मंडी तक सिमटकर रह गए जयराम, बढ़ी भाजपा की चिंता

इन हिमाचल डेस्क।। नगर निगम के चुनावों ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चार नगर निगमो में भाजपा सिर्फ मंडी नगर निगम पर क्लियर बहुमत ले पाई है, वहीं धर्मशाला में बहुमत से एक सीट पीछे रह गई है। धर्मशाला के साथ लगते पालमपुर शहर की बात करें तो यहां तो भाजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार के गृह नगर में भाजपा मात्र दो सीटें जीत पाई है। वहीं प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर सोलन में भाजपा भी भाजपा को कांग्रेस के आगे घुटने टेकने पड़े हैं।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने नगर निगमों के चुनाव पार्टी चिह्न पर करवाने का फैसला लिया था परंतु नतीजे पार्टी और मुख्यमंत्री के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। नए नगर निगम गठन के बावजूद मंडी के अलावा पालमपुर और सोलन जनता ने भाजपा को तवज्जो नही दी है। कुल मिलाकर सीएम जयराम ठाकुर मंडी तक सिमटकर रह गए हैं। कही न कही यह नतीजे मुख्यमंत्री और सरकार की लोकप्रियता का आईना भी है।

कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह अक्सर मंडी से सीएम की कुर्सी को लक्ष्मी की संज्ञा दे चुके हैं। वहीं विकास कार्यों के लिए बजट के आबंटन में भी बाकी प्रदेश के साथ भेदभाव किया जा रहा है। और मंडी में भी सिर्फ सिराज और धर्मपुर को प्राथमिकता देने के आरोप सरकार पर लग रहे हैं।

महेन्द्र सिंह तो हमेशा से खुद को और अपने परिवार को मजबूत करने में लगे है परंतु जयराम ठाकुर ने भी अपने ऊपर मंडी से बाहर न सोच पाने का ठप्पा लगवा लिया है, जो एक मुख्यमंत्री के लिए सुखद संदेश नहीं है। यही कारण रहे कि जोर शोर से प्रचार करके भी भाजपा मंडी से बाहर खास प्रदर्शन नही कर पाई।

धर्मशाला में भाजपा बेशक इस बात की खुशी मना रही है कि
उसकी कांग्रेस से अधिक सीटे हैं। परंतु जनमत को आंककर देखा जाए तो धर्मशाला की जनता ने भी भाजपा को नकार दिया है। सांसद किशन कपुर और विधायक नेहरिया के गृह वार्डो मे भाजपा उम्मीदवारों की हार हुई है। यहाँ सुधीर बनाम गैर सुधीर कांग्रेस की फूट ने भाजपा को थोड़ी राहत बेशक दी है परंतु भविष्य के लिए इसे अच्छा संदेश नही कहा जा सकता।

सोलन नगर निगम में भाजपा ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार होती लग रही है। पूर्वमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष नाहन से विधायक राजीव बिंदल के भरोसे भाजपा इस निगम को जीतने पर आश्वस्त थी। परन्तु अति उत्साह की मार ने बिंदल की संगठन क्षमता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पालमपुर में तो भाजपा महासचिव त्रिलोक कपूर के भरोसे बैठी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। बुटेल परिवार का डंका यहाँ खूब बजा है।
त्रिलोक कपूर के पालमपुर से भविष्य की राजनीति की पारी शुरू करने के सपने को भी यहाँ झटका लगा है।

मंडी में कॉल सिंह और सुखराम परिवार की तकरार से भाजपा को फायदा मिला है साथ ही सीएम जयराम की भावुक अपील जरूर कारगर हुई है। परंतु पूरे प्रदेश में कोई पॉजिटिव संदेश भाजपा अपने फेवर में नही दे पाई है।

जयराम के आने से उम्मीद जगी थी कि शान्ता कुमार, वीरभद्र और धूमल के राज में लोअर बनाम अपर के सीएम का जो राग लगा रहता था, वो खत्म होगा। परन्तु अभी लग रहा है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी सिर्फ मंडी तक सीमित होकर रह गए हैं। यह बात 2022 के चुनाव से पहले फतेहपुर और मंडी लोकसभा उप चुनाव के लिए भाजपा की चिंता की रेखाएं बढ़ाने के लिए काफी है। मृतप्राय कांग्रेस को निगम चुनावो ने जरूर संजीवनी दे दी है।

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