मंत्री की जगह बेटे ने किया सड़क का भूमिपूजन, हो रही है आलोचना

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर में स्थानीय विधायक और आईपीएच मिनिस्टर महेंद्र सिंह ठाकुर की जगह उनके बेटे ने सड़क का शिलान्यास कर दिया। यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कमलाह के मझयार गांव के लिए बनने वाली सड़क का शिलान्यास महेंद्र ठाकुर को करना था मगर उनके बेटे रजत ठाकुर ने ही सारी औपचारिकताएं पूरी कीं।

शिलान्यास और भूमि पूजन समारोह के लिए लगी पट्टिका में आईपीएच मंत्री का ही नाम लिखा था। मगर रजत ठाकुर ने वहां पर भूमि पूजन किया। सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं मौके पर मौजूद अधिकारियों पर। जिस दौरान यह सब हुआ, उस दौरान पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी वहां मौजूद थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अखबारों की कटिंग्स सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मंत्री का परिवार भी मंत्री हो जाता है।

आरोप और भी
जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया है कि लोकतंत्र में राजतंत्र जैसा काम किया जा राह है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मपुर में मंत्री की जगह उनके बेटे और बेटी ही अधिकतर कार्यक्रमों में मुख्त अतिथि की भूमिका निभा रहे हैं जबकि वे न तो सरकारी पद पर हैं और न ही जन प्रतिनिधि। उनका आरोप था कि पिछले स्कूली बच्चों की खेल प्रतियोगिता से लेकर कृषि जागरूकता शिविर में भी महेंद्र सिंह के बेटे की मुख्यातिथि थे।

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विवादों में रहे हैं महेंद्र
महेंद्र सिंह ठाकुर की कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ताजा मामला पिछले साल का है जब आरोप लगा था कि आईपीएच मंत्री अपने इलाके के लोगों को नौकरी में मदद करने के लिए बाकायदा चिट्ठी भेज रहे हैं। इससे सवाल उठा था कि अगर मंत्री इस तरह से करेंगे तो नौकरियां देने में निष्पक्षता कहां से रहेगी। 20 जून 2018 को दैनिक भास्कर ने बाकायदा लेटर के साथ खबर छापी थी।

राज्य के आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने अपने निर्वाचन हलके के एक युवक पत्र लिखकर अपने ही विभाग के बोर्ड में 20 जून तक आवेदन करने को कहा था। यही नहीं, मंत्री ने पत्र के साथ आवेदन फार्म भी भेजा था। आगे यह भी लिखा था कि यदि प्रार्थी के पास पोस्ट की पात्रता के लिए तय न्यूनतम अनुभव नहीं है आैर हासिल करने में दिक्कत आए तो इसे दूर किया जाएगा।

परिवार पर भी आरोप
इसके अलावा सोशल मीडिया एक तस्वीर वायरल होने के बाद एक खबर सोशल मीडिया में छाई रही थी कि बागवानी निदेशक के नाम पर पंजीकृत सरकारी इनोवो क्रिस्टा को मंत्री की बेटी इस्तेमाल करती दिखी।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर के अनुसार सूबे के तेजतर्रार मंत्री की बेटी ने कथित तौर पर सरकारी वाहन (एचपी 63डी-0001) में सहेलियों के साथ घूमने के दौरान फोटो क्लिक करवाया था।

वाहन की रजिस्ट्रेशन डीटेल्स

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में धर्मपुर निवासी रमेश चंद ने चुनाव से पहले दिए जाने वाले हलफनामों के आधर पर याचिका डाली है कि यहां के विधायक और जयराम सरकार में बागवानी एवं आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की पत्नी गृहिणी हैं और 2012 में उनके पास पैन कार्ड तक नहीं था। लेकिन इस बार उनकी संपत्ति 7.68 करोड़ दिखाई गई है। सवाल पूछा गया है कि पांच साल में उनके गृहिणी होते हुए यह संपत्ति एकाएक कैसे आ गई।

