बीजेपी अनिल शर्मा को पार्टी से निकालकर तो दिखाए: आश्रय शर्मा

मंडी।। हिमाचल प्रदेश की मंडी सदर से विधायक अनिल शर्मा के बाद अब उनके बेटे आश्रय शर्मा ने प्रदेश सरकार को निशाने पर लेने की कोशिश की है। अनिल शर्मा ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार उनके परिवार को प्रताड़ित कर रही है। अब आश्रय शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि अगर बीजेपी सरकार ऐसी ही प्रताड़ित करती रही तो अनिल शर्मा अगले चुनावों में कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे।

खास बात यह है कि 2017 से पहले वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे अनिल शर्मा ने 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था और बीजेपी की सरकार में मंत्री भी बने थे। मगर 2019 में जब उनके बेटे आश्रय ने कांग्रेस के टिकट पर मंडी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।

उसके बाद से बीजेपी ने न तो अनिल शर्मा को पार्टी से निकाला है और न ही अनिल ने इस्तीफा दिया है। बीजेपी में उनकी हालत ऐसी हो गई है कि कोई पूछ नहीं रहा। कई मंचों से अनिल कहते रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे और उनके इलाके में विकास कार्य ठप हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। दो दिन पहले की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने ऐसे ही आरोप लगाए थे।

अब उनके बेटे और कांग्रेस के महासचिव आश्रय शर्मा ने कहा है कि उनके पिता अगले चुनावों में मंडी से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं। हालांकि, अजीब बात यह है कि उन्होंने इसके लिए बीजेपी से ही मांग की है कि वह उनके पिता को पार्टी से निकालने की कार्रवाई करे।

आश्रय ने कहा, “दो सालों से अनिल शर्मा पर कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा उन्हें निष्कासित करने की कार्रवाई तो करके दिखाए।” यही नहीं, आश्रय ने यह भी कहा कि उनके पिता अनिल शर्मा की हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से मुलाकात हुई है, जो हाल ही में मंडी आए थे।

सरकार मेरे बच्चों को परेशान करने के लिए बिजली काटती रही: अनिल शर्मा

जब वीरभद्र ने तोड़ा था पालमपुर में बड़े अस्पताल का शांता कुमार का सपना

हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज करके याचिकाकर्ता पर दंड लगाया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘जनता के सहयोग से शांता कुमार के विवेकानंद ट्रस्ट ने जो अस्पताल बनाया था, वह आज व्यावसायिक गतिविधियां चला रहा है।’

पालमपुर में ट्रस्ट के माध्यम से इस अस्पताल को बनाने से पहले शांता कुमार ने एक और बड़े अस्पताल को  यहां लाने की कोशिश की थी। उस दौर में जब हिमाचल में स्वास्थ्य सुविधाएं नाममात्र की थीं। उस अस्पताल की कहानी बताने वाले इस लेख को पहली बार 26 अप्रैल, 2016 को इन हिमाचल पर प्रकाशित किया गया था। इसे अब फिर से प्रकाशित किया जा रहा है।

डॉक्टर  सतीश अवस्थी।। कल टांडा मेडिकल कालेज में सराय के शिलान्यास पर मैं भी उपस्थित था। टांडा मेडिकल कालेज में  शांता कुमार  ने सराय बनाने के लिए BHEL से ढाई करोड़ का धन उपलब्ध करवाया। आप सबको यह एक रूटीन बात लग रही होगी परन्तु मेरे जैसे व्यक्ति के लिए जिसने इतिहास के पन्ने पढ़े हैं उसके लिए यह एक अलग बात थी। कार्यक्रम की तस्वीरें देख मैं इतिहास में डूब गया।

1990 में बीजेपी रिकॉर्ड सीटों के साथ सत्ता में आई, शांता कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने। सब लोगों की नजरें उन पर थीं। गली चौराहों पर यही चर्चा होती थी कि पानी वाला मुख्यमंत्री इस बार क्या नया करेगा। मैं उस समय युवा डॉक्टर था, कांगड़ा जिले में अपनी सेवाएं दे रहा था। हॉस्पिटल के नाम पर पूरे हिमाचल में सिर्फ स्नोडन हॉस्पिटल हम लोगों के पास था, जिसमें कुछ एक सही दर्जे की सुविधाएं मौजूद थीं। फिर बात चली कि पालमपुर में एक हॉस्पिटल बनेगा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के बड़े अस्पतालों जैसी सुविधाएं होंगी। बात थी कि सीएम खुद इसके लिए कोशिश कर रहे हैं।

