हमीरपुर में संदिग्ध हालत में दीवार से लटका मिला युवक का शव

एमबीएम न्यूज़, हमीरपुर।। जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर एक शव बरामद हुआ है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार शव संदिग्ध हालत में पाया गया है। शव जली हुई अवस्था में पाया गया है। उसके हाथ और पैर दीवार से बंधे हुए थे।

शव को तेजाब या पेट्रोल से जलाए जाने की आशंका जताई जा रही है। बहरहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। पोस्टमार्टम के लिए शव हमीरपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बीचो-बीच एक पशुशाला है जो बिल्कुल सुनसान जगह पर है। यह बिल्कुल वीरान पड़ी हुई है। यहां से गुजरते हुए एक युवक ने बदबू आने पर अंदर देखा तो उसके होश उड़ गए। अंदर उसने एक शव को जली हुई अवस्था में दीवार से लटका देखा। उसका गला और हाथ-पैर दीवार पर बंधे हुए थे। युवक ने प्रधान को इसकी सूचना दी। प्रधान ने हमीरपुर सिध्र थाना को इसकी जानकारी दी।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया है। शव की शिनाख्त की जा रही है। मामले की जांच जारी है। लेकिन बताया जा रहा है कि वारदात चंद रोज पहले की हो सकती है।

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इस बारे जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने कहा कि प्राथमिक दृष्टि के आधार पर हत्या का मामला लग रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। शव आधे से अधिक जला हुआ होने के कारण शिनाख्त में मुश्किल हो रही है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

यूपी की जगह गलती से हिमाचल के हमीरपुर पहुँच गया युवक

हमीरपुर।। यूपी का एक युवक अपने गांव जाने की जगह गलती से हिमाचल पहुंच गया। यह युवक यूपी के हमीरपुर का रहने वाला है। युवक दिल्ली बस स्टैंड से अपने गांव के लिए बस में सवार हुआ, लेकिन वीरवार सुबह जब आंख खुली तो वह हिमाचल के हमीरपुर पहुँच चुका था।

हमीरपुर बस अड्डे पर कंडक्टर ने युवक को बस से उतरने के लिए कहा। युवक बस से उतरा तो हैरान रह गया। उसने कहा कि यह यूपी का हमीरपुर नहीं है। युवक का पर्स भी कहीं गिर गया था। काफी देर तक युवक बस अड्डे पर ही बैठा रहा। यूपी वापस जाने के लिए स्थानीय लोगों से मदद मांगता रहा।

इसके बाद मामला एचआरटीसी हमीरपुर डिपो के उपमंडलीय प्रबंधक विवेक लखनपाल के ध्यान में लाया गया। उन्होंने बिना देर किए युवक को एचआरटीसी की दिल्ली जाने वाली बस में निशुल्क भेजने का प्रबंध कर दिया। इसके साथ ही उसके भोजन की व्यवस्था भी कर दी। डीडीएम विवेक लखनपाल के इस सेवाभाव की प्रदेशभर में प्रशंसा हो रही है।

युवक का नाम पुरुषोत्तम श्रीवास्तव है और उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के बांदा के गांव परमापुरवा का रहने वाला है। उसने बताया कि दो साल पहले उसकी बहन की शादी हुई है। जीजा पनीपत में एक फैक्टरी में काम करते हैं। सोमवार को वह अपनी बहन को जीजा के पास छोड़ने के लिए पानीपत आया था।

बुधवार को लौटते समय वह दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंचा। रात को साढ़े दस बजे कश्मीरी गेट पर रुकी बस के परिचालक ने हमीरपुर जाने के लिए आवाज दी। 680 रुपये किराया देने के बाद वह उस बस में सवार हो गया। लेकिन सुबह उसने देखा तो वह यूपी की जगह हिमाचल के हमीरपुर पहुंच गया था। उसने कहा कि वह पहली बार दिल्ली आया था। उसके पास जो पैसे थे वह भी खर्च हो गए थे।

