जब धूमल के खास रहे बिंदल को छोड़ना पड़ा था स्वास्थ्य मंत्री का पद

शिमला।। बीजेपी नेता राजीव बिंदल को ताजपोशी के साढ़े चार महीनों में ही पार्टी प्रदेशाध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा है। एक वायरल ऑडियो के आधार पर स्वास्थ्य निदेशक अजय गुप्ता व पृथ्वी सिंह नाम के शख्स की गिरफ्तारी के बाद बिंदल ने ‘नैतिक मूल्यों’ का हवाला देकर इस्तीफा सौंपा था जो राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वीकार कर लिया था।

दरअसल पृथ्वी सिंह और निदेशक के बीच 5 लाख के कथित लेनदेन का ऑडियो वायरल हो गया था। इसके बाद खबरें आई थीं कि बीजेपी के बड़े नेता ने निदेशक के सेवा विस्तार की अनुशंसा की थी। फिर एक विजिटिंग कार्ड सामने आया जिसमें पृथ्वी सिंह का नाम एपेक्स डायग्नोसिस के कर्मचारी के तौर पर था। इस कम्पनी में बिंदल की पुत्री व दामाद का स्वामित्व है।

इसके बाद गुपचुप तरीके से सवाल उठाए जाने लगे थे। इस्तीफा दे चुके बिंदल का कहना है कि कथित घोटाले से साजिश के तहत जबरन उनका नाम जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि आजीवन उन्होंने नेकी और सेवाभाव से खुद को जोड़ा है और इस ‘अग्निपरीक्षा’ को भी वह पार कर लेंगे।

यह पहला मौका नहीं है जब बिंदल भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं। 2012 में जब बीजेपी की सरकार थी, तब आए दिन विपक्ष विधानसभा में बिंदल को लेकर हंगामा करता था। बिंदल पर कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे। उनपर मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति बनाने और गैरकानूनी तरीकों से जमीन खरीदने का आरोप लगाया जा रहा था।

धूमल को सदन में इस्तीफा सौंपा
तब बिंदल ने उन आरोपों को निराधार बताया था और सदन में भावनात्मक भाषण देते हुए आरोपों का जवाब दिया था। यहीं नहीं, उस दिन (12 मार्च, 2012) को उन्होंने सदन में ही तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार धूमल को इस्तीफा देने का एलान कर दिया था। मगर धूमल ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए बिंदल के इस्तीफे को खारिज कर दिया था।

बिंदल ने आरोप लगाने वालों पर मानहानि का दावा भी किया था। बावजूद उसके बिंदल पर आरोप लगते रहे और विपक्ष उन्हें घेरता रहा और लगातार सदन से वॉकआउट करता रहा। फिर, 26 जुलाई को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री का पद छोड़ा और बीजेपी महासचिव की जिम्मेदारी संभाल ली।

छोड़ना पड़ा था मंत्री पद
उस वक़्त उनका कहना था कि हाइकमान से उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। मगर उस समय हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा था कि शांता खेमा बिंदल से नाराज था और साल भर पहले बीजेपी के ही चार विधायक और दो मंत्री दिल्ली में तत्कालीन अध्यक्ष गडकरी से मिले थे और बिंदल को हटाने की मांग की थी।

वहीं, जागरण ने लिखा था कि ‘गडकरी ने दो टूक बिंदल को मंत्री पद छोड़ संगठन की जिम्मेदारी संभालने को कहा था।’

इससे पहले 2007 में भी विपक्ष ने बिंदल पर जमीन खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे और एचटी के अनुसार, शांता खेमे ने उन्हें टिकट देने का विरोध किया था। बाद में जब बीजेपी की सरकार बनी तो बिंदल को मंत्री बनाने का भी विरोध किया गया था। हालांकि धूमल ने अपने दाहिने हाथ बिंदल को भी मंत्री बनाया था और शांता खेमे से धवाला को भी।

सोलन नगर परिषद
विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ बिंदल का रिश्ता पुराना है। हालांकि, ये आरोप ही हैं और कोर्ट में कोई मामला अभी सिद्ध नहीं हुआ है। जैसे कि बिंदल पर सोलन नगर परिषद का अध्यक्ष रहते हुए कर्मचारियों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। 2012 में जब वीरभद्र सरकार बनी थी तो उसने मामले की जांच बिठाई थी और 2015 में बिंदल समेत 25 लोगों पर आरोप तय किए गए थे। तब बिंदल ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया था।