गौरतलब है कि महेंद्र सिंह ठाकुर की पत्नी के नाम पर मनाली के रांगड़ी में एक होटल भी है। एनजीटी के आदेश के बाद जांच में यहां पाया गया था कि टीसीपी और अन्य निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया है। इस कारण होटल का बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया था। बाद में खबर आई थी कि अवैध हिस्से पर खुद ही हथौड़ा चला दिया गया था।

प्रदेश में इस तरह से 1700 होटलों में अनियमितताएं पाई गई थीं और फिर जयराम सरकार ने इन होटलों को राहत देने की बात कही थी। उस समय विपक्ष ने आरोप लगाया था और ऐसी खबरें भी आई थीं कि सरकार में बैठे बड़े नेता के रिश्तेदार के होटल फंसने के कारण ही सरकार नियमों में बदलाव कर रही है ताकि उन्हें राहत दे सके। बाद में नियमों में बदलाव करके यह राहत राज्य सरकार ने दे भी दी थी।

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ऊना: सार्वजनिक भूमि पर नमाज के विरोध में हुड़दंग, पुलिस मूकदर्शक

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के नंगलकलां में कुछ हिंदू संगठनों ने नगर पंचायत की भूमि पर नमाज पढ़ने का विरोध करते हुए हुड़दंग किया। कुछ तथाकथित हिंदूवादी संगठनों ने टाहलीवाल हाजार से लेकर उस जगह तक रैली निकाली, जहां पर नमाज पढ़ी जाती है। यहां उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया और पहले से मुस्लिम समुदाय की ओर से टेंट के लिए लगाए गए खंबों को उखाड़ दिया गया। इस दौरान काफी संख्या में पुलिसकर्मी भी तैनात थे।

क्या है मामला
हर शुक्रवार को नगर पंचायत की जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते थे। हिंदू संगठनों इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि यहां हिमाचल के अलावा अन्य जगहों से भी लोग आते हैं और इस जगह नमाज अदा करने से माहौल खराब हो रहा है। उनका आरोप है कि पंचायत की भूमि पर जबरन कब्जा किया गया है और रास्ता रोकने की कोशिश हो रही है।

स्थानीय हिंदुओं का कहना था कि प्रशासन और नगर पंचायत के सामने वे कई बार मामला उठा चुके हैं मगर शिकायत को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी के विरोध में कुछ कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों ने रैली निकाली जिनमें ग्रामीण भी शामिल थे। वे भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय श्री राम के नारे लगाते रहे। फिर वे नमाज वाली जगह पहुंचे, वहां तंबुओं के लिए लगाए गए खंबों को उखाड़ा और हनुमान चालीसा पढ़ी।

मूकदर्शक पुलिस (तस्वीर: Punjab Kesrai)

हैरानी की बात यह है कि इस दौरान पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे और सबकुछ देखते रहे। सवाल उठ रहे हैं कि अगर यह अवैध कब्जा हटाना ही था तो प्रशासन को खुद हटाना था, हुड़दंगियों से क्यों हटवाया गया।

मूकदर्शन

इससे एक दिन पहले मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसपी से मुलाकात की थी। नगर पंचायत और पुलिस ने मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि वे इस जगह नमाज न पढ़ें। शुक्रवार को समुदाय के लोग नमाज पढ़ने पहुंचे भी नहीं। दरअसल इस जगह का मामला डिविजनल कमिश्नर धर्मशाला के पास लंबित है। हरोली के तहसीलदार का कहना है कि वहां से फैसला आने के बाद ही जमीन पर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

क्या कहते हैं दोनों पक्ष
क्षत्रिय महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भूपिंद्र ठाकुर और हिन्दू एकता मंच के अध्यक्ष नरेश राणा ने पत्रकारों से कहा कि हिमाचल को कैराना, मेरठ और पश्चिमी बंगाल बनने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बात को हिन्दू संगठन कतई सहन नहीं करेंगे। उधर मुस्लिम समुदाय का कहना है कि 1984 से ही इस जगह पर नमाज होती रही है। दैनिक भास्कर के मुताबिक रमजान नाम के शख्स ने कहा कि यह जमीन 1986 में नगर पंचायत के नाम चढ़ गई थी और हमने इसकी दुरुस्ती के लिए केस दायर किया है। उनका कहना था कि कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उन्हें मान्य होगा।

ऑपरेशन क्लीन: नोएडा में 120 अवैध बसें जब्त, हिमाचल कब जगेगा?