एचआरटीसी हमीरपुर डिपो के उपमंडलीय प्रबंधक विवेक लखनपाल ने कहा कि हमने इंसानियत के नाते युवक की मदद की है और यह हमारा फर्ज है। मामला ध्यान में आते ही युवक को निगम की बस में दिल्ली तक निशुल्क भेजने की व्यवस्था कर दी गई है।

तकनीकी शिक्षा के छात्रों को प्रोमोट करने की मांग को लेकर एनएसयूआई ने किया प्रदर्शन

धर्मशाला।। तकनीकी शिक्षा के छात्रों ने प्रोमोट करने की मांग को लेकर तकनीकी शिक्षा बोर्ड से लेकर जिलाधीश कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के बैनर तले यह प्रदर्शन किया गया।

एनएसयूआई ने कहा कि इस आपदा के दौर में विद्यार्थियों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ऑनलाइन कक्षाओ से सम्बंधित, व्यवहारिक कक्षाओं का अभाव, दो परीक्षाओं मे असफल होने पर डीटेन आदि  समस्याएं विद्यार्थियों को पेश आई है।

विद्यार्थियों ने इन सभी समस्याओं को लेकर जिलाधीश और तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर प्रदेश महासचिव अमर कुमार, सचिव सौरव (जानी), सचिव मनिंदर कपूर, जिला महासचिव कार्तिक राणा, क्षेत्रीय केन्द्र हिमाचल प्रदेश विश्व विद्यालय के अध्य्क्ष ड़ीके भरमौरी, वीर सिंह व अन्य छात्र नेता उपस्थित रहे।

धर्मशाला में बाढ़ से जल आपूर्ति बाधित होने से पानी की भारी किल्लत

धर्मशाला।। हाल ही में धर्मशाला में हुई जल-प्रलय के बाद से धर्मशाला के कई इलाके जल संकट का सामना कर रहे हैं। 12 जुलाई को मांझी नदी में आई बाढ़ में 38 में से 23 जलापूर्ति योजनाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

धर्मशाला के राम नगर निवासियों का आरोप है कि उन्हें पिछले चार दिनों से पानी नहीं मिला है। हैंडपंप से पीने का पानी लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। निवासियों का कहना है कि यदि आपूर्ति योजनाओं को नुकसान होता है, तो अधिकारियों को उन्हें टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना चाहिए था। लेकिन, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

आईपीएच धर्मशाला के कार्यकारी अभियंता सरवन ठाकुर का कहना है कि राम नगर और शाम नगर क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है क्योंकि आपूर्ति योजना अचानक बाढ़ में बह गई थी। धर्मशाला की अन्य योजनाओं से पानी को राम नगर की ओर मोड़ा जा रहा है। राम नगर और शाम नगर की दैनिक पानी की आवश्यकता लगभग 12 लाख लीटर है। उम्मीद है, हम कल तक इन क्षेत्रों में लगभग 7 लाख से 8 लाख लीटर पानी उपलब्ध करा सकेंगे।

ठाकुर का कहना है कि धर्मशाला के अन्य क्षेत्रों को भी पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि 38 में से 23 योजनाएँ अचानक बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गई हैं। उनका कहना है कि धर्मशाला शहर में रोजाना करीब 68 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है। हालांकि फिलहाल हम 30 लाख लीटर पानी ही सप्लाई कर पा रहे हैं।

उनका कहना है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत के लिए लोगों को लगाया गया है, लेकिन शहर में नियमित जलापूर्ति बहाल होने में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा। अचानक आई बाढ़ से धर्मशाला में जलापूर्ति योजनाओं और सीवरेज को हुए कुल नुकसान का अनुमान लगभग 8 करोड़ रुपये है।

धर्मशाला शहर पानी की आपूर्ति के लिए प्राकृतिक धाराओं पर निर्भर है। अचानक आई बाढ़ में आईपीएच विभाग की आपूर्ति पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है।

