मंडी तक सिमटकर रह गए जयराम, बढ़ी भाजपा की चिंता

इन हिमाचल डेस्क।। नगर निगम के चुनावों ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चार नगर निगमो में भाजपा सिर्फ मंडी नगर निगम पर क्लियर बहुमत ले पाई है, वहीं धर्मशाला में बहुमत से एक सीट पीछे रह गई है। धर्मशाला के साथ लगते पालमपुर शहर की बात करें तो यहां तो भाजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार के गृह नगर में भाजपा मात्र दो सीटें जीत पाई है। वहीं प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर सोलन में भाजपा भी भाजपा को कांग्रेस के आगे घुटने टेकने पड़े हैं।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने नगर निगमों के चुनाव पार्टी चिह्न पर करवाने का फैसला लिया था परंतु नतीजे पार्टी और मुख्यमंत्री के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। नए नगर निगम गठन के बावजूद मंडी के अलावा पालमपुर और सोलन जनता ने भाजपा को तवज्जो नही दी है। कुल मिलाकर सीएम जयराम ठाकुर मंडी तक सिमटकर रह गए हैं। कही न कही यह नतीजे मुख्यमंत्री और सरकार की लोकप्रियता का आईना भी है।

कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह अक्सर मंडी से सीएम की कुर्सी को लक्ष्मी की संज्ञा दे चुके हैं। वहीं विकास कार्यों के लिए बजट के आबंटन में भी बाकी प्रदेश के साथ भेदभाव किया जा रहा है। और मंडी में भी सिर्फ सिराज और धर्मपुर को प्राथमिकता देने के आरोप सरकार पर लग रहे हैं।

महेन्द्र सिंह तो हमेशा से खुद को और अपने परिवार को मजबूत करने में लगे है परंतु जयराम ठाकुर ने भी अपने ऊपर मंडी से बाहर न सोच पाने का ठप्पा लगवा लिया है, जो एक मुख्यमंत्री के लिए सुखद संदेश नहीं है। यही कारण रहे कि जोर शोर से प्रचार करके भी भाजपा मंडी से बाहर खास प्रदर्शन नही कर पाई।

धर्मशाला में भाजपा बेशक इस बात की खुशी मना रही है कि
उसकी कांग्रेस से अधिक सीटे हैं। परंतु जनमत को आंककर देखा जाए तो धर्मशाला की जनता ने भी भाजपा को नकार दिया है। सांसद किशन कपुर और विधायक नेहरिया के गृह वार्डो मे भाजपा उम्मीदवारों की हार हुई है। यहाँ सुधीर बनाम गैर सुधीर कांग्रेस की फूट ने भाजपा को थोड़ी राहत बेशक दी है परंतु भविष्य के लिए इसे अच्छा संदेश नही कहा जा सकता।

सोलन नगर निगम में भाजपा ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार होती लग रही है। पूर्वमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष नाहन से विधायक राजीव बिंदल के भरोसे भाजपा इस निगम को जीतने पर आश्वस्त थी। परन्तु अति उत्साह की मार ने बिंदल की संगठन क्षमता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पालमपुर में तो भाजपा महासचिव त्रिलोक कपूर के भरोसे बैठी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। बुटेल परिवार का डंका यहाँ खूब बजा है।
त्रिलोक कपूर के पालमपुर से भविष्य की राजनीति की पारी शुरू करने के सपने को भी यहाँ झटका लगा है।

मंडी में कॉल सिंह और सुखराम परिवार की तकरार से भाजपा को फायदा मिला है साथ ही सीएम जयराम की भावुक अपील जरूर कारगर हुई है। परंतु पूरे प्रदेश में कोई पॉजिटिव संदेश भाजपा अपने फेवर में नही दे पाई है।

जयराम के आने से उम्मीद जगी थी कि शान्ता कुमार, वीरभद्र और धूमल के राज में लोअर बनाम अपर के सीएम का जो राग लगा रहता था, वो खत्म होगा। परन्तु अभी लग रहा है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी सिर्फ मंडी तक सीमित होकर रह गए हैं। यह बात 2022 के चुनाव से पहले फतेहपुर और मंडी लोकसभा उप चुनाव के लिए भाजपा की चिंता की रेखाएं बढ़ाने के लिए काफी है। मृतप्राय कांग्रेस को निगम चुनावो ने जरूर संजीवनी दे दी है।

