी। यही कारण हैं कि हम यथासंभव सांकेतिक तस्वीरें इस्तेमाल करते हैं। मगर अफसोस, हिमाचल प्रदेश के अधिकतर ऑनलाइन पोर्टल और यहां तक कि प्रतिष्ठित अखबार तक मृतकों की वीभत्स तस्वीरें प्रकाशित करते हैं।

 

कुछ अपवाद भी हैं
कुछ मामलों में शव की तस्वीर दिखाना जरूरी हो जाता है। उदाहरण के लिए वनरक्षक होशियार सिंह के मामले में हमने तस्वीर में खून और चेहरे वाला हिस्सा धुंधला कर दिया था, मगर पेड़ से लटके शव की तस्वीर प्रकाशित की थी। ऐसा करना इसलिए जरूरी था ताकि पाठक देख सकें कि आखिर इस मामले में क्यों सवाल उठ रहे हैं। तस्वीर से पाठक समझ सकते थे कि खुदकुशी अगर की है तो शव पेड़ पर आखिर कैसे लटक सकता है, वह भी उल्टा।

अगर यह तस्वीर न दिखाई जाती तो जनता समझ न पाती कि मामले में सवाल क्यों उठ रहे हैं।

इसी तरह से हमने पिछले दिनों हमने एक बच्ची की तस्वीर दिखाई थी, जिसे उसके पिता ने कथित तौर पर नदी में फेंक दिया था। हमें जानकारी मिली थी कि जब यह तस्वीर ली गई और बच्ची को अस्पताल पहुंचा गया, तब तक उसकी सांसें चल रही थीं। साथ ही वह तस्वीर हृदय विदारक थी। अगर पाठकों तक यह संदेश देना है कि देखिए, कितनी प्यारी बच्ची हैवानियत की शिकार हो गई, तब उस तस्वीर को हमने अगली खबर में भी लगाने का फैसला किया। यह ठीक उसी तरह की बात है, जैसे मासूम बच्चे आलियान कुर्दी का शव जो समंदर किनारे गिरा था, उसकी वैसी तस्वीर सामने न आती तो पूरी दुनिया में रिफ्यूजियों की समस्या की तरफ ध्यान नहीं जाता।

पूरी दुनिया में तस्वीरों को ऐसे ही प्रकाशित किया गया, मगर In Himachal अब भी मानता है कि इस तस्वीर में बच्चे के शव को धुंधला करना ज़रूरी है।

नियम तोड़ने की वजह होनी चाहिए
दरअसल अगर आप अपने द्वारा खुद के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ते हैं तो ऐसा करने के लिए आपके पास संपादकीय रूप से अहम कारण होने चाहिए। ऐसा नहीं कि हर तस्वीर को अपवाद बनाकर हम तस्वीरें लगाने लगें। आगे भी हम इन्हीं मूल्यों को ध्यान में रखते हुए काम करेंगे। साथ ही ऑनलाइन या ऑफलाइन या किसी भी तरह के मीडिया साथियों से अनुरोध है कि वे भी कोशिश करें कि कम से कम वीभत्स तस्वीरें या वीडियो न डालें।

महिला ने पति पर लगाया 3 तलाक देकर नाबालिग से शादी करने का आरोप

चंबा।। तीन तलाक पर रोक के बावजूद हिमाचल प्रदेश के चंबा में एक मामला सामने आया है। एक मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने घर के कुछ सदस्यों के साथ बैठकर उसे एकतरफा तलाक दे दिया। यह महिला 10 महीने का बच्चा लिए न्याय के लिए जगोरी कार्यालय पहुंची थी। उसने आरोप लगाया कि न सिर्फ उसे तलाक दिया है बल्कि उसके शौहर ने एक नाबालिग युवती से निकाह भी कर लिया है।

 

आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि उसे एकतरफा तलाकनामे की सूचना दी गई है। ऐसे में शिकायत पर नारी अदालत ने इस तलाक को गैरकानूनी करार देते हुए कहा है कि वह अपने घर जाकर रहे। कोर्ट यह भी देख रहा है कि तलाकनामे की तारीख कोर्ट के आदेश से पहले की है या बाद की। पीड़िता का कहना है कि उसे अगस्त में तलाकनामा हो जाने की सूचना दी गई थी। उसके शौहर ने घर के चार अन्य लोगों के साथ बैठकर यह कह दिया कि अब तुम मेरी पत्नी नहीं रही।