अब सबकी निगाहें ताजा मामले पर हैं कि आगे क्या होता है।

स्वास्थ्य निदेशक केस: बेटी की कंपनी के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद बिंदल ने दिया इस्तीफा

छुट्टी आ रहे फौजियों के लिए विशेष प्रबंध करे सरकार: बाली

कांगड़ा।। पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने सरकार को सुझाव दिया है कि साल में एक आध बार कुछ दिनों की छुट्टी पर आ रहे फौजी भाइयों के लिए जल्द टेस्टिंग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि उन्हें इंस्टिट्यूशनल क्वारन्टीन में अधिक समय न बिताना पड़े और वे अगली पोस्टिंग पर जाने से पहले परिवार को समय दे पाए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने फेसबुक पर अपनी बात लिखी है। वह कहते हैं, “हमारे प्रदेश से कई जवान तीनों सेनाओं में देश सेवा में कार्यरत हैं। उनमें से कई फौजी भाइयों की छुट्टी आजकल स्वीकृत हुई है। पांच छः महीने में एक बार 10-15 दिन के लिए वे घर आते हैं। वो सेंटर कवारन्टाईन में रहेंगे तो उनकी छुटियाँ इसी में खत्म हो जाएंगी।”

“हमारे ये सैनिक भाई संशय में हैं कि छुट्टी मिलने पर भी क्या वो घर परिवार के साथ समय गुजार पाएंगे या नहीं? सरकार जिलावार आजकल या आने वाले दिनों में घर छुट्टी आने वाले सैनिकों के लिए COVID19 टेस्टिंग का विशेष प्रबंध करें। जहाँ सैनिक एक दो दिन रुक भी सकें और टेस्टिंग का रिजल्ट अगर नेगटिव आता है तो कम से कम होम कवारन्टाईन के लिए अपने घर जा सकें।”

हमारे प्रदेश से कई जवान तीनों सेनाओं में देश सेवा में कार्यरत हैं। ,उनमे से कई फौजी भाइयों की छुट्टी आजकल स्वीकृत हुई…

GS Bali ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಮೇ 28, 2020

बाली ने सुझाव दिया है कि इस दिशा में स्पेशल रूप से अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए जहाँ सैनिक भाई अपनी बात रख सकें या जानकारी प्राप्त कर सके।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वीकार किया बिंदल का इस्तीफा

शिमला।। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश बीजेपी के अध्य्क्ष रहे राजीव बिंदल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बिंदल ने स्वास्थ्य निदेशक वायरल ऑडियो मामले में हो रही चर्चा के बाद नड्डा को बुधवार शाम इस्तीफा भेज दिया था जिसे शाम को स्वीकार कर लिया गया।

इस्तीफा देने के बाद बिंदल ने क्या कहा था, देखें-

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद से त्यागपत्र भेजने को लेकर क्या कहा राजीव बिंदल ने, देखें।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಮೇ 27, 2020

सीएम जयराम ठाकुर से इस संबंध में जब पत्रकारों ने सवाल किए थे तो उनका क्या कहना था, ये भी सुनें-

देखें, राजीव बिंदल के इस्तीफे और ऑडियो टेप मामले की जांच को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने क्या कहा।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಮೇ 27, 2020

पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी थी-

बिंदल के इस्तीफे पर क्या बोले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, देखें।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಮೇ 27, 2020

क्या है पूरा मामला, जानें-

स्वास्थ्य निदेशक केस: बेटी की कंपनी के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद बिंदल ने दिया इस्तीफा

 

स्वास्थ्य निदेशक केस: बेटी की कंपनी के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद बिंदल ने दिया इस्तीफा

शिमला।। कथित तौर पर पैसा मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य निदेशक और पृथ्वी सिंह नाम के शख्स की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वीकार किया बिंदल का इस्तीफा

