पार्टी नेताओं पर टिप्पणी कर रहे वीरभद्र, अब आनंद शर्मा की उड़ाई खिल्ली

शिमला।। पूर्व सीएम वीरभद्र लगातार मंचों से अपनी ही पार्टी के नेताओं पर निशाना साधकर चर्चा में बने हुए हैं। इस कारण उनकी उम्र और सेहत को लेकर भी अटकलें लगना शुरू हो गई हैं। ताजा मामला धर्मशाला का है जहां कांगड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल के लिए प्रचार करने आए वीरभद्र ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की खिल्ली उड़ा दी।

वीरभद्र ने कहा कि वह (आनंद शर्मा) पंचायत चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें पता चलेगा। उन्होंने आनंद शर्मा पर यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा राज्यसभा का रास्ता चुना। इस दौरान वीरभद्र बगल में बैठे सुधीर शर्मा को कुहनी मारते भी दिखे जो मुस्कुरा रहे थे। अब इस वीडियो को बीजेपी ने अपने प्रचार का हथियार बना लिया है।

चुनाव के दौरान हर पार्टी कुछ स्टार प्रचारक तय करती है। यानी ऐसे चेहरे, जिनका प्रभाव हो और वे विभिन्न सीटों पर जाकर पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करके मतदाताओं को प्रभावित कर सकें। मगर हिमाचल में इस बार चुनाव बेहद रोमांचक ढंग से हो रहा है क्योंकि हिमाचल प्रदेश बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक तरह से वीरभद्र को अपना ‘स्टार प्रचारक’ बना दिया है। दरअसल वह अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक पेजों पर वीरभद्र सिंह के उन भाषणों के अंश पोस्ट कर रही है, जिनमें वह अपनी ही पार्टी के नेताओं की मंच पर खिल्ली उड़ाते नजर आ रहे हैं। रोचक बात यह है कि बीजेपी के इंस्टा अकाउंट में सीएम, पीएम और प्रत्याशियों के ताजा वीडियो आपको मुश्किल से मिलेंगे मगर वीरभद्र के वीडियो आसानी से मिल जाएंगे। यानी बीजेपी को अपने प्रचार अभियान में अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, वीरभद्र सिंह से मदद मिल रही है।

वैसे तो हर नेता मंच से विरोधी पार्टी के नेताओं पर हमले करता है मगर वीरभद्र पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने के दौरान अपनी राजनीतिक भड़ास निकालते नजर आ रहे हैं। वे उन लोगों को निशाने पर ले रहे हैं, जो पार्टी में उनकी हां में हां मिलाने वाले नहीं रहे या फिर जिन्होंने वीरभद्र सिंह को सीधे चुनौती देने की कोशिश की। यह बात सभी जानते हैं कि पार्टियों ने नेताओं के बीच महत्वाकांक्षाओं का टकराव होना सामान्य सी बात है। मतभेद भी होते हैं और वे एक-दूसरे की टांग खींचने का मौका भी नहीं चूकते। मगर जब चुनाव के समय दिखावे के लिए ही सही, सभी अपनी दूरियों को मिटाकर मंच पर एकता दिखाने की कोशिश करते हैं।

मगर वीरभद्र ने मानो तय कर लिया है कि पार्टी की एकता, छवि और उसका अनुशासन की ऐसी-तैसी, वह मंच से वही कहेंगे जो उनके दिल और मन में है। इसीलिए सबसे पहले उन्होंने हमीरपुर में कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर के पक्ष में प्रचार के बाद मंच से पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का नाम लिए बिना कह दिया कि उनके जाने से पार्टी में जो गंद था, वह साफ हो गया।

मजेदार बात है कि अब उनका यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी के काम आ रहा है। उसने इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को शेयर किया है और लोग इसपर खूब चुटकियां ले रहे हैं। इसी तरह शिमला से प्रत्याशी धनी राम शांडिल को वीरभद्र ने मंच से ‘पुराना पापी’ कह दिया और उनका यह वीडियो भी बीजेपी ने लपक लिया और अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।