उस दौर में अपोलो हॉस्पिटल भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ब्रैंड था। एक डॉक्टर होने के नाते हम लोग भी उत्साहित थे कि क्या सचमुच हिमाचल के पालमपुर में अपोलो स्तर का हॉस्पिटल बनेगा। सब चीजें सही राह पर जा रही थीं। शांता कुमार ने अपोलो के तत्कालीन चेरयमैन से बात कर ली थी और पालमपुर को लेकर सब फाइनल हो गया था। हिमाचल के लाखों लोगों ने इस पुनीत कार्य के लिए मुख्यमंत्री के कहने पर चन्दा भी दान दिया था। पर बाबरी मस्जिद विध्वंस के कारण पूरे देश में बीजेपी की सरकारें भंग कर दी गईं। तब ढाई साल की अवधि में ही शांता कुमार सरकार भी इस विवाद की भेंट चढ़ गई।

शांता कुमार | Image Courtesy: Shanta Kumar / HP Govt

पुनः चुनाव हुआ, लोक लुभावन निर्णयों की जगह जनहित में प्रदेश भविष्य के लिए निर्णय लेने वाले शांता कुमार को जनता ने अस्वीकार कर दिया। वीरभद्र सिंह प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने। शांता का ड्रीम प्रॉजेक्ट-  पालमपुर में अपोलो का निर्माण –  अब नई सरकार के रहमो करम पर निर्भर था।  बुरी तरह से चुनाव हारा हुआ यह नेता, जिसने मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपनी सीट भी गंवा दी थी, शिमला में नए मुख्यमंत्री  से मिला और अपोलो हॉस्पिटल को हरी झंडी देने की प्रार्थना की। कहा कि सब कुछ फाइनल है।

तब वीरभद्र सिंह ने शिमला में भद्रता का परिचय देते हुए शांता कुमार की रिक्वेस्ट को स्वीकार भी किया। परन्तु वीरभद्र सिंह राजनीति के घाघ आदमी हैं। कूटनीति में महारथी यह तथाकथित ‘राजा’ जनहित के लिए भी अपने विरोधियों को चांस नहीं देता।  शांता कुमार को वादा करने के बावजूद अपोलो हॉस्पिटल की फाइल ठन्डे बस्ते में डाल दी गई और एक दिन कांगड़ा दौरे पर आए मुख्यमन्त्री ने पालमपुर से 40 किलोमीटर दूर नगरोटा के टांडा में प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेज की घोषणा कर दी।

इस पेशे से जुड़े सब लोग अवाक थे। सिर्फ राजनीति के विद्वान समझ पाए कि अपोलो को बनवाकर वीरभद्र अपने विरोधी शांता को क्रेडिट लेने का कोई चांस नहीं देना चाहते थे। हम डॉक्टर लोग राजनीति नहीं जानते पर बस यह ज़रूर जानते थे कि अपोलो हॉस्पिटल बना-बनाया आ जाता। मगर नए मेडिकल कॉलेज को अच्छे स्तर पर ले जाना उस समय हिमाचल सरकार के वश में नहीं था। हुआ भी वही, टांडा मेडिकल कॉलेज खुल तो गया पर मूलभूत सुविधाओं और उच्च स्तरीय फैकल्टी, शोध आदि के लिए तरसता रहा।

वीरभद्र सिंह

आज भी टांडा मेडिकल कॉलेज कहाँ है, उसका क्या स्तर है, प्रदेश का हर आदमी जानता है। मात्र वीरभद्र सिंह की कूटनीति ने  स्वास्थ्य क्षेत्र में अपोलो से प्रदेश को वंचित करवाकर कितना पीछे धकेल दिया था यह आम जनता नहीं बल्कि प्रोफेशनल डॉक्टर जानते थे। वीरभद्र सिंह ने अगले कार्यकालों में भी कूटनीति के तहत प्रदेश में मेडिकल कॉलेज तो बनवा दिए मगर वे कभी उन्हें उस स्तर पर नहीं पहुंचा पाए, जिससे कि वे लोगों के ढंग से काम आ सकें।