सड़कों की खराब स्थिति पर हिमाचल प्रदेश को नोटिस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला जिला के रोहड़ू में गणसीधर-सुंगरी सड़क की खराब स्थिति को उजागर करने वाली एक याचिका पर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (पीडब्ल्यूडी) और उपायुक्त शिमला को नोटिस जारी किया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने रोहड़ू तहसील के भमनोली गांव के अर्पित शर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश पारित किया है। दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार इस सड़क का रखरखाव नहीं कर रही है। हाई कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को चार हफ़्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे जनहित याचिका माना है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके क्षेत्र के अधिकांश लोग बागवानी गतिविधियों में शामिल हैं। गणसीधर-सुंगरी सड़क बागवानों की जीवन रेखा है। यही एकमात्र सड़क है जो उनके क्षेत्र को उनकी उपज बेचने के लिए पास के बाजार से जोड़ती है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस सड़क की स्थिति कई वर्षों से बहुत दयनीय है। इसी सड़क पर लोगों की आजीविका, कृषि और पर्यटन गतिविधियां निर्भर हैं। आसपास की पंचायतों ने समय-समय पर इसके रखरखाव की मांग की है लेकिन उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की है कि संबंधित अधिकारियों को सड़क की ठीक से मरम्मत और रखरखाव करने का निर्देश दिया जाए।

‘देव-संसद’ में सरकार के दखल से देवी-देवताओं के गूर नाराज

कुल्लू।। ‘देव-संसद’ में सरकार के दखल पर देवी-देवताओं के गूरों ने नाराज़गी जताई है। ‘देव-संसद’ को जगती के नाम से जाना जाता है। कुल्लू जिले के नग्गर गांव में बुधवार को आयोजित ‘देव संसद’ के दौरान होने वाले अनुष्ठानों में बढ़ते सरकारी दखल पर देवी-देवताओं के गूरों ने चिंता व्यक्त की है।

जगती पट्ट परिसर में चार घंटे तक चली ‘जगती’ में 113 देवताओं के प्रतीकों और गूरों ने भाग लिया। देवताओं ने अपने गूर के माध्यम से दशहरा के दौरान एक ‘कहिका’ यानी प्रायश्चित समारोह आयोजित करने का फैसला सुनाया, ताकि क्रोधित देवताओं को शांत किया जा सके, जिन्हें पिछले साल कोविड प्रतिबंधों के बीच उत्सव में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। देवताओं ने रीति-रिवाजों और सदियों पुरानी प्रथाओं पर प्रतिबंध पर नाराजगी व्यक्त की।

देव समाज के सदस्यों ने कहा कि जहां राजनीतिक कार्यक्रमों में भारी भीड़ देखी गई, वहीं भक्तों के लिए मंदिर बंद कर दिए गए। देवता नाराज हैं क्योंकि हाल ही में सरकार की ओर से बड़ी चूक हुई है।

‘जगती’ के दौरान, यह निर्णय लिया गया कि 15 अक्तूबर से शुरू होने वाले दशहरे के दौरान ‘कहिका’ का आयोजन किया जाए। रोगों से बचाव के साथ-साथ देवताओं से माफी मांगने के लिए इस आयोजन का निर्णय लिया गया।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान क्रोधित देवताओं को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान किए जाएंगे। ‘छिद्र’ के नाम से जाना जाने वाला एक सफाई समारोह भी आयोजित किया जाएगा।

देवताओं के गूरों ने कहा कि सभी देवी-देवताओं को दशहरा में आमंत्रित किया जाना चाहिए। इस मौके पर भगवान रघुनाथ के ‘छरिबरदार’ यानी मुख्य कार्यवाहक महेश्वर सिंह और उनके पुत्र कारदार दानवेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

शिमला का रास्ता कांगड़ा से होकर ही गुज़रता है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: बाली

कांगड़ा।। कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री जीएस बाली ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। वीरवार को जीएस बाली ने प्रेसवार्ता कर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कई आरोप भी लगाए।