नूरपुर के लोगों की सुविधा के लिए घटाई जाएगी फोरलेन की चौड़ाई: पठानिया

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा है कि पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रॉजेक्ट के लिए नूरपुर में हाईवे की चौड़ाई 35 से घटाकर 32 मीटर की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि कंडवाल से भेडकुंड तक के सेक्शन में ऐसा किया जाएगा ताकि हाईवे बनाने में लोगों की जमीन और इमारतों का नुकसान न हो।

नूरपुर के विधायक और वन मंत्री ने कहा कि वो इस बात को लेकर गंभीर हैं कि लोगों को सही मुआवजा मिले और फोरलेन के कारण कम से कम लोगों का विस्तापन हो। उन्होंने कहा कि व्यापक जनहित के लिए सरकार में सड़क की चौड़ाई घटाने को सैद्धांतिक सहमति बनी है।

अधिग्रहण के लिए सरकार ने कांगड़ा के डिविज़नल कमिश्नर को मध्यस्थ बनाया है जो सात अप्रैल से काम शुरू करेंगे। मंत्री ने कहा, “सरकार ने एक प्रॉजेक्ट के लिए एक ही तरह का मुआवजा देने पर सहमति बनाई है और मैं इसपर कोई समझौता नहीं करूंगा. इस मामले को सुलझाने के बाद ही अगला चुनाव लड़ूंगा।”

सिराज में शराबियों ने डॉक्टर को क्वॉर्टर में घुसकर पीटा, चार गिरफ्तार

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बगस्याड़ में कुछ शराबियों द्वारा डॉक्टर की पिटाई का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पीड़ित डॉ. अभिनव हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर जीवानंद चौहान के बेटे हैं। डॉक्टर जीवानंद चौहान सीएमओ मंडी रह चुके हैं और मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज नेरचौक के एमएस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

क्या हुआ?
डॉक्टर अभिनव नाइट डयूटी के दौरान रात करीब साढ़े दस बजे डिनर करने के लिए  पास ही अपने क्वार्टर गए। वहां पर कुछ लोग शराब पीकर हुड़दंग कर रहे थे। इन्होंने शराब पीने के बाद डॉक्टर की गाड़ी पर पेशाब किया। विरोध करने पर इन्होंने डॉक्टर के क्वॉर्टर पर जाकर डंडे और लोहे की रॉड के साथ हमला बोल दिया।

मंडी में डॉक्टर से मारपीट.

नशे में धुत्त शराबी दरवाजे को तोड़कर अंदर घुसे और वहां मौजूद डॉक्टर अभिनव और उनके चचेरे भाई अविनाश के साथ मारपीट की। करीब एक घंटे तक वे वहां पर तोड़फोड़ करते रहे। डॉक्टर अभिनव ने अपने पिता डॉक्टर जीवानंद चौहान को इसकी सूचना दी और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद गोहर और जंजैहली थाने की टीमें रात को ही मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की।

साजिश के तहत हमला
ऐसा भी कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने डॉक्टर के साथ मारपीट की उनमें से कुछ की डॉक्टर अभिनव के साथ पुरानी रंजिश भी थी। कुछ महीने पहले क्षेत्र में ही गाड़ी को पास देने को लेकर इनका डॉक्टर के साथ विवाद हुआ था और उसमें भी क्रॉस एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि बाद में समझौता हो गया था। एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने बताया है कि जंजैहली पुलिस थाना ने इस संदर्भ में मामला दर्ज करके चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य लोगों की तलाश जारी है।