बहरहाल, हाल में जब टांडा में सराय का शिलान्यास हो रहा था, वहां शांता कुमार भी थे और वीरभद्र भी। दोनों की तस्वीरें देख मैं तुलना कर रहा था। एक वीरभद्र सिंह थे, जिन्होंने विरोधी को क्रेडिट न मिले इसलिए अपोलो को लात मार दी। वहीं पर शांता कुमार थे, जिनके सपने के खंडहर के ऊपर टांडा मेडिकल कॉलेज की नींव पड़ी और फिर भी वह उसकी सराय के निर्माण के लिए कहीं से धन का जुगाड़ कर लाए। यही नहीं, जिस आदमी ने उनके विचार के विरोध में यह मेडिकल कॉलेज बनाया था, उसी को इसके शिलान्यास का मौक़ा भी दिया।

मेरा मन आदर भाव से शांता कुमार के लिए झुक गया।

टांडा मेडिकल कॉलेज में सराय के शिलान्यास की तस्वीर

मैं कोई राजनीतिक आदमी नहीं हूँ परन्तु प्रदेश की राजनीति का स्तर मैं भी देखता हूँ। शिक्षण संस्थान, जिनकी कई सालों पहले घोषणाएं हुईं, वे आज तक ढंग से नहीं चल पा रहे। कांग्रेस की सरकार आती है तो बीजेपी सरकार में घोषित किए गए किसी इंजीनियरिंग कॉलेज को बजट नहीं मिलता और बीजेपी की सरकार आती है तो कांग्रेस सरकार में बनाए गए संस्थान पैसे के लिए तरसते हैं। ये पार्टियां, ये नेता ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे ये संस्थान उनके हों, जनता के नहीं।

टांडा मेडिकल कॉलेज आगे बढ़े, वहां अच्छा इलाज़ हो, मैं यह चाहता हूँ। पर अपोलो जैसा अस्पताल अगर राजनीतिक रस्साकशी की भेंट नहीं चढ़ता तो हिमाचल के असंख्य मरीज कई साल पहले से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर होते-होते दम नहीं तोड़ते। एक मेडिकल प्रफेशनल होने के नाते मैं समझता हूं कि एक एक पल और एक एक सुविधा कितनी अहम होती है। इसलिए ऐसी राजनीतिक की टीस आज भी कहीं न कहीं महसूस होती है।

(लेखक मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और स्वास्थ्य विभाग में लम्बी सेवा देने के बाद चंडीगढ़ में रहते हैं)

भाजपा में भी फैल रहा है राजनीतिक प्रदूषण: शांता कुमार

सरकार मेरे बच्चों को परेशान करने के लिए बिजली काटती रही: अनिल शर्मा

मंडी।। मंडी सदर से बीजेपी के विधायक अनिल शर्मा आरोप लगाया है कि राज्य सरकार उन्हें परेशान कर रही है। अनिल शर्मा ने विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ बीजेपी जॉइन की थी और नई सरकार में मंत्री भी बने थे। मगर 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब उनके बेटे आश्रय शर्मा ने कांग्रेस के टिकट से मंडी से चुनाव लड़ा तो उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

अब अनिल शर्मा का कहना है कि सरकार उन्हें प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार ने मुझे प्रताड़ित करने की सारी हदें पार की हैं। लॉकडाउन के दौरान मुंबई से आए मेरे बेटे आयुष, बहू अर्पिता और उनके बच्चों को जानबूझकर तंग किया गया। सवा माह तक जब तक परिवार मेरे घर में रहा, रोज आधी रात को बिजली काटी जाती रही। आयुष के बच्चे रात के अंधेरे में रोते थे।”

‘बेटे आयुष को नाके पर रोका गया’
अनिल शर्मा ने कहा, “मैं खुद भाजपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रहा हूं। हर बड़े अधिकारी को शिकायत की गई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उनके जाने के बाद बिजली दुरुस्त हो गई। अपने वाहन से चंडीगढ़ आ रहे आयुष को स्वारघाट बॉर्डर पर हवलदार ने दो घंटे तक खड़े रखा और बदसलूकी की।”