इन हिमाचल डेस्क।। देश की राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा और ग्रेटर नोएडा पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत यमुना एक्स्प्रेस वे पर दौड़ने वालीं 150 बसों को सीज किया है। आरोप है कि ये बसें बिना परमिट दौड़ रही थीं। ये बसें दिल्ली से लखनऊ, गोरखपुर, आजमगढ़, बनारस और पटना तक जाती थीं। इनमें एसी और स्लीपर बसें शामिल हैं।

सुबह पांच से नौ बजे तक चले अभियान के तहत इन्हें सीज किया गया है। जिन बसों के पास कागज नहीं मिले, उन्हें सीज ही कर लिया गया। बता दें कि इससे पहले ऑपरेशन क्लीन के पिछले चरण के तहत यूपी पुलिस ने इसी इलाके में 1174 ऑटो सीज किए थे। नीचे देखें, बसें जब्त होने के बाद नारेबाजी करते ऑपरेटर।

हिमाचल में भी अवैध बसें
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश भी इसी तरह बिना परमिट दौड़ रही वॉल्वो और एसी बसों से जूझ रहा है। ये बसें यात्रियों को दिल्ली से मनाली, धर्मशाला और शिमला जैसी जगहों को लाती हैं। इन बसों के पास सिर्फ ग्रुप्स को टूर पर ले जाने का परमिट है मगर बुकिंग ऐप्स के माध्यम से ये रोज फिक्स रूट पर चल रही हैं और हरियाणा, पंजाब व हिमाचल को चूना लगा रही हैं। द द्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल तक हिमाचल से 200 निजी बसें दिल्ली तक जा रही थीं मगर 70 ही हरियाणा में टैक्स दे रही थीं।

यही नहीं, इससे हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के दिल्ली से चलने वाले लग्जरी बसों के रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। चूंकि बिना परमिट वाली ये बसें टैक्स नहीं देतीं, इसलिए इनका किराया एचआरटीसी की बसों से लगभग आधा है। ऐसे में कौन यात्री चाहेगा कि ज्यादा पैसे दे। इसलिए हिमाचल के लोग और पर्यटक इन बसों से ही यात्रा करना ठीक समझते हैं। कैसे ये बसें एचआरटीसी को चूना लगा रही हैं, इसे पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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बेबस सरकारें
यह समस्या नई नहीं है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भी यह मामला उठा था। एक बार तत्कालीन परिवहन मंत्री सुबह-सुबह सड़कों पर भी उतरे थे मगर कुछ दिन बाद हालात वही हो गए थे। नई सरकार आने के बाद इस समस्या पर लगाम लगाए जाने की उम्मीद जगी थी मगर हालात सुधरे नहीं हैं। यहां तक कि पिछले दिनों ऐसी बात भी सामने आई थी कि हिमाचल में चलने वाली बिना परमिट वाली इन बहुत सी बसों को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के परिवार की कंपनियों ने खरीद लिया था।

पिछले साल मार्च में खबर आई थी कि बादलों ने जो कंपनियां खरीद ली हैं या खरीदने जा रहे हैं, वे इस तरह से हैं- लक्षमी होलीडेज़, लीओ ट्रैवल्स, नॉदर्न ट्रैवल्स, अप्सरा ट्रैवल्स और तनिष्क ट्रैवल्स। इन कंपनियों को बादल की कंपनी मेट्रो ईको ग्रीन रिजॉर्ट्स खरीद रही है जिसमें सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर शेयरहोल्डर हैं। इसका जिक्र इन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में भी किया था।

