चार साल इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल न करने पर घिरे रामस्वरूप

मंडी।। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार रामस्वरूप शर्मा ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रामस्वरूप ने पिछले चार साल तक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा और अब चुनाव के समय एकसाथ रिटर्न फाइल कर दिया। कांग्रेस ने जहां इसे लेकर सवाल उठाए हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे रामस्वरूप का निजी मामला बताते हुए बचाव किया है।

नामांकन करते समय दी गई जानकारी के हिसाब से 60 साल के रामस्वरूप 10वीं पास हैं और उनके ऊपर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। रामस्वरूप की संपत्ति 28,33,538 है और उनकी पत्नी की संपत्ति Rs 28,90,799 लाख रुपये है। इसके अलावा उनके पास एक लग्ज़री सिडैन समेत तीन कारें हैं। उनके पास 40 हजार कैश और पत्नी के पास 50 हजार रुपये नकद हैं।

कांग्रेस उठा रही सवाल
इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने चार साल तक आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा, “रामस्वरूप टैक्स के दायरे में आते हैं लेकिन उन्होंने चार साल में टैक्स न देकर कानून की धज्जियां उड़ाई हैं। लोकसभा चुनाव के समय तीन दिन के भीतर आयकर विभाग ने उन्हें छूट देकर आयकर रिटर्न मंजूर की है। इस सारे मामले की कांग्रेस चुनाव आयोग से शिकायत करेगी।”

राठौर ने कहा, “सासंद रामस्वरूप के आयकर विभाग को दिए हलफनामे में आयकर भरने में देरी के लिए जनसेवक होने के नाते वह अधिक व्यस्तता के चलते अपनी आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर सकने को हवाला दिया है। ये कारण हास्यास्पद और गैर जिम्मेदाराना हैं। किसी भी व्यक्ति या सासंद द्वारा तीन साल का आयकर रिटर्न दाखिल न करना आयकर कानून की साफ अवहेलना है।”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “पहली दृष्टि में कांग्रेस को यह जानबूझकर की गई अवहेलना लगती है। जो व्यक्ति कानून बनाने के मंदिर में बैठा हो और वही अपने देश के कानून की अवहेलना करे, वह तो सासंद बनने लायक ही नहीं है।” उन्होंने आयकर विभाग द्वारा तीन दिनों के भीतर उन्हें आयकर रिटर्न की एनओसी जारी करने पर हैरानी जताते हुए कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी राय के बाद अगला कदम उठाएंगे।

बीजेपी ने किया बचाव
इस मामले में रामस्वरूप शर्मा का बचवा करते हुए भाजपा उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा, “आयकर रिटर्न रामस्वरूप का निजी मामला है और वह एक जिम्मेदार आदमी है। आयकर रिटर्न में अगर कोई तकनीकी कमी रही होगी तो विभाग उनको जुर्माना लगाएगा जिसे वे भरेंगे। इसमें कांग्रेस को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस पार्टी यदि चुनाव आयोग से शिकायत करना चाहे तो वह इसके लिए स्वतंत्र है।”

चार साल इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल न करने पर घिरे रामस्वरूप

बाजू काटकर हाथ में दे देंगे, हम लल्लू-पंजू कार्यकर्ता नहीं: सत्ती

मंडी।। हिमचाल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने एक बार फिर मंच से आक्रामक टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा- जो हमारे नेताओं को गाली निकालेगा, उसका बाजू काटकर हाथ में दे देंगे। गौरतलब है कि इससे पहले सोलन में एक सभा में उन्होंने मंच से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए मां की गाली पढ़ दी थी, जिसके बाद उनके ऊपर चुनाव आयोग ने 48 घंटों तक प्रचार न करने की रोक लगाई थी।

‘पंजाबी एदां ही चलदी’
बुधवार को मंडी लोकसभा सीट से पंडित रामस्वरूप शर्मा ने अपना नामांकन भरा। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती जब मंच पर गए तो उन्होंने कहा, “वो उस चौकीदार को बेईमान बोलते हैं! ये लोग बोलते हैं और जब हम लोग पंजाबी में कड़वा शब्द बोल देते हैं तो है तो लोगों के पेट मे मरोड़ हो जाता है, बड़ी दिक्कत हो जाती है। भैया, पंजाबी एदां ही चलदी फिर। ऐसे ही चलता है काम। जो हमारे बाप को चोर बोलेगा, उसको भी हम ऐसा ही बोलेंगे। ए ता थोड़ा कोड ऑफ कंडक्ट है वरना मैंने करना था हिसाब-किताब।”