अनिल शर्मा ने कहा कि परिवार और राजनीति अलग-अलग हैं। परिवार पर आंच बर्दाश्त नहीं होगी। सरकार तीन साल के कार्यकाल में हर मोरचे पर विफल रही है। उन्होंने सीएम को नसीहत देते हुए यह तक कह डाला कि आने वाले दो सालों में अब वह कुछ ऐसा काम करें, जिससे कम से कम मंडी और प्रदेश की जनता उन्हें याद करती रहे।

भाजपा में भी फैल रहा है राजनीतिक प्रदूषण: शांता कुमार

पालमपुर।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने कहा है कि ‘भाजपा में भी राजनीतिक प्रदूषण फैल रहा है।’ शांता कुमार ने कहा कि उन्हें दुख है कि विवेकानंद ट्रस्ट को लेकर उनके खिलाफ मामला किसी विरोधी या कांग्रेस पार्टी ने नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के लोगों ने करवाया था, जिसकी वजह से उन्हें बहुत मानसिक पीड़ा पहुंची है।’

शांता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह मामला मेरी ही पार्टी के कुछ लोगों के इशारे पर किया था। पार्टी के कुछ लोग मुझे नीचा दिखाना चाहते थे, लेकिन ट्रस्ट के पक्ष में न्यायालय ने फैसला देकर न्याय किया है। शांता के इस बयान के बाद मचे सियासी घमासान के बाद आननफानन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप उनसे मिलने पालमपुर पहुंच गए। शाम करीब साढ़े पांच बजे पालमपुर पहुंचे कश्यप ने आधे घंटे तक शांता से मुलाकात की।

इससे पहले की गई पत्रकार वार्ता में शांता कुमार ने यह भी कहा था इस मामले में वह मानहानि का दावा आसानी से कर सकते हैं, लेकिन उनके मन में ऐसी हीन भावना नहीं है। जब कश्यप उनसे मिले तो उस दौरान जयसिंहपुर के विधायक रवि धीमान, बैजनाथ के विधायक मुल्खराज प्रेमी, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर, पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष विनय शर्मा सहित विशाल चौहान भी वहां मौजूद रहे।

क्या है मामला
शिमला हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट के खिलाफ पालमपुर में मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नाम पर जनता से धोखा देने के आरोपों को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि शांता ने सस्ते इलाज का प्रलोभन देकर पालमपुर में पीजीआई स्तर का अस्पताल बनाने की बात कही थी।

आरोप था कि प्रलोभन में आकर लोगों ने ट्रस्ट को करोड़ों का चंदा दिया, लेकिन जब यह अस्पताल बन गया तो उसे चैरिटेबल की बजाय व्यावसायिक बना दिया। मगर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लोकप्रियता की ललक में याचिका डालने का दोषी मानते हुए हर्जाना भरने को भी कहा था।

HRTC कंडक्टर भर्ती परीक्षा: पेपर की तस्वीरें खींचने को लेकर SIT करेगी जांच

शिमला।। एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती की परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर बाहर भेजने के मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। डीजीपी संजय कुंडू के निर्देश पर आठ सदस्यों की विशेष जांच टीम बनाई गई है। इस टीम में एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन, एसपी शिमला मोहित चावला, एसपी साइबर क्राइम संदीप धवल, एसपी इंटेलिजेंस संदीप भारद्वाज, एडिशनल एसपी सोलन अशोक कुमार, डीएसपी हमीरपुर रेनू कुमारी और डीएसपी मुख्यालय मंडी करण सिंह गुलेरिया को शामिल किया गया है।

डीजीपी कुंडू ने बताया कि ‘जांच टीम में विभिन्न जिलों के अधिकारियों को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि इस प्रकरण की जांच का प्रभाव राज्यव्यापी है।’ उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र हल करने में किसी बड़े संगठित गिरोह के हाथ होने को ध्यान में रखते हुए भी जांच होगी। इसके अलावा परीक्षा के संचालन में कमी या गड़बड़ी की भी जांच की जाएगी।