सुब्रमण्यन स्वामी ने ज्वालाजी मंदिर में गैर-हिंदुओं की नियुक्ति पर उठाया सवाल

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालाजी में ‘गैर-हिंदुओं की नियुक्ति’ को लेकर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने हिमाचल सरकार पर निशाना साधा है। इस संबंध में उन्होंने लगातार तीन ट्वीट किए हैं। सबसे पहले स्वामी ने डीसी कांगड़ा के उस आदेश की कॉपी ट्वीट की है, जिसके तहत श्री ज्वालामुखी मंदिर के दो कर्मचारियों का तबादला डीसी ऑफिस में किया गया था। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि हिमाचल सरकार मंदिरों पर नियंत्रण कर रही है। इस पूरे मामले में डीसी कांगड़ा ने भी अपना पक्ष रखा है।

क्या है मामला
दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह खबर फैली की ज्वालामुखी मंदिर में गैर हिंदू कर्मचारियों को लंगर का काम देखने के लिए नियुक्त किया गया है। फिर कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने कहा कि ‘डीसी कांगड़ा ने ऐसा करके हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘हिंदू मंदिर ज्वालामुखी में 32 वर्षों से कार्यरत कर्मियों को स्थायी नियुक्ति से दरकिनार कर विशेष समुदाय के दो कर्मियों को स्थायी निुयक्ति दी जा रही है जिसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।’

भारी विरोध के बाद डीसी कांगड़ा की ओर से एक आदेश जारी हुआ जिसमें लिखा गया कि ‘हिमाचल प्रदेश के धार्मिक संस्थान एवं धर्माथ निधि कानून 1984 के तहत मिली शक्तियों के तहत, जनहित में जशान दीन और शकीन मोहम्मद को ज्वालामुखी मंदिर से कमिश्नर (टेंपल) और डीसी कांगड़ा के ऑफिस ट्रांसफर किया जाता है।’

अब, बीजेपी के सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने रविवार को इसी ऑर्डर की कॉपी ट्वीट करते हुए लिखा, ‘क्या इसके बारे में कुछ पता है।’ फिर अगले ट्वीट में इसी ऑर्डर की कॉपी के साथ ट्वीट किया, “TDD पर निराधार आरोप लगा रही सनकी ब्रिगेड का इसे समझा सकता है?” इस ट्वीट में उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा है जो तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में गैर हिंदू कर्मचारियों की भर्ती पर सवाल उठा रहे थे।

कांगड़ा के डीसी का जवाब
अब इस मामले में कांगड़ा के डीसी के ट्विटर हैंडल से सुब्रमण्यन स्वामी को जवाब दिया गया है। इसमें डीसी राकेश प्रजापति की ओर से लिखा गया है, “दोनों की नियुक्ति 2017 में पिछली सरकार के दौरान हुई थी। लोगों ने मंदिर के पास उनकी मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई थी, जबकि वे काफी दूर मंदिर के रेस्टहाउस में नियुक्त किए गए थे। तो मैंने उन्हें कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मंदिर से 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय में ट्रांसफर कर दिया है।”

हिमाचल सरकार पर सवाल
बीजेपी के सांसद ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को निशाने पर लिया है। उन्होंने इसमें लिखा है- “हिमाचल प्रदेश सरकार ने शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में गैर-हिंदू नियुक्त किए हैं। हिमाचल सरकार ने ज्यादातर मंदिरों पर नियंत्रण कर लिया है। राजनेता और बाबू हिंदू मंदिरों को अपने निजी जागीर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन सीधा मुख्यमंत्री के तहत आता है।”

अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

फर्जी नशा मुक्ति केंद्र के खेल का पर्दाफाश करने वाले पत्रकार को धमकी

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट में अवैध ढंग से चल रहे नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत की खबर कवर करने वाले एक पत्रकार को धमकी मिली है। पत्रकार अविनाश विद्रोही ने बताया कि जिस इमारत में यह अवैध नशा मुक्ति केंद्र चल रहा था, उसके मालिक ने उन्हें फोन करके धमकाया है। यह पूरा का पूरा मामला किसी बड़े खेल की ओर इशारा कर रहा है।

अवैध दवाइयां मिलने से शुरू हुआ सिलसिला
दरअसल पिछले दिनों गगरेट पुलिस ने गांव बढोह से एक कार सवार से 320 गोली प्रतिबंधित दवाई की पकड़ी थी। पूछताछ में उसने एक दवाई के कारोबारी का नाम लिया। पुलिस जब उसके घर पहुंची तो ये कारोबारी गायब मिला। इस बीच, गगरेट में चल रहे एक नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक की मौत की खबर इलाके में फैली। ध्यान देने की बात यह है कि इस नशा मुक्ति केंद्र का संबंध उसी कारोबारी से बताया जा रहा है जो प्रतिबंधित दवाएं पकड़े जाने के बाद फरार हो गया था।