‘उंगली उठाई तो काट देंगे बाजू’
इसके बाद ठहाके गूंज उठते हैं। आगे सत्ती कहते हैं, “सामने हमारे नेता लोग बैठे हैं, अगर कोई इनकी ओर उंगली उठाएगा तो हम उसकी बाजू काटकर उसके हाथ में पकड़ा देंगे। कोई लल्लू-पंजू कार्यकर्ता नहीं हैं हम लोग। हम लल्लुओं की जमात नहीं हैं। हम लोग अपना करियर बनाने यहां नहीं आए हुए हैं कि लल्लुओं की जमानत हैं। कि आप लोग हमारे नेताओं को गालियां दो और हम लोगों से तुम लोग उत्तर सुनो, प्रसाद ढूंढा; नहीं मिलेगा।”

वहीं सत्ती ने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की तुलना दुर्गा और शेर से करते हुए कहा- जब दुर्गा शेर पर सवार हो जाती है तो शेर कुछ नहीं कर पाता और ऐसा ही मनमोहन के प्रधानमंत्री रहते देखने को मिला।

सत्ती ने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की तुलना दुर्गा और शेर से करते हुए कहा- जब दुर्गा शेर पर सवार हो जाती है तो शेर कुछ नहीं कर पाता और ऐसा ही मनमोहन के प्रधानमंत्री रहते देखने को मिला।

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बता दें कि मंच से इस तरह की भाषा बोलने वाले सत्ती ने चुनाव आयोग के एक नोटिस के जवाब में कहा था कि उनके टेप के साथ छेड़छाड़ हुई है। मगर मंडी में उन्होंने ‘पंजाबी में कड़वा शब्द कहने और पंजाबी में एदां ही चलदा’ बोलकर बता दिया कि पहले उनके जिस आचरण पर सवाल उठे थे, उसका उन्हें कोई मलाल नहीं।

पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए ये हैं चुनाव आचार संहिता के मायने

शिमला।। आदर्श आचार संहिता यानी वे नियम, जिनके आधार पर आदर्श आचरण होगा। चुनाव अच्छे से हों, कोई गलत हथकंडे न अपनाए, जनता को गलत तरीके से प्रभावित न करे, इसलिए यह मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू किया जाता है। जानिए, इसके तहत प्रत्याशियों और पार्टियों से किस तरह के आचरण की उम्मीद रखी जाती है:

  • कोई भी पार्टी जातियों, धर्म या भाषा वाले समूहों के बीच मतभेद पैदा करने या उनको बढ़ावा देने वाला काम नहीं करेंगी।
  • दूसरों के निजी जीवन के पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए न कोई बयान देना चाहिए।
  • ऐसे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए, जिनकी सच्चाई साबित न हुई हो। बात को तोड़-मरोड़कर भी नहीं कहना है।
  • वोटों के लिए धार्मिक भावनाओं की दुहाई नहीं देनी है और न ही धार्मिक जगहों को प्रचार के लिए इस्तेमाल करना है।
  • वोटरों को रिश्वत देना, डराना, परेशान करना, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वोट मांगना, प्रचार बंद होने के बाद सार्वजनिक सभाएं करना और लोगों को अपनी गाड़ी से वोट डालने के लिए लाना भी वर्जित है।

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  • कोई भी उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के घर के आगे प्रदर्शन नहीं करेगा।
  • किसी के घर की दीवार या संपत्ति पर बिना इजाजत पोस्टर या वॉल पेंटिंग नहीं होगी। झंडे, बैनर वगैरह भी नहीं लगेंगे।
  • दूसरे प्रत्याशी या पार्टी की सभा में बाधा नहीं पहुंचानी है।
  • दूसरी पार्टी या प्रत्यासी के जुलूस के रास्ते में या वैसी जगह पर अपना जुलूस नहीं ले जाना है।
  • कहीं सभा करनी है या जुलूस निकालना है ोत पहले पुलिस व अन्य अधिकारियों से इजाजत लेनी है ताकि वे कानून व ट्रैफिक आदि के इंतजाम कर सकें।
  • लाउड स्पीकर, फायर ब्रिगेड या अन्य सुविधा किसी आयोजना के लिए चाहिए तो उसके लिए पहले से आवेदन करना है।
  • अगर आपकी सभा में या कार्यक्रम में कोई पाधा पहुंचाता है तो खुद न उलझें, पुलिस की मदद लें।

