हिमाचल में सबके लिए क्यों न हो एयर ऐम्बुलेंस की सुविधा

इन हिमाचल डेस्क।। इस बात में कोई शक नहीं कि हिमाचल में कई मेडिकल कॉलेज और एक ऑन पेपर निर्माणाधीन एम्स है मगर गंभीर रूप से बीमार मरीजों या हादसों में जख्मी होने वाले लोगों को समय पर इलाज नहीं मिलता। जो सुविधाएं जिला अस्पतालों में मिल जानी चाहिए, उनके लिए आईजीएमसी शिमला या फिर टांडा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।

हिमाचल के कई दुर्गम इलाके ऐसे हैं जहां से इन अस्पतालों तक मरीजों को ले जाने में ही कई घंटे लग जाते हैं। कई बार तो टांडा और शिमला से भी पीजीआई रेफर किया जाता है। न जाने कितने ही मरीज रास्ते में ऐसे दम तोड़ देते हैं।

जलशक्ति मंत्री की घायल पोती को एयरलिफ्ट किए जाने पर कुछ लोग कह रहे हैं कि 'जो सक्षम है वो इमरजेंसी में अपने पैसों से…

Posted by In Himachal on Sunday, June 28, 2020

रविवार को हिमाचल के जलशक्ति मंत्री महेंद्र ठाकुर की पोती जख्मी हुईं। वह गंभीर थीं और उन्हें आईजीएमसी रेफर किया। उन्हें तुरंत वहां ले जाने के लिए सीएम का हेलिकॉप्टर आया। बच्ची को समय पर इलाज मिला और वह खतरे से बाहर है। यह एक सुखद उदाहरण है कि कैसे तुरन्त इलाज देने के लिए एयर ऐम्बुलेंस का इस्तेमाल मरीजों या घायलों की जान बचा सकता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि हिमाचल जैसे दुर्गम इलाकों वाले प्रदेश में आम आदमी को भी ऐसी सुविधा क्यों न मिले? हिमाचल जैसे कम आबादी वाले क्षेत्र के लिए ऐसा करना संभव है।

जलशक्ति मंत्री की घायल पोती को एयरलिफ्ट किए जाने पर कुछ लोग कह रहे हैं कि ‘जो सक्षम है वो इमरजेंसी में अपने पैसों से हेलीकॉप्टर मंगवाए तो क्या गलत है?’ गलत तो कुछ नहीं है मगर सवाल ये है कि जब एक मंत्री की पोती या पूर्व मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य कारणों से हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ सकती है तो क्या आम आदमी को कभी इसकी जरूरत नहीं पड़ती होगी? आम जनता के बारे में सोचना नेताओं का काम नहीं तो किसका है?

एयर ऐम्बुलेंस सभी की जरूरत है, नेता हों या आम आदमी। सीएम को हेलिकॉप्टर की उतनी आवश्यकता नहीं जितनी किसी की जान बचाने के लिए एयर एम्बुलेंस की है।

जलशक्ति मंत्री की पोती गिरकर जख्मी हुईं, सीएम ने भिजवाया हेलिकॉप्टर

जलशक्ति मंत्री की पोती गिरकर जख्मी हुईं, सीएम ने भिजवाया हेलिकॉप्टर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह की नौ साल की पोती खेलते हुए गिरने से घायल हो गई। जानकारी के अनुसार बच्ची रविवार को घर पर खेलते समय फर्श पर गिर गई। इस दौरान उसके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल बच्ची को धर्मपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल मंडी रैफर कर दिया और वहां से आईजीएमसी शिमला रैफर कर दिया गया।

वहीं अमर उजाला के मुताबिक, इसी बीच सीएम को हादसे की सूचना मिली तो उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर भेज दिया। महेंद्र सिंह की पोती को एम्बुलैंस के माध्यम से बिलासपुर के लुहणू तक पहुंचाया गया। मंत्री की पोती को बिलासपुर से हेलिकॉप्टर के माध्यम से आईजीएमसी भेजने की सूचना मिलते ही डीसी बिलासपुर राजेश्वर गोयल, एएसपी बिलासपुर अमित शर्मा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ लुहणू मैदान में पहुंचे।

रविवार शाम करीब साढ़े 5 बजे पवन हंस कंपनी का हैलीकॉप्टर लुहणू मैदान में पहले से ही मौजूद एम्बुलैंस से घायल बच्ची को आईजीएमसी शिमला ले गया। इस दौरान मंत्री और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी साथ थे।

आईजीएमसी पहुंचने पर करीब साढ़े पांच बजे बच्ची का ऑपरेशन हुआ। रात करीब आठ बजे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पत्नी साधना के साथ आईजीएमसी पहुंचे और मंत्री की पोती का हालचाल जाना। एमएस डॉ. जनक राज ने बताया कि बच्ची का ऑपरेशन कर दिया गया है। बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है।

CM रहते शांता कुमार के पास थी बेटी को डॉक्टर बनाने की पावर मगर…

इन हिमाचल डेस्क।।  हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को छोड़ने की घोषणा करने वाले शांता कुमार चर्चा में हैं। बीजेपी के संस्थापक सदस्य, पूर्व सीएम और पूर्व सांसद शांता कुमार कई मौक़ों पर मिसाल देते रहे हैं। फिर चाहे गठबंधन के लिए जोड़तोड़ की राजनीति से दूर रहकर सत्ता में आने का मौक़ा गंवाना हो या फिर अपनी ही सरकार को घोटालों और अन्य आरोपों को लेकर जवाबदेही के लिए लिखना हो।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उनकी सरकार में मंत्री रह चुके मोहिंदर नाथ सोफत ने फ़ेसबुक पर एक और क़िस्सा शेयर किया है, जिससे पता चलता है कि शांता कुमार निजी स्तर पर भी मूल्यों को कितनी तरजीह देते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि शांता कुमार की आलोचना न हुई हो या आरोप न लगे हों। मगर बावजूद इसके विरोधी दलों के नेता तक उनकी तारीफ़ करते हैं। इसकी वजह क्या है, इसका अनुमान आप सोफत द्वारा साझा किए गए इस किस्से से शायद लगा पाएं।