नशा मुक्ति केंद्र में युवक की मौत की चर्चा
जब शहर में नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक की मौत की चर्चा फैली तो पुलिस ने पड़ताल शुरू की। शुरू में पुलिस को जांच मे कुछ नहीं मिला। लेकिन बुधवार शाम को डीएसपी अंब सृष्टि पांडे ने नशा मुक्ति में दबिश दी तो वहां 19 लोग मिले। ये सभी नशे की लत से मुक्ति पाने के लिए यहां भर्ती थे। पता चला कि इस नशा मुक्ति केंद्र को चलाने वाला और भी कई जगह ऐसे केंद्र चला रहा है। यहां पर यह भी पता चला कि यहीं पर रह रहे एक युवक की वाकई मौत हुई है, जिसकी एक रात को तबीयत खराब हो गई थी।

He promised him a Merc, but showed no mercy

गगरेट अस्पताल से सामने आई जानकारी
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो सिविल हॉस्पिटल गगरेट में नौ मार्च को दर्ज एक रिपोर्ट ने बड़े खेल की ओर इशारा किया। यहां बताया गया कि एक युवक को अस्पताल में लाया गया था और उसे डॉक्टर ने मृत घोषित किया था। मृतक के साथ आए दो लोगों ने डॉक्टर को बताया था कि यह किडनी का रोगी था। मगर मृत घोषित किए जाने के बावजूद ये लोग डॉक्टर से बहस करके शव को होशियारपुर (पंजाब) ले गए।

इस संबंध में पूछताछ करने पर नशा मुक्ति केंद्र के संचालकों का कहना था कि युवक को होशियारपुर रेफर किया गया था। मगर तकनीकी रूप से गगरेट से किसी को होशियारपुर रेफर करना संभव नहीं था। ऐसे में इस केंद्र के संचालकों को लेकर कई सारे सवाल खड़े होने लगे। जब पुलिस ने तफ्तीश का दायरा बढ़ाया तो एक नई जानकारी सामने आई। यह नशा मुक्ति केंद्र अवैध था।

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अवैध नशामुक्ति केंद्र में क्या होता था?
पुलिस ने जांच की तो पता चला कि संचालकों के पास इस केंद्र को चलाने के लिए कोई इजाजत नहीं थी। डीएसपी अंब और बीएमओ गगरेट ने तुरंत इस केंद्र को बंद करवा दिया। यह बात साफ़ हो गई कि पिछले कई दिनों से गगरेट में चोरी-छिपे इसे चलाया जा रहा था। बिल्डिंग के बाहर न कोई बोर्ड लगा था न लोग यहां आ सकते थे। ऐसी खबरें सामने आईं कि पंजाब से नशे के आदी युवाओं को नशा छुड़ाने का झांसा देकर इस पुनर्वास केंद्र में लाया जाता था।

नगर पंचायत अध्यक्ष की थी इमारत
पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि यह इमारत वास्तव में गगरेट नगर पंचायत के अध्यक्ष की है। ऐसी खबरें भी सामने आईं कि शुरू में प्रतिबंधित दवाएं मिलने के बाद फरार कारोबारी, जो इस फर्जी नशा मुक्ति केंद्र को चलाता था, वह नगर पंचायत अध्यक्ष का करीबी है। बता दें कि नगर पंचायत अध्यक्ष पहल पहले भी अवैध दवाएं रखने का मामला है और उनका लाइसेंस इसी वजह से कैंसल भी हो चुका है। मगर पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं कि यह तथाकथित नशा मुक्ति केंद्र कौन चला रहा था।

