राहुल गांधी के लिए मंच से मां की गाली बोलने पर सतपाल सत्ती विवाद में

शिमला।। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की उस वीडियो के लिए कड़ी निंदा हो रही है जिसमें वह मंच से कथित तौर पर सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल की गई मां की गाली पढ़ते हुए नज़र आ रहे हैं। आलोचना हो रही है कि इस तरह का व्यवहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता।

कांग्रेस के नेताओं ने जहां भाजपा से मांग की है कि सतपाल सत्ती को पद से हटाया जाए, वहीं बीजेपी के नेता भी इस बयान को अपमानजनक मान रहे हैं। दरअसल सत्ती ने कहा कि सोशल मीडिया पर पंजाब के एक व्यक्ति ने राहुल के लिए लिखा था “अगर आप चौकीदार को चोर कहते हैं तो आप मादर#@ हैं।”

यह बात भले किसी और शख्स ने लिखी हो मगर सत्ती ने भरे मंच से कह दी। सभा में इतने सारे लोगों के सामने गाली का दोहराव करते समय सत्ती को ख्याल नहीं रहा कि यहां कौन-कौन बैठा है। नीचे वीडियो देखें, गाली की आवाज़ हमने हटा दी है।

सत्ती की इस बात को लेकर भी आलोचना हो रही है कि वह खुद राहुल का मजाक उड़ा रहे थे कि वह मंच से मर्यादा का उल्लंघन करके प्रधानमंत्री के लिए ‘चौकीदार चोर है’ का नारा लगाते हैं मगर बाद में उन्होंने खुद ऐसी बात कह दी जिसे कोई भी व्यक्ति चार लोगों के सामने न कह पाए।

यह पहला मौका नहीं है, जब सत्ती की जुबान फिसली है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने महात्मा गांधी पर अपमानजनक ढंग से बात की थी। उन्होंने गांधी जी को धोती, टोपी और लंगोट वाला कहकर संबोधित किया था।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सत्ती ने महात्मा गांधी पर की टिप्पणी

अनिल शर्मा ने बनना था सीएम, RSS की वजह से जयराम बन गए: सुखराम

मंडी।। शनिवार को द्रंग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस मंडल की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम,पूर्वमंत्री ठाकुर कौल सिंह व कांग्रेस लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी आश्रय शर्मा ने शिरकत की।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने मंच से हिमाचल सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “आज सीएम बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं। सीएम अनिल शर्मा ने बनना था लेकिन भाजपा में आरएसएस के दबदबे की वजह से जय राम ठाकुर को सीएम बनाया गया।”

सुखराम ने कहा, “हमारा परिवार भाजपा में शामिल हुआ था जिसके बाद हिमाचल में भाजपा की सरकार बनी और इसी वजह से अनिल शर्मा को सीएम बनना था।”

सुखराम ने कहा कि उनका जीवन अब अंतिम पड़ाव पर है और अब वे अपनी जगह जनता की सेवा के लिए अपने पोते आश्रय को समर्पित करते हैं ताकि वे भी यहां की जनता की सेवा कर सके और विकास के नए आयाम स्थापित कर सके।

‘मर्यादा भूल चुके जयराम’
इस दौरान आश्रय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वह सीएम की टिप्पणी से बहुत आहत हैं। आश्रय ने कहा, “आज सीएम जयराम ठाकुर अपनी सभी मर्यादा भूल चुके हैं। मेरे पिता अनिल शर्मा पहले भाजपा सरकार में मंत्री थे मगर जयराम उनका आज अपमान कर रहे हैं।”

आश्रय ने कहा, “मेरे पिता को सत्ता का मोह नहीं, तभी उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लेकिन आज हिमाचल के सीएम उनपर जो टिप्पणी कर रहे हैं, मैं उससे आहत हुआ हूं।”

‘रामस्वरूप को उजाले में भी नहीं पहचान रही जनता’
आश्रय ने कहा, ” रामस्वरूप हमारे बारे में कहते हैं कि रात के अंधेरे में भाजपा में शामिल हुए थे। इतना बता दे कि मंडी की जनता उन्हें उजाले में भी क्यों नहीं पहचान रही।”