प्रतीकात्मक तस्वीर

महिला ने कहा कि अब मेरे पति ने एक नाबालिग लड़की से शादी कर ली है, ऐसे में मैं अपने बच्चे को लेकर कहां जाऊं। नारी अदालत ने कहा है कि मामले की जांच होगी और उस लड़की की भी जांच की जाएगी, जिसके नाबालिग होने की बात कही जा रही है।

कुल्लू: बच्ची को नदी में फेंककर मारने के आरोप में पिता गिरफ्तार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। सरबरी नदी में मिली मासूम बच्ची के शव की पहचान कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक यह बच्ची लगवैली के सरली निवासी ज्ञान सिंह की बेटी टीना था, जिसकी उम्र 1 साल 2 महीने थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि मासूम को उसका पिता ही सरबरी नदी में जिंदा फैंक गया था। वह भी इसलिए, क्योंकि बच्ची रोना बंद नहीं कर रही थी।

 

कुल्लू थाना के प्रभारी अशोक शर्मा ने बताया कि अब तक की छानबीन में पुलिस ने पाया है कि मासूम लड़की को उसका पिता ही सरबरी नदी में फेंक गया था। जिसके चलते पुलिस ने सूम के पिता को ज्ञान चंद उर्फ ज्ञानू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है।

पकड़ा गया आरोपी (Image: MBM News Network)

उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति के तीन बच्चे पहले ही हैं, जिसमें दो लड़कियां और एक लड़का शामिल है। मासूम टीना आरोपी की चौथी और सबसे छोटी बेटी थी। अशोक ने बताया कि छानबीन में यह भी तथ्य सामने आए हैं कि ज्ञान चंद की पत्नी करीब एक सप्ताह पहले छोड़कर मायके चली गई थी और पीछे से ज्ञान अपनी सबसे छोटी बच्ची की देखभाल नहीं कर पा रहा था। जब लड़की रोने लगी तो वह उसके सरबरी नदी में जिंदा फैंक कर आया।

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इस कारण बच्ची काफी दूर तक बहती हुई आई और नदी किनारे सफाई अभियान को अंजाम दे रही महिलाओं ने उसे नदी से निकालकर अस्पताल लाया, जहां उसकी मौत हो गई थी। हादसे के पांचवे दिन शिनाख्त होने के बाद मासूम का शव चाचा के सुपूर्द कर दिया है। उधर पुलिस ने पिता के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मासूम की मां को भी पुलिस थाने तलब किया गया है। मां से भी पूछताछ की जाएगी।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

गुड़िया केस: हिमाचल सरकार ने CBI को 12 लाख का बिल भरने को कहा

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआई टीम से हिमाचल प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर 12 लाख रुपये का बिल भरने के लिए कहा है। मामले की जांच कर रही सीबीआई हिमाचल सरकार द्वारा चलाए जाने होटल वीटरहॉफ में ठहरी हुई है। टीम ने 6 कमरे लिए हुए हैं।

 

अंग्रेजी अखबार एचटी ने हिमाचल प्रदेश टूरिज़म डिपार्टमेंट कॉर्पोरेशन के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह बिल सीबीआई द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहनों को लेकर है। अखबार के मुताबिक मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि ‘सीबीआई ने जो टैक्सी इस्तेमाल की, उसका बिल 10 लाख रुपये के करीब है. हमने उन्हें बिल दे दिए हैं.’

 

गौरतलब है कि पिछले दिनों गुड़िया मामले की हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी तो हिमाचल सरकार के वकील ने सीबीआई के अधिकारियों के हिमाचल सरकार के होटल में रुकने पर आपत्ति जताई थी। इसपर सीबीआई ने कहा था कि ऐसे मामलों में सुविधाएं आदि मुहैया कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।

सलाम: ऑफ रोड बाइकिंग कर जंगल में पहुंचकर बच्चों को लगाए टीके

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। जंगल के बीच कच्ची सड़क, जो सड़क कम ही लगती है। इस पर दो बाइक सवार जा रहे थे। पीछे एक महिला बैठी थी, जिसके हाथ में वैक्सीन कैरियर था। बाइक को चला भी एक महिला ही रही थी और उसने टंकी पर एक और वैक्सीन कैरियर रखा हुआ था। वहीं एक और महिला इस तरह के वैक्सीन कैरियर को लेकर पैदल ही चल रही थी।