अब ताजा मामला मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा के प्रचार का है। सुखराम और वीरभद्र की प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है। नैतिकता यह कहती है कि पार्टी ने अगर किसी नेता को वापस लेने का फैसला लिया है तो अन्य नेता दिखावे के लिए ही सही, उसका सम्मान करते। मगर मंच से सार्वजनिक ढंग से उन्होंने नाचन में आश्रय शर्मा को लज्जित कर दिया जब वह उनके दादा पंडित सुखराम को कोसने लग गए और कहने लगे कि वह उन्हें माफ नहीं करेंगे। इस दौरान आश्रय के चेहरे के भाव देखने लायक थे।

वैसे वीरभद्र सिंह राजनीति में लंबे समय से हैं और उन्होंने भी कई लोगों का खेल बिगाड़ा है। सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि जो नेता अपने मन की न होने पर खुलेआम मंच से ही इस तरह से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों की चिंता किए बिना टिप्पणी कर सकता है, वह चुनाव के दौरान उन्हें ‘रगड़ने’ में गुपचुप ढंग से और क्या-क्या करता रहा होगा। कुछ ऐसे भी कॉमेंट कर रहे कि वीरभद्र को पता था कि इस बार में सीट निकालने में मुश्किल हो सकती है, इसलिए न खुद चुनाव लड़ा न परिवार के किसी सदस्य से। मगर कथित तौर पर वह ऐसा भी नहीं चाहेंगे कि इस माहौल में कोई और जीत जाए या अच्छे वोट ले जाए और आज नहीं तो कल के मजबूत नेता के तौर पर उभर जाए।

बहरहाल, ये राजनीतिक टीका-टिप्पणियां हैं, चलती ही रहेगीं। मगर राजनीति में चलती का नाम ही गाड़ी है और वीरभद्र की गाड़ी न सिर्फ चल रही है बल्कि दौड़ रही है।  उनकी रफ्तार पर लगाम लगाने का दम न तो प्रदेश के नए अध्यक्ष में हैं और न आलाकमान में जो कई बार वीरभद्र के दांव-पेंचों के आगे घुटने टेक चुका है।

बहरहाल, वीरभद्र के ही भाषण बीजेपी इस्तेमाल नहीं कर रही बल्कि वीरभद्र के करीबी पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी का भी एक वीडियो उसने पोस्ट किया है जिसमें वह आश्रय शर्मा के मज़े लेते नज़र आ रहे हैं।

कांग्रेस के नेता अपने ही प्रत्याशियों को गम्भीरता से नहीं लेते तो जनता क्या लेगी। देखिए कांग्रेस के पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी जी आश्रय शर्मा के नाम पर चुटकी लेते हुए। 👇🏼

BJP Himachal Pradesh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 28, 2019

बहरहाल, रविवार को मंडी में क्या कहा मंच से वीरभद्र ने, पढ़ें और वीडियो देखें-

प्रचार के बजाय वीरभद्र ने किया प्रहार, असहज हुए आश्रय शर्मा

मदद के बहाने बदला कार्ड, गहने खरीदकर खाली किया खाता

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश में एटीएम कार्ड बदलकर दूसरों के पैसे निकालने में मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाहपुर के एटीएम में एक शातिर ने एटीएम कार्ड बदलकर एक शख़्स को दो लाख रुपये का चूना लगा दिया।

बरतिया कुमार पुत्र धगडू राम गांब हरिया डाकघर लाहडू तहसील ज्वाली इन स्वन्ध मे शाहपुर थाना में शिकायत दर्ज करवाई है। उनका कहना है कि वह बद्दी में नौकरी करते हैं। उनके मुताबिक जब वह 24 अप्रैल को घर से बद्दी की तरफ जाते हुए शाहपुर एसबी आई के एटीएम के पास से पैसे निकालने लगे तो पैसे नहीं निकले।

तभी पास खड़े एक आदमी ने उनकी मदद की पेशकश। फिर उस व्यक्ति ने कार्ड लिया और पैसे निकालकर उन्हें दे दिए । इसी दौरान उस व्यक्ति ने बड़ी चालाकी से उनका एटीएम बदल दिया। जब व्यक्ति बद्दी जाकर पैसे निकालने लगा तो मशीन से पैसे नहीं निकले।