पत्रकार को धमकी
प्रतिबंधित दवाएं मिलने, कारोबारी के फरार होने, नशा मुक्ति केंद्र में युवक की मौत होने और इस केंद्र के भी अवैध पाए जाने के मामले को सामने लाने में अहम भूमिका रही गगरेट के पत्रकार अविनाश विद्रोही की। हिंदी अखबार जागरण पर उनकी खबरें इस दौरान लगातार प्रकाशित हुईं और पुलिस पर भी ढंग से कार्रवाई करने का दबाव बना। इस बीच अविनाश को एक फ़ोन आया।

अविनाश को धमकी देकर कहा गया, “बड़ी खबर लगाते हो वीर जी, किसी दिन मैंने कस के गले लगा लिया तो तेरे प्राण निकल जाएंगे। याद रख, अखबार मैंने रख ली है और ब्याज के साथ जल्दी ही तेरा हिसाब होगा।” स्पष्ट है, यह जान से मारने की धमकी है। अविनाश ने ‘इन हिमाचल’ को बताया कि इस धमकी के संबंध में उन्होंने डीएसपी अंब और एसपी उना को शिकायत दी है।

इस पूरे मामले में नशा माफिया की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी चर्चा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जो लोग नशे के कारोबार से जुड़े हैं, वही नशा मुक्ति केंद्र चलाने के नाम पर प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार कर रहे हों। यह मामला जितना सीधा लग रहा है, उतना है नहीं।

पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश, खासकर पंजाब से लगते इलाकों में अचानक नशे की समस्या बढ़ी है। ऐसे में सरकार को देखना होगा कि इसके पीछे कौन लोग हैं। कहीं यह एक संगठित अपराध की शक्ल लेने की ओर तो नहीं बढ़ रहा। साथ ही, पुलिस को पत्रकारों को भी सुरक्षा देनी चाहिए ताकि वे निर्भीक होकर अपना काम कर सकें।

‘खराब’ थर्ड अंपायरिंग को लेकर हिमाचल के वीरेंद्र शर्मा पर उठे सवाल

शिमला।। गुरुवार को भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए चौथे टी-20 मैच में दो फैसलों को लेकर विवाद हुए। एक तो सूर्यकुमार का कैच आउट, जिसमें रीप्ले में गेंद जमीन को छूती दिख रही थी, जबकि दूसरा रहा वॉशिंगटन सुंदर का कैच। इस मैच में खराब अंपायरिंग का आरोप लगा और कप्तान विराट कोहली समेत कई पूर्व क्रिकेटरों ने निराशा जताई। ज्यादा सवाल उठ रहे हैं थर्ड या टीवी अंपायर पर। इस मैच में थर्ड अंपायर थे- हिमाचल से संबंध रखने वाले वीरेंद्र शर्मा। शर्मा को घरेलू क्रिकेट में अच्छी अंपायरिंग के लिए बीसीसीआई ने 2018-19 सत्र का बेस्ट अंपायर घोषित किया था।

टीवी अंपायर की पहली गलती
सूर्यकुमार यादव फॉर्म में थे और उनका 14वें ओवर की पहली गेंद पर सैम करन को फाइन लेग पर लगाया गया छक्का उनके आत्मविश्वास का प्रतीक था। अगली गेंद पर डेविड मलान ने सीमा रेखा पर उनका कैच लिया जिसमें रीप्ले से साफ लग रहा था कि गेंद ने जमीन को छुआ है।

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लेकिन कई ऐंगल्स से रीप्ले देखने के बाद तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर का आउट का फैसला बने रहने दिया। इस फैसले के बाद दर्शकों और भारतीय खेमे में हताशा देखी गई।

टीवी अंपायर की दूसरी गलती
इसी मैच में कुछ ऐसा ही हुआ वॉशिंगटन सुंदर के साथ।19.4 ओवर में जब भारतीय बल्लेबाज सुंदर ने आर्चर की गेंद को हिट किया, तब ब्राउंड्री पर मौजूद फील्डर आदिल राशिद ने गेंद को लपक लिया। रीरिप्ले के दौरान बॉल को पकड़ते हुए राशिद का पैर रस्सी को छूता हुआ नजर आ रहा था। इसके बावजूद टीवी अंपायर ने सुंदर को आउट करार दिया।