 

यह नज़ारा दिखा हिमाचल प्रदेश के मंडी में। और इस कारनामे को अंजाम देने वाली हैं महिला स्वास्थ्य कर्मी गीता वर्मा, गीता भाटिया और प्रेमलता भाटिया। आजकल हिमाचल प्रदेश में खसरा-रुबैला का वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। इसमें सभी बच्चों का टीकाकरण जरूरी है। मगर जंगलों में रहने वाले घुमंतू गुज्जरों के बच्चों के टीकाकरण से वंचित रहने से पूरा अभियान फेल न हो जाए, िसके लिए गीता वर्मा ने ऑफ रोड ही बाइक चलाकर जाने का फैसला किया। उनके सात गीता भाटिया बैठीं और प्रेमलता पैदल आईं।

 

बता दें कि घुमन्तु गुज्जर एक ऐसा कबीला है जो अधिकतर जीवन जंगलो में ही गुजर करता है, जिनका आम लोगो से काफी कम सम्पर्क होता है। मंडी जिला की जंजैहली उपमंडल के शिकारी देवी के जंगल में स्वास्थ्य कर्मियों की कोशिश वाकई ही लाजवाब है। तीनों ही महिलाओं की हिम्मत की दाद इस कारण देनी होगी क्योंकि जंगल से गुजरना बेहद ही खतरनाक था, क्योंकि हर वक्त जंगली जानवरों के हमले का साया मंडरा रहा था।

टीकाकरण के बाद स्वास्थ्यकर्मी (MBM News Network)

शिद्दत से की गई कोशिश भी रंग लाई, क्योंकि अमूमन गुज्जर समुदाय इस तरह के कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी के लिए आनाकानी करता है। लेकिन गीता वर्मा के साथ गीता भाटिया व प्रेमलता भाटिया के हौंसले को देखकर 48 पात्र बच्चों का टीकाकरण किया गया।

 

करसोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत गीता वर्मा की तैनाती सब सेंटर शंकर देहरा में है। पहले करसोग पहुंची जहां से वैक्सीन बॉक्स के साथ अन्य सामान बाइक पर लादकर मंजिल की तरफ निकल गई। 5 सितंबर को घुमंतू गुज्जरों के बच्चों का सफल टीकाकरण करने के बाद जब वापिस लौटी तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी गीता की प्रशंसा में जमकर सामने आएं। एमआर वैक्सीनेशन के पश्चात घुमंतु गुज्जरों के साथ गीता देवी।

 

गीता बताती हैं कि ऑफ रोड बाइक चलाने के दौरान हेलमेट पहनना संभव नहीं था, न केवल बाइक पर सामान लदा हुआ था बल्कि संतुलन रखना भी जरूरी था। उनका कहना था कि पगडंडी के दोनों हिस्सों पर नज़र रखना जरूरी था, मगर हेलमेट से उसमें दिक्कत आ रही थई।

 

गीता वर्मा ने बताया कि उन्होंने अपना कार्य निष्ठा से निभाने की कोशिश की। उन्हें कतई भी अंदाजा नहीं था कि विभाग से प्रशंसा मिलेगी। हैलमेट के बारे में गीता ने कहा कि वह हर तरह का दोपहिया वाहन चला लेती है, साथ ही चोपहिया वाहन की ड्राइविंग भी कर लेती है। इसके लिए उनके पास लाइसेंस भी है।

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गीता वर्मा के पति केके वर्मा, हिमाचल प्रदेश पुलिस में शिमला में तैनात है। उन्होंने बताया कि ऑफ रोड बाइकिंग के अलावा 2 से 3 किलोमीटर पैदल भी चलना पडा, क्योंकि गुज्जरों की बस्तियां फैली हुई थी। डर के बारे में पूछे जाने पर गीता वर्मा ने कहा कि ड्यूटी जरुरी थी क्योंकि देश को नौनिहालों की सुरक्षा की बात थी।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