पोते आश्रय के लिए प्रचार पर निकले पंडित सुखराम। जानें, बेटे अनिल शर्मा को लेकर क्या कहा उन्होंने।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 13, 2019

हिमाचल: मरने के बाद भी जातिगत भेदभाव, श्मशान घाट भी बंटे

इन हिमाचल डेस्क।। जातिवाद पूरे भारत की समस्या है। वैसे तो पूरी दुनिया विभिन्न आधारों पर अलग-अलग वर्गों, गुटों, संप्रदायों में बंटी है लेकिन भारत में जो जाति आधारित भेदभाव है, वैसा कहीं और देखने को नहीं मिलता। समय के साथ बहुत सारी चीजें बदली हैं मगर अब भी हालात ऐसे नहीं हैं कि हम गर्व से कह सकें कि हमारे देश में जाति के आधार पर भेदभाव या पक्षपात नहीं होता। हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं हैं। हाल की दो घटनाएं बताती हैं कि कैसे अभी भी जातिवाद को दूर करने के लिए बहुत प्रयास किए जाने की जरूरत है।

कुल्लू के फोजल इलाके के धारा गांव में तथाकथिक अगड़ी जाति के लोगों पर आरोप है कि पंचायत की ओर से सरकारी खर्चे पर बनाए गए श्मशान घाट पर उन्होंने दलित महिला के शव को जलाने से रोक दिया। इसके पीछे कथित तौर पर यह दलील दी गई कि अगर दलित महिला के शव को यहां पर जलाया गया तो देव प्रकोप से अगर कुछ भी होता है तो उसकी जिम्मेवारी शव जलाने वालों की होगी। ऐसा ही एक मामला नूरपूर के एक गांव का है जहां महिला की मौत हुई। गांव के एक परिवार ने सरेआम धमकी दी कि गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार न करे। बाद में पुलिस की मौजूदगी में महिला का अंतिम संस्कार करवाना पड़ा।

कुल्लू से अक्सर आती हैं भेदभाव की खबरें

गहरी हैं जातिवाद की जड़ें
ग्रामीण और खासकर पहाड़ी इलाकों में लोगों और बच्चों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव की खबरें और उनके साथ अनुचित व्यवहार के किस्से तो हिमाचल में सुर्खियों में रहते ही हैं। कहीं बच्चों को जाति के आधार पर अन्य बच्चों से दूर बिठा दिया जाता है तो कभी उनके साथ मिड डे मील खाने से इनकार कर दिया जाता है। प्रशासन हस्तक्षेप करता है तो तथाकथित अगड़ी जातियों के अभिभावक अपने बच्चों को अन्य स्कूलों में ले जाते हैं। कहीं पर तो लोगों के मंदिर में प्रवेश पर अघोषित रोक है।

सोचिए, आदमी के मर जाने के बाद भी उससे भेदभाव होता है। श्मशान घाट में जाति के आधार पर शव जलाने से रोक दिया जाता है। पहले तो ऐसा था कि लोग हिमाचल में खड्डों, नदियों या नालों के किनारे ही दाह संस्कार किया करते थे। ऐसे में वहीं पर थोड़ी-छोड़ी दूरी पर अलग-अलग गांव या जाति के लोगों ने अपनी श्मशान भूमि चुनी होती थी। यह विभाजन उस दौर का था जब छुआछूत चरम पर थी। आज के दौर में हिमाचल में जिंदा लोगों में छुआछूत भले आपको देखे को न मिले, लेकिन श्मशान घाटों का बंटवारा आपको बता देगा कि ऊपर से हालात बेशक बेहतर दिख रहे हों, अंदर से चीजें ज्यादा नहीं बदली हैं।