पृथ्वी सिंह नाम का ये शख्स जिस कम्पनी में काम करता बताया जा रहा है, वह अपेक्स डायग्नोस्टिक्स है। उसके विजिटिंग कार्ड की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसकी पड़ताल होना बाकी है कि अभी भी यह शख्स इस कम्पनी का कर्मचारी है या नहीं और लीक हुई बातचीत का इससे संबंध है या नहीं।

कार्ड और वेबसाइट के मुताबिक, इस कम्पनी में डॉक्टर राज कुमार गांधी और डॉक्टर स्वाति बिंदल गांधी का स्वामित्व है। गौरतलब है कि स्वाति हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राजीव बिंदल की बेटी हैं।

ऐसे में इस मामले में कई चर्चाएं हो रही थीं। इस बीच, इस मामले के सामने आने के आठ दिन बाद बिंदल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को त्यागपत्र भेजा है। हालांकि, उन्होंने अपने बजाय संगठन का जिक्र करते हुए लिखा है कि भाजपा पर सवाल उठ रहे थे। उन्होंने लिखा है कि नैतिकता के आधार पर वह इस्तीफा दे रहे हैं। जोर देकर लिखा है – ध्यान रहे, उच्च नैतिक मूल्यों के आधार पर ही इस्तीफा दे रहा हूं।

उनका लिखा आगे पढें –

इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। इस मामले में सीएम जयराम ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया हुआ था और विजिलेंस को बिना दबाव काम करने की छूट दी थी। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आगे क्या होगा।

वंदना गुलेरिया बनाई गईं बीजेपी महिला मोर्चा की महामंत्री

सरकाघाट।। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा रश्मि धर सूद ने मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारियों व जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी हैं। इसमें जलशक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर की बेटी और प्रदेश जुवेनाइल जस्टिस केयर आयोग सदस्य बंदना गुलेरिया को महामंत्री पद की सौग़ात प्रदान की गई है। वंदना गुलेरिया इससे पहले जिला परिषद सदस्य और महिला आयोग से लेकर कई अन्य संगठनों पर रह चुकी हैं।

प्रदेश अध्यक्ष रश्मि धर सूद ने बताया कि प्रदेश पदाधिकारियों में पांच उपाध्यक्ष, दो महासचिव, पांच सचिव, एक सोशल मीडिया एवं आईटी प्रभारी, एक कोषाध्यक्ष और एक कार्यालय सचिव होंगे। उन्होंने बताया कि शोभा डडवाल, नूरपुर , वीना शर्मा, हमीरपुर, धन्नो देवी, चंबा, देव ऋषि, किन्नौर , एवं नीलम ठाकुर, देहरा, को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेवारी मिली। इसी प्रकार वंदना गुलेरिया हमीरपुर एवम शीतल व्यास, शिमला को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेवारी दी गई है।

गायत्री कपूर ,धर्मशाला, मीनाक्षी राणा ,ऊना , मांचली ठाकुर ,मंडी, द्रौपदी शर्मा, सिरमौर एवं मंजू जरियाल ऊना को प्रदेश सचिव का दायित्व सौंपा गया। रश्मि सूद ने बताया कि डॉ अर्चना ठाकुर कुल्लू को प्रदेश सोशल मीडिया एवं आईटी का दायित्व सौंपा गया और मधु सूद शिमला को प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेवारी दी गई है। किरण बाबा शिमला, को डाटा डिजिटिकरण एवं कार्यालय सचिव का दायित्व सौंपा गया है।

महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्षा ने बताया कि सभी 17 जिलों के जिला अध्यक्षाओ की भी नियुक्त कर दी गयी है जिसमें कांता ठाकुर को ज़िला चंबा, अनीता सिपहिया, देहरा, रंजू रस्तोगी, कांगड़ा , श्रेष्ठा ठाकुर, नूरपुर ,ठाकुर रागिनी रकवाल, पालमपुर , शकुंतला को लाहौल स्पीति, शिवानी वर्मा को सिरमौर, अनीता वर्मा को महासू, अनिला कश्यप को शिमला, रवीना नेगी को किन्नौर, मनीषा सूद को कुल्लू , सुमन ठाकुर को मंडी, अंजू शर्मा को सुंदरनगर , राजकुमारी को हमीरपुर, प्रोमिला ठाकुर को ऊना, भुवनेश्वरी लुंबा को बिलासपुर एवं शकुंतला शर्मा को जिला सोलन की अध्यक्षा नियुक्त किया गया है ।