“शांता कुमार जी की देश के राजनेताओं मे अलग पहचान है। वह अपने सिद्धांतों, विचारों के प्रति प्रतिबद्धता, कठोर निर्णयों और गरीबों के उत्थान के लिये चलाये गये अपने कार्यक्रमों के लिए जाने जाते है। उनके कई निर्णय ऐसे है जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग खड़ा करते है। मुझे सौभाग्य से लम्बे समय तक उनके साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

1986 मे आदरणीय शांता जी जब प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने तो उन्होंने मुझे प्रदेश सचिव के रूप मे अपनी टीम मे शामिल किया था। प्रदेश सचिव रहते हुए मैं अध्यक्ष जी की कोर टीम और उनके विश्वास पात्रों की टोली मे भी शामिल था।

आज की अवसरवादी राजनीति मे वह देश के कुछ एक सिद्धांतवादी नेताओं मे से एक है। आपातकाल के बाद 1977 मे हिमाचल मे बनी जनता पार्टी की सरकार के वह पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उस समय उनकी बेटी मेडिकल मे दाख़िला लेना चाहती थी। जब अफसरों ने उन्हे बताया कि आप मुख्यमंत्री कोटे से बेटी को दाखिला सरलता से दे सकते हो तो उन्होंने अफसरों से कहा कि मेरी बेटी को तो दाखिला मेरे कोटे से मिल जाएगा, परन्तु उस बच्ची का क्या होगा जो अपनी योग्यता के साथ इस सीट की हकदार है। यह कह कर उन्होंने एम बी बी एस मे मुख्यमंत्री का दो सीटों का ऐच्छिक कोटा समाप्त कर दिया था।

शांता कुमार

1977 मे आपने मुख्यमंत्री के तौर पर गांव-गांव मे पानी पहुंचा कर और गरीब के लिये अन्त्योदय जैसे कार्यक्रम चला कर जन नायक का दर्जा प्राप्त कर लिया था। अढ़ाई साल बाद ही जनता पार्टी अपने भीतरी विवादो के चलते विघटित हो गई थी। जनता पार्टी के बहुत से विधायकों ने पार्टी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था, परन्तु तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता जी ने जाने वाले विधायकों से तोल भाव न करते हुए अल्प मत मे आते ही मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।

मजेदार बात है कि शांता जी को अपने सिद्धांतों के चलते मुख्यमंत्री पद के जाने का कोई अफसोस नही था। राज्यपाल जी को त्याग पत्र सौपने के तुरंत बाद वह अपने कुछ सहयोगियों के साथ जुगनु फिल्म का आनंद उठाने चले गए थे। शांता कुमार जी राजनीति मे परिवारवाद के खिलाफ़ है। आज शांता जी हिमाचल के तीन वरिष्ठ स्थापित नेताओं मे से एक है, परन्तु परिवार को राजनीति से दूर रखने के मामले मे बस एक मात्र अपवाद है।

1977 मे अपने छोटे से कार्यकाल मे जो उन्होंने प्रदेश हित मे काम किये थे उसके और उनकी लोकप्रियता के चलते भाजपा जैसी नई पार्टी 1982 के विधानसभा के चुनाव मे 29 सीटें जीतने मे सफल रही थी। दो सीटें जनता पार्टी ने जीती थी। यानी की कांग्रेस, गैर कांग्रेसी भाजपा और जनता पार्टी बराबर सीटें जीत पाये थे। 6 लोग निर्दलीय के तौर पर जीत कर आये थे। भाजपा के कुछ नेता निर्दलीयो को साथ मिला कर सरकार बनाना चाहते थे, परन्तु शांता कुमार जी के सिद्धांत उन्हे इसकी अनुमति नही दे रहे थे।

उस समय भाजपा के शीर्ष नेता अटल जी जयपुर मे थे। शांता जी ने फोन पर अपने मन की बात उनसे कही और आदरणीय अटल जी ने वहीं से ब्यान जारी कर कह दिया कि हिमाचल मे जनता ने हमे विपक्ष मे बैठने के लिये वोट दिया है और हम हिमाचल मे विपक्ष की भूमिका अदा करेंगे। इस प्रकार पार्टी मे चल रही दुविधा समाप्त हो गई थी।”

हालाँकि, एक पक्ष यह भी सामने आ रहा है कि भले ही शांता कुमार ने अपनी बेटी के लिए यह सुविधा नहीं ली थी मगर इस व्यवस्था को वह ख़ुद समाप्त नहीं कर पाए थे। बताया जा रहा है कि उनके बाद सीएम बने ठाकुर राम लाल ने जिन दो लोगों को अपने इस कोटे से सीटें दिलवाईं, उससे उन्हीं के क्षेत्र का एक छात्र एक नंबर से वंचित रह गया। वह छात्र कोर्ट गया और फिर कोर्ट ने न सिर्फ़ उस छात्र को इंसाफ़ दिलाया बल्कि इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था को भी हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया।