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पॉलिसी क्यों नहीं?
सवाल यह भी उठता है कि जब सरकार और परिवहन विभाग इतनी बड़ी भीमकाय बसों को नहीं रोक सकता तो कैसे वह हिमाचल प्रदेश चिट्टे या अन्य नशीली चीजों की तस्करी रोक पाएगा? और अगर सरकार को लगता है कि वह अक्षम है और इन बसों के गोरखधंधे को नहीं रोक सकती या ऐसा करने से टूरिजम प्रभावित होगा तो वह कोई टैक्स सिस्टम या ऐसी पॉलिसी क्यों नहीं लाती जिसके तहत इन बसों से टैक्स लिया जा सके। ऐसा करने पर प्रदेश को राजस्व भी मिलेगा और एचआरटीसी को हो रहे घाटे की भरपाई भी।

ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मी से मारपीट करने पर चार गिरफ्तार

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में पुलिसकर्मी से मारपीट करने वाले चार को गिरफ्तार किया है। पौंग बांध पर बाथी दी लड़ी के पास तैरारी कर रहे लोगों को हटा रहे पुलिसकर्मी लाल चंद पर इन लोगों ने कथित तौर पर हमला कर दिया था। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें ये युवक इस बात से नाराज थे कि उन्हें तैराकी करने से क्यों रोका गया।

गौरतलब है कि जिस जगह पर ये लोग तैर रहे थे, वह जगह खतरनाक है और अब तक कई लोगों की यहां डूबकर मौत हो चुकी है। ऐसे में प्रशासन के आदेश पर पुलिसकर्मी यहां आए पर्यटकों को हटा रहे थे। ऐसे में कुछ स्थानीय युवक भड़क गए कि हमें क्यों रोका जा रहा है, पुलिस को तो बाहर से आए पर्यटकों को रोकना चाहिए।

वीडियो में बाद में ये लोग पुलिसकर्मी से उलझते हुए नजर आए। लाल चंद का आरोप है कि हाथापाई के दौरान उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई। इस घटना के बाद पुलिस ने हरकत में आए हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अश्विनी कुमार, संजीव कुमार, अभिषेक और सृष्टि गुलेरिया शामिल हैं।

घटना का वीडियो देखें-

बसों की समस्या पर छात्रों ने कुल्लू-मनाली हाइवे किया जाम

एमबीएम न्यूज़, कुल्लू।। बुधवार को स्कूली बच्चों ने कुल्लू-मनाली हाईवे को जाम कर दिया है। स्कूली छात्र-छात्राओं ने डोभी पुल के पास सड़क कप पूरी तरह बंद कर दिया। यहां पर जाम लगायां गया, वह प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर का विधानसभा क्षेत्र है। प्रदर्शन कर रहे बच्चों का कहना है कि उन्हें बसें नहीं मिल रही। उनका कहना है बसों में स्कूल-कॉलेज के छात्रों को बैठने नहीं दिया जा रहा।

चक्का जाम करते स्कूली छात्र (इमेज: MBM News Network)

डोभी क्षेत्र से कटराईं, पतलीकूहल और नग्गर क्षेत्र के स्कूलों सहित आसपास के सरकारी व निजी स्कूलों को जाने वाले कई छात्र-छात्राओं को आज सुबह बसें नहीं मिल पाई। जो बसें डोभी पुल के पास रुक रही थीं, वे बच्चों को बैठने में आना कानी कर रही थी।

इससे गुस्साए छात्र-छात्राएं सड़क पर धरने पर बैठ गए। छात्र-छात्राओं के साथ क्षेत्र के लोग भी नारेबाजी में शामिल दिखे। वे नारे लगाते हुए प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर कर रहे थे।

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चक्का जाम होने के बाद पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। करीब नौ बजे से ट्रैफिक रुकने के कारण डोभी पुल के दोनों और कई किलोमीटर तक लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। एचआरटीसी के आरएम ने मौके पर पहुंचकर छात्र-छात्राओं को समझाने की कोशिश की।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की है)

सड़क सुरक्षा पर सीएम ने ली हाई लेवल मीटिंग, लिए ये फैसले

शिमला।। शिमला शहर में सड़कों पर केवल एक तरफ पीली लाईन पर ही वाहनों की पार्किंग की अनुमति दी जाएगी और अनाधिकृत पार्किंग पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी की अध्यक्षता में सोमवार को सड़क सुरक्षा पर वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया।