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इसके अलावा चुनाव आयोग हर सामूहिक कार्यक्रम पर नजर रखेगा। यानी किसी की शादी, मुंडन, जन्मदिन या अन्य किसी निजी या धार्मिक अनुष्ठान पर पर नजर रहेगी। अगर ऐसे किसी कार्यक्रम में कोई उम्मीदवार शामिल होता है तो उस कार्यक्रम की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी।

अगर आप चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत करना चाहते हैं तो अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर प्ले स्टोर से cVIGIL ऐप डाउनलोड करके ऐसा कर सकते हैं। यहां क्लिक करके आप इस ऐप को इंस्टॉल कर सकते हैं।

महेंद्र नाथ सोफत: वरिष्ठ बीजेपी नेता की ‘बगावत’ और ‘घर वापसी’ की कहानी

शिमला।। एक समय भाजपा के वरिष्ठ नेता और शांता कुमार सरकार में प्रभावी मंत्री रहे महेंद्र नाथ सोफत ने भाजपा का दामन थाम लिया है। सोलन ज़िला के धर्मपुर क्षेत्र से सबंध रखने वाले महेंद्र नाथ सोफत जनसंघ समय से भाजपा से जुड़े रहे। शांता कुमार के खास माने जाने वाले सोफत की गिनती उस दौर के तेज़तर्रार युवा नेताओं में होती थी।

शांता कुमार के प्रदेश अध्यक्ष रहने के समय सोफत को प्रदेश महामंत्री का पद दिया गया। उसी कार्यकारिणी में सुरेश चंदेल महामंत्री संगठन तो प्रेम कुमार धूमल भी महामंत्री थे ।

धर्मपुर सीट अनुसूचित जाती के लिए रिज़र्व होने पर 1990 के चुनाव में सोफत को सोलन सीट से चुनाव लड़वाया गया। सोफत पहला चुनाव जीते और शांता कुमार सरकार में परिवहन मंत्री बने। परिवहन विभाग में निजी क्षेत्र का आगमन सोफ़त के समय ही हुआ।

1993 में भाजपा विरोधी लहर में सोफत भी चुनाव हारे । वहीं 1998 में सोफत को 25 वोट से हारा घोषित किया गया। सोफत ने काउंटिंग ग़लत किए जाने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने सोफत के हक़ में फ़ैसला सुनाया और सोलन चुनाव को रद्द कर दिया ।

नाटकीय घटनाक्रम में भाजपा ने 2000 में सोलन उपचुनाव से सोफ़त का टिकट काट दिया और राजीव बिंदल को टिकट थमा दिया। सोफ़त ने मित्र मंडल के बैनर तले सोलन से अगला चुनाव 2003 में लड़ा परंतु हार गए।

सोफत तब से भाजपा से निष्कासित चल रहे थे मगर फिर उनकी पार्टी में वापसी हुई। 2012 में सोफ़त हिमाचल लोकहित पार्टी से जुड़े पर चुनावी राजनीति से दूर रहे। बाद में महेश्वर सिंह ने हिलोपा का भाजपा में विलय कर दिया पर सोफ़त इससे सहमत नहीं रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ सोफत का 36 का आँकड़ा रहा जिसे समय-समय पर सोफत ने विभिन मंचों और मीडिया से बातचीत में भी ज़ाहिर किया।

जयराम ठाकुर जब सीएम बनने के बाद पहली बार सोलन आए थे तो सोफत को सभा में मंच पर बिठाया गया था। उसी समय से तय माना जा रहा था की सोफत भाजपा में वापस आ सकते हैं ।

शांता कुमार के कट्टर समर्थक सोफत के भाजपा में आने के पीछे मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और पूर्व में भाजपा प्रदेश महामंत्री रहे महेंद्र पाण्डेय के प्रयासों को भी माना जा रहा है ।

चुनाव आयोग ने सत्ती पर की कार्रवाई, प्रचार करने पर लगा बैन

शिमला।। देश भर में शांत छवि और स्वच्छ चुनावों के लिए पहचान रखने वाले हिमाचल प्रदेश का नाम भी अब उन राज्यों की सूची में आ गया है, जहां के नेताओं पर मर्यादाएं पार करने के कारण चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए बैन लगाया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का इस्तेमाल करने पर सुर्खियों में चल रहे बीजेपी प्रदेशााध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के खिलाफ चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने सत्ती के 48 घंटे तक प्रचार करने पर बैन लगा दिया है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सत्ती अब शनिवार तक चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी  को मंच से पढ़ दिया था। उस टिप्पणी में कथित तौर पर किसी शख्स ने राहुल को मां की गाली दी थी।