अलग-अलग श्मशान घाट
हिमाचल के बहुत से गांव ऐसे हैं जहां पर हर वर्ग का अपना श्मशान घाट चिह्नित है। कुछ ऐसे श्मशान घाट हैं जहां तथाकथित अगड़ी जाति के लोग तो अंतिम संस्कार करते हैं मगर अन्य जाति के लोगों को उस स्थान को इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देते। अन्य जाति के लोगों ने उसी स्थान के आसपास अपने लिए अलग जगह अंतिम संस्कार के लिए बनाई होती है। अब श्मशान घाटों में सीमेंट का ढांचा बनाया जाने लगा है। बहुत बार इस ढांचे का निर्माण सरकारी अनुदान से होता है। फिर वह पैसा चाहे पंचायत के माध्यम से आए, विधायक के या फिर सांसद के। लेकिन फिर भी कुछ गांवों में प्रभावशाली लोग अपने जाति या वर्ग वाले स्थान पर इसका निर्माण करवाते हैं और बाद में अन्य जाति के लोगों को रोकते हैं।

कई जगहों पर तो आपको आसपास ही तीन से चार श्मशान घाट के ढांचे खड़े नजर आ जाएंगे। गांवों में हर रोज तो किसी की मौत होती नहीं है, कोई बहुत व्यस्त जगह तो होता नहीं श्मशान घाट। कई बार महीनों में तो कई बार सालों में एक बार इसकी जरूरत पड़ती है। फिर क्यों एक ही जगह पर चार-चार बनाए होते हैं। इसलिए, क्योंकि हर श्मशान घाट अलग जाति या वर्ग से संबंधित होता है। यह बेवकूफी नहीं तो और क्या है?

इससे अफसोसनाक और कुछ नहीं हो सकता कि आप किसी की मौत पर भी अपनी अकड़ और झूठी शान दिखाने से बाज नहीं आते। यह दिखाता है कि आप अंदर से कितने खोखले हैं। आपके पास गर्व करने लायक ऐसा कुछ है नहीं जो जन्म के आधार पर संयोग से मिली पहचान के नाम पर खुद को उच्च और बाकी को नीचा दिखाना चाहते हैं। और ऊंचाई पर रहने के इसी मूर्खतापूर्ण जुनून के चक्कर में मुर्दों के बीच भी भेदभाव करने जैसी नीच हरकत करने को तैयार रहते हैं।

उम्मीद किससे की जाए?
वैसे तो इस तरह के मामलों में गांव के शिक्षित युवाओं को ही आगे आना चाहिए। उन्हें युवा सभा बनाकर इस भेदभाव को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें लोगों को समझाना चाहिए कि समय के साथ सोच बदलिए, फिजूल की बातों में कुछ नहीं रखा। मगर अफसोस, आज के अधिकतर युवा ऐसे चक्करों में पड़ना नहीं चाहते। और इससे भी दुख की बात ये कि बहुत से युवा तो खुद जिस माहौल में पैदा हुए हैं, उसके हिसाब से ही सोचते हैं। वे भी अपने बड़ों की तर्ज पर इस तरह के भेदभाव का समर्थन करने लगते हैं और फिर इस व्यवहार के बचाव में आरक्षण जैसे कुतर्क गढ़ने लगते हैं।

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क्या टिक टॉक पर व्यस्त पीढ़ी से कुछ उम्मीद रखी जा सकती है?

सबसे अहम जिम्मेदारी है नेताओं की। उन्हें जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए इस तरह की घटनाओं की निंदा करनी चाहिए। समय समय पर लोगों से अपील करनी चाहिए कि इस तरह की बातों को मन से निकालें, आदमी-आदमी में फर्क करना ठीक नहीं। मगर नेताओं से उम्मीद रखना भी आज के दौर में बेमानी है क्योंकि वे खुद जाति के आधार पर बने संगठनों सो शह देते हैं। हिमाचल में बनी राजपूत, गद्दी, ब्राहम्ण आदि समाजों की सभाओं में नेताओं का जाना और मान्यता देना दिखाता है कि इस जातिगत भेदभाव को नेता बनाए रखना चाहते हैं।