सीएम ने कहा कि शिमला में अधिकृत पार्किंग और अनाधिकृत पार्किंग क्षेत्र के साईन बोर्ड स्थापित किए जाएंगे। शिमला में चल रहे तीन बड़ी पार्किंग स्थलों को विकसित करने के कार्य में तेजी लाई जाएगी जबकि जिला प्रशासन व नगर निगम शिमला विशेषकर आवासीय क्षेत्रों में पार्किंग विकसित करने के लिए जगह चिन्हित करेंगे। इससे लोगों को जहां पर्याप्त पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी, वहीं शहर की सड़कों पर यातायात की व्यवस्था भी सुचारू बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने शिमला जिला प्रशासन और नगर निगम को 10 जुलाई तक ऐसे स्थल चिन्हित करने के भी निर्देश दिए जहां सड़क के किनारे पीली रेखा के साथ छोटी-छोटी पार्किंग विकसित की जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को अपने घरों के सैटबैक के दायरे में निजी पार्किंग विकसित करने के पहलू पर विचार करेगी।

सीएम ने कहा कि सभी सरकारी कार्यलयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपने वाहनों के लिए उनके पास पर्याप्त पार्किंग स्थल हो ताकि सड़कों पर वाहनों को खड़ा करने की आवश्यकता न रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों पर 50 मीटर के दायरे में पार्किंग की अनुमति नहीं दी जाएगी जहां स्कूली विद्यार्थी अपनी स्कूल बसों से उतरते और चढ़ते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लोगों को सड़क सुरक्षा के सम्बन्ध में जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता, शिक्षा एवं सम्पर्क गतिविधियां चलाई जाएंगी। राज्य में सभी तंग सड़कों को चिन्हित कर उन्हें चौड़ा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि शिमला शहर में रोजाना 1,65,000 वाहन चलते हैं जिसके कारण लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक सड़कों के निर्माण की आवश्यकता है।

सड़क सुरक्षा पर आज हमने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।हमने निर्णय लिया है कि शिमला शहर की सड़कों में केवल एक तरफ पीली…

Jairam Thakur ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಜುಲೈ 1, 2019

मुख्यमंत्री ने शिमला में एक स्कूल बस दुर्घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मृतकों के परिवारों को पांच लाख रुपये की राशि दी जा रही है तथा घायलों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन वाहनों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है जिसके लिए सभी स्कूल बसों की जांच नियमित रूप से की जाएगी तथा स्कूल प्रबन्धन को सुरक्षा मापदण्डों के बारे में जागरूक बनाया जाएगा।

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और परिवहन मंत्री गोविन्द ठाकुर ने भी वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सड़क सुरक्षा एवं सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। महापौर कुसुम सदरेट, उपमहापौर राकेश शर्मा, मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकान्त बाल्दी व आर.डी. धीमान, प्रधान सचिव, परिवहन जे.सी. शर्मा, प्रधान सचिव राजस्व, ओंकार शर्मा, पुलिस महानिदेशक एस.आर. मरडी, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव संजय कुण्डू, परिवहन निदेशक जे.एम. पठानिया, उपायुक्त शिमला अमित कश्यप, नगर निगम आयुक्त पंकज रॉय, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डी.सी. राणा, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियन्ता आर.पी. वर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।

स्रोत: सीएमओ हिमाचल

हाई कोर्ट ने लिया शिमला हादसे का संज्ञान, नूरपुर हादसे के साथ सुनवाई कल

शिमला।। पूरे प्रदेश को हिलाकर रेख देने वाले शिमला स्कूल बस हादसे का हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार नूरपुर स्कूल बस हादसे के केस के साथ होगी।

बता दें कि नूरपुर में पिछले साल अप्रैल में स्कूल बस सड़क से नीचे लुढ़क गई थी जिससे 29 बच्चों समेत 32 लोगों की जान चली गई थी। उस समय इस खबर ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं।

पढ़ें- खराब सड़कों को हादसों का कारण क्यों नहीं माना जाता?