मंच से गाली को लेकर सत्ती ने अजीब सफाई देते हुए कहा कि मैं तो किसी और के कॉमेंट पढ़ रहा था और कार्यकर्ताओं को बता रहा था कि ऐसा व्यवहार कितना गलत है। सत्ती ने चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब दे दिया था, जिससे शायद आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।

बता दें कि सत्ती को दो नोटिस जारी हुए थे। सत्ती एक अन्य वीडियो में प्रियंका गांधी को लेकर कुछ पैंट और साड़ी का जिक्र करते दिखे थे। उनकी एक और क्लिप है जिसमें वह राधा स्वामी परिवार पर कुछ कह रहे थे।

चाहता हूं कि सुखराम पूरे प्रदेश में कांग्रेस के लिए प्रचार करें: शांता कुमार

कांगड़ा।। भाजपा के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हाल ही में बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम पर चुटकी ली। शांता कुमार ने  कहा कि वह चाहते हैं कि पंडित सुखराम समूचे हिमाचल में कांग्रेस का प्रचार करें ताकि देवभूमि के ईमानदार लोग राजनीति के सबसे बड़े दल-बदलू को देख सकें।

कांगड़ा से भाजपा सांसद शांता कुमार ने कहा कि अगर सुखराम ऐसा करेंगे तो इससे भारतीय जनता पार्टी के वोट बढ़ेंगे। पालमपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शांता कुमार ने कहा कि वीरभद्र सिंह के कांगड़ा प्रवास से कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की जीत की संभावना पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

शांता कुमार

शांता कुमार ने कहा, “पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांगड़ा आए लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा। अब वीरभद्र सिंह हमारे गृह जनपद में आए हैं, उनका स्वागत है। परंतु उनके चुनाव प्रचार से भी कांग्रेस की जीत संभव नहीं हो पाएगी।”

शांता कुमार ने कहा कि भले ही वीरभद्र सिंह कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन ऐसा दावा उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले भी प्रदेश में सरकार बनाने का किया था। मगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार हिमाचल में बड़े बहुमत से बनी थी।

वीरभद्र के वकील का ऐलान- सत्ती की जुबान काटने वाले को 10 लाख का इनाम

शिमला।। चुनावी माहौल में हिमाचल प्रदेश को शर्मसार करने वाले बयानों का सिलसिला थम नहीं रहा है। जहां बीजेपी प्रदेशाध्य़क्ष सतपात सिंह सत्ती मंच से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अपमानजनक शब्द पढ़ने के आरोपों में घिरे हैं, दूसरी ओर वीरभद्र सरकार के दौरान डेप्युटी एडवोकेट जनरल रहे विनय शर्मा ने ऐलान किया है कि वह सतपाल सत्ती की जुबान काटने वाले को दस लाख रुपये का इनाम देंगे। गौरतलब है कि विनय शर्मा पूर्व सीएम वीरभद्र के वकील हैं और हाल ही में एक अखबार को उन्होंने वीरभद्र की ओर से लीगल नोटिस भी भेजा है।

क्या कहा विनय शर्मा ने
सतपाल सत्ती के बयान को मर्यादाहीन माना जा रहा है और उसकी आलोचना हो रही है। इस बयान की आलोचना करते हुए विनय शर्मा ने खुद मर्यादाओं का उल्लंघन कर दिया और ऐसी बात कह दी जिसका लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। हैरानी की बात है कि कानून से जुड़ा एक शख्स, एक वकील जो डेप्युटी एडवोकेट जनरल रह चुका हो, वह न सिर्फ गैरकानूनी बात कह रहा है बल्कि अपराध के लिए उकसा रहा है।

विनय शर्मा ने कहा कि सत्ती माफी मांगें वरना वह एफआईआर करवाएंगे और फिर भी माफी नहीं मांगी तो जो “अपमाजनक शब्द बोलने वाले सत्ती की काली जुबान काटेगा, उसे दस लाख रुपये दिए जाएंगे।” कानून के जानकारों का कहना है कि विनय शर्मा भले सत्ती केबयान के खिलाफ एफआईआर करवाने की बात कर रहे हैं, मगर उनके ऊपर भी इस भड़काऊ बयान के लिए एफआईआर हो सकती है।