शांता कुमार से जुड़े कुछ किस्से आप नीचे पढ़ सकते हैं-

40 साल पहले हमीरपुर की वो शाम जब बुजुर्ग ने अजनबी से माँगी लिफ्ट

https://inhimachal.in/opinions/टांडा-मेडिकल-कॉलेज-तो-बना/

नीरज भारती ने सेना पर ऐसा क्या लिखा था कि ‘राजद्रोह’ में हुई गिरफ़्तारी

शिमला।। कांग्रेस नेता और पूर्व सीपीएस नीरज भारती यूँ तो अभद्र और अश्लील टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहते हैं मगर इस बार मामला अलग है। लंबे समय से वह फ़ेसबुक पर की गई टिप्पणियों आदि को लेकर ख़बरों में रहते हैं और विवादों के सिलसिले में उन्हें थानों के चक्कर भी लगाने पड़े हैं। मगर इस बार मामला ‘राजद्रोह’ से जुड़ा हुआ है।

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक मुठभेड़ में भारतीय जवानों के शहीद होने की ख़बर आने के बाद नीरज भारती ने फ़ेसबुक पर जो प्रतिक्रिया दी थी, उसी को लेकर उन्हें इस बार जेल में रहना पड़ा। शुक्रवार को उनकी गिरफ़्तारी हुई थी और शनिवार को कोर्ट ने उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

दरअसल 18 जून को नीरज भारती ने आरोप लगाया था कि ‘बिहार रेजिमेंट को बिहार में चुनावों को देखते हुए चीन बॉर्डर पर लगाया था और फिर उन्हें शातिर तरीक़े से मरवा दिया गया ताकि राष्ट्रवादी माहौल बनाया जा सके।’ भारती का कहना था कि ‘चीन बॉर्डर पर कभी खून खराबा नहीं होता और इस बार भी चीन ने कुछ नहीं ंकिया होगा।’

नीरज भारती ने पुलवामा हमले का भी ज़िक्र किया था। उन्होंने क्या लिखा था, यथावत पढ़ें-

“मुझे पूरा यकीन है कि बिहार में चुनावों को देखते हुए बिहार रेजिमेंट चाइना बॉर्डर पर लगाई गई और जानबूझ कर बिहार रेजिमेंट के जवानों को किसी शातिर तरीके से मरवाया गया है ताकि बिहार चुनावों में राष्ट्रवादी माहौल बनाया जा सके, क्योंकि चाइना बॉर्डर पर कभी खून खराबा होता ही नहीं है और इस बार भी चाइना ने कुछ नहीं किया होगा बल्कि जैसे पुलवामा में पूरी सख्ती होने के बावजूद एक कार जवानों के काफिले में घुस गई थी और बहुत से जवान मारे गए थे वैसे ही किसी चाल के तहत इस बार भी बिहार रेजिमेंट के और साथ में कुछ पंजाब रेजिमेंट के जवानों को मरवाया गया है….. पर अक्ल के अंधे अंधभक्तों को ये बात समझ नहीं आएगी..”

मुझे पूरा यकीन है कि बिहार में चुनावों को देखते हुए बिहार रेजिमेंट चाइना बॉर्डर पर लगाई गई और जानबूझ कर बिहार रेजिमेंट…

Posted by Neeraj Bharti on Thursday, June 18, 2020

फिर दोहराई बात
इस पोस्ट को लेकर उनके ऊपर एफआईआर हुई। एफआईआर होने की ख़बरों को शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी बात पर क़ायम हैं। 21 जून को उन्होंने फिर एक पोस्ट डालकर कहा कि उनकी ’18 जून वाली पोस्ट सच्ची साबित हुई।’ उन्होंने जो लिखा है, उसे हम यथावत आगे दे रहे हैं-

“18 जून की मेरी पोस्ट सच साबित हुई है, खुद पढ़ लीजिए कैसे बिहार रेजिमेंट का नाम ले कर अब ये मोदी मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है, क्योंकि आने वाले समय में बिहार में चुनाव हैं और बिहार रेजिमेंट के ही शहीद हुए जवानों के नाम पर अब ये वोट मांगेगा, और सबसे बड़ी बात ये कि इसने सिर्फ चुनावों को देखते हुए बिहार रेजिमेंट का ही नाम लिया बाकी जो दूसरी रेजिमेंट के जवान शहीद हुए उनके लिए एक शब्द तक नहीं कहा जैसे कि पंजाब रेजिमेंट के भी 3 जवान शहीद हुए हैं और उनमें से एक हिमाचल के हमीरपुर से संबंधित थे शहीद अंकुश ठाकुर, और भी दूसरी रेजिमेंट के जवान थे उनका भी नाम तक नहीं लिया।

शहीद होने वाले सैनिकों में बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु लगभग पूरे देश के सैनिक थे तो फिर भाजपा और उसका प्रधानमन्त्री कैसे सिर्फ एक राज्य के सैनिकों की शहादत पर गर्व कर सकता, क्यों….. क्योंकि बाकी जगह चुनाव नहीं है अभी इसलिए, अब बताइए सेना का और शहीदों का अपमान नीरज भारती ने किया या मोदी ने किया, लोगों अभी भी सोच समझ लो ये भाजपाई आप लोगों को कभी सेना के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर गुमराह कर के अपनी राजनीति चमका रहे हैं इनको कोई लेना देना नहीं है किसी से भी शहीदों से भी उनको ये खुद मरवा रहे हैं सिर्फ और सिर्फ राजनीती के लिए, इन लोगों को सिर्फ अपनी कुर्सी से मतलब है बाकि किसी से नहीं फिर चाहे कोई हिन्दू मुसलमान के दंगे में मरे या फिर बिना किसी कारण सरहद पर कोई शहीद होए या फिर फौजियों से भरी बस बम से उड़ जाए इनको किसी की कोई परवाह नहीं है ये सिर्फ सत्ता चाहते हैं किसी भी कीमत पर।