सूद ने कहा कि मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारियों एवं कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी।

मंत्री की तस्वीर लगे हैंडवॉश और सैनिटाइजर बाँटने पर विवाद

कोरोना से डरे लोगों ने किया संक्रमित के अंतिम संस्कार का विरोध, सड़क पर रखे पत्थर

मंडी।। कुछ अख़बारों और पोर्टलों ने कोविड 19 को लेकर लोगों में जागरूकता लाने की जगह ऐसा डर फैलाया है कि इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। कोरोना के डर से कुछ लोग ज़िम्मेदारियों से ही हाथ धो बैठे हैं तो कुछ अपनी नाक मास्क के पीछे छिपाकर प्रदेश की नाक कटवा रहे हैं।

कोरोना ट्रेन और कोरोना विस्फोट जैसे शीर्षकों से डरे ग्रामीणों ने सड़क पर पत्थर रख दिए ताकि उनके इलाक़े में बनाए गए अस्थायी श्मशानघाट में कोरोना से जान गंवाने  वाले लोगों का दाह संस्कार न हो।

अब तक हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित पाँच लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को मंडी जिले में 65 साल की एक बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ा जो किडनी की समस्या से जूझ रही थीं। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया मगर उससे पहले विवाद हो गया।

दरअसल बल्ह क्षेत्र के लोगों ने महिला के शव को नई जगह पर बनाए अस्थायी श्मशानघाट में जलाने का विरोध किया। उन्होंने सड़क पर पत्थर रख दिए। तनाव बढ़ा तो अतिरिक्त पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस प्रशासन ने लोगों को समझाने बुझाने की खूब कोशिशें कीं मगर नतीजा सिफ़र रहा।

बल्ह हलके के कंसा, टांवा के ग्रामीणों ने अस्थायी रूप से बनाए गए श्मशानघाट को जाने वाले रास्ते को पत्थर रखकर बंद कर दिया था। जब अतिरिक्त पुलिस बुलाई गई, तब भी लोग मानने को तैयार नहीं हुए। आख़िरकार प्रसाधन ने सुकेती खड्ड के किनारे महिला का दाह संस्कार किया। इससे पहले हमीरपुर से कोरोना मरीज़ के शव का अंतिम संस्कार भी यहीं किया गया था।

प्रशासन ने शांत करवाए ग्रामीण, विधि-विधान से कोरोना संक्रमित का संस्कार, फूट-फूट कर रोये बेटे और पति

सरकार को चाहिए कि जागरूकता लाने के लिए और प्रयास करे।

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

जहां से शव वाहन गुजरा, नगर निगम शिमला वो सड़क ही कर डाली ‘सैनिटाइज़’

क्वॉरन्टीन टूरिजम: पैसे देकर होटलों के कमरे देखने हिमाचल आएंगे लोग?

आई.एस. ठाकुर।। जब एक अख़बार में आज सुबह ये ख़बर पढ़ी कि हिमाचल सरकार ने प्रदेश को ‘क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन’ बनाने पर विचार करने की बात की है, सिर चकरा गया। मैं सोचने लगा कि मुझे ये अख़बार पढ़ना बंद कर देना चाहिए क्योंकि इसने ज़रूर कुछ गड़बड़ बात छापी है।

सच कहूँ तो मुझे लगा कि कोई ऐसी बात भला कैसे कर सकता है, ज़रूर किसी रिपोर्टर ने गड़बड़ की है। मगर फिर उसके आगे मैंने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की प्रतिक्रिया पढ़ी जिनका कहना था कि ‘यह विचार अनैतिक है और लोगों को क्वॉरन्टीन के लिए यहाँ लाना सही नहीं है।’

फिर मैंने इंटरनेट पर सर्च करके वीडियो देखा तो पता चला कि ये बात सच है और हिमाचल प्रदेश के सीएम का कहना है कि ‘कोरोना संकट के कारण प्रदेश के पर्यटन उद्योग को धक्का लगा है और ऐसे सुझाव आ रहे हैं कि अगर भविष्य में कोरोना की स्थिति बेहतर होती है और लोगों को क्वॉरन्टीन में रहने के लिए कहा जाता है तो वे हिमाचल आकर ऐसा कर सकते हैं।’

मन भारी हो गया है। हैरान था कि हमारे हिमाचल प्रदेश के नेता क्या सोच रहे हैं और ऐसा कैसे सोच पा रहे हैं?

अव्यावहारिक सुझाव
पहली बात तो ये कि क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने की बात करना बहुत ही छिछला और वाहियात सुझाव है। व्यावहारिक होना तो दूर की बात है, इस पर तो विचार करना भी समझदार लोगों को शोभा नहीं देता। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में कोरोना संकट में ंकमी तभी आ आएगी, जब कोई वैक्सीन बनेगी, इलाज का तरीक़ा मिलेगा और टेस्टिंग बढ़ेगी। अभी इलाज का तरीक़ा नहीं है और टेस्ट करने के लिए पर्याप्त किट्स नहीं हैं तो लोगों को क्वॉरन्टीन किया जा रहा है और लक्षण सामने आने पर संदिग्ध संक्रमितों के ही टेस्ट किए जा रहे हैं।

मगर कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए बनी विशेष कमेटी कह चुकी है कि एक डेढ़ महीने में भारत रोज़ाना बड़े पैमाने पर लोगों का टेस्ट कर पाएगा। अगर ऐसा होगा तो लोगों को क्वॉरन्टीन किए जाने की ज़रूरत नहीं होगी। अभी इसलिए क्वॉरन्टीन किया जा रहा है ताकि टेस्ट होने से पहले कोई व्यक्ति कैरियर बनकर अपने संपर्क में आने वाले लोगों को संक्रमित न कर दे। ऐसे में, आपदा को अवसर में बदलकर क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने का विचार ही अव्यावहारिक है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

क्वॉरन्टीन होने के लिए ट्रैवल कौन करेगा?
चलिए, मान लेते हैं कि भविष्य में टेस्टिंग फ़ैसिलिटी नहीं बढ़ेगी और लोगों को क्वॉरन्टीन रहने के लिए कहा जाता रहेगा। तो क्या उस अवस्था में लोगों को ट्रैवल करने दिया जाएगा? क्वॉरन्टीन का मतलब होता है ख़ुद को ऐसे अलग-थलग रखना कि आप किसी संक्रमण की चपेट में न आ सकें। जब आप ट्रैवल करेंगे और वो भी एक राज्य से दूसरे राज्य में तो बीच में आप कई व्यक्तियों और संक्रमित चीज़ों के संपर्क में आ सकते हैं।

विभिन्न क्वॉरन्टीन उन्हीं लोगों को किया जा रहा है जो कहीं बाहर से लौट रहे हैं या फिर संक्रमित व्यक्ति के क़रीब आए होते हैं। तो आप ये बताइए कि कोई व्यक्ति गोवा से अपने घर हरियाणा पहुँचा है और उसे प्रशासन की ओर से क्वॉरन्टीन रहने के लिए कहा जाता है तो क्या वह ये बोलेगा कि यहां नहीं, मुझे हिमाचल के होटल में क्वॉरन्टीन होना है?

और अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित के संपर्क में आया है और फिर उसे क्वॉरन्टीन होने के लिए कहा जाता है, तो वह कहता है कि जी ठीक है, मेरे घर के बाहर बेशक यह लिखा है कि कोई और शख़्स अंदर नहीं आ सकता मगर आप मुझे हिमाचल भेज दो। तो क्या उस संभावित संक्रमित व्यक्ति को वहाँ का प्रशासन कहीं बाहर ट्रैवल करने देगा? क्या हिमाचल सरकार ख़ुद अपने यहाँ ऐसा करने दे रही है?

मान लेते हैं कि उसे इजाज़त मिल जाती है और वो हिमाचल चला आता है। लेकिन फिर जब वह हिमाचल में क्वॉरन्टीन होकर अपने प्रदेश लौटेगा तो उसे फिर से क्वॉरन्टीन रहने के लिए नहीं कहा जाएगा? क्योंकि क्वॉरन्टीन अवधि में बंद रहने के बाद जब आप हिमाचल में अपने राज्य के लिए ट्रैवल कर रहे होंगे, वायरस से तो तब भी संक्रमित हो सकते हैं। है न?

होटलों के इंटीरियर देखने आएँगे लोग?
और सबसे बड़ी बात ये है कि क्वॉरन्टीन का मतलब ही जब कहीं अलग थलग रहना है तो हिमाचल में आने पर भी तो लोगों को होटलों में बंद ही रहना होगा? या अभी कर्फ़्यू लगाकर बैठी सरकार टूरिजम को बूस्ट करने के लिए बाहर से क्वॉरन्टीन होने आए संभावित कोरोना संक्रमितों को खुलेआम पहाड़ों के नज़ारे देखने देगी? नहीं न? तो फिर कोई बंदा बेवकूफ है जो भारी भरकम पैसे खर्च करके सिर्फ़ होटलों का इंटीरियर देखने हिमाचल आएगा? कमरा तो कमरा है, हिमाचल के होटलों से कहीं बेहतर कमरे उसे कम पैसों पर अपने शहर में मिल जाएंगे।

कुल मिलाकर बात ये है कि हिमाचल को कोरोना क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने का हास्यास्पद सुझाव देने वाले को ‘मोस्ट इनोवेटिव आइडिया ऑफ़ द इयर’ का अवॉर्ड देना चाहिए।

मतलब सुझाव देने वालों के पास ऐसा आइडिया आ कहां से जाता है और हैरानी इस बात की है कि सरकार इसे विचार करने लायक भी समझ लेती है। और तो और, नेता प्रतिपक्ष को ये आइडिया अव्यावहारिक और अजीब नहीं बल्कि ‘अनैतिक’ लगता है। शायद हमारे नेताओं के पास सोचने के लिए समय नहीं है या फिर समझ नहीं है। जो भी हो, स्थिति ख़तरनाक है।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल और देश-दुनिया से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। ये उनके निजी विचार हैं। आप उनसे kalamkasipahi @ Gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं)

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सीएम बोले- हिमाचल को क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने पर कर रहे विचार

सीएम बोले- हिमाचल को क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने पर कर रहे विचार

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि कोरोना संकट को देखते हुए हिमाचल को क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को क्वॉरन्टीन होने की सलाह दी जाती है तो वे हिमाचल को प्रेफर करेंगे तो इससे यहाँ से टूरिज़म सेक्टर को बूस्ट मिल सकता है।

हिमाचल के सीएम ने ये बातें 22 मई को एनडीटीवी के टाउनहॉल कार्यक्रम में डॉक्टर प्रणय रॉय से साथ बाचतीत में कहीं। सीएम ने कहा कि उन्हें इस संबंध में सलाहें भी मिल रही हैं कि क्यों न हिमाचल को ‘क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन’ के तौर पर विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जब कोरोना संकट ख़त्म होगा तो पर्यटक सबसे पहले हिमाचल आना चाहेंगे। आगे बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “यह कॉनसेप्ट अच्छा लग रहा है कि हिमाचल एक क्वॉरन्टीन डेस्टिनेशन हो सकता है ऐसे दौर में। इस बारे में हम सोच रहे हैं कि पूरे देश में अगर कोरोना का इंपैक्ट कम होता है और लोगों को सलाह दी जाती है कि आपको क्वॉरन्टीन होना पड़ेगा 14 दिनों के लिए तो वे हिमाचल को प्रेफर करें।”

सीएम ने कहा, “बहुत सारे लोगों ने सलाह दी कि आप किस तरह से ऐसा कर सकते हैं, ये अच्छा सजेशन हो सकता है। हमारे टूरिज़्म को बूस्ट करने की संभावना की गुंजाइश बनेगी और इसे नए तरीके से किया जा सकता है।”

मुख्यमंत्री ने ये बातें हिमाचल प्रदेश के पर्यटन सेक्टर के बारे में पूछे गए सवालों को लेकर कहीं। बातचीत आप नीचे देख सकते हैं।

इसके बाद डॉक्टर राय ने पूछा कि जब बहुत से लोग आएँगे और उनमें से कोई बीमार हुआ तो क्या स्वास्थ्य सुविधाएँ, वेंटिलेटर वग़ैरह हैं उनके लिए। इस पर सीएम ने कहा कि हिमाचल छोटा सा स्टेट है मगर यहाँ सुविधाएँ पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा, “छह मेडिकल कॉलेज हैं, एम्स आ रहा है मगर मेडिकल कॉलेज फ़ंक्शन हैं। हमारे डॉक्टरों की टीमें अच्छे से ट्रेन्ड हैं। वायरस के आने के बाद हमने अच्छे से तैयारी की है और आज अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।”

कुमार स्वामी की शर्मनाक हरकत, मंत्रों से कोरोना ठीक करने का विज्ञापन

शिमला।। अखबारों में खबरों की शक्ल में भ्रामक विज्ञापन छपवाने वाले बाबा कुमार स्वामी ने इस बार सारी हदें पार कर दी हैं। हिमाचल के लोगों को लंबे समय से भ्रमित कर रहे इस बाबा ने अब मंत्रों से कोरोना को ठीक करने का दावा किया है। अखबार तो बेशर्म हैं ही, भोले भाले लोगों को खबरों की शक्ल में विज्ञापन पेश कर पत्रकारिता का सौदा कर चुके हैं।

यहां तक कहा गया है कि अमरीका में कुछ लोग उनकी वजह से कोरोना से ठीक हुए हैं और भविष्य में कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। बीच बीच में प्रधानमंत्री और पूर्व राष्ट्रपति के बयान दिए गए हैं ताकि लोगों को लगे कि बाबा वाकई पहुंची हुई चीज हैं।

मगर हकीकत में यह वही बाबा हैं जो अपने बेटे की कंपनी के बनाए शैंपू से अपने समागम में आए लोगों के सिर धुलवाते हैं और फिर दावा करते हैं कि उनकी कृपा से बड़ी संख्या में लोग फंगल इंफेक्शन से मुक्त हो गए। ये खबरों को तोड़ मरोड़कर, बढ़ा चढ़ाकर सिर्फ अपना विज्ञापन करते हैं और परेशान लोग इनकी ओर खिंचे चले आते हैं।

इस बार क्या भ्रामक दावे किए गए हैं, आगे तस्वीरें देखकर खुद तय करें। देखना होगा कि सरकार आपदा की इस घड़ी में भ्रम फैला रहे इस शख्स पर क्या कार्रवाई करती है। आपदा के समय फेक न्यूज देने पर तो कई पत्रकारों पर हिमाचल में एफआईआर हुई है। इस महाफेक न्यूज और इसे छापने वाले अखबार क्या लोगों से खिलवाड़ नहीं कर रहे?

ऊपर भगवान शिव के नाम से ‘बयान’ छापा गया है जिसमें कोरोना का जिक्र है। और साथ में लिखा गया है कि वेद में ऐसा लिखा है। वेद में सिर्फ रूद्र का जिक्र है, शिव का नहीं। और यदि किसी और ग्रंथ से शिव की यह टिप्पणी ली गई होगी, तब भी उसमें कोरोना का जिक्र कैसे होगा? साफ है, यह बाबा लोगों के डर का फायदा उठाकर अपनी दुकान बढ़ाने में लगा हुआ है।

 

बाबा ने पहले क्या भ्रम फैलाया, आगे देखें-

कुमार स्वामी की शर्मनाक हरकत, मंत्रों से कोरोना ठीक करने का विज्ञापन

‘भ्रम ऋषि’ संग मिलकर हिमाचल को गुमराह करते अखबार

अखबार बताएं कि उन्होंने ये समाचार छापा है या विज्ञापन

क्वारन्टीन सेंटर में रखी महिला की मौत, नेगेटिव आया सैम्पल

मंडी।। संस्थागत क्वारंटीन में रखे जाने दौरान 43 वर्षीय महिला की मौत हो गई है। यह महिला 15 मई को दिल्ली से लौटी थी और उन्हें एक स्कूल में क्वारन्टीन किया गया था।

सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर महिला को नेरचौक मेडिकल अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब बताया जा रहा है कि महिला शूगर और बीपी की मरीज थीं।

कुल्लू जिले के भेखली की रहने वाली यह महिला दिल्ली से लौटने के बाद घर नहीं पहुंची थीं। वह मंडी के कटिंडी स्थित मायके में ही ठहरी थी।

महिला का कोरोना सैंपल भी लिया गया गया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। एमएस डॉ. देवेंद्र ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।