बैंक कर्मी ने उन्हें बताया कि उनके खाते में दो लाख रुपये की जगह 100 रुपये ही बचे हैं। बरतिया ने यह बताया कि शातिर ने उनके कार्ड से कांगड़ा की एक दुकान से एक लाख रुपये के गहने खरीदे थे और बाकी पैसे निकाल लिए थे। थाना प्रभारी ने मामले की पुष्टि की है।

शिमला रेप केस: अब तक जो जानकारियां सामने आई हैं

शिमला।। 2017 के कुख्यात गुड़िया रेप और हत्याकांड के बाद शिमला एक बार फिर इसी तरह के मामले को लेकर देशभर में चर्चा में है। शिमला में रहकर पढ़ाई कर रही हरियाणा की रहने वाली 19 वर्ष की एक युवती ने आरोप लगाया है कि शिमला में अज्ञात लोगों ने उसे गाड़ी में खींचा, बलात्कार किया और सुनसान इलाके में छोड़ दिया। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि होने की खबर है मगर इस बीच पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं।

इस मामले में न तो लड़की ने मीडिया से बात की है और न ही पुलिस खुलकर कुछ बोलने को तैयार है। इसलिए जो जानकारी मीडिया तक पहुंच रही है, वह पूरी तरह स्पष्ट नहीं। इस घटना में कौन लोग शामिल थे, किस समय कहां पर घटना हुई, क्या पुलिस ने लड़की को टरकाया था? इन तमाम सवालों के जवाब अभी तक मिल नहीं पाए हैं।

पुलिस ने एसआईटी का गठन किया, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दुख जताते हुए मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस की लापरवाही की मजिस्ट्रियल जांच होगी। विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। विपक्ष सरकार की नाकामी बताते हुए हमलावर है और इस मसले पर राजनीति भी होने लगी है।

अहम सवाल
पुलिस अभी तक इस मामले को सुलझाने में कामयाब नहीं हुई है। जांच जारी है और पुलिस जांच पूरी होने तक कुछ भी कहने से डर ही है। उसका डर इस बात को लेकर भी है क्योंकि पहले गुड़िया रेप केस में जल्दबाजी में पुलिस ने मामले को सुलझाने का दावा किया था मगर बाद में सीबीआई जांच हुई तो कहानी कुछ और ही निकली थी। इसलिए इस बार पुलिस जल्दबाजी नहीं करना चाह रही।

ऐसी चर्चा है कि पहले युवती ने लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी में शिकायत की थी कि कुछ लोग उससे छेड़छाड़ कर रहे हैं और उसके बाद कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने उसे ढली थाने में जाने से कहा था मगर बाद में उसके साथ अपराधियों ने वारदात को अंजाम दे दिया। अगर ऐसा वाकई हुआ है तो इसमें पुलिस के रवैये पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इस मामले में दूसरा पक्ष यह है कि युवती ने लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी जाकर यह जानकारी ही हासिल की थी कि अगर किसी के साथ कोई छेड़छाड़ होती है या पीछा करता है तो लड़कियो को क्या करना चाहिए। ऐसे में वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे कहा था कि गुड़िया हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके मदद ली जा सकती है। बताया ये भी जा रहा है कि गुड़िया हेल्पलाइन का नंबर युवती ने यहीं से लिया था।

बाद में युवती ने गुड़िया हेल्पलाइन में ही शिकायत करके अपने साथ बलात्कार होने की शिकायत की थी। सवाल उठ रहे कि युवती का फोन पुलिस ने मंगलवार को घटनास्थल से बरामद किया। तो युवती ने किस नंबर से शिकायत की थी। क्या उसने वारदात के दौरान मौका पाकर पुलिस को गुड़िया हेल्पलाइन में फोन किया था और बाद में हमलावरों ने उसका फोन फेंक दिया था?