भले ही हिमाचली गर्व करते रहें, यहां भी जाति के आधार पर वैसी ही राजनीति होती है जैसी अन्य राज्यों में। इसका सीधा सबूत इस बार लोकसभा चुनाव में दिए गए टिकटों से मिलता है जहां दोनों प्रमुख पार्टियों ने मंडी और कांगड़ा सीटों पर जातिगत समीकरणों के आधार पर टिकट आवंटन किया है। यानी आम जनता से लेकर ऊपर सत्ता में बैठे लोगों तक सभी जाति व्यवस्था को पोषित कर रहे हैं।

यह सूरत बदलनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश की गिनती शांत, सुसंस्कृत और शिक्षित लोगों वाले प्रदेश में होती है। शिक्षा का स्तर यहां अच्छा है मगर शिक्षित होने का फायदा तभी है जब लोगों की सोच का दायरा बढ़े, वे उदार बनें। वरना श्रेष्ठ होने के भ्रम को पालते हुए फिजूल में गर्व करते रहने से नुकसान ही होगा।

हिमाचल में घर, गांव और राजनीति से लेकर देव परंपरा तक फैला है जातिवाद

अनिल शर्मा की विदाई के बाद अब किसे मिलेगा मंत्री पद

इन हिमाचल डेस्क।। एक पखवाड़े से जारी गतिरोध के बीच आखिर ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने जयराम कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि मंडी से अनिल शर्मा के पुत्र आश्रय शर्मा को कांग्रेस से टिकट मिलने के बाद से अनिल शर्मा पर मंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बना हुआ था। हालाँकि अनिल शर्मा ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है इसलिए फिलहाल वो विधायक के पद पर बने रहेंगे। भविष्य में अगर वो भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो मंडी सीट पर भी उपचुनाव सम्भव है।

अनिल शर्मा के इस्तीफे के बाद अब भाजपा विधायकों में भी रिक्त हुए मंत्रिपद को पाने के लिए खींचतान बढ़ने की सम्भावना है। कांगड़ा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे किशन कपूर अगर जीत जाते हैं तो जयराम ठाकुर को अपने मंत्रिमंडल में दो नए चेहरों को शमिल करना होगा।

भाजपा विधायक लोकसभा चुनाव में अपने अपने क्षेत्रों से लीड दिलवाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि मंत्रिमंडल में उनके नाम का परफॉर्मेंस के साथ नाम आने की सम्भावना बढ़े। मंत्रिमंडल में आने की चाह में कुछ विधायक पार्टी के बड़े नेताओं के पास भी अपने नाम की सिफारिश करने लगे हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव की परफॉर्मेंस और नतीजे क्या रहते है इसपर तो बहुत कुछ निर्भर करेगा ही, इसके इतर भी यह लगभग तय किया जा चुका है कि किन क्षेत्रों से मंत्री बनाये जाएंगे।

नाम न बताए जाने की शर्त पर पार्टी संगठन से जुड़े एक नेता के अनुसार, हो सकता है कि मंडी से अब किसी और को मंत्री बनाया जाए। अनिल शर्मा कांग्रेस से भाजपा में आने की शर्त की वजह से उस समय मंत्रिमंडल में लिए गए थे। जब मंडी से पहले से ही मुख्यमंत्री खुद हैं और एक अन्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर हैं तो अब किसी और जिले को मौका दिया जाएगा।

यह भी कहा जा रहा है कि धूमल की हार और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद हमीरपुर रीजन अपने आप को जयराम सरकार में उपेक्षित महसूस कर रहा है। धूमल काल में हमीरपुर-बिलासपुर से कभी सीएम को मिलाकर 4 मंत्री कैबिनेट में या अहम पदों पर बैठते रहे हैं। पिछली भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री धूमल के साथ साथ शिक्षा मंत्री आईडी धीमान और बिलासपुर से जे पी नड्डा व रिखी राम कौंडल अहम् पदों पर रहे हैं। लेकिन इस बार दोनों जिलों से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं हैं।