नीचे लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हुए उन 20 जवानों के नाम और उनकी रेजिमेंट के नाम भी लिख रहा हूं आप खुद पढ़ लीजिए इसने सिर्फ बिहार रेजिमेंट का नाम लिया अपने संबोधन में बाकि किसी रेजिमेंट का नहीं और मैंने भी वही बात लिखी थी जिसके लिए मुझ पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया है क्योंकि मैंने सच्चाई लिखी थी मैंने सेना के खिलाफ या शहीद हुए सैनिकों के खिलाफ कुछ नहीं लिखा था और ना ही सेना का अपमान किया है, हां मोदी के लिए जरूर लिखता हूं और वो मैं लिखता रहूंगा ये किसी मान सम्मान के लायक है ही नहीं।

आप मेरी पोस्ट भी पढ़ सकते है इस फोटो में और बताइए मैंने सेना का क्या अपमान किया, मुझे सभी शहीद हुए जवानों का दुख भी है और फक्र भी है कि वो अपना फ़र्ज़ निभाते हुए अपने देश की सीमा पर शहीद हुए लेकिन दुख इस बात का है कि एक हरामी ने अपनी सत्ता के लिए इन जवानों को शहीद करवा दिया जबकि कई वर्षों से उस भारत चाइना बॉर्डर पर कोई खून खराबा नहीं हुआ था और लगभग 7-8 बार मैं खुद इन इलाकों में गया हूं घूमने और वहां पर तैनात अपनी सेना के जवानों के साथ रहने का भी मौका मिला है और इस बॉर्डर पर क्या कार्यवाही होती है उसको भी जानने का मौका मिला है जब भी मैं वहां गया चाहे गालवान घाटी के साथ लगती पैंगगोंग झील हो या उसके साथ का बाकी का इलाका या फिर जहां परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद मेजर शैतान सिंह पोस्ट है रजांगला में मैं वहां तक भी गया हूं जहां चीन और भारत की चौकियां बिल्कुल आपने सामने हैं।

ये सब चाइना बॉर्डर पर ही है लेकिन कभी किसी सैनिक ने नहीं कहा कि यहां कोई खून खराबा होता है यहां सिर्फ अपनी अपनी सीमा की दीवार बनाने के लिए छुटपुट धक्का मुक्की होती थी कभी चीन वाले हमारी पत्थरों से बनी दीवार गिरा देते हैं और कभी हमारे देश के सैनिक उनकी दीवार गिरा देते हैं और एक दूसरे को अपनी अपनी भाषा में गाली दे कर सब शांतिपूर्वक अपनी अपनी पोस्ट पर वापस आ जाते हैं लेकिन अब अचानक ऐसा क्या हुआ कि सेना के एक वरिष्ठ कर्नल रैंक के अधिकारी सहित हमारे 20 जवानों की जान चली गई, और वो भी तब जब देश का प्रधानमन्त्री बोल रहा है कि ना कोई हमारी सीमा में घुसा और ना किसी ने कोई पोस्ट कब्जे में की तो फिर ये 20 जवान कैसे शहीद हो गए, क्या है इसका कोई जवाब।

मुझे मुकदमे से कोई फर्क नहीं पड़ता है पहले भी कई चल रहे हैं एक और सही लेकिन अब सच्चाई लिखना और सरकार और प्रधानमन्त्री को कोसना इस देश में देशद्रोह माना जाने लगा है, लेकिन याद रखना अगर अब भी आप लोग नहीं जागे तो ये आपके ऊपर हिटलर की तरह तानाशाही करेगा और आप सिर्फ देख सुन कर चुप रहने के आलावा और कुछ नहीं कर पाओगे इसलिए अभी भी वक़्त है जाग जाओ और इस सरकार के खिलाफ खड़े हो ताकि आपकी आने वाली पीढ़ी उनको गुलाम बनाने के लिए आपको गालियां ना निकाले….. जय हिन्द…..🙏”

इसके बाद उन्होंने शहीदों के नाम शेयर किए हैं और साथ में अपनी 18 जून वाली पोस्ट का स्क्रीनशॉट और बीजेपी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया पीएम मोदी का एक बयान। नीचे देखें-

नीरज भारती ने कई पोस्ट्स में ंलिखा है कि उन्होंने ‘वाजिब सवाल’ उठाए हैं। शनिवार को कोर्ट में प्रवेश करने से पहले और निकलने के बाद उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र ख़तरे में हैं और वह अपनी लड़ाई क़ानूनी तरीक़े से जारी रखेंगे।’ कुछ फ़ेसबुक पोस्ट्स में उन्होंने कहा था कि वह चाहते है कि उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया जाए।

नीरज भारती ने सेना पर ऐसा क्या लिखा था कि ‘राजद्रोह’ में हुई गिरफ़्तारी

नीरज भारती को चार दिन का रिमांड, बोले- लोकतंत्र ख़तरे में है

शिमला।। राजद्रोह के मामले में सीआईडी द्वारा हिरासत में लिए गए ज्वाली के पूर्व विधायक और पूर्व सीपीएस एजुकेशन नीरज भारती को आज कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें चार दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। भारती को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था।

पेशी के बाद पुलिस जीप में बैठने से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, “लड़ाई शुरू हुई है हम इस लड़ाई को आगे लेकर जाएँगे और जो हमारा लोकतंत्र ख़तरे में है उसको बचाने की मुहिम है। और राजनीति से प्रेरित तो है ये अपनी बात रखने का अधिकार भी छीना जा रहा है इस सरकार के द्वारा। केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा।”

