हिमाचल: बारिश से अब तक 152 की मौत, 59 घर तबाह

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में मॉनसून सीजन जारी है। इस मॉनसून सीजन में 13 जून से अब तक बारिश से संबंधित घटनाओं में 152 लोगों की जान चली गई है। इसके अलावा, इस अवधि में 59 कच्चे और पक्के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार, पीडब्ल्यूडी को 13,977.89 लाख और आईपीएच विभाग को 7,539.75 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

19 और 20 जुलाई को स्थानीय मौसम कार्यालय ने जनजातीय जिलों लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर आठ से दस जिलों के निचले और मध्य पहाड़ियों में भारी बारिश, बिजली और गरज के साथ ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं 21 व 22 जुलाई को दस जिलों में भारी बारिश, बिजली व गरज के साथ येलो अलर्ट जारी किया है।

भूस्खलन की चपेट में आने से रावी में गिरी कार, तीन लोग थे सवार

चम्बा।। चम्बा जिला में भूस्खलन के कारण एक बड़ा हादसा पेश आया है। भूस्खलन की चपेट में आने से यहाँ एक कार रावी नदी में गिर गयी। चम्बा-भरमौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर यह हादसा पेश आया है। भूस्खलन के कारण चम्बा-भरमौर उच्च मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध होने से सड़क पर दोनों तरह वाहनों की लंबी कतारें लग गयी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कार नंबर एचपी 01C 1323 भूस्खलन की चपेट में आने से रावी नदी में गिर गयी। बताया जा रहा है कि कार में तीन लोग सवार थे। पुलिस बल और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर कार सवारों की तलाश में जुटी है। अभी तक कार का कोई भी सुराग पता नहीं चल पाया है।

कार में सवार लोगों की पहचान 57 वर्षीय कल्यानो पुत्र फरंगु निवासी गांव चुकरासा डाक घर व सब तहसील धरवाला ज़िला चंबा, 55 वर्षीय सुभद्रा देवी पत्‍नी कल्‍यानो और 28 वर्षीय तेज नाथ पुत्र कल्यानो के रूप में हुई है। तेज नाथ कार चला रहा था।

कुल्लू की पार्वती घाटी में प्रवेश करने के लिए जल्द ही अदा करना होगा शुल्क

कुल्लू।। कुल्लू की पार्वती घाटी में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों पर विकास शुल्क लिया जाएगा। यह बात विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एसएडीए) की बैठक में डीसी कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कही।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसी कुल्लू ने कहा कि पर्यटकों की सुविधा के लिए कसोल और मणिकरण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बनाने और विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए विकास शुल्क लगाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के वाहनों से शुल्क नहीं लिया जाएगा।

डीसी ने कहा कि खूबसूरत पार्वती घाटी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों कसोल और मणिकरण में भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए इन स्थानों पर बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण की रक्षा के प्रयास भी किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि शुल्क की राशि जल्द ही तय की जाएगी। शुल्क वसूली के लिए बैरियर लगाने के लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से नाजुक क्षेत्रों पर वाहनों और पर्यटकों के बढ़ते दबाव से प्रकृति को होने वाले नुकसान की समस्या से निपटने के लिए रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया गया है।

डीसी ने कहा कि नदियों और नालों के पास गंदगी फैलाते हैं, जिससे पर्यावरण को खतरा है। कूड़ा-कर्कट इकट्ठा होने से क्षेत्र की सुंदरता खराब होती जा रही थी। वहीं इससे स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया था। कसोल और मणिकरण में ठोस व तरल कचरे के उचित निपटान की आवश्यकता थी जिसके लिए धन जुटाना आवश्यक था।

उन्होंने कहा कि पार्वती घाटी के मुख्य क्षेत्रों में कचरे के निपटान के लिए प्लांट स्थापित किए जाएंगे। साथ ही पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। शुल्क से इकट्ठा होने वाले धन का उपयोग कसोल और मणिकरण के विकास के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विकास शुल्क के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। एसएडीए के पास किसी विशेष क्षेत्र के विकास के लिए विकास शुल्क लगाने का अधिकार है।