जब एक पत्रकार ने जीएस बाली से पूछा कि क्या अगला मुख्यमंत्री कांगड़ा से हो सकता है। तो इसपर बाली ने कहा कि कांगड़ा जिला का मुख्यमंत्री की सीट पर पूरा अधिकार है। किसी भी सूरत में कांगड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, न ही किया जाना चाहिए। कांगड़ा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, जो भी सत्तासीन होता है उसकी गाड़ी कांगड़ा से होकर ही निकलती है। जिसकी गाड़ी कांगड़ा में रुक जाती है वो शिमला तक नहीं पहुँच पाता।

बाली ने यह भी कहा कि शांता कुमार के बाद मुख्यमंत्री की सीट कांगड़ा जिला को मिले 50 साल हो चुके है। अब कांगड़ा को भी नेतृत्व का मौका मिलना चाहिए। बाली की इस बात से सूबे की सियासत गरमा गई है। क्योंकि वीरभद्र सिंह की मौत के बाद कांग्रेस पार्टी को मुख्यमंत्री के लिए नए चेहरे की तलाश हैं। ऐसे में जीएस बाली का यह बयान सुर्खियों में आ गया है।

हालांकि जब जीएस बाली से पूछा गया कि वीरभद्र सिंह के बाद अब हिमाचल में कांग्रेस का नेता कौन होगा, तो बाली ने कहा कि नेता वही होगा जिसे पार्टी और जनता पसंद करेगी। अपना-अपना दावा करने से कोई नेता नहीं बन जाता।

कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर बाली ने कहा कि ऐसी कोई खास गुटबाजी कांग्रेस में नहीं है। और अगर गुटबाजी होगी भी तो वो एक डिनर में खत्म हो जाएगी।

हिमाचल में युवाओं को इस हफ्ते भी नसीब नहीं होगी वैक्सीन, करना होगा इंतजार

शिमला।। हिमाचल में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए इंतज़ार का समय बढ़ता ही जा रहा है। युवाओं को वैक्सीन लगवाने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। इस हफ्ते भी प्रदेश के युवाओं को कोरोना वैक्सीन नसीब नहीं होगी।

केंद्र से वैक्सीन की सप्लाई कम आने के कारण यह फैसला लिया गया है। 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को 22 जुलाई तक वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने पहले इस वर्ग को 14 जुलाई तक वैक्सीन न लगाने का फैसला लिया था। लेकिन अब इसे 22 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 18 से 44 आयु वर्ग में 31 लाख लोग हैं। इनमें से करीब 8 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। बाकी अन्य लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अगर 18 से 44 आयुवर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाई जाती है तो वैक्सीन का स्टॉक दो दिन में ही खत्म हो जाएगा।

एनएचएम के निदेशक हेमराज बैरवा ने कहा कि 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को 22 जुलाई के बाद ही वैक्सीन लगेगी। सरकार 45 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगाने के बाद ही इस वर्ग को वैक्सीन लगाएगी।

बता दें कि 29 जून के बाद से इस आयु वर्ग को कोरोना वैक्सीन नहीं लगाई गई है। पहले 30 जून को आयोजित टीकाकरण सत्र रद्द किए गए थे। उसके बाद नौ जुलाई तक इस वर्ग को वैक्सीन न लगाने का फैसला लिया गया था। उसके बाद इस फैसले को 14 जुलाई तक बढ़ाया गया और अब इसे बढ़ाकर 22 जुलाई तक कर दिया गया है।

बोह हादसा: भीमसेन ने बचाई थी 22 जिंदगियां, खुद परिवार समेत मलबे में बह गए

कांगड़ा।। शाहपुर की बोह घाटी के रुमेहड़ गांव का भीमसेन 22 जिंदगियां बचाकर खुद मौत के मुंह में चला गया। सोमवार को भारी बारिश से हुई तबाही में भीमसेन का घर भी मलबे के साथ का बह गया। उस वक्त भीमसेन परिवार सहित घर में मौजूद था। अफ़सोस, 22 लोगों की जिंदगियां बचाने वाला भीमसेन परिवार सहित खुद को इस प्राकृतिक आपदा से नहीं बचा सका।