इसलिए माना जा रहा है इस कमी को पूरा करने के लिए हमीरपुर और बिलासपुर में से एक जिले को मंत्रिपद दिया जा सकता है। इस बारे में हमीरपुर के विधायक नरेंद्र ठाकुर का नाम प्रमुखता से विचारणीय बताया जा रहा है। नरेंद्र ठाकुर दूसरी बार विधायक बने है और वर्तमान में हमीरपुर बिलासपुर दोनों जिलों के विधायकों में सबसे सीनियर हैं।

बिलासपुर से तीनों विधायक पहली बार विधानसभा गए हैं। किसी कारणवश या धूमल गुट की आपत्ति नरेंद्र ठाकुर के नाम पर रहती है, जैसा कि मंत्रिमंडल गठन में पहले भी देखा गया था तो बिलासपुर जिले की घुमारवीं सीट से चुनकर आए राजेंद्र गर्ग के नाम पर मुहर लग सकती है।

गर्ग केंद्रीय मंत्री जे पि नड्डा के गुट से माने जाते हैं। वहीं मुख्यमंत्री जयराम भी उन्हें अपना बालसखा बताते रहे हैं। नड्डा गर्ग के नाम की पैरवी करते हैं तो गर्ग का नाम आना बड़ी बात नहीं होगी।

इसके अतिरिक्त कांगड़ा लोकसभा सीट के नतीजों पर भी सबकी नजरे टिकी हुई हैं। किशन कपूर के लोकसभा में जाने की स्थिति बनती है तो नूरपुर से विधायाक राकेश पठानिया की मंत्रिमंडल में एंट्री की राह खुल सकती है। हालाँकि अंदरखाते पठानिया को भी अपने ही जिले के मंत्रियों के मौन विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, जिला कांगड़ा से रमेश धवाला भी वाया शांता कुमार अपने नाम की दावेदारी जताने से पीछे नहीं हटेंगे। वह योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से संतुष्ट नहीं बताये जा रहे हैं। मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा भी मंत्रीमंडल में जगह पाने के लिए पुरजोर कोशिश करेंगे, यह भी लगभग विदित है। पूर्व में मंत्री रहे बरागटा ऊपरी हिमाचल के प्रतनिधत्व पर अपनी दावेदारी बताते रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में स्थान के लिए भाजपा में आपसी खींचतान देखने को मिल सकती है। वहीं मंत्रियों के पोर्टफोलियो भी बदले जा सकते हैं।

देहरा में महिला जज पर जानलेवा हमला करने की कोशिश

धर्मशाला, अमित पुरी।। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के देहरा कोर्ट में तैनात महिला जज पर एक प्रवासी युवक ने दराट से हमला करने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि युवक नशे में धुत था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन के रिमांड पर भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि देहरा न्यायालय की महिला जज अपने निवास से कोर्ट की ओर पैदल ही जा रही थीं। इसी दौरान सामने से एक युवक हाथ में दराट लेकर आया जैसे ही वह महिला जज के पास पहुंचा और उसने महिला जज पर दराट से हमला करने की कोशिश की।

युवक नशे में धुत थाज़ इस कारण महिला जज ने आरोपी के हमले से खुद बचा लिया। इसी दौरान वहां मौके पर मौजूद वकीलों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

युवक की पहचान लक्षमण रॉय निवासी जिला रामपुर (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है। डीएसपी देहरा लालमन शर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उसे कांगड़ा कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

नीरज भारती पर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

कांगड़ा।। साल 2016 में सोशल मीडिया पर आर.टी.आई. एक्टिविस्ट देवाशीष भट्टाचार्य के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती सहित अन्य 8 लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।

भट्टाचार्य के अनुसार पूर्व सी.पी.एस. ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसका जब उन्होंने विरोध जताया तो उनके बारे में भी सोशल मीडिया पर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। ऐसे में उन्होंने तात्कालीन राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मामले को लेकर उनके आवेदन पर दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट की मैट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट ने बुधवार को पूर्व सी.पी.एस. सहित अन्यों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

 

भट्टाचार्य के अनुसार दिल्ली पुलिस ने भी एफ.आई.आर. दर्ज करने से इनकार कर दिया, ऐसे में उन्होंने अदालत का रुख किया और 156 (3) के तहत एक आवेदन दायर किया और उस आवेदन पर आज आदेश जारी हुए। वहीं इस मामले पर जब पूर्व सी.पी.एस. नीरज भारती से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