इस बीच पुलिस ने युवती के एक परिचित को भी बीती रात पूछताछ के लिए बुलाया था। बताया जा रहा है कि कॉल डीटेल्स के आधार पर पता चला कि घटना वाली रात इस शख्स से युवती की बात हुई थी। कहा जा रहा है कि युवती ने सबसे पहले घटना की जानकारी इसी मित्र को दी थी और कपड़े मंगवाए थे। अगर ऐसा था तो बाद में लड़की का फोन घटनास्थल पर कैसे रह गया जो पुलिस ने अगले दिन बरामद किया।

युवती ने जिस जगह से अपना अपहरण होने की बात कही है, वह ढली पुलिस स्टेशन से आगे है इसलिए उन रिपोर्टों पर भी सवाल उठ रहे हैं जिनमें कहा जा रहा है कि युवती का अपहरण लक्कड़ बाजार से ढली जाते समय हो गया था। हालांकि ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है कि जिस जगह पर युवती ने अपना अपहरण होने की बात कही है, उसके पास के मकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों में वह अकेली गुजरती हुई नजर आई है।

क्या है आशंका
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि युवती के साथ पहले ही बलात्कार हो चुका था और लक्कड बाजार पुलिस स्टेशन गई जहां वह हिम्मत करके शिकायत नहीं कर सकी और वहां से गुड़िया हेल्पलाइन की जानकारी लेकर निकल गई। फिर वह अकेली घर की ओर निकल पड़ी और वहीं शायद उसने हिम्मत जुटाकर गुड़िया हेल्पलाइन में शिकायत की। जाहिर है, जिस किसी के साथ ऐसी घटना हो, वह कितना घबराया हुआ होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसी कारण संभवत: लड़की द्वारा जी जा रही जानकारी में पुलिस को कुछ लूपहोल्स नजर आ रहे हैं।

इस तरह के मामलों में बहुत बार देखा जाता है कि डर या चिंता के कारण भी विक्टिम अपने साथ ऐसी हरकत को अंजाम देने वालों के खिलाफ खुलकर नहीं बोल पाते। इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले परिचित हों, तब स्थिति और ऊहापोह की बन जाती है। इसलिए बेहतर होगा कि किसी अच्छे काउंसलर की मदद लेकर पुलिस लड़की से सच जानने की कोशिश करे कि असली कहानी क्या है, कहां उसके साथ इस अपराध को अंजाम दिया गया और इसे अंजाम देने वाला कौन है। फिर जांच को सही दिशा में बढ़ाने की मदद मिलेगी।

मोदी पर किताब का विमोचन करके फंसे सीयू के वीसी कुलदीप अग्निहोत्री

धर्मशाला।। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति कुलदीप चंद अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के धर्मशाला पुस्तक मेले में प्रो कुलदीप चंद अग्निहोत्री की लिखित ‘भारतबोध का संघर्ष 2019 का महासमर’ का विमोचन किया गया था।

चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी पुस्तक के विमोचन पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से मामले में एसपी से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद आयोग कार्रवाई के बारे में फैसला करेगा।

छह अध्यायों की इस पुस्तक का प्रकाशन प्रभात पेपरबेक्स ने किया है। पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष सहित पांच सालों में पीएम के कार्यकाल में विपक्षी विचारधाराओं से संबंधित प्रमुख घटनाक्रमों का उल्लेख है।

किताब

उल्लेखनीय है कि आचार संहिता के चलते पीएम नरेंद्र मोदी बायोपिक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई गई है। वहीं, नमो टीवी पर मोदी के रिकॉर्डेड भाषणों और मोदी के जीवन पर लघु फिल्मों की सीरीज को भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटाया गया है।

जब सिंघी राम का केस हटा रही थी वीरभद्र सरकार और बीजेपी कर रही थी विरोध

शिमला।। हाल ही में रामपुर विधानसभा सीट से छह बार कांग्रेस के एमएलए रह चुके सिंघी राम भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। एक समय सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के करीबी रहे सिंघी राम के पार्टी में आने को बीजेपी बड़ी उपलब्धि बता रही है। उधर कांग्रेस का कहना है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। आज बीजेपी और कांग्रेस अनोखी भूमिकाओं में हैं। कुछ समय पहले तक बीजेपी सिंघी राम की कड़ी आलोचना करती थी तो कांग्रेस सरकार उनके प्रति नरम हो रही थी। यानी आज दोनों पार्टियां सिंघी राम को लेकर अपने स्टैंड पर यू टर्न ले चुकी हैं।