पहले भी दिए हैं अजीब बयान
यह पहला मौका नहीं है जब विनय शर्मा ने इस तरह की अजीब बात कही है। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस सरकार के दौरान एक फेसबुक लाइव में यह कहा था कि बीजेपी द्वारा प्रदेश को बदनाम करने से नाराज देवताओं के गुस्से की वजह से कोटरोपी में घटना हुई है। बता दें कि उस कुदरती हादसे में 40 लोगों की जान गई थी। इससे पहले उन्होंने मीडिया के एक हिस्से और गुड़िया के परिजनों पर प्रदेश को बदनाम करन का आरोप लगाते हुए केस करने की बात भी कही थी।

कोटरोपी भूस्खलन पर टिप्पणियां कर फंसे डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा

कांग्रेस ने सत्ती का वीडियो एडिट करके रची साजिश: रणधीर

शिमला।। मंच से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए गाली पढ़ देने वाले हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष से सफाई देते नहीं बन रही। जहां वह खुद कह रहे हैं कि उन्होंने तो मिसाल देने के लिए किसी और का कमेंट पढ़ा था, वहीं भाजपा प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने इसे कांग्रेस की साजिश ही बता दिया।

भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा है कि ‘कांग्रेस पार्टी षड़यंत्र के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के भाषण के दौरान कहे शब्दों को विडियो ऐडीटिंग के सहारे तोड़-मरोड़ कर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।’

गौरतलब है कि जो वीडियो वायरल हुआ है, उससे सत्ती भी इनकार नहीं कर रहे। मगर रणधीर शर्मा इसे एडिटेड बता रहे हैं। बता दें कि वायरल वीडियो में मां की गाली वाले जिस अभद्र कॉमेंट को सत्ती ने मंच से भरी जनसभा में पढ़ा, सत्ती को वह कॉमेंट खुद रणधीर शर्मा ने ही पढ़ाया था।

इस बात का जिक्र उस वीडियो में खुद सत्ती ने ही किया था। नीचे वीडियो देखें-

मगर अब रणधीर ने इसे कांग्रेस की साजिश बताते हुए कहा है कि ‘कांग्रेस की कोशिश प्रदेश में गलत परंपरा की शुरुआत करना है, जो बेहद शर्मनाक और निन्दनीय है।’

कोटरोपी भूस्खलन पर टिप्पणियां कर फंसे डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा

राज्यपाल ने लिया कुल्लू में दलित महिला का अंतिम संस्कार रोकने का संज्ञान

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के पतलीकूहल थाने के तहत आने वाले एक गांव में दलित समुदाय से संबंध रखने वाली महिला का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट पर करने से रोकने के मामले का राज्यपाल ने संज्ञान लिया है।

प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जिला प्रशासन को इस बारे में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और कार्रवाई के बारे में राजभवन को अपडेट देने के लिए कहा है।

क्या है मामला
कुल्लू के फोजल इलाके के धारा गांव में तथाकथिक अगड़ी जाति के लोगों पर आरोप है कि पंचायत की ओर से सरकारी खर्चे पर बनाए गए श्मशान घाट पर उन्होंने दलित महिला के शव को जलाने से रोक दिया।

इसके पीछे कथित तौर पर यह चेतावनी दी गई थी कि अगर दलित महिला के शव को यहां पर जलाया गया तो देव प्रकोप से अगर कुछ भी होता है तो उसकी जिम्मेवारी शव जलाने वालों की होगी।

हिमाचल में घर, गांव और राजनीति से लेकर देव परंपरा तक फैला है जातिवाद

आज है 72वां हिमाचल दिवस, सरकार नहीं कर पाएगी कोई घोषणा

शिमला।। आज हिमाचल प्रदेश का 72वां स्थापना दिवस सोमवार को मनाया जा रहा है। इस बार सिर्फ राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन होगा। शिमला के रिज पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे।

चुनाव आचार संहिता लगी होने के कारण इस साल जिला स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा।हर साल हिमाचल के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार जनता के लिए कोई न कोई घोषणा करती रही है मगर इस बार आचार संहिता के कारण ऐसा नहीं हो पाएगा।

हिमाचल दिवस पर रिज पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के लगभग 50 विद्यार्थी कौशल का प्रदर्शन करेंगे। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक राज्यपाल आचार्य देवव्रत हैं। यहां के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर मलखंब के बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष पहचान बना चुके हैं।

राज्यपाल ने कहा है कि देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश को अपार प्राकृतिक सौंदर्य तथा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का आशीर्वाद प्राप्त है। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी हिमाचल दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है।