नीरज भारती से जुड़ी अब तक की सभी खबरें आदि पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

भट्टाचार्य के खिलाफ क्या शब्द इस्तेमाल किए थे भारती ने, नीचे पढ़ें उस समय की एक खबर-

नीरज भारती ने पार कीं बदतमीजी की हदें, शर्मसार हुआ हिमाचल

राफेल मामले में मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को राफेल डील मामले में करारा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर नए दस्तावेज के आधार पर सुनवाई की फैसला किया है।

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने एक मत से दिए फैसले में कहा कि जो नए दस्तावेज डोमेन में आए हैं, उन आधारों पर मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई होगी। बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस एस. के. कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट अब रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के लिए नई तारीख तय करेगा। राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था कि इससे संबंधित डिफेंस के जो दस्तावेज लीक हुए हैं, उस आधार पर रिव्यू पिटिशन की सुनवाई की जाएगी या नहीं।

केंद्र ने किया था विरोध
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लीक दस्तावेजों के आधार पर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई का विरोध किया था और कहा था कि ये दस्तावेज प्रिविलेज्ड (विशेषाधिकार वाला गोपनीय) दस्तावेज है और इस कारण रिव्यू पिटिशन खारिज किया जाना चाहिए।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस के. एम. जोसेफ ने कहा था कि आरटीआई ऐक्ट 2005 में आया है और ये एक क्रांतिकारी कदम था ऐसे में हम पीछे नहीं जा सकते।

दस्तावेजों को केंद्र ने बताया था गोपनीय
सरकार ने कहा था कि जो दस्तावेज प्रशांत भूषण ने रिव्यू पिटिशन के साथ पेश किए हैं वह प्रिविलेज्ड दस्तावेज है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है ये दस्तावेज गोपनीय है और आरटीआई के अपवाद में है साथ ही एविडेंस ऐक्ट के तहत गोपनीय दस्तावेज है।

इंडियन एविडेंस ऐक्ट के तहत गोपनीय दस्तावेज पेश नहीं किया जा सकता। जो दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो, दो देशों के संंबंध पर असर डालता हो उन्हें गोपनीय दस्तावेज माना गया है।

अनुच्छेद-19 (2) के तहत अभिव्यक्ति के अधिकार पर वाजिब रोक की बात है। जहां देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला होगा वह रोक के दायरे में आएगा। आरटीआई के तहत भी देश की संप्रभुता से जुड़े मामले को अपवाद माना गया है। सरकारी गोपनीयता कानून की धारा-3 और 5 में भी रोक है।

पोस्टर पर बोले अनिल शर्मा- घटिया राजनीति पर उतरी भाजपा

मंडी।। मंडी संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार दूरी बनाए बैठे ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा का एक पोस्‍टर वायरल हो गया। पोस्‍टर में अनिल शर्मा पार्टी के लिए वोट डालने की अपील करते दिख रहे हैं। बेटे आश्रय शर्मा को टिकट मिलने के बाद अनिल शर्मा ने भाजपा से पूरी तरह से दूरी बना रखी है, लेकिन अब इस पोस्टर ने खलबली मच दी है। अनिल शर्मा का कहना है कि अगर यह पोस्टर पार्टी ने जारी किया है तो दुर्भाग्यपूर्ण है।

पोस्टर में अनिल शर्मा के नाम से मतदाताओं से भाजपा के पक्ष में प्रचार करने की अपील की जा रही है। पोस्‍टर में लिखा है- न मंत्री पद छोड़ूगा और न ही पार्टी। पोस्‍टर में अनिल शर्मा की फोटो के साथ लिखा गया है एक बार भाजपा बार बार भाजपा।

घटिया राजनीति पर उतरी भाजपा’
इधर, भाजपा मंडी जिला महामंत्री चेतराम ने कहा कि उन्होंने भी ऐसा पोस्टर देखा है, लेकिन भाजपा ने यह जारी नहीं किया है। मगर कम्युनिकेशन गैप इतना ज़्यादा हो गया है कि अनिल ने पार्टी से भी पता करने की जहमत नहीं उठाई और मीडिया से कहा- “यह पोस्टर किसने जारी किया, उन्हें मालूम नहीं है। यदि भाजपा ने ऐसा किया है तो वे बेहद घटिया राजनीति पर उतर आए हैं, क्योंकि मैंने खुद कहा था कि बेटे के विरोध में प्रचार नहीं करूंगा।”

यही नहीं, एक अखबार ने अनिल का बयान छापा है’ “मंत्री का झुनझुना पकड़ाकर न तो भाजपा मेरी और न मेरे परिवार की भावना से खेल सकती है। खेद है कि प्रचार के लिए भाजपा ऐसे हथकंडे अपना रही है। सीएम बोलें तो मैं अभी मंत्री पद से त्याग दे दूंगा, लेकिन विधायक हूं और बना रहूंगा, क्योंकि मैं जनता द्वारा चुन कर आया हूं, लेकिन इस्तीफा मांगने के लिए इतनी घटिया राजनीति भाजपा न करे। अगर भाजपा ने यह पोस्टर जारी नहीं किया है तो भाजपा इसका खंडन करे। साथ सरकार इसकी जांच करे।”

उधर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा है कि अनिल शर्मा शिकायत करें तो जांच करेगी। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर किसी की शरारत हो सकती है।

भाजपा नेता ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा को पार्टी के पक्ष में प्रचार कर अपना धर्म निभाने की नसीहत दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर के बयान के बाद अनिल शर्मा पर इस्तीफे का दबाव और बढ़ गया है। कौल सिंह ने ऐलान किया है कि आश्रय शर्मा के नामांकन के बाद हालात बदलेंगे। वहीं, पंडित सुखराम ने अनिल शर्मा के इस्तीफे को लेकर सही समय पर सही निर्णय लेने की बात कही है।

अनिल शर्मा ने अंतिम बार 25 मार्च को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से परिधि गृह मंडी में मिले थे। पंडित सुखराम व आश्रय शर्मा के कांग्रेस में वापसी की संभावनाओं को देखते हुए धर्म संकट में पड़ने की बात कही थी। इसके बाद अनिल शर्मा ने भाजपा से दूरी बनाकर रखी है। वह पार्टी के किसी कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर रहे हैं। इस्तीफे का मामला मुख्यमंत्री व भाजपा नेतृत्व पर छोड़ रखा है।

भाजपा नेता रोजाना पार्टी धर्म निभाने की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन अनिल शर्मा पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। इस गहमागहमी के बीच पोस्‍टर ने सबको चौंका दिया है।

प्रदेश डूबा है कर्ज में, ऊर्जा मंत्री ने सरकारी पैसे से खरीदी नई SUV

डायलिसिस के लिए मीलों दूर के अस्पताल के चक्कर काटता कलाकार

मंडी।। सरकार की ओर से कई योजनाएं जारी करके जनता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का दावा किया जाता है मगर करीबी अस्पतालों में अगर सुविधाएं ही न हों तो ऐसी योजनाओं का क्या फायदा। मंडी जिले के जोगिदर नगर उमंडल की खडियार पंचायत के दुनी चंद ऐसी ही परिस्थिति के कारण परेशानियो का सामना कर रहे हैं। 46 साल के दुनी चंद को डायलिसिस करवाने के लिए सप्ताह में दो बार 60 किलोमीटर दूर के अस्पताल जाना पड़ता है जबकि अपने इलाके में भी अस्पताल के नाम पर बड़ी सी इमारत खड़ी है।

दुनी चंद की जगरातों में भजन मंडली के साथ पैड प्ले किया करते थे मगर अचानक उनकी सेहत बिगड़ गई। दोनों किनडियां खराब हो चुकी हैं और जिंदगी डायलिसिस के सहारे चल ही है। जोगिंदर नगर के अस्पताल में यह सुविधा न होने के कारण पालमपुर जाना पड़ता है। यानी हफ्ते में दो बार 55-60 किलोमीटर जाना, इतना आना।

सरकार की हिमकेयर योजना का कार्ड दुनी चंद ने हाल ही में बनवाया है, लेकिन कुछ दवाइयां और इंजेक्शन ऐसे हैं जो बाहर से खुद खरीदने पड़ते हैं। हर सप्ताह घर से दो बार 55 किलोमीटर दूर पालमपुर तक जाने और दवाइयों के खर्च तक के लिए दुनी चंद के पास पैसे नहीं हैं। इसके ऊपर दो बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च। बूढ़ी मां और पत्नी मनरेगा में काम कर जैसे-तैसे घर खर्च के लिए पैसे कमा रहे हैं, लेकिन इससे भी घर का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है।

कभी कोई रिश्तेदार मदद करता तो कभी कभी कोई और, लेकिन यह काफी नहीं है। दुनी चंद खुद कलाकार हैं और पहले जगरातों में पैड बजाते थे। इसके बाद कुछ समय तक छोटी सी दुकान खोल कर काम किया करते थे। दुनी चंद बताते हैं कि उन्होंने कभी शराब, मांस, बीड़ी-सिगरेट का सेवन हीं किया। करीब डेढ़ साल से उन्हें दिक्कत आना शुरू हुई। दिल्ली ऐम्स में चैक भी करवाते रहे, लेकिन पिछले छह माह से अब पूरी तरह से डायलिसिस पर ही हैं।

सोचिए, जिस शख्स का बाथरूम तक जाना भी अब एक चुनौती बन चुका है, कैसे उसे मुश्किल हालात का सामना करते हुए लंबी दूरियां तय करनी पड़ रही हैं। बात दुनी चंद की नहीं है, ऐसे कई मरीज हैं, बुजुर्ग हैं जिन्हें घर द्वार पर सुविधाएं न मिल पाने के कारण बीमारी की हालत में दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

दुनी चंद की मदद के लिए 70183-83011 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। ध्यान दें, मदद के लिए पैसे आदि ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह आश्वस्त हो लें कि आपके पैसे सही जगह जा रहे हैं।

विक्रमादित्य ने जताई सीबीआई और इनकम टैक्स रेड की आशंका

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और शिमला ग्रामीण सीट से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने आशंका जताई है कि उनके घर पर सीबीआई और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का छापा पड़ सकता है।

विक्रमादित्य ने फेसबुक पोस्ट डालकर यह जानकारी दी है कि उन्हें भरोसेमंद सूत्रों से आयकर विभाग और सीबीआई की संभावित कार्रवाई का पता चला है। उन्होंने लिखा है, “पुख़्ता सूत्रों से ऐसी ख़बर मिल रही है कि CBI , IT हमारे निवास पर फिर दस्तक दे सकती है, उनके भव्य स्वागत के लिए हम तैयार है 😊”

पुख़्ता सूत्रों से ऐसी ख़बर मिल रही है की CBI , IT हमारे निवास पर फिर दस्तक दे सकती है , उनके भव्य स्वागत के लिए हम तैयार है 😊

Vikramaditya Singh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 7, 2019

वीरभद्र सिंह पर केंद्र में इस्पात मंत्री रहने के दौरान 6.1 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने के आरोप में सीबीआई ने साल 2015 में केस दर्ज किया था। उस दौरान सीबीआई ने 11 ठिकानों पर छापेमारी की थी। विक्रमादित्य सिंह अपने पिता वीरभद्र सिंह, मां प्रतिभा सिंह और बहन अपराजिता के साथ अभियुक्त हैं।

पिछले साल जुलाई में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। अगस्त में पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने विक्रमादित्य सिंह को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक जमानती की शर्त पर जमानत दी थी। साथ ही बिना इजाजत विदेश न जाने और गवाहों को प्रभावित न करने की हिदायत भी दी थी।

बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकाने पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। कमलनाथ के ओएसडी के यहां से 9 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इसके बाद से ही कांग्रेस नेता और अन्य विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि राजनीतिक दुर्भावना के तहत विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।