शिमला में सोमवार सुबह हुए हादसे में दो छात्राओं और ड्राइवर की मौत हो गई जबकि पांच अन्य छात्रों का इलाज चल रहा है।

यह सरकारी बस थी जो कॉन्वेंट ऑफ जीज़स ऐंड क्राइस्ट (चेल्सी) स्कूल के बच्चों के लिए सेवाएं दे रही थी।

पढ़ें- हिमाचलियो! शोर मत करो, कहीं विपक्ष की नींद न टूट जाए

सीएम जयराम ठाकुर ने हादसे की मजीस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। हादसे का कारण जांच के बाद पता चलेगा मगर तंग सड़क से गुजरते समय ड्राइवर की गलत जजमेंट को एक वजह माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि सड़क के किनारे पार्क की गाड़ियों की वजह से रास्ता बेहद तंग हो गया था। सड़क किनारे टायर के नीचे से कच्ची मिट्टी धंसने के कारण बस लुढ़क गई।

हादसे की शिकार हुई बस का इंश्योरेंस पिछले महीने की तीन तारीख को खत्म होने की बात भी सामने आई है। न्यूज 18 की खबर के मुताबिक 10 जून को यह बस बीच रास्ते में खराब भी हुई थी।

पढ़ें- तीन जून को खत्म हो चुकी थी बस की इंश्योरेंस?

इस बीच लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस और नेताओं को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का जनता ने घेराव किया जिसके बाद उन्हें मौके से जाना पड़ा। उधर कुछ लोगों ने सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए।

पढ़ें- असफल रहे परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर, तुरंत दें इस्तीफा: राठौर

असफल रहे परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर, तुरंत दें इस्तीफा: कुलदीप राठौर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के खलीणी में निजी स्कूल के लिए चल रही एचआरटीसी की बस के हादसे के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने परिवहन मंत्री से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर अपने दायित्व को निभाने में पूरी तरह असफल रहे हैं।

कुलदीप राठौर ने हिमाचल में बढ़ते बस हादसों पर चिंता जताते हुए परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर से तुरंत इस्तीफे की मांग की। राठौर ने कहा, “परिवहन मंत्री अपने विभाग को सुचारू ढंग से चलाने और अपना दायित्व निभाने में पूरी तरह असफल रहे हैं।”

‘खटारा थी बस’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जो बस हादसे की शिकार हुई वह खटारा थी और पिछले माह उसकी इंश्योरेंस तक खत्म हो गई थी। राठौर ने कहा, “बावजूद इसके इसे स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने में लगा रखा था। जब राजधानी शिमला में ही परिवहन व्यवस्था का यह हाल है तो प्रदेश के अन्य और ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होगा।”

पढ़ें- शिमला बस हादसा: 3 जून को ही खत्म हो चुकी थी बस की इंश्योरेंस?

कुलदीप राठौर ने सरकार से सवाल किया है कि परिवहन निगम के पास सैकड़ों नई बसें हैं जो स्टाफ के बिना खड़ी हैं, मगर सड़कों पर खटारा बसें दौड़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “मंत्रियों के लिए तो लाखों की कीमती गाड़ियां खरीदी जा रही हैं मगर आम लोगों की सुविधा की ओर सरकार का कोई ध्या नही है।”

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खराब सड़कों को हादसों का कारण क्यों नहीं माना जाता?

राजेश वर्मा।। हादसों के लिए निजी बस ऑपरेटरों पर तो कार्रवाई हो रही है लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग पर कार्रवाई कौन करेगा? जितने हादसे इनकी लचर व्यवस्था से होते हैं उतने तो शायद ही अन्य कारणों से होते होंगे।

प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग हो, राज्य मार्ग हो या गांव की लिंक सड़कें, क्या खड्ढे, टायरिंग के नाम पर धूल की फायरिंग, लुक की जगह थुक, नालियों का नाम नहीं, डंगों का काम नहीं जैसी नीति है इनकी।