दलित नेता सिंघी राम का वैसे अपने इलाके में प्रभाव रहा है और छह बार विधायक चुना जाना सामान्य बात भी नहीं। मगर 2007 के विधानसभा चुनाव में उस समय हर कोई हैरान रह गया था जब नंदलाल नाम के शख्स को कांग्रेस ने रामपुर से टिकट दे दिया था। नंदलाल दिल्ली में उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सिक्यॉरिटी टीम में थे। इस तरह से कथित पैराशूट प्रत्याशी के कारण सिंघी राम पार्टी में उपेक्षित हो गए। उधर नंदलाल बाद में 2012 और 2017 में फिर जीतकर विधानसभा पहुंचे। सिंघी राम 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़े मगर उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

मार्कशीट केस
सिंघी राम 2008 में उस समय चर्चा में आए थे जब उनके ऊपर अपनी बेटी की फर्जी मार्कशीट बनवाने का आरोप लगा। बीआर राही जब स्कूल शिक्षा बोर्ड में अध्यक्ष थे तो रामपुर से विधायक और उस समय के बागवानी मंत्री सिंघी राम की बेटी के नाम जमा दो का फर्जी सर्टिफिकेट तैयार होने की बात सामने आई।

सिंघी राम पर आरोप लगा कि उन्होंने 2005 में तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष बीआर राही व उपसचिव एसके मल्होत्रा की मदद से बेटी को दिल्ली के एक कॉलेज में दाखिला दिलवाने के लिए जाली मार्कशीट ली थी। यह मामला प्रदेश विजिलेंस के पास वर्ष 2008 में आया था। उस समय जांच में पाया गया था कि सिंघी राम की बेटी ने सनावर स्कूल कसौली से सीबीएसई बोर्ड से दस जमा दो की परीक्षा दी थी, लेकिन वह उत्तीर्ण नहीं हुई थीं।

विजिलेंस के मुताबिक इसके बाद दिल्ली के एक कॉलेज में उसने प्रदेश स्कूल बोर्ड की एक मार्कशीट की मदद से दाखिला लिया था। इसमें उसे 500 में से 446 अंक दर्शाए गए थे जबकि उस समय बोर्ड की परीक्षा में प्रथम आए छात्र के ही 82 फीसद अंक थे। जांच में प्रमाणपत्र में दर्शाए गए रोल नंबर को भी सही नहीं पाया गया था। इस मामले में जांच करते हुए विजिलेंस ने 11 मार्च 2008 को उक्त आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आईपीसी की धारा 420, 468, 471 और 120 बी लगाई गई थी।

सिंघी राम के बीजेपी में शामिल होते ही शिमला रूरल के एमएलए और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने कहा कि सिंघी राम कांग्रेस के सदस्य ही नहीं थे और उनका बीजेपी में जाना कोई मायने नहीं रखता। उन्होंने सिंघी राम की बेटी की फर्जी मार्कशीट का मामला भी उठाया मगर यहां जानकारी देना जरूरी है कि भले ही सिंघी राम पर कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कार्रवाई की थी मगर वीरभद्र सरकार ने ही उन्हें मार्कशीट मामले में राहत देने की कोशिश की थी।

श्री सिंघी राम , कांग्रिस के प्राथमिक सदस्य भी नहीं है , 2017 मैं निर्दलीय चुनाव लड़ने वह अपनी बेटी के लिए फ़र्ज़ी…

Vikramaditya Singh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 27, 2019

वीरभद्र सरकार ने वापस लेने चाहे केस
वीरभद्र बेशक सिंघी राम से नाराज थे मगर साल 2014 में उनकी सरकार के दौरान सिंघी राम और राही पर चल रहे केसों को वापस लेने की कोशिश हुई थी मगर कोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। चार आरोपियों पर दर्ज केस को करीब 6 साल बाद एडवांस स्टेज पर वापस लिया जा रहा था।