वहीं नीरज भारती की पत्नी मोनिका भारती ने कहा कि उनके पति ने चीन की गलवान घाटी में हुई हिंसा को लेकर सरकार से वाजिब प्रश्न पूछे थे और ऐसा करने का उन्हें लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनके पति ने कुछ ग़लत नहीं किया और वह उनके साथ खड़ी हैं। आख़िर में उन्होंने कहा- आई एम अ वेरी प्राउड वाइफ़।

शुक्रवार को गिरफ़्तारी से पहले सीआईडी ने नीरज भारती को लगातार तीसरे दिन भी पूछताछ के लिए भराड़ी स्थित थाने तलब किया था। खबर है कि पूछताछ के दौरान सवालों के जवाब देने में टाल-मटोल करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पूर्व सीपीएस पर आरोप है कि उन्होंने बीते दिनों सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट डाल कर सरकार के विरुद्ध घृणा, तिरस्कार, अवमानना, वैमनस्य आदि का दुष्प्रचार करके देश के नागरिकों में घृणा व देशद्रोह को फैलाने की कोशिश की है।

आरोप यह भी है कि उन्होंने फौजी जवानों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियों द्वारा दुष्प्रचार करके आम लोगों व सैनिकों को सरकार के विरूद्ध भड़काने एवं अपनी ड्यूटी न करने के लिए उकसाया है, जिससे आम लोगों में आक्रोश और नाराजगी का माहौल पैदा हुआ है। इस शिकायत पर सीआईडी ने भराड़ी थाना में भारती के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए, 153 ए, 504 व 505 के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया था।

इससे पहले नीरज भारती सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियाँ, गालियाँ और धमकियाँ देने के लिए भी चर्चित रहे हैं। विवादों में रहने वाले कांग्रेस नेता पर ‘इन हिमाचल’ द्वारा समय-समय पर की गई कवरेज को देखने के लिए यहां क्लिक करें

नीरज भारती को चार दिन का रिमांड, बोले- लोकतंत्र ख़तरे में है

अब राजीव बिंदल को मंत्री बनाने की लॉबीइंग में जुटे संघ के कुछ नेता

शिमला।। पीपीई किट खरीद में कथित गड़बड़ी को लेकर स्वास्थ्य निदेशक और एक शख्स की गिरफ्तारी के बाद उठ रहे सवालों के बीच बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले राजीव बिंदल को मंत्री बनाने के लिए लॉबीइंग शुरू हो गई है। खबर है कि संघ के नेताओं का एक वर्ग बिंदल को राज्य मंत्रिमंडल में जगह दिलाने की कोशिशों में जुट गया है। इस समय हिमाचल प्रदेश में तीन मंत्री पद खाली हैं।

सूत्रों का कहना है कि इसके लिए संघ के कुछ पदाधिकारी राज्य से लेकर दिल्ली तक संगठन पर दबाव बनाने की कोशिश में जुट गए हैं। हालांकि, ऐसा तभी हो पाएगा जब इस मामले के आरोपियों को क्लीन चिट मिल जाए। ‘इन हिमाचल’ को इस संबंध में कुछ मुलाकातें होने की भी जानकारी है जिसमें कुछ चर्चित चेहरे मध्यस्थता कर रहे थे।

इससे पहले धूमल सरकार में मंत्री रह चुके बिंदल को 2018 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी मगर उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। इससे वह नाखुश थे, इसलिए केंद्र में नड्डा की ताजपोशी होते ही पार्टी के राज्य प्रमुख का पद संभाल लिया। मगर चार महीनों के अंदर ही उन्हें एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के सिलसिले में इस्तीफा देना पड़ा।

इससे पहले 2012 में जब वह स्वास्थ्य मंत्री थे, तब विपक्ष ने उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। बिंदल को तब चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया था और आरोप लगाने वालों पर मानहानि का मुकदमा भी किया था। इससे पहले जब वह सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष थे, तब भी उनके ऊपर अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाया गया था।

बीेजेपी सरकार की फजीहत
कोरोना संकट में उलझे देश का ध्यान उस समय हिमाचल प्रदेश की ओर चला गया जब यहां के बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल ने अचानक पद छोड़ दिया। उन्होंने इस्तीफ़े में लिखा कि पार्टी पर उठाए जा रहे सवालों को देखते हुए वह ‘नैतिक मूल्यों’ के आधार पर इस्तीफा दे रहे हैं। इस तरह से बीजेपी और राज्य सरकार की पूरे देश में किरकिरी हुई।

बिंदल ने नड्डा को भेजे इस्तीफे में स्पष्ट कारण नहीं बताया था मगर पूरे प्रदेश में खबर फैल चुकी थी कि स्वास्थ्य विभाग में हुई पीपीई खरीद में गड़बड़ के तार ऐसे शख़्स से जुड़ रहे हैं जो बिंदल और उनके परिजनों का करीबी है। ये शख़्स है पृथ्वी सिंह जिसे हिमाचल प्रदेश स्टेट विजिलेंस ने स्वास्थ्य विभाग के निदेशक अजय गुप्ता के साथ गिरफ़्तार किया है।

मामला 43 सेकेंड के एक ऑडियो क्लिप के साथ जुड़ा है। इसमें स्वास्थ्य निदेशक अजय गुप्ता और पृथ्वी सिंह नाम के शख्स के बीच पांच लाख रुपये के कथित लेनदेन पर बात हो रही थी। आरोप है कि अजय गुप्ता ने पद का दुरुपयोग किया और नियमों को ताक पर रखकर ऐसी कंपनी से पीपीई किट खरीद लिए जो ट्रेस नहीं हो पा रही थी। आरोप है कि पृथ्वी सिंह से इसी डील के संबंध में पांच लाख रुपये की रिश्वत ली जा रही थी।

पृथ्वी सिंह नाहन से ही संबंध रखते हैं जहां के बिंदल विधायक हैं। यही नहीं, वह बिंदल की बेटी और दामाद की कंपनी में भी काम कर चुके हैं। हालांकि उनका कहना है कि कुछ महीनों से पृथ्वी सिंह के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है।

अजय गुप्ता रिटायरमेंट के नजदीक थे मगर कुछ नेताओं की ओर से उनके सेवा विस्तार की कोशिशें भी की गई थीं। जब मामला मीडिया में उठा तो विपक्ष ने भी सवाल उठाए और स्थानीय मीडिया में भी खबरें छपीं मगर किसी ने भी नेता का नाम नहीं लिया। इसी बीच बिंदल ने इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तुरंत मंजूर कर लिया।

आरोपों का है लंबा इतिहास
मगर यह पहला मौका नहीं है जब उनके ऊपर इस तरह के आरोप लगे हैं। विधायक बनने से पहले बिंदल जब 1995 में सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष थे, तब उनपर नियमों को ताक पर रखकर भर्तियां करवाने का आरोप लगा था और 2015 में कांग्रेस सरकार के दौरान मामले में चार्जशीट फाइल की गई थी मगर 2018 में बीजेपी की सरकार आते ही इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताकर केस बंद कर दिया गया था।

फिर 2007 चुनाव के समय बिंदल पर रेणुका बांध बनने से पहले आसपास की जमीन खरीदने का आरोप लगा था। तब पार्टी के अंदर से भी स्वर उठे थे कि उन्हें टिकट न दिया जाए। मगर वह जीते भी और मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें मंत्री भी बनाया. मगर 2012 आते-आते उनपर आय से अधिक संपत्ति बनाने और गलत ढंग से गरीबों को मिली जमीन खरीदने के आरोप लगे। विधानसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया तो बिंदल ने वहीं सीएम को इस्तीफा देने की घोषणा कर दी जिसे नामंजूर कर दिया गया। मगर विवाद नहीं थमा तो तत्कालीन अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उन्हें मंत्री पद छोड़ने को कह दिया। इसके बाद उन्होंने पार्टी महासचिव का पद संभाला।

क्या है पीपीई किट खरीद मामला
जिस ऑडियो क्लिप के सहारे विजिलेंस ने जांच शुरू की थी, उसमें दो लोगों के बीच पांच लाख रुपये के लेन-देन की बात हो रही थी। जब स्टेट विजिलेंस ने इस संबंध में दो लोगों की गिरफ़्तारी की, तब पता चला कि ये बातचीत हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य निदेशक अजय गुप्ता और पृथ्वी सिंह नाम के एक शख़्स के बीच हो रही थी। दोनों को स्टेट विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया था।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य उपकरण व अन्य सामग्री खरीदने के लिए कोई अलग से निगम या कंपनी का गठन नहीं किया है। इसलिए, तय दिशानिर्देश बनाकर जिलों के चीफ मेडिकल ऑफ़िसर टेंडर निकालकर इनकी खरीद करते हैं। मगर हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि कोरोना संकट आया तो निविदाएं मंगवाने का समय नहीं था और पीपीई किट खरीदने का जिम्मा अजय गुप्ता के नेतृत्व वाली टेक्निकल कमेटी को सौंप दिया गया।

इस कमेटी पर बड़ी जिम्मेदारी थी। उन्हें देखना था कि पीपीई उचित मूल्य पर मिलें और उनकी क्वॉलिटी भी अच्छी हो। इसके बाद अप्रैल में सरकार ने बिना टेंडर मंगवाए तो बार पीपीई किट खरीदे। पहली बार चंडीगढ़ की एक कंपनी से 1400 रुपये प्रति पीस के हिसाब से 6000 पीपीई खरीदे और दूसरी बार कुरुक्षेत्र की एक कंपनी बंसल कॉर्पोरेशन से 1050 प्रति पीस के हिसाब से 7000 पीपीई किट की खरीद हुई। पहला ऑर्डर 84 लाख का था जबकि दूसरा 73.5 लाख का।

बाद में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बंसल कॉर्पोरेशन नाम की कोई कंपनी कुरुक्षेत्र में नहीं मिल रही है। ऐसे में विजिलेंस पड़ताल कर रही है कि अजय गुप्ता, जिनपर पीपीई खरीद का जिम्मा था, उन्होंने किससे ये 73.5 लाख के पीपीई किट खरीदे और इसमें पृथ्वी सिंह की क्या भूमिका है। इस बीच विजिलेंस को तीन और ऑडियो मिले हैं जिससे पूरे खेल का पर्दाफ़ाश हो सकता है।

सूत्रों का कहना है कि इन ऑडियो के आधार पर विजिलेंस जांच को आगे बढ़ाकर उनसे भी पूछताछ करना चाहती है, जिनके लिए पृथ्वी सिंह काम करता था। मगर एक लॉबी सरकार पर जांच की दिशा बदलने का भी दबाव डाल रही है ताकि आरोपियों को क्लीन चिट दिलाई जा सके।

वीरभद्र के चहेते रहे पूर्व सीपीएस नीरज भारती गिरफ्तार

शिमला।। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चहेते और उनकी सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे नीरज भारती को सीआईडी ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। सीआईडी ने नीरज भारती को लगातार तीसरे दिन भी पूछताछ के लिए भराड़ी स्थित थाने तलब किया था। खबर है कि पूछताछ के दौरान सवालों के जवाब देने में टाल-मटोल करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

नीरज भारती पिछली सरकार में सीपीएस एजुकेशन थे तो कई बार उनके द्वारा अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का मामला उठा। मीडिया में खबरें आईं, मामला विधानसभा तक में उठा मगर सीएम वीरभद्र ने कहा कि नीरज कोई गलत काम नहीं कर रहे। यहां तक कि नीरज के पिता और सम्मानित कांग्रेस नेता चन्द्र कुमार ने भी अपने बेटे के व्यवहार को गलत नहीं बताया था।

विधानसभा में नीरज भारती की आपत्तिजनक टिप्पणियों वाले पोस्ट्स का प्रिंट लेकर तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष सतपाल सत्ती मुख्यमंत्री वीरभद्र के पास पहुंचे थे। वह नीरज भारती की फेसबुक पोस्ट्स का प्रिंट आउट वीरभद्र के डेस्क की ओर गिराने लगे। इससे चिढ़े वीरभद्र ने वे कागज फाड़े और सतपाल सत्ती की तरफ फेंक दिए। सत्ती ने फिर वे कागज वीरभद्र पर फेंक दिए।

सरकार बदल गई, नीरज ज्वाली से चुनाव हार गए मगर फेसबुक पर उनकी भाषा नहीं बदली। इस बार जिस मामले में उनकी गिरफ्तारी की खबर आई है, वह राजद्रोह का मामला है। शिमला निवासी अधिवक्ता नरेंद्र गुलेरिया की शिकायत पर सीआईडी ने बीते दिनों नीरज भारती पर पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया था।

क्या है आरोप
पूर्व सीपीएस पर आरोप है कि उन्होंने बीते दिनों सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट डाल कर सरकार के विरुद्ध घृणा, तिरस्कार, अवमानना, वैमनस्य आदि का दुष्प्रचार करके देश के नागरिकों में घृणा व देशद्रोह को फैलाने की कोशिश की है, साथ ही फौजी जवानों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियों द्वारा दुष्प्रचार करके आम लोगों व सैनिकों को सरकार के विरूद्ध भड़काने एवं अपनी ड्यूटी न करने के लिए उकसाया है, जिससे आम लोगों में आक्रोश और नाराजगी का माहौल पैदा हुआ है।

इस शिकायत पर सीआईडी ने भराड़ी थाना में भारती के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए, 153 ए, 504 व 505 के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया था। वहीं नीरज भारती का कहना है कि उन्होंने बीजेपी के लोगों से ऐसी भाषा सीखी है और जब तक बीजेपी समर्थक ऐसी भाषा इस्तेमाल करेंगे, वह भी ऐसा करते रहेंगे।

इस बीच एसपी लॉ एंड आर्डर डॉ. खुशहाल शर्मा ने मीडिया को नीरज भारती को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि नीरज भारती को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा।

इससे पहले दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने भी एक मामले में नीरज के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया था।

नीरज भारती पर इन हिमाचल तबसे सवाल उठा रहा है, जब बाकी मीडिया को उनकी कारस्तानियां नजर नहीं आती थीं। विस्तृत कवरेज के लिए यहां क्लिक करें

नीरज भारती पर शिकायतकर्ता महिला ने फेंका जूता, ‘पिटाई’ का दावा

शांता कुमार ने फिर पेश की मिसाल, पूर्व सीएम के नाते मिल रही सुविधाएं छोड़ीं

पालमपुर।। भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने बतौर पूर्व सीएम मिलने वाली सुविधाओं को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अब, जबकि वह सक्रिय राजनीति में नहीं हैं तो ये सुविधाएं बोझ हैं।

शांता कुमार ने कहा है कि उन्हें बतौर पूर्व मुख्यमंत्री, सरकार ने बहुत सी सुविधाएं दी हैं, इनसे जनहित के सार्वजनिक कार्य करने में बड़ी सुविधा होती रही है। उन सब सुविधाओं के लिये सरकार और मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का बहुत धन्यवाद करते हुए इन्हें लौटाने के लिए पत्र लिख दिया है।

कांगड़ा के पूर्व सांसद ने कहा कि अब वह सांसद नहीं हैं और सक्रिय राजनीति से भी मुक्त हो गए हैं। आयु का भी तकाजा है, इसलिए वह अब प्रवास लगभग नहीं करेंगे। ऐसी परिस्थिति में एस्कार्ट सुविधा की उन्हें कोई ज़रूरत नहीं है।

उन्होंने लिखा है कि एक सरकारी गाड़ी तथा चार कर्मचारी बिना काम के यहां होते हैं। लाखों रुपये का यह खर्च उन्हें चुभता रहता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अब उन्हें यह सुविधा बिलकुल नहीं चाहिए। इसलिये इस सुविधा को जल्द से जल्द वापस करवाने के निये मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि यह सुविधा एक जुलाई, 2020 से ही वापस ले ली जाए। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पिछला कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश की थी, जिसके लिए उनकी भारी आलोचना हुई थी।

पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं क्यों बढ़ाना चाहते हैं वीरभद्र?

IPS सौम्या पर गवाही बदलने का दबाव डालने पर जहूर ज़ैदी के PSO पर जांच

शिमला।। कोटखाई रेप एंड मर्डर केस में पुलिस द्वारा शुरू में गिरफ्तार किए गए नेपाली मूल के युवक सूरज की लॉकअप में हत्या के मामले में तत्कालीन आईजी जहूर जैदी को लेकर नई-नई बातें सामने आ रही हैं। आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवन पर कोर्ट में गवाही से पहले दबाव बनाने की कोशिश में अब ज़ैदी के तत्कालीन पीएसओ पर भी विभागीय जाँच बैठ गई है।

जब गुड़िया मामले के हाइलाइट होने के बाद प्रदेश सरकार ने शिमला के एसपी रहे डीडब्ल्यू नेगी को हटाया था तो उनकी जगह सौम्या सांबशिवन की नियुक्ति हुई थी। ऐसे में चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट में सौम्या की गवाही काफ़ी अहम थी। लेकिन इस साल की शुरुआत में जब सौम्या सांबशिवन को अदालत में पेश होना था, तब उनपर भारी दबाव डाला गया था।

सौम्या ने कोर्ट को बताया था कि सुनवाई से पहले उनके ऊपर इतना दबाव डाला गया था कि वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं और काम करना मुश्किल हो गया था। जनवरी में सौम्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पीएसओ और स्टेनो तक ने फोन बंद कर दिया है। मगर सौम्या ने कहा था कि जहूर जैदी को यह नहीं सोचना चाहिए कि ऐसा करके वह मामले से दूर हो सकते हैं।

इन दिनों मंडी के पंडोह में आईआरबी तीन की कंमांडेट हैं सौम्या सांबशिवन

‘लोकेशन जानने की कोशिश’
सौम्या ने कोर्ट को बताया था, “सितंबर 2019 से जहूर जैदी मेरे मोबाइल और ऑफिशियल लैंडलाइन नंबर पर लगातार बात करने की कोशिश कर रहे हैं। लगातार फोन कर मुझ पर बयान बदलने के लिए दबाव डाला गया।” आईपीएस अधिकारी का कहना था, “इससे मैं मानसिक रूप से इतनी परेशान हो गई कि मुझे धर्मशाला में 10 दिसंबर 2019 को डीजीपी को तत्काल मामले की सूचना देनी पड़ी। सूचना के बाद उनका फोन आना बंद हो गया, लेकिन मेरे पीएसओ से मेरी लोकेशन रोजाना जानने की कोशिश की गई।”

इसके बाद सीबीआई कोर्ट ने नोटिस जारी करके जैदी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। अब जैदी के पीएसओ के खिलाफ भी जांच शुरू हुई है क्योंकि उनके ऊपर भी सौम्या सांबशिवन पर दबाव बनाने का आरोप है। इस जांच से पहले पुलिस मुख्यालय ने मार्च में सरकार को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसी रिपोर्ट के अध्ययन में सरकार ने पाया कि जैदी के अलावा सौम्या पर पीएसओ ने भी बयान को लेकर दबाव बनाया था।

सौम्या ने बताया था कि कोर्ट में बयान देने से पहले तक उन्हें पंजाब कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से भी फोन कराया गया था। इस बयान के बाद कोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को जैदी के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश दिए थे। पुलिस मुख्यालय ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी और उसके बाद प्रदेश सरकार ने जैदी को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए थे। विभागीय जांच पूरी होने के बाद पुलिस मुख्यालय इस पर अंतिम फैसला करेगा।

ज़हूर ज़ैदी वीरभद्र सरकार के चहेते रहे हैं और शिमला मामले से पहले सोलन के विवादित बाबा अमरदेव के मामले में भी चर्चा में रहे है। आरोप है कि जब अमरदेव फँसने लगे तो वीरभद्र सरकार ने ज़ैदी को जाँच सौंपी और उसके बाद मामला ही बदल गया। सूरज हत्याकांड मामले में ज़मानत मिलने के बाद ज़ैदी सीधे अमरदेव से मिलने गए थे। वीरभद्र भी इसी साल अमरदेव के दरबार में हाज़िरी लगा चुके हैं। पूरा मामला क्या है, पढ़ने के लिए नीचे दिया गया लिंक पढ़ें-

नेताओं का दुलारा, हिमाचल का विवादित बाबा- अमरदेव

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पड़ोसी पर छेड़छाड़ का आरोप लगा रही लड़की का पुराना वीडियो वायरल

बिलासपुर।। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें बिलासपुर ज़िले की एक लड़की आरोप लगा रही है कि उसे उसके पड़ोस में रहने वाला शख़्स परेशान करता है। लड़की कहती है कि छेड़छाड़ से वह परेशान हो चुकी है। अपने पड़ोस में रहने वाले शख़्स पर आरोप लगाते हुए वह कहती है कि ‘इशारे करने से परेशान होकर मेरा छत जाना छूट चुका है।’

वीडियो में कुछ लोग जाते हुए दिख रहे हैं जिनमें एक महिला भी है। इनके पीछे चलते हुए वीडियो बना रही लड़की ने यह भी कहा कि अपनी पत्नी के सामने ही उसका पड़ोसी उसे इशारे करता है। चूँकि, आरोप लगाने वाली लड़की और वीडियो में दिख रहे लोगों का धर्म अलग है, इसलिए सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने सांप्रदायिक रंग ले लिया है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद ‘इन हिमाचल’ ने झंडूता पुलिस स्टेशन प्रभारी प्रीतम चंद शर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि यह वीडियो पुराना है मगर अभी वायरल हो गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने पहले ही एफआईआऱ दर्ज कर ली थी और चार्जशीट भी तैयार है।

इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआऱ हुई है और मामला कोर्ट में चल रहा है। प्रीतम चंद शर्मा ने बताया कि इस संबंध में उनकी वीडियो में दिख रही लड़की से बात हुई है और उसका कहना है कि उसके दोस्तों से गलती से यह वीडियो वायरल हो गया है।

झंडूता थाना प्रभारी प्रीतम चंद शर्मा ने बताया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अभी अचानक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने जाने के बाद लगातार उन्हें फ़ोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस आगे क़ानूनी रूप से उचित कदम उठाने पर विचार कर सकती है।