नई सड़कें धड़ाधड़ बनाई जा रही हैं और पुरानियों में मिट्टी बिछाई जा रही है लेकिन लोगों का क्या है। कभी उन्हें ओवर लोडिंग के नाम पर मारा जाएगा कभी उन्हें खटारा वाहन का बहाना लगाकर दुत्कारा जाएगा परंतु सड़कों की जवाबदेही न विभाग की न ठेकेदार की।

जब भी कोई हादसा होता है तो वहां पर सड़क की गुणवत्ता व सड़क सुरक्षा की जांच क्यों नहीं होती। दोषी कोई भी हो उस पर सीधे मर्डर या जानलेवा हमले का केस दर्ज होना चाहिए क्योंकि जब ऐसी दुर्घटनाओं में किसी की असमय मौत होती है तो उसमें लापरवाही व अनदेखी भी एक कारण है और पीडब्ल्यूडी विभाग भी ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार है।

मानवीय क्षति की कोई भरपाई नहीं लेकिन खून पसीने की कमाई से लोन लेकर जिन्होंने गाड़ियां ली हैं, उनकी गाड़ियां जब खड्ढों में गिरती है और टूट-फूट होती है उस आर्थिक हानि की भरपाई तो हो सकती है फिर यह भरपाई भी पीडब्ल्यूडी विभाग से क्यों न की जाए।

हादसों के बाद ब्लैक स्पाट चिन्हित किए जाते हैं। हादसों में सीधा ओवर लोडिंग को कारण बता कर अपनी जवाबदेही से बचने का यह तरीका कतई सही नहीं। प्रदेश में जितने भी हादसे हुए उन सभी के लिए अकेले ओवर लोडिंग ही उत्तरदायी नहीं हो सकती। अब तो लगने लग गया हो जैसे “लोक निर्माण विभाग” का “नाम लोक मार विभाग” कर देना चाहिए?

(स्वतंत्र लेखक राजेश वर्मा लम्बे समय से हिमाचल से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे vermarajeshhctu @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

ये लेखक के निजी विचार हैं।

हिमाचलियो! शोर मत करो, कहीं विपक्ष की नींद न टूट जाए

हिमाचलियो! शोर मत करो, कहीं विपक्ष की नींद न टूट जाए

आई. एस. ठाकुर।। श्….श्….श्…! हिमाचल वासियो, खामोश! शोर मत करो वरना विपक्ष जग जाएगा।

उसकी नींद में खलल न डालो। अभी वह अपनी ऊर्जा बचा रहा है ताकि कुछ दिनों में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में हंगामा कर सके, वॉकआउट करके पत्रकारों के कैमरे के सामने पूरी ताकत से ‘ये सरकार निकम्मी है’ के नारे लगा सके।

अभी उसे वैसे भी कुछ सुनाई नहीं दे रहा। विपक्ष को स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं के आरोपों की खबर नहीं, खराब सड़कों और हादसों के बारे में नहीं मालूम, बीमार अस्पतालों और बर्बाद होते जंगलों के बारे में भी उसे कुछ नहीं पता। वह तो मीठी सी नींद ले रहा है।

तो हिमाचल वासियो! अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के सामने गुहार मत लगाओ, हक के लिए आवाज बुलंद न करो, अगर कोई दुख या दर्द है तो उसे सहो, गलती से भी कराह नहीं निकलनी चाहिए वरना विपक्ष की नींद टूट सकती है।

अगर विपक्ष जग गया तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। उसे अभी से पत्रकारों के सामने आना पड़ सकता है, छुट्टियों में खलल पड़ सकता है। नारे लगाने से अभी से गला बैठ गया तो बाद में सत्र शुरू होने पर विधानसभा के अंदर नारे कैसे लगेंगे? और कहीं सड़कों पर उतरना पड़ गया तो अपनी ही पार्टी के प्रतिद्वंद्वी नेता के साथ कैसे आ पाएंगे?

तो प्यारे हिमाचल वासियो, विपक्ष को धर्मसंकट में मत डालो। बल्कि उसी से सीख लेते हुए दिल को समझाओ कि सब ठीक है, चिंता की कोई बात नहीं। सरकार है न हर बात की ‘जांच के आदेश’ देने के लिए।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है)

ये लेखक के निजी विचार हैं