‘वफ़ादारियां’ जिंदा रहीं तो वीरभद्र परिवार ही रहेगा कांग्रेस का पावर सेंटर

सुरेश चम्बयाल।। वीरभद्र ही कांग्रेस हैं, यह नारा भी हिमाचल में चलता रहा। और चले भी क्यों न? प्रदेश की राजनीति में 1983 में वीरभद्र सिंह आए तो 2017 के चुनाव तक वही कांग्रेस के सिरमौर रहे।

आलाकमान से कितनी भी टसल रही पर अंत में हुआ वही जो वीरभद्र सिंह ने चाहा और आलाकमान को भी हर हाल में उनके आगे नतमस्तक होना पड़ा।

वीरभद्र सिंह को किनसे मिलती रही चुनौतियां

रामलाल ठाकुर, पंडित सुखराम, विद्या स्टोक्स जैसे नेता समय-समय पर वीरभद्र सिंह को चुनौती देने की कोशिश करते रहे। परंतु पार्टी के अंदर शह मात की इस गेम में वीरभद्र हमेशा उन पर भारी पड़े। 1993 के निर्णायक चुनाव में तो विद्या स्टोक्स अपनी सीट तक से हार गईं। वहीं कहते है कि दिल्ली तक पंडित सुखराम अपने समर्थक विधायकों संग दौड़े, तो वीरभद्र सिंह ने वफ़ादारियों के दम पर शिमला से ही अपने रसूख को जिंदा रखा और सत्ता पाई।

हालांकि 1998 में सुखराम अलग पार्टी बनाकर वीरभद्र सिंह को सत्ता से दूर रखने में कामयाब हुए। परंतु सत्ता के संघर्ष में एक बार फिर 2003 से 2007 के टेन्योर में वीरभद्र सिंह विद्या स्टोक्स पर भारी पड़े।

2012 में आलाकमान जब एक बार फिर अड़ियल मूड में दिखा और वीरभद्र के ही कभी सिफलसार रहे कौल सिंह ठाकुर को अध्यक्ष के रूप में उनके सामने लाकर खड़ा कर दिया। तो वीरभद्र सिंह कमान लेने के लिए बगावती तेवर दिखाने से भी नहीं चूके, हालांकि वो केंद्र में मंत्री थे।

कहा जाता है एक ऐसी भी रात आई, जब वीरभद्र सिंह ने आलाकमान को सख्त संदेश दिया कि सुबह तक उनके कहे अनुसार होता है तो ठीक है अन्यथा शरद पवार की नेशनल कांग्रेस पार्टी तले वो अपने समर्थकों के साथ चुनाव लड़ेंगे और कांग्रेस से इतर फ्रंट तैयार कर देंगे। आलाकमान के पास तोड नहीं था और चुनाव से महीना पहले पुनः वीरभद्र सिंह को कमांड मिली और सत्ता भी।

सिटिंग सीएम रहते 2017 का चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ा गया। जिसमें कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज हारे। पर वीरभद्र सिंह बेटे के साथ हिमाचल विधानसभा का हिस्सा बने।

1983-2017 यानी 35 वर्ष तक हिमाचल कांग्रेस की धुरी उनके आसपास घूमती रही। यह कैसे संभव हो पाया। यह जानना-समझना जरूरी है। यह संभव हो पाया वफ़ादारियों की वजह से।

वीरभद्र की वफादार नेताओं की फौज

पूरे हिमाचल में वीरभद्र सिंह के पास ऐसे वफादार नेताओं की फ़ौज रही कि जब-जब पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन की नौबत आई, यह फौज अपने नेता के साथ खड़ी रही। इस कारण हर चुनौती, हर विरोधी को उनके आगे झुकना पड़ा। यह फौज यह वफ़ादारियाँ वीरभद्र सिंह ने विरासत में नहीं पाई। इसके लिए ताली का एक हाथ उनका भी था। टिकट से लेकर हार जाने की स्थिति में राजनीतिक रूप से इस फौज।ल के सिपाहियों को जिंदा रखने के लिए बोर्ड निगमों पर बिठाना वीरभद्र सिंह जो कर सकते थे वो किया। यही वो नीति थी जिससे यह नेता हमेशा वीरभद्र सिंह के वफादार रहे।