राज्य के मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में हुई कंडक्टर भर्ती की परीक्षा के मामले में किसी गिरोह के शामिल होने की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में किसी तरह का कोई गिरोह सक्रिय था या नहीं। अनिल कुमार खाची ने कहा कि इस मामले को लेकर सरकार गंभीर है और इस संबंध में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इस बीच, मंगलवार को कांगड़ा के ज्वाली निवासी अभियुक्त मनोज कुमार ने शाहपुर थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी पिछले दो दिन से फरार था। वहीं पुलिस ने अनिल कुमार को भी गिरफ्तार किया है, जिसे मनोज ने व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्र की फोटो खींच कर भेजी थी। अनिल एचआरटीसी में बतौर परिचालक नौकरी करता है और आरोपी मनोज के ही गांव का है। इसके अलावा पुलिस ने दो और लोगों को पकड़ा है जो सॉल्वर बताए जा रहे हैं। पुलिस इन चारों से पूछताछ कर रही है।

इससे पहले शिमला में प्रश्नपत्र का फोटो खींचकर बाहर बैठे अपने भाई को व्हाट्सएप से भेजने के आरोपी रोहड़ू निवासी लकी शर्मा और उसके भाई सनी शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया। सनी शर्मा से पूछताछ और कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

कंडक्टर भर्ती: कई जगह खींचे गए थे फोटो, 2 अरेस्ट, जांच जारी

कंडक्टर भर्ती: कई जगह खींचे गए थे फोटो, 2 अरेस्ट, जांच जारी

शिमला।। हिमाचल परिवहन निगम की कंडक्टर भर्ती परीक्षा विवादों में आ गई है। रविवार को आयोजित परीक्षा में प्रदेश के चार परीक्षा केंद्रों में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। दो अभ्यर्थी गिरफ्तार भी हुए हैं।विपक्ष ने जहां परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई वहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

सबसे पहले इन हिमाचल ने यह मामला उठाया था। 12 बजे तक होने वाले एग्जाम के प्रश्नपत्र की तस्वीरें वायरल होने की खबर इन हिमाचल ने एग्जाम खत्म होने से पहले ही प्रकाशित कर दी थी। बाद में बाकी मीडिया ने भी इस विषय को उठाया।

अब स्पष्ट हुआ है कि शिमला और शाहपुर सेंटरों से दो अभ्यर्थियों ने अपने मोबाइल से प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर बाहर भेज दिए। हालांकि, बताया जा रहा है कि शाहपुर में बाहर आया प्रश्न पत्र ही सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इन हिमाचल के पास भी इसकी प्रति सवा 11 बजे तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंच चुकी थी।

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिमला के एपी गोयल विवि सेंटर से आरोपी फरार भी हो गया, जिसे रात 8 बजे रोहड़ू से गिरफ्तार कर लाया गया है। आरोप है कि उसने अपने भाई को पर्चा व्हाट्सएप किया था। वहीं शाहपुर के निजी कॉलेज सेंटर से पर्चा वायरल करने वाले को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘लीक नहीं हुआ प्रश्नपत्र’
परीक्षा ले रहे हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के सचिव डॉ. जितेंद्र कंवर ने कहा कि मामलों की जांच की जाएगी। एक से अधिक लोगों को प्रश्नपत्र सोशल मीडिया से भेजा है तो आयोग पुलिस और परीक्षा ले रहे स्टाफ की रिपोर्ट पर कोई फैसला लेगा। फिलहाल भर्ती परीक्षा रद्द नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ‘परीक्षा सुबह 10:00 से 12:00 के बीच हुई है और जो भी गड़बड़ियां सामने आई हैं, वे 10:23 के बाद की हैं। इससे प्रश्न पत्र लीक होने का सवाल नहीं उठता।’

आयोग ने अनुबंध आधार पर कंडक्टरों के 568 पद भरने को 31 दिसंबर, 2019 से 30 जनवरी, 2020 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। सामान्य वर्ग के लिए 223 पद, एससी के लिए 110, एसटी के लिए 19 और ओबीसी के लिए 85 पदों के अलावा स्वतंत्रता सेनानी और बीपीएल के लिए अलग से पद आरक्षित हैं। चयनित अभ्यर्थी को मासिक 5910-20200 रुपये वेतन और 2400 रुपये ग्रेड-पे मिलेगा। परीक्षा के लिए प्रदेश भर में 304 केंद्र बनाए गए। इसके लिए 60 हजार अभ्यर्थियों को कॉल लेटर भेजे गए।  करीब 7000 अभ्यर्थियों के आवेदन रद्द भी हो चुके हैं।