प्रदेश सरकार ने सरकारी वकील के माध्यम से अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत इस मामले को वापस लेने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। सरकारी वकील ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला अधिक मजबूत नहीं है तथा सरकार इसे वापस लेना चाहती है लेकिन कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया था और बाद की तारीख़ दे दी थी।

बीजेपी ने किया था विरोध
जिस दौरान वीरभद्र सरकार सिंघी राम वाले केस वापस लेने की कोशिश कर रही थी, भारतीय जनता पार्टी इसके सख्त खिलाफ थी। उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा था, “कांग्रेस सरकार के मुखिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। ऐसे राज्य में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलने की संभावना प्रबल हो जाती हैं। कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री सिंघी राम से जुडे़ मामले को वापस लेना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।”
उस समय सतपाल सत्ती ने किया विरोध
और तो और, इसी साल फरवरी में हिमाचल सरकार की ओर से सिंघी राम की पूर्व विधायक पेंशन से 76 हजार रुपये रिकवर किए जाने के आदेश जारी किए गए थे। यह रकम उनके मंत्री रहते किए गए सरकारी दौरे की थी, जिसकी रिकवरी नहीं हो पाई थी। मगर अब बीजेपी के लिए सिंघी राम दागी नहीं रहे। मुख्यमंत्री और मंत्रियों का कहना है कि यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है और इससे बीजेपी को फायदा होगा।

प्रचार के बजाय वीरभद्र ने किया प्रहार, असहज हुए आश्रय शर्मा

मंडी।। नामांकन के बाद पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा के लिए प्रचार करने आए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निशाने पर उनके दादा पंडित सुखराम रहे।

रविवार को नाचन (मंडी, हिमाचल प्रदेश) के चैलचौक में जनसभा के दौरान वीरभद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को सुखराम और स्वर्गीय ठाकुर कर्म सिंह के गृह युद्ध से काफी नुकसान हुआ।

और इस तरह वीरभद्र सिंह ने आश्रय के लिए प्रचार की जगह कर दिया प्रहार। देखें, कैसे सुखराम को लेकर टिप्पणियां करके आश्रय शर्मा को किया असहज।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 28, 2019

कर्म सिंह ने पार्टी का साथ दिया लेकिन सुखराम ने हिविकां का गठन करके कांग्रेस से धोखा किया था। इसके लिए मैं सुखराम को कभी माफ नहीं कर सकता। हालांकि, वीरभद्र ने कहा कि यह बातें पुरानी हैं। नए हिमाचल के निर्माण के लिए मैं कांग्रेस पार्टी के लिए युवा पीढ़ी को सहयोग दूंगा।

वीरभद्र ने सुखराम पर कहा कि उन्होंने मुझे रगड़ने की कोशिश की मगर मेरा भाग्य अच्छा था। कोई किसी को मिटा नहीं सकता, किसी की हैसियत कम नहीं कर सकता क्योंकि होता वही है जो मंजूरे खुदा होता है। हालांकि वीरभद्र ने आश्रय के लिए वोट मांगते हुए कहा- मुझे रगड़ने की प्रक्रिया में यह शामिल नहीं था तो इससे कोई शिकायत नहीं।

आयकर मामले में रामस्वरूप को राहत, चुनाव लड़ने पर संकट नहीं

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा के चुनाव लड़ने पर कोई संकट नहीं है। आयकर विभाग की ओर से उन्हें क्लीन चिट प्रदान की गई है।

आयकर विभाग के मुताबिक आयकर रिटर्न में वह किसी भी प्रकार से दोषी नहीं हैं। इससे भाजपा सांसद एवं प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा को बड़ी राहत मिली है।