बिंदल सुंदर नारी नहीं कि नाहन की जनता बार-बार मोहित हो जाए: वीरभद्र

सिरमौर।। सिरमौर दौर पर गए हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फिर एक बार ऐसी मिसाल दी है, जो अनावश्यक और सेक्सिस्ट थी। नाहन से बीजेपी विधायक राजीव बिंदल पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बिंदल कोई सुंदर नारी नहीं, जो नाहन की जनता उन पर मोहित हो जाए।‘ इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि पैसे के दम पर राजीव बिंदल ने चुनाव जीते हैं।

 

महिलाओं से तुलना करना ठीक नहीं
उनके कहने का अर्थ जो भी हो, उनका यह मिसाल देने कहीं न कहीं महिलाओं और जनता के लिए अपमानजनक है। महिलाओं के आधार पर इस तरह के बयान देने को Sexist यानी लिंग के आधार पर भेदभाव या छांटीकशी करने वाला माना जाता है। इस तरह की टिप्पणियां न सिर्फ महिलाओं, बल्कि लोकतंत्र और जनमत का अपमान भी है। क्या वीरभद्र यह कहना चाहते थे कि जनता का किसी नेता को चुनना उसपर मोहित होना है और बार-बार मोहित होने पर ही कोई नेता जीतता है? तो मुख्यमंत्री खुद कैसे बार-बार जीतते रहे हैं? और क्या कोई महिला नेता अगर-अगर बार जीतती है तो वह अपनी सुंदरता की वजह से जीतती है? जनता को मोहित करके जीतती है?

 

बहरहाल, राजीव बिंदल ने भी इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने नारी जाति का अपमान किया है और उन्हें राजनीति से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने नाहन और सिरमौर की जनता को बिकाऊ कहकर उनका अपमान किया है और सिरमौर के कांग्रेसी नेताओं को भी काली भेड़ें कहकर उन्हें अपमानित किया है।’

 

उन्होंने मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोलन के बाद बिंदल ने नाहन के लोगों को ठगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं बाहर से आकर दूसरे स्थानों पर बसने के खिलाफ हूं। इस पर बिंदल ने कहा है कि मेरे पर निशाना साधने वाले वीरभद्र सिंह ने अपने तंबू रामपुर से उखाड़कर रोहड़ू में लगाए। रोहड़ू से उखाड़ कर शिमला ग्रामीण में लगाए और अब जहां भी वे तंबू लगाएंगे जनता उनका तंबू हमेशा के लिए उखाड़ देगी।

मुख्यमंत्री देते रहे हैं अमर्यादित मिसालें
शायद उम्र जिम्मेदार है या कुछ और वजह है, मुख्यमंत्री लगातार अजीब बयान दे रहे हैं। पिछले दिनों गद्दी समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी के कारण पार्टी की काफी फजीहत हुई है। नीचे देखें, मुख्यमंत्री के कुछ अजीब बयान-

मुख्यमंत्री ने गद्दी समाज का जिक्र करते हुए सत्ती पर की टिप्पणी

सीएम ने सफाई कर्मचारियों का हवाला देकर बीजेपी पर तंज

गुड़िया केस में मुख्यमंत्री ने कहा ज्यादा होशियार बन रहे हैं लोग

महेश्वर सिंह ने पत्नी वाले बयान पर मुख्यमंत्री पर किया पलटवार

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नड्डा को बताया बदतमीज लड़का

मुझे वो दिन भी याद है जब सुक्खू पैदा हुए थे

वनरक्षक की मौत पर बोले सीएम- ऐसे मामले होते रहते हैं 

मुख्यमंत्री ने चौपाल के विधायक पर किए व्यक्तिगत कॉमेंट

स्वाइन फ्लू से मौतों पर मुख्यमंत्री का शर्मनाक बयान

वीरभद्र ने स्वर्गीय आई.डी. धीमान पर की टिप्पणी

मुख्यमंत्री ने बीजेपी विधायक पर निजी टिप्पणी

कार्यकर्ता पर मंच से ही भड़क गए मुख्यमंत्री

खराब सड़कों के सवाल पर मीडिया पर बिफरे सीएम

बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट वाली नड्डा की ईमेल का पूरा सच