सॉफ्ट सिगनल का रोल?
हालांकि, गुरुवार को खेले गए मैच में सॉफ्ट सिगनल की भूमिका अहम रही। अब आपमें से कुछ सोच रहे होंगे कि आखिर ये सॉफ्ट सिग्नल होता क्या है? दरअसल, जब भी किसी कैच के लिए फील्ड अंपायर तीसरे अंपायर का रुख करता है तो उसे सॉफ्ट सिग्नल के रूप में अपना फैसला भी बताना होता है। यही हुआ था सूर्यकुमार के मामले में। तो फील्ड अंपायर ने सूर्यकुमार को आउट दिया था और थर्ड अंपायर ने ‘पर्याप्त सबूत न होने के कारण’ फील्ड अंपायर के फैसले को बरकरार रखा।

इस पूरे मामले को लेकर विराट कोहली ने मैच के बाद कहा, “जब फील्डर खुद ही इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं था कि उसने कैच किया है या नहीं तो मैदानी अंपायर ने सॉफ्ट सिग्नल आउट क्यों दिया? ये बात मैं समझ नहीं पाया।”

India vs Pakistan, ICC World Cup 2019: When Virat Kohli had a sleepless night | Cricket News - Times of India

उन्होंने कहा, “टेस्ट सीरीज में एक ऐसा वाकया हुआ था जब अजिंक्य रहाणे ने गेंद को कैच किया था लेकिन वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। जब बात करीबी हो तो सॉफ्ट सिग्नल काफी अहम बन जाता है। मुझे समझ नहीं आता कि अंपायर्स के लिए भी ‘मुझे पता नहीं’ जैसा कोई सिग्नल क्यों नहीं है। खेल के लिए ऐसा करना जरूरी है। लेकिन हम मैदान पर हर फैसले में स्पष्टता चाहते हैं।”

पूर्व क्रिकेटर वीरेंदर सहवाग ने तो एक तस्वीर ट्वीट की जिसमें बच्चे की आंख पर पट्टी बंधी है। उन्होंने लिखा है- थर्ड अंपयार फैसले लेते वक्त।

 

कौन हैं वीरेंद्र शर्मा
वीरेंद्र शर्मा ऐसे पहले हिमाचली हैं जिन्हें बतौर अंपायर बीसीसीआई के एलीट पैनल व आइसीसी के पैनल में शामिल होने का मौका मिला है। इससे पहले वह हिमाचल की ओर से 51 रणजी मैच खेल चुके हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दो शतक और आठ अर्धशतक उनके नाम हैं। उन्होंने फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए मैचों में 2000 के क़रीब रन बनाए हैं। बाद में उन्होंने अंपायरिंग में करियर शुरू किया।

पिछले दिनों जागरण को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “बेशक मैदान पर अंपायरिंग बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। हर किसी की नजर अंपायर पर होती है। ऐसे में कोई भी गलत निर्णय मैच का रुख पलट सकता है तो नए विवाद का भी कारण बन जाता है। ऐसे में खुद पर विश्वास जरूरी है।”

और अफसोस की बात है कि वह खुद विवाद में फंस गए हैं जबकि वह फील्ड अंपायरिंग की जगह टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करने वाले थर्ड अंपायर की भूमिका में थे।

Virender Sharma best Umpire in Domestic Cricket in 2018-19

‘अनुराग ठाकुर हैं रोल मॉडल’
अनुराग ठाकुर को विरेंद्र शर्मा अपना रोल मॉडल मानते हैं। उन्होंने कहा था, “क्रिकेट के क्षेत्र में बहुत से लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है लेकिन अनुराग ठाकुर उन सबमें अग्रणी हैं। उन्होंने न केवल हिमाचल बल्कि देश के क्रिकेट को भी नई ऊंचाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे हमेशा क्रिकेट और प्रतिभावान युवाओं को आगे बढऩे के लिए प्रेरित ही नहीं करते बल्कि अवसर भी उपलब्ध करवाते हैं। हिमाचल क्रिकेट के में उनका योगदान अविस्मरणीय है। वह अच्छे क्रिकेट प्रशासक होने के साथ उम्दा राजनीतिज्ञ भी हैं। इसके अलावा बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष अरुण ठाकुर भी प्रदेश व भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।”