मामला नम्बर 1
आरोप है कि शिमला के एपी गोयल विवि सेंटर में एक अभ्यर्थी मोबाइल सहित परीक्षा केंद्र पहुंचा। परीक्षा शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद उसने मोबाइल से प्रश्नपत्र का फोटो खींचा और बाहर बैठे अपने भाई के मोबाइल पर भेज दिया। पुलिस के मुताबिक परीक्षा की सीरीज बी का पेज नंबर 19 और अन्य पेज के फोटो बाहर भेजे। केंद्र अधीक्षक का कहना है कि उन्होंने अभ्यर्थी का फोन जब्त कर आयोग को सूचना दी।

कहा जा रहा है कि जितनी देर में आरोपी को पकड़ा जाता, वह भाग निकला। हालांकि बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया। चयन आयोग ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी पर तीन साल के लिए किसी भी भर्ती परीक्षा में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मामला नम्बर 2
अन्य मामले में सोलन के निजी स्कूल गुरुकुल में बनाए परीक्षा केंद्र में भी एक अभ्यर्थी मोबाइल फोन के साथ पकड़ा गया था। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने उसका फोन जब्त कर उसे परीक्षा के लिए अयोग्य करार दे दिया। उसके फोन की जांच की तो उसमें प्रश्न पत्र की फोटो पाई गई। परीक्षा समाप्त होने के बाद उसे परीक्षा केंद्र से बाहर किया गया। हालांकि, कहा जा रहा है कि उसने प्रश्न पत्र को किसी से शेयर नहीं किया था।

मामला नम्बर 3
उधर मंडी जिले के सुंदरनगर में परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड में फोटो और हस्ताक्षर संबंधित अभ्यर्थी का ही था, लेकिन नाम किसी और का था। अभ्यर्थी ने केंद्र अधीक्षक को बताया कि एडमिट कार्ड पर उसके भाई का नाम है, जो जोगिंद्रनगर में परीक्षा दे रहा है। आयोग सचिव ने बताया कि अभ्यर्थी ने परीक्षा देने से इनकार कर दिया। परीक्षा न देने के बारे में अभ्यर्थी से लिखित में लिया जाएगा। हालांकि अभ्यर्थी को परीक्षा देने से पहले एडमिट कार्ड जांचना चाहिए था। अभ्यर्थी ने जिस साइबर कैफे में ऑनलाइन आवेदन किया था, वहां भी गलती की आशंका हो सकती है। इन संबंध में एसडीएम सुंदरनगर से भी रिपोर्ट मांगी गई है।

मामला नम्बर 4
एक शख्स ने शाहपुर के निजी कॉलेज सेंटर से पर्चा वायरल कर दिया। इसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

सीएम ने दिए हैं जांच के आदेश
इस मामले में सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं विपक्ष इस मामले में हमलावर हो गया है। पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि कंडक्टर भर्ती ही नहीं, बल्कि इसका प्रश्नपत्र भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा, “सरकार परीक्षा रद्द करवाकर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच करवाए। इस परीक्षा में एक भी प्रश्न संबंधित क्षेत्र से नहीं है। जो प्रश्न पूछे गए हैं, वे उच्च स्तर के हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनके कार्यकाल में टीएमपीए की भर्ती हुई थी तो विपक्ष में बैठी भाजपा ने कई सवाल उठाए थे। वहीं अब जब खुद भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा का आयोजन कर रहा है, तो प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्र से मोबाइल के जरिये बाहर भेजकर लीक किया जा रहा है।”

बाली ने कहा कि ‘हमारे कार्यकाल की हर भर्ती पर विपक्ष में रहते भाजपा ने लांछन लगाए थे, लेकिन कोर्ट ने भर्तियों को क्लीन चिट दी थी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भाजपा सरकार में पटवारी भर्ती परीक्षा में भी गड़बड़झाला सवालों में आया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।’

सोनिया गांधी वाली शिलान्यास पट्टिका लगाने में कोई नुकसान नहीं: धूमल

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि अगर सोनिया गांधी द्वारा साल 2010 में किए गए रोहतांग टनल के शिलान्यास वाली पट्टिका को टनल में लगा दिया जाता है तो इसमें कोई नुकसान की बात नहीं है।

पूर्व सीएम ने कहा कि बीजेपी अपने संस्थापकों द्वारा दिखाए गए आदर्शों और उच्चतम सिद्धांतों का अनुसरण कर रही है। उन्होंने कहा कि पट्टिकाएं हटाना और तोड़ना कांग्रेस की संस्कृति है। धूमल ने कहा कि औट के पास मंडी और कुल्लू के बीच लारजी सुरंग की पट्टिका कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नष्ट कर दी थी।

तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार धूमल भी शामिल हुए थे शिलान्यास कार्यक्रम में

वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को जब अपने ही कर्मों का फल मिला तो वे शोर मचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन स्टोन की पट्टिकाओं को आमतौर पर संबंधित विभाग अपने पास सुरक्षित रख लेता है, ऐसे में इसमें हंगामा करने की जरूरत नहीं है।

इस बीच कुल्लू पुलिस ने कहा है कि जिस शिलान्यास पट्टिका को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही है, वह अटल टनल रोहतांग का निर्माण करने वाली कंपनी के स्टोर में मौजूद है। पुलिस ने यह छानबीन कांग्रेस की ओर से केलॉन्ग में दी गई शिकायत के आधार पर की थी।

इसे सुरंग में लगाने के सवाल पर बीआरओ ने कहा है कि ऊपर से आदेश आने पर ही कोई क़दम उठाया जाएगा।

अब अटल टनल रोहतांग के मुहाने पर 500 करोड़ की प्रतिमा बनाएगी सरकार

अटल टनल: मिल गई सोनिया गांधी के नाम वाली ‘लापता’ शिलान्यास पट्टिका

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश पुलिस को वह पट्टिका मिल गई है, जो साल 2010 में यूपीए सरकार के दौरान रोहतांग टनल के शिलान्यास के दौरान लगाई गई थी। 28 जून, 2010 को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने टनल के साउथ पोर्टल पर धुंधी के पास एक कार्यक्रम में इसका शिलान्यास किया था।

कुल्लू के एसपी गौरव सिंह ने बताया कि लाहौल स्पीति के केलॉंग पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई थी कि अटल टनल के शिलान्यास की पट्टिका गायब है। यह शिकायत कांग्रेस की जिला कमेटी के प्रधान की ओर से करवाई गई थी। इसमें शिकायत दी गई थी कि कुछ तत्वों ने पट्टिका को हटा दिया है।

जब यह मामला कुल्लू पलिस के पास पहुंचा तो जांच में पुलिस ने पाया कि यह पट्टिका मनाली में उस कंपनी की मकैनिकल वर्कशॉप में है, जिसने इस सुरंग का निर्माण किया है। यह पट्टिका तो मिल गई है, लेकिन अब सवाल उठ सकते है कि आखिर क्यों इस पट्टिका को सुरंग के पास लगाया गया।

जब से इस सुरंग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है, इसका श्रेय लेने के लिए होड़ मच गई है। बीजेपी जहां इसे अपने शासनकाल की उपलब्धि बता रही है वहीं कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी उसके कामों का श्रेय ले रही है।

एक ओर जहां कांग्रेस फिर से इस पट्टिका को लगाने की मांग कर रही है, वहीं अंग्रेजी अखबार ट्रिब्यून के मुताबिक, बीआरओ का कहना है कि ऊपर से आदेश देने के बाद ही इसे लगाने को लेकर कोई फैसला किया जाएगा।

अब अटल टनल रोहतांग के मुहाने पर 500 करोड़ की प्रतिमा बनाएगी सरकार

अटल टनल उद्घाटन में शामिल रहे मंत्री रामलाल मारकंडा भी कोरोना संक्रमित

शिमला।।अटल टनल रोहतांग के उद्घाटन कार्यक्रम से एक दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी के संपर्क में आए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बाद अब जनजातीय विकास मंत्री रामलाल मारकंडा भी वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने भी मुख्यमंत्री जयराम की ही तरह उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा किया था।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मारकंडा किसके संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं। मगर पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनके संपर्क में आए लोगों में एक हैं। बताया जा रहा है कि मारकांडा तीन अक्तूबर को हुए कार्यक्रम के बाद आइसोलेट थे और संभव है कि वह कार्यक्रम के दौरान ही संक्रमित हुए हों।

ऐसा इसलिए, क्योंकि कार्यक्रम से दो दिन पहले करवाए गए टेस्ट में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव थी। मगर अब एक दिन पहले कुछ लक्षण नजर आने पर उन्होंने अपना टेस्ट करवाया था, जो अब पॉजिटिव निकला है।

मारकंडा ने फेसबुक पर लिखा है, “कोरोना के कुछ लक्षण आने के कारण आज कोरोना टेस्ट करवाया,जिसकी रिपोर्ट अभी 10 मिनट पहले पॉज़िटिव आई है। चिकित्सकों की सलाह पर अपने सरकारी आवास में ही आइसोलेट हूं। आप सभी के आशीर्वाद से मैं शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो जाऊंगा।”

आज कोरोना के कुछ लक्षण आने के कारण आज कोरोना टेस्ट करवाया,जिसकी रिपोर्ट अभी 10 मिनट पहले पॉज़िटिव आई है।चिकित्सकों की…

Posted by Dr. Ramlal Markanda on Tuesday, October 13, 2020

सुरंग बनते ही लाहौल में कचरा फैलाने लगे टूरिस्ट, चंद्रा नदी को भी खतरा

केलॉन्ग।। अटल टनल रोहतांग बनते ही लाहौल जाने वाले पर्यटकों का तांता लग गया है। कोरोना संकट के बीच वाहनों की लंबी कतारें लाहौल पहुंच रही हैं। मगर इसका नुकसान भी यहां होने लगा है। अब तक बाकी जगहों की तुलना में टूरिस्टों द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी और कचरे से बचा रहने वाला ये इलाका भी अब प्रदूषित होने लगा है।

टनल के उत्तरी पोर्टल के पास सिस्सू हैलीपैड के पास गंदगी साफ देखी जा सकती है। लोग यहां पर नदी में उतर रहे हैं और वहीं पर कचरा फेंक रहे है। स्थानीय लोग इससे परेशान भी होने लगे हैं। उनका कहना है कि खाने-पीने की चीजों के पैकेटों से लेकर बियर-शराब की बोतलें तक फेंकी जा रही हैं और ये सबकुछ चंद्रा नदी में जा रहा है।

Littering on rise as tourists make beeline for Lahaul

स्थानीय लोगों की चिंता है कि अभी घाटी में स्थानीय लोगों के हिसाब से ही पर्याप्त संसाधन और इंतजाम नहीं है, ऐसे में सुरंग बनने के बाद जितनी संख्या में पर्यटक आ रहे है, उससे हालात और खराब हो रहे हैं। उन्हें चिंता है कि यही हाल रहा तो कुछ ही समय में यहां का पर्यावरण भी नुकसान की चपेट में आ जाएगा।

सड़क पर जाते समय किनारे जहां-तहां आप पर्यटकों द्वारा वाहनों से फेंका गया कचरा देख सकते हैं। लोगों की शिकायत यह है कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन कुछ नहीं कर रहा जबकि इस क्षेत्र की इकॉलजी बेहद संवेदनशील है।

समस्या यह है कि यहां पर न तो पर्यटकों के ठहरने के इंतजाम हैं, न सड़कें चौड़ी हैं और न पार्किंग का इंतजाम है। सार्वजनिक शौचालयों आदि की भी व्यवस्था न होने के कारण पर्यटकों को भी दिक्कत हो रही है। पर्यटकों की वाहनों के कारण एचआरटीसी तक की बसें थम जा रही हैं जिससे अपने किसी काम से जा रहे स्थानीय लोगों को भी दिक्कत हो रही है।

जरूरी है कि जब तक इन चीज़ों का इंतजाम नहीं हो जाता, सरकार को कोई रास्ता ढूंढना होगा और बेवजह टनल पार करके आ रहे लोगों पर लगाम लगानी होगी। पर्यटन की इजाजत तभी दी जानी चाहिए जब पर्यटकों लायक सुविधाएं हों। वरना गंदगी और अव्यवस्था की मार लाहौल घाटी के पर्यावरण और स्थानीय लोगों पर पड़ेगी।