शिमला।। दो दिन पहले बेंगलुरु से चलने वाले पोर्टल ‘वन इंडिया’ में एक खबर छपी- हिमाचल चुनाव: भाजपा प्रत्याशियों की सूची में वीरभद्र के मंत्री भी शामिल! इसमें दावा किया गया था कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल बीजेपी के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को एक ईमेल भेजकर बताया है कि किन लोगों को बीजेपी इस बार टिकट देगी। बाकायदा इसका स्क्रीनशॉट लगाया था जिसमें नड्डा और सत्ती की ईमेल आईडी नज़र आ रही थी। अब देखा-देखी में कई सारे पोर्टलों ने यह खबर चला दी। बता दें कि इस स्क्रीनशॉट वाला ईमेल ‘इन हिमाचल’ को भी आया था, मगर हमने पाया था कि इस स्क्रीनशॉट में कोई विश्वसनीयता नहीं है। और इसीलिए हमने फर्जी आईडी से आए ईमेल पर भरोसा नहीं करते। आज हम पाठकों को बताते हैं कि कैसे नकली स्क्रीनशॉट लिया जा सकता है।

 

अमूमन हम खुद को जानकारियां देने वालों का पता जाहिर नहीं करते और उनकी निजता बनाए रखते हैं। मगर चूंकि इस ईमेल में निजता बनाए रखने के लिए नहीं कहा गया था और राजनीतिक ईमेल था, इसलिए हम यहां गोपनीयता न बरतते हुए पारदर्शिता बरत रहे हैं। अन्य खुफिया सूचनाओं या पाठकों की तरफ से मिलने वाली अहम जानकारियों के मामले में हम उनकी पहचान छिपाए रखने की नीति को जारी रखेंगे। 30 अगस्त को हमारे पास himachalpradesh@protonmail.com से ईमेल आया, जिसे हमारे साथ info@hillpost.com को सीसी किया गया था। यही नहीं, जब हमने इसे नहीं छापा तो आज फिर सुबह 10.30 पर हमें इसने यही ईमेल फॉरवर्ड किया। इसमें दो स्क्रीनशॉट्स थे, जो नीचे हैं:

हमने सबसे पहले ईमेल अड्रेस की जांच की तो पता चला कि नड्डा और सत्ती इन्हीं ईमेल अड्रेस को इस्तेमाल करते रहे हैं और इंटरनेट पर बीजेपी की वेबसाइट्स पर उनके यही अड्रेस मेंशन किए गए हैं। यानी कोई भी जान सकता है कि इन नेताओं के पते क्या हैं। फिर उनके आधार पर स्क्रीनशॉट लेने के लिए फर्जी ईमेल दिखाना आसान है।

 

आप ऊपर से स्क्रीनशॉट्स देखेंगे तो लगता है कि नड्डा ने सत्ती को ईमेल भेजा है। और फिर इसे आगे फॉरवर्ड किया गया है। अब इस ईमेल को या तो सत्ती फॉरवर्ड कर सकते हैं या नड्डा। मगर दोनों ऐसा क्यों करेंगे। मगर इस फर्जी ईमेल का स्क्रीनशॉट बनाने वाला चालाक तो था, मगर एक हद तक। उसे लगता होगा कि हर कोई उसकी बातों पर यकीन कर लेगा और ऐसा हुआ भी। कुछ मीडिया पोर्टल्स ने खबरें छाप दीं। मगर हमने किस आधार पर पड़ताल की और क्यों इसे विश्वसनीय नहीं पाया, हम आगे बता रहे हैं-

 

फॉरवर्ड करते वक्त ईमेल अड्रेस भी एडिट हो सकते हैं
जब कभी आप किसी ईमेल अड्रेस को फॉरवर्ड करने लगते हैं, उसका टेक्स्ट नीला हो जाता है। साथ ही एडिट मोड ऑन हो जाता है, जिससे आप मूल ईमेल के कॉन्टेंट में बदलाव कर सकते हैं। यहां तक कि आप उन अड्रेस को भी बदल सकते हैं, जिनका मूल ईमेल में जिक्र है। यानी किसी बंदे ने पहले तो ईमेल आईडी के बीच फर्जी ईमेल भेजा, फिर उसे फॉरवर्ड करने लगा तो भेजने वाले की आईडी को एडिट करके वहां नड्डा की आईडी डाल दी और रिसीव करने वाली की आईडी की जगह सत्ती की। ठीक ऐसे ही, जैसे हमने आपको समझाने के लिए फर्जी स्क्रीनशॉट इसी तरीके से बनाया है।

पाठकों को यह समझाने के लिए बनाया गया ईमेल कि किसी मेसेज को फॉरवर्ड करने पर ईमेल अड्रेस को भी बदला जा सकता है।