जम्मू कश्मीर में जब सेना के जवानों ने स्थानीय कपड़े पहनकर बनाई सड़क

जम्मू।। भारतीय सेना के जवानों ने जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान से लगती सीमा के पास सड़क का निर्माण किया है। सामरिक महत्व की यह सड़क कश्मीर के कुपवाडा ज़िले में एक छोटे से गांव तीतवाल में बनाई गई है। खास बात यह है कि भारत के जवानों ने स्थानीय लोगों जैसे कपड़े पहनकर इस काम को अंजाम दिया।

इस गांव से लगभग 100 मीटर से भी कम दूरी पर पाकिस्तान की सीमा शुरू हो जाती है। यहां पर भारतीय सेना की भी चौकियां है। अगर जवान यह काम वर्दी पहनकर करते तो पाकिस्तानी फौज एक्टिव होकर उनपर हमला कर सकती थी। इसलिए, सड़क निर्माण के दौरान जवानों ने स्थानीय परिधान फिरन पहनी हुई थी।

सड़क के जिस हिस्से का निर्माण किया गया है, वह लगभग 100 मीटर है। यह सड़क छोटी ज़रूर है लेकिन भारतीय सेना के लिए यह काफी अहम है। सड़क ना होने की वजह से सेना को अपनी रसद और सामग्री से भरे ट्रक यहां तक लाने में दिक्कत आती थी। मगर अब सेना के ट्रक आसानी से चौकियों के क़रीब तक सामान ला सकते हैं।

स्थानीय लोगों को भी इस सड़क के बनने से काफ़ी फायदा हुआ है। वो भी अपनी ज़रूरत का सामान अब गाड़ियों में ला सकते हैं। वह भी इस काम में हाथ बंटा रहे थे। इस सड़क को बनाने में सेना को एक हफ्ते का समय लगा। एक बड़े से पहाड़ को काटा गया और फिर रास्ता साफ़ करके सड़क बनाई गई।

कंगना रणौत ने मंडी से चुनाव लड़ने की बात पर कहा- ‘पहले मेरा स्तर देखें’

शिमला।। मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। संवेदनहीनता का स्तर यह है कि अभी उनका अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ है लेकिन कुछ लोग उनके निधन से खाली हुई सीट पर होने वाले उपचुनाव पर बात करने लगे हैं। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का सोशल मीडिया संभाल चुके चिगुरु प्रशांत ने एक ट्वीट कर दिया, जिस पर कंगना रणौत ने पलटवार किया है।

प्रशांत ने लिखा था, “मेरा ट्वीट संभालकर रखें, कंगना रणौत मंडी लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव लड़ेंगी। अब मंडी लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव की तैयारी करेगी कंगना रणौत।”

कंगना रणौत ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे 2019 के लोकसभा चुनाव में ग्वालियर से चुनाव लड़ने का विकल्प दिया गया था। हिमाचल की आबादी बमुश्किल 60-70 लाख है। न गरीबी है न अपराध। अगर मैं राजनीति में जाऊंगी तो ऐसा राज्य चाहूंगी जहां जटिलताएं हों, जिनपर मैं काम कर सकूं और उस फील्ड में भी क्वीन बन सकूं। तुम जैसी छोटी मछली बड़ी बातें नहीं समझ सकती।”

फिर कंगना ने अपने इस जवाब को मेंशन करते हुए एक और ट्वीट किया और लिखा, “हर बेवकूफ जो आज हिमाचल में एक राजनेता की मौत से पैदा हुई त्रासदी का फायदा उठाना चाहता है, वह इसे पढ़े और मेरे बारे में छोटी बातें करने से पहले मेरा स्तर देखें। जब आप बब्बर शेरनी राजपूताना कंगना रणौत के बारे में बात कर रहे हों तो याद रखें। छोटी बातें नहीं, सिर्फ बड़ी बातें।’

हालांकि, कंगना की टिप्पणी को भी अनावश्यक और अपमानजनक माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि एक तरह से उन्होंने यह दिखाया है कि उनका स्तर बड़ा है और हिमाचल से चुनाव लड़ना उनके कद के अनुरूप नहीं है।