जो लोग घरों के अंदर थे, बह गए। जो बाहर थे वो घटना के प्रत्यक्षदर्शी बने। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया किसोमवार रात से भारी बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से पहाड़ के नीचे बसे अमर सिंह के घर की ओर छोटा नाला अवरुद्ध होने की वजह से थोड़ा-थोड़ा पानी आ रहा था।

हम करीब 22 लोग सुबह से ही पानी की निकासी के लिए जुटे हुए थे। सुबह करीब साढ़े 10 बजे करीब 70 मीटर दूर पहाड़ी पर अपने घर से भीमसेन ने हमें देखकर जोर-जोर से आवाजें लगाईं। उसने कहा कि पहाड़ से मलबा आ रहा है। यहां से भाग जाओ। भीमसेन की आवाज सुनकर सभी सड़क की तरफ भागे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि केवल 10 सेकंड में ही सब तबाह हो गया। पहाड़ से आया मलबा मकानों को बहाकर नीचे ले गया। हम सभी लोग वहां से भाग कर सड़क पर आ गए। यह भयानक मंजर देख हमारी आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया। मलबा बहुत ज़्यादा था इसलिए हम भी एक घर के नीचे छिप गए। लेकिन जब यह घर भी बहने लगा तो हम सभी भागकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचे।

जिन लोगों ने यह भयानक मंज़र देखा उनके लिए इसे बयान करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से आज लोग जिंदा है। अगर भीमसेन हमें मलबे के आने की चेतावनी नहीं देता तो आज हम जिंदा नहीं होते।

उन्होंने कहा कि भीमसेन उन्हें चेतावनी देने के बाद अपने परिवार को बाहर निकालने के लिए घर के अंदर भागा था। लेकिन कुछ पलों में ही उनका मकान मलबे के साथ बह गया।

एचपीएमसी का 20 लाख का सेब जूस गायब, अधिकारियों से रिपोर्ट तलब

शिमला।। एचपीएमसी यानी बागवानी उत्पाद विपणन और प्रसंस्करण निगम के उच्च अधिकारी इन दिनों एक पहेली को सुलझाने में लगे हैं। जैसे ही उच्च अधिकारी पहेली सुलझा लेते हैं, वैसे ही निगम के कुछ अफसरों पर गाज गिरना तय है।

पहेली यह कि एचपीएमसी का 20 लाख का सेब जूस कौन गटक गया। जी हाँ, एचपीएमसी के हिमाचल प्रदेश के परवाणू संयंत्र से 18.50 मीट्रिक टन सेब जूस गायब हो गया है। गोदाम में रखे-रखे यह जूस कहां चला गया, फिलहाल यह एक पहेली ही बना हुआ है। और जैसे ही उच्च अधिकारी इस पहेली को सुलझा लेते है तो एक बड़ा घपला सामने आने की आशंका जताई जा रही है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक ने एक हफ्ते में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की हैै। इस रिपोर्ट के आने के बाद संबंधित अफसरों पर गाज गिरना तय है।

अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक, एचपीएमसी के परवाणू संयंत्र में लगभग 1210 मीट्रिक टन सेब का कंसंट्रेट जूस (गाढ़ा जूस) रखा गया था। जब जांच की गई तो कुल 18.50 मीट्रिक टन जूस कम पाया गया। मामला एचपीएमसी प्रबंधन के संज्ञान में आते ही उच्च अधिकारी हरकत में आए।

एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल का कहना है कि जूस कहां गया, इस पर जांच शुरू कर दी गई है। परवाणू संयंत्र में बीस लाख कीमत का 18.50 मीट्रिक टन जूस कम पाया गया है। अधिकारियों से हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है। कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।