रोहड़ू, रामपुर, किन्नौर इन सीटों पर बीते वर्षो में जो भी नेता सत्ता में है वीरभद्र समर्थक हैं। रोहड़ू उपचुनाव में धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह को टिकट न मिलने की स्थिति में दूसरा कांग्रेस उम्मीदवार हार जाता है और भाजपा वहां जीतती है। यह संभव होता है तो सिर्फ वीरभद्र के एक इशारे से।

रामपुर से सिंघी राम को कब वो दूध में मक्खी की तरह बाहर कर देते है यह उनका वर्चस्व है। शिमला से हरीश जनारथा पार्टी के घोषित उम्मीदवार से ज्यादा वोट लेते हैं , यह किस कारण संभव था कहने की जरूरत नहीं है। लगातार हारों के बाद भी रंगीला राम राव, गंगू राम मुसाफिर, रामलाल ठाकुर को बोर्ड निगमों में एडजस्ट किया जाता है। ऊना से पत्रकार मुकेश अग्निहोत्री आज नेता प्रतिपक्ष हैं। कभी भाजपाई रहे राजेन्द्र राणा अपने गुरु सीएम उम्मीदवार धूमल को कांग्रेस टिकट से हरा देते हैं। इसकी नींव कौन, कैसे रखता है लिखने की जरूरत नहीं है।

कौन-कौन है वीरभद्र की वफादारी वाली लिस्ट में शामिल

किन्नौर से भरमौर तक नजर दौड़ाई जाए। जगत सिंह नेगी, मोहन लाल ब्राक्टा, नंद लाल, सुभाष मंगलेट, हरदीप बाबा, हर्षवर्धन चौहान, विनय कुमार, गंगू राम मुसाफिर , बम्बर ठाकुर, बीरू राम किशोर, मनसा राम, प्रकाश चौधरी, यदुपति ठाकुर, रंगीला राम राव, चेतराम ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर, चन्द्रशेखर, राजेन्द्र राणा, कुलदीप पठानिया, के के कौशल, प्रोमिला देवी, इंद्रदत्त लखनपाल, संजय रत्न, पवन काजल, यादवेंद्र गोमा, जगजीवन पाल  सिपहिया, केवल सिंह पठानिया, सुजान सिंह पठानिया परिवार, चन्द्र कुमार परिवार, कुलदीप पठानिया भटियात, ठाकुर सिंह भरमौरी। यह लिस्ट और भी लंबी है। हो सकता है इनमें से कुछ नाम राजनीति में आज सक्रिय हो कल न भी हों। और हो सकता है कुछ नाम छूट भी गए हों।

हालांकि इससे इतर ऐसे भी नेता है जो वीरभद्र के साथ अपनी आस्थाएं जोड़ते हैं या उनकी होंगी भी। फिर भी उपरोक्त लिस्ट में उन्हें जगह नहीं दी गई। क्योंकि आज वीरभद्र सिंह की विरासत पर उनकी खुद की नज़रें भी है और वो टकराव से नहीं प्यार से ही उसे पाने का सपना देख रहे हैं। चाहे वो कांगड़ा से सुधीर शर्मा हो, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजरें गड़ाए मुकेश अग्निहोत्री हो या चंबा से आशा कुमारी हों। इनकी अपनी आकांक्षाएं हो सकती है, वीरभद्र से करीबियां बेशक हैं।

पर अगर प्रतिभा सिंह अर्की सीट से उपचुनाव जीतकर आती है तो इनका क्या रुख होगा यह समय के गर्भ में है। वफ़ादारियाँ जिंदा रहती है, तो ऐसे कैसे मान लिया जाए कि आफ्टर वीरभद्र कांग्रेस का पावर सेंटर खिसक सकता है या खिसक गया है।

मुख्यमंत्री की हसरते पाले वीरभद्र सिंह के कथित समर्थकों को बाहर भी रखा जाए तब भी ऐसे नेताओं की लंबी लिस्ट है जो अगर प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में लामबंद रहे तो हिमाचल कांग्रेस का पावर सेंटर हौली लॉज ही रहता हुआ दिख रहा है।

कौन-कौन रख रहा है सीएम पद की चाहत

कांग्रेस में और कौन नेता है जिसके पास किन्नौर से भरमौर तक ऐसी फौज है। अग्निहोत्री और आशा, इस फौज की वफादारी का उनके प्रति सहज हस्तांतरण में अपने भविष्य को देख रहे हैं। सुधीर शर्मा सीएम पद की चाहत बेशक रखते होंगे पर उनकी फिलहाल प्राथमिकता कुछ और दिखती है।

वहीं रामलाल ठाकुर, कौल सिंह सिनियरटी की आस और आलाकमान के भरोसे इस कुर्सी के तबलगार हैं। जीएस बाली ने कांगड़ा फैक्टर और चंद नेताओं के संभावित समर्थन के आधार पर हुंकार भरी है। सुक्खू शांति से सब देख रहे हैं। इस विषय पर अलग से चर्चा बनती है और होगी भी। परन्तु फिलहाल इस विषय को इन्हीं कयासों के तले विराम दिया जाता है कि प्रतिभा सिंह अर्की से चुनाव लड़कर जीत कर आती है। तो पार्टी के भीतर बेगानों की तरह अपनों की नींदे भी हराम होंगी या नहीं। पावर सेंटर की क्या स्थिति रहेगी।

क्या विक्रमादित्य के साथ भी रहेंगी यही वफ़ादारियाँ

वफ़ादारियाँ जिंदा रहीं तो क्या होगा ? यही वफ़ादारियाँ क्या प्रतिभा सिंह के चुनाव में न आने से कम आयु वाले विक्रमादित्य के साथ रहेंगी? इसको फिलहाल यह लेखक न कहता है क्योंकि उसमें अहम और अनुभव का टकराव हो सकता है। इसलिए उपरोक्त स्थिति को प्रतिभा सिंह के परिपेक्ष में देखा गया है। वो दो बार सांसद रह चुकी हैं।

सबसे दिलचस्प यह देखना होगा कि जो नेता वीरभद्र सिंह के गुणगान तले उनकी विरासत को अपने हक में करने के सपने लेकर सत्ता की ओर नजरे गड़ाएं हैं, प्रतिभा सिंह या वीरभद्र परिवार खुद दिवगंत नेता के स्टाइल में अपने लिए समर्थन मांगता है तो उन नेताओं का क्या फैसला होगा?

(नोट: ये लेखक के निज़ी विचार हैं)

बाली के बयान पर सत्ती की प्रतिक्रिया, मुख्यमंत्री कहीं से भी हो सकता है

शिमला।। पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता जीएस बाली के बयान के बाद सूबे की सियासत गरमा गयी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने बाली के बयान पर प्रतिक्रिया दी है।

दो दिन पहले बाली ने बयान दिया था कि अगला मुख्यमंत्री कांगड़ा जिला से होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कांगड़ा जिला का मुख्यमंत्री सीट पर पूरा अधिकार है। कोई भी दल इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। 50 सालों से कांगड़ा को मुख्यमंत्री की सीट नहीं मिली है, इसलिए अब कांगड़ा को मौका मिलना चाहिए।

बाली के इस बयान पर सत्ती ने पलटवार किया है। सत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री कहीं से भी हो सकते हैं। क्षेत्र के हिसाब से बात नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री का पद एक प्रतिष्ठित पद है, इसे क्षेत्रवाद से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल में दोबारा जयराम ठाकुर ही मुख्यमंत्री बनेंगे। लोकसभा से लेकर पंचायतों तक के चुनाव में भाजपा जीतकर आई है। उपचुनाव भी भाजपा ही जीतेगी।

सत्ती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बंटी हुई है। उनसे प्रदेश की जनता को कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 10 से 15 उम्मीदवार मुख्यमंत्री के दावेदार है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री बनने की हौड़ मची है, जो कभी नहीं होने वाला है।

हिमाचल में बढ़ रही पर्यटकों की संख्या, पुलिस पूरी तरह मुस्तैद – सीएम

नई दिल्ली।। बीते कुछ समय से हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों आना-जाना काफी ज्यादा बढ़ गया है। कई जगहों पर बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों द्वारा कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाने के मामले सामने आए हैं। तो कहीं पर्यटकों द्वारा स्थानीय लोगों के साथ गुंडागर्दी करने के मामले भी देखे गए हैं।

इस सब के बीच प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने बाहरी राज्य के पर्यटकों को सख्त चेतावनी दी है।

सीएम इन दिनों दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर है। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम ने कहा कि शिमला, मनाली, धर्मशाला में पयर्टकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सभी जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी किए गए हैं कि पुलिस जवानों को पूरी तरह मुस्तैद रखा जाए। वहीं ट्रैफिक को लगातार मॉनीटर किया जाए।

सीएम ने कहा कि बरसात के मौसम में प्रदेश सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। पर्यटकों को नदी नालों के करीब न जाने की हिदायत दी गई है।

सीएम जयराम ठाकुर अपने दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। अनुमान है कि वह प्रधानमंत्री से मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के अलावा प्रस्तावित उपचुनाव पर चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ लंबित प्रोजेक्टों के संबंध में वह अन्य मंत्रियों से भी मुलाकात कर वित्तीय सहयोग मुहैया कराने की मांग कर सकते हैं।

मानव भारती यूनिवर्सिटी की डिग्रियां सत्यापित नहीं होने से रुकीं छात्रवृत्तियां

सोलन।। सोलन जिला की मानव भारती यूनिवर्सिटी के सैंकड़ों विद्यार्थियों की छात्रवृत्तियां रुक गई हैं। फर्जी डिग्री मामले में फंसी मानव भारती यूनिवर्सिटी के सैंकड़ों विद्यार्थियों की डिग्रियां सत्यापित नहीं हो पाई है। जिस कारण यूनिवर्सिटी के पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

यूनिवर्सिटी के पात्र विद्यार्थी केंद्र और राज्य सरकार की अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने प्रदेश सरकार को सत्यापन प्रक्रिया को जल्द शुरू करवाने का पत्र भेजा है।

अमर उजाला की खबर के अनुसार, मानव भारती यूनिवर्सिटी का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस वजह से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। डिग्रियों सहित यूनिवर्सिटी का अधिकांश रिकॉर्ड जब्त है। जिस कारण सत्यापन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। बीते दिनों यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रास्ता तलाशने को आयोग की तीन सदस्यीय टीम यूनिवर्सिटी में गई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट आयोग में सौंप दी है।

आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने रिपोर्ट के आधार पर सरकार को पत्र लिखा है। जब्त किए गए रिकॉर्ड को जारी करने के लिए सरकार से हाईकोर्ट से गुहार लगाने की सिफारिश की है। वहीं पुलिस एसआईटी के माध्यम से रिकॉर्ड मांगा गया है। डिग्रियों के सत्यापन के लिए भी कोर्ट से मंजूरी मांगने को कहा गया है।

आयोग ने मांग की है कि कानून की पढ़ाई कर चुके विद्यार्थियों की डिग्रियों का सत्यापन सबसे पहले किया जाए। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि डिग्रियों का सत्यापन होने के बाद ही इन विद्यार्थियों का बार काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकरण हो सकेगा। इसके साथ ही इन विद्यार्थियों के हाजिरी प्रमाणपत्र भी देने की मांग भी की गई है।

नासा: 2030 के दशक में धरती पर आएगी भीषण बाढ़, चांद का डगमगाना होगा कारण

चांद की कक्षा में आने वाले प्राकृतिक परिवर्तन और जलवायु बदलाव के कारण बढ़ते समुद्र के स्तर के साथ आने वाले वर्षों में पृथ्वी पर रिकॉर्ड बाढ़ आ सकती है। यह हाल ही में नासा और हवाई यूनिवर्सिटी में किए गए अध्ययन में सामने आया है।

नासा ने संभावना जताई है कि निकट भविष्‍य में चांद अपनी ही कक्षा पर डगमगा सकता है। 2030 के दशक में भीषण बाढ़ आने की बात भी अध्ययन में सामने आयी है। अगले दस वर्षों तक इस विनाशकारी बाढ़ का सिलसिला जारी रहने का भी अनुमान है। अध्ययन में अमेरिका पर पड़ने वाले प्रभाव को केंद्रित किया गया है।

नेशनल ओशियैनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़े कहते हैं कि 2019 में अमेरिका में हाई टाइड से 600 बाढ़ आई थी। वहीं नेचर क्लाइमेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2030 के दशक में यह संख्या कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

नासा के अध्ययन में कहा गया है कि चांद के अपनी कक्षा से डगमगाने से धरती पर बाढ़ की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। एक दो बार नहीं बल्कि कई बार बाढ़ आएगी। उन समूहों में बाढ़ आने का अनुमान जताया गया है जो एक महीने या उससे अधिक समय तक रह सकती है। बार-बार आने वाली बाढ़ से समुद्र तट और निचले इलाकों के पास रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।

हवाई यूनिवर्सिटी के एसिस्टेंट प्रोफेसर फिल थॉम्पसन ने कहा कि जब जलवायु परिवर्तन बढ़ जाएगा तो इसके साथ-साथ धरती पर प्राकृतिक संकट भी बढ़ेंगे। थॉम्पसन के अनुसार अगर महीने में 10 या 15 बार बाढ़ आती है तो कोई व्यवसाय पानी के नीचे काम नहीं कर सकता है। इससे लोगों की नौकरी चली जाएगी। क्योंकि बाढ़ में वह काम पर नहीं जा सकेंगे।

नासा के अनुसार चांद का डगमगाना कोई नई या खतरनाक चीज नहीं है। 1728 में पहली बार चांद के डगमगाने के बारे में रिपोर्ट की गई थी। यह 18.6 साल के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है। चक्र के पहले भाग के दौरान पृथ्वी के नियमित ज्वार को दबाता है और आधे समय में चांद लहरों को तेज कर देता है। नासा आया कहना है कि चांद वर्तमान में अपने चक्र के आधे हिस्से में है, जिससे पहले से ही कई तटों पर बाढ़ बढ़ रही है।

नासा के मुताबिक यह जलवायु परिवर्तन के ही कारण है। 2030 तक दुनियाभर में समुद्र का जलस्तर काफी बढ़ चुका होगा। चांद के डगमगाने के कारण बाढ़ तीव्रता भी बढ़ जाएगी। नासा के एडमिनिस्‍ट्रेटर बिल नेलसन के मुताबिक यह अध्ययन तटीय क्षेत्रों को अधिक बाढ़ वाले भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए महत्वपूर्ण है।

कार्यकर्ताओं को ठेंगा दिखाकर उपचुनाव में वंशवाद पर चलतीं बीजेपी-कांग्रेस

सुरेश चम्बयाल।। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 2020-21 वर्ष बहुत दुखद रहा। कद्दावर नेता वीरभद्र सिंह समेत दो विधायको फतेहपुर से सूजन सिंह पठानिया और जुब्बल कोटखाई से नरेंद्र बरागटा के निधन के साथ, मंडी से सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन से खाली हुई सीटों पर अब उप चुनाव होना है।

चूंकि, राज्य सरकार का यह चौथा वर्ष चल रहा है, ऐसे में चार सीटों का चुनाव एक तरह से आगामी विधानसभा का सेमी फाइनल माना जा रहा है। दोनों दल भाजपा-कांग्रेस अपनी पूरी ताकत इस सेमीफाइनल को अपने पक्ष में करने के लिए कर रहे हैं।

बेशक दोनों दल कैडर और कार्यकर्ताओं फौज की हुंकार भरते रहे है। परंतु उपचुनाव में खासकर विधानसभा में  दिवगंत नेताओं के परिवार से बाहर किसी आम कार्यकर्ता को आगे करने हिम्मत दिखाते हुए नहीं दिख रहे हैं।

फतेहपुर की बात की जाए तो स्वर्गीय पठानिया के बेटे भवानी पठानिया पर ही कांग्रेस दांव खेलती नजर आ रही है। हालांकि यही भवानी कभी परिवारवाद की राजनीति पर खुले आम कटाक्ष करते रहे हैं। मीडिया में ऐसी न्यूज कतरन भी शेयर की जा रही है, जिनमें भवानी पठानिया ने परिवारवाद की राजनीति का मुखर विरोध कभी किया था।

भवानी का हालांकि राजनीति से कभी कोई वास्ता नहीं रहा है। अच्छे पैकेज पर निजी बैंकिंग संस्थान में भवानी उच्च पद पर हैं। परंतु समय की करवट और पार्टी का दृष्टिकोण ऐसा है कि अपनी ही कही बात के विरुद्ध अब उन्हें चुनाव में उतरना पड़ सकता है।

दूसरी तरफ अक्सर कांग्रेस को परिवारवाद पर निशाने पर लेनी वाली भाजपा जुब्बल कोटखाई में स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा पर दांव खेलेगी। संभवतः यही फिलहाल नजर आ रहा है। हालांकि भवानी की तरह चेतन राजनीति से दूर नहीं है बल्कि पार्टी कैडर में सोशल मीडिया सेल का चार्ज देख रहे हैं।

अकस्मात रूप से उत्पन परिस्थितियों में चेतन ने जुबल कोटखाई में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। अन्यथा बीते वर्षों पर गौर किया जाए तो चेतन पिता की सीट जुब्बल कोटखाई की जगह शिमला शहरी में ज्यादा सक्रिय हो रहे थे। कोरोना काल में भी उनका समाज सेवा से जुड़ा अभियान जुब्बल कोटखाई की जगह शिमला शहर में ज्यादा फ़ोकस रहा था। इस कारण मंत्री सुरेश भारद्वाज और बरागटा परिवार के बीच कड़वाहट भी देखी गई थी।

सुरेश भारद्वाज ने भी जुब्बल कोटखाई में इसी कारण अपना हस्तक्षेप बढ़ा दिया था और बरागटा विरोधी नेत्री नीलम सरैक जो पार्टी में हाशिये पर थी उन्हें दोबारा पार्टी की मुख्यधारा में लाया था।

पूर्व मूख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन से खाली हुई अर्की सीट अभी चर्चा से बाहर है। दोनों पार्टियों की ओर से अभी इस सीट पर कोई दावेदारी आगे पेश नहीं की गई है।

चूंकि मंडी लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव है इसलिए बीच बीच में यह कयास निकलकर आ रहे हैं कि वीरभद्र परिवार से कोई चुनाव लड़ने के लिए आगे आता है तो उनके पास अर्की से विधानसभा या मंडी से लोकसभा दोनों ऑप्शन रहेंगी।

जाहिर सी बात है कि वीरभद्र सिंह परिवार की बात हो रही है तो पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के ऊपर ही कयास लगाए जा रहे है। हालांकि वीरभद्र की पुत्रबहु और विधायक विक्रमादित्य सिंह की धर्मपत्नी बेशक राजस्थान से है, पर अर्की से उनका ननिहाल का नाता है।

भाजपा यहाँ से रत्न पाल सिंह को आगे लाती है जो पिछला चुनाव हार चुके है या दो बार के विजेता रहे गोविंद राम को फिर मौका देती है यह भविष्य के गर्भ में है। कांग्रेस से संजय अवस्थी भी अपने टिकट की राह अर्की से लंबे अरसे से देख रहे है। यह संभव हो पाता है तो कम से कम यह सीट परिवारवाद से दूर रहेगी।

मंडी सीट पर अभी दोनों तरफ से सन्नाटा है। भाजपा में जहां कुछ नाम ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर, अजय जम्वाल, बिहारी लाल शर्मा आदि के रूप में सामने आते रहते है। वहीं कांग्रेस से कोई खास खबर निकलकर नहीं आती है। ऐसा लगता हैं कांग्रेस इस सीट को अपने लिए बहुत टफ मानकर चली हैं। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता कौल सिंह आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस सीट से लोकसभा लड़ने को लेकर सहज नहीं है।

फिर भी कांग्रेस के बीच का ही एक धड़ा कौल सिंह को इस सीट से सबसे सशक्त बताकर चुनाव लड़वाना चाहता है।
इससे इतर वीरभद्र परिवार की लोकसभा हेतु पारंपरिक सीट रही मंडी पर लोगों का यह भी मानना है कि अगर प्रतिभा सिंह इस सीट से लड़ती है तो भाजपा को यह बहुत बड़ी चुनौती होगी।

उपरोक्त नामों के अलावा भाजपा में यह भी चर्चा निकलकर आई है कि जे पी नडडा के हिमाचल दौरे में उन्होंने स्पष्ट किया है कि मंडी सीट से उम्मीदवार को लेकर जब भी पैनल बने चर्चा हो तो उसमें महिला का नाम भी रखा जाए।

गौरतलब है कि मोदीरीत भाजपा पार्टी में महिलाओं को  आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर चुकी है। इस आधार पर भाजपा नेत्री पायल वैद्य और रिवालसर से जिला पार्षद जीतकर आई प्रियन्ता शर्मा पर भाजपा संगठन विचार कर सकता है।

परिवारवाद की बात की जाए तो मंडी सीट से दिवगंत सांसद के बेटे शांति स्वरूप ने भी अपनी दावेदारी ठोकी है। मंडी अर्की को फिलहाल छोड़ दिया जाए तो फतेहपुर और जुब्बल कोटखाई सीट से दोनों पार्टियां अपने कैडर पर नहीं बल्कि सहानुभूति की लहर पर जीत की आस लेकर चली हैं।

अंदरखाते इस कारण उनके अपने ही कैडर में यह चर्चा भी छिड़ी है कि परिवार में ही विरासतें आगे सौंपी जाती रही तो आम कार्यकर्ता का नम्बर कब आएगा जो विधानसभा जाने की चाहत के साथ इस पेशे में जुड़े हैं।

हलांकि यह कोई नई परिपाटी नहीं है, इतिहास में भी यही होता रहा है। उपचुनावों में अक्सर आम कार्यकर्ता को नजरअंदाज करके परिवार में ही विरासतें सौंपने का दांव खेला जाता रहा है। ऐसा नहीं है की सहानुभूति की लहर की आस में खेला गया यह दांव हमेशा सटीक बैठा हो। असफलता के भी उदाहरण है।

बीते दशकों की बात की जाए तो 1993 में स्वर्गीय जगदेव ठाकुर के निधन के बाद उनके बेटे नरेंद्र ठाकुर को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था। 1998 में पंडित संत राम के निधन के बाद सुधीर शर्मा को कांग्रेस ने, 2006 में हरिनारायण सैनी के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी, 2011 में रेणुका सीट से विनय शर्मा पिता के निधन के बाद चुनाव हार गए थे।

आगामी उपचुनावों में यही देखना है कि कौन सा दल सहानुभूति से उपजे परिवारवाद को कितना भुना पाता है।
हालांकि यह सवाल तो बना रहेगा कि बृहद कैडर का दम भरने वाले दोनों दल, आम कार्यकर्ता को नजरअंदाज कर क्यों परिवारवाद में ही जीत की राह तलाशते हैं ?

(नोट: यह लेखक के निज़ी विचार है)

सत्त्व फाउंडेशन सुझाएगा खड्डों-नालों के करीब की बस्तियों को बाढ़ से बचाने के उपाय

मंडी।। सामाजिक संस्था सत्त्व फाउंडेशन ने खड्डों-नालों के करीब की बस्तियों को भूस्खलन और जल भराव से बचाने के तरीके सुझाने की पहल की है। इसके तहत जल धाराओं के पास की आबादी का इंजीनियरों की टीम मुआयना करेगी और कमजोर बिंदुओं की पहचान करेगी।

उसके बाद घरों को शिफ्ट करने, पानी की चैनलाइजेशन और तटबंध बनाने का सुझाव करने वाली रिपोर्ट भी बनाई जाएगी जो जरूरी कदम उठाने की अपील के साथ स्थानीय प्रशासन को सौंपी जाएगी।

इस बारे जानकारी देते हुए संस्था के सचिव प्रणव घाबरू ने बताया कि शाहपुर की बोह वैली बेहद खूबसूरत है। लेकिन अफसोस की बात है यहां बारिश ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली। उन्होंने कहा कि इस पर किसी का वश नहीं है कि कहां कितनी बारिश होगी। लेकिन जहां आप रहते हैं, वहां भारी बारिश होने की स्थिति में जल भराव या भूस्खलन का कितना खतरा है, इसका पता लगाया जा सकता है। साथ ही अनहोनी हो टालने के उपाय भी किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सत्त्व फाउंडेशन ने अनुभवी इंजीनियरों के साथ मिलकर एक टीम तैयार की है जो ऐसे ही रिस्क का आकलन कर निदान के उपाय करेगी। इस काम में मौके के सर्वेक्षण के साथ उपग्रह की तसवीरों का भी विश्लेषण किगा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के किसी मशवरे के लिए संस्था से 8219201185 पर व्हाट्सऐप के माध्यम से सम्पर्क किया जा सकता है।