चर्चा थी कि चार वर्षों की आयकर रिटर्न एक साथ भरने के मामले में उनका नामांकन रद्द हो सकता था, मगर अब इसकी नौबत नहीं आएगी। दरअसल रामस्वरूप ने चार साल तक आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया था और बाद में इकट्ठा फाइल किया था। कांग्रेस ने इसपर सवाल उठाए थे।

फेक न्यूज फैलाने पर फंसे शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य

शिमला।। हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला ग्रामीण से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य अपने आधिकारिक फेसबुक पेज से एक भ्रामक पोस्ट करने को लेकर विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने एक वर्दीधारी की तस्वीर शेयर की है जिसने गले में भाजपा का स्कार्फ बांधा हुआ है। उन्होंनेइस तस्वीर के साथ विक्रमादित्य ने लिखा है- “चुनाव आयोग क्या कर रहा है? कांगड़ा में हिमाचल पुलिस का अधिकारी बीजेपी का स्कार्फ पहने हुआ है?”

आगे उन्होंने फिर चुनाव आयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्या वह मोदी और बीजेपी से इतना डरा है कि आचार संहिता के स्पष्ट उल्लंघन पर भी कार्रवाई नहीं कर रहा।

मगर यह तस्वीर भ्रामक कैप्शन के साथ शेयर की गई है। मामला अलग ही है। सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि पहली बात तो यह कि कोई भी अधिकारी इतना मूर्ख नहीं (कम से कम हिमाचल का) कि वह किसी रैली में ऐसी हरकत करे। दूसरा यह वर्दी भी हिमाचल पुलिस की नहीं है। फिर मामला क्या है? आगे जानें-

दरअसल शुक्रवार को धसर्मशाला के दाड़ी मैदान में भाजपा की रैली के  दौरान मेडल, स्टार और तमगों से सुसज्जित वर्दी पहने आईटीबीपी के एक सेवानिवृत असिस्टेंट कमांडेंट पार्टी में शामिल हुए तो नेता, कार्यकर्ता और मीडिया कर्मी तक हैरान रह गए।

ओमप्रकाश नाम के इन जनाब ने पत्रकारों को बताया कि वह अरुणाचल प्रदेश में सेवाओं के दौरान रिटायर हुए थे। वर्दी पहनकर पार्टी में शामिल होने और नेताओं को सल्यूूूट करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने अनुमति ली हुई है।

हालांकि ओमप्रकाश का ऐसा करना उचित है या नहीं, यह चर्चा का विषय हो सकता है मगर इसे विक्रमादित्य द्वारा अलग रंग देना चर्चा का विषय बन गया है। खबर लिखे जाने तक पोस्ट को हटाया नहीं गया था। उनके इस व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना बताकर आलोचना हो रही है। उनके इस पोस्ट पर भी आलोचना भरे कॉमेंट आये हैं। बता दें कि विक्रमादित्य सोशल मीडिया पेजों पर पहले भी शिगूफे छोड़ते रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा था कि आयकर विभाग और ईडी उनके यहां छापा मारने वाले हैं।

विक्रमादित्य ने जताई सीबीआई और इनकम टैक्स रेड की आशंका

2.5 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं मोदी, जानें पांच साल में कितनी बढ़ी

इन हिमाचल डेस्क।। चुनावी माहौल में हर किसी को जिज्ञासा रहती है कि किस प्रत्याशी की कितनी संपत्ति है और अगर वह दोबारा चुनाव लड़ रहा है तो पिछली बार की तुलना में उसकी संपत्ति कितनी बढ़ गई। ऐसी ही जिज्ञासा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी। शुक्रवार को उन्होंने वाराणसी से नामांकन किया जिसमें दिए हलफनासे से उनकी संपत्ति को लेकर जानकारी सामने आई है।

चल-अचल संपत्ति लगभग ढाई करोड़ रुपये
चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति 2.5 करोड़ रुपये की बताई है। पीएम ने अपनी चल संपत्ति 1.41 करोड़ और अचल संपत्ति की कीमत 1.1 करोड़ रुपये की बताई है। पीएम की संपत्तियों में गुजरात के गांधीनगर का एक रिहायशी प्लॉट, 1.27 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट्स और 38,750 रुपये कैश शामिल हैं।

इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने टैक्स सेविंग इन्फ्रा बॉन्ड्स में 20,000 रुपये का निवेश भी किया है। इसके अलावा राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) में 7.61 लाख रुपये और LIC पॉलिसीज में 1.9 लाख रुपये लगाए हैं। मोदी के सेविंग बैंक अकाउंट में 4,143 रुपये कैश बैलेंस है। हलफनामे के मुताबिक प्रधानमंत्री के पास 4 सोने की अंगूठियां हैं, जिनका वजन 45 ग्राम और कीमत 1.13 लाख रुपये है।

सरकार से वेतन और ब्याज हैं आय के स्रोत
मोदी के पास गांधीनगर के सेक्टर-1 में 3,531 वर्ग फीट का प्लॉट भी है। हलफनामे के मुताबिक आवासीय भूखंड समेत प्रॉपर्टी की कीमत 1.1 करोड़ रुपये बताई गई है। आय के अपने स्रोतों में मोदी ने ‘सरकार से सैलरी’ और ‘बैंक से ब्याज’ का जिक्र किया है। हलफनामे में पीएम मोदी ने जशोदाबेन को अपनी पत्नी बताया है। उनकी पत्नी की आय के स्रोत के स्थान पर ‘ज्ञात नहीं’ लिखा गया है। उनका पेशा या व्यवसाय भी ‘ज्ञात नहीं’ के तौर पर दर्ज किया गया है।

PM ने इस बात की घोषणा की है कि उन्होंने 1983 में गुजरात यूनिवर्सिटी से MA की डिग्री हासिल की है। हलफनामे के मुताबिक वह दिल्ली विश्वविद्यालय (1978) से आर्ट्स ग्रैजुएट हैं। उन्होंने 1967 में गुजरात बोर्ड से SSC परीक्षा पास की थी।

2014 में नरेंद्र मोदी कुल 1.65 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। इसमें चल संपत्ति 65.91 लाख रुपये थी। इस तरह से देखा जाए तो पांच सालों में उनकी चल संपत्ति में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

अनुराग ठाकुर के पास है साढ़े आठ करोड़ रुपये की कुल संपत्ति

एमबीएम न्यूज, हमीरपुर।। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान दिए हलफनामे की तुलना अगर पिछले चुनाव से करें तो उनकी संपत्ति तीन करोड़ रुपये से अधिक बढ़ी है। अनुराग के पास 2014 में कुल चल व अचल संपत्ति पांच करोड़ 70 लाख थी। अब 2019 में यह लगभग साढ़े आठ करोड़ के करीब हो गई है।

अनुराग ठाकुर पर 10 लाख 85 हजार रुपये का कर्ज भी है। अपने शपथ पत्र में अनुराग ने बताया है कि उनकी कुल अचल संपत्ति चार करोड़ 96 लाख 70 हजार रुपये है। पत्नी शेफाली की अचल संपति 45 लाख 34 हजार 430 रूपये है। अनुराग ठाकुर की चल संपति 2 करोड़ 36 लाख 25 हजार 328 रूपये तथा पत्नी के नाम चल संपति 45 लाख 34 हजार 430 रुपये है।

विदेशी पिस्टल
अनुराग ठाकुर का विभिन्न बैंकों में 39 लाख जबकि पत्नी का 16 लाख रुपये के करीब जमा है। अनुराग ठाकुर के पास तीन लाख 20 हजार के आभूषण के अलावा 3 लाख 25 हजार की पिस्टल भी है। पत्नी के पास 22 लाख आठ हजार के आभूषण और अढाई लाख की पिस्टल है। दोनों पिस्टल विदेशी हैं। अनुराग के पास जर्मन कंपनी वॉल्दर (Walther) की पिस्टल है जबकि उनकी पत्नी के पास बेल्जियन कंपनी एफ़.एन. ब्राउनिंग की पिस्टल है।

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अनुराग ठाकुर के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हैं। एक एफआईआर को अदालत के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया है। किसी भी एफआईआर में आरोप तय नहीं हुए हैं।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

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