बहरहाल, ये तो बाद की बातें हैं। In Himachal लिस्ट में शामिल नामों से ही समझ गया था कि इस मेल को तैयार करने वाली की राजनीतिक समझ इतनी कम है कि उसने जिन नामों को शामिल किया है, उनमें से कुछ को टिकट मिलने के आसान दूर-दूर तक नहीं हैं। साथ ही कुछ ऐसे नाम भी लिख दिए हैं, जिन्हें साफ टिकट मिलने तय हैं। मगर जोगिंदर नगर समेत कई ऐसी सीटें, जहां भ्रम की स्थिति बनी हुई है, वहां पर कैंडिडेट्स के नाम तक नहीं लिखे। 68 में से 31 नामों की ही लिस्ट?

कौन है ईमेल भेजने वाला
हमने खोजबीन आगे बढ़ाई। पता चला कि यह फर्जी ईमेल भेजने वाला संभवत: बीजेपी का ही कार्यकर्ता है। संभव है वह धूमल समर्थक खेमे का न हो और नड्डा समर्थक खेमे का हो। इसीलिए उसने इस लिस्ट में हमीरपुर में प्रेम कुमार धूमल की जगह उनके बेटे अरुण का नाम लिखकर यह संकेत देने की कोशिश है कि इस बार धूमल सीएम नहीं बनेंगे। वैसे कोई कितना भी चालाक बन जाए, सबूत छोड़ ही देता है।

 

जिस ईमेल आईडी से हमें यह ईमेल भेजा गया था, उस आईडी से फेसबुक पर एक प्रोफाइल बनी है- भ्रष्टाचार मुक्त हिमाचल, जिसका यूआरएल- https://www.facebook.com/himachal.sharma.180 है। आप himachalpradesh@protonmail.com को फेसबुक पर सर्च करके इस आईडी को ढूंढ सकते हैं। यानी हो सकता है कि किसी ‘शर्मा’ टाइटल वाले व्यक्ति ने यग प्रोफाइल बनाई हो। मगर इस प्रोफाइल को गौर से देखें तो डिस्प्ले इमेज में “धूमल और वीरभद्र के गले मिलने वाली तस्वीर” लगाई गई है और ऊपर कवर इमेज में पीएम मोदी के साथ सिर्फ नड्डा हैं। बहुत संभावना है कि नड्डा के किसी अनाड़ी समर्थक ने इस मनगढ़ंत लिस्ट बनाने का पूरा खेल रचा हो।

मगर अफसोस, हमारा मीडिया का कुछ हिस्सा बिना चीज़ों को वेरिफाई किए भ्रम फैला रहा है। वह भी तब, जब दूसरों की ईमेल आईडी के माध्यम से भ्रम फैलाना अपराध है और सज़ा मिल सकती है।

नदी के बीच पत्थरों में फंसी मिली बच्ची, अस्पताल में तोड़ा दम

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। जिला मुख्यालय कुल्लू की सरबरी नदी से एक मासूम बच्ची बरामद हुई। यह बच्ची पानी में पत्थरों के बीच फंसी हुई थी। इसे क्षेत्रीय अस्पताल लाया गया, मगर उसने दम तोड़ दिया। यह पता नहीं चल पाया है कि बच्ची किसकी है और यहां कैसे पहुंची। आसपास किसी ने बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी नहीं लिखवाई है।

 

बताया जा रहा है कि जब नगर परिषद के वॉर्ड नम्बर 7 में स्वच्छता अभियान चल रहा था,  उस दौरान सफाई अभियान को अंजाम दे रही महिलाओं ने नदी में एक पत्थर के बीच फंसी हुई दिखी। महिलाओं ने और लोगों ने नदी से बाहर निकाला।

Image: Social Media
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महिलाओं ने बताया कि उस समय मासूम की सांसें चल रही थी जिसके चलते उन्होंने अपनी गाड़ी में ही उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान कुछ देर बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया।

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बच्ची किसकी है इसका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है और न ही किसी ने अपनी बच्ची की गुमशुद्धगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जिससे मासूम का इस तरह ब्यास नदी में मिलना कई सवालों को जन्म दे रहा है। उधर, पुलिस ने मासूम के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय अस्पताल के डैड हाउस में रखा है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)