राम स्वरूप शर्मा के खुदकुशी करने की आशंका, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

आम आदमी पार्टी का हिमाचल में भी हुआ पंजीकरण, नगर निगम चुनाव लड़ने की तैयारी

शिमला।। आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है। नगर निगम चुनाव में हिस्सा लेने के लिए आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग में आवेदन किया था। अब आयोग ने पार्टी को इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया की ओर से दिए गए चुनाव चिह्न ‘झाड़ू’ पर चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी है।

हिमाचल प्रदेश आम आदमी पार्टी ने अपने फेसबुक पेज पर निर्वाचन आयोग की ओर से मिले पत्र को शेयर किया है। साथ में लिखा है, “आम आदमी पार्टी का हुआ औपचारिक पंजीकरण। झाडू के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की मिली विधिवत इजाजत।” इसके आगे लिखा है- मां लक्ष्मी जी की कृपा अवश्य होगी।

May be an image of text that says "મिỏस राज्य निर्वाचन आयोग हिमाचल प्रदेश STATE ELECTION COMMISSION, HIMACHAL PRADESH आर्मसडेत्त,शिमता171002 Armsdale, 171002 2620152 Email:secysec-hp@nic.in dated the No.SEC(F)1-16/2020-2899 To 1"M, 2021 The Convener, Aam Aadmi Party, Dyerton Bizhub, Talland, By-Pass Road Khalini, Shimla, Himachal Pradesh Subject:- Sir, Regarding reservation Party Symbol. With reference to your letter No. nil dated 15th March, 2021, am directed to convey that your representation was considered Comsion Commission allowed you contest the elections Municipal Corporations Himachal Pradesh on party symbol Broom reserved by the Election Commission of India. Yours faithfully ac Secretary State Election Commission Himachal Pradesh"

अप्रैल माह में होने वाले नगर निगम चुनाव में आम आदमी 64 वॉर्डों में प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इस संबंध में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता कल्याण भंडारी ने पिछले दिनों पत्रकारों से कहा था ‘सोलन, मंडी, पालमपुर और धर्मशाला नगर निगम के मतदाताओं से संवाद स्थापित करने के लिए मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रियाओं से साबित हो गया है कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी का दबदबा देखने को मिलेगा।” भंडारी ने जानकारी दी थी कि आम आदमी पार्टी की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं।

राम स्वरूप शर्मा के खुदकुशी करने की आशंका, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

नई दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद राम स्वरूप शर्मा की मौत के मामले में नई जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि उन्होंने खुदकुशी की है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी है कि उसे सांसद के स्टाफ की ओर से सूचना मिली थी। सांसद के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और वह पंखे से बंधे फंदे पर लटके हुए पाए गए। ऐसे में, शुरुआती पड़ताल के आधार पर पुलिस खुदकुशी की भी आशंका जता रही है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नॉर्थ एवेन्यू को गोमती अपार्टमेंट्स पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

अंग्रेज़ी अखबार ट्रिब्यून के मुताबिक, राम स्वरूप शर्मा गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहे थे और पिछले छह महीनों से उनका इलाज चल रहा था। जिस वक्त यह घटना हुई, उनका सुरक्षा अधिकारी मंडी में था और पत्नी चारधाम यात्रा पर थीं।

मौत के असल कारण क्या थे, यह पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चल सकेगा। इस बीच, इस खबर के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आज होने वाली पार्ल्यामेंट्री पार्टी मीटिंग को रद्द कर दिया है।

बीजेपी नेता राम स्वरुप शर्मा का जन्म 10 जून 1958 को हुआ था। वह भारत के हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर से संबंध रखते थे।

बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मंडी सीट से उतारा था जिसमें उनकी जीत हुई थी। उन्होंने कांग्रेस की प्रतिभा सिंह के खिलाफ 39,796 वोटों के मार्जिन से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने उन्हीं पर विश्वास किया था और जीत हासिल की थी।

सांसद बनने से पहले वह मंडी जिला बीजेपी और बाद में हिमाचल प्रदेश राज्य भाजपा के आयोजन सचिव भी रहे थे थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। वह आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे।